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24 जनवरी 2026

आंध्र प्रदेश में कपास किसानों पर संकट, सीसीआई द्वारा भुगतान में की जा रही देरी

नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश के कपास उगाने वाले किसानों पर संकट बढ़ रहा है, क्योंकि कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) ने किसानों से खरीदे गई कपास की पेमेंट रोक दी है। हालांकि निगम ने सप्ताह भर के अंदर क्लीयरेंस का भरोसा दिया था। किसानों का आरोप है कि पेमेंट में बेवजह देरी की जा रही है और उनके पास पैसों की तंगी है, जबकि सीसीआई के अधिकारी बेनिफिशियरी की बैंक डिटेल्स में दिक्कतों का हवाला दे रहे हैं।


सीसीआई से जुडे सूत्रों के अनुसार न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर खरीद सिस्टम के तहत कई किसानों के जनधन या पोस्ट-ऑफिस से जुड़े अकाउंट हैं, जो अक्सर इनएक्टिव होते हैं या बड़े ट्रांजैक्शन नहीं कर पाते। कई मामलों में, पासबुक और ई-क्रॉप रिकॉर्ड में महिलाओं को किसान बताया गया है, लेकिन उनसे जुड़े अकाउंट या तो डॉरमेंट रहते हैं या बड़े ट्रांजैक्शन लेने के लिए तैयार नहीं होते हैं।

अक्सर कपास के हर किसान की 2 रुपये लाख से ज्यादा की पेमेंट होती है, तो सीसीआई को गलत क्रेडिट से बचने के लिए सावधानी बरतनी पड़ रही है। अधिकारियों ने कहा कि गलत डिपॉजिट या फेल हुए ट्रांसफर से लंबी एडमिनिस्ट्रेटिव और कानूनी दिक्कतें आ सकती हैं। सीसीआई के एक अधिकारी के अनुसार अगर पेमेंट गलत तरीके से क्रेडिट हो जाती हैं या इनएक्टिव अकाउंट की वजह से अटक जाती हैं, तो उन्हें ठीक करना एक लंबा प्रोसेस बन जाता है। इसलिए, हम हर मामले को अच्छी तरह से वेरीफाई कर रहे हैं।

हालांकि, इस सफाई से किसानों की चिंता कम करने में कोई खास मदद नहीं मिली है। किसानों का तर्क है कि उन्होंने अच्छी नीयत से कपास दिया था और अंदरूनी बैंकिंग या डॉक्यूमेंटेशन की दिक्कतों की कीमत उन्हें नहीं चुकानी चाहिए। कई किसानों को गंभीर लिक्विडिटी की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि लोन चुकाना बाकी है और अगले फसल सीजन की तैयारी चल रही है। इस देरी की वजह से कई परिवारों को प्राइवेट पार्टियों से उधार पर निर्भर रहना पड़ा और जरूरी खर्चों में कटौती करनी पड़ रही है। किसान यूनियनों ने मांग की है कि राज्य और केंद्र सरकार इस मुद्दे को जल्दी से सुलझाने के लिए कदम उठाएं। उन्होंने बताया कि पासबुक और ई-क्रॉप रिकॉर्ड में महिलाओं के नाम दिखना महिला किसानों को पहचानने के लिए पहले के पॉलिसी उपायों का हिस्सा था, और उसी हिसाब से पेमेंट को संभालने के लिए सही सिस्टम बनाए जाने चाहिए थे। विपक्ष ने भी इस मुद्दे को संभालने के तरीके की आलोचना की, यह कहते हुए कि खरीद एजेंसियों, बैंकों और रेवेन्यू अधिकारियों के बीच तालमेल की कमी से किसानों को नुकसान हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि लगातार देरी से एमएसपी खरीद में भरोसा कम हो सकता है और किसान प्राइवेट व्यापारियों के पास वापस जा सकते हैं जो कम कीमत पर कपास खरीद रहे हैं।

सीसीआई अधिकारियों ने कहा कि अकाउंट वेरीफाई करने और पेमेंट में तेजी लाने के लिए बैंकों, पोस्ट ऑफिस और कृषि विभागों के साथ कोऑर्डिनेट करने की कोशिशें चल रही हैं। हालांकि, किसानों का कहना है कि अगर बकाया तुरंत जारी नहीं किया गया, तो देरी से राज्य में कपास की खेती पर लंबे समय तक असर पड़ सकता है।

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