नई दिल्ली। कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई द्वारा कॉटन की बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी से गुरुवार को शाम के सत्र में गुजरात के साथ ही उत्तर भारत के राज्यों में कॉटन की कीमतों में तेजी आई।
सीसीआई ने गुरुवार को लगातार तीसरे कार्यदिवस में कॉटन की बिक्री कीमतों में 500 रुपये प्रति कैंडी की बढ़ोतरी की जबकि चालू सप्ताह में सीसीआई कॉटन की बिक्री कीमतों में 2,300 रुपये प्रति कैंडी तक की बढ़ोतरी कर चुकी है।
निगम ने गुरुवार को 1,43,800 गांठ, एक गांठ 170 किलो कॉटन की बिक्री की। इस दौरान स्पिनिंग मिलों ने 75,000 गांठ एवं व्यापारियों ने 68,800 गांठ कॉटन की खरीद की।
गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव गुरुवार को 500 रुपये तेज होकर 59,000 से 59,500 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए।
पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव तेज होकर 5,800 से 6,000 रुपये प्रति मन बोले गए।
हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव बढ़कर 5,650 से 5,800 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम तेज होकर 5,700 से 6,000 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम बढ़कर 55,000 से 56,000 रुपये कैंडी बोले गए।
घरेलू वायदा कारोबार में कॉटन की कीमतों में तेजी का रुख रहा। एनसीडीईएक्स पर अप्रैल 26 महीने के वायदा अनुबंध में कपास के दाम 23 रुपये तेज होकर 1,620 रुपये प्रति 20 किलो हो गए। एमसीएक्स पर अप्रैल 26 के वायदा अनुबंध में कॉटन के भाव 170 रुपये तेज होकर 27,200 रुपये प्रति कैंडी हो गए। हालांकि इस दौरान आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतों में गिरावट का रुख रहा।
सीसीआई लगातार कॉटन की बिक्री कीमत बढ़ा रही है साथ ही हाल ही में कॉटन की कीमतें दुनिया भर में मजबूत हुई हैं।
प्रमुख उत्पादक राज्यों में कपास की कीमतों में भी लगातार तेजी बनी हुई है। जानकारों के अनुसार चालू सीजन में अभी तक उत्पादक मंडियों में 280 लाख गांठ से ज्यादा कॉटन की आवक हो चुकी है तथा अब केवल 38 से 40 लाख गांठ ही बनी हुई है। कई राज्यों में कपास की कीमत न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी 8,110 प्रति क्विंटल के ऊपर पहुंच चुकी हैं।
स्पिनिंग मिलों की मांग बढ़ने से गुजरात के साथ ही उत्तर भारत में कॉटन के दाम तेज हुए। व्यापारियों के अनुसार घरेलू बाजार में अधिकांश स्पिनिंग मिलों के पास कॉटन का बकाया स्टॉक कम है, जबकि डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने से यार्न में निर्यात मांग पहले की तुलना में बढ़ी है। हालांकि सीसीआई घरेलू बाजार में लगातार कॉटन बेच रही है तथा निगम के पास कॉटन का भारी, भरकम स्टॉक है, लेकिन निगम लगातार कॉटन की बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी कर रही है। अत: घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतों में तेजी, मंदी काफी हद तक सीसीआई के बिक्री दाम पर निर्भर करेगी।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें