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18 November 2018

उत्‍तर प्रदेश: ट्रैक्‍टर पर धान लादकर विधानभवन जा रहे किसानों को प्रशासन ने रोका, खरीद का आश्वासन

आर एस राणा
नई दिल्ली। राज्य के बाराबंकी में धान की समर्थन मूल्य पर खरीद नहीं होने से नाराज किसानों को प्रशासन ने रोक लिया है तथा तुरंत खरीद करने को भी राजी हो गया हैं। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के बैनर तले करीब 250 से 300 ट्रेक्टर ट्रालियों में धान लादकर किसान विधानभवन के घेराव को निकले थे।
भाकियू के राष्‍ट्रीय प्रवक्‍ता राकेश टिकैत ने बताया कि बाराबंकी के डीएम और एसएसपी ने तुरंत धान की समर्थन मूल्य पर खरीद का आश्वासन दिया है, लेकिन हमारी मांग है कि पूरे प्रदेश में खरीद शुरू की जाये। इसलिए हमने राज्य सरकार को एक घंटे का समय दिया है, अगर खरीद शुरू नहीं की गई तो फिर हम विधानसभा का घेराव करेंगे।
बाराबंकी में खरीद तुरंत शुरू करने 
उन्होंने बताया कि डीएम ने बाराबंकी के सभी खरीद केंद्रों को तुरंत चालू करने का आश्वासन दिया है, तथा एक लाख रुपये तक की खरीद के लिए किसानों को रजिस्ट्रेशन भी नहीं कराना होगा। 
उन्होंने बताया कि प्रदेश में धान की खरीद नहीं होने के कारण किसानों को गेहूं की बुवाई समेत अगली फसल के लिए समय पर पैसे नहीं मिल पा रहे है। चालू खरीफ विपणन सीजन 2018-19 के लिए केंद्र सरकार ने धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 1,750 और 1,770 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है जबकि सरकारी खरीद के अभाव में किसान व्यापारियों का औने-पौने दाम पर धान बेचने को मजबूर हैं।
प्रदेश सरकार ने चालू खरीफ में 50 लाख टन धान की खरीद का लक्ष्य रखा हुआ है जबकि भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के अनुसार 16 नवंबर तक राज्य से केवल 40 हजार टन धान की एमएसपी पर खरीद ही हुई है। सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार ने धान की खरीद के लिए 638 खरीद केंद्र भी खोले हुए हैं, लेकिन अधिकतर खरीद केंद्रों पर खरीद नहीं हो रही है। ..............  आर एस राणा

जम्मू-कश्मीर और हिमाचल में बारिश तथा बर्फबारी की संभावना, दक्षिणी राज्यों में होगी बारिश

आर एस राणा
नई दिल्ली। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार आगामी 24 घंटों के दौरान उत्तर भारत के जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के कई क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी की संभावना है। उधर दक्षिण भारत के तमिलनाडु, केरल, दक्षिण कर्नाटक और आंध्र प्रदेश तथा पूर्वोत्तर के कई राज्यों में बारिश होने का अनुमान है।
आईएमडी के मुताबिक, अरब सागर में लो प्रेशर की वजह से तेज आंधी-तूफान केरल के तटीय इलाकों को अपनी चपेट में ले सकता है। इधर बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवात गाजा के तमिलनाडु के तट से टकराने के बाद केरल की आेर बढ़ने से यहां खतरा हो गया है। वहीं हिंद महासागर की आेर से भी भारत के दक्षिण प्रायद्वीपीय तटीय इलाके में हालात बिगड़ सकते हैं। इन हालातों में तमिलनाडु आैर केरल में आंधी-तूफान के साथ बारिश की आशंका है। इससे पहले तमिलनाडु में चक्रवात गाजा की वजह से जानमाल का काफी नुकसान हुआ है।
प्रायद्वीप और हिंद महासागर पर चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र 
मौसम विभाग के अनुसार प्रायद्वीप और हिंद महासागर पर एक और चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र अगले 24 घंटों के दौरान निम्न दबाव के क्षेत्र में तब्दील हो सकता है। असम और आसपास के इलाकों में एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र बना हुआ है।
हिमालय के पश्चिम में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस 
मौसम विभाग के पूर्वाअनुमान के अनुसार हिमालय के पश्चिम में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस की वजह से जम्मू-कश्मीर आैर हिमाचल में बर्फबारी या बारिश हो सकती है। इसका असर हिमालय से लगे मैदानी इलाकों पर भी पड़ेगा। इन राज्यों में भी कहीं-कहीं बारिश हो सकती है आैर ठंडी हवाएं चल सकती हैं।
केरल, पश्चिम तमिलनाडु और लक्षद्वीप द्वीप में हुई तेज बारिश
बीते 24 घंटों के दौरान केरल, पश्चिम तमिलनाडु और लक्षद्वीप द्वीप पर भारी बारिश हुई। इसके अलावा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के कुछ हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश देखी गई। उधर तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और असम के कुछ  हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हुई।.......... आर एस राणा

नए आलू की आवक बढ़ने से घटने लगे भाव, किसानों को हो रहा है नुकसान

आर एस राणा
नई दिल्ली। पंजाब और हिमाचल से नए आलू की आवक बढ़ने से कीमतों में गिरावट आने लगी है। दिल्ली की आजादपुर मंडी में पिछले दस दिनों में ही आलू की कीमतों में 1,000 से 1,200 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आ चुकी है जिस कारण किसानों को घाटा उठाना पड़ रहा है।
आजादपुर मंडी की पोटेटो ऐंड अनियन मर्चेंट एसोसिएशन (पोमा) के महासचिव राजेंद्र शर्मा ने बताया कि पंजाब और हिमाचल प्रदेश से नए आलू की आवक बढ़ी है, साथ ही उत्तर प्रदेश से पुराने आलू की आवक भी ज्यादा हो रही है। इसीलिए कीमतों में गिरावट आई है। नए आलू का भाव घटकर शनिवार को 600 से 800 रुपये प्रति 50 किलो रह गया जबकि 8 नवंबर को इसका भाव 1,200 से 1,400 रुपये प्रति 50 किलो था। इसी तरह से उत्तर प्रदेश के पुराने आलू का भाव घटकर 300 से 600 रुपये प्रति 50 किलो रह गया। इसके भाव में भी 200 से 300 रुपये प्रति 50 किलो की गिरावट आ चुकी है।
मेरठ जिले के बहचौला गांव के आलू किसान अम्बूज शर्मा ने बताया कि उनके पास पुराना आलू कोल्ड स्टोर में रखा हुआ है जिसके भाव घटकर 4 से 5 रुपये प्रति किलो रह गए हैं, इन भाव में कोल्ड स्टोर का खर्च भी नहीं निकल रहा है। उन्होंने बताया कि नए आलू की आवक दिसंबर-जनवरी में बनेगी, जबकि भाव में पहले ही मंदा आना शुरू हो गया है।
हरियाणा और उत्तर प्रदेश से आगे बढ़ेगी आवक
राजेंद्र शर्मा ने बताया कि पंजाब के होशियारपुर और हिमाचल के उना से नया आलूु आ रहा है जबकि आगे जालंधर और लुधियाना से आवक बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि दिसंबर में हरियाणा से आवक शुरू हो जायेगी, उसके बाद उत्तर प्रदेश के आलू की आवक बनेगी। दिल्ली में इस समय आलू की दैनिक आवक करीब 100 ट्रक की हो रही है, इसमें 35 से 40 ट्रक नए आलू के आ रहे हैं।
आलू का उत्पादन बढ़ने का अनुमान
कृषि मंत्रालय के पहले आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2017-18 में आलू का उत्पादन बढ़कर 493,44,000 टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसका उत्पादन 486,05,000 टन का ही हुआ था।
वित्त वर्ष 2017-18 में बढ़ा निर्यात
राष्ट्रीय बागवानी एवं अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (एनएचआरडीएफ) के अनुसार वित्त वर्ष 2017-18 के पहले 11 महीनों अप्रैल से फरवरी के दौरान 3,07,409 टन आलू का निर्यात हुआ है जबकि वित्त वर्ष 2016-17 में कुल निर्यात 2,55,725 टन का ही हुआ था।...........  आर एस राणा

रबी फसलों की बुवाई 16 फीसदी पिछे, मोटे अनाज और दलहन की बुवाई ज्यादा प्रभावित

आर एस राणा
नई दिल्ली। मानसूनी बारिश देश के कई राज्यों में सामान्य से कम होने का असर चालू रबी सीजन की बुवाई पर देखा जा रहा है। रबी फसलों की बुवाई चालू सीजन में 15.95 फीसदी पिछड़ रही है जबकि मोटे अनाज की बुवाई 45.28 फीसदी और दलहन की बुवाई 18.02 फीसदी पिछे चल रही है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू रबी में अभी तक देशभर में 191.12 लाख हेक्टेयर में ही रबी फसलों की बुवाई हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 227.41 लाख हेक्टेयर में इनकी बुवाई हो चुकी थी। रबी की प्रमुख फसल गेहूं की बुवाई चालू सीजन में 51.63 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 54.28 लाख हेक्टेयर में ही इसकी बुवाई हो पाई थी।
दलहन की बुवाई में आई कमी
रबी दलहन की बुवाई चालू सीजन में 18.02 फीसदी घटकर अभी तक केवल 69.95 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 85.32 लाख हेक्टेयर में दालों की बुवाई हो चुकी थी। रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुवाई घटकर 50.23 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 64 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। मसूर की बुवाई 6.81 लाख हेक्टेयर में और मटर की 4.09 लाख हेक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुवाई क्रमश: 8.58 और 4.65 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।
मोटे अनाजों की बुवाई 45.28 फीसदी पिछे
मोटे अनाजों की बुवाई चालू रबी में 45.28 फीसदी पिछे चल रही है तथा अभी तक इनकी बुवाई केवल 16.27 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुवाई 29.74 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। मोटे अनाजों में ज्वार की बुवाई 11.03 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुवाई 22.61 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। मक्का की बुवाई पिछले साल के 4.30 लाख हेक्टेयर से घटकर 3.40 लाख हेक्टेयर में हुई है।
तिलहन की बुवाई भी पिछड़ी
रबी तिलहन की बुवाई भी चालू सीजन में 5.34 फीसदी पिछे चल रही है तथा अभी तक देशभर में इनकी बुवाई केवल 46.85 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 49.50 लाख हेक्टेयर में इनकी बुवाई हो चुकी थी। तिलहन की प्रमुख फसल सरसों की बुवाई घटकर 43.34 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 44.46 लाख हेक्टेयर में इसकी बुवाई हो चुकी थी। मूंगफली की बुवाई भी पिछले साल के 1.95 लाख हेक्टेयर से घटकर चालू रबी में 1.36 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है। अलसी की बुवाई भी पिछले साल के 1.47 लाख हेक्टेयर से घटकर 1.25 लाख हेक्टेयर में ही हुई है।.............  आर एस राणा

सरकार डीओसी के निर्यात पर इनसेंटिव करेगी दोगुना, तिलहन किसानों को राहत देने की तैयारी

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार तिलहनों की कीमतों में सुधार लाने के लिए डीओसी के निर्यात पर इनसेंटिव को 5 फीसदी से बढ़ाकर 10 फीसदी करने की तैयारी कर रही है। सरकार का मकसद डीओसी के निर्यात को बढ़ावा देना है, जिसका असर तिलहन की कीमतों पर भी पड़ेगा।
सूत्रों के अनुसार केद्र सरकार सरसों, राइसब्रान, मूंगफली और केस्टर डीओसी के निर्यात पर इनसेंटिव को बढ़ाकर 10 फीसदी करेगी, जबकि वर्तमान में इनके निर्यात पर निर्यातकों को 5 फीसदी इनसेंटिव मिल रहा है। सोया डीओसी के निर्यात पर इनेंसटिव पहले ही 10 फीसदी है। डीओसी के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए इनसेंटिव को बढ़ाया जायेगा, जिससे घरेलू बाजार में तिलहन की कीमतों में सुधार आने का अनुमान है।
सरसों के साथ केस्टर और मूंगफली डीओसी का निर्यात बढ़ने की उम्मीद 
सोयाबीन प्रोससेर्स एसोसिएशन आॅफ इंडिया (सोपा) के उपाध्यक्ष नरेश गोयनका ने बताया कि इनसेंटिव में बढ़ोतरी से सरसों के साथ ही मूंगफली और केस्टर डीओसी के निर्यातकों को फायदा होगा। उन्होंने बताया कि सरसों डीओसी के निर्यात में चालू वित्त वर्ष 2018-19 के पहले सात महीनों अप्रैल से अक्टूबर के दौरान अच्छी बढ़ोतरी हुई है, इनसेंटिव बढ़ाने पर इसका निर्यात आगे और बढ़ेगा। अप्रैल से अक्टूबर के दौरान सरसों डीओसी का निर्यात 6,80,216 टन का हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2017-18 की समान अवधि में इसका निर्यात 3,23,358 टन का ही हुआ था।
अक्टूबर में डीओसी निर्यात में आई भारी गिरावट
साल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन आॅफ इंडिया (एसईए) के अनुसार अक्टूबर में डीओसी के निर्यात में 58 फीसदी की भारी गिरावट आकर कुल निर्यात 84,183 टन का ही हुआ था जबकि पिछले साल अक्टूबर में 2,00,158 टन डीओसी का निर्यात हुआ था।
चालू वित्त वर्ष 2018-19 के अप्रैल से अक्टूबर के दौरान डीओसी का निर्यात 6.5 फीसदी फीसदी बढ़कर 15,82,589 टन का हुआ है जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष 2017-18 की समान अवधि में इनका निर्यात 14,86,036 टन का ही हुआ है। .............  आर एस राणा

अक्टूबर में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 8 फीसदी बढ़ा, तेल वर्ष 2017-18 में घटा

आर एस राणा
नई दिल्ली। खाद्य एवं अखाद्य तेलों के आयात में अक्टूबर में 8 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल आयात 12,56,433 टन का हुआ है जबकि पिछले साल अक्टूबर में इनका आयात 11,67,397 टन का ही हुआ था।
साल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन आॅफ इंडिया (एसईए) के अनुसार तेल वर्ष 2017-18 (नवंबर-17 से अक्टूबर-18) के दौरान खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 2.68 फीसदी घटकर 150.2 लाख टन का ही हुआ है जबकि पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में इनका आयात 154.4 लाख टन का आयात हुआ था। तेल वर्ष 2017-18 के दौरान हुए कुल आयात में खाद्य तेलों की हिस्सेदारी 145,16,532 टन की है, जबकि 5,09,748 टन अखाद्य तेलों का आयात हुआ है। खाद्य एवं अखाद्य तेलों के आयात में पिछले साल में 27 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
विश्व बाजार में भाव घटने से आयात हुआ सस्ता
एसईए के अनुसार विश्व बाजार में कीमतों में आई गिरावट से आयातित खाद्य तेलों के भाव में मंदा आया है। आरबीडी पॉमोलीन का भाव भारतीय बंदरगाह पर अक्टूबर 2018 में घटकर 568 डॉलर प्रति टन रह गया जबकि पिछले साल अक्टूबर में इसका भाव 716 डॉलर प्रति टन था। इसी तरह से क्रुड पॉम तेल का भाव इस दौरान पिछले साल के 717 डॉलर प्रति टन से घटकर 529 डॉलर प्रति टन रह गए। ...........  आर एस राणा

दलहन आयात 67 फीसदी घटा, उत्पादक मंडियों में भाव एमएसपी से नीचे

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार की सख्ती से पहली छमाही में दालों के आयात में 67 फीसदी की भारी कमी आई है, हालांकि उत्पादक दालों के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से 1,000 से 1,500 रुपये प्रति क्विंटल से नीचे ही बने हुए हैं।
कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चालू वित्त वर्ष 2018-19 के अप्रैल से सितंबर के दौरान दालों का आयात घटकर 10.73 लाख टन का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2017-18 की समान अवधि में 32.96 लाख टन दालों का आयात हुआ था। मूल्य के हिसाब से चालू वित्त वर्ष 2018-19 की पहली छमाही में 3,097 करोड़ रुपये मूल्य की दालों का आयात हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 11,893 करोड़ रुपये मूल्य की दालों का आयात हुआ था।
मंडियों में समर्थन मूल्य से भाव नीचे
दलहन कारोबारी चंद्रशेखर एस नादर ने बताया की गुलबर्गा मंडी में गुरूवार को उड़द के भाव 4,200 से 4,500 रुपये प्रति क्विंटल रहे। केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2018-19 के लिए उड़द का एमएसपी 5,600 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है। इसी तरह से मंडी में अरहर भी 4,000 से 4,400 रुपये तथा मूंग 5,500 से 6,000 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है।
नेफेड लगातार दालों की बिक्री कर रही है, तथा नेफेड के पास दालों का बकाया स्टॉक ज्यादा है इसलिए जब तक नेफेड की बिकवाली बंद नहीं होगी, दालों की कीमतों में बड़ी तेजी की संभावना नहीं हैं। चालू खरीफ में अरहर और उड़द की पैदावार में कमी आने की आशंका है।
दलहन निर्यात में हुई बढ़ोतरी
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2018-19 की पहली छमाही अप्रैल से सितंबर के दौरान 1,71,656 टन दालों का निर्यात हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2017-18 की समान अवधि में 74,406 टन दालों का निर्यात हुआ था। मूल्य के हिसाब से दालों का निर्यात चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में 1,054 करोड़ रुपये का हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में केवल 724 करोड़ रुपये का ही निर्यात हुआ था।
दलहन आयात पर सख्ती
केंद्र सरकार ने मटर के आयात पर एक लाख टन की मात्रा तय कर रखी है, तथा तय मात्रा का आयात पहले ही हो चुकी है। इसलिए मटर का आयात वर्तमान में नहीं हो रहा है जबकि देश में दालों के कुल आयात में मटर की हिस्सेदारी 50 फीसदी से ज्यादा की होती है। वित्त वर्ष 2017-18 में दालों का कुल आयात 56.1 लाख टन का हुआ था, जिसमें मटर की हिस्सेदारी 28.70 लाख टन की थी। इसी तरह से अरहर के आयात की 2 लाख टन की और मूंग तथा उड़द के आयात की दिसंबर आखिर तक 1.50 लाख टन की मात्रा तय कर रखी है। चना और और मसूर के आयात पर क्रमश: 50 और 30 फीसदी का आयात शुल्क लगा रखा है।
दलहन का रिकार्ड उत्पादन
कृषि मंत्रालय के चौथे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2017-18 में दालों का रिकार्ड 252.3 लाख टन का उत्पादन हुआ है जोकि इसके पिछले साल के 231.3 लाख टन से ज्यादा है।......  आर एस राणा