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18 April 2015

ISMA Projected India's Sugar Production At 270 Lakh Tons



Considering the bumper sugar production this year, ISMA, the industrial association, projected India’s sugar production at 270 lakh tons for 2014-15 (1st Oct, 2014 – 30th Sep, 2015).

16 April 2015

ब्ढ़िया क्वालिटी के गेहूं की कीमतों में आयेगी तेजी


गेहूं का उत्पादन सरकारी अनुमान से 20 फीसदी घटने की आषंका
आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी में बेमौसम बारिष और ओलावृश्टि से गेहूं की फसल को भारी नुकसान हुआ है। इससे प्रति हैक्टेयर उत्पादकता में तो भारी गिरावट आई ही है, साथ ही गेहूं की क्वालिटी भी प्रभावित हुई है। इसलिए चालू सीजन में बढ़िया क्वालिटी के गेहूं की कीमतों में तेजी आने की संभावना है। कृशि मंत्रालय के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार चालू रबी में 957.6 लाख टन गेहूं की पैदावार होने का अनुमान है जबकि जानकारों का मानना है कि गेहूं की पैदावार में करीब 20 फीसदी तक कमी आयेगी।
गेहूं अनुसंधान निदेषालय के एक वरिश्ठ अधिकारी ने बताया कि मार्च-अप्रैल महीने में हुई बेमौसम बारिष से गेहूं की फसल को भारी नुकसान हुआ है। इससे क्वालिटी तो प्रभावित हुई ही है साथ ही प्रति हैक्टेयर उत्पादकता में भी भारी कमी आई है। उन्होंने बताया कि चालू रबी में गेहूं का उत्पादन सकरारी अनुमान से करीब 18 से 20 फीसदी कम रहने की आषंका है। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने गेहूं की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद षुरू कर दी है। सरकारी एजेंसियों ने अभी तक 19.06 लाख टन गेहूं की खरीद की है जोकि पिछले साल की समान अवधि में 20.52 लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी।
श्री बालाजी फूड प्रोडेक्टस लिमिटेड के प्रबंधक संदीप गुप्ता ने बताया कि मंडियों में बारिष से भीगे हुए गेहूं की आवक ज्यादा मात्रा में हो रही है। इसलिए अभी तक रोलर फ्लोर मिलों और बड़ी कंपनियों ने खरीद षुरू नहीं की है। आईटीसी ने थोड़ी-बहुत खरीद चालू की है। उम्मीद है कि चालू महीने के आखिर तक फ्लोर मिलों के साथ ही बड़ी कंपनियों की खरीद भी षुरू हो जायेगी, जिससे बढ़िया क्वालिटी के गेहूं की कीमतों में तेजी आने की संभावना है। लारेंस रोड़ पर गेहूं के भाव घटकर 1,480-1,500 रुपये प्रति क्विंटल रह गए जबकि राजस्थान से आईटीसी ने 1,510 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं की खरीद की।
विष्व बाजार में गेहूं के दाम नीचे होने के कारण नए रबी सीजन में गेहूं के निर्यात की संभावना कम है। विष्व बाजार में गेहूं के भाव 232 से 265 डॉलर प्रति टन हैं जबकि मई-जून में रूस और यूक्रेन की नई फसल की आवक का दबाव बनेगा, जिससे विष्व बाजार में गेहूं की कीमतों में और भी 15 से 20 डॉलर प्रति टन की गिरावट आने का अनुमान है। केंद्र सरकार ने चालू रबी विपणन सीजन के लिए गेहूं का एमएसपी 1,450 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। इसमें परिवहन लागत और अन्य खर्च जोड़ने के बाद बंदरगाह पहुंच भाव 1,700 रुपये प्रति क्विंटल से ज्यादा बैठता है, इसलिए निर्यात पड़ते लगने की संभावना नहीं है।.....आर एस राणा

रबी मक्का की आवक चालू, कीमतों में 100 रुपये की गिरावट संभव


आर एस राणा
नई दिल्ली। रबी के प्रमुख मक्का उत्पादक राज्यों बिहार और आंध्रप्रद्रेष में नई फसल की दैनिक आवक चालू हो गई है। पोल्ट्री उद्योग के साथ ही स्टार्च मिलों की मांग कमजोर है इसलिए मक्का की मौजूदा कीमतों में करीब 100 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आने की संभावना है। पंजाब और हरियाणा पहुंच मक्का के भाव 1,600 रुपये प्रति क्विंटल रहे।
बिहार के मक्का व्यापारी पवन अग्रवाल ने बताया कि उत्पादक मंडियों में नई मक्का की आवक चालू हो गई है। हालांकि बिहार में मौसम खराब होने से आवकों का दबाव नहीं बन रहा है लेकिन उम्मीद है जल्द ही मौसम साफ हो जायेगा और आवक बढ़ जायेगी। उन्होंने बताया कि मक्का के भाव बिहार की मंडियों में 1,300 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं तथा आवक बढ़ने पर करीब 100 रुपये प्रति क्विंटल की ओर गिरावट आने का अनुमान है।
मक्का कारोबारी कमलेष जैन ने बताया कि बर्ड फ्ल्यू की बीमारी फेलने के बाद से पोल्ट्र उद्योग के कारोबार में भारी कमी आई है इसलिए पोल्ट्री उद्योग की मांग मक्का में कमजोर है। नई फसल को देखते हुए स्टार्च मिल वाले भी सीमित खरीददारी कर रहे हैं। इसलिए मक्का की कीमतों में गिरावट आने की संभावना है। बिहार से पंजाब और हरियाणा पहुंच मक्का के अगाउ सौदे 1,500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हो रहे हैं जबकि मध्य प्रदेष और राजस्थान से पुराने माल के सौदे 1,600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हो रहे हैं। आध्ंा्रप्रदेष की निजामाबाद मंडी में मक्का के भाव 1,250 रुपये प्रति क्विंटल रहे।
यू एस ग्रेन काउंसिल के भारत में प्रतिनिधि अमित सचदेव ने बताया कि विष्व बाजार में दाम कम होने के कारण भारत से मक्का के निर्यात में तेजी आने की संभावना नहीं है। उन्होंने बताया कि विष्व बाजार में मक्का की उपलब्धता ज्यादा है। विष्व बाजार में मक्का के दाम 178 से 193 डॉलर प्रति टन बने हुए हैं जबकि भारतीय मक्का के दाम 220 डॉलर प्रति हैं। एपीडा के अनुसार चालू वित्त वर्श 2014-15 के पहले दस महीनों (अप्रैल से जनवरी) के दौरान 31.74 लाख टन मक्का का निर्यात ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्श की समान अवधि में 36.99 लाख टन मक्का का निर्यात हुआ था। 
कृशि मंत्रालय के दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार चालू रबी में मक्का की पैदावार घटकर 65.1 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल रबी में 71.1 लाख टन की पैदावार हुई थी।   आर एस राणा

राज्य सरकारें ही बनाना चाहिए चीनी का बफर स्टॉक - रामविलास पासवान

आर एस राणा
नई दिल्ली। राज्य सरकारों को ही चीनी का बफर स्टॉक बनाना चाहिए। गन्ना किसानों के बढ़ते बकाया भुगतान के हल के लिए गुरूवार को दिल्ली में प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य के मुख्यमंत्रियों के साथ हुई बैठक में केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने कहां कि चीनी के आयात शुल्क में बढ़ोतरी के लिए प्रधानमंत्री को पत्र लिखेंगे।
चालू पेराई सीजन में चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का बकाया बढ़कर 19,300 करोड़ रुपये हो गया है। चीनी मिलें चीनी के कम होने के कारण बकाया का भुगतान नहीं कर पा रही है जबकि केंद्र सरकार ने चीनी मिलों को रॉ-शुगर के निर्यात पर 4,000 रुपये प्रति टन की दर से इनसेंटिव देने की घोषणा की हुई है लेकिन विदेशी बाजार में दाम कम होने के कारण रॉ-शुगर का निर्यात भी सीमित मात्रा में ही हो पा रहा है।
गन्ना किसानों के बकाया भुगतान के हल के लिए 15 अप्रैल को केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने किसान संगठनों से बातचीत की थी जबकि 16 अप्रैल को प्रमुख उत्पादक राज्यों के मुख्यमंत्रियों से विचार-विमर्श किया। इस अवसर पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि राज्यों मुख्यमंत्रियों की तरफ से भी वहीं सुझाव आए हैं जो किसान संगठनों से आए थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्रियों ने चीनी का बफर स्टॉक बनाने की मांग है जबकि राज्य सरकारों को ही बफर स्टॉक बनाना चाहिए।
चीनी पर आयात शुल्क में बढ़ोतरी, तथा निर्यात में कैसी तेजी आये इत्यादि जैसे सुझावों के बारे में प्रधानमंत्री को लिखेंगे तथा इस पर अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही करेंगे।  आर एस राणा

मध्य अप्रैल तक 263 लाख टन से ज्यादा हुआ चीनी उत्पादन


चालू पेराई सीजन में 240 चीनी मिलें कर चुकी हैं गन्ने की पेराई बंद
आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू गन्ना पेराई सीजन 2014-15 (अक्टूबर से सितंबर) के दौरान मध्य अप्रैल तक देशभर में 263.56 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है जोकि पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 32.06 लाख टन ज्यादा है।
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के अनुसार चालू पेराई सीजन में 15 अप्रैल तक देशभर में 263.56 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 231.50 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। इस्मा के अनुसार चालू पेराई सीजन में 530 चीनी मिलों में गन्ने की पेराई चल रही थी जिनमें से मध्य अप्रैल तक 240 मिलों में पेराई बंद हो चुकी है तथा इस समय केवल 290 मिलों में पेराई चल रही है।
महाराष्ट्र में चालू पेराई सीजन में मध्य अप्रैल तक 99.61 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 74.43 लाख टन का उत्पादन हुआ था। उत्तर प्रदेश में चालू पेराई सीजन में 15 अप्रैल तक 67.85 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है जोकि पिछले साल इस समय के 5.30 लाख टन ज्यादा है। उत्तर प्रदेश में चालू पेराई सीजन में गन्ने की औसत रिकवरी पिछले साल की तुलना में ज्यादा आई है।
कर्नाटक में चालू पेराई सीजन में मध्य अप्रैल तक 45 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है जबकि पिछले साल इस समय तक 41.18 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। अन्य राज्यों में तमिलनाडु में 8.25 लाख टन, गुजरात में 11 लाख टन, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना में 8.75 लाख टन तथा पंजाब और हरियाणा में क्रमशः 5.25 और 5.20 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है।
चीनी के दाम कम होने के कारण चालू पेराई सीजन में चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का बकाया बढ़कर 19,300 करोड़ रूपया बकाया हो चुका है।.......आर एस राणा

As on 15th April, 2015, sugar mills across the country have produced 263.56 lac tons of sugar

  As on 15th April, 2015, sugar mills across the country have produced 263.56 lac tons of sugar.  This is 32.06 lac tons higher than the sugar produced during the corresponding period of 2013-14 SS.  Last year till 15th April, sugar production in the country was 231.50 lac tons.

·                  Out of the 530 sugar mills which started crushing operation this year, 240 sugar mills have already closed down and 290 mills are still crushing sugarcane.  Of the remaining 290 sugar mills, 100 mills are in Maharashtra, 50 mills in U.P., 44 in Karnataka and 36 in Tamil Nadu.

·                  Sugar mills of Maharashtra have produced 99.61 lac tons of sugar till 15th April 2015, as against 74.43 lac tons produced by them during the same period last season i.e. 2013-14.  In 2014-15 SS, 100 sugar mills are still in operation, whereas as on 15th April 2014 (2013-14 SS), 52 sugar mills were crushing sugarcane.

·                  In U.P, sugar mills have produced 67.85 lac tons of sugar till 15th April 2015.  This is 5.30 lac tons more than the last season’s sugar production during the corresponding period i.e. upto 15th April, 2014.  One of the main reasons for increase in production is increase in recovery percentage of sugar.  During the current year, till 15th April, 2015, sugar recovery has been around 9.53 as against last season’s cumulative average of 9.29%.  There are 50 sugar mills working as on 15th April, 2015, as against 42 which were working as on 15th April, 2014.

·                  Sugar production in Karnataka till 15th April, 2015 was 45.00 lac tons, as against 41.18 lac tons produced last season upto the corresponding period.  44 sugar mills are still working in the State.  Last year, as on 15th April, only 18 were in operation. 

·                  Sugar mills of Tamil Nadu have produced 8.25 lac tons of sugar till 15th April, 2015.  Of the 44 sugar mills which operated during 2014-15 SS, 8 have already shut their operations and 36 are working as of now.  In 2013-14, sugar production in the State upto 15th April, 2014 was 10.12 lac tons with 26 mills in operation.

·                  Gujarat sugar mills have produced 11 lac tons of sugar till 15th April, 2015 and 14 sugar mills are still working.  During the corresponding period of 2013-14 SS, 11.53 lac tons was the sugar production and 6 mills were working.

·                  Crushing operations in Andhra Pradesh and Telangana have almost come to an end as only 4 sugar mills are working as of now.  Till 15th April, 2015, sugar mills have produced 8.75 lac tons of sugar, as against 9.77 lac tons produced by them during the corresponding date of 2013-14 SS.

·                  Sugar mills of other States viz. Punjab and Haryana have produced 5.25 lac tons and 5.20 lac tons, respectively.  Last year as on 15thApril, 2014, sugar mills of these States produced 4.69 lac tons and 5 lac tons, respectively.   During the current 2014-15 SS, 9 sugar mills in Punjab and 10 in Haryana are still working. 

·                  As per the trend of sugar production upto 15th April, 2015 of 263.56 lac tons, with around 290 sugar mills still continuing their crushing operations, it seems that the country would produce over 270 lac tons of sugar in the current sugar season.

·                  This indicates that during the current season, there would be a surplus of over 22 lac tons produced over the estimated domestic consumption of 248 lac tons.  Therefore, the closing balance of 30th September, 2015 with the sugar industry will be over 90 lac tons.  This is after considering a few lac tons of exports.

·                  The domestic ex-mill sugar prices have fallen by Rs. 8 to 9 per kilo in the last six months i.e. from the beginning of this sugar season.  The sugar prices are at the lowest in the last seven years.  These prices are below the cost of production by Rs. 7000 to 9000 per ton of sugar.

·                  With cane price arrears remaining pending at Rs. 19300 crore i.e. at about 30-35% of the total price payable by the factories in the current season, the situation is alarming and there has to be something done immediately to ensure that:-

(i)            Ex-mill sugar prices improve without any further delay;
(ii)          Sugar mills get adequate cash flows;
(iii)         The surplus sugar inventory of 30-35 lac tons over and above the normative carry forward of 60 lac tons as on 1stOctober, should be disposed off.
(iv)         Banks need to also get enough confidence to extend loans to sugar mills.

·                  Only if the above surplus of 30-35 lac tons is disposed off and the burden is taken away from the mills, will the cane price arrears of farmers get cleared and the ex-mill sugar prices will improve at least to what it was at the beginning of the current sugar season.

·                  Increasing the import duty on sugar from 25% to 40% will be helpful, but only in the longer run.  The immediate problem of cash flows and the surplus sugar inventory needs to be addressed without any further delay and the request of the industry and the demand of the farmers that the Government should buy 30 lac tons of sugar should be approved by the Government.  This will give around Rs. 9000 crore of cash flows to the industry, which can go directly to the farmers.

·                  If the above surplus is not bought by the Government and it continues to burden the industry, the ex-mill sugar prices might fall further and the cane price arrears of farmers will continue to remain at a high level.

·                  It is feared that a substantial number of mills will not be able to get working capital loans from the banks if the above situation continues, and, therefore, there is a big risk that 25-30% of the industry may not be able to start their crushing operations in the coming season, 2015-16.

स्टॉकिस्टों की सक्रियता से ग्वार की कीमतों में तेजी बरकरार


खरीफ में मानूसन गड़बड़ाने की आशंका से ग्वार की खरीद में आई तेजी
आर एस राणा
नई दिल्ली। क्रूड तेल की कीमतें नीचे होने के कारण ग्वार गम पाउडर में निर्यात मांग तो कमजोर है लेकिन चालू खरीफ में मानसून गड़बड़ाने की आशंका बनी हुई है। इसीलिए प्लांट निर्माताओं के साथ ही स्टॉकिस्टों की खरीद ग्वार में तेज हो गई है जिससे भाव में तेजी बनी हुई है। गुरूवार को जोधपुर मंडी में ग्वार के भाव बढ़कर 4,650 रुपये और ग्वार गम के भाव 10,700 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।
ग्वार गम के निर्यातक विपिन अग्रवाल ने बताया कि क्रूड तेल की कीमतें नीचे होने के कारण ग्वार गम पाउडर की निर्यात मांग कमजोर ही है। निर्यातक पहले के किए हुए सौदों का ही भुगतान कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि हाल ही में हो रही बारिश से खरीफ मानसून में गड़बड़ी होने की आशंका है। इसीलिए प्लांट निर्माताओं के साथ ही स्टॉकिस्टों की ग्वार में मांग बढ़ गई है जिससे भाव तेज बने हुए हैं। जोधपुर मंडी में गुरूवार को ग्वार की कीमतों में 150 रुपये की तेजी आकर भाव 4,650 रूपये और गंगानगर मंडी में 4,450 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। जोधपुर में ग्वारगम के भाव बढ़कर गुरूवार को 10,700 रुपये प्रति क्विंटल हो गए तथा इसकी कीमतों में 200 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी दर्ज की गई। उत्पादक मंडियों में ग्वार की दैनिक आवक 25 से 30 हजार क्विंटल की हो रही है।
हरियाणा ग्वार गम केमिकल इंडस्ट्रीज के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ग्वार की फसल पूरी तरह से बारिश पर निर्भर करती है तथा इस समय जो बारिश हो रही है उसका असर मानसून पर पड़ेगा। चालू खरीफ में मानसूनी बारिश कम रहेगी। इसीलिए ग्वार में स्टॉकिस्टों की सक्रियता बढ़ गई है। ग्वार का स्टॉक मजबूत हाथों में होने के कारण बिकवाली भी सीतिम मात्रा में आ रही है जिससे तेजी को और बल मिल रहा है। आगामी दिनों में ग्वार की कीमतों में और भी तेजी की संभावना है।
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार वित्त वर्ष 2014-15 के पहले 11 महीनों अप्रैल से फरवरी के दौरान मूल्य के हिसाब ग्वार गम पाउडर के निर्यात में 12.91 फीसदी घटकर 9,561.68 करोड़ रुपये का हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 10,978.96 करोड़ रुपये का हुआ था। मात्रा के हिसाब से ग्वार गम उत्पादों के निर्यात में इस दौरान बढ़ोतरी हुई है। एपिडा के अनुसार अप्रैल से फरवरी के दौरान ग्वार गम उत्पादों का 6.62 लाख टन का निर्यात हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 5.45 लाख टन ग्वार गम उत्पादों का निर्यात हुआ था।.....आर एस राणा