नई दिल्ली। दाल मिलों की मांग कमजोर बनी रहने से घरेलू बाजार में शुक्रवार को अरहर एवं उड़द के साथ ही चना की कीमतों में मंदा आया, जबकि इस दौरान मसूर एवं के भाव लगभग स्थिर बने रहे।
उत्पादक मंडियों में अरहर, चना, मसूर एवं उड़द के साथ ही मूंग के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी से नीचे बने हुए हैं।
बर्मा से आयातित उड़द एफएक्यू एवं एसक्यू की कीमत चेन्नई में स्थिर हो गई। उड़द एफएक्यू के भाव अप्रैल एवं मई शिपमेंट के 835 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ पर स्थिर हो गए, जबकि इस दौरान एसक्यू उड़द के भाव अप्रैल एवं मई शिपमेंट के 930 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ बोले गए। लेमन अरहर फसल सीजन 2026 के भाव चेन्नई में अप्रैल एवं मई शिपमेंट के भाव 845 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ पर स्थिर हो गए। लेमन अरहर फसल सीजन 2025 के भाव चेन्नई में अप्रैल एवं मई शिपमेंट के भाव 825 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ बोले गए।
केंद्रीय पूल में दलहन का 22 लाख टन का स्टॉक हैं, जबकि केंद्र सरकार को 35 लाख टन बफर स्टॉक की जरूरत है। केंद्रीय पूल में दलहन के कुल स्टॉक में, मूंग 780,000 टन है, इसके बाद अरहर का स्टॉक 550,000 टन, मसूर का 400,000 टन और चना का लगभग 300,000 टन है। पिछले सीजन में कमजोर खरीद के कारण सरकार के पास उड़द का स्टॉक बहुत कम है।
चेन्नई में उड़द की कीमत स्थिर हो गई, साथ ही इस दौरान बर्मा में इनकी कीमत स्थिर बनी रही। घरेलू बाजार में दाल मिलों की मांग कमजोर बनी रहने लगातार तीसरे दिन उड़द की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। जानकारों के अनुसार अप्रैल मध्य के बाद और मई के मध्य तक म्यांमार से उड़द के कई शिपमेंट आने की उम्मीद है, इसलिए कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। उधर खपत का सीजन होने के बावजूद भी उड़द दाल मांग कमजोर है, जिससे स्टॉकिस्टों में घबराहट पूर्ण बिकवाली बनी हुई है। आगामी दिनों में इसकी कीमतों में तेजी, मंदी गर्मियों की फसल की आवक के साथ ही इसके आयात पड़ते के आधार पर बनेगी। आंध्र प्रदेश में रबी उड़द की लगातार आवक और म्यांमार से आयात की उपलब्धता भी कीमतों पर दबाव डाल रही है। हालांकि उड़द मोगर एवं गोटा में मांग पहले की तुलना में बढ़ी है। केंद्रीय पूल में उड़द का स्टॉक केवल 80,000 टन का ही है। मंडियों में उड़द की कीमत 7,800 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी की तुलना में डेढ़ से दो फीसदी नीचे हैं।
चेन्नई में लेमन अरहर की कीमत स्थिर हो गई, साथ ही इस दौरान बर्मा में इसके दाम लगातार तीसरे दिन भी स्थिर बने रहे। हालांकि घरेलू बाजार में दाल मिलों की मांग कमजोर होने से अरहर की कीमतों में गिरावट जारी रही। व्यापारियों के अनुसार चालू सप्ताह के आरंभ में बर्मा के साथ ही अफ्रीकी देशों से आयातित अरहर के दाम कमजोर हुए थे, जिससे घरेलू बाजार में इसकी कीमतों पर दबाव है। भाव में चल रही गिरावट को देखते हुए दाल मिलें केवल जरुरत के हिसाब से खरीद कर रही हैं। अरहर की समर्थन मूल्य पर कई राज्यों में खरीद हो रही है लेकिन खरीद भी सीमित मात्रा में ही हो रही है। केंद्र सरकार ने अरहर का समर्थन मूल्य 8,000 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है लेकिन उत्पादक मंडियों में देसी अरहर के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य के मुकाबले सात से आठ फीसदी नीचे आ गए हैं। चालू सीजन में अरहर की समर्थन मूल्य पर खरीद दो लाख टन की हुई है।
अफ्रीकी देशों से आयातित सफेद अरहर के दाम नवा सेवा बंदरगाह पर 685 से 690 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ पर स्थिर हो गए। गजरी के दाम 680 से 685 डॉलर प्रति टन पर स्थिर हो गए। इस दौरान अरुषा अरहर के भाव 730 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ पर स्थिर हो गए।
दाल मिलों की मांग कमजोर होने से दिल्ली में चना की कीमत 25 रुपये नरम हुई। व्यापारियों के अनुसार चना में बढ़ी हुई कीमतों में मिलों की खरीद का समर्थन नहीं मिल पा रहा। इसलिए दाम कमजोर हुए हैं। हालांकि मध्य प्रदेश और राजस्थान की उत्पादक मंडियों में चना की दैनिक आवक बराबर बनी हुई है, लेकिन कुल आवक की तुलना में खरीद नहीं बढ़ पा रही। इसलिए चना की कीमतों में अभी बड़ी तेजी के आसार नहीं है। हालांकि चालू सीजन में पीली मटर का कुल आयात पिछले साल की तुलना में कम हुआ है, जिससे चना की मांग में बढ़ोतरी का अनुमान है। बंदरगाह पर आयातित का स्टॉक ज्यादा है लेकिन गुजरात एवं कर्नाटक तथा महाराष्ट्र की मंडियों में चना की आवक पहले की तुलना में कम हुई है। उत्पादक मंडियों में देसी चना के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी 5,875 रुपये प्रति क्विंटल से 10 फीसदी से ज्यादा नीचे बने हुए हैं।
ऑस्ट्रेलिया से आयातित चना के भाव केंटनर में अप्रैल एवं मई डिलीवरी के 580 डॉलर तथा वैसल में इसके दाम 540 डॉलर प्रति, टन सीएडंएफ पर स्थिर हो गए। तंजानिया के चना के भाव अप्रैल एवं मई शिपमेंट के नवा सेवा बंदरगाह पर 565 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ पर स्थिर हो गए।
चने की समर्थन मूल्य पर खरीद एक लाख टन की हुई है। मध्य प्रदेश और राजस्थान से खरीद बढ़ने की उम्मीद है।
देसी मसूर के दाम दिल्ली में स्थिर हो गए, साथ ही इस दौरान बंदरगाह पर आयातित की कीमत स्थिर बनी रही। व्यापारियों के अनुसार मसूर के भाव में यहां से बड़ी गिरावट के आसार नहीं है, क्योंकि उत्पादक मंडियों में इसके भाव समर्थन मूल्य से काफी नीचे बने हुए हैं। उत्पादक राज्यों मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की मंडियों में नई फसल की आवक अपेक्षा अनुरूप बढ़ नहीं पा रही है, क्योंकि जानकार उत्पादन कम मान रहे हैं। इस दाल मिलें जरुरत के हिसाब से खरीद ही कर रही है, हालांकि खपत का सीजन होने के कारण मसूर दाल में बिहार एवं बंगाल तथा असम की मांग बनी रहेगी। केंद्रीय पूल में चार लाख टन मसूर का स्टॉक है। मसूर के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी 7,000 रुपये प्रति क्विंटल से 3.5 से 4 फीसदी नीचे आ गए हैं।
कनाडा से एक जहाज जिसमें कुल 43,278.110 टन दलहन हैं, (11,000 टन मसूर और 32,278.110 टन पीली मटर) इसके 19 अप्रैल, 2026 को मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंचने की उम्मीद है।
मसूर की समर्थन मूल्य पर खरीद सीमित मात्रा में ही हो रही है। केंद्रीय पूल में मसूर का स्टॉक 400,000 टन का है।
मूंग के दाम अधिकांश उत्पादक मंडियों में स्थिर बने रहे। व्यापारियों के अनुसार मूंग की कीमतों में अभी बड़ी तेजी के आसार नहीं है क्योंकि दाल मिलें जरूरत के हिसाब से ही खरीद कर रही है तथा कई राज्यों में मूंग की समर्थन मूल्य पर खरीद तो हो रही है, लेकिन कुल आवक की तुलना में खरीद सीमित मात्रा में ही हो रही है। मौसम अनुकूल रहा मूंग की आवक उत्पादक मंडियों में अभी बनी रहने की उम्मीद है। चालू समर सीजन में भी मूंग की बुआई बढ़ी है। उधर केंद्रीय पूल मूंग का स्टॉक सबसे ज्यादा है। अत: अभी इसके भाव में बड़ी तेजी मानकर व्यापार नहीं करना चाहिए। मूंग की कीमत उत्पादक मंडियों में एमएसपी 8,768 प्रति क्विंटल की तुलना में 18 से 20 फीसदी नीचे है।
चेन्नई में उड़द एफएक्यू के दाम 50 रुपये कमजोर होकर 7,800 से 7,825 रुपये प्रति क्विंटल रह गए, जबकि एसक्यू के भाव 50 रुपये घटकर 8,400 से 8,425 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।
दिल्ली में उड़द एफएक्यू के दाम 75 रुपये घटकर 8,200 से 8,225 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए, जबकि एसक्यू के भाव 8,825 से 8,850 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।
मुंबई में उड़द एफएक्यू के दाम 75 रुपये कमजोर होकर 7,900 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।
कोलकाता में उड़द एफएक्यू के दाम 25 रुपये कमजोर होकर 8,100 से 8,125 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।
गुंटूर में उड़द पॉलिश के दाम 50 रुपये घटकर 7,850 से 7,900 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। विजयवाड़ा में उड़द पॉलिश के भाव 7,950 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।
चेन्नई में लेमन अरहर भाव शाम के सत्र में 25 रुपये कमजोर होकर 7,500 से 7,525 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।
दिल्ली में लेमन अरहर के भाव शाम के सत्र में 7,725 से 7,750 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।
मुंबई में लेमन अरहर के भाव शाम के सत्र में 25 रुपये कमजोर होकर 7,500 से 7,525 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।
देसी अरहर के दाम कानपुर, सोलापुर, जलगांव और नागपुर में कमजोर हुए, जबकि अन्य अधिकांश उत्पादक मंडियों में स्थिर बने रहे।
मुंबई में अफ्रीकी देशों से आयातित अरहर के भाव स्थिर हो गए। सूडान से आयातित अरहर के भाव 6,750 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। इस दौरान गजरी अरहर के भाव 6,250 से 6,300 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। मतवारा की अरहर का स्टॉक नहीं है। सफेद अरहर के दाम 6,300 से 6,350 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।
दिल्ली में देसी मसूर के दाम 6,600 से 6,625 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।
कनाडा की मसूर के दाम कंटेनर में 6,125 से 6,150 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। जबकि ऑस्ट्रेलिया की मसूर के भाव कंटेनर में 6,075 से 6,125 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। कनाडा की मसूर के दाम मुद्रा बंदरगाह पर 5,925 से 5,950 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। हजिरा बंदरगाह पर इसके दाम 6,000 से 6,025 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। बरेली में देसी मसूर के भाव 6,550 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।
दिल्ली में राजस्थान के नए चना के दाम 25 रुपये नरम होकर 5,475 से 5,500 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इस दौरान मध्य प्रदेश के नए चना का व्यापार 25 रुपये घटकर 5,425 से 5,450 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ। जयपुर लाइन के चना के भाव 25 रुपये कमजोर होकर 5,450 से 5,475 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।
इंदौर में बोल्ड किस्म के मूंग के दाम 8,200 से 8,400 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। इस दौरान जयपुर में चमकी मूंग के भाव 7,450 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। राजस्थान लाइन की मूंग के दाम दिल्ली में 7,000 से 7,900 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। अकोला में चमकी मूंग के दाम 8,300 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।

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