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06 February 2016

जनवरी महीने में चावल का निर्यात 45 फीसदी घटा


आर एस राणा
नई दिल्ली। जनवरी महीने में देष से चावल के निर्यात में 45 फीसदी की भारी गिरावट आई है। जनवरी महीने में देष से केवल 8.08 लाख टन चावल का ही निर्यात हो पाया है जबकि दिसंबर महीने में 14.71 लाख टन चावल का निर्यात हुआ था।
विष्व बाजार में मांग कम होने का असर भारतीय चावल के निर्यात पर पड़ा है। खासकर के जनवरी महीने में बासमती चावल के निर्यात में सबसे ज्यादा कमी देखी गई। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार जनवरी महीने में चावल के निर्यात में जहां बासमती की हिस्सेदारी केवल 38.12 फीसदी थी वहीं गैर-बासमती चावल की हिस्सेदारी 61.87 फीसदी है। जनवरी महीने में देष से केवल 3.08 लाख टन बासमती चावल का ही निर्यात हुआ है जबकि दिसंबर महीने में 5 लाख टन गैर-बासमती चावल का निर्यात हुआ था।
एपीडा के अनुसार चालू वित वर्ष 2015-16 के पहले 8 महीनों अप्रैल से नवंबर के दौरान देष से 26.90 लाख टन बासमती चावल का निर्यात हुआ है जबकि गैर-बासमती चावल का निर्यात इस दौरान 42.92 लाख टन का हुआ है।.......आर एस राणा

असामान्य तापमान से पंजाब, हरियाणा में गेहूं की उत्पादकता प्रभावित होने की आषंका


आर एस राणा
नई दिल्ली। असामान्य तापमान से पंजाब और हरियाणा में चालू रबी में गेहूं की उत्पादकता प्रभावित होने की आषंका है। पंजाब और हरियाणा में इस समय दिन का तामपान 23 से 35 डिग्री और रात का तामपान 6 से 10 डिग्री चल रहा है। अगर इन राज्यों में यही स्थिति बनी रही तो चालू रबी में गेहूं की प्रति हैक्टेयर उत्पादकता घटने की आषंका है। सामान्यतः गेहूं की फसल को पकने के लिए 150 से 160 दिन लगते हैं जबकि इस समय 75 से 90 दिन की फसल हो चुकी है। इस समय फसल को ठंड की जरुरत है लेकिन दिन का तापमान सामान्य से ज्यादा गर्म है जिसका असर पौधों की ग्रोथ पर पड़ सकता है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू रबी में गेहूं की बुवाई में 4.38 फीसदी की कमी आकर कुल बुवाई 292.52 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 305.94 लाख हैक्टेयर में हुई थी।

05 February 2016

खराब मौसम से कृषि उत्पादन हो सकता है प्रभावित : प्रणव मुखर्जी


प्रकृति इस साल भी हमारे ऊपर मेहरबान नहीं रही है। अपर्याप्त मानसून के बाद शुष्क दौर के कारण लगातार दूसरे वर्ष कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है। यह गंभीर चिंता का विषय है। पूसा में आयोजित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के 54वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए प्रणव मुखर्जी ने यह बात कही। कृषि क्षेत्र के बड़े हिस्से सूखे, बाढ़ और तूफान जैसी जलवायु संबंधी कठिन परिस्थितियों से प्रभावित है। राष्टï्रपति ने ऐसी चुनौतियों से निपटने के लिए गंभीर प्रयास किए जाने का आह्वान किया ताकि भारतीय कृषि को मौसम के उतार चढ़ाव झेलने में समर्थ बनाया जा सके।
राष्ट्रपति ने कहा कि फसल वर्ष 2014-15 (जुलाई से जून) के दौरारन बारिश में 12 प्रतिशत की कमी के कारण देश का खाद्यान्न उत्पादन घटकर 25.3 करोड़ टन रह गया, जबकि वर्ष 2013-14 में 26.5 करोड़ टन का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ था।
उन्होंने कहा कि यह गंभीर प्रयास करने का समय है क्योंकि भारत में खेती योग्य भूमि का लगभग 80 प्रतिशत भाग सूखा, बाढ़ और समुद्री तूफान जैसी प्राकृतिक कठिनाइयों से प्रभावित होता रहता है। खाद्य तेलों और दलहनों पर भारत की निर्भरता के बारे में उन्होंने कहा कि भविष्य में इन चीजों की मांग बढऩे की संभावना है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण ए समस्याएं और जटिल हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि आईएआरआई को जैव प्रौद्योगिकी, सिंथेटिक जीव विज्ञान, नैनो प्रौद्योगिकी, कंप्यूटेशन जीवविज्ञान, सेंसर प्रौद्योगिकी जैसे अग्रणी विज्ञान से पैदा हुए अवसरों का उपयोग कर विषम जलवायु को झेलने लायक प्रौद्योगिकी समाधान विकसित करना चाहिए।

04 February 2016

सरसों की कीमतों में 10 फीसदी की गिरावट आने की आषंका


आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी में सरसों की बुवाई में जरुर कमी आई है लेकिन तेलों में मांग कमजोर होने से सरसों की कीमतों में 8 से 10 फीसदी की गिरावट आने की आषंका है। गुरुवार को राजस्थान की अलवर मंडी में सरसों का भाव 3,950 से 4,150 रुपये, हरियाणा की दादरी मंडी में 3,750 रुपये तथा मध्य प्रदेष की मोरेना मंडी में 4,200 रुपये तथा जयपुर मंडी में पुरानी सरसों 4,325 रुपये और नई सरसों 4,270 रुपये प्रति क्विंटल रही।
उत्पादक मंडियों में सरसों की दैनिक आवक बढ़ने लगी है तथा मौजूदा मौसम को देखते हुए आगामी दिनों में दैनिक आवक और बढ़ेगी। इस समय सरसों खल में उठाव कमजोर है जबकि तेलों की उपलब्धता ज्यादा होने के कारण सरसों तेल की मांग भी सीमित बनी हुई है। हालांकि चालू रबी में सरसों की बुवाई में कमी आई है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू रबी में सरसों की बुवाई 64.51 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 65.17 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू रबी में सरसों की पैदावार का लक्ष्य 81.09 लाख टन का रख हुआ है जबकि पिछले साल इसकी पैदावार 63.09 लाख टन की हुई थी। जानकारों के अनुसार सरसों की पैदावार पिछले साल की तुलना में ज्यादा होने का अनुमान है साथ ही इस बार क्वालिटी काफी अच्छी है।.....आर एस राणा

Wheat Export Decreases To 2223.98 T In January-2016



 
India exported 2223.98 tonne wheat in January-2016,quite lower than exported volume(7338.29 tonne) in December-2015.Import was registered at 4950 tonne during the same time against 28025.03 tonne imported in December-2015.Average monthly  FoB quote for exported volume in January-2016 was $324.42 per tonne while average monthly CiF quote for imported volume was$253.67 per tonne. It indicates itself that wheat is cheaper in global market.

उत्पादन में कमी की आषंका से लालमिर्च तेज


आर एस राणा
नई दिल्ली। आंध्रप्रदेष में लालमिर्च की पैदावार पिछले साल की तुलना में घटने की आषंका है। जिसे देखते हुए मसाला कंपनियों के साथ ही स्टॉकिस्टों ने खरीद बढ़ा दी है इसीलिए इसकी कीमतों में तेजी देखी जा रही है। हालांकि उत्पादक मंडियों में लालमिर्च की दैनिक आवक और बढ़ेगी लेकिन स्टॉकिस्टों की खरीद को देखते हुए मौजूदा कीमतों में और भी तेजी आने की संभावना है।
गुरुवार को गुंटूर मंडी में लालमिर्च की दैनिक आवक 50,000 बोरी की हुई जबकि खम्मम मंडी मंडी में इसकी दैनिक आवक 30,000 बोरी की हुई। गुंटूर में 341 क्वालिटी की लालमिर्च के भाव 11,500 से 12,500 रुपये तथा तेजा क्वालिटी की लालमिर्च के भाव 11,500 से 12,200 रुपये प्रति क्विंटल रहे। ब्याडगी क्वालिटी की लालमिर्च के भाव मंडी में 11,300 से 12,000 रुपये तथा फटकी क्वालिटी की लालमिर्च के भाव 7,500 से 8,500 रुपये प्रति क्विंटल रहे। खम्मम मंडी में तेजा क्वालिटी की लालमिर्च के भाव 11,000 से 12,000 रुपये प्रति क्विंटल रहे।
चालू सीजन में आंध्रप्रदेष में लालमिर्च की प्रति हैक्टेयर उत्पादकता में कमी आने की आषंका है जिससे इसकी कुल पैदावार पिछले साल की तुलना में कम रहेगी। इस समय लालमिर्च में घरेलू मसाला कंपनियों के साथ ही, निर्यातकों और स्टॉकिस्टों की खरीद अच्छी बनी हुई है जिससे इसकी मौजूदा कीमतों में 400 से 500 रुपये प्रति क्विंटल की और तेजी आने का अनुमान है।
भारतीय मसाला बोर्ड के अनुसार चालू वित वर्ष 2015-16 की पहली छमाही में लालमिर्च का निर्यात बढ़कर 177,000 टन का हो चुका है जबकि पिछले वित वर्ष की पहली छमाही में इसका निर्यात 164,081 टन का हुआ था।.......आर एस राणा

Indian Basmati FOB Trades Under Pressure, Pakistan's Basmati Rice Price Firm


Indian FOB for 1121 steam in the month of January moved down from last month and currently is in the range of USD 805-810/MT which is down by around 7.43% from last month price. Average basmati rice price declined due to slackened demand from retailers against adequate supply push the price in southward direction. Pakistani basmati price has unlikely increased from USD 716/MT to 734$/MT, according to the UN's Food and Agriculture Organization (FAO). Currently Pakistani basmati FOB is hovering in the range of USD 716/MT which is up by 2.47% from last month FOB of USD 716/MT.