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06 जुलाई 2020

चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य में 200 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी पर फैसला जल्द संभव

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार मिलों को राहत देने के लिए चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य में 200 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी पर जल्द फैसला ले सकती है। सूत्रों के अनुसार पिछले हफ्ते शुक्रवार को हुई बैठक में सचिवों के समूह ने इसमें 200 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी थी। माना जा रहा है कि जल्द ही इसकी अधिसूचना जारी की जायेगी।
इस समय चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 3,100 रुपये प्र​ति क्विंटल है, तथा किसानों के बढ़ते बकाया में कमी लाने के लिए सरकार जल्द ही इसे बढ़ाकर 3,300 रुपये प्रति क्विंटल करेगी। जानकारों के अनुसार चीनी मिलों पर किसानों का बकाया बढ़कर 20,000 करोड़ रुपये के करीब है, इसमें सबसे ज्यादा बकाया उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों पर 17,000 करोड़ रुपये मय ब्याज है। इसीलिए सरकार चीनी के न्यूनतम बिक्री भाव को बढ़ाना चाहती है, ताकि किसानों के बकाया भुगतान में तेजी लाई जा सके।
उद्योग के अनुसार सरकार के इस फैसल से चीनी मिलों को राहत मिल मिलेगी। चीनी के भाव दिल्ली में इस समय 3,600 रुपये प्रति क्विंटल है, जब​कि उत्तर प्रदेश में एक्स फैक्ट्री भाव 3,325 से 3,375 रुपये और महाराष्ट्र में 3,250 से 3,300 रुपये प्रति क्विंटल है। जानकारों के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा न्यूनतम बिक्री मूल्य में बढ़ोतरी से चीनी की कीमतों में 100 से 150 रुपये प्रति क्विंटल की और तेजी आने का अनुमान है।  ....  आर एस राणा

04 जुलाई 2020

मसूर को छोड़ अन्य दालें समर्थन मूल्य से नीचे, तेजी की संभावना नहीं

आर एस राणा
नई दिल्ली। उत्पादक मंडियों में मसूर को छोड़ अन्य दालों के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे बने हुए हैं जबकि दालों में मांग सामान्य से 25 से 30 फीसदी कम है। नेफेड समर्थन मूल्य पर 20.79 लाख चना और 5.50 लाख अरहर की खरीद कर चुकी है इसलिए दालों की कीमतों में तेजी की संभावना नहीं है।
चना की कीमतों में सुधार आया था, लेकिन उंचे भाव में स्टॉकिस्टों की मुनाफावसूली से तेजी टिक नहीं पाई। जानकारों के अनुसार उत्पादक मंडियों में चना का बकाया स्टॉक ज्यादा है, जबकि दालों में मांग सामान्य की तुलना में कम है इसलिए चना में व्यापार छोटे टारगेट बनाकर ही करना चाहिए, बड़ी तेजी मानकर व्यापार नहीं करना चाहिए। उत्पादक मंडियों में चना के भाव 3,900 से 4,200 रुपये और दिल्ली में इसके भाव 4,200 रुपये प्रति क्विंटल रहे। आयातित चना के भाव 5,800 रुपये प्रति क्विंटल है, इसलिए आयात पड़ते नहीं लगेंगे। नेफेड चालू रबी में 20.79 लाख टन चना की खरीद कर चुकी है तथा खरीद का लक्ष्य 22.50 लाख टन का है।
समर मूंग की आवक बढ़ी, खरीफ में बुआई ज्यादा
समर मूंग की आवक उत्पादक मंडियों में चल रही है, जबकि सितंबर में खरीफ की नई फसल की आवक बनेगी। इसलिए मूंग की कीमतों में भी तेजी की संभावना नहीं है। मूंग की बुआई चालू खरीफ में 9.10 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 3.11 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। उत्पादक मंडियों में मूंग के भाव 6,200 से 6,600 रुपये प्रति क्विंटल है जबकि आयातित मूंग के भाव 7,100 रुपये प्रति क्विंटल है इसलिए मूंग के आयात सौदे भी नहीं हो रहे हैं।
अरहर की कीमतों में हल्का सुधार संभव, बड़ी तेजी नहीं
अरहर के भाव दिल्ली में 5,450 से 5,550 रुपये प्रति क्विंटल और उत्पादक मंडियों में 5,000 से 5,800 रुपये प्रति क्विंटल है। आयातित अरहर के भाव मुंबई में 5,500 से 5,600 रुपये प्रति क्विंटल हैं। चालू वित्त वर्ष में करीब 2.75 लाख टन अरहर का आयात हो चुका है तथा आयातित अरहर सस्ती है इसलिए घरेलू बाजार में अरहर के भाव में हल्का सुधार तो बन सकता है लेकिन बड़ी तेजी मानकर व्यापार नहीं करना चाहिए। अरहर की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 16.56 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल के 2.79 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।
आयाति​त उड़द सस्ती, सितंबर में आयेगी नई फसल
उड़द के भाव उत्पादक मंडियों में 5,800 से 5,900 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं, जबकि आयातित उड़द एफएक्यू के भाव 5,500 से 5,550 रुपये प्रति क्विंटल हैं। उड़द का आयात 4 लाख टन का अगस्त 2020 तक करना है जिसमें से करीब 3.50 लाख टन का आयात हो चुका है, आयातित उड़द सस्ती है जबकि सितंबर में नई फसल आ जायेगी, इसलिए उड़द की कीमतों में भी तेजी की संभावना नहीं है। चालू खरीफ में उड़द की बुआई बढ़कर 8.77 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई केवल 1.87 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई थी।
मसूर का आयात 8 से 9 लाख टन होने का अनुमान
मसूर के भाव कानपुर मंडी में 5,800 रुपये प्रति क्विंटल है जबकि आयातित मसूर के भाव 5,625 रुपये प्रति क्विंटल है। जानकारों के अनुसार चालू वित्त वर्ष में अभी तक करीब पांच लाख टन मसूर का आयात हो चुका है तथा माना जा रहा है कि चालू सीजन में कुल आयात 8 से 9 लाख टन का हो जायेगा। अगस्त तक मसूर के आयात पर 10 फीसदी आयात शुल्क है, अत: अगर सरकार ने उसके बाद बाद आयात शुल्क बढ़ा दिया तो फिर मसूर की कीमतों में मंदे की उम्मीद नहीं है। हालांकि आयाति​त मसूर सस्ती है तथा अगले दस-बारह दिनों में करीब 90 हजार आयातित मसूर आने का अनुमान है इसलिए इसके भाव में भी सीमित तेजी-मंदी ही बनी रहने का अनुमान है।
दालों का करीब 34.50 लाख टन का स्टॉक
केंद्रीय पूल में दालों का करीब 34.50 लाख टन का बकाया स्टॉक है, तथा कई राज्यों में अभी सरकारी खरीद चल रही है। हालांकि मसूर और मूंग और उड़द की खरीद सीमित में ही हुई है तथा इनका बकाया स्टॉक भी कम है लेकिन इसके बावजूद भी दालों की कीमतों में ज्यादा तेजी की संभावना नहीं है।............  आर एस राणा

एग्री कमोडिटी में हाजिर एवं वायदा में तेजी मंदी की दैनिक आधार पर खबरों के लिए

एग्री कमोडिटी में हाजिर एवं वायदा में तेजी मंदी की दैनिक आधार पर खबरों के लिए।

दैनिक आधार पर दलहन, तिलहन, खाद्य तेल, गेहूं, मक्का, जौ, कपास, ग्वार सीड एवं ग्वार गम के अलावा केस्टर सीड, चीनी, गुड़ तथा मसालों हल्दी, जीरा, धनिया और लालमिर्च के साथ इलायची के निर्यात के साथ ही घरेलू बाजार में तेजी-मंदी आदि की खबरें ई-मेल के माध्यम या फिर वाट्सएप पर मिलेंगी।

केंद्र सरकार की नीति जैसे की आयात, निर्यात पर फैसला या फिर घरेलू बाजार में कोई पहले जिसका, जिसका असर एग्री कमोडिटी पर पड़ता हो।

अधिक जानकारी के लिए फोन नं. 7678684719 या फिर 9811470207 पर

आर एस राणा
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7678684719, 9811470207

बासमती चावल का निर्यात बढ़ा, अच्छी मांग से कीमतों में और आयेगा सुधार

आर एस राणा
नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2019-20 में देश से बासमती चावल का निर्यात बढ़ा है, जबकि कोरोना वायरस जैसी महामारी के कारण जहां अन्य एग्री जिंसों की निर्यात मांग पर असर पड़ा है, वहीं बासमती चावल में निर्यात मांग अच्छी बनी हुई है, जिससे घरेलू बाजार में चावल और धान की कीमतों में और भी सुधार आने का अनुमान है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार वित्त वर्ष 2019-20 में देश से बासमती चावल का निर्यात बढ़कर 44.54 लाख टन का हुआ है जोकि पिछले वित्त वर्ष 2018-19 के 44.14 लाख टन से ज्यादा है। हालांकि गैर-बासमती चावल के निर्यात में इस दौरान कमी आई है। वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान गैर-बासमती चावल का निर्यात 50.36 लाख टन का ही हुआ है, जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 76.47 लाख टन का हुआ था।
मंत्रालय के अनुसार मूल्य के हिसाब से वित्त वर्ष 2019-20 में बासमती चावल का निर्यात 31,026 करोड़ रुपये और गैर-बासमती चावल का निर्यात 14,353 करोड़ रुपये का हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष के दौरान इनका निर्यात मूल्य के हिसाब से क्रमश: 32,804 करोड़ और 21,171 करोड़ रुपये का हुआ था।
हरियाणा की कैथल मंडी के एक बासमती चावल के निर्यातक के अनुसार इस समय सऊदी अरब, इराक एवं कुवैत के साथ ही यूरोपीय देशों की आयात मांग अच्छी है। हालांकि ईरान को सीधे निर्यात सौदे कम हो रहे हैं, लेकिन वायदा दुबई निर्यात हो रहा है। घरेलू बाजार में बासमती चावल और धान का बकाया स्टॉक कम है जबकि नई फसल की आवक अक्टूबर अंत या फिर नवंबर में बनेगी, इसलिए घरेलू बाजार में बासमती चावल के साथ ही धान की कीमतों में और भी सुधार आने का अनुमान है। शनिवार को मंडियों में बासमती चावल पूसा 1,121 सेला का भाव 5,500 रुपये और धान का भाव 3,500 रुपये प्रति क्विंटल रहा। डूप्लीकेट बासमती धान का भाव मंडी में 3,200 से 3,300 रुपये प्रति क्विंटल बोला गया। .................  आर एस राणा

खरीफ फसलों की बुआई 88 फीसदी बढ़ी, मानसून की चाल पहले की तुलना में पड़ी धीमी

आर एस राणा
नई दिल्ली। मध्य जून तक मानसून की प्रगति काफी अच्छी थी, जिस कारण खरीफ फसलों की बुआई में में अभी तक भारी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन पिछले दस-बारह दिनों से मानसून की चाल धीमी पड़ गई है, तथा उत्तर भारत के कई राज्यों में बारिश नहीं हो रही है जिसका असर फसलों पर पड़ने की आशंका है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू सीजन में खरीफ फसलों की बुआई 88.22 फीसदी बढ़कर 432.97 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 230.03 लाख हेक्टेयर में फसलों की बुआई हो पाई थी। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार पहली जून से 3 जुलाई के दौरान देश भर में सामान्य से 11 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है। इस दौरान पूरे देश में औसतन 191.6 मिलीमीटर बारिश होती है जबकि चालू सीजन में 213.1 मिलीमीटर बारिश हुई है। इस दौरान मध्य भारत में सामान्य से 20 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है लेकिन उत्तर भारत के राज्यों में सामान्य से 7 फीसदी कम बारिश हुई है। पंजाब में इस दौरान सामान्य से 18 फीसदी, हरियाणाा और दिल्ली एनसीआर में 16 फीसदी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 37 फीसदी कम बारिश हुई है। राजस्थान में भी इस दौरान सामान्य से 10 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई।
धान की रोपाई ज्यादा, दलहन की बुआई आगे
खरीफ की प्रमुख फसल धान की रोपाई 68.08 लाख हेक्टेयर में हुई है जोकि पिछले साल की समान अवधि की 49.23 लाख हेक्टेयर से थोड़ी कम है। दालों की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 36.82 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 9.46 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर की बुआई 16.56 लाख हेक्टेयर में, उड़द की 8.77 लाख हेक्टेयर में और मूंग की बुआई 9.10 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 2.79 लाख हेक्टेयर, 1.87 लाख और 3.14 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। अन्य दालों की बुआई भी 2.07 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 1.66 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।
मक्का, बाजरा के साथ ज्वार की बुआई बढ़ी
मोटे अनाजों की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 70.69 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई केवल 35.20 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई थी। मक्का की बुआई बढ़कर चालू सीजन में 45.28 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 23.27 लाख हेक्टेयर में ही मक्का की बुआई हो पाई थी। बाजरा की बुआई बढ़कर 17.90 लाख हेक्टेयर में, ज्वार की 4.55 लाख हेक्टेयर में और रागी की 1.35 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 7.85 लाख हेक्टेयर, 1.70 लाख हेक्टेयर और 1.25 लाख हेक्टेयर में हुई थी।
सोयाबीन, मूंगफली और कपास की बुआई ज्यादा
खरीफ तिलहन की बुआई चालू सीजन में बढ़कर 109.20 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 33.63 लाख हेक्टेयर में ही इनकी बुआई हो पाई थी। खरीफ तिलहन की प्रमुख फसल सोयाबीन की बुआई बढ़कर 81.81 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई केवल 16.43 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान में अनुकूल मौसम से इसकी बुआई में बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह से मूंगफली की बुआई बढ़कर 25.05 लाख हेक्टेयर में हुई है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 15.58 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। कपास की बुआई चालू खरीफ सीजन में बढ़कर 91.67 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई केवल 45.85 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। गन्ने की बुआई चालू खरीफ सीजन में बढ़कर 50.62 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल की इसी अवधि के 49.86 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।.................  आर एस राणा

03 जुलाई 2020

दालों को पीडीएस में शामिल करने की जरूरत: नाफेड

आर एस राणा
नई दिल्ली। पिछले तीन महीने के दौरान प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के सफल क्रियान्वयन और अब अगले पांच महीने के लिए इसके विस्तार के एलान के बाद अब दाल को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में शामिल कर लेना चाहिए। ये सुझाव है नाफेड के अधिकारी एस के सिंह का है जोकि जेएलवी एग्रो की ओर से आयोजित एक वेबनार में बोल रहे थे।
एस के सिंह के मुताबिक साल 2015 से देश को मिली सबक के बाद सरकार की कोशिशों और नीतियों की बदौलत अब दलहन की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। एक ओर जहां उत्पादन में भारी बढ़त हो रही है, वहीं दूसरी ओर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर दलहन खरीद से बाजार को स्थिर करने में भी मदद मिली है। ऐसे में किसानों को अच्छा दाम मिलने से लाभ हुआ। वहीं दूसरी ओर ग्राहकों को वाजिब दाम पर दाल भी मिल रही है।
हालांकि साथ में उन्होने ये भी कहा कि भारत में दाल प्रोटीन का सबसे बड़ा स्रोत है। लेकिन मौजूदा भाव पर भी देश का एक बड़ा तबका इसे खरीदकर नहीं खा सकता है। ऐसे में दाल को भी पीडीएस में शामिल कर लेना चाहिए, ताकि तय मात्रा में समाज के कम आय वर्ग के लोगों को भी पौष्टिक आहार मिल सके। उनका मानना है कि देश में दाल का बाजार पूरी तरह से नियंत्रण में है। उत्पादन से लेकर इसकी खरीद और रखरखाव की भी व्यवस्था बेहतर हुई है। ऐसे में इसे गेहूं और चावल की तरह सार्वजनिक वितरण प्रणाली में शामिल किया जा सकता है।
उन्होने कहा कि इस साल कोरोना काल में नैफेड ने किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर करीब 30 लाख टन दाल और सरसों की खरीद की है, साथ ही किसानों को उनके खाते में सीधा भुगतान भी सुनिश्चित किया है। इस काम के लिए देश भर में करीब 4,000 खरीद केंद्र खोले गए हैं। ऐसा पहली बार हुआ है कि नैफेड ने कई किसानों के दरवाजे पर जाकर भी खरीद को अंजाम दिया है।
केंद्र सरकार प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत देश के 80 करोड़ गरीबों को प्रति महीने 5 किलो अनाज और हर महीने प्रति परिवार को एक किलो चना मुफ्त में दे रही है। लॉकडाउन के दौरान अप्रैल से शुरू हुई इस योजना को केंद्र सरकार ने नवंबर तक के लिए बढ़ा दिया है।............ आर एस राणा

केंद्र सरकार ने राज्य से खाने के खुले तेल की बिक्री पर रोक लगाने के लिए लिखा पत्र

आर एस राणा
नई दिल्ली। खाने के तेलों में हो रही मिलावट की शिकायत पर केंद्र सरकार ने राज्यों को खुले में तेल बिक्री पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री रामविलास पासवान ने इसके बारे में जानकारी दी है।
केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्रालय में अपर सचिव निधि खरे ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को लिखे पत्र में कहा है कि, "पैकेज्ड कमोडिटीज के मामले में निर्धारित मात्रा के पैकेट में ही तेल बेचने की इजाजत है। राज्य इस कानून को सख्ती से पालन कराएं"।
वहीं नागरिक आपूर्ति मंत्री रामविलास पासवान ने इस पत्र को ट्वीट करके कहा है कि इस बात की लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि बाजार में नियमों के विरुद्ध खुले खाद्य तेल की बिक्री हो रही है। जिसमें मिलावट का खतरा है। लिहाजा राज्य सरकारों को निर्देश दिया गया है कि इस पर सख्त कदम उठाएं और निर्धारित पैकिंग के बिना हो रहे दुषित खुले तेल की बिक्री पर तत्काल रोक लगाएं।
इस बारे में उद्योग लगातार सरकार से मांग करता रहा है, तथा सरकार की ओर से इस तरह की कोशिश पहले भी की जा चुकी है लेकिन राज्यों ने केंद्र के प्रस्ताव पर आपत्ति जता दी थी। दरअसल छोटे कस्बों और गांवों में गरीब तबके के लोग रोज की जरूरत के लिहाज से लूज में तेल खरीदते हैं जो पैकेज्ड के मुकाबले काफी सस्ता भी होता है। देश में खाने के तेल के बाजार में ऐसे ग्राहकों की हिस्सेदारी करीब 40 फीसदी है।..........  आर एस राणा