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28 April 2016

एग्री कमोडिटी में मुनाफे का अच्छा अवसर

एग्री कमोडिटी में आगे की रणनीति कैसे बनाये, कब आयेगी तेजी, किस भाव पर स्टॉक करने पर मिलेगा मुनाफा, क्या रहेगी सरकार की नीति, आयात-निर्यात की स्थिति के साथ ही विदेष में कैसी है पैदावार, इन सब की स्टीक जानकारी के लिए हमसे जुड़े............एग्री कमोडिटी की दैनिक रिपोर्ट के साथ ही मंडियों के ताजा भाव आपको ई-मेल से हिंदी में भेजे जायेंगे............एक महीना रिपोर्ट लेने का चार्ज मात्र 1,000 रुपये, 6 महीने का 5,000 रुपये और एक साल का केवल 8,000 रुपये........



आर एस राणा
rsrana2001@gmail.com
09811470207

गुंटूर में 39 लाख बोरी लालमिर्च की हो चुकी है आवक

आर एस राणा
नई दिल्ली। मंडी सूत्रों के अनुसार चालू सीजन में मध्य अप्रैल 2016 तक आंध्रप्रदेष की गुटूर मंडी में 39.95 लाख बोरी (एक बोरी-40 किलो) लालमिर्च की आवक चुकी है। इस समय दैनिक आवक कम हो रही है तथा तेजा क्वालिटी में घरेलू मसाला निर्माताओं के साथ ही निर्यातकों की मांग अच्छी बनी हुई है।
गुरुवार को गुंटूर मंडी में लालमिर्च की दैनिक आवक घटकर 30 हजार बोरी की हुई जबकि 341 क्वालिटी की लालमिर्च के भाव 8,000 से 13,000 रुपये, तेजा क्वालिटी के 7,800 से 12,200 रुपये, एस-10 क्वालिटी के भाव 9,000 से 12,200 रुपये, ब्याडगी क्वालिटी की लालमिर्च के भाव 8,000 से 13,200 रुपये और फटकी क्वालिटी के भाव 5,500 से 8,000 रुपये प्रति क्विंटल रहे।.....आर एस राणा

चालू महीने के चौथे सप्ताह मेंदलहन का आयात बढ़ा

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू महीने के चौथे सप्ताह 18 अप्रैल से 24 अप्रैल के दौरान देष में दलहन आयात में 16 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। सरकारी सूत्रों के अनुसार 18 अप्रैल से 24 अप्रैल के दौरान देष में 94.8 हजार टन दालों का आयात हुआ है जबकि इसके पहले सप्ताह 11 अप्रैल से 17 अप्रैल के दौरान 81 हजार दालों का आयात हुआ है। इस दौरान सभी दालों के आयात में बढ़ोतरी हुई है।...आर एस राणा

आयातित अरहर और उड़द की कीमतों में गिरावट


आर एस राणा
नई दिल्ली। आयातित अरहर और उड़द की कीमतों में गिरावट आई है जबकि मूंग के भाव स्थिर बने हुए हैं। मुुंबई में लेमन के भाव घटकर 1,405 डॉलर प्रति टन रह गए जबकि 26 तारिख को लेमन का भाव 1,425 डॉलर प्र्रति टन था। इसी तरह से उड़द एफएक्यू का भाव इस दौरान 1,540 डॉलर से घटकर 1,530 डॉलर और एसक्यू का भाव 1,720 डॉलर से घटकर 1,600 डॉलर प्रति टन रह गया।
मूंग अन्ना का भाव 1,000 डॉलर प्रति टन पर स्थिर बना हुआ है। पकाकू का भाव भी 1,050 डॉलर से घटकर और पेड़ीसेवा का भाव 1,070 डॉलर तथा छौला एसक्यू का भाव 790 और एफएक्यू का भाव 690 डॉलर प्रति टन पर स्थिर बना हुआ है। आयातित अरहर और उड़द की कीमतों में अभी और नरमी आने का अनुमान है।....आर एस राणा

27 April 2016

गत सप्ताह 867 टन चना और 2,696 टन मसूर का आयात हुआ


आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू महीने के दूसरे सप्ताह यानि 11 अप्रैल से 17 अप्रैल के दौरान देष में 867 टन आयातित चना आया। इस दौरान हुए कुल आयात में आस्ट्रेलिया से 321 टन, अर्जेटीना से 232 टन और अन्य देषों से 314 टन चने का आयात हुआ।
सूत्रों के अनुसार 11 अप्रैल से 17 अप्रैल के दौरान देष में 2,696 टन मसूर का आयात हुआ। मसूर के कुल आयात में 1,529 टन का आयात कनाडा से तथा 1,051 टन अमेरिका से जबकि 116 टन मसूर का आयात आस्ट्रेलिया से हुआ।.......आर एस राणा

कपास निर्यात में गिरावट दर्ज की गई


आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू महीने के दूसरे सप्ताह 11 अप्रैल से 17 अप्रैल के दौरान कपास के निर्यात में कमी देखी गई। इस दौरान देष से 0.468 लाख गांठ (एक गांठ-170 किलो) कपास का निर्यात हुआ है जबकि इसके पहले सप्ताह 4 अप्रैल से 10 अप्रैल के दौरान निर्यात 0.760 गांठ का हुआ था।
देष से 11 अप्रैल से 17 अप्रैल के दौरान सबसे ज्यादा कपास का आयात बंगलादेष ने 0.20 लाख गांठ का किया है जबकि अन्य निर्यात इस दौरान पाकिस्तान को 0.12 लाख गांठ, वियतनाम को 0.06 लाख गांठ और चीन को 0.03    लाख गांठ का हुआ है।......आर एस राणा

क्या दालें फिर बिगाड़ेंगी जायका

चना उत्पादन में कमी के आसार हैं। वहीं तुअर का स्टॉक मांग से कम है। वहीं आयात के भी ज्यादा विकल्प नहीं हैं। ऐसे में सवाल ये हैं कि क्या दालें फिर बिगाड़ेंगी जायका? गौरतलब है कि देश में 2012-13 में 1.83 करोड़ टन, 2013-14 में 1.92 करोड़ टन दल का उत्पादन हुआ। अनुमान है कि 2015-16 में 1.83 करोड़ टन दाल का उत्पादन होगा। अगर मांग की बात करें तो साल 2013-14 में दाल की मांग रही 21.7 करोड़ टन। जबकि 2014-15 में दाल की मांग रही 22.68 करोड़ टन। दाल की मांग को पूरा करने के लिए 2014-15 में 37 लाख टन दाल का आयात किया गया है। वहीं अनुमान है कि साल 2015-16 में 50 लाख टन दाल का आयात किया जाएगा।

महाराष्ट्र सरकार ने नई पहल करते हुए प्राइस कंट्रोल बिल लागू करने का निर्णय लिया है। कैबिनेट ने इस बिल पर अपनी मुहर लगा दी है। जिसके तहत जरूरी सामान का एमआरपी सरकार तय करेगी। दाल, तेल और अनाज इस कानून के दायरे में आएंगे। एमआरपी से ज्यादा दाम पर बेचने पर जुर्माना भरना होगा।

इधर दाल की सप्लाई को लेकर चिंता बनी हुई है। चने के उत्पादन में भारी कमी की आशंका है। इस साल 87 लाख टन चना उत्पादन का अनुमानहै। ये भी आशंका है कि उत्पादन अनुमान से 40 फीसदी कम रह सकता है। ऊंचे भावों पर भी चने की आवक कम है। तुअर का स्टॉक भी मांग के मुकाबले कम है। आयात के विकल्प भी बेहद सीमित हैं। लगातार 2 साल सूखे से दलहन की पैदावार कम हो गई है। इसके बावजूद सप्लाई बढ़ाने के ठोस उपाय नहीं किए गए। उधर सरकार जमाखोरों के खिलाफ सख्ती कार्रवाई करने 1.5 लाख टन के बफर स्टॉक बनाने का एलान कर रही है।