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14 अप्रैल 2026

खेती की नई तकनीक एवं प्रशिक्षण और बाजार का पूरा समाधान एक ही जगह - शिवराज सिंह

रायसेन/नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के रायसेन के दशहरा मैदान में 11 से 13 अप्रैल 2026 तक आयोजित होने वाला राष्ट्रीय स्तर का उन्नत कृषि महोत्सव–प्रदर्शनी एवं प्रशिक्षण देश के किसानों को “प्रयोगशाला से खेत तक” और “बीज से बाजार तक” की पूरी यात्रा एक ही मैदान पर दिखाते हुए विकास की राह पर लेकर जाएगा।


यह सिर्फ मेला नहीं, बल्कि तीन दिनों का ऐसा कृषि महाकुंभ है जो किसानों की तकदीर बदलने का सबसे बड़ा मौका है। इसके उद्घाटन सत्र में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह किसानों का उत्साह बढ़ाएं, साथ ही मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। 13 अप्रैल को समापन सत्र में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की उपस्थिति में क्षेत्र के लिए समग्र कृषि रोडमैप जारी किया जाएगा।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस आयोजन के संबंध में क्षेत्र के प्रबुद्धजनों, प्रगतिशील किसानों और पदाधिकारियों तथा सभी जनप्रतिनिधियों की बैठक लेकर विस्तृत चर्चा की और कहा कि मध्य प्रदेश के रायसेन में 11 से 13 अप्रैल तक होने वाला राष्ट्रीय स्तर का उन्नत कृषि महोत्सव खेती‑किसानी का असली गेम चेंजर साबित होगा। दशहरा मैदान, रायसेन में लगने वाले इस विशाल राष्ट्रीय कृषि मेले में नई खेती तकनीकों, उन्नत बीज, ड्रोन व आधुनिक मशीनों, सूक्ष्म सिंचाई, पशुपालन–मत्स्यपालन, प्रसंस्करण, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) और ग्रामीण आजीविका के सैकड़ों स्टॉल लगेंगे, जहाँ किसान देखेंगे भी, सीखेंगे भी और तुरंत लाभ लेने के तरीके भी समझेंगे।

उन्होंने बताया कि समापन सत्र में रायसेन, विदिशा, सीहोर और आसपास के समान एग्रो‑क्लाइमेटिक कृषि‑जलवायु क्षेत्र के लिए विशेष कृषि रोडमैप प्रस्तुत किया जाएगा, जिसमें उत्पादन बढ़ाने से लेकर बाजार तक पहुंच मजबूत करने की स्पष्ट दिशा दी जाएगी और जिसका विमोचन नितिन गडकरी की गरिमामय उपस्थिति में होगा।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि लगभग तीन सौ स्टॉलों वाली यह बहु‑क्षेत्रीय प्रदर्शनी खेती के हर चरण– इनपुट से लेकर प्रसंस्करण और विपणन तक के समाधान एक ही जगह उपलब्ध कराएगी। इसमें कृषि, बागवानी, सूक्ष्म सिंचाई, कृषि मशीनरी व टेक्नोलॉजी, उर्वरक, कीटनाशक, बीज कंपनियां, डिजिटल कृषि, फसल बीमा, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), स्टेट एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (एसएयू), कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), पशुपालन, मत्स्य, ग्रामीण विकास, खाद्य प्रसंस्करण, माइक्रो–स्मॉल एंड मीडियम इंटरप्राइजेज (एमएसएमई), भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नेफेड), एफपीओ और स्टार्टअप्स की सक्रिय भागीदारी रहेगी। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए विषयवार सेमिनार–प्रशिक्षण सत्र, लाइव डेमो, नुक्कड़ नाटक, सांस्कृतिक कार्यक्रम और अलग‑अलग राज्यों से आए प्रगतिशील किसानों के अनुभव साझा करने के विशेष कार्यक्रम भी आयोजित होंगे, जिससे “खेती का गेम चेंजर– राष्ट्रीय कृषि मेला, रायसेन” का संदेश सिर्फ पोस्टर तक सीमित न रहकर जमीन पर दिखे।

शिवराज सिंह ने बताया कि मेले में अलग‑अलग हॉल में तीनों दिन लगातार सेमिनार और प्रशिक्षण सत्र होंगे, जिनमें फसल कटाई के बाद प्रबंधन, दलहन–तिलहन उत्पादकता वृद्धि, मृदा स्वास्थ्य, प्राकृतिक खेती, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, कीट प्रबंधन, बीज प्रणाली, फसल बीमा, एआई आधारित डिजिटल कृषि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हाइड्रोपोनिक्स (जल‑आधारित खेती), प्रिसिजन फार्मिंग (सटीक खेती) और वर्टिकल फार्मिंग (ऊर्ध्वाधर खेती) जैसे विषय शामिल हैं। फील्ड में लाइव डेमो के जरिए ड्रिप और स्प्रिंकलर सूक्ष्म सिंचाई, फर्टिगेशन (उर्वरक मिश्रित सिंचाई), न्यूट्री‑केयर से संतुलित पोषण, ऑटोमेशन‑आधारित स्मार्ट फार्मिंग, टिश्यू कल्चर पौध, ड्रोन से छिड़काव, रीपर–बाइंडर, हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, बेलर, रोटावेटर जैसी आधुनिक मशीनें किसानों को चलाकर दिखाई जाएँगी और उन्हें हाथों‑हाथ प्रशिक्षण दिया जाएगा।

आईसीएआर द्वारा मृदा परीक्षण की मोबाइल मिनी‑लैब, समेकित कृषि प्रणाली व प्राकृतिक खेती के लाइव मॉडल, डेयरी, बकरी पालन, कुक्कुट व मत्स्य पालन की यूनिट, मोबाइल वेटरनरी यूनिट, बीज मिनिकिट वितरण, बीमा कंपनियों द्वारा मौके पर फसल बीमा और किसान शिकायत व परामर्श के लिए हेल्पडेस्क की विशेष व्यवस्था रहेगी, जिससे “बीज से बाजार तक, प्रयोगशाला से खेत तक” की पूरी कड़ी एक ही परिसर में दिखाई देगी।

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