Total Pageviews

19 August 2017

एग्री कमोडिटी में आगे की रणनीति कैसे बनाए

एग्री कमोडिटी दलहन, तिलहन, और मसालों के साथ ही गेहूं, मक्का, जौ, कपास, खल, बिनौला, ग्वार सीड, चीनी, और कपास आदि की कीमतों में कब आयेगी तेजी तथा आगे की रणनीति कैसे बनाये, भाव में कब आयेगी तेजी, किस भाव पर स्टॉक करने पर मिलेगा मुनाफा, क्या रहेगी सरकार की नीति, आयात-निर्यात की स्थिति के साथ ही विदेष में कैसी है पैदावार, इन सब की स्टीक जानकारी के लिए हमसे जुड़े............एग्री कमोडिटी की दैनिक रिपोर्ट के साथ ही मंडियों के ताजा भाव आपको ई-मेल से हिंदी में भेजे जायेंगे एग्री जिंसों के अलावा किराना में हल्दी, जीरा, धनिया, लालमिर्च, इलायची, कालीमिर्च आदि की जानकारी भी हिंदी में ई-मेल के माध्यम से दी जायेगी।
............एक महीना रिपोर्ट लेने का चार्ज मात्र 1,000 रुपये, 6 महीने का 5,000 रुपये और एक साल का केवल 8,000 रुपये........
हमें ई-मेल करे या फिर फोन पर संपक करें।

आर एस राणा
rsrana2001@gmail.com
rsrana2017@yahoo.com
mobile no.  09811470207

20 अगस्त 2017 का मॉनसून पूर्वानुमान

हिमालय के तराई क्षेत्रों में बीते दिनों से बनी मॉनसून की अक्षीय रेखा दक्षिण की ओर पहुँच गई है। इस समय यह अमृतसर, अंबाला, सिधी, झारसुगुडा और तटीय ओड़ीशा पर बने निम्न दबाव के क्षेत्र के मध्य से होते हुए बंगाल की खाड़ी तक पहुँच रही है। अनुमान है कि मॉनसून की अक्षीय रेखा जल्द ही दक्षिणी दिशा में जाएगी।
उत्तर प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी भागों पर एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र बना हुआ है। पश्चिमी असम पर भी हवाओं में एक चक्रवाती क्षेत्र दिखाई दे रहा है।
पश्चिमी तटों पर बनी मॉनसून ट्रफ का विस्तार इस समय दक्षिणी कोंकण व गोवा से केरल तक है और यहीं पर प्रभावी है।
गुजरात के कच्छ और इससे सटे दक्षिणी पाकिस्तान पर एक और चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र दिखाई दे रहा है।
इसके अलावा उत्तरी पाकिस्तान और इससे सटे भागों पर एक पश्चिमी विक्षोभ ऊपरी हवाओं में बने एक सिस्टम के रूप में दिखाई दे रहा है।
बीते 24 घंटों में मॉनसून के प्रदर्शन का ज़िक्र करें तो मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में मॉनसून व्यापक रहा और भीषण बारिश रिकॉर्ड की गई।
पूर्वोत्तर भारत, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मराठवाड़ा, तमिलनाडु, केरल औरकर्नाटक में भी मॉनसून सक्रिय रहा और हल्की से मध्यम मॉनसून वर्षा दर्ज की गई।
हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली में पिछले 24 घंटों के दौरान मॉनसून की सामान्य सक्रियता के चलते हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई।
दूसरी ओर जम्मू कश्मीर, पंजाब, राजस्थान और गुजरात में मॉनसून शांत रहा जबकि देश के बाकी भागों में कमजोर मॉनसून के चलते हल्की वर्षा हुई।
अगले 24 घंटों के दौरान मॉनसून का सबसे व्यापक प्रदर्शन दक्षिणी मध्य प्रदेश, विदर्भ, मराठवाड़ा और मध्य महाराष्ट्र में देखने को मिलेगा। इन भागों में मध्यम से भारी बारिश जारी रहने के आसार हैं।
केरल, तटीय कर्नाटक और आसपास के क्षेत्रों में में भी मॉनसून सक्रिय रहेगा और मध्यम बारिश जारी रह सकती है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पश्चिमी तटीय भागों में अगले 24 घंटों के दौरान मॉनसून का प्रभाव बढ़ेगा और बारिश की गतिविधियों में वृद्धि देखने को मिलेगी।
बिहार, झारखंड, ओडिशा और तमिलनाडु में मॉनसून सामान्य रहेगा और बादल छाए रहेंगे। कुछ स्थानों पर हल्की बारिश होने के आसार हैं।
हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, जम्मू कश्मीर और पूर्वी राजस्थान में कुछ स्थानों पर वर्षा की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।
पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वोत्तर भारत के राज्यों, गंगीय पश्चिम बंगाल,छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में बारिश में गिरावट आ सकती है।
गुजरात और पश्चिमी राजस्थान में मॉनसून कमजोर ही बना रहेगा। इन भागों में मुख्यतः शुष्क मौसम जारी रह सकता है।...........www.skymet.com

सोयाबीन के साथ ही मूंगफली की बुवाई भी घटी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में तिलहन की प्रमुख फसल सोयाबीन के साथ ही मूंगफली की बुवाई में भी कम आई है। सोयाबीन के प्रमुख उत्पादक राज्य मध्य प्रदेश में बारिश की भी कम है इसलिए सोयाबीन के भाव में सुधार आने का अनुमान है। मूंगफली में मांग कमजोर है, हालांकि नई फसल तक इसकी कीमतों में हल्का सुधार तो आ सकता है लेकिन बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में सोयाबीन की बुवाई घटकर अभी तक केवल 102.33 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 112.51 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। हालांकि उत्पादक राज्यों में सोयाबीन का स्टॉक ज्यादा है लेकिन बारिश की कमी से सोयाबीन की प्रति हैक्टेयर उत्पादकता में कमी आने की आशंका है, इसलिए मौजूदा भाव में और भी सुधार आने का अनुमान है।
मूंगफली की बुवाई चालू खरीफ में घटकर अभी तक केवल 37.67 लाख हैक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 42.98 लाख हैक्टेयर में मूंगफली की बुवाई हो चुकी थी। खरीफ तिलहन की अन्य फसलों में सनफ्लावर की बुवाई चालू खरीफ में अभी तक केवल 1.17 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुवाई 1.45 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। सीशम सीड की बुवाई चालू खरीफ में 11.67 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुवाई 13.30 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।
केस्टर सीड की बुवाई भी चालू खरीफ में घटकर अभी तक केवल 3.68 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुवाई 4.30 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। तिलहनों की बुवाई चालू खरीफ में घटकर 157.36 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुवाई 175.10 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।..............   आर एस राणा

बाजरा की बुवाई बढ़ी, मक्का और ज्वार की पिछड़ी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में जहां बाजरा की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है, वहीं मक्का के साथ ही ज्वार की बुवाई में कमी आई है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में बाजरा की बुवाई बढ़कर 69.29 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई केवल 67 लाख हैक्टेयर में ही हुई है।
मक्का की बुवाई चालू खरीफ में घटकर 76.72 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक मक्का की बुवाई 81.55 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। हालांकि मक्का की सामान्य बुवाई खरीफ में 73.34 लाख हैक्टेयर में ही होती है। विश्व बाजार में मक्का के भाव सस्ते हैं, जबकि घरेलू बाजार में खरीफ मक्का की आवक सितंबर में बनेगी, इसलिए मक्का के भाव में हल्का सुधार तो सकता है लेकिन बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं है।
ज्वार की बुवाई चालू खरीफ में घटकर 15.73 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 18.54 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। रागी की बुवाई चालू खरीफ में घटकर 5.95 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुवाई 7.94 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। चालू खरीफ में मोटे अनाजों की बुवाई घटकर 171.75 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 179.17 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी।.................   आर एस राणा

18 August 2017

एमपी, यूपी, हरियाणा व महाराष्ट्र तथा कर्नाटका में सूखे जैसे हालात

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में मध्य प्रदेश, पष्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र के मराठवाडा और विदर्भा के साथ ही कर्नाटका में भी बारिश सामान्य से काफी कम होने के कारण सूखे जैसे हालात बने हुए हैं, जिनका असर चालू खरीफ में दलहन, तिलहन तथा मोटे अनाजों की पैदावार पर पड़ने की आशंका है।
भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जून से 16 अगस्त तक सामान्य से 33 फीसदी बारिश कम हुई है जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में सामान्य से 13 फीसदी कम बारिश हुई है। आईएमडी के अनुसार हरियाणा, चंडीगढ़ में चालू खरीफ में बारिश सामान्य से 24 फीसदी और पंजाब में 15 फीसदी कम बारिश हुई है। हिमाचल प्रदेश में भी सामान्य से 7 फीसदी कम बारिश हुई है।
आईएमडी के अनुसार पश्चिमी मध्य प्रदेश में चालू खरीफ में अभी तक सामान्य से 21 फीसदी और पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 20 फीसदी तथा उड़ीसा में 7 फीसदी सामान्य से कम बारिश हुई है। महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भा में भी सूखे जैसे हालात बने हुए हैं, मराठवाड़ा में जहां सामान्य से 30 फीसदी और विदर्भा में 31 फीसदी सामान्य से कम बारिश हुई है। छत्तीसगढ़ में भी चालू खरीफ में सामान्य से 11 फीसदी कम बारिश हुई है।
कोस्टल कर्नाटका में जहां चालू खरीफ में अभी तक सामान्य से 26 फीसदी कम बारिश हुई है, वहीं नार्थ इस्ट कर्नाटका में 21 फीसदी और साउथ कर्नाटका में 30 फीसदी सामान्य की तुलना में कम बारिश हुई है। केरल में भी चालू खरीफ में सामान्य के मुकाबले 29 फीसदी कम बारिश हुई है। तेलंगाना में भी 16 फीसदी बारिश चालू खरीफ में सामान्य से कम हुई है। ............   आर एस राणा

दलहन, तिलहन के साथ मोटे अनाजों की बुवाई कम, कपास की ज्यादा

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में दलहन, तिलहन के साथ ही मोटे अनाजों की बुवाई में कमी आई है, जबकि कपास और गन्ने की बुवाई बढ़ी है। खरीफ की प्रमुख फसल धान की रौपाई पिछले साल के लगभग बराबर ही हुई है। दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों की बुवाई तो घटी ही है, साथ ही देशभर के 23 फीसदी इलाकों में बारिश सामान्य से कम हुई है, जबकि तिलहन, दलहन और मोटे अनाजों की पैदावार खरीफ में मानसूनी बारिश पर ही निर्भर होती है, अतः चालू खरीफ में इनकी प्रति हैक्टेयर उत्पादकता में की कमी आ सकती है।
मानसून के आरंभ में अच्छी बारिश से जहां खरीफ फसलों की बुवाई आगे चल रही थी, वहीं महीने से बारिश सामान्य से कम होने के कारण कुल बुवाई भी पिछड़ी है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में फसलों की बुवाई घटकर अभी तक केवल 976.34 लाख हैक्टेयर में हो पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 984.57 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी।
मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में दलहन की बुवाई घटकर 130.68 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक दलहन की बुवाई 135.42 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। दलहनी फसलों में अरहर की बुवाई में करीब 9 लाख हैक्टेयर में कमी आकर कुल बुवाई अभी तक 40.81 लाख हैक्टेयर में ही हुई है, जबकि मूंग की बुवाई भी पिछले साल की तुलना में घटी है। हालांकि उड़द की बुवाई पिछले साल की तुलना में ज्यादा हुई है।
तिलहनों की बुवाई चालू खरीफ में घटकर 157.36 लाख हैक्टेयर में ही पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में तिलहनों की बुवाई 175.10 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। तिलहनों में सोयाबीन के साथ ही मूंगफली की बुवाई भी पिछड़ रही है। सोयाबीन की बुुवाई चालू खरीफ में अभी तक केवल 102.33 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 112.51 लाख हैक्टेयर में सोयाबीन की बुवाई हो चुकी थी। मूंगफली की बुवाई भी चालू खरीफ में घटकर 37.67 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 42.98 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।
खरीफ की प्रमुख फसल धान की रौपाई चालू रबी में 341.58 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 340.14 लाख हैक्टेयर में रौपाई ही हो पाई थी। मोटे अनाजों की बुवाई चालू रबी में पिछले साल की तुलना में घटकर अभी तक केवल 171.75 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 179.17 लाख हैक्टेयर में मोटे अनाजों की बुवाई हो चुकी थी। मोटे अनाजों में जहां बाजरा की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है वहीं मक्का के साथ ही ज्वार की बुवाई पिछे चल रही है।
कपास की बुवाई चालू रबी में बढ़कर 118.14 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 101.54 लाख हैक्टेयर में ही कपास की बुवाई हो पाई थी। गन्ने की बुवाई भी चालू सीजन में बढ़कर 49.78 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 45.64 लाख हैक्टेयर में ही गन्ने की बुवाई हो पाई थी।...............     आर एस राणा

देश के 23% इलाकों में कम हुई बारिश

मॉनसून सीजन के 2.5 महीने खत्म हो गए हैं और इस दौरान पूर्वी और उत्तरी भारत में जहां भयंकर बाढ़ आई है, वहीं दक्षिण भारत समेत देश के  कुछ इलाकों में बेहद कम बारिश हुई है। खास करके दक्षिण भारत में सामान्य से 16 फीसदी कम बारिश हुई है। जहां कर्नाटक और केरल में करीब 30 फीसदी कम बारिश हुई है।
इस दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी काफी कम बारिश रिकॉर्ड हुई है। मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में भी बारिश की स्थिति चिंताजनक है। हालांकि मौसम विभाग का दावा है कि अगले कुछ दिनों में मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में बारिश सुधर सकती है।