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04 August 2015

ओएमएसएस के तहत गेहूं की कीमतों में कटौती का प्रस्ताव नहीं - खाद्य मंत्रालय


डेडीकेट मूवमेंट के आधार पर मध्य प्रदेश और पंजाब से गेहूं की बिक्री शुरु
आर एस राणा
नई दिल्ली। खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत गेहूं की कीमतों में कटौती का अभी कोई प्रस्ताव नहीं है। खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ओएमएसएस के तहत पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश से 1,550 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं की बिक्री जारी रहेगी तथा परिवहन एवं अन्य खर्च स्वयं फ्लोर मिलर को ही वहन करना होगा।
उन्होंने बताया कि आस्ट्रेलिया से आयातित गेहूं की कीमतों में पिछले पंद्रह दिनों में करीब 25 से 30 डॉलर प्रति टन की तेजी आई है इसलिए दक्षिण भारत की फ्लोर मिलों ने मध्य प्रदेश से ओएमएसएस के तहत गेहूं की खरीद शुरु कर दी है। आस्ट्रलियाई गेहूं के भाव उंचे होने के कारण नए आयात सौदे नहीं हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रमुख उत्पादक राज्यों पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की मंडियों में गेहंूं की दैनिक आवक कम हो रही है ऐसे में उम्मीद है कि आगामी दिनों में पंजाब और हरियाणा से भी ओएमएसएस के तहत गेहूं का उठाव शुरु हो जायेगा।
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जुलाई महीने में मध्य प्रदेश से डेडीकेट मूवमेंट के तहत 4.37 लाख टन गेहूं की बिक्री के लिए निविदा आमंत्रित की थी जिसमें से 21,200 टन गेहूं की बिक्री हुई। पंजाब से 12.91 लाख टन गेहूं की बिक्री के लिए निविदा आमंत्रित की थी जिसमें से 5300 टन गेहूं का उठाव हुआ। हरियाणा से 4.90 लाख टन गेहूं बेचने के लिए निविदा आमंत्रित की थी लेकिन यहां से गेहूं का उठाव नहीं हुआ।
गेहूं कारोबारी राजेश गुप्ता ने बताया कि आवक कम होने से मंडियों में गेहूं की कीमतों में महीने भर से तेजी बनी हुई है। दिल्ली की लारेंस रोड़ मंडी में गेहूं के भाव बढ़कर मंगलवार को 1,565 से 1,570 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। गुजरात की राजकोट मंडी में गेहूं के भाव 1,600 से 1,900 रुपये प्रति क्विंटल क्वालिटीनुसार हो गए। राजस्थान की कोटा मंडी में गेहूं के भाव 1,525 से 1,700 रुपये और मध्य प्रदेश की रतलाम मंडी में 1,325 से 1,500 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।.......आर एस राणा

03 August 2015

उत्तर भारत की मांग से हल्दी की कीमतों में और तेजी की संभावना


आर एस राणा
नई दिल्ली। हल्दी में इस समय निर्यातकों की मांग तो कमजोर है लेकिन उत्तर भारत के राज्यों की अच्छी मांग बनी हुई है जिससे हल्दी की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। प्रमुख उत्पादक राज्यों हल्दी की बुवाई जोरों पर है तथा चालू महीने में होने वाली बारिष से पैदावार का अनुमान आयेगा। इसीलिए स्टॉकिस्टों की बिकवाली कम है जिससे मौजूदा कीमतों में और भी तेजी की संभावना है।
हल्दी कारोबारी पी सी गुप्ता ने बताया कि हल्दी में उत्तर भारत के राज्यों की मांग अच्छी है, जबकि स्टॉकिस्टों की बिकवाली कम आ रही है। इसीलिए हल्दी की कीमतों में तेजी आई है। आंध्रप्रदेष और तेलंगाना में हल्दी की बुवाई अच्छी हुई है लेकिन उत्पादन का अनुमान चालू महीने  में होने वाली बारिष की स्थिति पर निर्भर करेगा। आंध्रप्रदेष की निजामाबाद मंडी में हल्दी के भाव सोमवार को 7,300 से 7,400 रुपये प्रति क्विंटल रहे तथा मंडी में दैनिक आवक 1,500 बोरी (एक बोरी-70 किलो) की हुई। नांनदेड मंडी में हल्दी के भाव 6,700 से 7,500 रुपये प्रति क्विंटल रहे।
आंध्रप्रदेष में हल्दी की बुवाई 6,135 हैक्टेयर में और तेलंगाना में 35,548 हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी है। तेलंगाना में करीब 65 फसीदी बुवाई का कार्य पूरा हो चुका है। जुलाई महीने में उत्पादक राज्यों में कम बारिष हुई ऐसे मंे चालू महीने में मानसूनी बारिष से भी हल्दी की कीमतों में तेजी-मंदी का असर पड़ेगा। बारिष फसल के अनुकूल रही तो कीमतों में गिरावट भी आ सकती है लेकिन अगर बारिष कम रही तो, फिर भाव में तेजी जारी रह सकती है। हल्दी कारोबारी राजेंद्र जैन ने बताया कि आगामी दिनों में हल्दी में निर्यातकों की मांग भी बढ़ेगी, साथ ही घरेलू मसाला कंपनियों की मांग में भी इजाफा होगा। जिससे भाव में तेजी आने का अनुमान है।
भारतीय मसाला बोर्ड के अनुसार वित्त वर्ष 2014-15 में हल्दी का निर्यात बढ़कर 86,000 टन का हुआ है जबकि वित्त वर्ष 2013-14 में इसका निर्यात 77,500 टन का हुआ था।.........आर एस राणा

कमजोर वैश्विक रुख से चांदी टूटी

श्विक बाजारों में नरमी के रुख के बीच सटोरियों के सौदे काटने से आज वायदा बाजार में चांदी 0.35 प्रतिशत टूटकर 34,660 रूपए प्रति किलो पर आ गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में दिसंबर डिलिवरी के लिए चांदी का भाव 123 रुपये या 0.35 प्रतिशत घटकर 34,660 रुपये प्रति किलो पर आ गया और इसमें 29 लॉट में कारोबार हुआ। इसी तरह, सितंबर डिलिवरी के लिए चांदी का भाव 100 रुपये या 0.29 प्रतिशत घटकर 33,925 रुपये प्रति किलो पर आ गया और इसमें।,615 लॉट में कारोबार हुआ।

जिंस और स्टॉक एक्सचेंजों में समान शुल्क

बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने पंजीकरण प्रक्रिया शुरू करने से पहले यह प्रस्ताव रखा है कि पंजीकरण और लेन-देन शुल्क के मामले में जिंस एक्सचेंजों के ब्रोकरों पर भी वहीं शर्तें लागू होनी चाहिए, जो शेयर बाजार के ब्रोकरों पर लगी हुई हैं। इस समय जिंस ब्रोकर सीधे वायदा बाजार आयोग (एफएमसी) के नियंत्रण में नहीं हैं। अब एफएमसी का विलय सेबी में किया जा रहा है। जिंस ब्रोकिंग समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ हाल की एक बैठक में सेबी ने कहा कि जिंस ब्रोकरों पर वहीं नियम लागू होने चाहिए, जो इक्विटी ब्रोकरों पर लगे हुए हैं। सेबी ने कहा कि इक्विटी ब्रोकर 50,000 रुपये का पंजीकरण शुल्क चुकाते हैं, इसलिए जिंस ब्रोकरों पर भी इतना ही पंजीकरण शुल्क लगना चाहिए।

इसके अलावा सेबी ने यह भी कहा कि लेन-देने फीस बराबर होनी चाहिए, इसलिए जिंस ब्रोकरों को 0.02 फीसदी ट्रांजेक्शन शुल्क चुकाना चाहिए। इक्विटी ब्रोकर वायदा में कारोबार के लिए इतना ही ट्रांजेक्शन शुल्क लगाते हैं। इसका मतलब है कि वायदा प्लेटफॉर्म पर 1 करोड़ रुपये के लेन-देन पर 200 रुपये ट्रांजेक्शन शुल्क लगेगा। इस समय सेबी खुद में एफएमसी के प्रस्तावित विलय से पहले जिंस ब्रोकरों के पंजीकरण के लिए दिशानिर्देश तैयार कर रहा है। जिंस ब्रोकरों का पंजीकरण अगस्त के अंत तक शुरू होने के आसार हैं, जबकि सेबी में एफएमसी का विलय सितंबर तक पूरा होने की संभावना है।

हालांकि जिंस ब्रोकरों ने सेबी को सिफारिश दी है कि राष्ट्रीय और क्षेत्रीय जिंस एक्सचेंजों के सदस्यों में विभेद किया जाना चाहिए। वहीं जिंसों में सीटीटी (जिंस लेन-देन क र) और गैर-सीटीटी सेगमेंट को अलग-अलग रखा जाना चाहिए। सूत्रों ने कहा कि जिंस ब्रोकरों ने प्रस्ताव रखा है कि राष्ट्रीय स्तर के ब्रोकर से 50,000 और क्षेत्रीय ब्रोकर से 25,000 रुपये पंजीकरण शुल्क वसूला जाए, जबकि सेबी 50,000 रुपये के एकसमान पंजीकरण शुल्क के पक्ष में है। उन्होंने कहा, 'हमने कहा है कि क्षेत्रीय एक्सचेंजों के सदस्यों की वित्तीय क्षमता कमजोर होती है और इसलिए उन्हें कम फीस चुकाने की मंजूरी दी जाए। एक राष्ट्रीय ब्रोकर के लिए 50,000 रुपये का पंजीकरण शुल्क ठीक है।' दरअसल संपूर्ण बाजार के विकास के लिए सिस्टम में क्षेत्रीय ब्रोकरों का होना जरूरी है। बैठक में इस बात पर भी चर्चा की गई कि क्षेत्रीय ब्रोकरों को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।  (BS Hindi)

खाद्यान्न उत्पादन 26.41 करोड़ टन उत्पादन अनुमान का लक्ष्य तय


दलहन के साथ ही तिलहन उत्पादन में ज्यादा बढ़ोतरी का अनुमान
आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने फसल सीजन 2015-16 में देष में 26.41 करोड टन खाद्यान्न के उत्पादन का लक्ष्य तय किया है जोकि चालू फसल सीजन 2014-15 के तीसरे आरंभिक अनुमान 25.11 करोड़ टन से ज्यादा है। नए फसल सीजन में दलहन के साथ ही तिलहन की पैदावार ज्यादा होने का अनुमान है।
कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फसल सीजन 2015-16 में खाद्यान्न के उत्पादन का लक्ष्य 26.41 लाख टन का तय किया है तथा इसके लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर तैयारी पूरी कर ली गई है। राज्य सरकारों के सहयोग से किसानों को उच्च गुणवत्ता के बीज उपलब्ध करायें जा रहे हैं, साथ ही किसानों तक खाद और बिजली की सप्लाई को अनिवार्य किया गया है। उन्होंने बताया कि फसल सीजन 2015-16 में दलहन के साथ ही तिलहन के उत्पादन का लक्ष्य ज्यादा तय किया गया है। इससे खाद्य तेलों के साथ ही दलहन के आयात में कमी लाना है।
उन्होंने बताया कि फसल सीजन 2015-16 में दलहन के उत्पादन का लक्ष्य बढ़ाकर 200.5 लाख टन का तय किया गया है जबकि फसल सीजन 2014-15 में 173.8 लाख टन दालों का उत्पादन हुआ था। इसी तरह से तिलहनों की पैदावार का लक्ष्य चालू फसल सीजन में 330 लाख टन का तय किया गया है जबकि पिछले साल 273.80 लाख टन तिलहनों की पैदावार हुई थी। उन्होंने बताया कि फसल सीजन 2015-16 में चावल की पैदावार का लक्ष्य 10.61 करोड़ टन का तय किया गया है जबकि फसल सीजन 2014-15 में 10.25 करोड़ टन चावल की पैदावार हुई थी।
गेहूं उत्पादन का लक्ष्य 2015-16 में 947.5 लाख टन का लक्ष्य किया गया है जबकि फसल सीजन 2014-15 के तीसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार 907.8 लाख टन गेहूं की पैदावार होने का अनुमान है। कृषि मंत्रालय ने फसल सीजन 2015-16 में 58.5 लाख टन ज्वार की पैदावार का लक्ष्य तय किया है जबकि 237.5 लाख टन मक्का उत्पादन का लक्ष्य है। इसी तरह से बाजरा की पैदावार बढ़ाकर 95 लाख टन उत्पादन का अनुमान तय किया है। जौ की पैदावार का अनुमान 17.8 लाख टन और 18 लाख टन रागी उत्पादन का लक्ष्य तय किया है। कपास के उत्पादन का लक्ष्य 2015-16 में 351.5 लाख गांठ (एक गांठ-170 किलो) होने का तय किया है जबकि फसल सीजन 2014-15 के तीसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार 353.28 लाख कपास उत्पादन का अनुमान है।.......आर एस राणा

31 July 2015

खरीफ फसलों की बुवाई में 9 फीसदी की बढ़ोतरी

खरीफ फसलों की बुवाई में 9 फीसदी की बढ़ोतरी
तिलहन के साथ ही दलहन की बुवाई में अच्छी बढ़ोतरी
आर एस राणा
नई दिल्ली। खरीफ फसलों की बुवाई चालू सीजन में 9 फीसदी बढ़कर 764.28 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 703.04 लाख हैक्टेयर में हुई थी। उत्पादक राज्यों में हुई अच्छी बारिष से दलहन के साथ ही तिलहनों की बुवाई में अच्छी बढ़ोतरी हुई है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में प्रमुख फसल धान की रोपाई बढ़कर 227.8 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 214.82 लाख हैक्टेयर में ही धान की रोपाई हुई थी।
दलहन की बुवाई चालू रबी में बढ़कर 82.44 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 48.15 लाख हैक्टेयर में ही दालों की बुवाई हुई थी। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 27.6 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 26.25 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। उड़द की बुवाई चालू खरीफ में 21.15 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 16.64 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी।
तिलहनों की बुवाई चालू खरीफ में 148.50 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 135.60 लाख हैक्टेयर में तिलहनी फसलों की बुवाई हुई थी। खरीफ तिलहन की प्रमुख फसल सोयाबीन की बुवाई 106.35 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 95.66 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। मूंगफली की बुवाई चालू खरीफ में 29.05 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 26.29 लाख हैक्टेयर में हुई थी।
मोटे अनाजों की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 148.49 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 125.50 लाख हैक्टेयर में हुई थी। मक्का की बुवाई खरीफ सीजन में 66.74 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 60.70 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी।
गन्ने बुवाई चालू सीजन में 47.33 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 46.42 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। कपास की बुवाई भी चालू खरीफ में 101.91 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इसकी बुवाई 104.84 लाख हैक्टेयर में हुई थी।................आर एस राणा

उत्पादक राज्यों में अच्छी बारिष से कपास की कीमतों में और गिरावट की आषंका


सीसीआई के पास करीब 45 लाख गांठ कपास का बचा हुआ है स्टॉक
आर एस राणा
नई दिल्ली। कपास के प्रमुख उत्पादक राज्यों गुजरात, मध्य प्रदेष, आंध्रप्रदेष और उत्तर भारत के राज्यों में हुई अच्छी बारिष से पैदावार बढ़ने का अनुमान है। इसीलिए कपास की कीमतों में सप्ताहभर में करीब 500 से 800 रुपये की गिरावट आकर अहमदबाद में षंकर-6 किस्म की कपास के भाव 34,000 से 34,500 रुपये प्रति कैंडी (एक कैंडी-356 किलो) रह गए। कमजोर मांग को देखते हुए मौजूदा कीमतों में और भी गिरावट आने की आषंका है वैसे भी कॉटन कार्पोरेषन ऑफ इंडिया (सीसीआई) के पास अभी भी करीब 45 लाख गांठ (एक गांठ-170 किलो) कपास का स्टॉक बचा हुआ है।
नार्थ इंडिया कॉटन एसोसिएषन के अध्यक्ष राकेष राठी ने बताया कि प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों गुजरात, मध्य प्रदेष, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, तेलंगाना और आंध्रप्रदेष में चालू महीने में अच्छी बारिष हुई है जोकि फसल के लिए अच्छी है। हालांकि महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में अभी भी स्थिति चिंताजनक है, मराठवाड़ा में सामान्य से करीब 50 फीसदी कम बारिष हुई है जबकि आंध्रप्रदेष के भी कुछ क्षेत्रों में बारिष कम हुई है। उन्होंने बताया कि ज्यादातर उत्पादक क्षेत्रों में बारिष अच्छी होने के कारण ही कपास में मिलों की मांग घटी है जबकि सीसीआई ई-निलामी के द्वारा लगातार भाव घटाकर बिकवाली कर रही है। इसीलिए उत्पादक मंडियों में भाव कम हुए हैं तथा मौजूदा कीमतों में और भी गिरावट आने की आषंका है।
सीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि निगम चालू सीजन में अभी तक 39 लाख गांठ कपास की बिक्री ई-निलामी के माध्यम से घरेलू बाजार में कर चुकी है जबकि 3 लाख गांठ कपास का निर्यात किया है। निगम के पास अभी भी करीब 45 लाख गांठ कपास का स्टॉक बचा हुआ है तथा आगामी दिनों में निगम बिक्री और भी बढ़ा सकता है। सीसीआई ने चालू सीजन में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 87 लाख गांठ कपास की खरीद की थी।
कपास कारोबारी हरी भाई ने बताया कि चालू सीजन में करीब 45 लाख गांठ कपास का निर्यात ही हुआ है तथा विष्व बाजार में इस समय कपास के भाव 63.50 डॉलर प्रति औंस हैं। इन भावो में निर्यात सौदे सीमित मात्रा में ही हो रहे है तथा विष्व बाजार में अभी कीमतो में भारी तेजी की उम्मीद भी नहीं है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में कपास की बुवाई 101.91 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 104.84 लाख हैक्टेयर में हुई थी।......आर एस राणा