कुल पेज दृश्य

09 मार्च 2018

फरवरी में खली के निर्यात में आई 47 फीसदी की भारी गिरावट

आर एस राणा
नई दिल्ली। घरेलू बाजार में भाव उंचे होने के कारण फरवरी महीने में खली के निर्यात में 47 फीसदी की गिरावट आकर कुल निर्यात 1,61,969 टन का ही हुआ है जबकि पिछले साल फरवरी महीने में इसका निर्यात 3,05,457 टन का हुआ था।
साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (एसईए) के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2017-18 के पहले 11 महीनों अप्रैल से फरवरी के दौरान खली के निर्यात में 56 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल निर्यात 26,77,536 टन का हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2016-17 की समान अवधि में इनका निर्यात 17,14,984 टन का ही हुआ था।
सोया खली का निर्यात घटा सरसों खली का बढ़ा
घरेलू बाजार में भाव उंचे होने के कारण फरवरी महीने में सोया खली के निर्यात में जनवरी के मुकाबले भारी गिरावट आई है। जनवरी में जहां सोया खली का निर्यात 1,05,678 टन का हुआ था वहीं फरवरी में इसका निर्यात घटकर केवल 73,816 टन का ही रह गया। हालांकि इस दौरान सरसों खली के निर्यात में बढ़ोतरी हुई है। फरवरी में सरसों खली का निर्यात बढ़कर 42,231 टन का हो गया जबकि जनवरी में इसका निर्यात केवल 24,980 टन का ही हुआ था।
घरेलू बाजार में सोया खली के भाव में भारी तेजी
सोया खली के भाव भारतीय बंदरगाह पर फरवरी में बढ़कर 486 डॉलर प्रति टन हो गए जबकि जनवरी में इसका भाव 409 डॉलर प्रति टन था। सरसों खली का भाव जनवरी में भारतीय बंदरगाह पर 226 डॉलर प्रति टन था जबकि फरवरी में इसका भाव बढ़कर 235 डॉलर प्रति टन हो गया।  .....   आर एस राणा

चीनी पर आयात शुल्क को शून्य कर सकती है केंद्र सरकार

आर एस राणा
नई दिल्ली। चीनी मिलों पर किसानों की बढ़ती बकाया राशि से परेशान केंद्र सरकार ​निर्यात शुल्क को 20 फीसदी से घटाकर शून्य कर सकती है। ​चालू पेराई ​सीजन में चीनी का रिकार्ड उत्पादन 295 लाख टन होने का अनुमान है जोकि सालाना खपत 250 लाख टन से की तुलना में 45 लाख टन ज्यादा है। बंपर उत्पादन के कारण घरेलू बाजार में चीनी की कीमतें काफी नीचे बनी हुई हैं।
खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार चीनी के निर्यात शुल्क को 20 फीसदी से घटाकर शून्य करने की योजना है। इसके साथ ही कुछ अन्य उपाय भी किए जा सकते हैं, ताकि घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में सुधार आ सके और चीनी के बकाया भुगतान में तेजी आ सके। सूत्रों के अनुसार चीनी मिलों पर किसानों का बकाया राशि बढ़कर करीब 14 हजार करोड़ रुपये के करीब पहुंच गई है।
चीनी के भाव लागत से नीचे
प्रमुख उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में चीनी के एक्स फैक्ट्री भाव 3,200 से 3,325 रुपये और महाराष्ट्र में चीनी के एक्स फैक्ट्री भाव 3,000 से 3,075 रुपये प्रति क्विंटल तथा कर्नाटका में इसके भाव 2,925 से 3,000 रुपये प्रति क्विंटल है। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के अनुसार चीनी मिलों की औसतन लागत 3,500 रुपये प्रति क्विंटल आ रही है।
रिकार्ड उत्पादन का अनुमान
इस्मा के अनुसार चालू पेराई सीजन 2017-18 में चीनी का रिकार्ड उत्पादन 295 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल उत्पादन 203 लाख टन का हुआ था। देश में चीनी की सालाना खपत 245 से 250 लाख टन होने का अनुमान है।
निर्यात शुल्क शून्य करने के बाद निर्यात पड़ते नहीं


चीनी कारोबारी सुधीर भालोठिया ने बताया कि​ विश्व बाजार में सफेद चीनी के भाव 440 से 445 डॉलर प्रति टन है, ऐसे में चीनी के निर्यात शुल्क को शून्य कर देने से भी निर्यात संभव नहीं हो पायेगा। उन्होंने कहां कि घरेलू बाजार में चीनी का उपलब्धता ज्यादा है, ऐसे में जब तक एक कोटा तय करके और निर्यात पर इनसेंटिव नहीं दिया जायेगा, तब तक घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में सुधार की संभावना नहीं है। .............   आर एस राणा

03 मार्च 2018

चना के आयात शुल्क में फिर बढ़ोतरी, क्या किसानों को मिल पायेगा उचित भाव


आर एस राणा

नई दिल्ली। किसानों को चना के उचित भाव दिलाने के लिए केंद्र सरकार ने महीने भर में इसके आयात शुल्क में दूसरी बार बढ़ोतरी की है। केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसचूना के अनुसार चना के आयात पर आयात शुल्क को 40 फीसदी से बढ़ाकर 60 फीसदी कर दिया है। रिकार्ड उत्पादन अनुमान से घरेलू बाजार में चना के भाव में इससे हल्का सुधार तो आ सकता है लेकिन बड़ी तेजी की संभावना नहीं है।

चना के भाव एमएसपी से नीचे

शनिवार को दिल्ली की लारेंस रोड़ मंडी में चना के भाव 3,900 से 3,950 रुपये प्रति क्विंटल रहे। केंद्र सरकार ने रबी विपणन सीजन 2017-18 के लिए चना का न्यनूतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 4,400 रुपये प्रति क्विंटल (बोनस सहित) तय किया हुआ है। मुंबई में आस्ट्रेलिया से आया​तित चना के भाव शनिवार को 3,750 रुपये प्रति क्विंटल रहे।

महीने भर में दूसरी बार बढ़ाया आयात शुल्क

​​केंद्र सरकार ने दिसंबर में चना के आयात पर 30 फीसदी का आयात शुल्क लगाया था, लेकिन घरेलू बाजार में इससे इसकी कीमतों में सुधार नहीं आया। अत: बंपर उत्पादन को देखते हुए फरवरी के शुरु में केंद्र सरकार ने चना के आयात पर शुल्क को 30 फीसदी से बढ़ाकर 40 फीसदी कर दिया। इसके बावजूद भी भाव में सुधार नहीं आया, जिससे आयात शुल्क में एक बार फिर बढ़ोतरी करनी पड़ी। शाक्मभरी खाद्य भंडार के प्रबंधक राधाकिशन गुप्ता ने बताया कि चालू रबी में देश में चना का रिकार्ड उत्पादन 100 लाख टन से ज्यादा होने का अनुमान है जबकि उत्पादक राज्यों में बकाया स्टॉक भी बचा हुआ है इसलिए तेजी की संभावना नहीं है।

मध्य मार्च के बाद बढ़ेगी नई फसल की आवक

कर्नाटका के साथ ही महाराष्ट्र में चना की नई फसल की आवक शुरू हो चुकी है जबकि प्रमुख उत्पादक राज्य मध्य प्रदेश में नई फसल की आवक मध्य मार्च तक बढ़ जायेगी। राजस्थान की मंडियों में चना की नई फसल की आवक अप्रैल में बनेगी। कर्नाटक और महाराष्ट्र की मंडियों में चना के भाव 3,500 से 3,800 रुपये प्रति​ क्विंटल चल रहे हैं।

रिकार्ड उत्पादन का अनुमान

कृषि मंत्रालय के दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार चना का रिकार्ड 111 लाख टन उत्पादन होने का अनुमान है जबकि फसल सीजन 2016-17 में इसका उत्पादन 93.8 लाख टन का ही हुआ था।

बुवाई में भारी बढ़ोतरी 

चालू रबी में चना की बुवाई बढ़कर 107.62 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 99.53 लाख हैक्टेयर में हुई थी। 



किसानों को वाजिब दाम दिलाने हेतु पॉम तेल पर आयात शुल्क 14 फीसदी बढ़ाया


आर एस राणा
नई दिल्ली। रबी तिलहनी फसलों सरसों और मूंगफली की आवक उत्पादक मंडियों में चालू हो गई है, जबकि इनके भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे बने हुए हैं, अत: भाव में सुधार लाने के लिए केंद्र सरकार ने आयातित क्रुड पॉम तेल और रिफाइंड पॉम तेल के आयात शुल्क में 14 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी है।

केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार क्रुड पॉम तेल (सीपीओ) के आयात पर शुल्क को 30 फीसदी से बढ़ाकर 44 फीसदी और रिफाइंड पाम तेल पर आयात शुल्क को 40 फीसदी से बढ़ाकर 54 फीसदी कर दिया है। जिससे घरेलू बाजार में खाद्य तेलों के साथ ही तिलहनों की कीमतों में सुधार आने का अनुमान है। 

एमएसपी से नीचे बने हुए हैं भाव

उत्पादक राज्यों में किसानों को मूंगफली 3,900 से 4,000 रुपये प्रति क्विंटल पर बेचनी पड़ रही है जबकि चालू फसल विपणन सीजन 2017-18 के लिए केंद्र सरकार ने इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 4,450 रुपये प्रति क्विंटल (बोनस सहित) तय किया हुआ है। इसी तरह से सरसों के भाव उत्पादक मंडियों में 3,600 से 3,700 रुपये प्रति क्विंटल हैं जबकि सरसों का एमएसपी 4,000 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है।

किसानों को मिल सकेगा उचित भाव

साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन आॅफ इंडिया (एसईए) के कार्यकारी निदेशक डॉ. बी वी मेहता ने बताया कि केंद्र सरकार ने क्रुड पॉम और रिफाइंड पॉम तेल पर आयात शुल्क में बढ़ोतरी करके तिलहन किसानों के लिए अच्छा काम किया है, इससे किसानों को उनकी उपज का उचित भाव मिल सकेगा। उन्होंने कहां कि अगर केंद्र सरकार कच्चे तेल और रिफाइंड तेल के आयात शुल्क केे अंतर को बढ़ा देती तो इससे घरेलू उद्योग को भी राहत मिल जाती। भाव में अंतर कम होने के कारण रिफाइंड तेलों के आयात में बढ़ोतरी हो रही है। जनवरी में क्रुड पॉम तेल और रिफाइंड पॉम तेल के औसत भाव भारीतय बंदरगाह पर 669 डॉलर प्रति टन रहे। 

​आयात में हुई बढ़ोतरी

एसईए के अनुसार चालू तेल वर्ष नवंबर-17 से अक्टूबर-18 के पहले तीन महीनों नवंबर से जनवरी के दौरान खाद्य एवं अखाद्य तेलों के आयात में 25 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल आयात 36,28,734 टन का हो चुका है जबकि पिछले ​तेल वर्ष की समान अवधि में इनका आयात 34,14,008 टन का ही हुआ था।

कुल खपत के 65 फीसदी से ज्यादा आयात

देश में खाद्य तेलों की सालाना खपत 225 लाख टन से ज्यादा है। फसल सीजन 2016-17 के दौरान कुल खपत के 65 फीसदी से ज्यादा खाद्य तेलों का आयात हुआ था। इस दौरान 150.8 लाख टन खाद्य तेलों का आयात हुआ था जबकि घरेलू उत्पादन केवल 79.1 लाख टन का ही हुआ था। 


01 मार्च 2018

मध्य प्रदेश में डिफाल्टर किसानों को कर्ज चुकाने के लिए एक महीने की मोहल्लत

आर एस राणा
नई दिल्ली। पांच महीने बाद मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं इसलिए राज्य में किसानों का मुद्दा सबसे बड़ा मुद्दा है। राज्य के किसान जहां कर्जदार हो रहे हैं, वहीं हाल ही में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से उनकी फसल भी बर्बाद हो गई है। इसे ध्यान में रखते हुए आम बजट में अल्पकालिक कर्ज चुकाने को डिफाल्टर किसानों के लिए समझौता योजना के तहत 350 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है साथ ही किसानों को कर्ज चुकाने की अंतिम तारीख 28 मार्च से बढ़ाकर 27 अप्रैल की गई है।
मध्य प्रदेश के वित्तमंत्री जयंत मलैया ने बुधवार को पेश आम बजट 2018—19 में खेती—किसानी को ज्यादा तरजीह देते हुए कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
आम बजट 2018—19 में कृषि क्षेत्र के लिए 37,498 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। राज्य सरकार ने सिचाई व्यवस्था पर बेहतर कार्य किया है। माइक्रो सिंचाई परियोजना के लिए 397 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। दो लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र बढ़ाने का प्रावधान भी किया गया है। हॉर्टिकल्चर के लिए 1,158 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। मत्स्य पालन के लिए 90.89 करोड़ रुपये बजट मे आवंटित किए गए हैं। 
बजट में पशुपालन के लिए 1,038 करोड़ रुपये का और कृषि समृद्धि योजना के लिए 3,650 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। किसानों के लिए कृषक समृद्धि‍ योजना लागू की जाएगी।  फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर उपार्जन की व्यवस्था के साथ ही वित्त मंत्री ने भावांतर योजना के लिए तीन हजार करोड़ का प्रावधान किया है। इस योजना से प्रदेश के 15 लाख किसानों को लाभ मिला है। फसलों के संरक्षण के लिए कोल्ड स्टोरेज की संख्या भी बढ़ाई जायेगी।


वित्त मंत्री ने कहा कि विश्व में छाई मंदी का असर मध्य प्रदेश पर भी पड़ा है। कांग्रेस ने राज्य सरकार पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाया। ......  आर एस राणा

सस्ता खाद्य तेलों का आयात कहीं सरकार के गले की फांस न बन जाए

आर एस राणा
नई दिल्ली। खाद्यान्न के साथ ही दलहन के रिकार्ड उत्पादन से केंद्र सरकार अपनी पीठ तो थपथपा रही है लेकिन सस्ते खाद्य तेलों के आयात के कारण किसान तिलहनी फसलों से तौबा कर रहे हैं जिसका खामियाजा सरकारी खजाने से भारी—भरकम राशि चुकाकर करना पड़ रहा है। सरकार नीतियां तो बना रही है लेकिन व्यवाहरिक नहीं होने के कारण इनका उल्टा असर हो रहा है। तिलहनों का उत्पादन पिछले चाल साल में बढ़ने के बजाए उल्टा घट गया हैं। फसल सीजन 2013-14 में देश में 327.49 लाख टन तिलहनों का उत्पादन हुआ था जबकि फसल सीजन 2017-18 में इनका उत्पादन घटकर 298.82 लाख टन ही होने का अनुमान है।
साल दर साल खाद्य तेलों के मामले में बढ़ती आयात निर्भरता से जहां घरेलू खेती को नुकसान हो रहा है। घटती घरेलू पैदावार व बढ़ते आयात के बीच लगातार अंतर बढ़ता ही जा रहा है। सस्ते आयात के चक्कर में घरेलू तिलहनी फसलों की खेती किसानों के लिए महंगी साबित हो रही है। लिहाजा उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) भी नहीं मिल पाता।
एमएसपी से नीचे बिक रही है सरसों और मूंगफली
उत्पादक राज्यों में किसानों को मूंगफली 3,900 से 4,000 रुपये प्रति क्विंटल पर बेचनी पड़ रही है जबकि चालू फसल विपणन सीजन 2017-18 के लिए केंद्र सरकार ने इसका एमएसपी 4,450 रुपये प्रति क्विंटल (बोनस सहित) किया हुआ है। इसी तरह से सरसों की नई फसल की आवक शुरू होने से पहले ही उत्पादक मंडियों में इसके भाव 3,600 से 3,700 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गए हैं जबकि इसका एमएसपी 4,000 रुपये प्र​ति क्विंटल तय किया हुआ है।
आयात निर्भरता बढ़कर 65 फीसदी से ज्यादा
पिछले एक दशक में हालात बद से बदतर हो चुके हैं। इससे पार पाने के लिए केंद्र के साथ ही राज्य सरकारों ने उपाय जल्द शुरू नहीं किए तो फिर हालात काबू में नहीं आ पायेंगे। वर्ष 2010-11 में हम अपनी जरुरत के 50 फीसदी खाद्य तेलों का आयात कर रहे थे जोकि फसल सीजन 2016-17 में आयात निरर्भता बढ़कर 65 फीसदी से ज्यादा हो गई है। वर्ष 2010-11 में 79.2 लाख टन खाद्य तेलों का घरेलू उत्पादन हुआ था जबकि फसल सीजन 2016-17 में घरेलू उत्पादन घटकर 79.1 लाख टन ही होने का अनुमान है।
खाद्य तेलों की सालाना खपत 225 लाख टन के पार
साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन आॅफ इंडिया (एसईए) के कार्यकारी निदेशक डॉ. बी वी मेहता ने बताया कि देश में खाद्य तेलों की सालाना खपत बढ़कर 225 लाख टन से ज्यादा हो गई है जबकि घरेलू उत्पादन 72 से 79 लाख टन पर टिका हुआ है। अत: घरेलू जरुरतों को पूरा करने के लिए सीजन 2016-17 में रिकार्ड 150 लाख टन से ज्यादा खाद्य तेलों का आयात हुआ है। जिससे सरकारी खजाने पर 75 हजार करोड़ रुपये का भार पड़ा है।
खपत के हिसाब से 10 लाख खाद्य तेलों का उत्पादन हर साल बढ़े
उन्होंने बताया कि देश में जनसंख्या में हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए हर साल 10 लाख टन अतिरिक्त खाद्य तेलों की जरुरत है जिसके लिए करीब 30 लाख टन तिलहनों का उत्पादन हर साल बढ़ाना होगा, लेकिन उत्पादन बढ़ने के बजाए घट रहा है। खाद्य तेलों का घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को तिलहनी फसलों का उचित मूल्य दिलाने के साथ ही प्रति हैक्टेयर उत्पादकता बढ़ाना भी जरुरी है। खाद्य तेलों के सस्ते आयात को रोकने के लिए एक भाव तय कर देना चाहिए, जिससे नीचे भाव आने पर आयात शुल्क में बढ़ोतरी की जाये। आमतौर पर तिलहनों की ज्यादा खेती असिंचित क्षेत्रों में होती है अत: मौसम का असर भी तिलहनी फसलों पर पड़ता है।.......  आर एस राणा

दलहन और तिलहन की खरीद सुनिश्चित करने हेतु दोगुना धन आवंटन

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है, इसी कड़ी में केंद्र सरकार ने चालू रबी में दलहन के साथ ही तिलहनी फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद को बढ़ावा देने के लिए पिछले साल की तुलना में दोगुने धन का आवंटन किया है। ऐसे में चालू रबी सीजन में दलहन के साथ ही तिलहनों की सरकारी खरीद ज्यादा होने का अनुमान है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में चालू रबी में दलहन के साथ ​ही तिलहनी फसलों की खरीद के लिए 19,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया है जबकि पिछले साल 9,500 करोड़ रुपये का ही आवंटन किया गया था। प्रमुख उत्पादक राज्यों की मंडियों में इस समय जहां किसानों को दलहन एमएसपी से 1,000 से 1,500 रुपये प्रति क्विंटल नीचे भाव पर बेचनी पड़ रही है, वहीं ​तिलहनों फसलों में मूंगफली के भाव भी एमएसपी से 400 से 500 रुपये नीचे बने हुए हैं। चालू महीने में रबी दलहनों चना और मसूर तथा मूंग और उड़द की आवक बढ़ेगी, जबकि तिलहनी फसलों में सरसों और मूंगफली की नई फसल की आवक बढ़ेगी।
नेफेड 3.86 टन अरहर की कर चुकी है खरीद
दलहन और तिलहनों की एमएसपी पर खरीद के लिए केंद्र सरकार ने नेशनल एग्रीकल्चर कोआॅपरेटिव मार्केटिंग फैडरेशन आॅफ इंडिया (नेफैड) के अधिकृत किया हुआ है। नेफैड खरीफ में अरहर की खरीद रही है। तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, कर्नाटका और महाराष्ट्र से नेफैड 3,86,273 टन की खरीद एमएसपी पर कर चुकी है।

दलहन के रिकार्ड उत्पादन की उम्मीद 

कृषि मंत्रालय के दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार चालू फसल सीजन 2017-18 में दलहन की रिकार्ड पैदावार 239.5 लाख टन होने का अनुमान है जबकि फसल सीजन 2016-17 में दालों का 231.3 लाख टन का हुआ था। रबी दलहन की प्रमुख फसल चना का उत्पादन चालू रबी में रिकार्ड 111 लाख टन होने का अनुमान है। 

तिलहनों की पैदावार घटने का अनुमान

फसल सीजन 2017-18 में तिलहनों का उत्पादन 298.8 लाख टन होने का अनुमान है जोकि पिछले साल के 312.8 लाख टन से कम है। तिलहन की प्रमुख फसल सोयाबीन का उत्पादन 113.9 लाख टन, मूंगफली का उत्पादन 82.2 लाख टन और केस्टर सीड का उत्पादन 15 लाख टन होने का अनुमान है.     .........   आर एस राणा