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09 फ़रवरी 2018

चीनी के निर्यात शुल्क में कटौती करने पर विचार — रामविलास पासवान

आर एस राणा
नई दिल्ली। गन्ना किसानों के बकाया भुगतान को लेकर केंद्र सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसलिए चीनी मिलों को राहत देने के लिए निर्यात शुल्क में भी कमी करने पर सरकार विचार कर रही है। केंद्रीय उपभोक्ता, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री रामविलास पासवान ने शुक्रवार को प्रेस वार्ता में कहां कि हमने चीनी आयात को पूरी तरह से रोकने के लिए आयात शुल्क 50 फीसदी से बढ़ाकर 100 फीसदी कर दिया है। निर्यात शुल्क को हटाने के साथ ही उद्योग की कई मांगे हैं जिन पर सरकार विचार कर रही है। चीनी के निर्यात पर इस समय 20 फीसदी निर्यात शुल्क है।
उन्होंने बताया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में आईटी का प्रयोग करके पारदर्शिता लाई गई है और सस्‍ता अनाज सही लाभार्थी तक पहुंचे, इसे सुनिश्चित करने के लिए राशनकार्डों को आधार से जोड़ा गया है। इस अभियान से 2 करोड़ 75 लाख फर्जी, डुप्‍लीकेट और अवैध ढंग से बने राशनकार्डों की छंटनी की गई है।
उन्‍होंने कहा कि एनडीए सरकार ने 2014 के चुनाव से पूर्व महंगाई पर नियंत्रण करने का जनता से वादा किया था, जिसे पिछले तीन वर्षों में कर दिखाया है। केंद्रीय पूल में दालों का बफर स्‍टॉक उपलब्‍ध है, जिसे बाजार मूल्‍यों को स्‍थिर रखने के लिए खुले बाजार में निविदा के माध्‍यम से बेचा भी जा रहा है।
उन्होंने बताया कि उपभोक्ता संरक्षण विधेयक संसद में प्रस्‍तुत किया जा चुका है और इसे शीघ्र ही पारित करवा कर कानूनी रूप दिया जाएगा। उपभोक्‍ता शिकायतों के त्‍वरित समाधान के लिए राष्‍ट्रीय उपभोक्ता हैल्‍पलाइन के काउंटर 40 से बढ़ा कर 60 कर दिए गए हैं। इसके अतिरिक्‍त 6 शहरों में क्षेत्रीय उपभोक्ता हैल्‍पलाइनें भी स्‍थापित कर दी गई हैं। लीगल मेट्रोलॉजी के माध्‍यम से जनता को सही मात्रा और सही एमआरपी पर वस्‍तुएं और सेवाएं प्राप्‍त हों, इसे सुनिश्चित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि आम बजट 2018—19 में खाद्य विभाग के लिए 2,24,159.10 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जो वर्ष 2017-18 के 1,96,809.22 करोड़ रुपए से लगभग 14 फीसदी अधिक है। इसी प्रकार उपभोक्ता मामले विभाग के लिए इस वर्ष 1,804.52 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
देश में रिकॉर्ड खाद्यान्‍न का उत्‍पादन हुआ है। वर्ष 2017-18 में 275 मिलियन टन खाद्यान्‍न और 300 मिलियन टन से अधिक फलों का उत्‍पादन हुआ है। किसानों के कल्‍याण के लिए हमारी सरकार ने निरन्‍तर प्रयास किए हैं, जिन्‍हें इस बजट में भी जारी रखा गया है और किसानों को उनकी लागत के डेढ़ गुना न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य (एमएसपी) दिए जाने के लिए बजट में किए गए प्रावधान से उनकी आय में बढ़ोतरी होगी।  ...........  आर एस राणा



08 फ़रवरी 2018

ग्वार गम उत्पादों के निर्यात में भारी बढ़ोतरी

आर एस राणा
नई दिल्ली। ग्वार गम उत्पादों में अमेरिका के साथ ही खाड़ी देशों की आयात मांग अच्छी बनी हुई है। चालू वित्त वर्ष 2017—18 के पहले 9 महीनों अप्रैल से दिसंबर के दौरान ग्वार गम उत्पादों का निर्यात बढ़कर 3,65,451 टन का हो चुका है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2016—17 की समान अवधि में इनका निर्यात 2,69,001 टन का ही हुआ था।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार मूल्य के हिसाब से चालू वित्त वर्ष 2017—18 के पहले 9 महीनों अप्रैल से दिसंबर के दौरान ग्वार गम उत्पादों का निर्यात 48.83 फीसदी बढ़कर 2,951.25 करोड़ रुपये का हो चुका है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2016—17 की समान अवधि में इनका निर्यात 1,982.87 करोड़ रुपये का ही हुआ था।



प्रमुख उत्पादक राज्यों राजस्थान और हरियाणा की मंडियों में ग्वार सीड की दैनिक आवक घटकर 8,000 से 9,000 क्विंटल की रह गई है। राजस्थान की जोधपुर मंडी में ग्वार गम पाउडर का भाव गुरुवार को 9,800 से 10,000 रुपये और ग्वार सीड का भाव 4,600 रुपये प्रति क्विंटल रहा। राज्य की गंगानगर मंडी में ग्वार सीड का भाव 4,500 रुपये प्रति क्विंटल रहा।  ..... आर एस राणा

सोयाबीन के उत्पादन अनुमान में 7.98 लाख टन की कमी आने की आशंका — सोपा

सोयाबीन के उत्पादन अनुमान में 7.98 लाख टन की कमी आने की आशंका — सोपा
खरीफ में सोयाबीन के उत्पादन अनुमान में 7.98 लाख टन की कमी आने की आशंका है। सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन आॅफ इंडिया (सोपा) द्वारा जारी दूसरे ​अग्रिम अनुमान के अनुसार सोयाबीन का उत्पादन घटकर 83.5 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि अक्टूबर में पहले आरंभिक अनुमान में 91.46 लाख टन उत्पादन का अनुमान था।
सोपा के कार्यकारी निदेशक डी एन पाठक ने बताया कि चालू खरीफ सीजन में सोयाबीन का कुल उत्पादन 83.5 लाख टन होने का अनुमान है जबकि नई फसल की आवक के समय उत्पादक मंडियों में 13 लाख टन का बकाया स्टॉक बचा हुआ था। अत: कुल उपलब्धता 96.50 लाख टन की है। उन्होंने बताया कि उत्पादक राज्यों में सोयाबीन की कुल उपलब्धता पिछले साल के लगभग ही है।
उन्होंने बताया कि प्रमुख उत्पादक राज्यों मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान की उत्पादक मंडियों में चालू फसल सीजन में अक्टूबर—17 से जनवरी—18 के दौरान 53 लाख टन सोयाबीन की दैनिक आवक हो चुकी है। इस समय स्टॉकिस्टों के साथ ही किसानों के पास 45.32 लाख टन का बकाया स्टॉक बचा हुआ है।


चालू तेल वर्ष 2017—18 के पहले चार महीनों अक्टूबर—17 से जनवरी—18 के दौरान 7.05 लाख टन सोया डीओसी का निर्यात हो चुका है जबकि पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 7.24 लाख टन का हुआ था। सोपा के अनुसार चालू तेल वर्ष में सोया डीओसी का कुल निर्यात 12.50 लाख टन होने का अनुमान है। 

चीनी मिलें अ​ब तय कोटे के आधार पर ही बेच सकेंगी चीनी

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार चीनी की कीमतों में सुधार लाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है ताकि किसानों के बकाया भुगतान में तेजी आ सके। केंद्र सरकार ने अब चीनी की बिक्री के लिए मिलों पर सीमा तय कर दी है। अत: फरवरी और मार्च में मिलें चीनी की बिक्री तय सीमा के आधार पर कर सकेंगी, जिससे की बाजार में चीनी की उपलब्धता जरुरत से ज्यादा नहीं हो। ​इससे चीनी की कीमतों में सुधार आने का अनुमान है।
केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार फरवरी में चीनी मिलें पिछले महीने के बकाया स्टॉक तथा फरवरी में कुल उत्पादन की केवल 17 फीसदी चीनी ही बाजार में बेच सकेगी। अत: चीनी मिलों को कुल स्टॉक का 83 फीसदी स्टॉक अपने पास रखना अनिवार्य होगा। इसी तरह से मार्च में चीनी मिलें फरवरी के बकाया स्टॉक तथा मार्च में उत्पादन को मिलाकर कुल स्टॉक की केवल 16 फीसदी ही चीनी बाजार में बेच सकेंगी। अत: चीनी मिलों को कुल स्टॉक की 84 फीसदी चीनी अपने पास रखनी होगी।
इससे पहले केंद्र सरकार ने चीनी के आयात को रोकने के लिए आयात पर शुल्क को 50 फीसदी से बढ़ाकर 100 फीसदी कर दिया था।
उत्तर प्रदेश में चीनी के एक्स फैक्ट्री भाव गुरुवार को 3,175 से 3,250 रुपये, महाराष्ट्र में 2,850 से 2,950 रुपये और दिल्ली में 3,375 से 3,450 रुपये प्रति क्विंटल (टैक्स अगल) रहे।केंद्र सरकार द्वारा चीनी मिलों पर कोटा तय करने से बाजार में अनावश्यक सप्लाई रुक जायेगी, जिससे इसकी कीमतों में 50 से 100 रुपये की तेजी आने का अनुमान है। 
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के अनुसार चालू पेराई सीजन 2017—18 में चीनी का उत्पादन बढ़कर 261 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले पेराई सीजन 2016—17 में केवल 203 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था। ........ आर एस राणा

07 फ़रवरी 2018

पाकिस्तान से चीनी आयात को रोकने के लिए आयात शुल्क 100 फीसदी किया

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पाकिस्तान से हो रहे चीनी के आयात सौदों को रोकने के लिए आयात शुल्क को 50 फीसदी से बढ़ाकर 100 फीसदी किया है। पाकिस्तान से वाघा—अटारी बार्डर के ​जरिए गत सप्ताह 5,000—6,000 टन की खेप भारत पहुंच थी। पाकिस्तान में पंजाब प्रांत की चीनी मिलों को वहां की सरकार चीनी निर्यात पर सब्सिडी दे रही है।
पाकिस्तान में चीनी का उत्पादन ज्यादा होने का अनुमान है, साथ ही पिछले साल का बकाया स्टॉक भी ज्यादा है। इसीलिए वहां की चीनी मिलों को पाकिस्तान सरकार निर्यात पर सब्सिडी दे रही है। पाकिस्तान से वाघा—अटारी बार्डर के रास्ते सड़क मार्ग से चीनी आयात पर पविहन लागत भी कम आती है। भारत के पंजाब के अमृतसर में गत सप्ताह पाकिस्तान से 5,000 से 6,000 टन चीनी आई है। सूत्रों के अनुसार अमृतसर पहुंच इस चीनी का भाव 3,250 से 3,300 रुपये प्रति क्विंटल है। ऐसे में उद्योग को डर था कि कहीं आयात सौदे ज्यादा मात्रा में ना हो जाए, इसलिए सरकार से आयात शुल्क को 50 फीसदी से बढ़ाकर 100 फीसदी करने की मांग की थी, जिसे केंद्र सरकार ने मान लिया।
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के अनुसार चालू पेराई सीजन 2017—18 में चीनी का उत्पादन बढ़कर 261 लाख टन होने का अनुमान है जबकि देश में चीनी की सालाना खपत 245 से 250 लाख टन की होती है। पेराई सीजन 2016—17 में चीनी का उत्पादन केवल 203 लाख टन का ही हुआ था। नए पेराई सीजन के आरंभ में पहली अक्टूबर 2017 को घरेलू बाजार में करीब 40 लाख टन चीनी का बकाया स्टॉक बचा भी हुआ था। अत: कुल उपलब्धता खपत की तुलना में ज्यादा होने से घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों मेंं गिरावट बनी हुई थी।
चीनी की कीमतों में गिरावट का असर चीनी मिलों द्वारा किसानों को किए जाने वाले भुगतान पर भी पड़ा है, तथा चीनी मिलों पर किसानों के बकाया की राशि लगातार बढ़ रही है। सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार ​चीनी के निर्यात की संभावना भी तलाश रही है, इसके लिए निर्यात शुल्क को भी शून्य कर सकती है। इस समय चीनी के निर्यात पर 20 फीसदी का निर्यात शुल्क है। चीनी मिलों द्वारा चीनी बेचने के ​नियमों को भी केंद्र सरकार सख्त कर सकती है जिससे घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता जरुरत से ज्यादा नहीं हो।
केंद्र सरकार द्वारा चीनी के आयात शुल्क को 100 फीसदी कर देने से घरेलू बाजारों में चीनी की कीमतों में हल्का सुधार आया है। उत्तर प्रदेश में चीनी के एक्स फैक्ट्री भाव 3,175 से 3,250 रुपये, महाराष्ट्र में 2,850 से 2,950 रुपये और दिल्ली में 3,375 से 3,450 रुपये प्रति क्विंटल (टैक्स अगल) हो गए। चीनी में मांग को देखते हुए इसकी कीमतों में हल्का सुधार और भी आ सकता है। ............  आर एस राणा

जनवरी में डीओसी के निर्यात में 52 फीसदी की भारी गिरावट

आर एस राणा
नई दिल्ली।  घरेलू बाजार में कीमतें बढ़ने के साथ ही विश्व बाजार में भाव में आई कमी के कारण जनवरी में डीओसी के निर्यात में 52 फीसदी की भारी कमी आई हैं। जनवरी में डीओसी का निर्यात घटकर 1,16,150 टन का ही हुआ है जबकि पिछले साल जनवरी में इसका निर्यात 2,39,613 टन का हुआ था।
साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन आॅफ इंडिया (एसईए) के अनुसार केंद्र सरकार ने 17 नवंबर 2017 को खाद्य तेलों के आयात पर शुल्क को 12.5 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया था। इसके साथ ही सोया डीओसी के निर्यात पर निर्यातकों को प्रोत्साहन राशि 5 फीसदी से बढ़ाकर 7 फीसदी कर देने से उद्योग के साथ ही किसानों को फायदा होगा। चालू वित्त वर्ष के ​दिसंबर के मुकाबले जनवरी में सोया डीओसी के साथ ही सरसों डीओसी, राईसब्रान और केस्टर डीओसी के निर्यात में भी कमी आई है। 
चालू वित्त वर्ष 2017—18 के पहले 10 महीनों अप्रैल से जनवरी के दौरान डीओसी का कुल निर्यात पिछले वित्त वर्ष 2016—17 की समान अवधि के मुकाबले 68 फीसदी बढ़ा है। अप्रैल से जनवरी के दौरान डीओसी का निर्यात 23,62,049 टन का हुआ है जब​कि पिछले वित्त वर्ष 2016—17 की समान अवधि में इनका निर्यात 14,09,527 टन का ही हुआ था।
घरेलू मंडियों में सोयाबीन की कीमतों में आई तेजी से सोया डीओसी के भाव भी बढ़े हैं। जनवरी में सोया डीओसी के औसत भाव बढ़कर भारतीय बंदरगाह पर 409 डॉलर प्रति टन हो गए, जबकि दिसंबर में इसके औसत भाव 375 डॉलर प्रति टन थे। सरसों डीओसी के भाव जनवरी में बढ़कर भारतीय बंदरगाह पर 226 डॉलर प्रति टन हो गए, जबकि दिसंबर में इसके भाव 224 डॉलर प्रति टन थे। ....... आर एस राणा

आयात को हत्तोसाहित करने के लिए चना आयात शुल्क में 10 फीसदी की बढ़ोतरी

आर एस राणा
नई फसल की आवक का दबाव बनने से पहले ही चना की कीमतों में आई गिरावट को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने आयात पर शुल्क में 10 फीसदी की बढ़ोतरी कर शुल्क 40 फीसदी कर दिया है। इससे चना के भाव में हल्का सुधार आया है। मुंबई में आयातित आस्ट्रेलाई चना के भाव 75 रुपये बढ़कर 3,900 रुपये और दिल्ली में 4,050 से 4,100 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।
22 दिसंबर 2017 को केंद्र सरकार ने चना के आयात पर 30 फीसदी का आयात शुल्क लगाया था लेकिन इससे कीमतों में सुधार नहीं आया। सूत्रों के अनुसार चना के आयात को हत्तोसाहित करने के लिए चना के आयात शुल्क को 30 फीसदी से बढ़ाकर 40 फीसदी कर दिया है, इसकी अधिसूचना जल्दी ही जारी हो जायेगी।
प्रमुख उत्पादक राज्यों की मंडियों में चना के भाव 3,500 से 4,000 रुपये प्रति क्विंटल है तथा नई फसल की आवक बढ़ने पर इसके भाव में और गिरावट आने का अनुमान है। केंद्र सरकार ने चालू रबी विपणन सीजन 2017—18 के लिए चना का न्यनूतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 4,400 रुपये प्रति क्विंटल (बोनस सहित) तय किया हुआ है। जानकारों के अनुसार आस्ट्रेलिया में चना का उत्पादन 10.50 लाख टन होने का अनुमान है तथा इसमें से 70 से 80 फीसदी का आयात भारत  में होने का अनुमान है। ऐसे में माना जा रहा है कि आस्ट्रेलिया से आयातित चना की कीमतों में गिरावट आ सकती है।
आयात में बढ़ोतरी
वित्त वर्ष 2016—17 में चना का आयात 10.80 लाख टन का हुआ था जबकि ​इसके पिछले वित्त वर्ष 2015—16 में चना का आयात 10.31 लाख टन का ही हुआ था। चालू वित्त वर्ष 2017—18 के पहले पांच महीनों अप्रैल से अगस्त के दौरान 3.39 लाख टन चना का आयात हो चुका है।
बुवाई में भारी बढ़ोतरी
चालू रबी सीजन में चना की बुवाई में भारी बढ़ोतरी हुई है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चना की बुवाई बढ़कर 107.24 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई केवल 99.04 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी।
उत्पादन अनुमान ज्यादा
कृषि मंत्रालय ने फसल सीजन 2017—18 में चना के उत्पादन का लक्ष्य 97.5 लाख टन का तय किया है जबकि इसके पिछले साल 2016—17 में चना का उत्पादन 93.3 लाख टन का हुआ था।
नई फसल की आवक शुरू
चना की नई फसल की आवक कर्नाटका, आंधप्रदेश और महाराष्ट्र में शुरू हो गई है तथा चालू महीने के आखिर तक मध्य प्रदेश में भी नई फसल की आवक बन जायेगी। राजस्थान और उत्तर प्रदेश में चना की नई फसल अप्रैल महीने में आयेगी। चालू रबी सीजन में चना की बुवाई में भारी बढ़ोतरी हुई है तथा अभी तक मौसम भी फसल के अनुकूल बना हुआ है। ऐसे में माना जा रहा है कि चना का रिकार्ड उत्पादन होने का अनुमान है। .............  आर एस राणा