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31 दिसंबर 2025

राजस्थान में रबी फसलों की बुआई 99 फीसदी पूरी, गेहूं की तय लक्ष्य से कम

नई दिल्ली। राजस्थान में चालू रबी सीजन में फसलों की कुल बुआई 99 फीसदी क्षेत्रफल में पूरी हो चुकी है। गेहूं की बुआई जहां तय लक्ष्य की तुलना में कम हुई है, वहीं जौ और चना की लक्ष्य से ज्यादा हुई है।


चालू रबी सीजन में राज्य में 29 दिसंबर तक गेहूं की बुआई 35.48 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में इसकी बुआई 38.37 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। राज्य सरकार ने चालू रबी में बुआई का लक्ष्य 36 लाख हेक्टेयर का तय किया था। हालांकि जौ की बुआई चालू रबी सीजन में बढ़कर 4.49 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 3.30 लाख हेक्टेयर में हो पाई थी।

चालू रबी सीजन में तिलहनी फसलों की बुआई राज्य में बढ़कर 36.42 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 35.03 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। तिलहनी फसलों में सरसों की बुआई बढ़कर 34.90 लाख हेक्टेयर में, तारामीरा की 1.38 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले रबी की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 33.72 लाख हेक्टेयर और 1.20 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई राज्य में बढ़कर 22.39 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इस समय तक 16.55 लाख हेक्टेयर में ही इसकी बुआई हुई थी। चालू रबी में चना की बुआई का लक्ष्य 21.50 लाख हेक्टेयर तय किया गया था। अन्य रबी दलहन की बुआई 34 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 38 हजार हेक्टेयर की तुलना में कम है।

राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार 29 दिसंबर तक राज्य में रबी फसलों की बुआई 119.51 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में केवल 114.86 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हुई थी। चालू रबी सीजन में राज्य में 120.15 लाख हेक्टेयर में फसलों की बुआई का लक्ष्य तय किया है।

चालू रबी सीजन में फसलों की कुल बुआई बढ़कर 614 लाख हेक्टेयर के पार - कृषि मंत्रालय

नई दिल्ली। चालू रबी सीजन में फसलों की बुआई 1.13 फीसदी बढ़कर 614.30 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई केवल 607.43 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। गेहूं के साथ ही दलहन एवं तिलहनी फसलों की बुआई में बढ़ोतरी हुई है।  


कृषि मंत्रालय के अनुसार 26 दिसंबर तक रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की बुआई बढ़कर 322.68 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक कुल 322.49 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

चालू रबी में दलहनी फसलों की बुआई बढ़कर 133.44 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 129.79 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई चालू रबी सीजन में बढ़कर 95.88 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इस समय तक 91.22 लाख हेक्टेयर में ही इसकी बुआई हुई थी।

अन्य रबी दलहन में मसूर की बुआई बढ़कर 17.06 लाख हेक्टेयर में तथा मटर की 7.92 लाख हेक्टेयर में हुई है। पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 16.85 लाख हेक्टेयर में और 8.27 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। उड़द की बुआई चालू रबी में घटकर 3.63 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि में 3.86 लाख हेक्टेयर की तुलना में हो चुकी थी है।

चालू रबी सीजन में तिलहनी फसलों की बुआई देशभर में बढ़कर 94.29 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 93.25 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। तिलहनी फसलों में सरसों की बुआई बढ़कर 87.80 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 86.57 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। हालांकि मूंगफली की बुआई घटकर 2.77 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 3.29 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। अलसी की बुआई भी चालू रबी में घटकर 1.99 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि के 2.00 लाख हेक्टेयर की तुलना में कमी है।

मोटे अनाजों की बुवाई चालू रबी में बढ़कर 49 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 48.89 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। मोटे अनाजों में ज्वार की 20.38 लाख हेक्टेयर और मक्का की 20.92 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 22 और 20.12 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

जौ की बुआई चालू रबी सीजन में बढ़कर 6.78 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 6.08 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

चालू रबी सीजन में राज्य में धान की रोपाई बढ़कर 14.90 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 13.01 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

महाराष्ट्र में चालू पेराई सीजन में चीनी का उत्पादन 58 फीसदी बढ़कर 44.78 लाख टन हुआ

नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2025 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन (अक्टूबर-25 से सितंबर-26) में 28 दिसंबर तक महाराष्ट्र में चीनी का उत्पादन 58.17 फीसदी बढ़कर 44.78 लाख टन का हो चुका है। पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में राज्य में 28.31 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था।

 
शुगर कमिश्नर के अनुसार 28 दिसंबर तक राज्य में 515.3 लाख टन गन्ने की पेराई हो चुकी है और 44.78 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। राज्य की औसत चीनी रिकवरी 8.69 फीसदी की बैठ रही है। राज्य में 28 दिसंबर तक कुल 193 फैक्ट्रियों (96 कोऑपरेटिव और 97 प्राइवेट) ने पेराई शुरू की है।

पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में राज्य में 195 चीनी फैक्ट्रियों (97 को ऑपरेटिव और 98 प्राइवेट) ने पेराई आरंभ कर दी थी। पिछले साल की समान अवधि में राज्य में 333.2 लाख टन गन्ने की पेराई की थी और 28.31 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। औसत चीनी की रिकवरी दर 8.5 फीसदी की थी।

कोल्हापुर डिवीजन ने 114.3 लाख टन गन्ने की पेराई की है और 11.69 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। कोल्हापुर डिवीजन में रिकवरी की दर 10.23 फीसदी की है। डिवीजन में 36 फैक्ट्रियां चल रही हैं, जिसमें 25 सहकारी और 12 प्राइवेट हैं।

इसी तरह से पुणे डिवीजन में कुल 30 फैक्ट्रियां चल रही हैं, जिसमें 17 सहकारी और 13 प्राइवेट मिलें है। उन्होंने अब तक 124.08 लाख टन गन्ने की पेराई कर 11.14 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। पुणे डिवीजन की रिकवरी दर 8.93 फीसदी की है।

सोलापुर डिवीजन में कुल 43 फैक्ट्रियां चल रही हैं, जिसमें 15 सहकारी और 28 प्राइवेट हैं। अब तक डिवीजन में 107.4 लाख टन गन्ने की पेराई हो चुकी है और 8.39 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। चीनी की रिकवरी दर 7.81 फीसदी की है।

अहमदनगर (अहिल्यानगर) डिवीजन में कुल 26 फैक्ट्रियां, 15 को ऑपरेटिव और 11 प्राइवेट ने पेराई शुरू कर दी हैं। इन सभी फैक्ट्रियों ने अब तक 61.92 लाख टन गन्ने की पेराई की है और 5.05 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। अहमदनगर डिवीजन में चीनी की रिकवरी दर 8.17 फीसदी है। छत्रपति संभाजीनगर डिवीजन में कुल 22 चीनी मिलों (13 कोऑपरेटिव और 9 प्राइवेट) ने पेराई शुरू कर दी है तथा उन्होंने 49 लाख टन गन्ने की पेराई कर 3.59 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया है। चीनी की रिकवरी की दर 7.33 फीसदी है।

नांदेड़ डिवीजन में कुल 29 फैक्ट्रियां (10 कोऑपरेटिव और 19 प्राइवेट) चल रही हैं और उन्होंने 52.11 लाख टन गन्ने की पेराई कर 4.42 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। इस डिवीजन में चीनी की रिकवरी दर 8.48 फीसदी है। अमरावती डिवीजन में एक को ऑपरेटिव और 3 प्राइवेट फैक्ट्रियां चल रही हैं, और उन्होंने 5.55 लाख टन गन्ने की पेराई की है।

सीसीआई ने चालू सप्ताह में एक लाख गांठ से ज्यादा कॉटन की बिक्री की

नई दिल्ली। कॉटन कारपोरेशन आफ इंडिया, सीसीआई ने चालू सप्ताह में घरेलू बाजार में 100,400 गांठ, एक गांठ - 170 किलो कॉटन की बिक्री की जबकि निगम के पास अभी भी पिछले साल की खरीदी हुई कॉटन का 6 लाख गांठ से ज्यादा का स्टॉक बचा हुआ है।

सीसीआई फसल सीजन 2024-25 की खरीदी हुई कॉटन की लगातार घरेलू बाजार में मिलों को बिकवाली कर रही है। इससे पिछले सप्ताह में निगम के केवल 51,300 गांठ कॉटन की बिक्री की थी।

सीसीआई ने पिछले सप्ताह कॉटन की बिक्री कीमतों में 200/- रुपये प्रति कैंडी की कटौती की की थी तथा निगम अभी तक फसल सीजन 2024-25 की खरीदी हुई कुल 93,27,700 गांठ की बिक्री कर चुकी है। सबसे ज्यादा बिक्री निगम ने तेलंगाना में 36,23,300 गांठ की, महाराष्ट्र में 29,55,700 गांठ के अलावा गुजरात में 13,59,500 गांठ की बिक्री की है। कर्नाटक में निगम ने 5,26,800 गांठ के अलावा मध्य प्रदेश में 3,60,900 गांठ तथा ओडिशा में 2,01,600 गांठ तथा 1,82,600 गांठ और पंजाब, हरियाणा तथा राजस्थान में क्रमश: 62,800 तथा 1,800 और 52,700 गांठ कॉटन की बिक्री की है।

स्पिनिंग मिलों की सीमित मांग बनी रहने के कारण शनिवार को शाम के सत्र में गुजरात में कॉटन के दाम स्थिर हो गए, जबकि उत्तर भारत में इसकी कीमतों में हल्का सुधार आया।

गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव शनिवार को 53,400 से 53,800 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो पर स्थिर हो गए।

पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव बढ़कर 5,280 से 5,450 रुपये प्रति मन बोले गए।हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव 5,210 से 5,380 रुपये प्रति मन बोले गए।ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम बढ़कर 5,250 से 5,500 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 51,000 से 52,000 रुपये कैंडी बोले गए। देशभर की मंडियों में कपास की आवक 136,500 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई।

केंद्र सरकार ने कॉटन के आयात पर शून्य शुल्क की समय सीमा को 30 सितंबर 2025 से बढ़ाकर 31 दिसंबर 2025 किया हुआ है।

व्यापारियों के अनुसार स्पिनिंग मिलों की मांग बनी रहने से उत्तर भारत में कॉटन की कीमतों में सुधार आया है, जबकि गुजरात में इसके भाव स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार हाल ही में सूती धागे की स्थानीय मांग में सुधार आया है, जिस कारण स्पिनिंग मिलें अच्छे मार्जिन में व्यापार कर रही है। वैसे भी अधिकांश मिलों के पास कॉटन का बकाया स्टॉक कम है। इसलिए कॉटन के भाव में हल्का सुधार बन सकता है। हालांकि घरेलू बाजार में कॉटन की कुल उपलब्धता ज्यादा है। सीसीआई घरेलू बाजार में लगातार पिछले साल की खरीदी हुई कॉटन बेच रही है। अत: मिलों को आसानी से कच्चा माल मिल रहा है। इसलिए स्पिनिंग मिलें कॉटन की खरीद जरुरत के हिसाब से ही कर रही है।

27 दिसंबर 2025

केंद्र सरकार ने जनवरी के लिए 22 लाख टन चीनी का कोटा जारी किया

नई दिल्ली। केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने जनवरी 2026 के लिए 22 लाख टन चीनी का मासिक कोटा जारी किया है, जो कि जनवरी 2025 में किए गए आवंटित कोटे से कम है।


मंत्रालय ने दिसंबर 2025 के लिए घरेलू बिक्री के लिए 22 लाख टन का मासिक चीनी कोटा आवंटित जारी किया गया था जबकि जनवरी 2025 में केंद्र सरकार ने चीनी का कोटा 22.5 लाख टन का जारी किया था।

व्यापारियों के अनुसार, जनवरी 2026 के लिए 22 लाख चीनी के कोटा की घोषणा से घरेलू बाजार के चीनी के दाम स्थिर ही बने रहने की उम्मीद है। चालू पेराई सीजन के आरंभ होने के बाद से अभी तक चालू सीजन में चीनी की कीमतों में करीब 8 फीसदी की गिरावट आई है। पेराई सीजन के आरंभ में, महाराष्ट्र में चीनी की कीमत लगभग 3,900 रुपये प्रति क्विंटल थी जोकि अब घटकर 3,600 रुपये प्रति क्विंटल रह गई हैं।

सीसीआई ने बिनौले की बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी की, हाजिर बाजार में दाम तेज

नई दिल्ली। कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई ने शुक्रवार को बिनौले की बिक्री कीमतों में 30 से 70 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी। अत: हाजिर बाजार में बिनौला के साथ ही कपास खली के दाम 50 से 100 रुपये प्रति क्विंटल तक तेज हुए।


व्यापारियों के अनुसार सीसीआई लगातार बिनौला की बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी कर रही है तथा चालू फसल सीजन में सीसीआई उत्पादक राज्यों से करीब 50 लाख गांठ कपास की खरीद कर चुकी है। अत: बिनौला का सबसे ज्यादा स्टॉक सीसीआई के पास होने के कारण हाजिर बाजार में बिनौला एवं कपास खली की कीमत निगम के बिक्री भाव के हिसाब से ही तेज हो रही है।

उत्तर भारत के राज्यों में सप्ताह भर में जहां बिनौला के भाव 300 से 350 रुपये प्रति क्विंटल तक तेज हुए हैं, वहीं इस दौरान कपास खली की कीमतों में 150 से 200 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आई है।

कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई ने शुक्रवार को घरेलू बाजार में ई नीलामी के माध्यम से 14,57,200 क्विंटल बिनौले की बिक्री की तथा इसकी बिक्री कीमतों में 30 से 70 रुपये प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी की।

तेल मिलों की खरीद बनी रहने के कारण उत्तर भारत के राज्यों में शुक्रवार को बिनौले की कीमत तेज हुई। हरियाणा में बिनौले के भाव 50 रुपये तेज होकर 3,750 से 3,900 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। इस दौरान राजस्थान में बिनौला के भाव 100 रुपये तेज होकर 3,650 से 4,000 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। बिनौला के दाम पंजाब में 50 रुपये बढ़कर 3,600 से 3,850 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

पशु आहार वालों की मांग बढ़ने से कपास खली की कीमत तेज हुई। सेलू में रेगुलर क्वालिटी की कपास खली की कीमत 50 रुपये तेज होकर 3,475 रुपये प्रति क्विंटल हो गई। इस दौरान शाहपुर में रेगुलर क्वालिटी की कपास खली की कीमत 50 रुपये बढ़कर 3,500 रुपये प्रति क्विंटल हो गई। सूर्यापेट में रेगुलर क्वालिटी की कपास खली के भाव 50 रुपये तेज होकर 3,350 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश एवं हरियाणा तथा पश्चिम बंगाल में सरसों की बुआई बढ़ी

नई दिल्ली। प्रमुख उत्पादक राज्यों राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश एवं हरियाणा तथा पश्चिम बंगाल में चालू रबी में सरसों की बुआई बढ़ोतरी हुई है। मौसम फसल के अनुकूल है जिससे उत्पादन अनुमान में बढ़ोतरी का अनुमान है।


सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एसईए के अनुसार देशभर में सरसों की बुआई लगभग 84.67 लाख हेक्टेयर में होने का अनुमान है, जो कि पिछले साल की समान अवधि की तुलना में लगभग 4 फीसदी ज्यादा है।

उत्पादक राज्यों में ज्यादातर में सरसों की फसल ब्रांडिंग से फूल/फली बनने के स्टेज पर हैं, जबकि अगेती बोई गई फसल में फली बनने बनने लगी हैं। सभी मॉनिटर किए गए राज्यों में ओवरऑल फसल की स्थिति अच्छी है तथा अभी तक कहीं किसी रोग की सूचना नहीं है।

दिसंबर 2025 के पहले दो सप्ताह में उत्पादक राज्यों में बारिश नहीं हुई है। लेकिन फसल के लिए तापमान अच्छा है, साथ ही मिट्टी में काफी नमी और सिंचाई से फसल की ग्रोथ और डेवलपमेंट में मदद मिली है।  

रबी सीजन 2025-26 के लिए सरसों की फसल की मॉनिटरिंग स्टडी की तीसरी रिपोर्ट पेश की जा रही है। इसे एग्रीवॉच ने तैयार किया है, जिसे एसईए ने 2025-26 के लिए रेप-सरसों की फसल सर्वे के लिए ऑफिशियल एजेंसी के तौर पर नियुक्त किया है। यह रिपोर्ट 15 दिसंबर 2025 तक सरसों की बुवाई की प्रोग्रेस और फसल की कंडीशन का अपडेट और कॉम्प्रिहेंसिव एनालिसिस देती है।