नई दिल्ली। कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई ने 5 जनवरी से 9 जनवरी के दौरान 2,23,100 गांठ, एक गांठ 170 किलो फसल सीजन 2024-25 के दौरान खरीदी हुई कॉटन की बिक्री की। इसके पिछले सप्ताह में निगम ने केवल 2,02,100 गांठ बेची थी।
सूत्रों के अनुसार अभी तक पिछले फसल सीजन 2024-25 के दौरान खरीदी हुई 98,53,300 गांठ कॉटन की बिक्री कर चुकी है। फसल सीजन 2024-25 की खरीदी हुई कॉटन की लगातार घरेलू बाजार में मिलों को बिकवाली कर रही है।
पहली अक्टूबर 2025 से शुरू हुए चालू फसल सीजन में सीसीआई 72 लाख गांठ से ज्यादा कपास की खरीद समर्थन मूल्य पर कर चुकी है। माना जा रहा है कि निगम की कुल खरीद एक करोड़ पहुंचने का अनुमान है।
स्पिनिंग मिलों की मांग बनी रहने के कारण शुक्रवार को शाम के सत्र में गुजरात में कॉटन की कीमतों में तेजी दर्ज की गई, जबकि इस दौरान उत्तर भारत के राज्यों में इसके भाव में स्थिर से सुधार आया।
गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव शुक्रवार को 200 रुपये तेज होकर दम 55,100 से 55,400 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए।
पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव सुधरकर 5,500 से 5,660 रुपये प्रति मन बोले गए।हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव बढ़कर 5,460 से 5,600 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 5,525 से 5,680 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 53,000 से 54,000 रुपये कैंडी बोले गए।
देशभर की मंडियों में कपास की आवक 208,300 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई।
घरेलू वायदा कारोबार में कॉटन की कीमतों में तेजी का रुख रहा। एनसीडीईएक्स पर अप्रैल 26 महीने के वायदा अनुबंध में कपास के दाम 4.5 रुपये तेज होकर 1,590 रुपये प्रति 20 किलो हो गए। आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतों में मिलाजुला रुख रहा।
व्यापारियों के अनुसार स्पिनिंग मिलों की मांग बनी रहने के कारण गुजरात में कॉटन की कीमतों में तेजी जारी रही, जबकि उत्तर भारत में इसकी कीमतों में स्थिर से सुधार आया। व्यापारियों के अनुसार अधिकांश मिलों के पास कॉटन का बकाया स्टॉक कम है जबकि सूती धागे की स्थानीय मांग बराबर बनी हुई है, जिस कारण स्पिनिंग मिलें अच्छे मार्जिन में व्यापार कर रही है। हालांकि घरेलू बाजार में कॉटन की कुल उपलब्धता ज्यादा है। सीसीआई घरेलू बाजार में लगातार पिछले साल की खरीदी हुई कॉटन बेच रही है। अत: मिलों को आसानी से कच्चा माल मिल रहा है। हाल ही में घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतों में तेजी आई है। बढ़े दाम पर मिलों की खरीद सीमित हुई है इसलिए कॉटन के दाम रुक सकते हैं।

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