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24 June 2017

बाजरा की बुवाई बढ़ी, मक्का और ज्वार घटी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में जहां बाजरा की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है, वहीं मक्का के साथ ही ज्वार की बुवाई पिछड़ रही है। बाजरा का पुराना स्टॉक राजस्थान और हरियाणा में ज्यादा होने से इसकी कीमतों में मंदा बना हुआ है। मक्का में दक्षिण भारत की मंडियों में भाव में और सुधार आने का अनुमान है लेकिन उत्तर भारत में भाव में तेजी नहीं है। ज्वार में बीज वालों की मांग से हल्का सुधार आने का अनुमान है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में बाजरा की बुवाई बढ़कर 4.66 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 2.88 लाख हैक्टेयर में ही बाजरा की बुवाई हुई थी। खरीफ में मोटे अनाजों की प्रमुख फसल मक्का की बुवाई चालू खरीफ में अभी तक 9.44 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 9.50 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।
ज्वार की बुवाई चालू खरीफ में अभी तक 1.42 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 1.65 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। मोटे अनाजों की कुल बुवाई चालू खरीफ में 17.71 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 15.94 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी।......   आर एस राणा

सोयाबीन के साथ मूंगफली की बुवाई बढ़ी, भाव में तेजी की उम्मीद नहीं

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में तिलहन की प्रमुख फसल सोयाबीन के साथ ही मूंगफली की बुवाई आगे चल रही है। सोयाबीन के साथ मूंगफली का स्टॉक उत्पादक मंडियों में ज्यादा है, जबकि तेलों में मांग कमजोर है इसलिए चालू महीने में इनकी कीमतों में तेजी की संभावना नहीं है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में सोयाबीन की बुवाई बढ़कर 5.67 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 3.01 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई थी। इसी तरह से मूंगफली की बुवाई भी चालू खरीफ में बढ़कर 4.70 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 3.15 लाख हैक्टेयर में ही मूंगफली की बुवाई हुई थी।
तिलहनों की कुल बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 11.24 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 7.23 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हो पाई थी। ...............   आर एस राणा

23 June 2017

कपास और तिलहन की बुवाई बढ़ी, दलहन की पिछड़ी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में कपास के साथ ही तिलहन की बुवाई बढ़ी है जबकि दलहन की बुवाई पिछड़ी है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में फसलों की बुवाई बढ़कर 130.74 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 119.28 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी। दक्षिण भारत के राज्यों में मानसूनी बारिश हो रही है जबकि उत्तर भारत के राज्यों में प्री-मानसून की बारिश अच्छी हुई है जिससे आगे खरीफ फसलों की बुवाई में और तेजी आयेगी।
खरीफ की प्रमुख फसल धान की रौपाई घटकर चालू रबी में 16.70 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 15.97 लाख हैक्टेयर में ही रौपाई हो पाई थी। दलहन की बुवाई चालू रबी में घटकर 5.97 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में दालों की बुवाई 9.01 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।
तिलहनों की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 11.24 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में तिलहनों की बुवाई 7.23 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई थी। मोटे अनाजों की बुवाई चालू रबी में बढ़कर 17.71 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है तथा पिछले साल इस समय तक 15.94 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी।
कपास की बुवाई चालू रबी में बढ़कर 24.70 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 19.07 लाख हैक्टेयर में ही कपास की बुवाई हो पाई थी। गन्ने की बुवाई भी चालू सीजन में बढ़कर 47.52 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 44.82 लाख हैक्टेयर में ही गन्ने की बुवाई हो पाई थी।......    आर एस राणा

22 June 2017

डॉलर के मुकाबले रुपये में हल्की रिकवरी

डॉलर के मुकाबले रुपये में हल्की रिकवरी आई है। एक डॉलर की कीमत 64.55 रुपये के पास है। डॉलर में गिरावट से रुपये को सपोर्ट मिला है। कच्चा तेल पिछले 10 महीने के निचले स्तर से संभलने की कोशिश कर रहा है। हालांकि बढ़त के बावजूद नायमैक्स पर क्रूड में 43 डॉलर के नीचे कारोबार हो रहा है। वहीं ब्रेंट का दाम 45.5 डॉलर के नीचे है। सोने और चांदी में हल्की बढ़त है। चांदी पिछले एक महीने के निचले स्तर से काफी बढ़ चुकी है।
ग्लोबल मार्केट में चीनी का दाम पिछले 16 महीने के निचले स्तर पर आ गया है और कल घरेलू बाजार में भी चीनी करीब 6 महीने के निचले स्तर पर बंद हुई। राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में प्री मॉनसून बारिश से कपास की बुआई जोरों पर है। राजस्थान के कई इलाकों में कल से ही रुक रुककर बारिश हो रही है।

एफसीआई को नहीं मिला गेहूं का खरीददार, भाव में तेजी की उम्मीद नहीं

आर एस राणा
नई दिल्ली। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा खुले बाजार बिक्री भाव (ओएमएसएस) में गेहूं बेचने का भाव हाजिर मंडियों से उंचा रखने के कारण एक भी निविदा नहीं भरी गई। सूत्रों के अनुसार एफसीआई ने गेहूं के गैर उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्रप्रदेश और तमिलनाडु, तथा केरल और कर्नाटका आदि में गेहूं बेचने के लिए निविदा आमंत्रित की थी, लेकिन एक भी राज्य से फ्लोर मिलों ने गेहूं खरीदने के लिए रुचि नहीं दिखाई।
एफसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार आंध्रप्रदेष में एफसीआई ने गेहूं बेचने के लिए निविदा भरने का न्यूनतम भाव 2,074 से 2,109 रुपये तथा गुजरात में 2,178 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था। पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश से गेहूं का बिक्री भाव 1,790 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है जबकि इसमें परिवहन लागत व अन्य खर्च अलग हैं। व्यापारियों के अनुसार आस्ट्रेलियाई से आयातित गेहूं का भाव तुतीकोरन बंदरगाह पर 1,780 रुपये प्रति क्विंटल है, तथा फ्लोर मिलों में पहुंच इसका भाव 1,880 से 1,930 रुपये प्रति क्विंटल बैठ रहा है। इसीलिए फ्लोर मिलें दक्षिण भारत में आयातित गेहूं की खरीद ज्यादा मात्रा में कर रही है।
जानकारों के अनुसार दक्षिण भारत में करीब 14 स 15 लाख टन गेहूं का स्टॉक जमा है, इसलिए अभी फ्लोर मिलें एफसीआई से खरीद नहीं करेंगी। दिल्ली में गेहूं का भाव 1,740 से 1,745 रुपये प्रति क्विंटल है। प्रमुख उत्पादक राज्यों मध्य प्रदेश के साथ ही राजस्थान में गेहूं का स्टॉक ज्यादा है, साथ ही 10 फीसदी आयात शुल्क के बावजूद भी आस्ट्रेलियाई गेहूं सस्ता पड़ रहा है। ऐसे में गेहूं की कीमतों में सुधार तभी आ सकता है, अगर केंद्र सरकार गेहूं के आयात शुल्क को 10 फीसदी से बढ़ाकर 25 फीसदी कर दे।
चालू रबी विपणन सीजन 2017-18 में एफसीआई की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं की सरकारी खरीद 306.54 लाख टन से ज्यादा की हो चुकी है जबकि साल की समान अवधि में इसकी की खरीद 229.61 लाख की हुई थी।
केंद्रीय पूल में पहली जून को गेहूं का स्टॉक बढ़कर 334.40 लाख टन का हो चुका है जबकि पिछले साल पहली जून को 326.38 लाख टन गेहूं का ही स्टॉक मौजूद था।................   आर एस राणा

बासमती चावल का निर्यात 40 लाख टन ही होने का अनुमान

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2017-18 में बासमती चावल का निर्यात 40 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2016-17 में 39.99 लाख टन बासमती चावल का निर्यात हुआ था। वित्त वर्ष 2015-16 में बासमती चावल का निर्यात 40.50 लाख टन का हुआ था।
ऑल इंडिया राईस एक्सपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय सेतिया ने बताया कि चालू वित्त वर्ष 2017-18 में भी बासमती चावल का निर्यात 40 लाख टन के आसपास ही होगा, जबकि चालू सीजन में बासमती चावल का उत्पादन पिछले साल की तुलना में ज्यादा होने का अनुमान है। चालू सीजन में बासमती धान के भाव उत्पादक मडियों में उंचे हो गए थे, जिस कारण पंजाब और हरियाणा में किसान खासकर के पूसा 1,121 और 1,509 धान की रौपाई ज्यादा करेंगे। व्यापारियों के अनुसार जुलाई के बाद घरेलू बाजार में बासमती चावल के साथ ही धान की कीमतों में और मंदा आने का अनुमान है।
एपीडा के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2017-18 के पहले महीने अप्रैल में बासमती चावल का निर्यात बढ़कर 3,89,406 टन का हुआ है जबकि पिछले साल अप्रैल महीने में इसका निर्यात 3,36,769 टन का हुआ था।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में धान की रौपाई 9.22 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 9.40 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। अभी तक गैर-बासमती चावल की रौपाई ही शुरु हुई है, पंजाब और हरियाणा में पूसा 1,121 बासमती धान और पूसा-1,509 पूसा की रौपाई जुलाई में शुरु होगी।..........   आर एस राणा

दलहन आयात में हुई बढ़ोतरी

आर एस राणा
नई दिल्ली। 17 जून को समाप्त हुए सप्ताह में दक्षिण भारत के चैन्नई और कृषणानाप्तम बंदरगाह पर 1,355 कंटेनर दलहन के आए है, जबकि इसके पहले सप्ताह में केवल 649 कंटेनरों का आयात हुआ था।
सूत्रों के अनुसार 17 जून को समाप्त हुए सप्ताह में उड़द के 764 कंटेनर आए है जबकि इसके पहले सप्ताह में उड़द के 313 कंटेनर ही आए थे। इसी तरह से मसूर के 186 कंटेनरों का आयात हुआ है जबकि इसके पहले सप्ताह में केवल 127 कंटेनरों का ही आयात हुआ था।  चने का आयात बढ़कर भी इस दौरान 154 कंटेनरों का हुआ है जबकि इसके पहले सप्ताह में केवल 70 कंटेनर चना का आयात हुआ था। इसी तरह से मूंग, पीली मटर और हरि मटर का आयात भी ज्यादा हुआ है।......  आर एस राणा