Total Pageviews

23 May 2018

गेहूं की सरकारी खरीद 336 लाख टन के पार, आयात शुल्क बढ़ा सकती हैं सरकार

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी विपणन सीजन 2018-19 में न्यनूतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं की सरकारी खरीद बढ़कर 336.39 लाख टन की हो चुकी है जोकि तय लक्ष्य 320 लाख टन से ज्यादा है। कई राज्यों की मंडियों में अभी गेहूं की आवक बनी हुई है, इसलिए खरीद में और बढ़ोतरी होगी। ​बंपर उत्पादन अनुमान से केंद्र सरकार गेहूं के आयात शुल्क में बढ़ोतरी कर सकती है।
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के अनुसार चालू रबी विपणन सीजन में एमएसपी पर 336.39 लाख टन गेहूं की खरीद हो चुकी है तथा उत्पादक राज्यों उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब और राजस्थान की मंडियों में अभी दैनिक आवक दो लाख टन के करीब हो रही है ऐसे में खरीद बढ़कर 345 से 348 लाख टन तक पहुंच सकती है। ​पिछले रबी सीजन में समर्थन मूल्य पर कुल 308.25 लाख टन गेहूं की ही खरीद हुई थी।
आयात शुल्क को दोगुना कर सकती है सरकार
चालू रबी में गेहूं की रिकार्ड पैदावार 986.1 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसका उत्पादन 985.1 लाख टन का हुआ था। अत: बंपर उत्पादन अनुमान को देखते हुए केंद्र सरकार गेहूं के आयात की संभावनाओं को समाप्त करना चाहती है, इसलिए आयात पर शुल्क को 20 फीसदी से बढ़ाकर 40 फीसदी कर सकती है। गेहूं की कारोबारी फर्म प्रवीन कॉमर्शियल कंपनी के प्रबंधक नवीन गुप्ता ने बताया कि अभी तो गेहूं के आयात पड़ते नहीं लग रहे, लेकिन जुलाई में ब्लैक सी रीजन के देशों की फसल आने के बाद विश्व बाजार में इसके भाव में गिरावट आ सकती है।
पंजाब, हरियाणा से खरीद ज्यादा
एफसीआई के अनुसार प्रमुख उत्पादक राज्य पंजाब से चालू रबी में गेहूं की सरकारी 126.29 लाख टन की हो चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 116.49 लाख टन से ज्यादा है। इसी तरह से हरियाणा से गेहूं की खरीद बढ़कर 87.36 लाख टन की हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य की मंडियों से केवल 74.10 लाख टन गेहूं ही खरीदा गया था।
उत्तर प्रदेश की मंडियों में आवक हो रही है अभी भी ज्यादा
उत्तर प्रदेश से चालू रबी में 38.09 लाख टन गेहूं समर्थन मूल्य पर खरीदा गया है, जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य से केवल 23.28 लाख टन की ही खरीद हो पाई थी। उत्तर प्रदेश की मंडियों में सबसे ज्यादा करीब एक लाख टन से ज्यादा की आवक हो रही है। मध्य प्रदेश से गेहूं की खरीद चालू रबी में 69.03 लाख टन की हुई है, जबकि पिछले खरीद सीजन की समान अवधि में राज्य से 65.32 लाख टन की ही खरीद हुई थी।
राजस्थान से भी खरीद बढ़ी
राजस्थान से गेहूं की खरीद बढ़कर चालू रबी में 14.25 लाख टन की हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य की मंडियों से केवल 10.57 लाख टन गेहूं ही खरीदा गया था। उत्तराखंड से 83,746 टन, गुजरात से 35,741 टन और चंडीगढ़ से 14,030 टन गेहूं की खरीद समर्थन मूल्य पर हो चुकी है।..........  आर एस राणा

​तेजी से आगे बढ़ रहा है मानसून, अगले 2-3 दिन में अंडमान पहुंचने का अनुमान

आर एस राणा
नई दिल्ली। मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है तथा जल्द ही इसके अंडमान में पहुंचने की उम्मीद है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार आगामी 2 से 3 दिन में मानसून अंडमान पहुंच जायेगा, इसके लिए प​रिस्थितियां एकदम अनुकूल हैं। 
आईएमडी ने चालू खरीफ सीजन में 29 मई को केरल में मानसून के आगमन की पहले ही घोषणा कर चुका है, साथ ही चालू खरीफ में मानसूनी बारिश भी अच्छी होने की भविष्यवाणी है।
खरीफ फसलों का उत्पादन काफी हद तक मानसूनी बारिश पर निर्भर करता है, अत: मानसूनी बारिश अच्छी और तय समय पर हुई तो फिर खरीफ फसलों का उत्पादन भी बढ़ेगा। उत्तर भारत के धान उत्पादक राज्यों पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश तथा राजस्थान में किसान धान की नर्सरी तैयार कर रहे हैं। 
आगामी 24 घंटों के दौरान उतरी ओडिसा, महाराष्ट्र के विदर्भ और तेलंगाना के कुछेक क्षेत्रों में कहीं हल्की तो कहीं मध्यम बारिश होने का अनुमान है। उत्तरपूर्वी राज्यों में भी इस दौरान बारिश होने का अनुमान है।
​दक्षिण भारत के राज्यों केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु के कुछ क्षेत्रों में जहां हल्की बारिश होने का अनुमान है, वहीं एकाध जगह मध्यम बारिश हो सकती है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, कोंकण और जम्मू-कश्मीर के उत्तरी हिस्सों में भी आगामी 24 घंटों में बारिश होने का अनुमान है।
आईएमडी के अनुसार बीते 24 घंटों के दौरान दक्षिण हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, विदर्भ और गुजरात के साथ ही दिल्ली में लू का प्रकोप जारी रहा। 
इस दौरान पश्चिम बंगाल, उत्तरी ओडिशा और असम में कहीं मध्य तो कहीं भारी बारिश बारिश हुई। दक्षिण भारत के केरल, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, दक्षिणपूर्वी मध्य प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, त्रिपुरा और नागालैंड में कहीं-कहीं हल्की बारिश देखी गई। 
अंडमान निकोबार द्वीप समूह के साथ ही लक्षद्वीप में भी पिछले 24 घंटों के दौरान कुछेक जगहों पर हल्की बारिश हुई। .............   आर एस राणा

देश के आधे राज्यों में मानसून से पूर्व की बारिश कम, गुजरात में हालत सबसे ज्यादा खराब

आर एस राणा
नई दिल्ली। खरीफ फसलों की बुवाई से पहले मार्च से मई के दौरान होने वाली मानसून पूर्व की बारिश इस बार देश के आधे राज्यों में सामान्य से कम हुई है। ​बुवाई से पहले खेतों को तैयार करने में मानसून से पूर्व की बारिश से किसानों को फायदा होता ही है, वही इससे गर्मी के प्रकोप से भी राहत मिलती है। मानसून पूर्व की बारिश में कमी वाले राज्यों में गुजरात प्रमुख है।
भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार इस साल एक मार्च से 16 मई तक पूर्वोत्तर के राज्यों के साथ ही बिहार, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और जम्मू-कश्मीर में मानसून पूर्व की बारिश सामान्य से कम हुई है। इस दौरान पूरे देश में मानसून पूर्व की बारिश सामान्य की तुलना में 11 फीसदी कम हुई है।
आईएमडी के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार साल 2014 के बाद देश में मानसून पूर्व की बारिश का यह न्यनूतम स्तर है। माना जाता है कि मानसून पूर्व की बारिश फलों के साथ सब्जियों की फसलों के लिए अच्छी होती है, फलों में खासकर के आम, लीची और स्ट्रॉबेरी के अलावा सब्ज्यिों के फसलों के लिए इसका अहम योगदान होता है, साथ ही धान की रौपाई से पहले नर्सरी तैयार करने और खेतों को तैयार करने में किसानों की मददगार साबित होती है।
चालू सीजन में गुजरात में मानसून पूर्व की बारिश सामान्य से 93 फीसदी कम हुई है, जबकि केंद्र शासित राज्य दादर नगर हवेली और दमन दीव में इस दौरान बारिश हुई ही नहीं। उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तेलंगाना और त्रिपुरा में इस दौरान सामान्य से अधिक मानसून पूर्व की बारिश हुई है।............  आर एस राणा

गन्ना किसानों की मुश्किल और बढ़ी, बकाया बढ़कर 21,700 करोड़ के पार

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू पेराई सीजन में गन्ने का बंपर उत्पादन किसानों के लिए घाटे का सौदा सा​बित हो रहा है, चीनी मिलों पर देशभर के गन्ना किसानों के बकाया की राशि बढ़कर 21,700 रुपये को पार कर गई है। ​समय पर भुगतान नहीं मिलने से गन्ना किसानों को भारी आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है जिस कारण राज्य और केंद्र सरकार के खिलाफ किसानों में रोष बढ़ रहा है।
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) ने केंद्र सरकार को पत्र लिखा है कि घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में भारी गिरावट से चीनी मिलों पर बकाया की राशि बढ़कर रिकार्ड स्तर पर पहुंच गई है, अत: समय रहते कारगर कदम नहीं उठाया गया तो अगले पेराई सीजन में कुछ चीनी मिलों में पेराई शुरू ही नहीं हो पायेगी।
उद्योग केंद्र सरकार पर बना रहा है दबाव
इस्मा ने गन्ना मूल्य निर्धारण में रंगराजन समिति की सिफारिशों को लागू करने के लिए केंद्र सरकार से आग्रह किया है।​ इस्मा ने यह भी कहा है कि अगर रंगराजन समिति की सिफारिशों के मुताबिक गन्ने का उचित एवं लाभाकारी मूल्य (एफआरपी) होता तो 223 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर नहीं होता। चालू पेराई सीजन 2017-18 के लिए केंद्र सरकार ने गन्ने का एफआरपी 255 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है। उद्योग संगठन ने केंद्र सरकार को ऐसे समय में पत्र लिखा है जबकि आगामी पेराई सीजन के लिए गन्ने का एफआरपी तय किया जाना है।
चीनी पर सेस लगाने पर फैसला अटका
केंद्र सरकार ने गन्ना किसानों के बकाया भुगतान के लिए 5.50 रुपये प्रति क्विंटल की दर से सब्सिडी देने की घोषणा की हुई है। चीनी पर तीन रुपये प्रति किलो की दर से सेस लगाने का प्रस्ताव है, जिस पर अभी फैसला नहीं हो सका है। चीनी पर सेस लगाने पर फैसला करने के लिए केंद्र सरकार ने असम के वित्त मंत्री हेमंत बिस्वसर्मा की अध्यक्षता में मंत्रियों के समूह का गठन किया हुआ है जोकि 15 जून तक रिपोर्ट फाइनल करेगा।
भाव में सुधार के लिए उठाए गए कदम नाकाफी
केंद्र सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में सुधार लाने के लिए कदम तो उठाएं हैं, लेकिन सरकारी कदमों से भाव में सुधार नहीं आ पा रहा है। चीनी के आयात को रोकने के लिए सरकार आयात पर 100 फीसदी का आयात शुल्क लगा चुकी है, जबकि निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए 20 निर्यात शुल्क को समाप्त कर चुकी है। इसके अलावा 20 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति भी दी हुई है, लेकिन विश्व बाजार में भाव कम होने के कारण निर्यात पड़ते नहीं लग रहे हैं। 
रिकार्ड चीनी उत्पादन अनुमान
पहली अक्टूबर 2017 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन में अप्रैल के आखिर तक चीनी का रिकार्ड उत्पादन 310.37 लाख टन हो चुका है जबकि अभी भी कुछ चीनी मिलों में पेराई चल रही है ऐसे में उत्पादन 315-320 लाख टन होने का अनुमान है। चीनी का उत्पादन बढ़ने के साथ ही गन्ना किसानों पर बकाया की राशि भी लगातार बढ़ रही है।............   आर एस राणा

21 May 2018

मटर आयात पर और सख्ती, सौ फीसदी एडवांस पैमेंट हो चुके सौदों का ही होगा आयात

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मटर के आयात पर लगाम लगाने के लिए और सख्ती की है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार आयातकों ने जो आयात सौदे 25 अपैल 2018 से पहले के किए ​हुए हैं, तथा जिनका 100 फीसदी भुगतान भी हो चुका है। उन्हीं आयात सौदे के आयात को मंजूरी होगी।
आयातकों से पहले मांगा था आयात सौदों का ब्यौरा
इससे पहले केंद्र सरकार ने 10 मई को मटर आयातकों से 25 अप्रैल 2018 तक किए गए अगाऊ सौदों की जानकारी मांगी थी। असके अलावा केंद्र सरकार ने 25 अप्रैल को अधिसूचना जारी कर अप्रैल से जून के दौरान केवल एक लाख टन मटर के आयात को मंजूरी दी थी।
सरकारी सख्ती के बावजूद भाव में सुधार नहीं 
केंद्र सरकार दलहन आयात पर लगातार सख्ती तो कर रही है, लेकिन घरेलू बाजार में दलहन के बंपर उत्पादन उत्पादन अनुमान से भाव में सुधार नहीं आ पा रहा है, जिस कारण उत्पादक मंडियों में किसानों को दालें समर्थन मूल्य से 1,500 से 2,000 रुपये प्रति क्विंटल तक नीचे बेचने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
उत्पादक मंडियों में दालों के भाव समर्थन मूल्य से नीचे
उत्पादक मंडियों में अरहर के भाव 3,800 से 4,000 रुपये प्रति क्विंटल और उड़द के भाव 3,200 से 3,500 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं जबकि केंद्र सरकार ने इनका समर्थन मूल्य क्रमश: 5,450 रुपये और 5,400 रुपये प्रति क्विंटल (बोनस सहित) तय किया हुआ है। इसी तरह से मूंग के भाव उत्पादक मंडियों में 4,600 से 4,800 रुपये प्रति क्विंटल है जबकि मूंग का एमएसपी 5,575 रुपये प्रति क्विंटल (बोनस सहित) है।
नेफेड के पास दलहन का बंपर स्टॉक
नेफेड एमएसपी पर 8.67 लाख टन अरहर की खरीद कर चुकी है, इसके अलावा चालू रबी में11.16 लाख टन चना और 92,969 टन मसूर की खरीद भी समर्थन मूल्य पर हो चुकी है। चना और मसूर की खरीद अभी चल रही है अत: केंद्रीय पूल में आगे दलहन का स्टॉक और बढ़ेगा।
केंद्र की सख्ती से आयात में आई कमी
केंद्र सरकार की सख्ती से वित्त वर्ष 2017-18 में दालों का आयात 15 फीसदी घटकर 56 लाख टन का ही हुआ है जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष 2016-17 में 66.08 लाख टन दलहन का रिकार्ड आयात हुआ था।...........  आर एस राणा

डीजल के दाम रिकार्ड स्तर पर, धान किसानों को होगी मुश्किल

आर एस राणा
नई दिल्ली। डीजल की कीमतों में बेहताशा बढ़ोतरी से धान किसानों की चिंता बढ़नी शुरू हो गई है, चालू खरीफ के लिए किसान धान की नर्सरी तैयार कर रहे है, अगले महीने से इसकी रौपाई शुरू हो जायेगी। अत: डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी से इस बार धान की फसल की लागत बढ़ जायेगी। 
कर्नाटक विधानसभा चुनावों तक स्थिर रहे डीजल और पेट्रोल के दामों में चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद से ही लगातार तेजी का दौर बना हुआ है। हालत यह है कि सोमवार को इनके दामों ने पिछले 56 माह का भी रिकॉर्ड तोड़ दिया। दिल्ली में पेट्रोल के दाम 76.24 रुपये और डीजल के 67.57 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गए।
खरीफ सीजन में धान के प्रमुख उत्पादक राज्यों पंजाब में सोमवार को डीजल के दाम 67.90 प्रति लीटर हो गए हैं ज​बकि हरियाणा के पानीपत में डीजल के दाम 68.19 रुपये, उत्तर प्रदेश के लखनऊ में 67.46 प्रति लीटर और राजस्थान के जयपुर में 72.23 रुपये प्रति लीटर हो गए।
लागत में होगी बढ़ोतरी
धान की रौपाई मानसूनी बारिश शुरू होने पर की जाती है लेकिन धान के खेत में लगातार पानी रखना पड़ता है, इसलिए बारिश के अलावा किसानों को ट्यूबवेल से भी पानी देना पड़ता हैं। ऐसे में किसानों की चिंता बढ़ना भी लाजिमी है। हरियाणा के गोहाना ​के पूठी गांव के किसान राजेश कुमार ने बताया कि उसने पांच एकड़ में फसल लगाने के लिए धान की नर्सरी लगाई है, ​लेकिन डीजल की कीमतों में इसी तरह से बढ़ोतरी जारी रही तो​ फिर रौपाई एक या फिर दो एकड़ में ही की जायेगी। उसके खेत में दो टयूबवेल है, ​डीजल की कीमत रिकार्ड स्तर पर होने के कारण फसल की लागत चालू खरीफ में बढ़ जायेगी।?
धान के खेत में हर समय रखना पड़ता है पानी
पंजाब के लुधियाना के धान किसान धर्मेंद्र गिल ने बताया कि डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी से इस बार धान किसानों की लागत 10 से 15 फीसदी तक बढ़ जायेगी, क्योंकि धान के खेत में आधा से एक फुट तक पानी रखना पड़ता है, इसलिए बारिश के अलावा टयूबवेल से भी पानी देना पड़ता है।
जून में रौपाई हो जायेगी शुरू
प्रमुख धान उत्पादक राज्यों पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान में धान की रौपाई का कार्य जून में शुरू हो जायेगा। पेट्रोल और डीजल की कीमतें कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भतर करती है, तथा जानकारों का मानना है कि ओपेक की कटौती से अभी कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी रहेगी है। विश्व बाजार में कच्चा तेल 80 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच चुका है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रही तो फिर डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी होगी। 
खरीफ में करीब 400 लाख हैक्टेयर में होती है धान की रौपाई
कृषि मंत्रालय के अनुसार खरीफ सीजन में धान की रौपाई सामान्यत: 396.09 लाख हैक्टेयर में होती है, इसमें सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में 58.79 लाख हैक्टेयर में होती है। .......   आर एस राणा

समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद 332.60 लाख टन, हरियाणा में आवक हुई बंद

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी विपणन सीजन 2018-19 में न्यनूतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं की सरकारी खरीद बढ़कर 332.60 लाख टन की हो चुकी है जोकि तय लक्ष्य 320 लाख टन से ज्यादा है। पिछले साल की समान अवधि में 287.24 लाख टन गेहूं की खरीद ही हुई थी। हरियाणा की मंडियों में गेहूं की आवक नहीं होने से खरीद बंद हो गई है। जबकि पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान की मंडियों से अभी खरीद चल रही है।
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के अनुसार चालू प्रमुख उत्पादक राज्य पंजाब से चालू रबी विपणन सीजन में 126.11 लाख टन गेहूं समर्थन मूल्य पर खरीदा गया है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 116.34 लाख टन से ज्यादा है। राज्य की मंडियों में आवक घटकर अब 13-14 हजार टन की रह गई है। हरियाणा से चालू रबी में गेहूं की सरकारी खरीद 87.36 लाख टन की हो चुकी है जोकि अभी तक की सर्वाधिक है। पिछले साल इस समय तक राज्य की मंडियों से 74.10 लाख टन गेहूं खरीदा गया था। राज्य की मंडियों मेंं आवक नहीं होने से खरीद बंद हो गई है। 
मध्य प्रदेश से चालू रबी विपणन सीजन में गेहूं की समर्थन मूल्य पर खरीद 67.79 लाख टन की हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य की मंडियों से 64.63 लाख टन गेहूं ही खरीदा गया था। उत्तर प्रदेश की मंडियों से चालू रबी में 36.04 लाख टन गेहूं की खरीद हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य की मंडियों से 21.68 लाख टन गेहूं ही खरीदा गया था। मध्य प्रदेश से गेहूं की खरीद जहां तय लक्ष्य से ज्यादा हो चुकी है वहीं उत्तर प्रदेश से अभी खरीद तय लक्ष्य से पिछे ही चल रही है। उत्तर प्रदेश से खरीद चालू रबी में 40 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य तय किया गया है।
अन्य राज्यों में राजस्थान से चालू रबी में गेहूं की खरीद बढ़कर 13.99 लाख टन की हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य से केवल 10.31 लाख टन गेहूं की खरीद ही हो पाई थी। उत्तराखंड से 78,582 टन, गुजरात से 35,305 टन और चंडीगढ़ से 14,030 टन गेहूं की खरीद समर्थन मूल्य पर चालू रबी में हुई है।
-------  आर एस राणा