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03 July 2015

दलहन की बुवाई, तिलहन or मोटे अनाज

दलहन की बुवाई
अरहर की बुवाई 9.25 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 3.04 लाख हैक्टेयर में हुई थी।
मूंग की बुवाई 6.02 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 2.79 लाख हैक्टेयर में हुई थी।
उड़द की बुवाई 4.99 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 1.20 लाख हैक्टेयर में हुई थी।
तिलहन
मूंगफली की बुवाई 14.73 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 8.20 लाख हैक्टेयर में हुई थी।
सोयाबीन की बुवाई 56.12 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 4.67 लाख हैक्टेयर में हुई थी।
मोटे अनाज
मक्का की बुवाई 29.77 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 17.85 लाख हैक्टेयर में हुई थी।

सीसीआई निर्यात के बजाए घरेलू बाजार में ज्यादा कपास बेचेगी


निगम ई-निलामी के माध्यम से घरेलू बाजार में बेच चुकी है 25 लाख गांठ
आर एस राणा
नई दिल्ली। कॉटन कापोरेषन ऑफ इंडिया लिमिटेड (सीसीआई) निर्यात के बजाए घरेलू बाजार में कपास की बिक्री ज्यादा करेगी। निगम चालू कपास सीजन में अभी तक 25 लाख गांठ (एक गांठ-170 किलो कपास) की बिक्री घरेलू बाजार में कर  चुकी है जबकि निर्यात केवल 25 लाख गांठ का ही किया है।
सीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस समय कपास में निर्यात मांग अच्छी है लेकिन हमे घरेलू बाजार में कपास की आपूर्ति बनाए रखनी है, इसलिए हम निर्यात के बजाए घरेलू बाजार में ज्यादा कपास की बिक्री करेंगे। उन्होंने बताया कि चालू कपास सीजन में निगम ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 87 लाख गांठ कपास की खरीद की थी जिसमें से ई-निलामी के माध्यम से 25 लाख गांठ की बिक्री घरेलू मिलों को की है।
उन्होंने बताया कि निगम कपास की बिक्री बाजार भाव से उंचे पर कर रही है जिससे कि उत्पादक राज्यों की मंडियों में कपास का भाव एमएसपी से नीचे नहीं जाए। हालांकि मिलों के साथ ही व्यापारी सीसीआई से खुले बाजार में कपास बेचने की मांग कर रहे हैं।......आर एस राणा

चालू खरीफ में 306 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है फसलों की बुवाई


दलहन, तिलहन के साथ ही कपास की बुवाई में भारी बढ़ोतरी
आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन में देषभर में 306.06 लाख हैक्टेयर में फसलों की बुवाई हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 194.25 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। खरीफ में दलहन के साथ ही तिलहन और कपास की बुवाई में भारी बढ़ोतरी हुई है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में दलहन की बुवाई बढ़कर 22.61 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 9.72 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी। तिलहन की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 74.17 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 14.73 लाख हैक्टेयर में बुवाई ही हो पाई थी।
कपास की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 60.16 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक कपास की बुवाई 35.42 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। धान की रोपाई चालू खरीफ में 54.03 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 53.56 लाख हैक्टेयर में रोपाई हुई थी। मोटे अनाजों की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 43.72 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 28.92 लाख हैक्टेयर में मोटे अनाजों की बुवाई हुई थी। गन्ने की बुवाई चालू खरीफ सीजन में 43.68 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 43.92 लाख हैक्टेयर में गन्ने की बुवाई हुई थी।......आर एस राणा

30 June 2015

एसटीसी ने 2,000 टन कोकोनट तेल का आयात करेगी


नई दिल्ली। सार्वजनिक कंपनी स्टेट ट्रेडिंग कार्पोरेषन आफ इंडिया लिमिटेड (एसटीसी) ने 2,000 टन कोकोनेट तेल के आयात हेतु निविदा आमंत्रित की है। निविदा के अनुसार तेल की आपूर्ति मुंदड़ा बंदरगाह पर (सीआईएफ) के आधार पर होगी।
एसटीसी के अनुसार निविदा भरने की अंतिम तिथि 2 जुलाई 2015 है तथा 1,008 टन कोकोनट तेल की षिपमेंट की अवधि 3 जुलाई से 15 अगस्त तय की गई है जबकि 987 टन कोकोनट तेल की षिपमेंट की अवधि 3 जुलाई से 31 अगस्त 2015 तय की गई है।

चालू वित वर्ष के पहले महीने में दलहन आयात 32 फीसदी बढ़ा


आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू वित वर्ष 2015-16 के पहले महीने अप्रैल में दलहन आयात में भारी बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान दलहन के आयात में 32 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल आयात 2.61 लाख टन का हुआ है। आयात में बढ़ोतरी के साथ ही राजस्थान सरकार दालों पर आवष्यक वस्तु अधिनियम के तहत स्टॉक सीमा लगाने के कारण पिछले आठ-दस दिनों में दलहन की कीमतों में गिरावट आई है।
कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अप्रैल 2015 में देष में दालों का आयात बढ़कर 2.61 लाख टन का हो गया जबकि पिछले साल अप्रैल महीने में 1.97 लाख टन दालों का आयात हुआ था। उन्होंने बताया कि मानसूनी बारिष कम होने के कारण फसल सीजन 2014-15 में दलहन की घरेलू पैदावार में कमी आई थी जिसकी वजह से उत्पादक मंडियों में दालों के भाव में तेजी आई थी। यही कारण है कि अप्रैल महीने में दलहन के आयात में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने बताया कि वित वर्ष 2014-15 में देष में रिकार्ड 45.8 लाख टन दालों का आयात हुआ था जबकि वित वर्ष 2013-14 में 31.7 लाख टन दालों का आयात हुआ था।
दलहन आयातक फर्म के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मंगलवार को आस्ट्रेलियाई चने के भाव मुंबई में 4,400 रुपये प्रति क्विंटल रह गए जबकि मयंमार से आयातित उड़द के भाव 7,600 रुपये तथा लेमन अरहर के भाव 7,050 रुपये प्रति क्विंटल रहे। केनेडियन मसूर के भाव मुंबई पहुंच 6,200 से 6,350 रुपये प्रति क्विंटल रहे। कनाडा की पीली मटर के भाव 2,521 रुपये और हरी मटर के भाव 2,750 से 2,850 रुपये प्रति क्विंटल रहे। रुस से आयातित काबुली के भाव 4,000 से 4,250 रुपये प्रति क्विंटल रहे।
दलहन कारोबारी दुर्गा प्रसाद ने बताया कि दिल्ली में चना के भाव 4,325 रुपये, मूंग के भाव 6,400 रुपये, मोठ के भाव 6,600 रुपये, उड़द के 7,800 रुपये, अरहर के भाव 6,900 रुपये और मसूर के भाव 6,500 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। काबूली के भाव दिल्ली में 4,800 से 5,000 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं। उन्होंने बताया कि आयात में हुई बढ़ोतरी के साथ ही राजस्थान में दलहन पर स्टॉक सीमा लगा देने से दालों की कीमतों में गिरावट आई है।
कृषि मंत्रालय के तीसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2014-15 में देष में दलहन का उत्पादन घटकर 173.8 लाख टन होने का अनुमान है जबकि फसल सीजन 2013-14 में देष में रिकार्ड 192.5 लाख टन का उत्पादन हुआ था।.....आर एस राणा

29 June 2015

निर्यातकों की मांग से बासमती चावल की कीमतों में और तेजी की संभावना


आर एस राणा
नई दिल्ली। बासमती चावल में इस समय निर्यातकों की अच्छी मांग बनी हुई है जबकि मिलरों के पास स्टॉक कम है। इसीलिए पिछले आठ-दस दिनों में पूसा 1,121 बासमती चावल सेला के भाव में 400 से 500 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आकर भाव 4,400 से 4,500 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। निर्यातकों की मांग को देखते हुए इसकी मौजूदा कीमतों में और भी 150 से 200 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आने का अनुमान है।
चावल निर्यातक फर्म के एक अधिकारी ने बताया कि बासमती चावल खासकर के पूसा-1,121 सेला में इस समय निर्यात मांग अच्छी बनी हुई है जबकि मिलरों के पास स्टॉक कम है। इसीलिए बासमती चावल की कीमतों में तेजी बनी हुई है। उन्होंने बताया कि अगले आठ-दस दिनों में ईरान की आयात निविदा खुलेंगी, जिससे इसमें मांग और भी बढ़ने का अनुमान है। उत्पादक मंडियों में सोमवार को पूसा-1,121 बासमती चावल सेला का भाव बढ़कर 4,400 से 4,500 रुपये प्रति क्विंटल हो गए जबकि पूसा-1,121 बासमी चावल स्टीम का भाव बढ़कर 4,900 से 5,000 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। पूसा 1,509 बासमती चावल सेला का भाव बढ़कर इस दौरान 3,300 से 3,400 रुपये और स्टीम का भाव 4,600 से 4,700 रुपये प्रति क्विंटल हो गया।
चावल व्यापारी संजीव अग्रवाल ने बताया कि चावल की कीमतों में आई तेजी के कारण स्टॉकिस्टा धान की बिकवाली सीमित मात्रा में कर रहे हैं। जिससे मंडियों में धान की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। उत्पादक मंडियों में पूसा 1,121 बासमती धान के भाव बढ़कर 2,600 से 2,700 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। पूसा 1,509 धान की कीमतें मंडियों में बढ़कर 1,900 से 2,000 रुपये प्रति क्विंटल हो गई।
एपीडा के अनुसार चालू वित वर्ष 2015-16 के पहले महीने अप्रैल में बासमती चावल का निर्यात बढ़कर 3.48 लाख टन का हुआ है जबकि वित वर्ष 2014-15 के अप्रैल महीने में देश से 2.85 लाख टन बासमती चावल का निर्यात हुआ था। वित वर्ष 2014-15 में देश से 37 लाख टन बासमती चावल का निर्यात हुआ था जोकि वित वर्ष 2013-14 के 37.5 लाख टन से कुछ कम था।.....
आर एस राणा

गेहूं की सरकारी खरीद 276 लाख टन के पार


नई दिल्ली। गेहंू की सरकारी खरीद 276.21 लाख टन हो गई है जबकि पिछले साल इस समय तक देशभर की मंडियों से 270.68 लाख टन गेहूं खरीदा गया था।
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस समय केवल राजस्थान से ही गेहूं की खरीद हो रही है जबकि अन्य राज्यों से खरीद बंद हो गई है। उन्होंने बताया कि अभी तक गेहूं की कुल खरीद में पंजाब की हिस्सेदारी 99.52 लाख टन, हरियाणा से 67.55 लाख टन, उत्तर प्रदेश से 22.67 लाख टन, मध्य प्रदेश से 72.61 लाख टन और राजस्थान से 12.97 लाख टन गेहूं की खरीद हुई है। उन्होंने बताया कि चालू सीजन में गेहूं की सरकारी खरीद में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी उत्तर प्रदेश में हुई है जबकि कमी राजस्थान में आई है।