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01 December 2019

दिसंबर अंत तक ही मिलेगी प्याज की उंची कीमतों से राहत, आयात भी महंगा

आर एस राणा
नई दिल्ली। देश के कई शहरों में प्याज के खुदरा दाम 80 से 100 प्रति किलो बने हुए हैं। दिसंबर के अंत तक ही इससे राहत मिलने की उम्मीद है। जनवरी के शुरू में महाराष्ट्र और गुजरात में लेट खरीफ प्याज की फसल की आवक बनेगी, इसलिए दिसंबर के अंत में ही गिरावट आने का अनुमान है। आयातित प्याज महंगा होने के साथ ही इसकी क्वालिटी भी हल्की है। प्याज के प्रमुख उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात और राजस्थान में अक्टूबर और नवंबर में हुई बेमौसम बारिश के साथ ही कई राज्यों में बाढ़ जैसे हालात बनने से प्याज की फसल को भारी नुकसान हुआ। इसीलिए उत्पादक मंडियों में प्याज की दैनिक आवक नहीं बढ़ पा रही है।
राजस्थान से आ रहा है इस समय नया प्याज
दिल्ली आजादपुर मंडी की पोटेटो एंड अनियन मर्चेंट एसोसिएशन (पोमा) के महासचिव राजेंद्र शर्मा ने आउटलुक को बताया कि दिल्ली में इस समय राजस्थान से प्याज की आवक हो रही है। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और कर्नाटक तथा गुजरात में फसल को भारी नुकसान हुआ, जिस कारण इन राज्यों की अपनी मांग ही पूरी नहीं हो रही है। उन्होंने बताया कि शनिवार को दिल्ली में 80 ट्रक प्याज की आवक हुई, जिसमें से 76 ट्रक राजस्थान से आए थे। बाकी चार ट्रक आयातित प्याज के हैं। अफगानिस्तान से आयातित प्याज आ रहा है लेकिन इसकी क्वालिटी हल्की होने के कारण खुदरा विक्रेता इसे खरीद नहीं कर रहे हैं। अफगानिस्तान से आयातित प्याज का भाव आजादपुर मंडी में 50 रुपये प्रति किलो रहा, जबकि राजस्थान के प्याज का भाव 50 से 65 रुपये प्रति किलो रहा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने 1.2 लाख टन प्याज के आयात की अनुमति दी है, लेकिन जिस देश में सालाना करीब 200 लाख टन की खपत होती हो, वहां 1.2 लाख टन से क्या होता है? वैसे भी दैनिक खपत ही करीब 50 हजार टन से ज्यादा की होती है।
जनवरी के आरंभ में आएगी लेट खरीफ प्याज की फसल
दिल्ली के प्याज के थोक कारोबारी सुरेंद्र कुमार गुप्ता ने बताया कि प्याज का उत्पादन रबी, खरीफ और लेट खरीफ सीजन में होता है। कुल उत्पादन का 60 से 65 फीसदी रबी सीजन में होता है जबकि 35 से 40 फीसदी उत्पादन खरीफ और लेट खरीफ में होता है। खरीफ की फसल की रोपाई जुलाई-अगस्त में की जाती है तथा इसकी खुदाई अक्टूबर से दिसंबर के दौरान होती है। लेट खरीफ की प्याज की रोपाई अक्टूबर-नवंबर में होती तथा इसकी खुदाई जनवरी-फरवरी में होती है। अत: लेट खरीफ प्याज की फसल की आवक जनवरी में बनेगी, इसलिए दिसंबर के अंत तक ही कीमतों में गिरावट आने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि खरीफ और लेट खरीफ प्याज की फसल का भंडारण भी नहीं किया जाता है।
उत्पादक मंडियों में थोक में ही दाम ऊंचे
राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (एनएचआरडीएफ) के अनुसार महाराष्ट्र की पीपलगांव मंडी में शुक्रवार को बढ़िया क्वालिटी के प्याज का भाव 68 से 78.51 रुपये प्रति किलो रहा जबकि 19 अक्टूबर को इसका भाव 34 से 61.56 रुपये प्रति किलो था। मंडी में शुक्रवार को प्याज की आवक 3,800 क्विंटल की हुई। पुणे मंडी में प्याज का भाव शुक्रवार को बढ़िया क्वालिटी का 80 रुपये प्रति किलो रहा, जबकि 19 नवंबर को इसका भाव 65 रुपये प्रति किलो था। लासलगांव मंडी में प्याज का भाव शुक्रवार को 62.26 रुपये प्रति किलो रहा जबकि 19 नवंबर को इसका भाव 63 रुपये प्रति किलो थे। अन्य मंडियों मालेगांव में शुक्रवार को प्याज का भाव 64.80 रुपये और कोल्हापुर में 75 रुपये प्रति किलो रहा। उपभोक्ता मामले मंत्रालय के अनुसार फुटकर में प्याज के भाव शनिवार को दिल्ली में 76 रुपये, देहरादून में 75 रुपये, जम्मू में 80 रुपये, हिसार में 75 रुपये तथा पंचकुला में 90 रुपये प्रति किलो रहे।
बेमौसम बारिश से खरीफ प्याज उत्पादन में कमी
कृषि मंत्रालय के अनुसार उत्पादक राज्यों में बेमौसम बारिश और बाढ़ से प्याज की फसल को भारी नुकसान हुआ है। चालू खरीफ और लेट खरीफ में इसका उत्पादन घटकर 52.06 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल खरीफ और लेट खरीफ में उत्पादन 69.91 लाख टन का हुआ था। मंत्रलाय के अनुसार फसल सीजन 2018-19 में प्याज के उत्पादन का अनुमान 234.85 लाख टन का था, जो इसके पिछले साल के 232.62 लाख टन से ज्यादा ही था।............  आर एस राणा

रबी फसलों की बुआई 338 लाख हेक्टेयर के पार, दलहन की बुआई पिछे

आर एस राणा
नई दिल्ली। रबी फसलों की बुआई में तो तेजी आई है, लेकिन कई राज्यों में अक्टूबर और नवंबर में हुई बेमौसम बारिश से दालों की बुआई पिछे चल रही है। रबी फसलों की बुआई 338.20 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल के 339.75 लाख हेक्टेयर के लगभग बराबर ही है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार रबी की प्रमुख फसल गेहूं की बुआई बढ़कर चालू सीजन में बढ़कर 150.74 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 141.25 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। चालू सीजन में दलहन की बुआई 10 फीसदी पिछड़कर 89.23 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 99.15 लाख हेक्टेयर में दालों की बुआई हो चुकी थी। रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई पिछले साल के 68.40 लाख हेक्टेयर से घटकर 61.59 लाख हेक्टयेर में ही हुई है। मसूर की बुआई चालू रबी में 10.29 लाख हेक्टेयर में और मटर की 6.37 लाख हेक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 11.88 और 6.68 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।
मोटे अनाजों में ज्वार और जौ की बुआई बढ़ी
मोटे अनाजों की बुआई चालू रबी में 29.75 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई 28.27 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। मोटे अनाजों में ज्वार की बुआई चालू रबी में बढ़कर 18.42 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 16.71 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हुई थी। मक्का की बुआई चालू रबी में 6.30 लाख हेक्टेयर और जौ की बुआई 4.61 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 7.15 और 4.16 लाख हेक्टेयर में हुई थी।
तिलहन की बुआई में आई कमी
रबी तिलहन की बुआई चालू रबी में 60.31 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई 63.69 लाख हेक्टेयर हो चुकी थी। रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों की बुआई 55.40 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुआई 55.58 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। मूंगफली की बुआई 1.92 लाख हेक्टेयर में और अलसी की बुआई 1.75 लाख हेक्टेयर तथा सनफ्लावर की बुआई 60 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है।..........  आर एस राणा

चालू पेराई सीजन में चीनी उत्पादन 273 लाख टन होने का अनुमान : सरकार

आर एस राणा
नई दिल्ली। पहली अक्टूबर से शुरू चालू पेराई सीजन 2019-20 में देश में चीनी का उत्पादन 273 लाख टन होने का अनुमान है जोकि पिछले पेराई सीजन 331 लाख टन से कम है। उत्पादन में कमी जरुर आने का अनुमान है लेकिन पिछले पेराई सीजन का बकाया स्टॉक ज्यादा होने के कारण कुल उपलब्धता ज्यादा है।
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री दानवे रावसाहब दादाराव ने राज्यसभा में बताया कि महाराष्ट्र में सूखे और बाढ़ से गन्ने की फसल को भारी नुकसान हुआ है जिस कारण राज्य में चीनी का उत्पादन पिछले साल के 107 लाख टन की तुलना में चालू पेराई सीजन में 58.3 लाख टन ही होने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि चालू पेराई सीजन में देश में चीनी का उत्पादन 273 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पहली अक्टूबर 2019 को 140 लाख टन का बकाया स्टॉक बचा हुआ था। अत: चालू पेराई सीजन में चीनी की कुल उपलब्धता 413 लाख टन की होगी जबकि देश में चीनी की सालाना खपत 260 लाख टन की ही होती है।
15 नवंबर तक चीनी उत्पादन में आई गिरावट
उन्होंने बताया कि चालू पेराई सीजन में चीनी मिलों में नकदी की स्थिति में सुधार लाने, तोकि गन्ना किसानों को समय पर भुगतान किया जा सके, इसके लिए केंद्र सरकार ने 40 लाख टन चीनी का बफर स्टॉक बनाने के साथ ही 60 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति भी दी हुई है। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के अनुसार चालू पेराई सीजन में चीनी का उत्पादन 260 लाख टन होने का ही होने का अनुमान है। चालू पेराई सीजन में 15 नवंबर तक देश में चीनी का उत्पादन 63.8 फीसदी कम होकर कुल उत्पादन 4.85 लाख टन का ही हुआ है जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में 13.38 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका था। ..... आर एस राणा

कपास का उत्पादन 9 फीसदी बढ़ने का अनुमान, 50 लाख गांठ निर्यात की उम्मीद-सीएबी

आर एस राणा
नई दिल्ली। पहली अक्टूबर से शुरू हुए चालू फसल सीजन 2019-20 में कपास का उत्पादन 9 फीसदी बढ़कर 360 लाख गांठ (एक गांठ-170 किलो। होने का अनुमान है। साथ ही कपास का निर्यात बढ़कर 50 लाख गांठ और आयात कम होकर 25 लाख गांठ ही होने की उम्मीद है।
टेक्सटाइल कमिश्नर की अध्यक्षता में हुई कॉटन एडवाइजरी बोर्ड (सीएबी) की पहली बैठक में फसल सीजन 2019-20 में देश में कपास का उत्पादन 360 लाख गांठ होने का अनुमान जारी किया है जोकि पिछले साल की तुलना में 9.09 फीसदी अधिक है। पिछले साल देश में 330 लाख गांठ कपास का उत्पादन हुआ था। प्रमुख उत्पादक राज्य गुजरात में चालू फसल सीजन में कपास का उत्पादन बढ़कर 95 लाख गांठ होने का अनुमान है जबकि पिछले साल राज्य में 87.50 लाख गांठ का ही उत्पादन हुआ था। महाराष्ट्र में कपास का उत्पादन 82 लाख गांठ और तेलंगाना में 53 लाख गांठ होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इन राज्यों में क्रमश: 75.50 और 43 लाख गांठ का उत्पादन हुआ था।
राजस्थान, हरियाणा और मध्य प्रदेश में उत्पादन अनुमान कम
अन्य राज्यों राजस्थान में कपास का उत्पादन 25 लाख गांठ, हरियाणा में 22 लाख गांठ और पंजाब में 13 लाख गांठ होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इन राज्यों में क्रमश: 26 लाख गांठ, 23 लाख गांठ और 10 लाख गांठ का ही उत्पादन हुआ था। भारी बारिश और बाढ़ से मध्य प्रदेश में चालू फसल सीजन में कपास का उत्पादन घटकर 20 लाख गांठ ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल राज्य में 24 लाख गांठ का उत्पादन हुआ था। आंध्रप्रदेश में चालू सीजन में 20 लाख गांठ, कर्नाटक में 18 लाख गांठ और तमिलनाडु में 6 लाख गांठ तथा ओडिशा में 4 लाख गांठ के उत्पादन का अनुमान है।
आयात कम होने एवं निर्यात बढ़ने का अनुमान
सीएबी के अनुसार फसल सीजन 2019-20 में कपास का निर्यात बढ़कर 50 लाख गांठ होने का अनुमान है जबकि पिछले साल केवल 44 लाख गांठ का ही निर्यात हुआ था। कपास का आयात पिछले साल के 31 लाख गांठ से घटकर 25 लाख गांठ ही होने का अनुमान है। सीएबी के अनुसार के चालू सीजन के आरंभ में पहली अक्टूबर 2019 को कपास का बकाया स्टॉक 44.41 लाख गांठ का बचा हुआ था जबकि पहली अक्टूबर 2020 में शुरू होने वाले सीजन के आरंभ में बकाया 48.41 लाख गांठ का स्टॉक बचने का अनुमान है। .... आर एस राणा

दलहन आयात कोटा बढ़ाने से दालों की कीमतों पर दबाव, खाद्य तेलों में सुधार


-चालू रबी में दालों की बुआई पिछे चल रही है, हालांकि व्यापारियों का मानना है कि आगे बुआई में तेजी आयेगी। कई राज्यों में अक्टूबर और नवंबर मेें बेमौसम बारिश से बुआई पिछड़ी है।

-रबी दलहन फसल की बुआई करीब 19 फीसदी पिछड़ गई है। रबी दलहन की बुआई 19.27 फीसदी पिछड़कर 71.26 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल अभी तक 88.27 लाख हेक्टेयर बुआई हो चुकी थी। चना की बुआई चालू रबी में पिछले साल के 61.91 लाख हेक्टेयर से घटकर 48.35 लाख हेक्टेयर हो हुई है।

-दलहन की बुआई में आई से केंद्र सरकार दलहन आयात का कोटा बढ़ा सकती है, इस तरह से खबर बाजार में चलाई जा रही है, जिससे दालों की कीमतों पर दबाव है।
-जानकारों के अनुसार सरकार दलहन आयात का कोटा बढ़ाती है, तो केवल उड़द और मूंग का आयात कोटा ही बढ़ेगा।

-खाद्य तेलों के आयात पर केंद्र सरकार सख्ती कर सकती है, माना जा रहा है कि रिफाइंड खाद्य तेलों के आयात को फ्री कैटेगरी से हटाकर प्रतिबंधित श्रेणी में डाल सकती है, हालांकि क्रुड पॉम तेल को फ्री कैटेगरी में ही रखने का प्रस्ताव है। उद्योग ने क्रुड और रिफाइंड तेल के आयात शुल्क अंतर को भी बढ़ाने की मांग की है, अगर ऐसा होता है खाद्य तेलों की कीमतों में सुधार बन सकता है। 

सीसीआई की कपास खरीद की गति धीमी, किसान एमएसपी से नीचे बेचने को मजबूर

आर एस राणा
नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2019 से शुरू हुए चालू खरीफ विपणन सीजन में कॉटन कारपोरेशन आफ इंडिया (सीसीआई) ने समर्थन मूल्य पर मात्र दो लाख गांठ (एक गांठ-170 किलो) कपास की खरीद ही की है जोकि अभी तक हुई कुल आवक का मात्र 6 फीसदी है। सरकारी खरीद के अभाव में किसानों को समर्थन मूल्य से 400 से 500 रुपये नीचे दाम पर कपास बेचनी पड़ रही है, जिससे उन्हें भारी घाटा उठाना पड़ रहा है।
सीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चालू सीजन में 24 नवंबर तक उत्पादक मंडियों में 32 लाख गांठ कपास की आवक हो चुकी है जिसमें से निगम ने केवल दो लाख गांठ की खरीद ही की है। उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा खरीद तेलंगाना से राज्य सरकार की एजेंसी के साथ 1.20 लाख गांठ कपास खरीदी है, जबकि अन्य राज्यों में 22 हजार गाांठ कपास की खरीद पंजाब से, 19 हजार गांठ राजस्थान से, 13 हजार गांठ गुजरात से और 12 हजार गांठ की खरीद हरियाणा से की है। इसके अलावा कर्नाटक से भी थोड़ी खरीद की गई है। उन्होंने बताया कि उत्पादक मंडियों में आ रही कपास में नमी की मात्रा ज्यादा आ रही है जिस कारण खरीद सीमित मात्रा में ही की जा रही है। पिछले साल 24 नवंबर तक उत्पादक मंडियों में 36 लाख गांठ कपास की आवक हो चुकी थी। पिछले फसल सीजन में निगम ने एमएसपी पर 10.70 लाख गांठ कपास की खरीद की थी, जिसमें से 1.70 लाख गांठ बेची गई है।
व्यापारियों को नीचे दाम पर बेच रहे किसान कपास
महाराष्ट्र के जिला परभणी के सोनपेठ के कपास किसान सुधीर बिंदू ने बताया कि सीसीआई खरीद नाममात्र की ही कर रही है जिस कारण व्यापारियों को 4,900 से 5,100 रुपये प्रति क्विंटल के दाम पर कपास बेचनी पड़ रही है जबकि केंद्र सरकार ने चालू खरीफ विपणन सीजन 2019-20 के लिए मीडियम स्टेपल कपास का समर्थन मूल्य 5,255 रुपये और लॉन्ग स्टेपल का 5,550 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। सीसीआई के एक अधिकारी के अनुसार निगम ने 8 फीसदी नमी यूक्त कपास की खरीद 5,550 रुपये प्रति क्विंटल की दर से कर रही है, तथा 12 फीसदी नमी युक्त कपास की खरीद निगम 5,328 रुपये प्रति क्विंटल की दर से कर रही है। इससे ज्यादा नमी होने पर निगम खरीद नहीं कर रही है।
विश्व बाजार में कीमतें नीची होने से निर्यात सौदे कम
राजस्थान की अलवर मंडी के कपास के थोक कारोबारी ने बताया कि उत्पादक मंडियों में कपास के भाव 4,950 से 5,200 रुपये प्रति क्विंटल (क्वालिटी के अनुसार) चल रहे हैं तथा आगे कपास की दैनिक आवक बढ़ने का अनुमान है। विश्व बाजार में कपास दाम नीचे बने हुए हैं, जिस कारण निर्यात सौदे भी सीमित मात्रा में ही हो रहे हैं। न्यूयार्क कॉटन के दिसंबर वायदा में कपास के भाव 27 नवंबर को 64.91 सेंट प्रति पाउंड रहे, जबकि 18 अक्टूबर को इसके भाव 64.99 सेंट प्रति पाउंड थे। उन्होंने बताया कि बेमौसम बारिश से महाराष्ट्र और गुजरात में कपास की फसल की आवक में देरी हुई है, साथ ही क्वालिटी भी प्रभावित हुई है।
कपास का उत्पादन अनुमान ज्यादा
कृषि मंत्रालय के पहले आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2019-20 में कपास का उत्पादन 322.67 लाख गांठ होने का अनुमान है जबकि पिछले साल 287.08 लाख गांठ का उत्पादन हुआ था। कपास की बुआई चालू खरीफ में 127.67 लाख हेक्टेयर में हुई थी, जोकि इसके पिछले साल के 121.05 लाख हेक्टेयर से ज्यादा थी। उद्योग के अनुसार चालू फसल सीजन में कपास का उत्पादन 13.62 फीसदी बढ़कर 354.50 लाख गांठ होने का अनुमान है।.......... आर एस राणा

पहली छमाही में दलहन आयात 38 फीसदी बढ़ा, रोक के बावजूद हो रहा है उड़द आयात

आर एस राणा
नई दिल्ली। किसानों को मूंग न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे दाम पर बेचनी पड़ रही है, इसके बावजूद भी चालू वित्त वर्ष 2019-20 की पहली छमाही अप्रैल से सितंबर में दालों का कुल आयात 38.13 फीसदी बढ़ गया। अक्टूबर से उड़द के आयात पर रोक लगी हुई, लेकिन हाईकोर्ट से स्टे आर्डर लेकर आयातक आयात कर रहे हैं।
केंद्र सरकार ने चालू खरीफ विपणन सीजन 2019-20 के लिए मूंग का समर्थन मूल्य 7,050 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है जबकि उत्पादक मंडियों में किसान 6,600 से 6,700 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर मूंग बेचने को मजबूर हैं। सार्वजनिक कंपनी नेफेड मूंग की समर्थन मूल्य पर खरीद तो कर रही है लेकिन अभी 22 नवंबर तक केवल 36,300 टन मूंग की खरीद ही एमएसपी पर हुई है जबकि चालू खरीफ में उत्पादन 14.2 लाख टन होने का अनुमान है। अत: समर्थन मूल्य पर खरीद नाममात्र की ही हो रही है। मूंग के अलावा मंडियों में चना, मसूर और अरहर के भाव भी समर्थन मूल्य से नीचे बने हुए हैं।
स्टे आर्डर लेकर कर रहे हैं उड़द का आयात
उड़द के भाव तो मंडियों में समर्थन मूल्य से उपर बने हुए हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2019-20 में अक्टूबर तक डेढ़ लाख टन उड़द के आयात की अनुमति दी थी, जबकि अप्रैल से अक्टूबर के दौरान ही 1.56 लाख टन उड़द का आयात हो चुका है। सूत्रों के अनुसार राजस्थान के आयातकों ने हाईकोर्ट से उड़द आयात के लिए स्टे आर्डर लिया है, अत: करीब 2,000 कंटेनर (एक कंटेनर-24 टन उड़द) जल्द ही मुंबई और चैन्नई बंदरगाह पर पहुंचने वाली हैं।
अप्रैल से सितंबर के दौरान 14.78 लाख टन दालों का हो चुका है आयात
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2019-20 की पहली छमाही अप्रैल से सितंबर के दौरान 14.78 लाख टन होने का आयात हो चुका है जोकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 38.13 फीसदी ज्यादा है। पिछले वित्त वर्ष 2018-19 में इस दौरान 10.70 लाख टन दालों का ही आयात हुआ था। दिल्ली के एक दलहन कारोबारी ने कहा कि केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष में उड़द, मूंग, अरहर और मटर के आयात की अनुमति केवल दाल मिलर्स को ही दी थी, लेकिन आयातित दालें खुले बाजार में बिक रही है। उन्होंने बताया कि लेमन अरहर का भाव मुंबई में 5,000 से 5,100 रुपये, उड़द एसक्यू का भाव 7,400 से 7,500 रुपये तथा एफएक्यू के व्यापार 6,400 से 6,500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हो रहे हैं।
खरीफ में दालों का उत्पादन अनुमान कम
केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2019-20 के लिए डेढ़ लाख टन उड़द, डेढ़ लाख टन मूंग और डेढ़ लाख टन ही मटर के आयात की अनुमति दी थी, तथा आयातकों को आयात भी 31 अक्टूबर तक ही करना था। इसके अलावा सरकार ने मसूर के आयात पर 30 फीसदी आयात शुल्क और चना के आयात पर 60 फीसदी का आयात शुल्क लगा रखा है। कृषि मंत्रालय के अ
नुसार फसल सीजन 2018-19 में खरीफ में दालों का उत्पादन घटकर 82.3 लाख टन ही होने का अनुमान है जोकि इसके पिछले साल के 85.9 लाख टन से कम है। अरहर की नई फसल की आवक उत्पादक मंडियों में दिसंबर में बढ़ेगी, जबकि अरहर के दाम मंडियों ममें 5,500 से 5,600 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं।.... आर एस राणा