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01 October 2016

मूंगफली की कीमतों में गिरावट आने का अनुमान

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में मूंगफली की बुवाई में हुई बढ़ोतरी से इसकी पैदावार ज्यादा होने का अनुमान है। इसलिए आगामी दिनों में दैनिक आवक बढ़ने पर मूंगफली के साथ ही इसके तेल की कीमतों में भी गिरावट आने का अनुमान है। उत्पादक मंडियों में इस समय मूंगफली का भाव 5,000 से 5,400 रुपये प्रति क्विंटल है जबकि तेल का भाव 1,190 रुपये प्रति 10 किलो है।
चालू खरीफ में मूंगफली की बुवाई बढ़कर 46.93 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई केवल 36.38 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई थी। प्रमुख उत्पादक राज्य गुजरात में मूंगफली की बुवाई बढ़कर 16.44 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 12.96 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी। अन्य राज्यों में राजस्थान में बुवाई बढ़कर 6.17 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 4.13 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी। तमिलनाडु में चालू खरीफ में मूंगफली की बुवाई 2 लाख हैक्टयेर में, महाराष्ट्र में 2.11 लाख हैक्टेयर में, मध्य प्रदेष में 2.55 लाख हैक्टेयर में और कर्नाटका में 5.23 लाख हैक्टेयर तथा आंध्रप्रदेष में 9.29 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी।
कृषि मंत्रालय के पहले आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2016-17 में खरीफ सीजन में मूंगफली की पैदावार बढ़कर 64.98 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसकी पैदावार 53.40 लाख टन की हुई थी।
मूंगफली दाने के निर्यात में चालू वित्त वर्ष 2016-17 के पहले पांच महीनों अप्रैल से अगस्त के दौरान बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान इसका निर्यात बढ़कर 2,08,476 टन का हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 1,81,507 टन का ही हुआ था। मूल्य के हिसाब से मूंगफली दाने के निर्यात में इस दौरान 23.75 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल निर्यात 1,819.94 करोड़ रुपये का हुआ है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 1,470.67 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ था।............आर एस राणा

एग्री कमोडिटी में मुनाफे का अच्छा अवसर

एग्री कमोडिटी दलहन, तिलहन, और मसालों के साथ ही गेहूं, मक्का, जौ, कपास, खल, बिनौला, ग्वार सीड, चीनी, और कपास आदि की कीमतों में कब आयेगी तेजी तथा आगे की रणनीति कैसे बनाये, भाव में कब आयेगी तेजी, किस भाव पर स्टॉक करने पर मिलेगा मुनाफा, क्या रहेगी सरकार की नीति, आयात-निर्यात की स्थिति के साथ ही विदेष में कैसी है पैदावार, इन सब की स्टीक जानकारी के लिए हमसे जुड़े............एग्री कमोडिटी की दैनिक रिपोर्ट के साथ ही मंडियों के ताजा भाव आपको ई-मेल से हिंदी में भेजे जायेंगे

---------------------खरीफ फसलों में अरहर,  किन भाव पर स्टॉक करने से मिलेगा फायदा, बाजरा, मक्का, सोयाबीन, मूंगफली, कपास, केस्टर सीड और ग्वार सीड का भविष्य कैसा रहेगा, इनके निर्यात-आयात की क्या हैं संभावनाएं, इन सभी की स्टीक जानकारी कें लिए हमसे जुड़े। अगले सप्ताह इनकी विस्तृत खबरें मिलेंगी, केवल ई-मेल के माध्यम से।

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आर एस राणा
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केस्टर सीड की कीमतों में तेजी की संभावना

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में केस्टर सीड की बुवाई में कमी आई है, साथ ही गुजरात और राजस्थार में सितंबर में बारिष भी कम हुई है जिससे केस्टर सीड की कीमतों में आगामी दिनों और तेजी आने का अनुमान है। केस्टर सीड के भाव इस समय मिल पहुंच 840 रुपये प्रति 20 किलो चल रहे है जबकि मध्य नवंबर तक इसके भाव बढ़कर 900 रुपये प्रति 20 किलो होने का अनुमान है।
जानकारों के अनुसार इस समय केस्टर तेल में निर्यात मांग अच्छी है। घरेलू मंडियों में केस्टर तेल का भाव 875 रुपये प्रति 10 किलो है। केस्टर सीड की नई फसल जनवरी महीने में आती है जबकि आवक का दबाव फरवरी-मार्च में होता है। चालू सीजन में एक तो बुवाई कम हुई है, साथ ही प्रमुख उत्पादक राज्य गुजरात और राजस्थान में सितंबर महीने में हुई कम बारिष से इसके प्रति हैक्टेयर उत्पादन में भी कमी आने की आषंका है। इस समय उत्पादक राज्यों में मौसम गर्म बना हुआ है जिसका असर फसल पर पड़ रहा है। इसलिए आगे भाव में तेजी आने का ही अनुमान है।
साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएषन के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2016-17 के पहले चार महीनों अप्रैल से जुलाई के दौरान केस्टर तेल का निर्यात बढ़कर 1,74,846 टन का हो चुका है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 1,71,804 टन का हुआ था। वित्त वर्ष 2015-16 में कुल निर्यात 4.96 लाख टन का हुआ था जबकि चालू वित्त वर्ष में निर्यात पिछले साल की तुलना में ज्यादा होने का अनुमान है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में केस्टर सीड की बुवाई केवल 8.30 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक बुवाई 10.90 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।..............आर एस राणा

30 September 2016

ग्वार गम उत्पादों के निर्यात में कमी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू महीने चौथे सप्ताह 19 से 25 सितंबर के दौरान ग्वार गम उत्पादों ग्वार गम पाउडर, ग्वार स्पलिट और ग्वार मील के निर्यात में कमी आई है। साथ विष्व बाजार में इनकी कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है।
सितंबर के चौथे सप्ताह में 6,820 टन ग्वार गम उत्पादों का निर्यात हुआ है जबकि इसके पहले सप्ताह में 8,791 टन ग्वार गम उत्पादों का निर्यात हुआ था। चौथे सप्ताह में ग्वार गम पाउडर का निर्यात 5,007 टन का हुआ है तथा इसका निर्यात औसतन 1,350 डॉलर प्रति टन की दर से हुआ है जबकि इसके पिछले सप्ताह में 5,253 टन ग्वार गम पाउडर का निर्यात हुआ था।
19 से 25 सितंबर के दौरान ग्वार स्पलिट का निर्यात केवल 280 टन का ही हुआ है जबकि इसके पहले सप्ताह में 1,184 टन का हुआ था। चौथे सप्ताह में जहां ग्वार स्पलिट का निर्यात औसतन 968.06 डॉलर प्रति टन की दर से हुआ है वहीं, तीसरे सप्ताह में इसके निर्यात सौदे 983.4 डॉलर प्रति टन की दर से हुए थे। ग्वार मील का निर्यात चौथे सप्ताह में घटकर 1,533 टन का हुआ है जिसका निर्यात औसतन 556.69 डॉलर प्रति टन की से हुआ है।
ग्वार सीड की नई फसल की आवक षुरु हो चुकी है, गुरुवार को उत्पादक मंडियों इसकी दैनिक आवक करीब 25,000 बोरी की हुई। प्रमुख उत्पादक राज्यों राजस्थान और हरियाणा में ग्वार उत्पादक क्षेत्रों में बारिष नहीं होने से उत्पादन अनुमान में कमी आने की आषंका है। पहले चालू सीजन में ग्वार सीड का उत्पादन अनुमान सवा करोड़ बोरी का लगाया जा रहा था जोकि अब घटाकर 75 से 80 लाख बोरी ही होने का अनुमान है। हालांकि ग्वार गम उत्पादों में निर्यात मांग कम है, साथ ग्वार सीड का बकाया स्टॉक भी मंडियों में खपत से ज्यादा है लेकिन स्टॉकिस्टों की सक्रियता से भाव में तेजी आने की संभावना है।
चालू वित्त वर्ष 2016-17 के पहले पांच महीनों अप्रैल से अगस्त के दौरान ग्वार गम उत्पादों का निर्यात घटकर 1,30,922 टन का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 1,42,629 टन का हुआ था। मूल्य के हिसाब से चालू वित्त वर्ष 2016-17 के पहले पांच महीनों अप्रैल से अगस्त के दौरान ग्वार गम उत्पादों का निर्यात 40.63 फीसदी घटकर केवल 988.37 करोड़ रुपये का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 1,664.87 करोड़ रुपये का हुआ था।............आर एस राणा

चावल निर्यात में हुई बढ़ोतरी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2016-17 के पहले पांच महीनों अप्रैल से अगस्त में बासमती के साथ ही गैर-बासमती चावल के निर्यात में बढ़ोतरी हुई है। सूत्रों के अनुसार चालू वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों में बासमती चावल का निर्यात बढ़कर 17,75,684 टन का हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 16,78,797 टन का हुआ था।
गैर बासमती चावल का निर्यात चालू वित्त वर्ष 2016-17 के पहले पांच महीनों अप्रैल से अगस्त के दौरान बढ़कर 30,08,238 टन का हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 29,83,915 टन का हुआ था।
हालांकि मूल्य के हिसाब से चालू वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों में बासमती चावल में 5.81 फीसदी की गिरावट आई है। इस दौरान देष से 9,368.23 करोड़ रुपये मूल्य का बासमती चावल का निर्यात हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 9,945.81 करोड़ रुपये का हुआ था। गैर-बासमती चावल के निर्यात में इस दौरान मूल्य के हिसाब से 5.94 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल 7,394.67 करोड़ रुपये का हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 6,979.80 करोडऋ रुपये का हुआ था।..........आर एस राणा

इस बार सामान्य से 3 फीसदी कम हुई बारिश

आज मॉनसून सीजन का अंतिम दिन है और इस पूरे सीजन के दौरान देश में सामान्य से 3 फीसदी कम बारिश हुई है। हालांकि करीब 80 फीसदी इलाकों में सामान्य या इससे ज्यादा बारिश हुई है। लेकिन बारिश की सबसे ज्यादा कमी पंजाब, हरियाणा और केरल में रही है। इन राज्यों में 25-35 फीसदी कम बारिश हुई है। वहीं राजस्थान में इस साल सबसे ज्यादा बारिश रिकार्ड की गई है।  मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना में भी अच्छी बारिश हुई है। पूरे देश में बारिश की स्थिति के बारे में बात करें तो देश के 64 फीसदी इलाकों में इस साल सामान्य बारिश हुई है। जबकि 17 फीसदी इलाकों में सामान्य से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई है। वहीं 19 फीसदी ऐसे इलाके हैं जहां सामान्य से कम बारिश हुई है।

29 September 2016

सरकार 1.70 लाख टन और दलहन का आयात करेगी

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार बफर स्टॉक के लिए 1.70 लाख टन और दलहन का आयात करेगी। उपभोक्ता मामले मंत्रालय के सचिव हेम पांडे ने बताया कि 80 हजार मसूर और 90 हजार अरहर का आयात सार्वजनिक कपंनियों के माध्यम से किया जायेगा।
उन्होंने बताया कि बफर स्टॉक के लिए सार्वजनिक कंपनियों अभी तक 1.81 लाख टन दलहन के आयात सौदे कर चुकी हैं जिसमें से 36,000 टन दलहन भारत पहुंच भी चुकी है। इसके अलावा सार्वजनिक कंपनियां अभी तक 1.20 लाख टन दलहन की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कर चुकी हैं।
चालू खरीफ विपणन सीजन 2016-17 में एमएसपी पर खरीद के लिए प्रमुख उत्पादक राज्यों में 417 खरीद केंद्र खोले जायेंगे, तथा आवष्यकता पड़ी तो इसमें और बढ़ोतरी की जायेगी। केंद्र सरकार ने 20 लाख टन दलहन का बफर स्टॉक बनाने का फैसला किया है, इसमें 10 लाख टन दलहन की खरीद घरेलू मंडियों से की जायेगी, जबकि 10 लाख टन दलहन का आयात किया जायेगा।.........आर एस राणा