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14 अप्रैल 2026

चालू तेल वर्ष के पहले चार महीनों में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 8 फीसदी बढ़ा - एसईए

नई दिल्ली। चालू तेल वर्ष 2025-26 के पहले पांच महीनों नवंबर-25 एवं मार्च-26 के दौरान देश में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 8 फीसदी बढ़कर 6,572,131 टन का हुआ है, जबकि पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में इनका आयात 6,096,923 टन का हुआ था। मार्च 2026 में खाद्य तेलों का आयात पिछले महीने (फरवरी, 2026) के 12.92 लाख टन की तुलना में 10 फीसदी होकर 11.93 लाख टन का रह गया।


सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार मार्च 2026 में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 11 फीसदी बढ़कर 1,186,569 टन का हुआ है, जबकि पिछले साल मार्च में इनका आयात 1,073,023 टन का हुआ था। इस दौरान खाद्य तेलों का आयात 1,173,168 टन का एवं अखाद्य तेलों का आयात 13,401 टन का हुआ है।

एसईए के अनुसार नवंबर’25 से मार्च’26 के आयात डेटा से पता चलता है कि भारत के खाद्य तेलों के आयात में पिछले साल समान अवधि के मुकाबले 8 फीसदी की मामूली बढ़ोतरी हुई है, जो विश्व सप्लाई पर लगातार इंडिपेंडेंस दिखाता है। हालांकि, मार्च में फरवरी की तुलना में गिरावट से पता चलता है कि विश्व बाजार में दाम तेज होना तथा रुपये में गिरावट और घरेलू उपलब्धता, खासकर सरसों की फसल आने की वजह से मांग प्रभावित हुई है।

दिसंबर और फरवरी के बीच आयात में तेज बढ़ोतरी विश्व बाजार में सप्लाई में रुकावट की चिंताओं की ओर इशारा करती है, खासकर सूरजमुखी के तेल पर असर डालने वाले चल रहे रूस-यूक्रेन संघर्ष, पाम तेल के लिए दक्षिण-पूर्व एशिया में सप्लाई-साइड की अनिश्चितताओं और मिडिल ईस्ट तनाव के कारण बढ़ी हुई माल ढुलाई लागत है। इसके अलावा, बड़े उत्पादक देशों में बायोफ्यूल की ओर झुकाव सहित मजबूत विश्व की मांग ने कीमतों को स्थिर रखा है, जिससे भारतीय रिफाइनर सावधानी से इंतजार करों एवं देखो की नीति अपना रहे हैं।

जानकारों के अनुसार आगे चलकर, जब तक विश्व बाजार में कीमत नरम नही होती या करेंसी की हालत बेहतर नहीं होती, तब तक शॉर्ट टर्म में आयात कम रहने की संभावना है, जबकि लॉन्ग टर्म में, देश जियोपॉलिटिकल रिस्क को कम करने के लिए घरेलू तिलहन उत्पादन में बढ़ोतरी पर फोकस करने के साथ ही आयात को बैलेंस करना जारी रख सकता है।

नवंबर’25 से मार्च’26 के दौरान नेपाल ने लगभग 162,000 टन रिफाइंड तेल निर्यात किया है, जिसमें 142,133 टन रिफाइंड सोया तेल, 12,123 टन रिफाइंड सूरजमुखी तेल और 6,793 टन आरबीडी पामोलिन शामिल है। फरवरी 2026 में, नेपाल ने लगभग 55,000 टन रिफाइंड तेल निर्यात किया, जिसमें मुख्य रूप से रिफाइंड सोया तेल और थोड़ी मात्रा में सूरजमुखी तेल के अलावा आरबीडी पामोलिन शामिल थे।

एसईए के अनुसार नवंबर 25 से मार्च 26 के दौरान 952,170 टन के मुकाबले केवल 192,486 टन रिफाइंड पाम तेल का आयात हुआ और नवंबर 24 से मार्च 25 के दौरान 4,978,288 टन के मुकाबले 6,260,337 टन क्रूड तेल का आयात हुआ। रिफाइंड तेल का रेश्यो तेजी से घटकर 16 फीसदी से 3 फीसदी ही रह गया, जबकि क्रूड पाम तेल के आयात में बढ़ोतरी की वजह से क्रूड तेल का रेश्यो एक साल पहले के 84 फीसदी से बढ़कर 97 फीसदी हो गया।

नवंबर’25 से मार्च’26 के आयात डेटा से पता चलता है कि देश इंडोनेशिया और मलेशिया से क्रूड पाम तेल के आयात पर सबसे ज्यादा निर्भर है। दोनों मिलकर 2.8 मिलियन टन से ज्यादा का योगदान देते हैं, जिससे भारत की खाने के तेल की मुख्य जरूरतों के लिए दक्षिण-पूर्व एशिया पर निर्भरता ज्यादा है। साथ ही अर्जेंटीना और ब्राजील सोया तेल के आयात के लिए रीढ़ बने हुए हैं, जबकि रूस और यूक्रेन, ब्लैक सी क्षेत्र में चल रहे जियोपॉलिटिकल तनाव के बावजूद, सूरजमुखी तेल के जरूरी सप्लायर बने हुए हैं।

इंडोनेशिया द्वारा भविष्य में निर्यात पर रोक, बायोडीजल की शर्तें, या रूस-यूक्रेन संघर्ष में बढ़ोतरी जैसी कोई भी रुकावट सीधे देश में खाद्य तेलों की उपलब्धता और कीमतों पर असर डाल सकती है। रिफाइंड तेलों के लिए नेपाल का आयात के रूप में उभरना, भारत को घरेलू रिफाइनिंग क्षमता को कम करके और रेवेन्यू लीकेज की वजह से नुकसान पहुंचा रहा है।

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