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24 June 2018

गेहूं की सरकारी खरीद 355 लाख टन, केंद्रीय पूल में बंपर स्टॉक से भंडारण में आयेगी परेशानी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी विपणन सीजन 2018-19 में गेहूं की सरकारी खरीद बढ़कर 355.03 लाख टन की हो चुकी है जोकि तय लक्ष्य 320 लाख टन से 35 लाख टन ज्यादा है। गेहूं की बंपर खरीद से केंद्रीय पूल में खाद्यान्न का बंपर स्टॉक हो चुका है, ​जिसके भंडारण में भारी परेशानी आयेगी। कई राज्यों की उत्पादक मंडियों में खरीदा हुआ गेहूं खुले में ही पड़ा हुआ है जबकि कई राज्यों में मानसून के साथ प्री-मानसूनी की बारिश शुरू हो चुकी है।
बंपर खरीद हुई है चालू रबी में
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के अनुसार चालू रबी सीजन में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 355.03 लाख टन गेहूं की खरीद हो चुकी है जबकि पिछले साल समर्थन मूल्य पर कुल 308.25 लाख टन गेहूं ही खरीदा गया था। 
प्रमुख उत्पादक राज्यों से खरीद तय लक्ष्य से ज्यादा
प्रमुख उत्पादक राज्य पंजाब से चालू रबी में गेहूं की खरीद बढ़कर 126.90 लाख टन की हो चुकी है जबकि राज्य से खरीद का लक्ष्य 119 लाख टन का तय किया गया था। इसी तरह से हरियाणा से चालू रबी में गेहूं की रिकार्ड खरीद 87.39 लाख टन की हुई है जबकि खरीद का लक्ष्य 74 लाख टन का तय गया था। उधर मध्य प्रदेश से गेहूं की खरीद चालू रबी में बढ़कर 72.86 लाख टन और उत्तर प्रदेश से 50.87 लाख टन की हो चुकी है जबकि इन राज्यों से खरीद का लक्ष्य क्रमश: 67 और 40 लाख टन का तय किया गया था।
केंद्रीय पूल में खाद्यान्न का बंपर स्टॉक 
केंद्रीय पूल में पहली जून को 437.25 लाख टन गेहूं और 242.70 लाख टन चावल को मिलाकर खाद्यान्न का कुल 680.25 लाख टन स्टॉक हो चुका है जबकि पिछले साल पहली जून को केंद्रीय पूल में केवल 555.40 लाख टन खाद्यान्न का स्टॉक ही था। ..............आर एस राणा

खाद्य पदार्थो में मिलावटखोरों पर सख्ती करने की तैयारी, एफएसएसआई ने की उम्रकैद की सिफारिश

केंद्र सरकार खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों की खिलाफ सख्ती से निपटने की तैयारी कर रही है। फूड रेगुलेटर, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकारण (एफएसएसएआई) ने खाद्य सुरक्षा कानून में बदलाव करने का प्रस्ताव किया है।
सूत्रों के अनुसार एफएसएसएआई ने खाद्य पदार्थों में मिलाकर करने वाले को उम्रकैद तक करने की सिफारिश की है। नए प्रस्ताव में मिलावट से नुकसान होने की आशंका में भी उम्रकैद की सिफारिश की गई है। सूत्रों के अनुसार तैयार प्रस्ताव में मिलावट करने करने वालों पर 7 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना देने की सिफारिश की गई है।
सूत्रों के अनुसार इस समय मिलाकर से मौत होने पर ही उम्रकैद का प्रावधान है। इसके अलावा खाने का सामाना आयात करने वाली ​कंपनियों की जिम्मेदारी भी तय होगी, साथ ही उपभोक्ताओं की परिभाषा में भी बदलाव होगा। सूत्रों के अनुसार पशुओं के खाद्य पदार्थ भी कानून के दायरें में लाने जाने का प्रस्ताव है।

उत्तरी और पश्चिमी क्षेत्र के जलाशयों में पानी कम, बारिश कम होने से कई राज्यों में जल संकट


आर एस राणा
नई दिल्ली। उत्तर क्षेत्र के हिमाचल प्रदेश, पंजाब और राजस्थान के साथ ही गुजरात और महाराष्ट्र के जलाशयों में पानी का स्तर पिछले दस साल के औसत स्तर से भी नीचे आ गया है, जबकि चालू सीजन में देशभर में अभी तक मानसूनी बारिश भी सामान्य से 10 फीसदी कम हुई है। मानसून 15 जून से महाराष्ट्र में अटका हुआ है, ऐसे में मानसून में और देरी हुई तो फिर कई राज्यों में चल रहा जल संकट और गहरा सकता है।
मौसम विभाग के अनुसार 24 जून से मानसून के फिर से रफ्तार पकड़ने की संभावना है। चालू खरीफ में केरल में मानसून ने तय समय से 3 दिन पहले ही दस्तक दे दी थी, तथा 15 जून तक दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर के कई राज्यों के अलावा महाराष्ट्र में मानसून पहुंच गया गया था। 15 जून से मानसून महाराष्ट्र से आगे नहीं बढ़ा है जिसका असर खरीफ फसलों की बुवाई पर भी ​पड़ा है।
केन्द्रीय जल संसाधन मंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार 21 जून 2018 को उत्तरी क्षेत्र के हिमाचल प्रदेश, पंजाब और राजस्थान के 6 जलाशयों में पानी का स्तर घटकर उनकी कुल भंडारण क्षमता के 16 फीसदी पर आ गया है जोकि पिछले 10 साल के औसत 28 फीसदी से काफी कम है। पिछले वर्ष की समान अवधि में इन जलाशयों में पानी का स्तर 25 फीसदी था।
यही हाल पश्चिमी क्षेत्र के जलाशयों का भी है। पश्चिमी क्षेत्र के गुजरात तथा महाराष्ट्र में 27 जलाशयों में पानी का स्तर घटकर कुल भंडारण क्षमता का 13 फीसदी ही रह गया है जोकि पिछले दस साल के औसत अनुमान 17 फीसदी से भी कम है। पिछले साल की समान अवधि में पश्चिमी क्षेत्र के जलाशयों में कुल क्षमता का 18 फीसदी पानी था।
मध्य क्षेत्र के उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ के 12 जलाशयों में पानी का स्तर घटकर उनकी कुल भंडारण क्षमता के 21 फीसदी पर आ गया है जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में इन जलाशयों में पानी का स्तर 29 फीसदी था। हालांकि 10 साल के औसत 18 फीसदी से थोड़ा अधिक है।
दक्षिण भारत के राज्यों में मानसून आने से जलाशयों में पानी के स्तर पर में सुधार आया है। आंधप्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के 31 जलाशयों में पानी का स्तर कुल भंडारण का 20 फीसदी हो गया है जोकि दस साल के औसत 17 फीसदी से थोड़ा ज्यादा है। पिछले साल की समान अवधि में इन राज्यों के जलाशयों में पानी का स्तर घटकर 8 फीसदी ही गया था।...........  आर एस राणा

खरीफ फसलों के एमएसपी की घोषणा में देरी, किसान सांसत में

आर एस राणा
नई दिल्ली। खरीफ फसलों की बुवाई शुरू हो चुकी है, लेकिन केंद्र सरकार ने अभी तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) घोषित ​नहीं किए हैं, जिस कारण किसान बुवाई के लिए फसलों का चयन नहीं कर पा रहे हैं। केंद्र के डेढ़ गुना एमएसपी तय करने के दावे के उल्ट कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) ने खरीफ की प्रमुख फसल धान के एमएसपी में मात्र 80 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की सिफारिश की है।
चालू वित्त वर्ष 2018-19 के आम बजट में केंद्र सरकार ने खरीफ फसलों के एमएसपी डेढ़ गुना तय करने का दावा किया था, लेकिन सीएसीपी ने चालू खरीफ के लिए धान के एमएसपी में 80 रुपये की बढ़ोतरी की सिफारिश कर फसल सीजन 2018-19 के लिए कॉमन धान का एमएसपी 1,630 रुपये और ग्रेड ए धान का एमएसपी 1,670 रुपये प्रति क्विंटल तय करने की सिफारिश की है। आमतौर पर सीएसीपी की सिफारिशों पर कैबिनेट की मोहर लग जाती है, लेकिन चुनाव साल होने के कारण सरकार किसानों की नाराजगी का कोई जोखिम नहीं लेना चाहेगी, इसलिए इसमें कुछ संशोधन किया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार इस पर संबंधित मंत्रालयों में सहमति बनाने के कारण ही एमएसपी की घोषणा में देरी हो रही है।
केंद्र सरकार खरीफ सीजन की प्रमुख फसल धान के साथ ही मोटे अनाजों में ज्वार, बाजरा, मक्का और रागी तथा दालों में अरहर, उड़द और मूंग के अलावा तिलहनी फसलों में सोयाबीन, मूंगफली, सनफ्लावर, नाईजर सीड और शीसम सीड के अलावा कपास के एमएसपी घोषित करती है। खरीफ सीजन में एमएसपी पर धान की ही खरीद ज्यादा होती है, अन्य फसलों की खरीद नाममात्र की ही होती है। सूत्रों के अनुसार इसीलिए केंद्र सरकार धान के बजाए अन्य फसलों जिनकी खरीद समर्थन मूल्य पर नहीं के बराबर होती है, उनके एमएसपी में ज्यादा बढ़ोतरी कर सकती है। 
कई राज्यों में चालू साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने है जबकि 2019 में देश में लोकसभा चुनाव होने हैं इस​लिए किसानों को केंद्र सरकार से फसलों के एमएसपी को लेकर काफी उम्मीद भी है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में 115.90 लाख हैक्टेयर में खरीफ फसलों की बुवाई हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 128.35 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। हालांकि अभी बुवाई शुरूवाती चरण में है। सामान्यत: खरीफ सीजन में 10.58 करोड़ हैक्टेयर में फसलों की बुवाई होती है। ..............  आर एस राणा

चीनी में मांग कम होने से गिरावट, स्टॉकिस्ट जुलाई के कोटे का रहे हैं इंतजार

आर एस राणा
नई दिल्ली। जुलाई महीने का चीनी का कोटा अगले सप्ताह आने की संभावना है, इसीलिए स्टॉकिस्टों की मांग कम आ रही है जिससे चीनी की कीमतों में गिरावट आई है। चालू सप्ताह में इसके भाव में 200 से 250 रुपये की गिरावट आ चुकी है। शनिवार को दिल्ली में चीनी के भाव 3,350 से 3,400 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।
चीनी कारोबारी सुधीर भालोठिया ने बताया कि चीनी में ग्राहकी कम होने से मंदा आया है। उत्तर प्रदेश में चीनी के एक्स फैक्ट्री भाव घटकर शनिवार को 3,100 से 3,200 रुपये और महाराष्ट्र में 2,800 से 2,900 रुपये प्रति​ क्विंटल रह गए। जुलाई का कोटा अगले सप्ताह जारी होने की उम्मीद है इसीलिए मांग कम आ रही है।
जून महीने में केंद्र सरकार ने 21 लाख टन चीनी का कोटा जारी किया था, व्यापारियों के अनुसार जुलाई में भी चीनी का कोटा पिछले महीने के बराबर ही आने का अनुमान है। पिछले महीने कोटा तय होने से पहले ही मिलें चीनी बेच चुकी थी, इसलिए भाव में तेजी बनी थी। आगे त्यौहारी सीजन है इसलिए चीनी में बड़ी खपत कपंनियों की मांग अच्छी बनी रहने का अनुमान है इसलिए आगे तेजी-मंदी भी केंद्र सरकार तय कोटे के आधार पर ही बनेगी। ...........  आर एस राणा

कई राज्यों में प्री-मानसून एवं मानसून की बारिश कम, खरीफ फसलों की बुवाई पिछड़ी

आर एस राणा
नई दिल्ली। देश के कई राज्यों में प्री-मानसून के साथ ही मानसून की बारिश कम होने से खरीफ फसलों की बुवाई पिछड़ रही है। कपास, तिलहन, दलहन और धान के साथ ही मोटे अनाजों की बुवाई पिछले साल की तुलना में घटी है। हालांकि अभी बुवाई शुरूआती चरण में है, तथा आगे जैसे-जैसे मानसून की सक्रियता बढ़ेगी, फसलों की बुवाई में भी तेजी आने का अनुमान है। 
मौसम विभाग ने चालू खरीफ में मानसून सामान्य रहने की भविष्यवाणी की थी। मानसून ने केरल में तय समय से तीन दिन पहले ही दस्तक भी दे दी थी,​ जिससे खरीफ फसलों की अच्छी बुवाई की आस बंधी थी लेकिन 15 जून के बाद से मानसून महाराष्ट्र से आगे नहीं बढ़ रहा है, साथ ही देश आधे से अधिक भाग में प्री-मानसून की बारिश भी सामान्य से कम हुई है जिसका असर खरीफ फसलों की बुवाई पर दिख रहा है।
खरीफ फसलों की कुल बुवाई पिछे
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में फसलों की बुवाई अभी तक केवल 115.90 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 128.35 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी।
कपास और मोटे अनाजों की पर भी असर
मंत्रालय के अनुसार कपास की बुवाई चालू खरीफ में अभी तक केवल 20.68 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 24.70 लाख हैक्टेयर में कपास की बुवाई हो चुकी थी। इसी तरह से मोटे अनाजों की बुवाई भी चालू सीजन में पिछड़ कर 16.69 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 18.34 लाख हैक्टेयर में मोटे अनाजों की बुवाई हो चुकी थी।
तिलहनी फसलों के साथ ही दलहन की बुवाई भी घटी
तिलहनी फसलों की बुवाई चालू सीजन में अभी तक केवल 5.03 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 9.93 लाख हैक्टेयर में इनकी बुवाई हो चुकी थी। तिलहनी फसलों में मूंगफली और सोयाबीन की बुवाई पिछे चल रही है। खरीफ दलहनी फसलों अरहर, उड़द और मूंग आदि की बुवाई भी चालू खरीफ में घटकर 5.91 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुवाई 7.82 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।
धान की रोपाई कम, गन्ना की बुवाई ज्यादा 
खरीफ की प्रमुख फसल धान की रोपाई चालू सीजन में 10.67 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी रोपाई 11.17 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। गन्ना की बुवाई जरुर चालू खरीफ में बढ़कर 50.01 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुवाई 49.48 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई थी।............   आर एस राणा

खाड़ी देशों की आयात मांग से बासमती में सुधार, आगे कीमतों में फिर मंदा आने की उम्मीद

आर एस राणा
नई दिल्ली। रमजान का महीना समाप्त होने के बाद बासमती चावल में खाड़ी देशों की आयात मांग बढ़ी है जिससे घरेलू बाजार में बासमती चावल और धान की कीमतों में 100 से 200 रुपये की तेजी आई है। 15 जून से मानसून की गति धीमी हो गई है, लेकिन मौसम विभाग के अनुसार चालू सप्ताह के आखिर तक मानसून फिर रफ्तार पकड़ेगा। इसलिए बासमती चावल के साथ ही धान की कीमतों में आगे मंदा ही आने का अनुमान है।
चावल और धान की कीमतों में हल्का सुधार
चावल कारोबारी रामनिवास खुरानिया ने बताया कि रमजान के कारण महीने भर से खाड़ी देशों की आयात मांग बासमती चावल में कम थी। रमजान समाप्त हो गया है इसलिए खाड़ी देशों की आयात मांग बढ़ी ​है जिससे घरेलू मंडियों में बासमती चावल और धान की कीमतों सुधार आया है। हरियाणा की कैथल मंडी में बुधवार को पूसा बासमती धान 1,121 का भाव बढ़कर 3,600 रुपये और पूसा बासमती चावल 1,121 सेला का भाव 6,600 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। पूसा बासमती चावल 1,509 का भाव बढ़कर 5,900 से 6,000 रुपये प्रति क्विंटल हो गया।
निर्यातकों की मांग कमजोर
चावल की निर्यातक फर्म केआरबीएल लिमिटेड के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर अनिल मित्तल ने बताया कि रमजान के बाद बासमती चावल की निर्यात मांग में थोड़ा सुधार आया है जिससे इनके भाव बढ़े हैं। उन्होंने बताया कि बासमती चावल के ​नए निर्यात सौदे सीमित मात्रा में ही हो रहे है जबकि मानसून की रफ्तार धीमी होने का असर भी धान और चावल की कीमतों पर पड़ा है, ऐसे में आगे जैसे ही मानसून गति पकड़ेगा, इनकी कीमतों में फिर गिरावट आने का अनुमान है। वैसे भी उत्पादक राज्यों में बासमती चावल का बकाया स्टॉक अच्छा है।
अप्रैल में बासमती चावल का निर्यात घटा
एपीडा के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2018-19 के अप्रैल महीने में बासमती चावल का निर्यात घटकर 3,70,183 टन का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2017-18 के अप्रैल महीने में इसका निर्यात 3,89,542 टन का हुआ था। वित्त वर्ष 2017-19 में बासमती चावल का निर्यात बढ़कर 40.51 लाख टन का हुआ था, जोकि इसके पिछले वित्त वर्ष 2016-17 के 39.85 लाख टन से ज्यादा था।...... आर एस राणा