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06 जून 2020

बागवानी फसलों का उत्पादन 3.13 फीसदी बढ़ने का अनुमान, सब्जियों के साथ फलों की पैदावार ज्यादा

आर एस राणा
नई दिल्ली। कोरोना वायरस महामारी के कारण हुए लॉकडाउन के दौरान किसानों को भले ही टमाटर के साथ प्याज का उचित दाम नहीं मिल पा रहा, इसके बावजूद भी देश में बागवानी फसलों की बुवाई और उत्पादन में बढ़ोतरी हो रही है। दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2019-20 में बागवानी फसलों का उत्पादन 3.13 फीसदी बढ़कर 32.04 करोड़ टन होने का अनुमान है जोकि खाद्यान्न उत्पादन अनुमान से भी ज्यादा है।
कृषि मंत्रालय के दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2019-20 में बागवानी फसलों की बुवाई 2.56 करोड़ हेक्टेयर में हुई है जोकि पिछले साल 2018-19 के 2.54 करोड़ हेक्टेयर से ज्यादा है। अत: बुवाई में हुई बढ़ोतरी से बागवानी फसलों का उत्पादन भी बढ़कर 32.04 करोड़ टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल 31.07 करोड़ टन का ही उत्पादन हुआ था। बागवानी फसलों में सब्जियों के साथ ही फलों का उत्पादन चालू सीजन में ज्यादा होने का अनुमान है।
प्याज का उत्पादन अनुमान ज्यादा, आलू का कम
मंत्रालय के अनुसार प्याज का उत्पादन चालू फसल सीजन 2019-20 में 17 फीसदी बढ़कर 267.4 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसका उत्पादन 228.2 लाख टन का हुआ था। हालाकि इस दौरान आलू के उत्पादन में कमी आने का अनुमान है। आलू का उत्पादन चालू फसल सीजन में घटकर 513 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल देश में 519.47 लाख टन आलू का उत्पादन हुआ था। आलू की बुआई में तो बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसल को नुकसान हुआ था।
टमाटर का उत्पादन 8.2 फीसदी ज्यादा
मंत्रालय के दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार टमाटर का उत्पादन 8.2 फीसदी बढ़कर 205.7 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल देश में 190.1 लाख टन टमाटर का ही उत्पादन हुआ था। मंत्रालय के अनुसार फसल सीजन 2019-20 के दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार फलों का उत्पादन बढ़कर 990.7 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल 979.7 लाख टन का ही उत्पादन हुआ था। दिल्ली की आजादपुर फल एवं सब्जी मंडी में दो जून को प्याज का भाव 2.50 से 9 रुपये प्रति किलो तथा टमाटर का भाव 1.25 से 4.75 रुपये प्रति किलो रहा। आलू का भाव मंडी में 6 से 22 रुपये प्रति किलो रहा।............... आर एस राणा

मई अंत तक चीनी उत्पादन में आई 18 फीसदी की गिरावट, 270 लाख टन का अनुमान

आर एस राणा
नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2019 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन 2019-20 के पहले आठ महीने, 31 मई 2020 तक चीनी के उत्पादन में 18.11 फीसदी की कमी आई है। इस दौरान कुल 268.21 लाख टन का ही उत्पादन हुआ है जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में 327.53 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका था। चालू पेराई सीजन के अंत तक कुल 270 लाख टन चीनी के उत्पादन का अनुमान है।
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के अनुसार चालू पेराई सीजन में 18 चीनी मिलों में पेराई अभी चल रही है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 10 मिलों में ही पेराई चल रही थी। इस्मा ने गन्ना पेराई सीजन के आरंभ में 265 लाख टन चीनी के उत्पादन का अनुमान लगाया था, लेकिन उत्तर प्रदेश में लॉकडाउन के कारण गुड़ और खांडसारी यूनिट के जल्दी बंद होने से चीनी मिलों को गन्ना ज्यादा मिला, जिस कारण चीनी के उत्पादन अनुमान में बढ़ोतरी हुई। चालू पेराई सीजन के अंत तक चीनी का उत्पादन 270 लाख टन होने का अनुमान है जोकि पिछले साल की तुलना में करीब 60 लाख टन कम रहेगा।
उत्तर प्रदेश में चीनी का उत्पादन ज्यादा, महाराष्ट्र में कम
इस्मा के अनुसार उत्तर प्रदेश में चालू पेराई सीजन में मई के अंत तक चीनी का उत्पादन बढ़कर 125.46 लाख टन का हो चुका है जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में राज्य में केवल 117.81 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था। अत: उत्तर प्रदेश में चीनी के उत्पादन में अभी तक पिछले साल की तुलना में 7.65 लाख टन की बढ़ोतरी हो चुकी है। राज्य की 119 चीनी मिलों में से 105 में पेराई बंद हो चुकी है तथा इस समय 14 मिलें में ही पेराई चल रही है। महाराष्ट्र में चालू पेराई सीजन में अभी तक केवल 60.98 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ है जोकि पिछले पेराई सीजन की तुलना में 46.2 कम है। पिछले पेराई सीजन में इस समय तक 107.20 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका था। बाढ़ और सूखे से महाराष्ट्र में गन्ने की फसल को भारी नुकसान हुआ था।
कर्नाटक और तमिलनाडु में भी घटा चीनी का उत्पादन
कर्नाटक में चालू पेराई सीजन में 31 मई तक चीनी का उत्पादन घटकर 33.82 लाख टन का ही हुआ है जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में राज्य में 43.25 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका था। कर्नाटक में मिलों में पेराई 30 अप्रैल 2020 को बंद हो गई थी, लेकिन इस समय कुछ मिलों में पेराई का स्पेशल सीजन चल रहा है। तमिलनाडु में चीनी का उत्पादन चालू पेराई सीजन में 5.78 लाख टन का ही हुआ है जोकि पिछले साल के 7.22 लाख टन से कम है।
अन्य राज्यों में चीनी का उत्पादन 32.75 लाख टन
अन्य राज्यों में गुजरात, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, बिहार, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा तथा राजस्थान को मिलाकर 31 मई तक 42.17 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। उत्तर भारत की चीनी मिलें मई में आवंटित किए गए कोटे की चीनी की बिक्री कर चुकी है लेकिन पश्चिम और दक्षिण भारत की मिलें लॉकडाउन के कारण सीमित मात्रा में ही कोटे की चीनी बेच पाई है, इसलिए केंद्र सरकार ने मई के कोटे की चीनी की बिक्री जून में करने की अनुमति दे दी है। उद्योग के अनुसार लॉकडाउन खुल गया है, जिससे मिठाई की दूकान, होटल आदि खुले गए हैं, जिससे चालू महीने में चीनी की मांग में बढ़ोतरी होने का अनुमान है। पेराई सीजन के अंत में चीनी का बकाया स्टॉक 115 लाख टन बचने का अनुमान है जबकि आरंभ में 95 से 100 टन बकाया बचने की उम्मीद थी।............ आर एस राणा

मानसून ने दी केरल में दस्तक, इस साल 102 फीसदी सामान्य बारिश का अनुमान - मौसम विभाग

आर एस राणा
नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम मानसून के केरल में दस्तक देने के साथ ही चार महीने चलने वाला बारिश का मौसम शुरू हो गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून ने केरल में दस्तक दे दी है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के उप-महानिदेशक आनंद कुमार शर्मा के अनुसार मानसून का आगमन आज केरल में हो गया है तथा आईएमडी ने पहले ही एक जून को मानसून केरल पहुंचने का पूर्वानुमान जारी कर दिया था।
मौसम विभाग के अनुसार इस साल सामान्य बारिश होगी। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम राजीवन ने बताया कि अच्छे मानसून के लिए परिस्थितियां अनुकूल हो रही हैं। इसलिए जून से सितंबर तक होने वाली बारिश 102 फीसदी तक होगी। नॉर्थ ईस्ट इंडिया में काफी समय से बारिश थोड़ी कम हो रही है, इस साल भी मात्र 96 फीसदी बारिश होने का अनुमान है। इस साल 102 फीसदी सामान्य बारिश का अनुमान है, इसमें चार फीसदी कमी, या ज्यादा हो सकती है। क्षेत्रवार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश उत्तर पश्चिम भारत में दीर्घावधि औसत के 107 फीसदी, मध्य भारत में 103 फीसदी, दक्षिणी प्रायद्वीप में 102 फीसदी तथा पूर्वोत्तर भारत में 96 फीसदी बारिश होने की संभावना है। इसमें आठ फीसदी कम या ज्यादा हो सकती है।
पहले आईएमडी ने 5 जून को मानसून आने की भविष्यवाणी की थी, लेकिन बाद में इसमें बदलाव कर दिया
इस सप्ताह की शुरुआत में मौसम विभाग ने कहा था कि मानसून पहली जून को केरल में पहुंच जायेगा, जबकि इससे पहले आईएमडी ने 5 जून को मानसून आने की भविष्यवाणी की थी, लेकिन बाद में इसमें बदलाव कर दिया। वर्ष 2019 में, दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 8 जून को केरल में दस्तक दी थी। मौसम विभाग ने कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून आज, 1 जून 2020 को केरल पहुंच गया है। अरब सागर के ऊपर चक्रवात के बनने से केरल में मानसून की शुरुआत के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव माधवन राजीवन ने 15 अप्रैल को अपने पूर्वानुमान में कहा था कि इस वर्ष मानसून की बारिश सामान्य रूप से लंबी अवधि के औसत से 100 फीसदी सामान्य होने की संभावना है। इसमें 5 फीसदी कम या फिर ज्यादा हो सकता है।
बादल और तेज हवाओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही है जोकि मानसून के अनुकूल है
मौसम विभाग के अनुसार केरल में कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा हुई है तथा बादल और तेज हवाओं में भी लगातार वृद्धि हुई है जोकि मानसून के अनुकूल है। राज्य के मौसम विभाग ने भारी वर्षा की चेतावनी जारी की है। इसमें कहा गया है कि तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, एर्नाकुलम, त्रिशूर, कोझीकोड, मलप्पुरम, कासरगोड और कन्नूर में बारिश के साथ-साथ 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की संभावना है। देश में जून से सितंबर तक मानसून के मौसम में 75 फीसदी वर्षा होती है।
25-30 जून के बीच राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब को कवर करते हुए 5 जुलाई तक पूरे में पहुंचेगा
समूचे देश के लिए वर्ष 2020 के दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून – सितम्बर) की वर्षा सामान्य (दीर्घावधि औसत के 96 से 104 फीसदी) होने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार पहली जून को मौसम केरल, लक्षदीप और अंडमान पहुंच गया है जबकि एक से पांच जून तक तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश में पहुंचेगा। 5 जून से 10 जून के बीच मानसून मध्य महाराष्ट्र, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल पहुंच जायेगा तथा 10 से 15 जून तक पूरे महाराष्ट्र के साथ ही ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के निचले इलाकों तथा झारखंड, आधे बिहार को कवर करेगा। इसके बाद 15 से 20 जून तक गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पूर्वी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड तक पहुंच जायेगा जबकि 20 से 25 जून तक पूरे गुजरात के साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, जम्मू एंड कश्मीर में मानसून का आगमन होगा। 25 से 30 जून के बीच राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब को कवर करते हुए 30 जून से 5 जुलाई तक पूरे देश में पहुंच जायेगा।
खेती किसानी के लिए मानसून काफी अहम
जून से सितंबर तक चलने वाले इस दक्षिण-पश्चिम मानसून पर खरीफ की फसलों के उत्पादन की स्थिति काफी हद तक निर्भर करती है, इसलिए खेती किसानी के लिए मानसून काफी अहम है। प्री मानसून की बारिश से कई राज्यों में खरीफ फसलों की बुआई आरंभ हो गई है, लेकिन मानसूनी बारिश शुरू होने के बाद ही खरीफ फसलों धान, ज्वार, बाजरा, सोयाबीन, मूंगफली आदि की बुआई में तेजी आने का अनुमान है। मौसम का पूर्वानुमान लगाने वाली निजी एजेंसी स्काईमेट ने 30 मई को मानसून आने की घोषणा की थी लेकिन आईएमडी ने इससे इनकार करते हुए कहा था कि इस तरह की घोषणा के लिए अभी स्थितियां बनी नहीं हैं..........  आर एस राणा

केंद्र सरकार ने धान के समर्थन मूल्य में मात्र 2.9 फीसदी की बढ़ोतरी की, पिछले साल से भी कम

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2020-21 के लिए खरीफ की प्रमुख फसल धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में मात्र 53 रुपये प्रति क्विंटल, यानि 2.9 फीसदी की बढ़ोतरी कर भाव कोमन वेरायटी का 1,868 रुपये और ग्रेड ए वेरायटी का 1,888 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। धान के एमएसपी में बढ़ोतरी पिछले साल की तुलन में कम की गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सोमवार को आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमिटी (सीसीईए) की बैठक में खरीफ फसलों के एमएसपी में 2.1 फीसदी से 12.7 फीसदी की बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया गया। बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) की सिफारिश पर धान की लागत का 50 फीसदी मुनाफा निर्धारित कर इसका एमएसपी तय किया गया है।
पिछले साल धान का समर्थन मूल्य 65 रुपये बढ़ाया था
केंद्र सरकार ने पिछले साल खरीफ सीजन में धान के एमएसपी में 3.7 फीसदी यानि 65 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी कर भाव कोमन वेरायटी का 1,815 रुपये और ग्रेड ए वेरायटी का 1,835 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर के एमएसपी में 200 रुपये यानि 3.7 फीसदी की बढ़ोतरी कर भाव 6,000 रुपये, मूंग के एमएसपी में 146 रुपये, 2.1 फीसदी की बढ़ोतरी कर भाव 7,196 रुपये और उड़द के एमएसपी में 300 रुपये यानि 5.3 फीसदी की बढ़ोतरी कर भाव 6,000 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है।
सोयाबीन और मूंगफली के एमएसपी में क्रमश: 170 और 185 रुपये की बढ़ोतरी
खरीफ तिलहन की प्रमुख फसल सोयाबीन के एमएसपी में 170 रुपये की बढ़ोतरी कर भाव 3,880 रुपये और मूंगफली के एमएसपी में 185 रुपये की बढ़ोतरी कर भाव 5,275 रुपये, सनफ्लॉवर सीड के एमएसपी में 235 रुपये की बढ़ोतरी कर भाव 5,885 रुपये और शीशम सीड के समर्थन मूल्य में 370 रुपये की बढ़ोतरी कर भाव 6,855 रुपये तथा नाइजर सीड के समर्थन मूल्य में सबसे ज्यादा 755 रुपये की बढ़ोतरी कर भाव 6,695 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। तिलहन का उत्पादन खपत से कम होने के कारण हमें हर साल करीब 140 से 150 लाख टन खाद्य तेलों का आयात करना पड़ता है।
बाजरा के समर्थन मूल्य में 150 रुपये और मक्का में 90 रुपये बढ़ाये
मोटे अनाजों में बाजरा के समर्थन मूल्य में 150 रुपये की बढ़ोतरी कर 2,150 रुपये, मक्का के एमएसपी में 90 रुपये की बढ़ोतरी कर भाव 1,850 रुपये और रागी के समर्थन मूल्य में 145 रुपये की बढ़ोतरी कर भाव 3,295 रुपये तथा ज्वार के समर्थन मूल्य में 70 रुपये की बढ़ोतरी कर हाईब्रिड का एमएसपी 2,620 रुपये और मालदंडी ज्वार का 2,640 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। इसके अलावा मीडियम स्टेपल कपास के समर्थन मूल्य में 260 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी कर भाव 5,515 रुपये और लोंग स्टेपल कपास के एमएसपी में 275 रुपये की बढ़ोतरी कर भाव 5,825 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। पिछले साल कपास के समर्थन मूल्य में 105 और 100 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी कर भाव मीडियम स्टेपल का भाव 5,255 रुपये और लोंग स्टेपल का 5,550 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था।..........  आर एस राणा

चना, अरहर और मक्का किसानों को नहीं मिल रहा समर्थन मूल्य, सरकारी खरीद नाममात्र की

आर एस राणा
नई दिल्ली। मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत दलहन और तिलहन की खरीद सीमित मात्रा में होने के कारण किसानों को चना, अरहर, मक्का और सरसों न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से 300 से 1,075 रुपये प्रति क्विंटल तक नीचे भाव पर बेचनी पड़ रही है। केंद्र सरकार पीएसएस के तहत दलहन और तिलहन की खरीद कुल उत्पादन का 25 फीसदी तक करती है। नेफेड अरहर, चना और सरसों की खरीद कर भी रही है, लेकिन कुल उत्पादन के मुकाबले खरीद नाममात्र की ही हो रही है। इस कारण किसानों को मजबूरन अपनी उपज समर्थन मूल्य से नीचे भाव पर बेचनी पड़ी रही है।
नेफेड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पीएसएस के तहत उत्पादक राज्यों की मंडियों से 9.03 लाख टन चना, 5.05 लाख टन अरहर और 6.32 लाख टन सरसों की खरीद हुई है। उन्होंने बताया कि कोरोना वायरस को देखते हुए, रबी फसलों के लिए पीएसएस के तहत दैनिक खरीद की सीमा 25 क्विंटल से बढ़ाकर 40 क्विंटल प्रतिदिन कर दी गई है। चना की खरीद आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश और हरियाणा से की जा रही है जबकि अरहर की खरीद तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, गुजरात और ओडिशा से की गई है। सरसों की खरीद राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात और हरियाणा से की गई है। मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में किसानों से पीएसएस योजना के तहत चना, मसूर और सरसों की खरीद की समय सीमा को 30 मई से बढ़ाकर 10 जून करने का फैसला लिया है।
पीएसएस योजना के तहत तय मात्रा 25 फीसदी के मुकाबले खरीद कम
कृषि मंत्रालय के तीसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार चालू रबी में चना की पैदावार 109 लाख टन होने का अनुमान है जबकि अभी तक खरीद हुई है केवल 9.03 लाख टन की, यानि कुल उत्पादन का केवल 8.29 फीसदी। इसी तरह अरहर के उत्पादन का अनुमान 35.5 लाख टन का है जबकि खरीद हुई है केवल 5.05 लाख टन की जो कुल उत्पादन का केवल 13.47 फीसदी ही है। सरसों की समर्थन मूल्य पर खरीद हुई है 6.32 लाख टन की जबकि उत्पादन अनुमान है 87.03 लाख टन का। कुल उत्पादन की केवल 7.27 फीसदी सरसों की खरीद ही अभी तक हो पाई है। मक्का की समर्थन मूल्य पर खरीद हो नहीं हो रही है जबकि मक्का के उत्पादन का अनुमान चालू रबी सीजन में 88 लाख टन का है।
उत्पादक मंडियों में चना, सरसों, अरहर और मक्का के दाम एमएसपी से नीचे
कर्नाटक की गुलबर्गा मंडी के अरहर कारोबारी चंद्रशेखर एस नादर ने बताया कि मंडी में अरहर का भाव 4,900 से 5,100 रुपये प्रति क्विंटल है जबकि केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2019-20 के लिए अरहर का समर्थन मूल्य 5,800 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है। राजस्थान की कोटा मंडी के दलहन व्यापारी भानू जैन ने बताया मंडी में चना के भाव 3,800 से 4,000 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि केंद्र सरकार ने चना का समर्थन मूल्य 4,875 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है। सरसों के भाव उत्पाद मंडियों में 4,000 से 4,150 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि सरसों का समर्थन मूल्य 4,425 रुपये प्रति क्विंटल है। मक्का का समर्थन मूल्य 1,760 रुपये प्रति क्विंटल है जबकि बिहार की मंडियों में मक्का के भाव 1,100 से 1,200 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं।..... आर एस राणा

चालू पेराई सीजन में गन्ना किसानों का बकाया बढ़कर 17,134 करोड़ रुपये पर पहुंचा - केंद्र सरकार

आर एस राणा
नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2019 से शुरू हुए चालू गन्ना पेराई सीजन 2019-20 (अक्टूबर से सितंबर) में गन्ना किसानों का चीनी मिलों पर बकाया बढ़कर 17,134 करोड़ रुपये पर पहुंच चुका है।
केंद्रीय खाद्य मंत्रालय के अनुसार गन्ना के बकाया की राशि की गणना केंद्र सरकार द्वारा तय किए जाने वाले उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) के आधार पर की जाती है। गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 1966 के तहत, गन्ना खरीदने के 14 दिनों के अंदर चीनी मिलों को किसानों को भुगतान करना होता है, अगर इस अवधि में चीनी मिलें भुगतान नहीं कर पाती है तो उन्हें बकाया पर 15 फीसदी सालाना की दर से ब्याज का भी भुगतान करना होगा।
केंद्रीय खाद्य मंत्रालय के अनुसार चालू पेराई सीजन 2019-20 में 28 मई तक चीनी मिलों ने 64,261 करोड़ रुपये का गन्ना किसानों से खरीदा है जिसमें से भुगतान केवल 47,127 करोड़ रुपये का ही किया है। अत: चीनी मिलों पर किसानों का बकाया 17,134 करोड़ रुपये है। पेराई सीजन 2018—19 की समान अवधि में गन्ने का बकाया 18,140 करोड़ रुपये था।
केंद्र सरकार बकाया भुगतान में तेजी लाने के लिए कई उपाय कर रही है - केंद्रीय खाद्य सचिव
केंद्रीय खाद्य सचिव सुधांशु पांडे ने कहा कि किसानों को गन्ना मूल्य भुगतान सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने कई उपाय किए हैं। उन्होंने बताया कि पेराई सीजन 2017-18 एवं 2019-19 में चीनी का उत्पादन ज्यादा होने के कारण चीनी की कीमतों में आई कमी के कारण गन्ना के बकाया में बढ़ोतरी हुई। उन्होंने बताया कि इथेनॉल उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी के लिए बैंकों ने करीब 18,600 करोड़ रुपये के सॉफ्ट लोन को मंजूरी दी है, जिससे 362 चीनी मिलों को डिस्टलरीज में बदला जा रहा है, जिसके लिए केंद्र सरकार द्वारा लगभग 4,080 करोड़ रुपये का ब्याज वहन किया जा रहा है।
सरकार 40 लाख टन चीनी के बफर स्टॉक के रख-रखाव की लागत कर रही है वहन
उन्होंने बताया कि सरकार 40 लाख टन चीनी के बफर स्टॉक के रख-रखाव के लिए 1,674 करोड़ रुपये की लागत वहन कर रही है। इसके अलावा सरकार 60 लाख टन चीनी के निर्यात पर चीनी मिलों को 10,448 रुपये प्रति टन की दर से सहायता दे रही है, जिस पर लगभग 6,268 करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि चालू पेराई सीजन में निर्यात के लिए तय कोटे 60 लाख टन में से करीब 36 लाख टन चीनी का निर्यात हो चुका है तथा आने वाले महीनों में और 24 लाख टन का निर्यात चीनी मिलें करने की कोशिश कर रही हैं।.... आर एस राणा

प्रवासियों के लिए आवंटित अनाज में राज्यों की दिलचस्पी कम, पीएमजीकेएवाई के तहत 80 फीसदी खाद्यान्न का उठाव

आर एस राणा
नई दिल्ली। कोरोना वायरस के कारण देशभर में चल रहे लॉकडाउन के कारण प्रवासी मजदूरों को भूखे पेट पलायन को मजबूर होना पड़ा। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने प्रवासी मजदूरों को खाना देने के लिए मई-जून के लिए खाद्यान्न का आवंटन तो किया, इसमें इस खाद्यान्न के उठाव में राज्यों की दिलचस्पी कम रही। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के तहत कुल आवंटित अनाज एवं दालों का उठाव राज्य क्रमश: 79.81 और 57.49 फीसदी कर चुके हैं लेकिन प्रवासियों के लिए खाद्यान्न के कुल आवंटन का केवल 25.75 फीसदी अनाज ही राज्यों ने अभी तक उठाया है।
उभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रवासियों मजदूरों के लिए आत्मनिर्भर भारत पैकेज योजना के तहत केंद्र सरकार राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों को मई और जून के लिए आठ लाख टन खाद्यान्न (2.44 लाख टन गेहूं और 5.56 लाख टन चावल) का आवंटन कर चुकी है जिसमें से 27 मई तक राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों ने केवल 2.06 लाख टन खाद्यान्न ही उठाया है। अत: इस योजना के तहत कुल आवंटन का मात्र 25.75 फीसदी अनाज ही राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों ने अभी तक उठाया है। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत, मई-जून के दौरान प्रत्येक प्रवासी मजदूर को प्रति माह पांच किलोग्राम खाद्यान्न मुफ्त में वितरित किया जाना है। इस योजना के तहत केवल तीन राज्यों एवं केंद्र प्रदेशों अंडमान एवं निकोबार, आंध्रप्रदेश एवं लक्षद्वीप ने ही पूरे दो महीनों के लिए आवंटन का उठाव किया है।
राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों ने पीएमजीकेएवाई योजना के तहत 95.80 लाख टन खाद्यान्न उठाया
उन्होंने बताया कि पीएमजीकेएवाई योजना के तहत केंद्र सरकार ने अप्रैल, मई और जून 2020 के लिए राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को 120.04 लाख टन खाद्यान्न (15.65 लाख टन गेहूं और 104.4 लाख टन चावल) का आवंटन किया है। इसमें से 27 मई तक, राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों ने 95.80 लाख टन खाद्यान्न (15.6 लाख टन गेहूं और 83.38 लाख टन चावल) का उठाव किया है। उन्होंने बताया कि पीएमजीकेएवाई योजना के तहत राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश कुल आवंटन का 79.81 फीसदी अनाज उठा चुके है। पीएमजीकेएवाई योजना के तहत अप्रैल, मई और जून की अवधि में प्रति माह, प्रति व्यक्ति 5 किलोग्राम खाद्यान्न मुफ्त में वितरित किया जा रहा है।
राज्यों को 5.88 लाख टन दालों का हो चुका है आवंटन, 3.88 लाख टन उठा चुके हैं राज्य
उन्होनें बताया कि पीएमजीकेएवाई योजना के तहत राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के लगभग 20 करोड़ परिवारों को तीन महीनें तक एक किलो दाल प्रति परिवार, प्रति महीना फ्री में आवंटित की जा रही हैं इसके तहत 24 मई तक केंद्र सरकार 5.88 लाख टन दालों का आवंटन कर चुकी है, तथा 4.44 लाख टन दालें राज्यों को भेजी भी जा चुकी है, जिसमें से राज्य सरकारों ने 3.38 लाख टन का उठाव किया है। पीएमजीएवाई के तहत देश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के लाभार्थी परिवार को हर महीने पांच किलो गेहूं या चावल और प्रत्येक राशन कार्ड पर एक किलो दाल मुफ्त अप्रैल से जून तक देने का प्रावधान किया है
एनजीओ व स्वयंसेवी संस्थाओं को 886 टन गेहूं एवं 7,778 टन चावल का आवंटन किया गया
भारतीय खाद्य निगम के अनुसार राहत केन्द्र एवं लंगर चला रहे एनजीओ व स्वयंसेवी संस्थाओं को लॉकडाउन की अवधि के दौरान अब तक 21 रुपये प्रति किलो की दर से 886 टन गेहूं व 22 रुपये प्रति किलो की दर से 7,778 टन चावल दिया गया है। एफसीआई के अनुसार पश्चिम बंगाल सरकार ने बगैर ई-नीलामी के खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत 11,800 टन चावल देने का अनुरोध किया है, लेकिन ओडिशा सरकार द्वारा अभी तक खाद्यान्न की कोई जरुरत नहीं बताई गई है।...  आर एस राणा