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18 अप्रैल 2026

सीसीआई ने कॉटन के बिक्री दाम बढ़ाए, गुजरात के साथ ही उत्तर भारत में इसके भाव तेज

नई दिल्ली। कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई ने बुधवार को कॉटन की बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी की जिससे स्पिनिंग मिलों की खरीद बढ़ने से शाम के सत्र में गुजरात के साथ ही उत्तर भारत के राज्यों में कॉटन की कीमतों में तेजी दर्ज की गई।


सीसीआई ने बुधवार को कॉटन की बिक्री कीमतों में 900 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी 356 किलो की बढ़ोतरी की। इस दौरान निगम ने फसल सीजन 2025-26 की कुल 60,100 गांठ कॉटन की बिक्री की, जिसमें से स्पिनिंग मिलों ने 23,000 गांठ एवं व्यापारियों ने 37,100 गांठ कॉटन की खरीद की।

गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव बुधवार को 300 रुपये तेज होकर 59,600 से 60,000 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए।

पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव तेज होकर 5,930 से 6,130 रुपये प्रति मन बोले गए।हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव बढ़कर 5,780 से 5,930 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम तेज होकर 5,800 से 6,130 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 56,300 से 57,300 रुपये कैंडी बोले गए। देशभर की मंडियों में कपास की आवक 47,500 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई।

घरेलू वायदा कारोबार में कॉटन की कीमतों में तेजी का रुख रहा। एनसीडीईएक्स पर अप्रैल 26 महीने के वायदा अनुबंध में कपास के दाम 22 रुपये तेज होकर 1,662 रुपये प्रति 20 किलो हो गए। इस दौरान आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतों में तेजी का रुख रहा।

प्रमुख उत्पादक राज्यों में कपास की कीमत स्थिर हो गई। जानकारों के अनुसार चालू सीजन में मार्च अंत तक उत्पादक मंडियों में 292.74 लाख गांठ से ज्यादा कॉटन की आवक हो चुकी है।

सीसीआई द्वारा बिक्री कीमत तेज करने से स्पिनिंग मिलों की मांग बढ़ गई, जिससे गुजरात के साथ ही उत्तर भारत के राज्यों में कॉटन की कीमतों में तेजी आई। व्यापारियों के अनुसार घरेलू बाजार में अधिकांश स्पिनिंग मिलों के पास कॉटन का बकाया स्टॉक कम है, जबकि यार्न में निर्यात मांग अच्छी बनी हुई है, इसलिए मिलों को कॉटन की ज्यादा खरीद सीसीआई से करनी पड़ रही है। सीसीआई घरेलू बाजार में लगातार कॉटन बेच रही है तथा निगम के पास कॉटन का बंपर स्टॉक है। अत: घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतों में तेजी, मंदी काफी हद तक सीसीआई के बिक्री दाम पर निर्भर करेगी।

हाल ही में उद्योग ने इसके उत्पादन अनुमान में बढ़ोतरी की है जबकि चालू सीजन में कॉटन का आयात भी बढ़ेगा, हालांकि प्राइवेट जिनर्स के पास अच्छी क्वालिटी की कॉटन का बकाया स्टॉक कम है, जिस कारण उनकी बिकवाली भी कमजोर बनी हुई है।

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