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25 September 2017

26 सितंबर 2017 का मौसम पूर्वानुमान

उत्तरी पाकिस्तान के पास एक पश्चिमी विक्षोभ बना हुआ है।
मॉनसून की अक्षीय रेखा इस समय गंगानगर, कैथल, बरेली, वाराणसी, जमशेदपुर, दिघा होते हुए उत्तरी अंडमान सागर में पहुँच रही है।
उत्तरी अंडमान सागर और इससे सटे भागों पर एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र बना हुआ है। इस सिस्टम से उत्तरी तमिलनाडु और केरल होते हुए लक्षद्वीप तक विंड शीयर ज़ोन बना हुआ है।
बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों पर एक अन्य चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र विकसित हो गया है।
पिछले 24 घंटों के दौरान दक्षिण-मध्य महाराष्ट्र, आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु, झारखंड के कुछ हिस्सों और गंगीय पश्चिम बंगाल में कई जगहों पर हल्की से मध्यम और एक-दो जगह भारी वर्षा रिकॉर्ड की गई है।
तटीय आंध्र प्रदेश, दक्षिणी छत्तीसगढ़, ओड़ीशा के तटवर्ती हिस्सों, पूर्वोत्तर भारत, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी हल्की से मध्यम वर्षा की गतिविधियां देखने को मिली।
पश्चिमी, उत्तर-पश्चिमी और मध्य तथा पूर्वी भारत के शेष भागों में मौसम मुख्यतः शुष्क बना रहा।
अगले 24 घंटों के दौरान प्रमुख वर्षा वाले क्षेत्रों का ज़िक्र करें तो अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह में मौसम सक्रिय रहेगा और यहाँ मध्यम से भारी बारिश के बीच कुछ स्थानों पर मूसलाधार बौछारें गिर सकती हैं।
दक्षिणी कोंकण व गोवा, तटीय व दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक, रायलसीमा, दक्षिणी तटवर्ती आंध्र प्रदेश और उत्तरी तमिलनाडु में कई स्थानों हल्की से मध्यम वर्षा के साथ एक-दो स्थानों पर भारी वर्षा के आसार हैं।
केरल, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक, ओड़ीशा, गंगीय पश्चिम बंगाल, पूर्वोत्तर भारत, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की जा सकती है।
तेलंगाना, दक्षिणी छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड में कहीं-कहीं बादल छाने और हल्की वर्षा होने की संभावना है।
दिल्ली सहित देश के शेष सभी भागों में मौसम शुष्क बना रहेगा।...............www.skymet.com

असामान्य मौसम से खरीफ में खाद्यान्न उत्पादन में 38.6 लाख टन की कमी की आशंका

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में देश के कई राज्यों में असामान्य मानसून के कारण खरीफ में खाद्यान्न का उत्पादन 38.6 लाख टन घटकर 13.46 करोड़ टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल खरीफ सीजन में 13.85 करोड़ टन खाद्यान्न का उत्पादन हुआ था।
कृषि मंत्रालय द्वारा जारी पहले आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2017-18 में देश के कई राज्यों में जहां सूखे जैसे हालात रहे, वहीं कई राज्यों में बाढ़ व भारी बारिश से फसल को नुकसान की आशंका है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार चालू मानसून सीजन (जून से सितंबर) के पहले सप्ताह तक देशभर में औसत से 5 फीसदी कम बारिश हुई है। कृषि मंत्रालय के अनुसार अभी तक बारिश सामान्य हुई है।
खरीफ की प्रमुख फसल चावल का उत्पादन चालू खरीफ में 19.1 लाख टन कम होकर 94.48 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसका उत्पादन 96.39 लाख टन का हुआ था। इसी तरह से खरीफ दलहन का उत्पादन घटकर चालू खरीफ में 87.1 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल खरीफ सीजन में दालों का उत्पादन 94.2 लाख टन का हुआ था। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर का उत्पादन घटकर 39.9 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल खरीफ में अरहर का उत्पादन 47.8 लाख टन का हुआ था। मूंग का उत्पादन पिछले साल के 16.2 लाख टन से घटकर 13.2 लाख टन ही होने का अनुमान है। उड़द का उत्पादन चालू खरीफ में बढ़कर 25.3 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसका उत्पादन 21.7 लाख टन का हुआ था।
मोटे अनाजों में मक्का का उत्पादन चालू खरीफ में घटकर 187.3 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल खरीफ में 192.4 लाख टन मक्का का उत्पादन हुआ था। बाजरा का उत्पादन पिछले साल के 98 लाख टन से घटकर 86.6 लाख टन होने का अनुमान है। ज्वार का उत्पादन चालू खरीफ में बढ़कर 21.5 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल ज्वार का उत्पादन 18.5 लाख टन का ही हुआ था।
मंत्रालय के अनुसार खरीफ तिलहन का उत्पादन का घटकर चालू खरीफ में 206.79 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल खरीफ में इसका उत्पादन 224.01 लाख टन का उत्पादन हुआ था। खरीफ तिलहन की प्रमुख फसल सोयाबीन का उत्पादन घटकर 122.17 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल खरीफ में इसका उत्पादन 137.94 लाख टन का उत्पादन हुआ था। मूंगफली का उत्पादन चालू खरीफ में पिछले साल के लगभग बराबर ही 62.13 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसका उत्पादन 62.21 लाख टन का हुआ था।
पहले आरंभिक अनुमान के अनुसार कपास का उत्पादन चालू खरीफ में घटकर 322.73 लाख गांठ (एक गांठ-170 किलो) होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसका उत्पादन 330.92 लाख गांठ का हुआ था। बुवाई में हुई बढ़ोतरी से चालू खरीफ में गन्ने का उत्पादन पिछले साल से ज्यादा होने का अनुमान है। ............   आर एस राणा

24 September 2017

ग्लोबल मार्केट में सोने का दाम 1295 डॉलर के नीचे

डॉलर में बढ़त से सोने पर फिर से दबाव बनने लगा है। ग्लोबल मार्केट में सोने का दाम 1295 डॉलर के नीचे फिसल गया है। चांदी में भी करीब 0.5 फीसदी की गिरावट के साथ कारोबार हो रहा है। कच्चे तेल में भी मजबूत डॉलर का असर है और ऊपरी स्तर से दबाव दिख रहा है। ब्रेंट क्रूड 6 महीने से ज्यादा का ऊपरी स्तर छू चुका है। ब्रेंट 57 डॉलर के बेहद करीब कारोबार कर रहा है। पिछले 3 महीने में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 15 फीसदी की तेजी आ चुकी है। अमेरिका के ऑयल रिग मे फिर से गिरावट आई है और इसे देखते हुए दुनिया भर में कच्चे तेल में तेजी के सौदे पिछले 1 महीने के ऊपरी स्तर पर चला गया है। आज डॉलर के मुकाबले रुपया संभलता दिख रहा है।

23 September 2017

24 सितंबर 2017 का मौसम पूर्वानुमान

निम्न दबाव का प्रभावी क्षेत्र आगे बढ़ते हुए उत्तर प्रदेश के उत्तर और पश्चिमी हिस्सों तथा उत्तराखंड पर पहुँच गया है। इसके अलावा एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र भी आसपास के भागों पर विकसित हो गया है।
पश्चिमी विक्षोभ पूर्वी जम्मू कश्मीर पर बना हुआ है।
मॉनसून की अक्षीय रेखा इस समय पश्चिम में हिमालय के तराई क्षेत्रों से हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तरी बिहार होते हुए अरुणाचल प्रदेश तक बनी हुई है।
बंगाल की खाड़ी के मध्य से तटीय तमिलनाडु तक एक ट्रफ रेखा बनी हुई है। इसके साथ-साथ तमिलनाडु के तटीय भागों पर बंगाल की खाड़ी में ही एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र भी बना हुआ है।
उत्तरी पाकिस्तान और इससे सटे जम्मू कश्मीर के पास एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र भी विकसित हो गया है।
पिछले 24 घंटों के दौरान हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तरी मध्य प्रदेश और हरियाणा के कुछ भागों में भारी से अति भारी वर्षा रिकॉर्ड की गई है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, पूर्वोत्तर भारत और पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी कई जगहों पर हल्की से मध्यम बौछारें दर्ज की गई हैं।
गुजरात और राजस्थान के अधिकांश हिस्सों को छोड़कर देश के बाकी भागों में कुछ स्थानों पर गरज के साथ हल्की बारिश देखने को मिली।
अगले 24 घंटों के दौरान उत्तरी हरियाणा, उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना है। इन भागों में एक-दो स्थानों पर मूसलाधार वर्षा भी हो सकती है। भारी बारिश दिन के पहले भाग में होगी। दोपहर तक वर्षा में कमी आने के आसार हैं।
उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, असम और अरुणाचल प्रदेश में भी कुछ जगहों पर मध्यम बारिश होने के आसार हैं।
दक्षिणी ओड़ीशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पूर्वोत्तर भारत के बाकी भागों, पूर्वी जम्मू कश्मीर, तेलंगाना और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में हल्की मॉनसून वर्षा हो सकती है।.............www.skymet.com
गुजरात के कच्छ क्षेत्र, पश्चिमी राजस्थान और पंजाब में मौसम शुष्क बना रहेगा।
राजस्थान और गुजरात के तापमान में वृद्धि होने के आसार हैं।

एग्री कमोडिटी दैनिक न्यूज के लिए सुनहरा मौका

खरीफ फसलें सोयाबीन, मूंगफली, केस्टर सीड, ग्वार सीड, धान, बाजरा, मक्का, मूंग, उड़द, अरहर तथा कपास आदि की नई फसल की आवक उत्पादक मंडियों में अक्टूबर में चालू हो जायेगी, तथा इस बार कैसा रहगा जिंसों का बाजार, आगे किस-किस कमोडिटी में निवेश करने से होगा फायदा, या फिर किस कमोडिटी में बनेगी बड़ी तेजी, आयात और निर्यात के साथ ही केंद्र सरकार की नीतियां कैसी रहेगी, इस सब की जानकारी के लिए हमसे जुड़े। 
एग्री कमोडिटी में दैनिक न्यूज ई-मेल के माध्यम से हिंदी में मिलेंगी। इसमें आपको हर रोज एग्री जिंसों दलहन, तिलहन, ग्वार सीड, चीनी, गेहूं, मोटे अनाज, चावल तथा मसालों की तेजी-मंदी की जानकारी, निर्यात-आयात की खबरों के अलावा सरकार की नीतियां, उत्पादन तथा पैदावार की जानकारी दी जायेगी। प्रमुख उत्पादक मंडियों के एग्री जिसों के भाव शाम 5 बचे तक मिलेंगे। यह स्कीम केवल 15 अक्टूबर 2017 तक है, उसके बाद सदस्यता शुल्क बढ़ेगा।

एक महीने का सदस्यता शुल्क 1,000 रुपये, 6 महीने का सदस्यता शुल्क 5,000 रुपये और एक साल का सदस्यता शुल्क 8,000 रुपये है।
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अरहर और मूंग की बुवाई में आई कमी, उड़द की ज्यादा

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में अरहर के साथ ही मूंग की बुवाई में कमी आई है, लेकिन उड़द की बुवाई पिछले साल की तुलना में ज्यादा हुई है। कृषि मंत्रालय के अनुसार अरहर की बुवाई चालू खरीफ में घटकर 43.26 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 52.77 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। उड़द और मूंग की दैनिक आवक मौसम साफ होने के बाद बढ़ने का अनुमान है, जिससे अक्टूबर में इनके भाव में गिरावट आ सकती है। जानकारों के अनुसार बारिश सामान्य से कम होने के कारण मूंग की प्रति हैक्टेयर उत्पादकता कम होने से उत्पादन में कमी आने की आशंका है, ऐसे में दिसंबर-जनवरी में भाव तेज होने का अनुमान है। अरहर के उत्पादन में तो कमी आने की आशंका है, लेकिन केंद्रीय पूल में स्टॉक ज्यादा होने से भाव में बड़ी तेजी की उम्मीद अभी नहीं है।
मंत्रालय के अनुसार प्रमुख उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र के साथ ही मध्य प्रदेश, कर्नाटका, तेलंगाना के साथ ही आंध्रप्रदेश में भी अरहर की बुवाई कम हुई है। महाराष्ट्र में चालू खरीफ में अरहर की बुवाई घटकर 12.73 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 15.31 लाख हैक्टेयर में अरहर की बुवाई हो चुकी थी। कर्नाटका में अरहर की बुवाई घटकर 8.79 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 11.91 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। इसी तरह से मध्य प्रदेश में बुवाई घटकर 6.51 लाख हैक्टेयर में, गुजरात में 2.70 लाख हैक्टेयर में, आंध्रप्रदेश में 2.47 लाख हैक्टेयर में, तेलंगाना में 2.51 लाख हैक्टेयर में और उत्तर प्रदेश में बुवाई 3.36 लाख हैक्टेयर में हुई है।
मूंग की बुवाई चालू खरीफ में घटकर 31.73 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में मूंग की बुवाई 34.50 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। राजस्थान में मूंग की बुवाई चालू खरीफ में 15.70 लाख हैक्टेयर में, महाराष्ट्र में 5.52 लाख हैक्टेयर में, मध्य प्रदेश में 2.28 लाख हैक्टेयर में और कर्नाटका में 3.67 लाख हैक्टेयर में ही हुई है।
उड़द की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 42.88 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुवाई केवल 35.26 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। उड़द की बुवाई मध्य प्रदेश में बढ़कर 17.89 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक मध्य प्रदेश में केवल 11.68 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। अन्य राज्यों में महाराष्ट्र में 4.83 लाख हैक्टेयर में, उड़ीसा में 2.42 लाख हैक्टेयर में, राजस्थान में 5.40 लाख हैक्टेयर में और उत्तर प्रदेश में 5.96 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है।.................    आर एस राणा

बारिश की कमी से धान के साथ ही दलहन व तिलहन की बुवाई घटी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन में देश के कई राज्यों में मानसूनी बारिश सामान्य से कम होने के कारण धान, दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों की बुवाई में तो कमी आई है, लेकिन कपास के साथ ही गन्ने की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में फसलों की कुल बुवाई घटकर अभी तक केवल 1,054.97 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 1,063.28 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। खरीफ की प्रमुख फसल धान की रौपाई चालू खरीफ में घटकर 376.76 लाख हैक्टेयर में ही पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी रौपाई 381.75 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।
मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में दलहन की बुवाई घटकर 141.18 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक दलहन की बुवाई 146.26 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। दलहनी फसलों में अरहर के साथ ही मूंग की बुवाई में तो चालू खरीफ में कमी आई है लेकिन उड़द की बुवाई पिछले साल से ज्यादा हुई है।
तिलहनों की बुवाई चालू खरीफ में घटकर 172.94 लाख हैक्टेयर में ही पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में तिलहनों की बुवाई 189.45 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। तिलहनों में सोयाबीन के साथ ही मूंगफली की बुवाई भी पिछड़ रही है। सोयाबीन की बुुवाई चालू खरीफ में अभी तक केवल 105.91 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 114.72 लाख हैक्टेयर में सोयाबीन की बुवाई हो चुकी थी। मूंगफली की बुवाई भी चालू खरीफ में घटकर 41.52 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 46.88 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। केस्टर सीड की बुवाई भी चालू खरीफ में पिछड़ रही है। चालू खरीफ में केस्टर सीड की बुवाई घटकर 8.17 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 8.39 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी।
मोटे अनाजों की बुवाई चालू रबी में पिछले साल की तुलना में घटकर अभी तक केवल 185.35 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 190.06 लाख हैक्टेयर में मोटे अनाजों की बुवाई हो चुकी थी। मोटे अनाजों में जहां बाजरा की बुवाई में हल्की बढ़ोतरी हुई है वहीं मक्का के साथ ही ज्वार की बुवाई में कमी आई है।
कपास की बुवाई चालू रबी में बढ़कर 121.72 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 102.56 लाख हैक्टेयर में ही कपास की बुवाई हो पाई थी। गन्ने की बुवाई भी चालू सीजन में बढ़कर 49.95 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 45.64 लाख हैक्टेयर में ही गन्ने की बुवाई हो पाई थी।...............   आर एस राणा