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25 अप्रैल 2026

गल्फ में अनिश्चितता के माहौल का घरेलू खाद्य तेल उद्योग पर असर, कमजोर मानसून की आशंका

नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के आसपास हाल के घटनाक्रमों से गल्फ क्षेत्र में अस्थिरता और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है, जिसका असर घरेलू खाद्य तेल उद्योग पर पड़ रहा है। उधर भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी ने चालू सीजन में मानसून नॉर्मल से कमजोर होने की आशंका जताई है।


सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एसईए के अनुसार अमेरिका और ईरान के आसपास हाल के घटनाक्रमों ने गल्फ क्षेत्र में एक अस्थिर और अनिश्चितता का माहौल बना दिया है। हालांकि कुछ समय के लिए सीजफायर और होर्मुज स्ट्रेट के फिर से खुलने से शुरू में कुछ राहत मिली थी, लेकिन अब स्थिति साफ नहीं है, क्योंकि बीच-बीच में रुकावट आ रही है जोकि घरेलू तेल तिलहन उद्वयोग के लिए मुश्किलें बढ़ रही है। इससे शिपमेंट में कमी आई है साथ ही माल ढुलाई की लागत बढ़ गई है। अत: खाने के तेल और ऑयल मील के ट्रेड पर अनिश्चितता का माहौल है।

लड़ाई शुरू होने के बाद से, पॉलीइथाइलीन और पॉलीप्रोपाइलीन जैसे क्रूड से जुड़े उत्पादों की कीमतें जो कि प्लास्टिक पैकेजिंग के मुख्य इनपुट हैं की कीमत 50 से 60 फीसदी तक बढ़ गई हैं। इससे बोतलें और प्लास्टिक रैपर एफएमसीजी की कीमत बढ़ गई है। पैकेजिंग में आमतौर पर उत्पाद की लागत का 15 से 25 फीसदी हिस्सा होता है, जिसका मतलब है कि थोड़ी, बहुत बढ़ोतरी भी खाने के तेलों की कीमतों पर काफी असर डाल सकती है। इस संदर्भ में, लगातार बढ़ते तनाव का इस सेक्टर पर लंबे समय तक असर पड़ सकता है, हालांकि हमें उम्मीद है कि लगातार कोशिशों से आने वाले महीनों में इसका टिकाऊ समाधान होगा, और ग्लोबल ट्रेड की स्थिति आसान हो जायेगी।

मानसूनी 2026 का आउटलुक – अनिश्चितता और उभरते जोखिमों का मौसम

भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी ने शुरुआती अनुमान में 2026 का साउथ वेस्ट मॉनसून, का लॉन्ग पीरियड एवरेज (एलपीए) 92 फीसदी का अनुमान जारी किया है, जो कि नॉर्मल से नीचे की कैटेगरी में रहने की संभावना है। यह एलपीए 96 फीसदी और 104 फीसदी के बीच नॉर्मल मानसून से अलग होगा। सीजनल पैटर्न में समय और जगह के हिसाब से इसमें बदलाव हो सकते हैं, और मानसून के दूसरे आधे हिस्से में बारिश सामान्य की तुलना में कम होने की संभावना है। सेंट्रल और नॉर्थ-वेस्ट इंडिया के इलाकों में नॉर्मल से कम बारिश की संभावना ज्यादा हो सकती है, जबकि पूर्वी और नॉर्थ-ईस्ट इलाकों के कुछ हिस्सों तुलनात्मक रूप से बेहतर बारिश हो सकती है।

एल नीनो भी एक बड़ी चिंता बनी हुई है, क्योंकि यह आमतौर पर मानसून की तेजी को कम कर देता है। हालांकि इंडियन ओशन डाइपोल से न्यूट्रल से लेकर थोड़े पॉजिटिव सिग्नल कुछ सपोर्ट दे सकते हैं, लेकिन ओवरऑल आउटलुक कमजोर मानसून और बढ़ते जोखिम का संकेत देता है। साउथ वेस्ट मॉनसून इंडिया की इकोनॉमिक ग्रोथ के लिए जरूरी है, क्योंकि खरीफ फसलों के उत्पादन में बढ़ोतरी एक मजबूत रूरल इकोनॉमी को सपोर्ट करती है। अगर खरीफ सीजन में बारिश कम होती है, जिसका असर उत्पादन में कमी पर पड़ता है तो खाने की चीजों की महंगाई बढ़ सकती है। यह स्थिर यूएस एवं ईरान के बीच चल रहे तनाव की वजह से बढ़ती लागत और फ्यूल की बढ़ती कीमतों के बीच हो रहा है, जिससे कृषि उद्योग पर और दबाव बढ़ रहा है और यह सभी के लिए चिंता का विषय बन गया है।

सरसों का उत्पादन अनुमान

एसईए ने 30 मार्च 2026 को जयपुर में एक कॉन्फ्रेंस की थी, जिसमें रबी 2024–25 के सरसों के उत्पादन अनुमान पेश किए गए। इस दौरान 92.15 लाख हेक्टेयर में 115.2 लाख टन सरसों के उत्पादन का अनुमान लगाया गया। एक खास बात मस्टर्ड मॉडल फार्म (एमएमएफ) प्रोजेक्ट था, जिसे एडब्ल्यूएल और सॉलिडेरिडाड के साथ लागू किया गया था। फसल सीजन 2025–26 में इसे राजस्थान, हरियाणा और मध्य प्रदेश में लगभग 3000 एकड़ के रीजेनरेटिव एग्रीकल्चर प्रोग्राम में बदल दिया गया, जिससे मिट्टी की सेहत और किसानों की इनकम में सुधार के साथ-साथ 28 फीसदी तक की पैदावार में बढ़ोतरी हुई।

ऑयल मील का निर्यात – ग्लोबल दिक्कतों के बीच मार्केट में डायवर्सिटी लाने की जरूरत

वर्ष 2024-25 के दौरान, देश से लगभग 4.5 मिलियन टन ऑयल मील का निर्यात किया था, जिसकी कीमत 12,000 करोड़ रुपये लगभग (यूएसडी 1.35 बिलियन) से ज्यादा थी, जिसमें से  मिडिल ईस्ट और यूरोप को क्रमश: 20 फीसदी और 15 फीसदी का निर्यात हुआ था।। खाड़ी क्षेत्र में हाल ही बढ़े बनाव से परिवहन लागत एवं शिपिंग चुनौतियों के कारण मिडिल ईस्ट और यूरोप को निर्यात प्रभावित किया है। इसे कम करने के लिए, मौजूदा और दूसरे मार्केट में कोशिशों को मजबूत करने की जरूरत है। इस बारे में, एसईए जुलाई 2026 के दौरान अन्य मुख्य मार्केट में 10-12 बड़े निर्यातकों का एक ट्रेड डेलिगेशन भेजने की योजना बना रहा है ताकि इस कमी को पूरा किया जा सके।

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