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24 March 2019

समर्थन मूल्य पर 357 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य, उत्पादन अनुमान ज्यादा

आर एस राणा
नई दिल्ली। पहली अप्रैल से शुरू होने वाले चालू रबी विपणन सीजन 2019-20 में केंद्र सरकार ने 357 लाख टन गेहूं न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद का लक्ष्य तय किया है जबकि पिछले रबी में समर्थन मूल्य पर 357.95 लाख टन गेहूं खरीदा गया था।
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चालू रबी में पंजाब से 125 और हरियाणा से 85 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य तय किया। चालू रबी में पंजाब में 171.60 लाख टन और हरियाणा में 132.19 लाख टन गेहूं उत्पादन का अनुमान है। पंजाब से गेहूं की खरीद पहली अप्रैल 2019 से शुरू होगी तथा 25 मई तक खरीद की जायेगी। राज्य में एफसीआई 413 और राज्य की खरीद एजेंसियां 1,423 खरीद केंद्र खोलेगी। हरियाणा से गेहूं की समर्थन मूल्य पर खरीद पहली अप्रैल से 15 मई तक चलेगी तथा राज्य में एफसीआई 86 और राज्य सरकार की एजेंसियां 298 खरीद केंद्रों के माध्यम से खरीद करेगी। पिछले रबी में पंजाब से 126.92 लाख टन और हरियाणा से 87.84 लाख टन गेहूं की खरीद समर्थन मूल्य पर हुई थी।
मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से खरीद का लक्ष्य कम
मध्य प्रदेश से चालू रबी में 75 लाख टन और उत्तर प्रदेश से 50 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य तय किया है। मध्य प्रदेश में गेहूं का उत्पादन चालू रबी में 207.74 लाख टन और उत्तर प्रदेश में 350 लाख टन होने का अनुमान है। मध्य प्रदेश से गेहूं की खरीद 15 मार्च से 15 जून के दौरान की जायेगी तथा राज्य सरकारी एजेंसियां 3,100 खरीद केंद्रों के माध्यम से खरीद करेंगी। उत्तर प्रदेश से पहली अप्रैल से 15 जून तक गेहूं की समर्थन मूल्य पर खरीद की जायेगी, तथा खरीद के लिए एफसीआई 213 और राज्य सरकार 6,000 केंद्र खोलेगी। पिछले रबी में मध्य प्रदेश से 73.13 लाख टन और उत्तर प्रदेश से 52.94 लाख टन गेहूं समर्थन मूल्य पर खरीदा गया था।
राजस्थान से खरीद का लक्ष्य ज्यादा
अन्य राज्यों में राजस्थान से 17 लाख टन, बिहार से 2 लाख टन, गुजरात से 50 हजार टन तथा उत्तराखंड से भी 2 लाख टन और अन्य राज्यों से 50 हजार टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य तय किया है। राजस्थान में चालू रबी में गेहूं का 113.60 लाख टन, बिहार में 56.10 लाख टन, गुजरात में 24.20 लाख टन और उत्तराखंड में 9.26 लाख टन उत्पादन का अनुमान है। पिछले रबी में राजस्थान से 15.32 लाख टन, उत्तराखंड से 1.10 लाख टन, गुजरात से 37 हजार टन और चंडीगढ़ से 14 हजार टन तथा बिहार से 18 हजार टन गेहूं खरीदा गया था।
समर्थन मूल्य 105 रुपये बढ़ाया
चालू रबी विपणन सीजन 2019-20 के लिए गेहूं का समर्थन मूल्य 105 रुपये बढ़ाकर 1,840 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है जबकि पिछले रबी विपणन सीजन 2018-19 में 1,735 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीद हुई थी।
गेहूं का उत्पादन अनुमान ज्यादा
कृषि मंत्रालय के दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार चालू रबी में गेहूं का उत्पादन बढ़कर 991.2 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले फसल सीजन में 971.1 लाख टन का  उत्पादन हुआ था। ........... आर एस राणा

सरकारी खरीद के अभाव में सस्ते दाम पर सरसों बेचने को मजबूर किसान

आर एस राणा
नई दिल्ली। सरकारी खरीद के अभाव में किसानों को सरसों औने-पौने दाम पर बेचनी पड़ रही है। उत्पादक राज्यों की मंडियों में कंडीशन की सरसों 3,400 से 3,600 रुपये प्रति क्विंटल (कंडीशन-42 फीसदी तेल) बिक रही है जबकि केंद्र सरकार ने चालू रबी विपणन सीजन 2019-20 के लिए सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 4,200 रुपये प्रति क्विंटल तय कर रखा है।
हरियाणा की दादरी मंडी में सरसों बेचने आए किसान अभय राम ने बताया कि मंडी में उनकी सरसों 3,450 रुपये प्रति क्विंटल के भाव बिकी है, अभी तक मंडी में सरसों की सरकारी खरीद शुरू नहीं हुई है। हरियाणा के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार राज्य की मंडियों से 28 मार्च से हैफेड सरसों की समर्थन मूल्य पर खरीद शुरू करेगा। हैफेड एक किसान से प्रति एकड़ 25 क्विंटल सरसों की खरीद करेगा तथा वही सरसों खरीदी जायेगी, जिसमें नमी 8 फीसदी से कम होगी।
उत्पादन के मुकाबले खरीद का लक्ष्य कम
सरसों के सबसे बड़े उत्पादक राज्य राजस्थान की कैथल मंडी के सरसों कारोबारी पुष्कर राज ने बताया कि मंडी में कंडीशन की सरसों 3,500 से 3,600 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है। सरकारी खरीद अभी शुरू नहीं हुई है जिस कारण किसानों को नीचे भाव बेचनी पड़ रही है। नेफेड के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार राजस्थान की कोटा लाइन की मंडियों से सरसों की खरीद शुरू कर दी गई है। 21 मार्च तक राज्य से 418 टन सरसों की खरीद हुई है जबकि चालू रबी में राजस्थान से सरसों की खरीद का लक्ष्य 8.50 लाख टन का है। राजस्थान के कृषि निदेशालय के अनुसार चालू रबी में राज्य में 35.88 लाख टन सरसों के उत्पादन का अनुमान है।
रिकार्ड उत्पादन का अनुमान
कृषि मंत्रालय के दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार चालू फसल सीजन 2018-19 में देश में सरसों का रिकार्ड उत्पादन 83.97 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल 75.40 लाख टन का ही उत्पादन हुआ था। इससे पहले फसल सीजन 2012-13 में 80.29 लाख टन सरसों का उत्पादन हुआ था। उद्योग के अनुसार चालू रबी में सरसों का 87.50 लाख टन होने का अनुमान है। 
खाद्य तेलों का आयात बढ़ा
साल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (एसईए) के अनुसार चालू तेल वर्ष 2018-19 (नवंबर-18 से अक्टूबर-19) के पहले चार नवंबर से फरवरी में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 1.61 फीसदी बढ़कर 48.62 लाख टन का हुआ है जबकि पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में इनका आयात केवल 47.85 लाख टन का ही हुआ था। फरवरी में खाद्य एवं अखाद्य तेलों के आयात में 7.4 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल आयात 12.42 लाख टन का हुआ है जबकि पिछले साल फरवरी में 11.57 लाख टन का आयात हुआ था। तेल वर्ष 2017-18 में 145.16 लाख टन और तेल वर्ष 2016-17 में रिकार्ड 150.77 लाख टन का आयात हुआ था।....... आर एस राणा

पीएम-किसान योजना में 4 लाख से ज्यादा ट्रांजैक्शन फेल, गलत लोगों के खाते में भी गया पैसा

आर एस राणा
नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव से पहले आधी-अधूरी तैयारियों के साथ शुरू की गई प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम किसान) के चार लाख से ज्यादा ट्रांजैक्शन फेल हो गए हैं। किसानों के खाते में पैसा तो भेजा गया, लेकिन तकनीकी कारणों से पैसा जमा नहीं हुआ। साथ ही कई ऐसे लोगों के खातों में भी रकम पहुंचने की शिकायत आई है जिसका खेती-किसानी से कोई लेना-देना नहीं है। इसलिए सरकार पीएम-किसान योजना के लाभार्थियों के लिए अब आधार को अनिवार्य करने जा रही है।  
जिन लोगों का खेती-किसानी से लेना-देना नहीं, उनके खाते में भी आए पैसे
सूत्रों के अनुसार भाजपा शासित राज्यों ने केंद्र सरकार के कहने पर ज्यादा से ज्यादा किसानों के डाटा बगैर जांच-परख के भेज दिए, जिस कारण इस तरह की समस्या सामने आ रही है। कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार पीएम-किसान योजना के तहत जारी की गई पहली किस्त में से 4 लाख से ज्यादा ट्रांजैक्शन फेल होने के साथ ही बहुत से ऐसे लोगों के खातों में भी रकम पहुंच गई है, जिनका खेती-किसानों से कोई लेना देना है। इस कड़ी में एक प्राइवेट बैंक के मैनेजर के खाते में भी 2,000 रुपये की पहली किस्त जमा हुई है। उन्होंने बताया कि बाकि बचे हुए लाभार्थियों को पहली किस्त देने के लिए अब आधार के साथ ही एक और भी पहचान देना अनिवार्य होगा।
1.65 करोड़ किसानों का ब्यौरा दुरस्त करने के लिए राज्यों को वापिस भेजा 
उन्होंने बताया कि देश के करीब 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 4.75 करोड़ किसानों का ब्यौरा कृषि मंत्रालय के पास आया है जिनमें से 1.65 करोड़ किसानों का ब्यौरा दुरस्त करने के लिए वापिस राज्यों के पास भेजा गया है। ऐसे में मंत्रालय के पास पात्र 3.11 करोड़ किसानों का ब्यौरा है जिसमें से 2.75 करोड़ किसानों को पहली किस्त भेजी जा चुकी है।
अंतरिम बजट में सरकार ने की थी घोषणा
अंतरिम बजट 2019-20 में, केंद्र सरकार ने पीएम-किसान योजना की घोषणा की थी जिसके तहत दो हेक्टेयर तक की खेती योग्य भूमि वाले छोटे और सीमांत किसानों को 6,000 रुपये प्रति वर्ष तीन किस्तों में दिए जाने हैं। इसके तहत मार्च के अंत तक 2,000 रुपये की पहली किस्त देने का वादा किया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 फरवरी को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में 1.01 करोड़ किसानों को पहली किस्त हस्तांतरित करते हुए इस योजना की औपचारिक शुरूआत की थी। इस योजना के तहत हर वर्ष 75,000 करोड़ रुपये किसानों के खाते में दिए जाने हैं।..................आर एस राणा

21 March 2019

चने का एमएसपी भी नहीं मिल पा रहा किसानों को

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की बात तो करती है लेकिन किसानों को चना समर्थन मूल्य से 570 से 670 रुपये प्रति क्विंटल नीचे भाव पर बेचना पड़ रहा है। उत्पादक मंडियों में चना के भाव 3,900 से 4,050 रुपये प्रति क्विंटल है जबकि केंद्र सरकार ने चालू रबी विपणन सीजन 2019-20 के लिए चना का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 4,620 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है।
मध्य प्रदेश की उत्पादक मंडियों में चना की नई फसल की आवक बढ़ रही है लेकिन अभी तक समर्थन मूल्य पर खरीद शुरू नहीं हुई है। उज्जैन मंडी में चना बेचने आए काजाखेड़ी बडनगर, उज्जैन के किसान लखन ने बताया कि मंडी में उनका चना 3,900 रुपये प्रति क्विंटल के बिका है। राज्य की इंदौर मंडी में चना के भाव 4,000 से 4,050 रुपये प्रति क्विंटल रहे। मध्य प्रदेश में चालू रबी में चना की बुवाई 34.32 लाख हेक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल राज्य में 35.50 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई थी।
राजस्थान से 25 से होगी खरीद शुरू
राजस्थान की मंडियों से चना की समर्थन मूल्य पर खरीद 25 मार्च से शुरू होगी, जबकि राज्य की मंडियों में नए चना की आवक शुरू हो गई है। कृषि विपणन विभाग, राजस्थान के अनुसार राज्य की मंडियों में चना के औसत भाव 3,900 से 4,000 रुपये प्रति क्विंटल है तथा होली के बाद उत्पादक मंडियों में चना की नई फसल की आवक और बढ़ेगी। राजस्थान में चना की बुवाई चालू रबी में 15.02 लाख हेक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल राज्य में 15.05 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई थी। राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार राज्य में चना का उत्पादन 21.63 लाख टन होने का अनुमान है। महाराष्ट्र स्टेट एग्रीकल्चर मार्किटिंग बोर्ड के अनुसार राज्य की मंडियों में औसत चना के भाव 4,138 रुपये प्रति क्विंटल रहे।
समर्थन मूल्य पर तेलंगाना से हो रही है खरीद
नेफेड के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार तेलंगाना से समर्थन मूल्य पर 21 हजार टन से ज्यादा चना की खरीद हो चुकी है। राजस्थान की मंडियों से चना की खरीद 25 मार्च से शुरू की जायेगी तथा अन्य राज्यों की मंडियों से भी जल्दी ही खरीद शुरू की जायेगी। उन्होंने बताया कि राजस्थान से समर्थन मूल्य पर 4.17 लाख टन चना खरीद का लक्ष्य है जबकि पिछले रबी सीजन में राज्य से 5.79 लाख टन चना की खरीद की थी। रबी विपणन सीजन 2018-19 में नेफेड ने समर्थन मूल्य पर 27.24 लाख टन चना की खरीद की थी, जिसमें से करीब 18.50 लाख टन का स्टॉक बचा हुआ है।
उत्पादन कम होने का अनुमान
केंद्र सरकार ने चालू रबी विपणन सीजन 2019-20 के लिए चना का एमएसपी 220 रुपये बढ़ाकर 4,620 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है जबकि पिछले रबी में एमएसपी 4,400 रुपये प्रति क्विंटल था। कृषि मंत्रालय के दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2018-19 में चना का उत्पादन घटकर 103.2 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल 111 लाख टन का उत्पादन हुआ था। चालू रबी में चना की बुवाई 10.21 फीसदी की कमी आकर कुल बुवाई 96.59 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल 107.57 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई थी।............  आर एस राणा

पीएम-किसान योजना में सात करोड़ से ज्यादा लाभार्थियों को आचार संहिता के कारण पहली किस्त में देरी की आशंका

आर एस राणा
नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव 2019 से ऐन पहले शुरू की गई प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना के पात्र सात करोड़ से ज्यादा किसानों का रजिस्ट्रशन नहीं होने से पहली किस्त में देरी होने की आशंका है। उन्हें मार्च के अंत तक सरकार से वित्त मदद नहीं मिल पाएगी। चुनाव आचार सहिता लागू होने से पहले करीब 12.50 करोड़ किसानों में से कृषि मंत्रालय के पास 4.75 करोड़ किसानों का ब्यौरा ही आया था जिनमें से 3.11 करोड़ किसानों को ही पात्र पाया गया तथा इनमें से 2.75 करोड़ किसानों को पहली किस्त जारी की जा चुकी है। 
कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 7 करोड़ से ज्यादा किसान जिनका अभी तक रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है, तथा जो पात्र है उनको पीएम-किसान योजना के तहत पहली किस्त देने के लिए चुनाव आयोग से अनुमति मांगी है। उन्होंने बताया कि इसके ही पात्र किसान जिनको पहली किस्त दी जा चुकी है, उन्हें दूसरी किस्त देने की तैयारी भी चल रही है तथा इसके लिए भी चुनाव आयोग से अनुमति मांगी गई है।
कुल 4.75 करोड़ किसानों का आया है ब्यौरा
उन्होंने बताया कि देश के करीब 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 4.75 करोड़ किसानों का ब्यौरा कृषि मंत्रालय के पास आया है जिनमें से 1.65 करोड़ किसानों का ब्यौरा दुरस्त करने के लिए वापिस राज्यों के पास भेजा गया है। ऐसे में मंत्रालय के पास पात्र 3.11 करोड़ किसानों का ब्यौरा है जिसमें से 2.75 करोड़ किसानों को पहली किस्त भेजी जा चुकी है। उन्होंने बताया कि सरकार पीएम किसान योजना की दूसरी किश्त भी अप्रैल में देने की योजना बना रही है इसके लिए भी चुनाव आयोग से मंजूरी मांगी है।
रजिस्ट्रेशन का काम जारी रहेगा
उन्होंने बताया कि किसानों के रजिस्ट्रशन का काम जारी रहेगा, तथा चुनाव आयोग से अनुमति मिलने के बाद ही किसानों के खाते में रकम भेजी जायेगी। उन्होंने कहा कि जिन किसानों को पहली किस्त भेजी जा चुकी है, उन पर आचार संहिता का कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन नए रजिस्ट्रेशन हो रहे किसानों को पहली किस्त मिलने में देरी होने की आशंका है।
सालाना 6,000 रुपये मिलेंगे किसानों को
अंतरिम बजट 2019-20 में, केंद्र सरकार ने पीएम-किसान योजना की घोषणा की थी जिसके तहत दो हेक्टेयर तक की खेती योग्य भूमि वाले छोटे और सीमांत किसानों को 6,000 रुपये प्रति वर्ष तीन किस्तों में दिए जाने हैं। इसके तहत मार्च के अंत तक 2,000 रुपये की पहली किस्त देने का वादा किया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 फरवरी को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में 1.01 करोड़ किसानों को पहली किस्त हस्तांतरित करते हुए इस योजना की औपचारिक शुरूआत की थी। इस योजना के तहत हर वर्ष 75,000 करोड़ रुपये किसानों के खाते में दिए जाने हैं।
देश में किसानों की संख्या 14.75 करोड़
वर्ष 2015-16 की कृषि जनगणना रिपोर्ट के अनुसार देश में 14.57 करोड़ किसान हैं। इनमें से करीब 12.50 करोड़ किसान परिवार लघु एवं सीमांत श्रेणी में आते हैं। मंत्रालय के अनुसार पश्चिम बंगाल, सिक्किम, दिल्ली, मध्यप्रदेश, राजस्थान, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और लक्षद्वीप के पात्र किसानों का ब्यौरा अभी तक नहीं आया है।........  आर एस राणा

सरकार ने केंद्रीय पूल से गेहूं खरीदारों की मांगी जानकारी, जमाखोरी की आशंका

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार की नजर गेहूं के बड़े कारोबारियों पर है, इसी के तहत सरकार ने भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) से खरीदारों की सूची मांगी है। एफसीआई ओएमएसएस के तहत गेहूं की बिक्री 1,950 रुपये प्रति क्विंटल के भाव कर रही है जबकि दिल्ली के लारेंस रोड़ पर गेहूं का भाव 2,070 से 2,075 रुपये प्रति क्विंटल है। जानकारों के अनुसार इन भाव में व्यापारियों को मात्र 10 से 15 रुपये प्रति क्विंटल की ही बचत हो रही है।
खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार चालू सीजन में खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत रिकार्ड 80 लाख टन गेहूं की बिक्री की गई है, इसके बावजूद भी भाव में अपेक्षित गिरावट नहीं आई है। इसीलिए एफसीआई से बड़े खरीददारों की सूची देने को कहा है। उन्होंने कहा कि व्यापारियों द्वारा खरीदे गए और बेचे गए गेहूं की जानकारी ली जायेगी। फसल सीजन 2017-18 में केवल 14.21 लाख टन गेहूं ओएमएसएस के तहत बिका था। 
मौजूदा भाव में गेहूं कारोबारियों को मात्र 10 से 15 रुपये की बचत
लारेंस रोड के एक गेहूं कारोबारी ने बताया कि एफसीआई हरियाणा और पंजाब से 1,950 रुपये प्रति क्विंटल के भाव गेहूं बेच रही है। इन भाव में हरियाणा स्थित एफसीआई के गोदाम से गेहूं खरीद करने पर 60 रुपये परिवहन लागत एवं करीब 40-50 रुपये अन्य खर्च को मिलाकर करीब 100 से 110 रुपये का खर्च आता है। अत: इस समय गेहूं में केवल 10 से 15 रुपये प्रति क्विंटल का मार्जिन मिल रहा है। इसलिए व्यापारियों ने गेहूं की खरीद भी एफसीआई से पहले की तुलना में कम कर दी है। उन्होंने बताया कि अप्रैल से नए गेहूं की आवक बढ़ जायेगी, तथा चालू सीजन में गेहूं का उत्पादन भी ज्यादा होने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि सप्ताहभर में गेहूं की कीमतों में 30 से 35 रुपये प्रति क्विंटल का मंदा आया है।
फ्लोर मिलों ने खरीदा है 70 फीसदी से ज्यादा गेहूं
कर्नाटक के एक फ्लोर मिल के प्रबंधक ने बताया कि ओएमएसएस के तहत केंद्र द्वारा बेचे गए 80 लाख टन गेहूं में से 70 फीसदी से ज्यादा सीधा फ्लोर मिलों द्वारा खरीदा गया है। उन्होंने बताया कि दक्षिण भारत की फ्लोर मिलों ने मध्य प्रदेश से गेहूं की खरीद की है, जबकि सरकार मार्च में मध्य प्रदेश से ओएमएसएस के तहत बिक्री बंद कर दी थी। उन्होंने बताया कि दिसंबर तक एफसीआई 1,925 रुपये प्रति क्विंटल के भाव गेहूं बेच रही थी, जबकि जनवरी से बिक्री भाव 1,950 रुपये प्रति क्विंटल किया गया था।
केंद्रीय पूल में स्टॉक ज्यादा
केंद्रीय पूल में पहली मार्च को 201.09 लाख टन गेहूं का स्टॉक बचा हुआ है जबकि पिछले साल मार्च में केवल 151.55 लाख टन का स्टॉक था। एफसीआई ने रबी विपणन सीजन 2018-19 में समर्थन मूल्य पर 357.95 लाख टन गेहूं की खरीद की थी। इसमें सबसे ज्यादा पंजाब से 126.92 लाख टन, हरियाणा से 87.84 लाख टन और मध्य प्रदेश से 73.13 लाख टन तथा उत्तर प्रदेश से 52.94 लाख टन था।
एमएसपी में 105 रुपये की बढ़ोतरी
चालू रबी विपणन सीजन 2019-20 के लिए केंद्र सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ाकर 1,840 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है जबकि पिछले रबी सीजन में एमएसपी 1,735 रुपये प्रति क्विंटल था। मध्य प्रदेश में राज्य सरकार ने गेहूं पर 160 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस तय किया हुआ है, अत: मध्य प्रदेश में किसानों से 2,000 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर खरीद होगी।
उत्पादन अनुमान ज्यादा
कृषि मंत्रालय के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार चालू रबी 2018-19 में गेहूं का उत्पादन बढ़कर 991.2 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल 971.1 लाख टन का उत्पादन ही हुआ था।..... आर एस राणा

चालू पेराई सीजन में चीनी का उत्पादन 6 फीसदी बढ़ा, महाराष्ट्र-कर्नाटक में बंद होने लगी मिलें

आर एस राणा
नई दिल्ली। पहली अक्टूबर से शुरू हुए चालू पेराई सीजन 2018-19 में 15 मार्च तक चीनी का उत्पादन 5.91 फीसदी बढ़कर 273.47 लाख टन का हो चुका है जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में 258.20 लाख टन का उत्पादन हुआ था। चालू पेराई सीजन में 154 चीनी मिलों में पेराई बंद हो चुकी है, जोकि मुख्यत: महाराष्ट्र और कर्नाटक की हैं।
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के अनुसार महाराष्ट्र में चालू पेराई सीजन में 15 मार्च तक 100.08 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में 93.84 लाख टन का ही उत्पादन हुआ था। राज्य में 85 चीनी मिलें पेराई बंद कर चुकी है तथा इस समय केवल 110 मिलों में ही पेराई चल रही थी। पिछले साल इस समय राज्य में 149 चीनी मिलों में पेराई चल रही थी।
उत्तर प्रदेश में चीनी उत्पादन पिछले साल के बराबर, कर्नाटक में ज्यादा
उत्तर प्रदेश में चालू पेराई सीजन में पहली अक्टूबर 2018 से 15 मार्च 2019 तक 84.14 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में राज्य में 84.39 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। उधर कर्नाटक में चालू पेराई सीजन में 15 मार्च तक चीनी का उत्पादन बढ़कर 42.45 लाख टन का हो चुका है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में केवल 35.10 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था। कर्नाटक में 56 चीनी मिलों में पेराई बंद हो चुकी है जबकि इस समय केवल 11 चीनी मिलों में ही पेराई चल रही है।
अन्य राज्यों में भी उत्पादन ज्यादा
तमिनाडु में चालू पेराई सीजन में अभी तक 5.40 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में राज्य में 4.33 लाख टन का ही उत्पादन हुआ था। गुजरात में चालू पेराई सीजन में चीनी का उत्पादन पिछले साल के 9.10 लाख टन से बढ़कर 9.80 लाख टन का हो चुका है। आंध्रप्रदेश और तेलंगाना में चालू पेराई सीजन में 15 मार्च तक 6.50 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है जबकि पिछले पेराई सीजन में इस समय तक 6.40 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था। अन्य राज्यों में बिहार में 6.65 लाख टन, उत्तराखंड में 2.95 लाख टन, पंजाब में 5.45 लाख टन, हरियाणा में 4.90 लाख टन और मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ को मिलाकर 4.75 लाख टन का उत्पादन हुआ है। .......आर एस राणा