नई दिल्ली। कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई ने बुधवार को घरेलू बाजार में ई नीलामी के माध्यम फसल सीजन 2025-26 में खरीदी हुई 1,700 गांठ, एक गांठ 170 किलो कॉटन की बिक्री घरेलू मिलों को की। इस दौरान निगम ने बिनौले की बिक्री कीमतों में 20 से 100 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी भी की।
सूत्रों के अनुसार सीसीआई ने बुधवार को लगातार दूसरे दिन बिनौले की बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी की। इससे पहले निगम से मंगलवार को इसके बिक्री दाम 30 से 100 रुपये प्रति क्विंटल तक तेज किए थे।
सूत्रों के अनुसार सीसीआई चालू सीजन में न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर 80 लाख गांठ से ज्यादा की खरीद कर चुकी है तथा माना जा रहा है कि कुल खरीद एक करोड़ गांठ होने का अनुमान है। निगम के पास फसल सीजन 2024-25 की खरीदी हुई कॉटन का भी करीब 50 हजार गांठ का बकाया स्टॉक बचा हुआ है। निगम चालू फसल सीजन के साथ ही पिछले साल की खरीदी हुई कॉटन भी घरेलू बाजार में बेच रही है क्योंकि निगम के पास भारी, भरकम स्टॉक है इसलिए आगामी दिनों में घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतों में तेजी, मंदी सीसीआई के बिक्री भाव के अनुसार ही बनेगी।
स्पिनिंग मिलों की मांग कमजोर बनी रहने के कारण बुधवार को शाम के सत्र में गुजरात में कॉटन की कीमतों में नरमी आई, जबकि इस दौरान उत्तर भारत के राज्यों में इसके भाव में मिलाजुला रुख रहा।
गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव बुधवार को 150 रुपये नरम होकर 54,900 से 55,300 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो रह गए।
पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव 5,400 से 5,580 रुपये प्रति मन बोले गए। हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव 5,300 से 5,400 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 5,400 से 5,580 रुपये प्रति मन बोले गए।
लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 51,000 से 52,000 रुपये कैंडी बोले गए। देशभर की मंडियों में कपास की आवक 117,600 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई।
घरेलू वायदा कारोबार में कॉटन की कीमतों में तेजी का रुख रहा। एनसीडीईएक्स पर अप्रैल 26 महीने के वायदा अनुबंध में कपास के दाम 2.5 रुपये तेज होकर 1,595 रुपये प्रति 20 किलो हो गए। एमसीएक्स पर जनवरी 26 के वायदा अनुबंध में कॉटन के भाव 26,500 रुपये प्रति कैंडी पर स्थिर हो गए। इस दौरान आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतों में तेजी का रुख रहा।
व्यापारियों के अनुसार स्पिनिंग मिलों की मांग कमजोर होने से गुजरात में कॉटन की कीमतों में नरमी आई, हालांकि जिनिंग मिलों की बिक्री कम आने से उत्तर भारत के राज्यों में इसके भाव में मिलाजुला रुख रहा। व्यापारियों के अनुसार घरेलू बाजार में कॉटन की कुल उपलब्धता ज्यादा है। इसलिए अधिकांश मिलें जरुरत के हिसाब से ही कॉटन की खरीद कर रही है। उद्योग ने कॉटन के उत्पादन अनुमान में बढ़ोतरी की है, तथा चालू सीजन में कॉटन का आयात भी रिकॉर्ड होने का अनुमान है।

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