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02 September 2015

रोलर फ्लोर मिलों को भारतीय खाद्य निगम से मिल सकता है बढ़िया गेहूं


एफसीआई केवल लस्टर लोस गेहूं की कर रही है बिक्री, भाव में कटौती नहीं करेगी सरकार
आर एस राणा
नई दिल्ली। रोलर फ्लोर मिलों को भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) से रबी विपणन सीजन 2014-15 में खरीदा गया बढ़िया गेहूं खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत मिल सकता है। खाद्य मंत्रालय फ्लोर मिलों को 75-25 फीसदी के आधार पर गेहूं की बिक्री करने पर विचार कर रहा है। इसके तहत रोलर फ्लोर मिलें 75 फीसदी चालू रबी विपणन सीजन 2015-16 का लस्टर लोस और 25 फीसदी गेहूं विपणन सीजन 2014-15 का बढ़िया गेहूं खरीद सकेंगी।
खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फ्लोर मिलों ने एफसीआई से 50-50 फीसदी के आधार पर गेहूं की बिक्री करने की मांग की थी, इसमें 50 फीसदी गेहूं चालू रबी विपणन सीजन 2015-16 का लस्टर लोस और 50 फीसदी बढ़िया गेहूं जोकि पिछले रबी विपणन सीजन 2014-15 में खरीदा गया था। उन्होंने बताया कि मंत्रालय इसको 75-25 फीसदी करने पर विचार कर रहा है तथा उम्मीद है कि अगले सप्ताह तक इस पर अंतिम फैसला हो जाए। उन्होंने बताया कि ओएमएसएस के तहत गेहूं के बिक्री भाव में कटौती का सरकार का कोई इरादा नहीं है।
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चालू सीजन में ओएमएसएस और डेडीकेट मूवमेंट के आधार पर अभी तक 2.78 लाख टन गेहूं की बिक्री हुई है। इसमें सबसे ज्यादा गेहूं मध्य प्रदेष से 89,250 टन, पंजाब से 53,000 टन, कर्नाटका से 55,000 टन और जम्मू-कष्मीर से 51,000 टन गेहूं का ही उठाव हुआ है। गुजरात से केवल 16,050 टन गेहूं उठा है जबकि हरियाणा से नाममात्र का ही उठाव हुआ है। सूत्रों के अनुसार हरियाणा और पंजाब में चालू रबी विपणन सीजन 2015-16 में लस्टर लोस गेहूं की ज्यादा खरीद हुई थी।
केंद्र सरकार द्वारा गेहूं के आयात पर 10 फीसदी का आयात षुल्क लगा देने से गेहूं गेहं का आयात बंद हो गया है, इसलिए दक्षिण भारत की रोलर फ्लोर मिलों की खरीद उत्तर भारत के साथ ही भारतीय खाद्य निगम के गोदामों से षुरु हो गई है जिसकी वजह से गेहूं की कीमतों में तेजी आई है। चालू फसल सीजन में दक्षिण भारत की फ्लोर मिलों ने आस्ट्रेलिया और यूक्रेन से करीब 5 लाख टन गेहूं का आयात किया है।
केंद्र सरकार खुले बाजार बिक्री योजना के तहत पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेष से डेडीकेट मूवमेंट के आधार पर 1,550 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं बेच रही है। भारतीय खाद्य निगम ने चालू रबी विपणन सीजन 2015-16 में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 280.87 लाख टन गेहूं की खरीद की हो जोकि पिछले साल हुई कुल खरीद 280.23 लाख टन से ज्यादा है।
केंद्रीय पूल में पहली अगस्त को गेहूं का स्टॉक 367.78 लाख टन का है जोकि तय मानकों बफर स्टाक से ज्यादा ही है। कृषि मंत्रालय के चौथे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2014-15 में गेहूं का उत्पादन 889.4 लाख टन होने का अनुमान है जबकि फसल सीजन 2013-14 में 958.5 लाख टन गेहूं का उत्पादन हुआ था।.....आर एस राणा

उत्तर प्रदेष में चीनी मिलों पर 7,656 करोड़ का बचा हुआ है बकाया

आर एस राणा
नई दिल्ली। गन्ने का पेराई सीजन भले ही समाप्त हो गया हो लेकिन उत्तर प्रदेष की चीनी मिलों पर अभी भी किसानों का 7,655.79 करोड़ रुपये का बकाया बचा हुआ है। चालू पेराई सीजन में अभी तक चीनी मिलें कुल राषि का केवल 65.33 फीसदी ही अदा कर पाई है।
उत्तर प्रदेष षुगर मिल्स एसोसिषन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चालू पेराई सीजन में राज्य की चीनी मिलों ने 20,644.40 करोड़ रुपये का गन्ना किसानों से खरीदा था जिसमें से अभी भी मिलों पर किसानों का 7,655.79 करोड़ रुपये बकाया बचा हुआ है। उन्होंने बताया कि चीनी के दाम बाजार में बने रहे, जबकि चीनी मिलों ने गन्ने की खरीद उंची कीमत पर की थी इसीलिए मिलों को बकाया भुगतान में परेषानी आ रही है। हालांकि पिछले डेढ़-दो महीने से चीनी की कीमतों में करीब 150 से 200 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आई है जिससे उम्मीद है कि बकाया भुगतान में भी तेजी आयेगी। उत्तर प्रदेष में बुधवार को चीनी के एक्स फैक्ट्री भाव 2,450 से 2,550 रुपये प्रति क्विंटल हो गए जबकि दिल्ली में एम ग्रेड चीनी के भाव 2,700 रुपये प्रति क्विंटल रहे।
उन्होंने बताया कि राज्य की चीनी मिलों ने चालू पेराई सीजन में 7,437.93 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की है जिससे 71 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ। चालू पेराई सीजन में गन्ने में रिकवरी की औसत दर 9.55 फीसदी रही जोकि पिछले की तुलना में ज्यादा है।....आर एस राणा

01 September 2015

दैनिक आवक कम होने से सरसों की कीमतों में तेजी की संभावना


आर एस राणा
नई दिल्ली। उत्पादक मंडियों में दैनिक आवक कम होने से सरसों की कीमतों में तेजी आने की संभावना है। दिल्ली की लारेंस रोड मंडी में सरसों के भाव 4,500 रुपये प्रति क्विंटल रहे। हालांकि सरसों डीओसी में निर्यात मांग काफी कमजोर है, साथ ही आयात ज्यादा होने से खाद्य तेलों की उपलब्धता भी ज्यादा है लेकिन बिहार, पश्चिमी बंगाल और असम की मांग अच्छी बनी हुई है।
खाद्य तेलों के कारोबारी ने बताया कि सरसों तेल में इस समय बिहार, पश्चिमी बंगाल और असम की अच्छी मांग बनी हुई है जबकि उत्पादक मंडियों में सरसों की दैनिक आवक कम है। रबी में सरसों की पैदावार में आई कमी से सरसों की उपलब्धता कम है जिसकी वजह से स्टॉकिस्ट नीचे भाव में बिकवाल नहीं है। उन्होंने बताया कि उत्पादक मंडियों में मंगलवार को सरसों की कीमतों में 25 से 50 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी दर्ज की गई।
आगरा के एक सरसों व्यापारी ने बताया कि मंगलवार को मंडी में सरसों की कीमतों में 25 रुपये की तेजी आकर भाव 5,050 रुपये, मध्य प्रदेश की मोरेना मंडी में 4,550 रुपये तथा राजस्थान की अलवर मंडी में 4,600 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। सरसों डीओसी के भाव अलवर मंडी में 19,300 रुपये प्रति टन रहे। जयपुर में सरसों के भाव बढ़कर 4,715-4,720 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। उन्होंने बताया कि त्यौहारी सीजन के साथ ही सर्दियों का सीजन शुरु हो रहा है जिससे आगामी दिनों में सरसों तेल में मांग और भी बढ़ेगी। ऐसे में सरसों की मौजूदा कीमतों में 100 से 150 रुपये प्रति क्विंटल की और तेजी आने की संभावना है।
साल्वेंट एक्सट्रेशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार जुलाई महीने में सरसों डीओसी का निर्यात घटकर 8,645 टन का ही हुआ है जबकि जून महीने में इसका निर्यात 56,139 टन का हुआ था। कृषि मंत्रालय के चौथे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2014-15 में सरसों का उत्पादन घटकर 63.09 लाख टन का ही हुआ है जबकि इसके पिछले साल इसकी पैदावार 78.77 लाख टन की हुई थी।........आर एस राणा

28 August 2015

सोया खली में निर्यात मांग कम होने का असर सोयाबीन की कीमतों पर


महाराष्ट्र में बारिष की कमी का असर पैदावार पर पड़ने की आषंका
आर एस राणा
नई दिल्ली। महाराष्ट्र में बारिष कम होने का असर सोयाबीन की पैदावार पर पड़ने की आषंका तो है लेकिन सोया खली और तेल में कमजोर मांग होने के कारण इसकी कीमतों में अभी भारी तेजी की संभावना नहीं है।
सोयाबीन के थोक कारोबारी नरेष गोयनका ने बताया कि सोया खली में निर्यात के साथ ही घरेलू मांग भी कमजोर बनी हुई है जबकि आयातित खाद्य तेलों की उपलब्धता ज्यादा होने के कारण तेल में भी मांग सीमित मात्रा में आ रही है। हालांकि चालू खरीफ में सोयाबीन की बुवाई तो पिछले साल से ज्यादा हुई है लेकिन महाराष्ट्र के कई जिलों में सूखे जैसे हालात का असर सोयबीन की पैदावार पर पड़ने की आषंका है। उन्होंने बताया कि इसके बावजूद भी सोयाबीन की कीमतों में भारी तेजी की संभावना नहीं है।
सोयाबीन के कारोबारी उमेष जैन ने बताया कि उत्पादक मंडियों में सोयाबीन की दैनिक आवक तो कम है लेकिन प्लांटों की मांग भी कमजोर बनी हुई है जिससे भाव में तेजी नहीं आ पा रही है। उन्होंने बताया कि इंदौर मंडी में सोयाबीन के भाव 3,300 से 3,350 रुपये, कोटा मंडी में 3,200 से 3,300 रुपये और लातूर मंडी में 3,390 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं। कांडला बंदरगाह पर सोया खली के भाव 31,000 रुपये प्रति टन रह गए जबकि इंदौर में सोया खली के भाव 29,500 रुपये प्रति टन रहे।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में सोयाबीन की बुवाई बढ़कर 114.17 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 110.30 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी।
साल्वेंट एक्ट्रेक्टर्स एसोसिएषन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2015-16 की पहली तिमाही में सोया खली का निर्यात घटकर 34,161 टन का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 1,00,746 टन का निर्यात हुआ था। भारतीय बंदरगाह पर सोया खली के भाव जून महीने में घटकर 553 डॉलर प्रति टन रह गए जबकि मई महीने में इसके भाव 592 टन प्रति टन थे।...आर एस राणा

दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों की बुवाई बढ़ी


धान की रौपाई पिछले साल के लगभग बराबर
आर एस राणा
नई दिल्ली। जून महीने में हुई अच्छी बारिष से चालू खरीफ में दलहन, तिलहन के साथ ही मोटे अनाजों की बुवाई बढ़ी है। खरीफ की प्रमुख फसल धान की रौपाई चालू खरीफ में 345.89 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी रौपाई 345.48 लाख हैक्टेयर में हुई थी।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में दलहन की बुवाई बढ़कर 105.52 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 94.18 लाख हैक्टेयर में ही दालो की बुवाई हुई थी। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर की बुवाई 34.30 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 33.58 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। इसी तरह से उड़द की बुवाई पिछले साल के 23.24 लाख हैक्टेयर से बढ़कर 26.34 लाख हैक्टेयर में और मूंग की बुवाई 19.97 लाख हैक्टेयर से बढ़कर 23.92 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है।
मोटे अनाजों की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 172.67 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 167.23 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। बाजरा की बुवाई 67.02 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 62.57 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। मक्का की बुवाई पिछले साल के 73.30 लाख हैक्टेयर से बढ़कर 73.79 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है।
तिलहनों की बुवाई चालू खरीफ में 174.59 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 172.26 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी। तिलहन की प्रमुख फसल सोयाबीन की बुवाई चालू खरीफ में 114.17 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 110.30 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। मूंगफली की बुवाई पिछले साल के 35.73 लाख हैक्टेयर से घटकर 34.72 लाख हैक्टेयर में ही हुई है।
गन्ने की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 48.84 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अविध में 47.17 लाख हैक्टेयर में गन्ने की बुवाई हुई थी। कपास की बुवाई पिछले साल के 122.50 लाख हैक्टेयर से बढ़कर 112.68 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है।.......आर एस राणा

27 August 2015

अनुकूल मौसम से आस्ट्रेलिया में चने की पैदावार ज्यादा होने का अनुमान


अक्टूबर में आयेगी नई षिपमेंट, भाव में गिरावट की आषंका
आर एस राणा
नई दिल्ली। आस्ट्रेलिया में अनुकूल मौसम से चना की पैदावार बढ़ने का अनुमान है तथा सितंबर के आखिर में नई फसल की आवक षुरु हो जायेगी, तथा अक्टूबर में षिपमेंट चालू हो जायेंगे, जिससे घरेलू बाजार में चने की कीमतें में गिरावट आने की आषंका है।
चना आयातक संतोष उपाध्याय ने बताया कि हम आस्ट्रेलिया से कुल आयात 70 से 75 फीसदी चना आयात करते हैं तथा चालू सीजन में आस्ट्रेलिया में मौसम फसल के अनुकूल बना हुआ है जिससे पैदावार ज्यादा होने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि आस्ट्रेलिया चना के भाव 710 डॉलर प्रति टन है तथा अक्टूबर-नवंबर षिपमेंट के सौदे 690 डॉलर प्रति टन की दर से हो रहे हैं। आस्ट्रेलिया में चने की नई फसल की आवक सितंबर महीने के आखिर में षुरु होगी, तथा षिपमेंट अक्टूर-नवंबर में होगी।
चना कारोबारी दुर्गा प्रसाद ने बताया कि घरेलू बाजार में उपलब्धता कम होने के कारण चना की कीमतों में तेजी बनी हुई है। वैसे भी चना दाल अन्य दालों के मुकाबले अभी भी सस्ती है इसलिए चना दाल की खपत ज्यादा हो रही है। घरेलू बाजार में सितंबर महीने में चना के दाम उंचे रह सकते हैं लेकिन अक्टूबर-नवंबर में भाव घटने की संभावना है। दिल्ली में गुरुवार को चना के भाव 4,850 से 4,875 रुपये प्रति क्विंटल रहे तथा दैनिक आवक 25 से 30 मोटर की हुई। महाराष्ट्र की लातूर मंडी में चना के भाव 4,950 रुपये प्रति क्विंटल रहे तथा इसकी कीमतों में 100 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई। मध्य प्रदेष की इंदौर मंडी में चना के भाव 4,600 रुपये और राजस्थान की जयपुर मंडी में 4,850 रुपये प्रति क्विंटल रहे।
चना व्यापारी महेष जैन ने बताया कि चना के प्रमुख चना उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्य प्रदेष के कुछ भागों में अगस्त महीने में कम बारिष हुई है जिसका असर रबी में चना की बुवाई पर पड़ सकता है। ऐसे में आगामी दिनों में चना की तेजी-मंदी काफी हद तक मानसूनी बारिष पर भी निर्भर करेगी।
कृषि मंत्रालय के चौथे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल वर्ष 2014-15 में चना की पैदावार घटकर 71.7 लाख टन होने का अनुमान है। पिछले साल इसकी रिकार्ड पैदावार 95.3 लाख टन की हुई थी।.....आर एस राणा

स्टॉकिस्टों की सक्रियता से बढ़े रहे हैं ग्वार के भाव


ग्वार गम उत्पादों के निर्यात में 52 फीसदी की भारी गिरावट
आर एस राणा
नई दिल्ली। ग्वार गम उत्पादों में निर्यात मांग कमजोर बनी हुई है लेकिन स्टॉकिस्टों की सक्रियता से ग्वार की कीमतों में तेजी आई है। उत्पादक मंडियों में पिछले 10 दिनों में ग्वार सीड की कीमतो में करीब 500 से 550 रुपये और ग्वार गम की कीमतों में 1,200 से 1,250 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आ चुकी है।
ग्वार गम निर्यातक कंपनी के एक अधिकारी ने बताया कि ग्वार गम उत्पादों में निर्यात मांग कमजोर बनी हुई है, लेकिन स्टॉकिस्टों की पकड़ मजबूत होने से ग्वार के भाव में तेजी बनी हुई है। उत्पादक राज्यों में जून महीने में हुई अच्छी बारिष से ग्वार की बुवाई पिछले साल से ज्यादा हुई है लेकिन अगस्त महीने में बारिष कम होने का डर दिखाकर स्टॉकिस्ट बाजार में सक्रिय हो गए हैं। जोधपुर मंडी में 17 अगस्त को ग्वार का भाव 3,600 रुपये और गंगानगर मंडी में 3,500 रुपये प्रति क्विंटल था। जोधपुर मंडी में इस दौरान ग्वार गम का भाव 7,800 रुपये प्रति क्विंटल था जबकि गुरुवार को ग्वार गम का भाव बढ़कर 9,050 रुपये और ग्वार का भाव 4,150 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। गंगानगर मंडी में इस दौरान ग्वार का भाव बढ़कर 4,050 रुपये प्रति क्विंटल हो गया।
वाणिज्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चालू वित्त वर्ष 2015-16 के पहले चार महीनों अप्रैल से जुलाई के दौरान मूल्य के हिसाब से ग्वार गम उत्पादों का निर्यात 1,534.08 करोड़ रुपये का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इनका निर्यात 3,192.69 करोड़ रुपये का हुआ था।
एपिडा के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2015-16 के पहले तीन महीनों अप्रैल से जून के दौरान ग्वार गम उत्पादों के निर्यात में 48 फीसदी की गिरावट आकर केवल 90,000 टन ग्वार गम उत्पादों का ही निर्यात हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 1.78 लाख टन का निर्यात हुआ था।
ग्वार कारोबारी सुरेंद्र सिंघला ने बताया कि उत्पादक मंडियों में ग्वार की दैनिक आवक 18 से 20 हजार बोरी की हो रही है। चालू सीजन में ग्वार की बुवाई पिछले साल से ज्यादा हुई है लेकिन आगामी दिनों में तेजी-मंदी काफी हद तक मानसूनी बारिष पर निर्भर करेगी। अगर आगामी सप्ताह में उत्पादक राज्यों में बारिष हुई तो भाव घट सकते हैं, लेकिन अगर बारिष नहीं हुई तो फिर स्टॉकिस्ट और भी भाव को बढ़ा देंगे।......आर एस राणा