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22 February 2018

उत्तर के साथ मध्य भारत और महाराष्ट्र में बारिश और ओलावृष्टि की आशंका

आर एस राणा
नई दिल्ली। मौसम विभाग के अनुसार अगले चार दिनों 23 से 26 फरवरी के दौरान देश के कई राज्यों में बारिश और ओलावृष्टि होने की आशंका है। बेमौसम बारिश हुई तो ​फिर किसानों की मुश्किल बढ़ सकती है क्योंकि कई राज्यों में चना की नई फसल की आवक जहां चालू हो गई है, वहीं सरसों की फसल भी पककर लगभग तैयार है। बेमौसम ​बारिश या ओलावृष्टि की आशंका से चना के साथ ही गेहूं और दलहन की कीमतों में सुधार आ सकता है। 
मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटे में उत्तर और मध्य भारत के साथ ही महाराष्ट्र के कई इलाकों में मौसम खराब रह सकता है, इस​ दौरान कुछेक जगहों पर बारिश के साथ ही ओलावृष्टि होने की भी आशंका है। महाराष्ट्र के साथ ही मध्य प्रदेश में जहां चना की नई फसल की आवक चालू हो गई है, वहीं पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में सरसों की फसल पककर लगभग तैयार हो चुकी हैं। ऐसे में बेमौसम बारिश या ओलवृष्टि हुई तो इन फसलों को नुकसान होगा।
मौसम विभाग के अनुसार 24 फीरवरी को उत्तर भारत के पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में बारिश की आशंका है। 24 से 26 फरवरी के दौरान महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के कई इलाकों में बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी मौसम विभाग ने जारी की है। चालू महीने के शुरू में भी इन राज्यों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्ठि से रबी फसलों को नुकसान हुआ था।
मौसम विभाग के आगामी 24 घंटों में जम्मू—कश्मीर के पर्वतीय इलाकों के साथ हिमाचल प्रदेश में भी एक—दो स्थानों पर बारिश या ​बर्फबारी के आसार हैं। राजस्थान और सौराष्ट्र तथा कच्छ में कुछेक जगह बादल छाए रह सकते हैं।
मौसम विभाग के अनुसार ​बीते 24 घंटे के दौरान जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम तथा उत्तरी राजस्थान में कुछेक जगह हल्की तथा कई जगह मध्यम बारिश हुई है। उत्तर भारत के राज्यों पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में अधिकतम तामपान में बढ़ोतरी दर्ज की गई।...........   आर एस राणा

19 February 2018

सरकारी भंडारों के ​साथ ही किसान की जेब भी भरी होनी चाहिए—कृषि मंत्री

आर एस राणा
नई दिल्ली। खाद्यान्न उत्पादन में बढ़ोतरी से जहां भंडारण भरे रहे, वहीं किसान ​की जेब भी भरी होनी चाहिए। केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने दिल्ली में सोमवार को एग्रीकल्चर—2022 किसानों की आय दोगनुी करने पर आयाजित कार्यशाला के उद्घाटन समारोह में कहां कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2018-19 के लिए कृषि एवं किसान कल्याण के बजटीय आवंटन को पिछले वर्ष यानि 2017-18 के 51,576 करोड़ से बढ़ा कर 2018-19 में 58,080 करोड़ कर दिया।  सरकार ने किसानों की आय दोगुना करने के लिए निर्धारित ‘सात सूत्रीय’ रणनीति के प्रत्येक सूत्र के लिए प्रचुर धन राशि की उपलब्धता सुनिश्चित की है। यह बजट किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलवाने के उद्देश्‍य से कृषि मंडियों के लिए नए सुधारों की शुरूआत करता है।
प्रधानमंत्री के वायदे के मुताबिक 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की वृहद योजना को अमली जामा पहनाने का काम सरकार ने अप्रैल 2016 से ही एक समिति के गठन से शुरू कर दिया था। इस स​मिति में वरिष्ठ अर्थशास्त्री, भारत सरकार के खाद्य प्रसंकरण, फसल, पशु पालन एवं डेयरी तथा नीति प्रभागो के संयुक्त सचिव, नीति आयोग के कृषि सलाहकार एवं कई अन्य गैर सरकारी सदस्यों को शामिल किया गया। सरकार चाहती है कि कृषि नीति एवं कार्यक्रमों को ‘उत्पादन केंद्रित’ के बजाय ‘आय केंद्रित’ बनाया जाए।
भारत जैसे विशाल और आर्थिक विषमताओं वाले देश में दूर-दराज के दुर्गम इलाकों तक और समाज के सबसे कमजोर वर्ग तक अनाज की भौतिक और आर्थिक पहुँच सुनिश्चित करना एक कठिन चुनौती साबित हो रही थी। परन्तु 2014-15 के दौरान सरकार की अनुकूल नीतियों, कारगर योजनाओं और प्रभावी क्रियान्वयन ने इस कार्य को बखूबी अंजाम दिया। प्रधान मंत्री के नेतृत्व में देश में ‘क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर’ विकसित करने की ठोस पहल की गई है। इसके लिये राष्ट्रीय-स्तर की परियोजना लागू की गई है, जिसके अंतर्गत किसानों को जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकें अपनाने के लिये जागरूक एवं सक्षम बनाया जा रहा है।.....आर एस राणा

नई फसल आने से पहले गेहूं महंगा

नया सीजन शुरू होने से पहले गेहूं की कीमतों में तेजी आई है और वायदा में ये पिछले एक साल के ऊपरी स्तर पर चला गया है। मार्च वायदा 1800 रुपये का स्तर छू चुका है। इस महीने इसमें करीब 9 फीसदी की तेजी आ चुकी है। वहीं दिल्ली में गेहूं का भाव 2000 रुपये पर पहुंच गया है। दरअसल सरकार ने अप्रैल से शुरू होने वाले नए सीजन के लिए 1735 रुपये क्विंटल एमएसपी तय किया है। वहीं मध्य प्रदेश में बेमौसम बारिश से करीब 600 गांवों में गेहूं की फसल को नुकसान की आशंका है। इस साल गेहूं की खेती करीब 5 फीसदी कम हुई है।

महाराष्ट्र में राज्य सरकार 4.63 लाख अरहर की एमएसपी पर करेगी खरीद

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू सीजन में पैदावार कम होने के बावजूद भी अरहर की कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे बनी हुई है। ऐसे में राज्य के किसानों को नुकसान नहीं हो इसलिए महाराष्ट्र सरकार ने 4.63 लाख टन अरहर की खरीद एमएसपी पर करने का फैसला किया है।
राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार राज्य की मंडियों में अरहर के भाव 4,400 से 5,000 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं जबकि केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2017—18 के लिए अरहर का एमएसपी 5,450 रुपये प्रति क्विंटल (बोनस सहित) तय किया हुआ है। इसलिए राज्य सरकार ने एमएसपी पर 4.63 लाख टन अरहर की खरीद का निर्णय किया है।
उधर कर्नाटका में भी राज्य सरकार एमएसपी पर एक लाख टन अरहर की खरीद करेगी। राज्य की गुलबर्गा मंडी में सोमवार को अरहर की आवक 14,000 हजार बोरी की हुई तथा भाव 4,000 से 4,400 रुपये प्रति क्विंटल रहे। आंध्रप्रदेश और तेलंगाना तथा महाराष्ट्र से अरहर की एमएसपी पर खरीद सार्वजनिक कंपनी नेफैड भी कर रही है। नेफैड के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार निगम एमएसपी पर चालू खरीफ सीजन में 17 फरवरी 2018 तक 2,87,613 टन अरहर की खरीद कर चुकी है। 
कृषि मंत्रालय के पहले आरंभिक अनुमान के अनुसार चालू फसल सीजन 2017—18 में अरहर की पैदावार घटकर 39.9 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले खरीफ सीजन में रिकार्ड 47.8 लाख टन की पैदावार हुई थी। ........   आर एस राणा

पंजाब में किसान ऋण माफी के दूसरे चरण में 600 करोड़ का आवंटन

आर एस राणा
नई दिल्ली। पंजाब में किसान ऋण माफी के दूसरे चरण के अभियान में 600 करोड़ रुपये किसानों को वितरित किए जायेंगे। मार्च के आरंभ में अमृतसर, जालंधर और गुरदासपुर से इसकी शुरुआत की जायेगी। राज्य सरकार ने पहले चरण के दौरान इस योजना के तहत 160 करोड़ रुपये का आंवटन किसानों को किया है।
सूत्रों के अनुसार पहले चरण में कुछ किसानों ने व्यापारिक कामकाज के लिए ऋण लिया हुआ था, उन्होंने भी इस योजना के तहत ऋण प्राप्त किया था। इसलिए दूसरे चरण में मुख्यमंत्री ने पार्टी विधायकों को किसान ऋण माफी अभियान पर नजर रखने के निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि विधायकों से सलाह करने के बाद ही ऋण माफी सूची को अंतिम रूप दे। राज्य सरकार ने छोटे किसानों का 2—2 लाख का ऋण माफ करने का फैसला किया हुआ है।
सूत्रों के अनुसार अगले वित्त वर्ष में किसान ऋण माफी के लिए और अधिक धनराशि का आवंटन करने का अनुमान है। ऐसे में माना जा रहा है कि आगामी बजट में किसान ऋण माफी योजना के आवंटन में राज्य की अमरेन्द्र सरकार बढ़ोतरी करे।
सूत्रों के अनुसार दूसरे चरण में उन किसानों पर भी नजर रखी जायेगी, तो किसान ऋण माफी की शर्तों को पूरा नहीं करते। ऐसे में उन किसानों पर खास नजर रहेगी, जिनकी जमीन राज्य से बाहर किसी दूसरे राज्य में है। नए नियमों के अनुसार किसानों को स्वयं प्रमाणित एफीडेविट देने होंगे, कि वह इस योजना की सभी शर्तों को पूरा करते हैं। इससे उन्हें प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काटने से भी मुक्ति मिलेगी।  ........ आर एस राणा

17 February 2018

जनवरी में वनस्पति तेलों का आयात 25 फीसदी बढ़ा —एसईए

आर एस राणा
नई दिल्ली। घरेलू बाजार में तिलहनों की कीमतों में आए सुधार से जनवरी में खाद्य तेलों के साथ ही अखाद्य तेलों के आयात में 25 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल आयात 12,46,847 टन का हुआ है जबकि पिछले साल जनवरी में इनका आयात 10,28,859 टन का ही हुआ था।
साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (एसईए) के अनुसार चालू तेल वर्ष 2017-18 के पहले तीन महीनों नवंबर-17 से जनवरी-18 के दौरान खाद्य और अखाद्य तेलों का कुल आयात 6 फीसदी बढ़कर 36,28,734 टन का हुआ है जबकि पिछले तेल वर्ष 2016-17 की समान अवधि में इनका आयात 34,14,008 टन का ही हुआ था। इस दौरान खाद्य तेलों का आयात 35,30,451 टन का और अखाद्य तेलों का आयात 98,283 टन का हुआ है।
आयातित खाद्य तेलों की कीमतों में भी दिसंबर के मुकाबले जनवरी में बढ़ोतरी हुई है। एसईए के अनुसार आरबीडी पॉमोलीन का भाव भारतीय बंदरगाह पर पहुंच जनवरी में बढ़कर औसतन 669 डॉलर प्रति टन हो गया जबकि दिसंबर में इसका भाव 661 डॉलर प्रति टन था। क्रुड पॉम तेल का भाव भी दिसंबर के 662 डॉलर प्रति टन से बढ़कर जनवरी में 669 डॉलर प्रति टन हो गया। क्रुड सोयाबीन तेल के भाव इस दौरान भारतीय बंदरगाह पर पहुंच 811 डॉलर से बढ़कर 817 डॉलर प्रति टन हो गए। ..........आर एस राणा

सरकारी कदमों से दलहन के आयात में तो कमी आई, लेकिन भाव नहीं सुधरे

आर एस राणा
केंद्र सरकार द्वारा दलहन आयात में कमी लाने के लिए आयात शुल्क में बढ़ोतरी के साथ ही आयात की तय सीमा कर देने से आयात में तो भारी कमी आई है, लेकिन इसका असर उत्पादक मंडियों में दालों की कीमतों पर नहीं पड़ा है। दिसंबर महीने में दालों का आयात घटकर 3.19 लाख टन का ही हुआ है जबकि पिछले साल दिसंबर में 8.24 लाख टन दालों का आयात हुआ था। हालांकि उत्पादक राज्यों में किसानों को दालें एमएसपी से 1,000 से 1,500 रुपये प्रति ​क्विंटल नीचे बेचनी पड़ रही है।
खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि केंद्र सरकार ने घरेलू दलहन किसानों के हितों को देखते मटर, चना और मसूर पर आयात शुल्क लगाया है जबकि अरहर, मूंग और उड़द के आयात की सीमा तय कर दी थी। अत: अरहर, मूंग और उड़द का आयात नहीं हो रहा है जबकि चना, मसूर और मटर के आयात में भी भारी कमी आई है। उन्होनें बताया कि चालू वित्त वर्ष के दिसंबर महीने में आयात घटकर 3.91 लाख टन का ही हुआ है जबकि इसके पहले नवंबर में 7.56 लाख टन दालों का आयात हुआ था। 
कुल आयात में कमी आने का अनुमान
उन्होने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा उठाये गए कदमों से दलहन के कुल आयात में पिछले साल की तुलना में कमी आयेगी। चालू वित्त वर्ष 2017—18 के पहले 9 महीनों अप्रैल से दिसंबर के दौरान 56.80 लाख टन दालोें का आयात हो चुका है। वित्त वर्ष 2016—17 में दालों का रिकार्ड आयात 66.08 लाख टन का हुआ था। इसके पिछले वित्त वर्ष 2015—16 में दलहन का आयात 57.97 लाख टन का हुआ था।
चालू वित्त वर्ष 2017—18 की ​तीसरी तिमाही अक्टूबर से दिसंबर के दौरान दालों का आयात घटकर 16.5 लाख टन का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2016—17 की समान अवधि में इनका आयात 26.4 लाख टन का हुआ था।
आयात घटाने के लिए उठाए कदम
केंद्र सरकार ने चालू महीने में चना के आयात शुल्क को 30 फीसदी से बढ़ाकर 40 फीसदी किया है, जबकि इससे पहले दिसंबर में चना और मसूर के आयात पर 30 फीसदी का आयात शुल्क लगाया था। नवंबर में केंद्र सरकार ने मटर के आयात पर 50 फीसदी का आयात शुल्क लगाया था। अगस्त में केंद्र सरकार ने अरहर के आयात की 2 लाख टन और मूंग और उड़द के आयात की 3 लाख टन की सीमा तय की थी।
पैदावार ज्यादा होने का अनुमान
कृषि मंत्रालय के अनुसार फसल सीजन 2016—17 में देश में दलहन की रिकार्ड पैदावार 229 लाख टन होने का अनुमान है जबकि फसल सीजन 2015—16 में उत्पादन केवल 163.5 लाख टन का ही हुआ था। देश में दलहन की सालाना खपत 240 से 250 लाख टन की होती है।
उत्पादक मंडियों में भाव एमएसपी से नीचे
महाराष्ट्र, कर्नाटक और तेलंगाना की मंडियों में अरहर के भाव 4,000 से 4,300 रुपये प्रति क्विंटल है जबकि केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2017—18 के लिए अरहर का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 5,450 रुपये प्रति क्विंटल (बोनस सहित) किया हुआ है।.....आर एस राणा