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08 जनवरी 2026

हरियाणा में खाद्य आपूर्ति विभाग फसलों की समर्थन मूल्य पर खरीद के नियम कड़े करेगा

नई दिल्ली। हरियाणा में चालू खरीफ सीजन में हुए धान घोटाले से राज्य के खाद्य आपूर्ति विभाग ने बड़ा सबक लिया है। प्रदेश में आगामी सीजन के दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर होने वाली फसलों की खरीद को लेकर नियमों में बदलाव किया जायेगा। जिंसों की सरकारी खरीद की जांच भी सख्त होगी। आगामी सीजन के लिए सबसे बड़ा बदलाव यह होने वाला कि अब गेटपास घर से नहीं बनेंगे। मंडी में फसल लेकर पहुंचने वाले किसानों के वाहनों की फिजिकल जांच होगी और फसल वाहन में है इसका सत्यापन किया जायेगा।


राज्य के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री राजेश नागर का कहना है कि भविष्य में गड़बड़ी न हो इसके लिए अभी से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। विभाग की तरफ से किसानों के वाहन की ट्रैकिंग की व्यवस्था होगी। जो किसान मंडी में फसल लेकर आएंगे उनके वाहन नंबर, वाहन की श्रेणी का लाइव फोटो होगा। जिस गेट से एंट्री होगी उस पर सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य रूप से लगाये जायेंगे तथा कैमरे से निगरानी के बाद वाहन को अंदर आने की अनुमति होगी। गेट में अंदर घुसने से पहले किसान की फसल, वजन, किसान का नाम, पंजीकृत मोबाइल नंबर का ब्योरा भी दर्ज किया जायेगा।

मेरी फसल-मेरा ब्यौरा के अनुसार पंजीकृत फसल का क्षेत्र आदि ब्योरे से भी मिलान किया जाश्येगा। मंडी के गेट पर ही फिजिकल जांच होगी। संबंधित फसल ब्यौरे के अनुसार किसान के वाहन में हैं, इसका सत्यापन होने के बाद ही गेट पास काटा जाएगा। मंडी में जो निकासी वाले गेट होंगे वहां भी कैमरे लगाए जाएंगे और निकासी के दौरान भी किसानों के वाहनों की जांच होगी।

खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारियों ने किसानों के वाहनों की ट्रैकिंग को लेकर विभागीय मंत्री के समक्ष एक प्रेजेंटेशन दिया है। आगामी दिनों में दो और प्रेजेंटेशन मिलेंगे और बाद में सुझावों को शामिल करके इसे फाइनल किया जाएगा। मंत्री नागर का कहना है कि इसका लाभ यह होगा कि आढ़तियों व राइस मिल में खरीदे गए धान की वास्तविक रिपोर्ट तैयार हो सकेगी। जांच भी आसान होगी। मंडियों से राइस मिलों से धान की ढुलाई वाले वाहनों को लेकर भी और मजबूत ट्रैकिंग होगी। जो भी वाहन पहुंचेंगे उनमें निकासी के दौरान फसल थी या वाहन खाली था यह भी पता चल सकेगा।

धान घोटाले के संबंध में राज्य के खाद्य आपूर्ति विभाग पर अक्सर अनियमितताओं, धान की खरीद में गड़बड़ी, और किसानों से जुड़े घोटालों के आरोप लगते हैं, जिसमें बिचौलियों द्वारा हेराफेरी, गलत डेटा एंट्री, और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के कार्यान्वयन में भ्रष्टाचार शामिल है। अतः: इससे विभाग की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं और सरकार को कड़ी कार्रवाई करनी पड़ती है, जैसे कि पोर्टल पर सही डेटा की अनिवार्यता और अधिकारियों की जवाबदेही तय करना।

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