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03 December 2016

एग्री कमोडिटी में आगे की रणनीति कैसे बनाए

एग्री कमोडिटी दलहन, तिलहन, और मसालों के साथ ही गेहूं, मक्का, जौ, कपास, खल, बिनौला, ग्वार सीड, चीनी, और कपास आदि की कीमतों में कब आयेगी तेजी तथा आगे की रणनीति कैसे बनाये, भाव में कब आयेगी तेजी, किस भाव पर स्टॉक करने पर मिलेगा मुनाफा, क्या रहेगी सरकार की नीति, आयात-निर्यात की स्थिति के साथ ही विदेष में कैसी है पैदावार, इन सब की स्टीक जानकारी के लिए हमसे जुड़े............एग्री कमोडिटी की दैनिक रिपोर्ट के साथ ही मंडियों के ताजा भाव आपको ई-मेल से हिंदी में भेजे जायेंगे

एग्री जिंसों के अलावा किराना में हल्दी, जीरा, धनिया, लालमिर्च, बादाम, पिस्ता, इलायची, कालीमिर्च आदि की जानकारी भी हिंदी में ई-मेल के माध्यम से दी जायेगी। हमें ई-मेल करे या फिर फोन पर संपक करें।

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आर एस राणा
 rsrana2001@gmail.com
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अक्टूबर में केस्टर तेल का निर्यात बढ़ा, भाव में तेजी की उम्मीद

आर एस राणा
नई दिल्ली। अक्टूबर महीने में केस्टर तेल का निर्यात बढ़कर 47,112 टन का हुआ है जबकि पिछले साल अक्टूबर महीने में 37,205 टन केस्टर तेल का ही निर्यात हुआ था। इस समय केस्टर तेल में निर्यात मांग अच्छी है जबकि चालू सीजन में केस्टर सीड की पैदावार में 25 से 30 फीसदी की कमी आने की आषंका है। ऐसे में आगामी दिनों में केस्टर सीड की कीमतों में और तेजी आने का अनुमान है। गुजरात की दिसा मंडी में केस्टर सीड के भाव 3,775 से 3,800 रुपये प्रति क्विंटल हैं।
साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएषन आफ इंडिया (एसईए) के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2016-17 के पहले सात महीनों अप्रैल से अक्टूबर के दौरान केस्टर तेल का निर्यात 3,08,158 टन का हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 2,98,082 टन का ही हुआ था। वित्त वर्ष 2015-16 में केस्टर तेल का कुल निर्यात 5,43,274 टन का ही हुआ था जबकि चालू वित्त वर्ष में केस्टर तेल के निर्यात में पिछले साल की तुलना में 8 से 10 फीसदी की बढ़ोतरी होने का अनुमान है।
सूत्रों के अनुसार चालू महीने के 21 नवंबर से 26 नवंबर को समाप्त हुए सप्ताह में 13,500 टन केस्टर तेल का नियात औसतन 1,655.52 डॉलर प्रति टन की दर से हुआ है। इस दौरान 5,500 टन केस्टर तेल का निर्यात टर्की को और 8,000 टन तेल का निर्यात साउदी अरब को क्रमषः 1,709 और 1,601.04 डॉलर प्रति टन (एफओबी) की दर से हुआ है।.............आर एस राणा

ग्वार गम उत्पादों का निर्यात 12.25 फीसदी बढ़ा

आर एस राणा
नई दिल्ली। ग्वार गम उत्पादों की निर्यात मांग बढ़ने से चालू महीने में लगातार तीसरे सप्ताह में इनके निर्यात में बढ़ोतरी हुई है। चालू महीने के तीसरे सप्ताह 21 नवंबर से 26 नवंबर के दौरान ग्वार गम उत्पादों (ग्वार गम पाउडर, ग्वार स्पलिट और मील) का निर्यात बढ़कर 8,625 टन का हुआ है जबकि इसके पहले सप्ताह में इनका निर्यात 7,684 टन का हुआ था। मालूम हो कि चालू महीने के दूसरे सप्ताह 6,554 टन ग्वार गम उत्पादो का निर्यात हुआ था। चालू महीने में अभी तक 26,846 टन ग्वार गम उत्पादों का निर्यात हो चुका है।
चालू महीने के 21 नवंबर से 26 नवंबर के दौरान 5,056 ग्वार गम पाउडर का निर्यात औसतन 1,401.56 डॉलर प्रति टन की दर से हुआ है जबकि तीसरे सप्ताह में 4,634 टन ग्वार गम पाउडर का निर्यात औसतन 1,428.58 डॉलर प्रति टन की दर से हुआ था। इसी तरह से ग्वार स्पलिट का निर्यात 21 नवंबर से 26 नवंबर के दौरान 1,420 टन का औसतन 969.24 डॉलर प्रति टन की दर से हुआ है जबकि इसके पहले सप्ताह में 859 टन ग्वार स्पलिट का निर्यात औसतन 989.5 डॉलर प्रति टन की दर से हुआ था।
ग्वार मील का निर्यात चालू महीने के 21 से 26 नवंबर के दौरान 2,149 टन का औसतन 497.99 डॉलर प्रति टन की दर से हुआ है जबकि इसके पहले सप्ताह में 2,191 टन ग्वार मील का निर्यात 516.85 डॉलर प्रति टन की दर से हुआ था।.............आर एस राणा

दिसंबर में 10 से 12 लाख टन दलहन आयात होने का अनुमान

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू महीने में करीब 10 से 12 लाख टन दलहन आयात होने का अनुमान है। सूत्रों के अनुसार प्राइवेट आयातकों के साथ ही सार्वजनिक कंपनियों ने दिसंबर-जनवरी की षिपमेंट के सौदे ज्यादा मात्रा में किए है, ऐसे में चालू महीने में घरेलू बाजार में दलहन की कीमतों में गिरावट ही रहने का अनुमान है।
पहली दिसंबर को नवा सेवा बंदरगाह पर 536 कंटेनर दलहन के पहुंचे हैं। इसमें से करीब 7 कंटेनर चना के, 49 कंटेनर अरहर के मौजांबिक से तथा 76 कंटेनर अरहर के तंजानिया से आए हैं, इसके अलावा 53 कंटेनर मसूर के और 2 कंटेनर हरी मटर के कनाडा से मुंबई बंदरगाह पर पहुंचे हैं। इसके साथ ही 6 कंटेनर पीली मटर के पहुंचे हैं। जानकारों के अनुसार इस दौरान उड़द का कोई कंटेनर नहीं आया है।
आगामी दिनों में पीली मटर, चना के साथ ही मसूर और अरहर का आयात ज्यादा मात्रा में होगा।.............आर एस राणा

02 December 2016

गेहूं, दलहन और तिलहनों की बुवाई बढ़ी, मोटे अनाजों की पिछड़ी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी में जहां गेहूं के साथ ही दलहन और तिलहनों की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है वहीं मोटे अनाजों की बुवाई अभी भी पिछे चल रही है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू रबी अभी तक देषभर में 415.53 लाख हैक्टेयर में फसलों की बुवाई हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुवाई 382.84 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी।
रबी की प्रमुख फसल गेहूं की बुवाई बढ़कर अभी तक 173.93 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 152.56 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हो पाई थी। रबी दहलन की बुवाई अभी तक 112.95 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 99.83 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुवाई बढ़कर 76.69 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 68.57 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। मसूर की बुवाई भी बढ़कर चालू रबी में अभी तक 12.38 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 9.37 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी।
रबी तिलहनों की बुवाई चालू सीजन में अभी तक 70.70 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 64.21 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी। रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों की बुवाई 61.73 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 54.32 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई थी। मूंगफली की बुवाई चालू रबी में बढ़कर 4.64 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 4.13 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी।
हालांकि मोटे अनाजों की बुवाई अभी भी पिछे चल रही है, अभी तक देषभर में केवल 44.59 लाख हैक्टेयर में ही मोटे अनाजों की बुवाई हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 51.40 लाख हैक्टेयर में इनकी बुवाई हो चुकी थी। मोटे अनाजों में सबसे ज्यादा कमी ज्वार की बुवाई में आई है। ज्वार की बुवाई चालू रबी में अभी तक केवल 27.67 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 35.12 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। रबी मक्का की बुवाई भी चालू सीजन में अभी तक 10.15 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 9.53 लख हैक्टेयर में इसकी बुवाई हुई थी। जौ की बुवाई चालू रबी में 5.65 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 5.14 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी।..............आर एस राणा

चालू पेराई सीजन में 24.71 लाख टन हो चुका है चीनी का उत्पादन

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू पेराई सीजन 2016-17 में मिलों द्वारा गन्ने की पेराई पहले आरंभ करने से 30 नवंबर 2016 तक 24.71 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है जोकि पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 4.06 लाख टन ज्यादा है। पिछले साल की समान अवधि में 23.35 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था।
इंडियन षुगर मिल्स एसोसिएषन (इस्मा) के अनुसार चालू पेराई सीजन में अभी तक 365 चीनी मिलों में पेराई आरंभ हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 340 चीनी मिलों में ही पेराई आरंभ हुई थी। हालांकि सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में 30 नवंबर 2016 तक केवल 9.50 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ है जबकि पिछले साल की समान अवधि में राज्य में 12.90 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। महाराष्ट्र में चीनी मिलों में पेराई देर से आरंभ हुई है।
अन्य राज्यों में उत्तर प्रदेष में चालू पेराई सीजन में अभी तक 8.51 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 1.74 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था। कर्नाटका में भी चालू पेराई सीजन में अभी तक 7 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 60 हजार टन चीनी का उत्पादन हुआ था।
गुजरात में चालू पेराई सीजन में अभी तक 1.37 लाख टन जबकि अन्य राज्यों में अभी तक 1.03 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ है। माना जा रहा है कि आगामी दिनों में गन्ने की पेराई में और तेजी आयेगी, जिससे चीनी का उत्पादन और बढ़ेगा।...............आर एस राणा

01 December 2016

धनिया की बुवाई गुजरात में बढ़ी, आंध्रप्रदेष में घटी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी में जहां गुजरात में धनिया की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है, वहीं आंध्रप्रदेष में बुवाई पिछड़ रही है। गुजरात कृषि निदेषालय के अनुसार राज्य में अभी तक 24,100 हैक्टेयर में धनिया की बुवाई हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में केवल 4,700 हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी। राज्य में सामान्यतः धनिया की बुवाई 90,400 हैक्टेयर में होती है।
उधर आंध्रप्रदेष में चालू रबी में अभी तक केवल 289 हैक्टेयर में ही धनिया की बुवाई हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 5,346 हैक्टेयर में धनिया की बुवाई हो चुकी थी। राज्य में धनिया की बुवाई सामन्यतः 24,100 हैक्टेयर में होती है।
चालू रबी में धनिया की बुवाई ज्यादा होने का अनुमान है, जबकि उत्पादक राज्यों में बकाया स्टॉक भी ज्यादा है। ऐसे में सर्दियों की मांग से भाव में 200 से 300 रुपये प्रति क्विंटल का सुधार तो आ सकता है लेकिन बड़ी तेजी की संभावना नहीं है। मध्य प्रदेष की रामगंज मंडी में बादामी क्वालिटी के धनिया का भाव 6,500 रुपये, ईगल क्वालिटी के धनिया का भाव 6,750 रुपये और स्कूटर ब्रांड धनिया का भाव 6,800 से 7,000 रुपये प्रति क्विंटल रहा तथा दैनिक आवक 7,000 बोरी की हुई।............आर एस राणा