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31 जनवरी 2026

महाराष्ट्र में चीनी का उत्पादन 37 फीसदी बढ़कर 76 लाख टन पर पहुंचा

नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2025 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन (अक्टूबर-25 से सितंबर-26) में 29 जनवरी तक महाराष्ट्र में चीनी का उत्पादन 36.72 फीसदी बढ़कर 76.03 लाख टन का हो चुका है। पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में राज्य में 55.61 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था। राज्य का पेराई सीजन अब अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है।


शुगर कमिश्नर के अनुसार 29 जनवरी तक राज्य में 826.47 लाख टन गन्ने की पेराई हो चुकी है और 76.03 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। राज्य की औसत चीनी रिकवरी 9.2 फीसदी की बैठ रही है। राज्य में 29 जनवरी तक कुल 199 फैक्ट्रियों (98 कोऑपरेटिव और 101 प्राइवेट) ने पेराई चल रही है।

पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में राज्य में भी 199 चीनी फैक्ट्रियों (98 को ऑपरेटिव और 101 प्राइवेट) ने पेराई चल रही थी। पिछले साल की समान अवधि में राज्य में 616.2 लाख टन गन्ने की पेराई की थी और 55.61 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। औसत चीनी की रिकवरी दर 9.03 फीसदी की थी।

कोल्हापुर डिवीजन ने 178.7 लाख टन गन्ने की पेराई की है और 19.27 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। कोल्हापुर डिवीजन में रिकवरी की दर 10.79 फीसदी की है। डिवीजन में 37 फैक्ट्रियां चल रही हैं, जिसमें 25 सहकारी और 12 प्राइवेट हैं।

इसी तरह से पुणे डिवीजन में कुल 30 फैक्ट्रियां चल रही हैं, जिसमें 17 सहकारी और 13 प्राइवेट मिलें है। उन्होंने अब तक 187 लाख टन गन्ने की पेराई कर 17.73 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। पुणे डिवीजन की रिकवरी दर 9.48 फीसदी की है।

सोलापुर डिवीजन में कुल 47 फैक्ट्रियां चल रही हैं, जिसमें 17 सहकारी और 30 प्राइवेट हैं। अब तक डिवीजन में 177.97 लाख टन गन्ने की पेराई हो चुकी है और 14.79 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। चीनी की रिकवरी दर 8.31 फीसदी की है।

अहमदनगर (अहिल्यानगर) डिवीजन में कुल 26 फैक्ट्रियां, 15 को ऑपरेटिव और 11 प्राइवेट में पेराई चल रही हैं। इन सभी फैक्ट्रियों ने अब तक 102 लाख टन गन्ने की पेराई की है और 8.99 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। अहमदनगर डिवीजन में चीनी की रिकवरी दर 8.74 फीसदी है। छत्रपति संभाजीनगर डिवीजन में कुल 22 चीनी मिलों (13 कोऑपरेटिव और 9 प्राइवेट) में पेराई चल रही है तथा उन्होंने 80.58 लाख टन गन्ने की पेराई कर 6.31 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया है। चीनी की रिकवरी की दर 7.83 फीसदी है।

नांदेड़ डिवीजन में कुल 30 फैक्ट्रियां (10 कोऑपरेटिव और 20 प्राइवेट) चल रही हैं और उन्होंने 89 लाख टन गन्ने की पेराई कर 8.05 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। इस डिवीजन में चीनी की रिकवरी दर 9.06 फीसदी है। अमरावती डिवीजन में एक को ऑपरेटिव और 3 प्राइवेट फैक्ट्रियां चल रही हैं, और उन्होंने 1.33 लाख टन गन्ने की पेराई की है।

आर्थिक सर्वे में कृषि सुधारों की वकालत, मृदा स्वास्थ्य सुधार हेतु यूरिया के भाव बढ़ाने का सुझाव

नई दिल्ली। संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 में कृषि सुधारों की वकालत की गई है। सर्वे में कहा गया है कि उर्वरक असंतुलन को कम करने और मृदा स्वास्थ्य सुधारने के लिए यूरिया की कीमतों में बढ़ोतरी तथा किसानों को वित्तीय प्रोत्साहन के माध्यम से संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देना जरूरी है।


भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि की अहम भूमिका को रेखांकित करते हुए सर्वे में कहा गया है कि कृषि क्षेत्र ने अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान की है, लेकिन इसकी वृद्धि दर अभी अपेक्षाकृत कम है। कृषि एवं सहयोगी क्षेत्रों में जो वृद्धि दर्ज की गई है, उसका बड़ा हिस्सा गैर-कृषि उत्पादन से आता है। भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में विविधता बढ़ रही है और गैर-कृषि क्षेत्र आमदनी में अहम भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि स्किल गैप और प्रोडक्टिविटी में कमी जैसी चुनौतियां हैं।  

सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि कृषि क्षेत्र में पूंजी निवेश काफी कम है और इसमें बढ़ोतरी आवश्यक है। इसके साथ ही खाद्य सुरक्षा कानून के तहत राशन प्रणाली में फूड वाउचर शुरू करने की सिफारिश भी की गई है।

उर्वरकों के असंतुलित उपयोग को सर्वेक्षण में गंभीर चिंता का विषय बताते हुए यूरिया की कीमतों में बढ़ोतरी की वकालत की है। साथ ही इनपुट सब्सिडी के बजाय प्रति एकड़ इनकम सपोर्ट देने का सुझाव दिया गया है। मृदा स्वास्थ्य और संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन पर विशेष जोर दिया गया है।

सर्वेक्षण में उर्वरकों के असंतुलित उपयोग को चिंताजनक बताया गया है। नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश (एनपीके) का आदर्श अनुपात 4:2:1 माना जाता है, जबकि वर्ष 2023–24 में यह बिगड़कर 10.9:4.1:1 हो गया। वर्ष 2009–10 में यह अनुपात 4:3.2:1 था। मृदा स्वास्थ्य के लिए इस असंतुलन को दूर करना जरूरी है। किसानों को दी जाने वाली सहायता के तरीके में भी सुधार करना होगा।

पीओएस मशीनों पर आधार आधारित प्रमाणीकरण लागू होने के बाद इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम (आईएफएमएस) के माध्यम से सरकार के पास विस्तृत डेटा उपलब्ध है। सर्वे में कहा गया है कि इसी डेटा का उपयोग कर सुधार लागू किए जाने चाहिए।

कृषि फसलों की उत्पादकता उस अनुपात में नहीं बढ़ रही है, जितनी किसानों की आय बढ़ाने के लिए आवश्यक है। इसलिए इस क्षेत्र में व्यापक सुधार की जरूरत बताई गई है। सर्वेक्षण में जोर दिया गया है कि ग्रामीण आय बढ़ाने के लिए प्राइस सपोर्ट की बजाय कृषि उत्पादकता को बढ़ाना होगा। साथ ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर अत्यधिक निर्भरता को लेकर भी आगाह किया है।

सर्वे में कहा गया कि मैन्युफैक्चरिंग पर आधारित एक्सपोर्ट ग्रोथ, ग्रामीण इलाकों में लंबे समय तक खुशहाली के लिए ज़रूरी है, क्योंकि सिर्फ़ खेती भारत के बढ़ते वर्कफोर्स को नहीं संभाल सकती।

सर्वेक्षण में यह स्वीकार किया गया है कि देश के बढ़ते कार्यबल को सिर्फ खेती से रोजगार नहीं मिल सकता है, ग्रामीण क्षेत्रों में समृद्धि के लिए मैन्युफैक्चरिंग पर आधारित एक्सपोर्ट ग्रोथ भी आवश्यक है। हाल में हुए मुफ्त व्यापार समझौतों से श्रम-आधारित एग्रो और फूड प्रोसेसिंग आधारित निर्यात की मांग बढ़ा सकते हैं, बशर्ते भारत वैश्विक प्रतिस्पर्धा में खरा उतरने वाले उत्पाद तैयार करे।

सर्वेक्षण में जलवायु परिवर्तन को कृषि क्षेत्र के लिए एक बड़ी चुनौती माना गया है। लगातार बेहतर मानसून से कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई है, जिससे खाद्य सुरक्षा मजबूत हुई है और महंगाई दर को नियंत्रित रखने में मदद मिली है। देश की खाद्य सुरक्षा के लिए जलवायु अनुकूल किस्मों के विकास, सटीक खेती और जल उपयोग में दक्षता पर जोर दिया गया है।  

कृषि के विकास और किसानों की आय सुनिश्चित करने के लिए सरकार की लगभग दो दर्जन योजनाओं का उल्लेख सर्वे में किया गया है। इसमें बताया गया है कि कृषि एवं सहयोगी क्षेत्रों की औसत वार्षिक वृद्धि दर (एएजीआर) वैश्विक औसत 2.9 फीसदी से अधिक रही है और पिछले चार वर्षों में यह 4.4 फीसदी तक पहुंची है।

चालू वर्ष में कृषि एवं सहयोगी क्षेत्रों की वृद्धि दर मुख्य रूप से गैर-फसली क्षेत्रों की अधिक वृद्धि के कारण रही है। फसल उत्पादकता के मामले में देश में क्षेत्रीय असमानता बनी हुई है, जिसे प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के माध्यम से दूर करने का प्रयास किया जाएगा।

कृषि में पूंजी निवेश की कमी को आंकड़े भी दर्शाते हैं। वर्तमान में देश के कुल सकल फसल क्षेत्र का केवल 55.8 फीसदी हिस्सा ही सिंचित है। इसमें भी तिलहन और दालों का क्षेत्रफल कम है, जबकि चावल, गेहूं और गन्ना जैसी फसलों में सिंचाई सुविधाएं अपेक्षाकृत अधिक हैं।

सर्वे के अनुसार चालू वित्त वर्ष में सरकार के 27.5 लाख करोड़ रुपये के कृषि ऋण लक्ष्य के मुकाबले ग्राउंड लेवल क्रेडिट डिस्बर्समेंट 28.69 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसमें 15.39 लाख करोड़ रुपये अल्पकालिक ऋण (फसली ऋण) और 12.77 लाख करोड़ रुपये टर्म लोन शामिल हैं।

देश में वर्ष 1950 में कृषि ऋण का 90 फीसदी हिस्सा गैर-संस्थागत स्रोतों यानी साहूकारों से आता था, जो 2021–22 में घटकर 23.4 फीसदी रह गया है। हालांकि मौजूदा कृषि अर्थव्यवस्था के आकार को देखते हुए यह अनुपात अब भी चिंता का विषय है। इसका अर्थ है कि बड़ी संख्या में किसान आज भी साहूकारों से ऋण ले रहे हैं, जिन पर अक्सर 30 से 50 फीसदी तक ब्याज देना पड़ता है।

वैश्विक माहौल में उथल-पुथल के बीच अर्थव्यवस्था की स्थिरता के लिए कृषि पर दारोमदार रहेगा। हालांकि, अनिश्चित माहौल में खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण आय और कृषि को वैश्विक झटकों और जलवायु जोखिम से बचाए रखना चुनौतीपूर्ण है। टिकाऊ ग्रामीण ग्रोथ के लिए सरकारी सहायता और खरीद की बजाय उत्पादकता, विविधता और फूड सिस्टम को टिकाऊ बनाने की तरफ जाना होगा। इसके लिए केंद्र, राज्यों और निजी क्षेत्र को मिलकर काम करना होगा।

सीसीआई ने 1,700 गांठ कॉटन की बिक्री की, बिनौले के भाव लगातार दूसरे दिन बढ़ाए

नई दिल्ली। कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई ने बुधवार को घरेलू बाजार में ई नीलामी के माध्यम फसल सीजन 2025-26 में खरीदी हुई 1,700 गांठ, एक गांठ 170 किलो कॉटन की बिक्री घरेलू मिलों को की। इस दौरान निगम ने बिनौले की बिक्री कीमतों में 20 से 100 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी भी की।


सूत्रों के अनुसार सीसीआई ने बुधवार को लगातार दूसरे दिन बिनौले की बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी की। इससे पहले निगम से मंगलवार को इसके बिक्री दाम 30 से 100 रुपये प्रति क्विंटल तक तेज किए थे।

सूत्रों के अनुसार सीसीआई चालू सीजन में न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर 80 लाख गांठ से ज्यादा की खरीद कर चुकी है तथा माना जा रहा है कि कुल खरीद एक करोड़ गांठ होने का अनुमान है। निगम के पास फसल सीजन 2024-25 की खरीदी हुई कॉटन का भी करीब 50 हजार गांठ का बकाया स्टॉक बचा हुआ है। निगम चालू फसल सीजन के साथ ही पिछले साल की खरीदी हुई कॉटन भी घरेलू बाजार में बेच रही है क्योंकि निगम के पास भारी, भरकम स्टॉक है इसलिए आगामी दिनों में घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतों में तेजी, मंदी सीसीआई के बिक्री भाव के अनुसार ही बनेगी।

स्पिनिंग मिलों की मांग कमजोर बनी रहने के कारण बुधवार को शाम के सत्र में गुजरात में कॉटन की कीमतों में नरमी आई, जबकि इस दौरान उत्तर भारत के राज्यों में इसके भाव में मिलाजुला रुख रहा।

गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव बुधवार को 150 रुपये नरम होकर 54,900 से 55,300 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो रह गए।

पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव 5,400 से 5,580 रुपये प्रति मन बोले गए। हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव 5,300 से 5,400 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 5,400 से 5,580 रुपये प्रति मन बोले गए।
लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 51,000 से 52,000 रुपये कैंडी बोले गए। देशभर की मंडियों में कपास की आवक 117,600 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई।

घरेलू वायदा कारोबार में कॉटन की कीमतों में तेजी का रुख रहा। एनसीडीईएक्स पर अप्रैल 26 महीने के वायदा अनुबंध में कपास के दाम 2.5 रुपये तेज होकर 1,595 रुपये प्रति 20 किलो हो गए। एमसीएक्स पर जनवरी 26 के वायदा अनुबंध में कॉटन के भाव 26,500 रुपये प्रति कैंडी पर स्थिर हो गए। इस दौरान आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतों में तेजी का रुख रहा।

व्यापारियों के अनुसार स्पिनिंग मिलों की मांग कमजोर होने से गुजरात में कॉटन की कीमतों में नरमी आई, हालांकि जिनिंग मिलों की बिक्री कम आने से उत्तर भारत के राज्यों में इसके भाव में मिलाजुला रुख रहा। व्यापारियों के अनुसार घरेलू बाजार में कॉटन की कुल उपलब्धता ज्यादा है। इसलिए अधिकांश मिलें जरुरत के हिसाब से ही कॉटन की खरीद कर रही है। उद्योग ने कॉटन के उत्पादन अनुमान में बढ़ोतरी की है, तथा चालू सीजन में कॉटन का आयात भी रिकॉर्ड होने का अनुमान है। 

रबी में फसलों की बुआई 2.84 फीसदी बढ़कर 660 लाख हेक्टेयर के पार - कृषि मंत्रालय

नई दिल्ली, 27 जनवरी। चालू रबी सीजन में फसलों की बुआई 2.84 फीसदी बढ़कर 660.48 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई केवल 642.24 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। गेहूं के साथ ही दलहन एवं तिलहनी फसलों की बुआई में बढ़ोतरी हुई है।  


कृषि मंत्रालय के अनुसार 23 जनवरी तक रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की बुआई बढ़कर 334.17 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक कुल 328.04 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

चालू रबी में दलहनी फसलों की बुआई बढ़कर 137.55 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 133.94 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई चालू रबी सीजन में बढ़कर 95.88 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इस समय तक 91.22 लाख हेक्टेयर में ही इसकी बुआई हुई थी।

अन्य रबी दलहन में मसूर की बुआई बढ़कर 18.12 लाख हेक्टेयर में तथा मटर की 7.92 लाख हेक्टेयर में हुई है। पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 17.66 लाख हेक्टेयर में और 8.27 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। उड़द की बुआई चालू रबी में घटकर 4.81 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि में 5.25 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

चालू रबी सीजन में तिलहनी फसलों की बुआई देशभर में बढ़कर 97.03 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 93.58 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। तिलहनी फसलों में सरसों की बुआई बढ़कर 89.36 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 86.57 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। इसी तरह से मूंगफली की बुआई बढ़कर 3.52 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक 3.37 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। अलसी की बुआई भी चालू रबी में बढ़कर 1.99 लाख हेक्टेयर हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 1.76 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

मोटे अनाजों की बुवाई चालू रबी में बढ़कर 60.70 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 57.45 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। मोटे अनाजों में ज्वार की 23.01 लाख हेक्टेयर और मक्का की 29.05 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 24.11 और 26.21 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

जौ की बुआई चालू रबी सीजन में बढ़कर 7.37 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 6.08 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

चालू रबी सीजन में राज्य में धान की रोपाई बढ़कर 31.03 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 29.23 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

सीसीआई ने 64,500 गांठ कॉटन बेची, चालू सीजन में खरीद 80 लाख गांठ के पार

दिल्ली। कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई ने 19 जनवरी से 23 जनवरी के दौरान 364,500 गांठ, एक गांठ 170 किलो कॉटन की बिक्री की। इस दौरान निगम ने फसल सीजन 2025-26 के दौरान खरीदी हुई 353,900 गांठ और फसल सीजन 2024-25 में खरीदी हुई 10,600 गांठ कॉटन बेची।


सीसीआई ने इससे पहले सप्ताह 12 जनवरी से 16 जनवरी के दौरान 17,500 गांठ, फसल सीजन 2024-25 के दौरान खरीदी हुई कॉटन की बिक्री की थी।

पहली अक्टूबर 2025 से शुरू हुए चालू फसल सीजन में सीसीआई 80 लाख गांठ से ज्यादा कॉटन की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कर चुकी है। माना जा रहा है कि निगम की कुल खरीद एक करोड़ पहुंचने का अनुमान है। निगम के पास पिछले साल की खरीदी हुई कॉटन का भी करीब एक लाख गांठ का स्टॉक बचा हुआ है। 

स्पिनिंग मिलों की मांग बनी रहने के कारण शनिवार को शाम के सत्र में गुजरात में कॉटन की कीमतों में नरमी दर्ज की गई, जबकि इस दौरान उत्तर भारत के राज्यों में इसके भाव में स्थिर हो गए।

गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव शनिवार को 100 रुपये नरम होकर 55,200 से 55,500 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो रह गए।

पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव 5,420 से 5,570 रुपये प्रति मन बोले गए। हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव 5,350 से 5,450 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 5,420 से 5,570 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 51,600 से 52,600 रुपये कैंडी बोले गए।

देशभर की मंडियों में कपास की आवक 109,000 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई।

व्यापारियों के अनुसार हाल ही में विश्व बाजार में कॉटन की कीमतों में नरमी आई है, अत: घरेलू बाजार में भी स्पिनिंग मिलों की खरीद पहले की तुलना में कम हुई है। विश्व स्तर पर भू राजनीतिक गतिरोध लगातार बढ़ रहा है। वैसे भी चालू सीजन में घरेलू बाजार में कच्चे माल की कुल उपलब्धता ज्यादा है, जबकि सीसीआई पिछले साल की खरीदी हुई कॉटन के साथ ही चालू सीजन में खरीदी हुई की बिक्री भी कर रही है। इसलिए स्पिनिंग मिलें बड़ी खरीद करके जोखिम नहीं लेना चाहती। इसलिए कॉटन की कीमतों में घरेलू बाजार में अभी सीमित तेजी, मंदी बनी रह सकती है।

24 जनवरी 2026

चालू पेराई सीजन में महाराष्ट्र में चीनी का उत्पादन 41 फीसदी बढ़कर 69.73 लाख टन के पार

नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2025 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन (अक्टूबर-25 से सितंबर-26) में 22 जनवरी तक महाराष्ट्र में चीनी का उत्पादन 40.92 फीसदी बढ़कर 69.73 लाख टन का हो चुका है। पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में राज्य में 49.48 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था।

 
शुगर कमिश्नर के अनुसार 22 जनवरी तक राज्य में 766.28 लाख टन गन्ने की पेराई हो चुकी है और 69.73 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। राज्य की औसत चीनी रिकवरी 9.1 फीसदी की बैठ रही है। राज्य में 22 जनवरी तक कुल 199 फैक्ट्रियों (98 कोऑपरेटिव और 101 प्राइवेट) ने पेराई शुरू की है।

पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में राज्य में भी इतनी ही चीनी फैक्ट्रियों (98 को ऑपरेटिव और 101 प्राइवेट) ने पेराई आरंभ कर दी थी। पिछले साल की समान अवधि में राज्य में 554.92 लाख टन गन्ने की पेराई की थी और 49.48 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। औसत चीनी की रिकवरी दर 8.92 फीसदी की थी।

कोल्हापुर डिवीजन ने 165.93 लाख टन गन्ने की पेराई की है और 17.72 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। कोल्हापुर डिवीजन में रिकवरी की दर 10.68 फीसदी की है। डिवीजन में 37 फैक्ट्रियां चल रही हैं, जिसमें 25 सहकारी और 12 प्राइवेट हैं।

इसी तरह से पुणे डिवीजन में कुल 30 फैक्ट्रियां चल रही हैं, जिसमें 17 सहकारी और 13 प्राइवेट मिलें है। उन्होंने अब तक 176.92 लाख टन गन्ने की पेराई कर 16.58 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। पुणे डिवीजन की रिकवरी दर 9.37 फीसदी की है।

सोलापुर डिवीजन में कुल 47 फैक्ट्रियां चल रही हैं, जिसमें 17 सहकारी और 30 प्राइवेट हैं। अब तक डिवीजन में 164.77 लाख टन गन्ने की पेराई हो चुकी है और 13.53 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। चीनी की रिकवरी दर 8.22 फीसदी की है।

अहमदनगर (अहिल्यानगर) डिवीजन में कुल 26 फैक्ट्रियां, 15 को ऑपरेटिव और 11 प्राइवेट ने पेराई शुरू कर दी हैं। इन सभी फैक्ट्रियों ने अब तक 94.35 लाख टन गन्ने की पेराई की है और 8.13 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। अहमदनगर डिवीजन में चीनी की रिकवरी दर 8.62 फीसदी है। छत्रपति संभाजीनगर डिवीजन में कुल 22 चीनी मिलों (13 कोऑपरेटिव और 9 प्राइवेट) ने पेराई शुरू कर दी है तथा उन्होंने 74.1 लाख टन गन्ने की पेराई कर 5.75 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। चीनी की रिकवरी की दर 7.77 फीसदी है।

नांदेड़ डिवीजन में कुल 30 फैक्ट्रियां (10 कोऑपरेटिव और 20 प्राइवेट) चल रही हैं और उन्होंने 80.84 लाख टन गन्ने की पेराई कर 7.22 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। इस डिवीजन में चीनी की रिकवरी दर 8.93 फीसदी है। अमरावती डिवीजन में एक को ऑपरेटिव और 3 प्राइवेट फैक्ट्रियां चल रही हैं, और उन्होंने 8.21 लाख टन गन्ने की पेराई की है तथा 7.29 लाख क्विंटल चीनी बनाई है। इस डिवीजन में चीनी की रिकवरी दर 8.88 फीसदी है।

आंध्र प्रदेश में कपास किसानों पर संकट, सीसीआई द्वारा भुगतान में की जा रही देरी

नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश के कपास उगाने वाले किसानों पर संकट बढ़ रहा है, क्योंकि कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) ने किसानों से खरीदे गई कपास की पेमेंट रोक दी है। हालांकि निगम ने सप्ताह भर के अंदर क्लीयरेंस का भरोसा दिया था। किसानों का आरोप है कि पेमेंट में बेवजह देरी की जा रही है और उनके पास पैसों की तंगी है, जबकि सीसीआई के अधिकारी बेनिफिशियरी की बैंक डिटेल्स में दिक्कतों का हवाला दे रहे हैं।


सीसीआई से जुडे सूत्रों के अनुसार न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर खरीद सिस्टम के तहत कई किसानों के जनधन या पोस्ट-ऑफिस से जुड़े अकाउंट हैं, जो अक्सर इनएक्टिव होते हैं या बड़े ट्रांजैक्शन नहीं कर पाते। कई मामलों में, पासबुक और ई-क्रॉप रिकॉर्ड में महिलाओं को किसान बताया गया है, लेकिन उनसे जुड़े अकाउंट या तो डॉरमेंट रहते हैं या बड़े ट्रांजैक्शन लेने के लिए तैयार नहीं होते हैं।

अक्सर कपास के हर किसान की 2 रुपये लाख से ज्यादा की पेमेंट होती है, तो सीसीआई को गलत क्रेडिट से बचने के लिए सावधानी बरतनी पड़ रही है। अधिकारियों ने कहा कि गलत डिपॉजिट या फेल हुए ट्रांसफर से लंबी एडमिनिस्ट्रेटिव और कानूनी दिक्कतें आ सकती हैं। सीसीआई के एक अधिकारी के अनुसार अगर पेमेंट गलत तरीके से क्रेडिट हो जाती हैं या इनएक्टिव अकाउंट की वजह से अटक जाती हैं, तो उन्हें ठीक करना एक लंबा प्रोसेस बन जाता है। इसलिए, हम हर मामले को अच्छी तरह से वेरीफाई कर रहे हैं।

हालांकि, इस सफाई से किसानों की चिंता कम करने में कोई खास मदद नहीं मिली है। किसानों का तर्क है कि उन्होंने अच्छी नीयत से कपास दिया था और अंदरूनी बैंकिंग या डॉक्यूमेंटेशन की दिक्कतों की कीमत उन्हें नहीं चुकानी चाहिए। कई किसानों को गंभीर लिक्विडिटी की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि लोन चुकाना बाकी है और अगले फसल सीजन की तैयारी चल रही है। इस देरी की वजह से कई परिवारों को प्राइवेट पार्टियों से उधार पर निर्भर रहना पड़ा और जरूरी खर्चों में कटौती करनी पड़ रही है। किसान यूनियनों ने मांग की है कि राज्य और केंद्र सरकार इस मुद्दे को जल्दी से सुलझाने के लिए कदम उठाएं। उन्होंने बताया कि पासबुक और ई-क्रॉप रिकॉर्ड में महिलाओं के नाम दिखना महिला किसानों को पहचानने के लिए पहले के पॉलिसी उपायों का हिस्सा था, और उसी हिसाब से पेमेंट को संभालने के लिए सही सिस्टम बनाए जाने चाहिए थे। विपक्ष ने भी इस मुद्दे को संभालने के तरीके की आलोचना की, यह कहते हुए कि खरीद एजेंसियों, बैंकों और रेवेन्यू अधिकारियों के बीच तालमेल की कमी से किसानों को नुकसान हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि लगातार देरी से एमएसपी खरीद में भरोसा कम हो सकता है और किसान प्राइवेट व्यापारियों के पास वापस जा सकते हैं जो कम कीमत पर कपास खरीद रहे हैं।

सीसीआई अधिकारियों ने कहा कि अकाउंट वेरीफाई करने और पेमेंट में तेजी लाने के लिए बैंकों, पोस्ट ऑफिस और कृषि विभागों के साथ कोऑर्डिनेट करने की कोशिशें चल रही हैं। हालांकि, किसानों का कहना है कि अगर बकाया तुरंत जारी नहीं किया गया, तो देरी से राज्य में कपास की खेती पर लंबे समय तक असर पड़ सकता है।

चालू रबी सीजन में फसलों की बुआई बढ़कर 651 लाख हेक्टेयर के पार - कृषि मंत्रालय

नई दिल्ली, 20 जनवरी। चालू रबी सीजन में फसलों की बुआई 3.30 फीसदी बढ़कर 652.33 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई केवल 631.45 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। गेहूं के साथ ही दलहन एवं तिलहनी फसलों की बुआई में बढ़ोतरी हुई है।  


कृषि मंत्रालय के अनुसार 16 जनवरी तक रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की बुआई बढ़कर 334.17 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक कुल 328.04 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

चालू रबी में दलहनी फसलों की बुआई बढ़कर 137 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 133.18 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई चालू रबी सीजन में बढ़कर 95.88 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इस समय तक 91.22 लाख हेक्टेयर में ही इसकी बुआई हुई थी।

अन्य रबी दलहन में मसूर की बुआई बढ़कर 18.12 लाख हेक्टेयर में तथा मटर की 7.92 लाख हेक्टेयर में हुई है। पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 17.66 लाख हेक्टेयर में और 8.27 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। उड़द की बुआई चालू रबी में घटकर 4.58 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि में 4.88 लाख हेक्टेयर की तुलना में हो चुकी थी है।

चालू रबी सीजन में तिलहनी फसलों की बुआई देशभर में बढ़कर 96.86 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 93.33 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। तिलहनी फसलों में सरसों की बुआई बढ़कर 89.36 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 86.57 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। इसी तरह से मूंगफली की बुआई बढ़कर 3.52 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक 3.37 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। अलसी की बुआई भी चालू रबी में बढ़कर 1.99 लाख हेक्टेयर हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 1.76 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

मोटे अनाजों की बुवाई चालू रबी में बढ़कर 58.72 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 55.93 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। मोटे अनाजों में ज्वार की 22.54 लाख हेक्टेयर और मक्का की 27.55 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 23.85 और 25.05 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

जौ की बुआई चालू रबी सीजन में बढ़कर 7.37 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 6.08 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

चालू रबी सीजन में राज्य में धान की रोपाई बढ़कर 25.58 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 20.98 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

दिसंबर के दौरान डीओसी का निर्यात 40 फीसदी घटा - एसईए

नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2025-26 के दिसंबर में डीओसी के निर्यात में 40 फीसदी की गिरावट आकर कुल निर्यात 240,900 टन का ही हुआ है, जबकि पिछले साल दिसंबर में इनका निर्यात 398,7361 टन का ही हुआ था।


सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एसईए के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2025-26 के पहले 9 महीनें अप्रैल से दिसंबर के दौरान डीओसी के निर्यात में 5 फीसदी की कमी आकर कुल निर्यात 2,975,739 टन का ही हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इनका निर्यात 3,150,678 टन का हुआ था।

घरेलू बाजार में सरसों की क्रशिंग में हाल ही में कमी आई है, तथा नई फसल की आवक फरवरी एवं मार्च में होगी। इसलिए नई फसल की आवक से पहले इसके निर्यात में, खासकर के चीन द्वारा किए जा रहे आयात में कमी आयेगी। इस समय भारतीय डीओसी की कीमत 250 एफओबी अमेरिकी डॉलर बोली जा रही हैं जबकि 14 जनवरी, 2026 को सरसों डीओसी हैम्बर्ग एक्स-मिल भाव 247 डॉलर डॉलर प्रति टन थी। अप्रैल से दिसंबर, 2025 के दौरान, देश से चीन को 685,049 टन सरसों डीओसी का निर्यात किया है, जबकि वित्त वर्ष की इसी अवधि के दौरान केवल 26,327 टन (कुल 1,433,635 टन सरसों डीओसी का 48 फीसदी) का निर्यात किया गया था।

पिछले दो महीनों (नवंबर एवं दिसंबर’25) में सोया डीओसी का निर्यात 228,376 टन का ही हुआ है, जबकि पिछले साल की समान अवधि (नवंबर एवं दिसंबर’24) में इसका निर्यात 461,894 टन का हुआ था। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि यूरोप से लगातार सपोर्ट मिलने के बावजूद विश्व बाजार में इसकी कीमतों में मंदा आया है। पिछले दो सालों से, सोया डीओसी बनाने वालों को घरेलू बाजार में फीड बनाने वालों से कम डिमांड का सामना करना पड़ रहा है, जो सस्ते डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स विद सॉल्युबल (डीडीजीएस) को पसंद कर रहे हैं, जो मक्का और चावल जैसे अनाज से इथेनॉल बनाने के बाद एक बचा हुआ उत्पाद है।

भारतीय बंदरगाह पर दिसंबर में सोया डीओसी का भाव तेज होकर 396 डॉलर प्रति टन हो गया, जबकि नवंबर में इसका दाम 393 डॉलर प्रति टन था। इस दौरान सरसों डीओसी का मूल्य दिसंबर में भारतीय बंदरगाह पर 217 डॉलर प्रति टन रहा, जबकि नवंबर में भी इसका भाव 217 डॉलर प्रति टन ही था। इस दौरान कैस्टर डीओसी का दाम नवंबर के 100 डॉलर प्रति टन से कमजोर होकर दिसंबर में 97 डॉलर प्रति टन रह गया।

मध्य जनवरी तक चीनी का उत्पादन 22 फीसदी बढ़कर 159 लाख टन के पार - इस्मा

नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2025 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन (अक्टूबर-25 से सितंबर-26) में 15 जनवरी तक देशभर में चीनी का उत्पादन 22 फीसदी बढ़कर 159.09 लाख टन का हो चुका है जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में 130.44 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था।


इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (इस्मा) के आंकड़ों के अनुसार चालू सीजन में 518 मिलों में पेराई चल रही हैं, जबकि पिछले सीजन में की समान अवधि में केवल 500 मिलें ही पेराई चल रही थी।

चालू पेराई सीजन में उत्तर प्रदेश में 15 जनवरी 2026 तक 46.05 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है, जो कि पिछले पेराई सीजन की तुलना में 3.23 लाख टन (लगभग 8 फीसदी) ज्यादा है। महाराष्ट्र में चालू सीजन में 64.50 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है, जो पिछले सीजन की इसी अवधि की तुलना में लगभग 51 फीसदी अधिक है। राज्य में वर्तमान में 204 चीनी मिल चल रही हैं, जबकि पिछले साल इस समय केवल 196 मिलें चल रही थी।

कर्नाटक में चालू पेराई सीजन में 31.5 लाख टन चीनी का उत्पादन मध्य जनवरी तक हो चुका है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 27.45 लाख टन की तुलना में ज्यादा है। इसी तरह से गुजरात में चालू पेराई सीजन में 15 जनवरी तक 3.86 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 3.73 लाख टन की तुलना में ज्यादा है। तमिलनाडु में चालू पेराई सीजन में 1.85 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है, जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में केवल 1.30 लाख टन चीनी का उत्पादन ही हुआ था।

इस्मा के अनुसार अन्य राज्यों में चालू पेराई सीजन में 11.78 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है, जोकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि के 12.43 लाख टन की तुलना में कम है।

इस्मा के अनुसार, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा सरकार द्वारा गन्ने की कीमतों में वृद्धि के बाद, बिहार सरकार ने भी हाल ही में गन्ने की कीमत में 15 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि करके भाव 380 रुपये प्रति क्विंटल (जल्दी पकने वाली किस्म के लिए) कर दिया है। इस समय महाराष्ट्र और कर्नाटक में एक्स-मिल चीनी की कीमतें लगभग 3,550 रुपये प्रति क्विंटल हैं, जो चीनी के मौजूदा की उत्पादन लागत की तुलना में काफी कम है।

जैसे, जैसे गन्ने का पेराई सीजन आगे बढ़ रहा है और चीनी का स्टॉक बढ़ता जा रहा है, इससे संकेत मिल रहे हैं कि गन्ने के पेमेंट का बकाया भुगतान भी मिलों पर बढ़ना शुरू हो गया है। अत: इस्मा ने कहा है कि बढ़ती उत्पादन लागत के हिसाब से चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य, एमएसपी में बदलाव करना जरूरी है।

सीसीआई ने चालू सप्ताह में केवल 17,500 गांठ कॉटन की बिक्री की

नई दिल्ली। कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई ने 12 जनवरी से 16 जनवरी के दौरान 17,500 गांठ, एक गांठ 170 किलो फसल सीजन 2024-25 के दौरान खरीदी हुई कॉटन की बिक्री की। सीसीआई ने 5 जनवरी से 9 जनवरी के दौरान 2,23,100 गांठ की बिक्री की थी।


सूत्रों के अनुसार सीसीआई अभी तक पिछले फसल सीजन 2024-25 के दौरान खरीदी हुई 98,70,800 गांठ कॉटन की बिक्री कर चुकी है। फसल सीजन 2024-25 की खरीदी हुई कॉटन की लगातार घरेलू बाजार में मिलों को बिकवाली कर रही है।

पहली अक्टूबर 2025 से शुरू हुए चालू फसल सीजन में सीसीआई 72 लाख गांठ से ज्यादा कपास की खरीद समर्थन मूल्य पर कर चुकी है। माना जा रहा है कि निगम की कुल खरीद एक करोड़ पहुंचने का अनुमान है।

स्पिनिंग मिलों की मांग बनी रहने के कारण शुक्रवार को शाम के सत्र में गुजरात में कॉटन की कीमतों में तेजी दर्ज की गई, जबकि इस दौरान उत्तर भारत के राज्यों में इसके भाव में स्थिर से सुधार आया।

गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव शुक्रवार को 200 रुपये तेज होकर दम 55,100 से 55,400 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए।

पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव सुधरकर 5,500 से 5,660 रुपये प्रति मन बोले गए।हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव बढ़कर 5,460 से 5,600 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 5,525 से 5,680 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 53,000 से 54,000 रुपये कैंडी बोले गए।

देशभर की मंडियों में कपास की आवक 208,300 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई।

घरेलू वायदा कारोबार में कॉटन की कीमतों में तेजी का रुख रहा। एनसीडीईएक्स पर अप्रैल 26 महीने के वायदा अनुबंध में कपास के दाम 4.5 रुपये तेज होकर 1,590 रुपये प्रति 20 किलो हो गए। आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतों में मिलाजुला रुख रहा।

व्यापारियों के अनुसार स्पिनिंग मिलों की मांग बनी रहने के कारण गुजरात में कॉटन की कीमतों में तेजी जारी रही, जबकि उत्तर भारत में इसकी कीमतों में स्थिर से सुधार आया। व्यापारियों के अनुसार अधिकांश मिलों के पास कॉटन का बकाया स्टॉक कम है जबकि सूती धागे की स्थानीय मांग बराबर बनी हुई है, जिस कारण स्पिनिंग मिलें अच्छे मार्जिन में व्यापार कर रही है। हालांकि घरेलू बाजार में कॉटन की कुल उपलब्धता ज्यादा है। सीसीआई घरेलू बाजार में लगातार पिछले साल की खरीदी हुई कॉटन बेच रही है। अत: मिलों को आसानी से कच्चा माल मिल रहा है। हाल ही में घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतों में तेजी आई है। बढ़े दाम पर मिलों की खरीद सीमित हुई है इसलिए कॉटन के दाम रुक सकते हैं।

चालू पेराई सीजन में 15 जनवरी तक चीनी का उत्पादन 22 फीसदी बढ़ा - एनएफसीएसएफ

नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2025 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन (अक्टूबर-25 से सितंबर-26) में 15 जनवरी तक देशभर में चीनी का उत्पादन 21.63 फीसदी बढ़कर 158.85 लाख टन का हो चुका है जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में 130.60 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था।


नेशनल फेडरेशन ऑफ को ऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (एनएफसीएसएफ) के अनुसार
15 जनवरी, 2026 तक देशभर की चीनी मिलों ने 1763.74 लाख टन गन्ने की पेराई की है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 1484.04 लाख टन गन्ने की पेराई ही की थी। चालू पेराई सीजन में देशभर में 519 चीनी मिलों में पेराई चल रही है।

चालू पेराई सीजन में 15 जनवरी तक औसत चीनी की रिकवरी दर 9.01 फीसदी बैठ रही है, जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में 8.80 फीसदी की बैठ रही थी।

एनएफसीएसएफ के अनुसार उत्तर प्रदेश में चालू पेराई सीजन में मिलों ने 466.33 लाख टन गन्ने की पेराई की है तथा राज्य में चीनी का उत्पादन 45.70 लाख टन का हुआ है। राज्य में गन्ने में रिकवरी की दर 9.80 फीसदी की आ रही है। महाराष्ट्र की चीनी मिलों ने अभी तक 717.78 लाख टन गन्ने की पेराई की है तथा राज्य में 64.60 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है। राज्य में एवरेज रिकवरी की दर 9 फीसदी की आई है।

कर्नाटक में चालू पेराई सीजन में चीनी मिलों ने 381.37 लाख टन गन्ने की पेराई की है तथा राज्य में 30.70 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। राज्य में चालू पेराई सीजन में रिकवरी की दर 8.05 फीसदी की आ रही है।

एनएफसीएसएफ के अनुसार चालू गन्ना पेराई सीजन के अंत (सितंबर 2026) तक कुल चीनी का उत्पादन 350 लाख टन होने का अनुमान है। इस दौरान इथेनॉल में करीब 35 लाख टन चीनी उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने की उम्मीद है। इस तरह से नेट उत्पादन 315 लाख टन का होने का अनुमान है।

प्रमुख उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र में चालू पेराई सीजन में चीनी का उत्पादन 110 लाख टन, उत्तर प्रदेश में 105 लाख टन, कर्नाटक में 55 लाख टन और गुजरात में 8 लाख टन के उत्पादन का अनुमान है।

चालू पेराई सीजन में चीनी की घरेलू खपत 290 लाख टन होने की उम्मीद है। इसके अलावा पेराई सीजन के आरंभ में 50 का स्टॉक बचा हुआ है। इस हिसाब से चीनी मिलों के गोदामों में नए सीजन के आरंभ में लगभग 75 लाख टन चीनी का बकाया स्टॉक बचेगा।

उद्योग ने दूसरी बार बढ़ाया कॉटन उत्पादन अनुमान, 317 लाख गांठ होने की उम्मीद

नई दिल्ली। उद्योग ने दूसरी बार कॉटन के उत्पादन अनुमान में बढ़ोतरी की है। पहली अक्टूबर 2025 से शुरू हुए फसल सीजन 2025-26 के दौरान देश में कॉटन का उत्पादन 317 लाख गांठ, एक गांठ 170 किलो होने का अनुमान है, जोकि इसके पहले के अनुमान से 7.50 लाख गांठ ज्यादा है।


इससे पहले दिसंबर में उद्योग ने 309.50 लाख गांठ कॉटन के उत्पादन का अनुमान जारी किया था, जोकि पहले आरंभिक अनुमान से 4.50 लाख गांठ ज्यादा था।

कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सीएआई के अनुसार चालू फसल सीजन 2025-26 में देश में 317 लाख गांठ कॉटन के उत्पादन का अनुमान है। प्रमुख उत्पादन राज्य महाराष्ट्र में दूसरे आरंभिक उत्पादन में 3 लाख गांठ, तेलंगाना में 4.50 लाख गांठ तथा कर्नाटक में एक लाख गांठ और तमिलनाडु में 50 हजार गांठ की बढ़ोतरी का अनुमान है। इस दौरान मध्य प्रदेश में दूसरे आरंभिक अनुमान में एक लाख गांठ की कमी आने का अनुमान है।

सीएआई के अनुसार चालू फसल सीजन 2025-26 में उत्तर भारत के राज्यों में कॉटन का कुल उत्पादन 30.50 लाख गांठ होने का अनुमान है। इसमें पंजाब की हिस्सेदारी 2 लाख गांठ, हरियाणा की 7 लाख गांठ के अलावा अपर राजस्थान में 12.50 लाख गांठ के अलावा लोअर राजस्थान में 9 लाख गांठ कॉटन के उत्पादन का अनुमान है।

मध्य भारत के राज्यों में कॉटन का उत्पादन 187 लाख गांठ होने का अनुमान है। इसमें गुजरात की हिस्सेदारी 75 लाख गांठ तथा महाराष्ट्र की 94 लाख गांठ के अलावा मध्य प्रदेश की 18 लाख गांठ है।

दक्षिण भारत के राज्यों में चालू फसल सीजन में 94 लाख गांठ कॉटन के उत्पादन का अनुमान है। इसमें तेलंगाना की हिस्सेदारी 45 लाख गांठ, आंध्र प्रदेश 17 लाख गांठ के अलावा कर्नाटक 27 लाख गांठ तथा तमिलनाडु में 5 लाख गांठ कॉटन के उत्पादन का अनुमान है।

अन्य राज्यों में ओडिशा में चालू सीजन में 3.50 लाख गांठ तथा अन्य राज्यों में 2 लाख गांठ के उत्पादन का अनुमान है।

एसएआई के अनुसार चालू फसल सीजन में 50 लाख गांठ कॉटन के आयात का अनुमान है, जोकि पिछले साल के 41 लाख गांठ से 9 लाख गांठ ज्यादा है। चालू फसल सीजन के पहले तीन महीनों में दिसंबर अंत तक 31 लाख गांठ आयातित कॉटन भारतीय बंदरगाह पर पहुंच चुकी है।

चालू फसल सीजन 2025-26 के दौरान देश से 15 लाख गांठ कॉटन के निर्यात का अनुमान है, जोकि पहले के अनुसार से 3 लाख गांठ कम है। चालू फसल सीजन के पहले तीन महीनों में दिसंबर अंत देश से 4.50 लाख गांठ कॉटन का निर्यात हो चुका है।

एसएआई के अनुसार चालू फसल सीजन के आरंभ में 60.59 लाख गांठ का बकाया स्टॉक बचा हुआ था जबकि 317 लाख गांठ का उत्पादन होने की उम्मीद है। इस दौरान 50 लाख गांठ आयातित कॉटन आयेगी। अत: घरेलू बाजार में कॉटन की कुल उपलब्धता 427.59 लाख गांठ की बैठेगी।

चालू फसल सीजन में कॉटन की कुल खपत 305 लाख गांठ की होने का अनुमान है, इसके अलावा 15 लाख गांठ का निर्यात हो जायेगा। अत: क्लोजिंग स्टॉक 107.59 लाख गांठ का बैठेगा।

चालू फसल सीजन में दिसंबर अंत तक 155.19 लाख गांठ की आवक उत्पादक मंडियों में हो चुकी है। 

14 जनवरी 2026

चालू रबी सीजन में फसलों की कुल बुआई बढ़कर 2.81 फीसदी बढ़ी - कृषि मंत्रालय

नई दिल्ली। चालू रबी सीजन में फसलों की बुआई 2.81 फीसदी बढ़कर 644.29 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई केवल 626.64 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। गेहूं के साथ ही दलहन एवं तिलहनी फसलों की बुआई में बढ़ोतरी हुई है।  

कृषि मंत्रालय के अनुसार 9 जनवरी तक रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की बुआई बढ़कर 334.17 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक कुल 328.04 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

चालू रबी में दलहनी फसलों की बुआई बढ़कर 136.36 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 132.61 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई चालू रबी सीजन में बढ़कर 95.88 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इस समय तक 91.22 लाख हेक्टेयर में ही इसकी बुआई हुई थी।

अन्य रबी दलहन में मसूर की बुआई बढ़कर 18.12 लाख हेक्टेयर में तथा मटर की 7.92 लाख हेक्टेयर में हुई है। पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 17.66 लाख हेक्टेयर में और 8.27 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। उड़द की बुआई चालू रबी में घटकर 4.37 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि में 4.70 लाख हेक्टेयर की तुलना में हो चुकी थी है।

चालू रबी सीजन में तिलहनी फसलों की बुआई देशभर में बढ़कर 96.86 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 93.33 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। तिलहनी फसलों में सरसों की बुआई बढ़कर 89.36 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 86.57 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। मूंगफली की बुआई बढ़कर 3.52 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक 3.37 लाख हेक्टेयर में हुई थी। अलसी की बुआई भी चालू रबी में बढ़कर 1.99 लाख हेक्टेयर हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 1.76 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

मोटे अनाजों की बुवाई चालू रबी में बढ़कर 55.20 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 53.17 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। मोटे अनाजों में ज्वार की 21.36 लाख हेक्टेयर और मक्का की 25.24 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 22.66 और 23.49 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

जौ की बुआई चालू रबी सीजन में बढ़कर 7.36 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 6.08 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

चालू रबी सीजन में राज्य में धान की रोपाई बढ़कर 21.71 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 19.49 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

दिसंबर 2025 में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 8 फीसदी बढ़ा - एसईए

नई दिल्ली। दिसंबर 2025 में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 8 फीसदी बढ़कर 1,383,245 टन का हुआ है, जबकि पिछले साल दिसंबर में इनका आयात 1,275,554 टन का हुआ था। इस दौरान खाद्य तेलों का आयात 1,362,245 टन का एवं अखाद्य तेलों का आयात 21,000 टन का हुआ है।


सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार चालू तेल वर्ष 2025-26 के पहले दो महीनों नवंबर-25 एवं दिसंबर-25 के दौरान देश में खाद्वय एवं अखाद्य तेलों का आयात 12 फीसदी कम होकर 2,567,077 टन का ही हुआ है, जबकि पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में इनका आयात 2,926,53 टन का हुआ था।

एसईए के अनुसार दिसंबर 2025 में पाम तेल का आयात घटकर 5.07 लाख टन रह गया, जो नवंबर 2025 के 6.32 लाख टन की तुलना में 1.25 लाख टन कम है, यानी 20 फीसदी की कमी आई है। पाम तेल का बंदरगाह पर स्टॉक 6.27 लाख टन से घटकर 4.53 लाख टन का रह गया, जो पिछले महीने की तुलना से 1.74 लाख टन कम है।

सोया तेल का आयात दिसंबर 2025 में बढ़कर 5.05 लाख टन का हो गया, जबकि नवंबर 2025 में इसका आयात 3.71 लाख टन का हुआ था, यानी इसके आयात में 36 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। सोया तेल का बंदरगाह पर स्टॉक पिछले महीनों के 2.65 लाख टन की तुलना में 0.25 लाख टन बढ़कर 3.00 लाख टन का हो गया।

सूरजमुखी तेल का आयात दिसंबर 2025 में 3.50 लाख टन का हुआ है, जो कि नवंबर 2025 के 1.43 लाख टन के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है, हालांकि पहले दो महीनों में कुल आयात 6.05 लाख टन के मुकाबले घटकर 4.92 लाख टन का रह गया, जो 19 फीसदी कम है। सूरजमुखी तेल का बंदरगाह पर स्टॉक पिछले महीने के 1.25 लाख टन से 0.75 लाख टन बढ़कर 2.00 लाख टन का हो गया।

कृषि मंत्रालय के अनुसार 2 जनवरी, 2026 तक रबी तिलहन की फसलों की बुआई 3.04 फीसदी बढ़कर 99.30 लाख हेक्टेयर में हो गई हैं, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई 93.27 लाख हेक्टेयर में हुई थी। रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों का रकबा 2.79 फीसदी बढ़कर 89.36 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 86.57 लाख हेक्टेयर था। दिसंबर 2025 के दूसरे पखवाड़े में बारिश नहीं हुई, हालांकि अनुकूल तापमान ने फसल की सामान्य ग्रोथ में मदद की।

नवंबर एवं दिसंबर 2025 के दौरान 517,067 टन की तुलना में सिर्फ 3,500 टन रिफाइंड तेल (आरबीडी पामोलिन) का आयात किया है और नवंबर-दिसंबर, 2024 में 2,326,358 टन की तुलना में 2,509,700 टन क्रूड पाम तेल का आयात किया गया। अत: रिफाइंड तेल का रेश्यो तेजी से 18 फीसदी से घटकर 0.14 फीसदी का रह गया, जबकि क्रूड पाम तेल के आयात में बढ़ोतरी के कारण क्रूड तेल का रेश्यो 82 फीसदी से बढ़कर 99.86 फीसदी का हो गया है।

दिसंबर में आयातित खाद्य तेलों की कीमतों में भारतीय बंदरगाह पर मिलाजुला रुख रहा। दिसंबर में आरबीडी पामोलिन का भाव भारतीय बंदरगाह पर बढ़कर 1,058 डॉलर प्रति टन का हो गया, जबकि नवंबर में इसका भाव 1,049 डॉलर प्रति टन था। इस दौरान क्रूड पाम तेल का भाव भारतीय बंदरगाह पर दिसंबर में घटकर 1,094 डॉलर प्रति टन का रह गया, जबकि नवंबर में इसका भाव 1,096 डॉलर प्रति टन था। क्रूड सोया तेल का भाव नवंबर में भारतीय बंदरगाह पर 1,188 डॉलर प्रति टन था, जोकि दिसंबर में घटकर 1,175 डॉलर प्रति टन रह गया।

सीसीआई ने बिनौले की बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी की, हाजिर बाजार में भाव मजबूत

नई दिल्ली। कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई ने सोमवार को बिनौले की बिक्री कीमतों में 80 से 180 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी। अत: हाजिर बाजार में बिनौला के साथ ही कपास खली के दाम 100 से 125 रुपये प्रति क्विंटल तक तेज हुए।


कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई ने सोमवार को घरेलू बाजार में ई नीलामी के माध्यम से 15,23,300 क्विंटल बिनौले की बिक्री की पेशकश की। निगम ने बिनौले की बिक्री कीमतों में 80 से 180 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की। सीसीआई ने पिछले सप्ताह भी बिनौले की बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी की थी।

व्यापारियों के अनुसार सीसीआई लगातार बिनौला की बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी कर रही है तथा चालू फसल सीजन में सीसीआई उत्पादक राज्यों से करीब 72 लाख गांठ से ज्यादा कपास की खरीद कर चुकी है। अत: बिनौला का सबसे ज्यादा स्टॉक सीसीआई के पास होने के कारण हाजिर बाजार में बिनौला एवं कपास खली की कीमत निगम के बिक्री भाव के हिसाब से ही तेज हो रही है। प्राइवेट जिनिंग मिलों के पास बिनौले का स्टॉक कम है, तथा हाल ही में भाव में आई तेजी के कारण जिनिंग मिलों की बिक्री कम हुई है।

तेल मिलों की खरीद बढ़ने के कारण बिनौले की कीमत तेज हुई। हरियाणा में बिनौले के भाव 150 रुपये तेज होकर 3,850 से 4,100 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। इस दौरान राजस्थान में बिनौला के भाव 100 रुपये बढ़कर 3,900 से 4,150 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। बिनौला के दाम पंजाब में 100 रुपये तेज होकर 3,850 से 4,050 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। हुबली में रेगुलर क्वालिटी के बिनौले के दाम तेज होकर 3,950 से 4,100 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। विश्व बाजार में खाद्य तेलों के दाम तेज हुए हैं, जिस कारण घरेलू बाजार में बिनौले में तेल मिलों की खरीद बनी रहने की उम्मीद है। हालांकि इसकी कीमतों में तेजी, सीसीआई के बिक्री दाम पर ही निर्भर करेगी।

पशु आहार वालों की मांग सीमित होने से कपास खली की कीमत स्थिर बनी रही। सेलू में रेगुलर क्वालिटी की कपास खली की कीमत 3,800 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गई। इस दौरान भोकर में रेगुलर कपास खली की कीमत 3,800 रुपये प्रति क्विंटल बोली गई। शहापूर में रेगुलर कपास खली के भाव 3,800 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।

महाराष्ट्र में चीनी का उत्पादन 54 फीसदी बढ़कर 56.29 लाख टन के पार

नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2025 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन (अक्टूबर-25 से सितंबर-26) में 8 जनवरी तक महाराष्ट्र में चीनी का उत्पादन 53.88 फीसदी बढ़कर 56.29 लाख टन का हो चुका है। पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में राज्य में 37.80 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था।

 
शुगर कमिश्नर के अनुसार 8 जनवरी तक राज्य में 632.92 लाख टन गन्ने की पेराई हो चुकी है और 56.29 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। राज्य की औसत चीनी रिकवरी 8.89 फीसदी की बैठ रही है। राज्य में 8 जनवरी तक कुल 197 फैक्ट्रियों (98 कोऑपरेटिव और 99 प्राइवेट) ने पेराई शुरू की है।

पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में राज्य में 199 चीनी फैक्ट्रियों (98 को ऑपरेटिव और 101 प्राइवेट) ने पेराई आरंभ कर दी थी। पिछले साल की समान अवधि में राज्य में 434.14 लाख टन गन्ने की पेराई की थी और 37.80 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। औसत चीनी की रिकवरी दर 8.71 फीसदी की थी।

कोल्हापुर डिवीजन ने 137.73 लाख टन गन्ने की पेराई की है और 14.42 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। कोल्हापुर डिवीजन में रिकवरी की दर 10.47 फीसदी की है। डिवीजन में 37 फैक्ट्रियां चल रही हैं, जिसमें 25 सहकारी और 12 प्राइवेट हैं।

इसी तरह से पुणे डिवीजन में कुल 30 फैक्ट्रियां चल रही हैं, जिसमें 17 सहकारी और 13 प्राइवेट मिलें है। उन्होंने अब तक 146.95 लाख टन गन्ने की पेराई कर 13.44 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। पुणे डिवीजन की रिकवरी दर 9.16 फीसदी की है।

सोलापुर डिवीजन में कुल 46 फैक्ट्रियां चल रही हैं, जिसमें 17 सहकारी और 29 प्राइवेट हैं। अब तक डिवीजन में 138.05 लाख टन गन्ने की पेराई हो चुकी है और 11.04 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। चीनी की रिकवरी दर 8 फीसदी की है।

अहमदनगर (अहिल्यानगर) डिवीजन में कुल 27 फैक्ट्रियां, 15 को ऑपरेटिव और 12 प्राइवेट ने पेराई शुरू कर दी हैं। इन सभी फैक्ट्रियों ने अब तक 77.8 लाख टन गन्ने की पेराई की है और 6.55 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। अहमदनगर डिवीजन में चीनी की रिकवरी दर 8.43 फीसदी है। छत्रपति संभाजीनगर डिवीजन में कुल 22 चीनी मिलों (13 कोऑपरेटिव और 9 प्राइवेट) ने पेराई शुरू कर दी है तथा उन्होंने 60.39 लाख टन गन्ने की पेराई कर 4.56 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया है। चीनी की रिकवरी की दर 7.56 फीसदी है।

नांदेड़ डिवीजन में कुल 29 फैक्ट्रियां (10 कोऑपरेटिव और 19 प्राइवेट) चल रही हैं और उन्होंने 64.94 लाख टन गन्ने की पेराई कर 5.64 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। इस डिवीजन में चीनी की रिकवरी दर 8.69 फीसदी है। अमरावती डिवीजन में एक को ऑपरेटिव और 3 प्राइवेट फैक्ट्रियां चल रही हैं, और उन्होंने 6.64 लाख टन गन्ने की पेराई की है।

10 जनवरी 2026

सीसीआई ने चालू सप्ताह में 2,23,100 गांठ कॉटन की बिक्री की, पिछले सप्ताह से ज्यादा

नई दिल्ली। कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई ने 5 जनवरी से 9 जनवरी के दौरान 2,23,100 गांठ, एक गांठ 170 किलो फसल सीजन 2024-25 के दौरान खरीदी हुई कॉटन की बिक्री की। इसके पिछले सप्ताह में निगम ने केवल 2,02,100 गांठ बेची थी।


सूत्रों के अनुसार अभी तक पिछले फसल सीजन 2024-25 के दौरान खरीदी हुई 98,53,300 गांठ कॉटन की बिक्री कर चुकी है। फसल सीजन 2024-25 की खरीदी हुई कॉटन की लगातार घरेलू बाजार में मिलों को बिकवाली कर रही है।

पहली अक्टूबर 2025 से शुरू हुए चालू फसल सीजन में सीसीआई 72 लाख गांठ से ज्यादा कपास की खरीद समर्थन मूल्य पर कर चुकी है। माना जा रहा है कि निगम की कुल खरीद एक करोड़ पहुंचने का अनुमान है।

स्पिनिंग मिलों की मांग बनी रहने के कारण शुक्रवार को शाम के सत्र में गुजरात में कॉटन की कीमतों में तेजी दर्ज की गई, जबकि इस दौरान उत्तर भारत के राज्यों में इसके भाव में स्थिर से सुधार आया।

गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव शुक्रवार को 200 रुपये तेज होकर दम 55,100 से 55,400 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए।

पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव सुधरकर 5,500 से 5,660 रुपये प्रति मन बोले गए।हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव बढ़कर 5,460 से 5,600 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 5,525 से 5,680 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 53,000 से 54,000 रुपये कैंडी बोले गए।

देशभर की मंडियों में कपास की आवक 208,300 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई।

घरेलू वायदा कारोबार में कॉटन की कीमतों में तेजी का रुख रहा। एनसीडीईएक्स पर अप्रैल 26 महीने के वायदा अनुबंध में कपास के दाम 4.5 रुपये तेज होकर 1,590 रुपये प्रति 20 किलो हो गए। आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतों में मिलाजुला रुख रहा।

व्यापारियों के अनुसार स्पिनिंग मिलों की मांग बनी रहने के कारण गुजरात में कॉटन की कीमतों में तेजी जारी रही, जबकि उत्तर भारत में इसकी कीमतों में स्थिर से सुधार आया। व्यापारियों के अनुसार अधिकांश मिलों के पास कॉटन का बकाया स्टॉक कम है जबकि सूती धागे की स्थानीय मांग बराबर बनी हुई है, जिस कारण स्पिनिंग मिलें अच्छे मार्जिन में व्यापार कर रही है। हालांकि घरेलू बाजार में कॉटन की कुल उपलब्धता ज्यादा है। सीसीआई घरेलू बाजार में लगातार पिछले साल की खरीदी हुई कॉटन बेच रही है। अत: मिलों को आसानी से कच्चा माल मिल रहा है। हाल ही में घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतों में तेजी आई है। बढ़े दाम पर मिलों की खरीद सीमित हुई है इसलिए कॉटन के दाम रुक सकते हैं।