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15 September 2018

मानसूनी बारिश सामान्य से 8 फीसदी कम, फिर भी खरीफ फसलों की बुवाई 0.72 फीसदी बढ़ी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन में पहली जून से 14 सितंबर तक देशभर में मानसूनी बारिश सामान्य से 8 फीसदी कम होने के बावजूद खरीफ फसलों की बुवाई में 0.72 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू सीजन में फसलों की बुवाई बढ़कर 1,053.03 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुवाई 1,045.55 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई थी।
धान की रोपाई 2.28 फीसदी ज्यादा
मंत्रालय के अनुसार खरीफ की प्रमुख फसल धान की रोपाई चालू खरीफ में 2.28 फीसदी बढ़कर 383.34 लाख हैक्टेयर में ही चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी रोपाई 374.81 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। दालों की बुवाई चालू खरीफ सीजन में 0.86 फीसदी घटकर 137.41 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 138.60 लाख हैक्टेयर में दालों की बुवाई हो चुकी थी। खरीफ दलहन में मूंग और अरहर की बुवाई पिछले साल की तुलना में बढ़ी है, लेकिन उड़द की बुवाई में करीब 4 लाख हैक्टेयर की कमी आई है।
सोयाबीन की बुवाई ज्यादा, मूंगफली की कम
खरीफ तिलहनों में जहां सोयाबीन की बुवाई बढ़ी है, वहीं मूंगफली की घटी है। तिलहनों की कुल बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 177.29 लाख हैक्टेयर में ही चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुवाई 171.98 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। खरीफ तिलहन की प्रमुख फसल सोयाबीन की बुवाई चालू सीजन में बढ़कर 112.50 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक सोयाबीन की बुवाई केवल 105.76 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई थी। मूंगफली की बुवाई घटकर चालू सीजन में 40.12 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में मूंगफली की बुवाई 41.31 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।
केस्टर सीड की बुवाई बढ़ी
केस्टर सीड की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 8.35 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुवाई 7.91 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। शीसम सीड की बुवाई पिछले साल के 13.77 लाख हैक्टेयर से बढ़कर 13.84 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है। नाईजर सीड की बुवाई पिछले साल के 1.86 से घटकर 1.37 लाख हैक्टेयर में ही हुई है।
मोटे अनाजों की बुवाई पिछड़ी
चालू खरीफ में मोटे अनाजों की बुवाई अभी तक केवल 175.46 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक मोटे अनाजों की बुवाई 182.23 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। मोटे अनाजों में मक्का की बुवाई चालू सीजन में 79.14 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल इस समय तक 78.02 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हो पाई थी। बाजरा की बुवाई घटकर अभी तक केवल 65.47 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 70.36 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी।
ज्वार की बुवाई में आई कमी
ज्वार की बुवाई चालू खरीफ में पिछले साल के 17.78 लाख हैक्टेयर से घटकर 17.68 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है। रागी की बुवाई पिछले साल के 10.04 लाख हैक्टेयर से घटकर 8.26 लाख हैक्टेयर में ही हुई है।
कपास की बुवाई पिछले साल के लगभग बराबर
कपास की बुवाई चालू खरीफ में 120.56 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुवाई 120.98 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। गन्ने की बुवाई चालू सीजन में बढ़कर 51.94 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक गन्ने की बुवाई 49.86 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई थी।..........  आर एस राणा

तिलहनी फसलों की आवक शुरू होने से पहले ही, खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 11 फीसदी बढ़ा

आर एस राणा
नई दिल्ली। खरीफ तिलहनी फसलों सोयाबीन और मूंगफली की आवक अगले महीने उत्पादक राज्यों में शुरू हो जायेगी। उससे पहले ही खाद्य एवं अखाद्य तेलों के आयात में 11 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है जिसका असर घरेलू बाजार में तिलहन की कीमतों पर पड़ने की आशंका है, जिसका खामियाजा किसानों को उठाना पड़ सकता है।
रुपये के मुकाबले डॉलर महंगा होने के बावजूद भी खाद्य एवं अखाद्य तेलों के आयात में बढ़ोतरी हुई है। अगस्त में 15,12,597 टन खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात हुआ है जबकि पिछले साल अगस्त में इनका आयात 13,61,272 टन का ही हुआ था।
जुलाई के मुकाबले अगस्त में आयात ज्यादा
साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन आॅफ इंडिया (एसईए) के कार्यकारी निदेशक डॉ. बी वी मेहता के अनुसार जुलाई में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 11.19 लाख टन का ही हुआ था जबकि अगस्त में आयात बढ़कर 15.12 लाख टन का हो गया। उन्होंने बताया कि जून-जुलाई में इनके आयात में कमी आई थी, जिस कारण घरेलू बाजार में खाद्य तेलों का बकाया स्टॉक कम था।
कुल आयात में कमी आने का अनुमान
एसईए के अनुसार चालू तेल वर्ष (नवंबर-17 से अक्टूबर-18) के पहले 10 महीनों नवंबर से अगस्त के दौरान आयात में 3.7 फीसदी की कमी आकर कुल आयात 122,78,673 टन खाद्य एवं अखाद्य तेलों का हुआ है जबकि पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में इनका आयात 127,53,568 टन का हुआ था। उद्योग के अनुसार चालू तेल वर्ष में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का कुल आयात 147 से 148 लाख टन का होने का अनुमान है जबकि पिछले तेल वर्ष में 154.4 लाख टन का आयात हुआ था।
आयातित खाद्य तेलों के भाव घटे
विश्व बाजार में कीमतों में आई गिरावट के कारण आयातित खाद्य तेलों के भाव में भी मंदा आया है। आरबीडी पामोलीन का भाव भारतीय बंदरगाह पर अगस्त में घटकर औसतन 578 डॉलर प्रति टन रह गया जबकि जुलाई में इसका औसत भाव 592 डॉलर प्रति टन था। इस दौरान क्रुड पॉम तेल का भाव भी 583 डॉलर से घटकर 565 डॉलर प्रति टन रह गया।
खरीफ तिलहनों की बुवाई बढ़ी
चालू खरीफ सीजन में तिलहनों की बुवाई बढ़कर 173.95 लाख हैक्टेयर में ही चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुवाई 169.20 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। खरीफ तिलहन की प्रमुख फसल सोयाबीन की बुवाई चालू सीजन में बढ़कर 111.92 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक सोयाबीन की बुवाई केवल 105.26 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई थी। मूंगफली की बुवाई घटकर चालू सीजन में 39.87 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में मूंगफली की बुवाई 40.76 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।............  आर एस राणा

नए सीजन के आरंभ में कपास का बकाया स्टॉक 16 लाख गांठ कम बचेगा, नई आवक में भी देरी संभव

आर एस राणा
नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2018 से आरंभ होने वाले कपास के नए सीजन में बकाया स्टॉक 22 लाख गांठ (एक गांठ-170 किलो) ही बचने का अनुमान है जोकि पिछले साल की तुलना में 16.07 लाख गांठ कम है। उत्तर भारत के राज्यों में चालू महीने में हुई अच्छी बारिश से नई फसल की आवक में भी देरी होने की आशंका है, इसलिए अभी कपास की कीमतों में ज्यादा मंदा आने की संभावना नहीं है।
कुल उपलब्धता 416 गांठ की रही
कॉटन एसोसिएशन आफ इंडिया (सीएआई) के अध्यक्ष अतुल एस. गणात्रा के अनुसार चालू फसल सीजन 2017-18 में कपास का उत्पादन 365 लाख गांठ होने का अनुमान है जबकि नई फसल के समय बकाया स्टॉक 36.07 लाख गांठ का बचा हुआ था। चालू सीजन में करीब 15 लाख गांठ कपास का आयात होने का अनुमान है। ऐसे में कुल उपलब्धता 416 लाख गांठ की बैठेगी। 
विश्व में कीमतों में आई गिरावट
सीएआई के अनुसार विश्व बाजार में कपास की कीमतों में आई गिरावट कारण भारत से निर्यात पड़ते नहीं लग रहे है। विश्व बाजार में कपास के भाव 82.13 सेंट प्रति पाउंड रहे तथा उपर से इसमें करीब 10 सेंट प्रति पाउंड से ज्यादा का मंदा आ चुका है। चालू सीजन में अभी तक कपास की 69 लाख गांठ का निर्यात हो चुका तथा कुल निर्यात 70 लाख गांठ का ही होने का ही होने का अनुमान है।
358 लाख गांठ की हो चुकी है आवक  
अगस्त के आखिर तक उत्पादक राज्यों की मंडियों में 358 लाख गांठ कपास की आवक हो चुकी है जबकि कपास का आयात मई आखिर तक केवल 13.50 लाख गांठ का ही हुआ है। फसल सीजन 2016-17 में कपास का आयात 27 लाख गांठ का हुआ था, जबकि चालू फसल सीजन 2017-18 में आयात घटकर 15 लाख गांठ का ही होने का अनुमान है।
उत्तर भारत में आवक में होगी देरी
नार्थ इंडिया कॉटन एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेश राठी के अनुसार उत्तर भारत के राज्यों में चालू महीने में हुई बारिश से नई फसल की आवक में देरी होगी। इसलिए अभी घरेलू मंडियों में कपास की कीमतों में ज्यादा मंदा आने की संभावना नहीं है। अहमदाबाद में सोमवार को शंकर 6 किस्म की कपास के भाव 28,000 से 28,500 रुपये प्रति कैंडी (एक कैंडी-356 किलो) रहे। घरेलू बाजार में यार्न मिलों के कपास बकाया स्टॉक भी कम माना जा रहा है।
बुवाई में आई कमी
कृषि मंत्रालय के अनुसार कपास की बुवाई चालू खरीफ सीजन में 2.39 फीसदी पिछे चल रही है। अभी तक देशभर में कपास की बुवाई केवल 118.10 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुवाई 120.98 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।..........आर एस राणा

गुजरात : खरीफ फसलों की 94 फीसदी बुवाई पूरी, कपास की बढ़ी तो मूंगफली की घटी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू सीजन में गुजरात में खरीफ फसलों की बुवाई 94.20 फीसदी होकर 80.68 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है। खरीफ में राज्य में जहां कपास की बुवाई में बढ़ोतरी हुइ है, वहीं मूंगफली की बुवाई में कमी आई है।
राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार 10 अगस्त तक राज्य में 80.86 लाख हैक्टेयर में खरीफ फसलों की बुवाई हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक फसलों की बुवाई 84.24 लाख हैक्टेयर में फसलों की बुवाई हो चुकी थी।
कपास की बुवाई ज्यादा, मूंगफली की कम
खरीफ की प्रमुख फसल कपास की बुवाई बढ़कर 27.08 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में केवल 26.45 लाख हैक्टेयर में ही कपास की बुवाई हुई थी। तिलहन की प्रमुख फसल मूंगफली की बुवाई चालू खरीफ में घटकर 14.67 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में 16.15 लाख हैक्टेयर में मूंगफली की बुवाई हो चुकी थी।
तिलहनों की कुल बुवाई कम
चालू खरीफ में राज्य में तिलहनी फसलों की बुवाई घटकर अभी तक केवल 21.64 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 24.11 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। सोयाबीन की बुवाई राज्य में पिछले साल के 1.29 लाख हैक्टेयर से बढ़कर 1.35 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है। केस्टर सीड की बुवाई पिछले साल के 5.53 लाख हैक्टेयर से घटकर 4.83 लाख हैक्टेयर में ही हुई है। 
दालों की बुवाई पिछले साल से घटी
राज्यों में दालों की बुवाई चालू खरीफ में पिछले साल के 5.60 लाख हैक्टेयर से घटकर 4.34 लाख हैक्टेयर में ही हुई है। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर की बुवाई 2.70 से घटकर 2.51 लाख हैकटेयर में और उड़द की पिछले साल के 1.30 लाख हैक्टेयर की तुलना में 1.06 हैक्टेयर में ही हुई है। मूंग की बुवाई चालू खरीफ में केवल 60,794 हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 1.25 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी।
मक्का की बुवाई बढ़ी, धान की घटी
मोटे अनाजों में मक्का की बुवाई पिछले साल के 3.06 लाख हैक्टेयर से बढ़कर 3.13 लाख हैक्टेयर में और धान की रोपाई 8.05 से घटकर 8.04 लाख हैक्टेयर में ही हुई है।............ आर एस राणा

चीन महाराष्ट्र से खरीद सकता है सोया डीओसी, किसानों को होगा फायदा

आर एस राणा
नई दिल्ली। अमेरिका और चीन के बीच चले ट्रेड वार से भारतीय सोया डीओसी के लिए अच्छी खबर है। चीन ने महाराष्ट्र से सोया डीओसी की खरीद में रुचि दिखाई है, इससे उद्योग के साथ ही सोयाबीन के किसानों को भी फायदा होगा।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ 11 सितंबर को चीन के कौंसल जरनल तांग गोचाई ने मुलाकत कर राज्य से कृषि उत्पादों की खरीद और निवेश की इच्छा जताई।
बैठक के बाद फडणवीस ने कहा कि चीन से इस मुद्दे पर और बातचीत के लिए एक स्वतंत्र अधिकारी को नियुक्त किया गया है। उन्होंने कहा कि चीन राज्य से सोया डीओसी की खरीद करता है तो इससे राज्य से सोयाबीन किसानों को लाभ मिलेगा। सोयाबीन किसानों के हितों को देखते हुए केंद्र सरकार सोया डीओसी के निर्यात पर निर्यातकों को 10 फीसदी निर्यात प्रोत्साहन राशि भी दे रही है।
एक क्विंटल सोयाबीन से केवल 18 किलो तेल प्राप्त होता है, तथा बाकि डीओसी प्राप्त होती। इसलिए डीओसी की कीमत काफी महत्वपूर्ण है। सोयाबीन के भाव उत्पादक मंडियों में 3,350 से 3,400 रुपये प्रति क्विंटल रहे तथा इंदौर में सोया रिफाइंड तेल के भाव 750 रुपये प्रति 10 किलो रहे। सोया डीओसी के भाव एक्स फैक्ट्री 28,000 से 28,500 रुपये प्रति टन रहे। सोयाबीन की नई फसल की दैनिक आवक अक्टूबर में बढ़ेगी, इसलिए अक्टूबर में इनकी मौजूदा कीमतों में गिरावट आ सकती है।
सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (सोपा) के कार्यकारी निदेशक डी एन पाठक ने बताया कि पिछले फसल सीजन में हमने 17 से 18 लाख टन सोया डीओसी का निर्यात किया था, पिछले साल फसल कम थी। चालू सीजन में सोयाबीन की बुवाई में तो बढ़ोतरी हुई ही है, साथ ही अनुकूल मौसम से पैदावार भी ज्यादा होने का अनुमान है। इसलिए चालू सीजन में उपलब्धता ज्यादा होगी, चीन सोया डीओसी का आयात करेगा तो भारतीय किसानों को इसका फायदा होगा।............  आर एस राणा

नए पेराई सीजन में भी जारी रहेगी चीनी बेचने की कोटा प्रणाली, केंद्र सरकार भी पक्ष में

आर एस राणा
नई दिल्ली। चीनी बेचने के लिए कोटा प्रणाली को पहली अक्टूबर 2018 से शुरू होने वाले नए पेराई सीजन में भी जारी रखने की योजना है। चीनी मिलों की मांग पर केंद्र सरकार भी इसके पक्ष में है तथा जल्द ही इस बारे में अधिसूचना जारी की जा सकती है।
खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आगामी पेराई सीजन में भी चीनी का बंपर उत्पादन होने का अनुमान है इसलिए चीनी मिलों ने कोटा प्रणाली सिस्टम को जारी रखने की मांग की है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने पहले 30 सितंबर 2018 तक कोटा प्रणाली को लागू किया था।
उन्होने बताया कि चालू पेराई सीजन में तो चीनी का रिकार्ड उत्पादन हुआ ही है, गन्ने के बुवाई क्षेत्रफल में हुई बढ़ोतरी को देखते हुए आगामी पेराई सीजन में चीनी के उत्पादन में और बढ़ोतरी का अनुमान है, अत: चीनी की कीमतों में बड़ी गिरावट नहीं आये, इसलिए हर महीने घरेलू बाजार में बेचने के लिए जारी किए जाने वाले चीनी की कोटा प्रणाली को नए पेराई सीजन में भी जारी रखा जायेगा, तथा इस बाबत जल्दी ही अधिसूचना भी जारी की जायेगी।
गन्ने के कीमतों में सुधार लाने के लिए चालू पेराई सीजन में केंद्र सरकार ने चीनी के न्यूनतम बिक्री भाव 29 रुपये प्रति किलो तय करने के साथ ही मिलों पर चीनी बेचने के लिए कोटा प्रणाली तय की। इसके अलावा जहां आयात पर शुल्क को बढ़ाकर 100 फीसदी किया, वहीं निर्यात शुल्क को भी शुन्य किया। इसके साथ ही चीनी मिलों को एथनॉल का उत्पादन बढ़ाने के लिए कर्ज मुक्त ऋण देने के साथ एक साल के लिए 30 लाख टन चीनी का बंपर स्टॉक बनाने को भी मंजूरी दी।
उद्योग के अनुसार चालू पेराई सीजन में 325 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है, जबकि गन्ना के बुवाई क्षेत्रफल में बढ़ोतरी को देखते हुए आगामी पेराई सीजन में उत्पादन बढ़कर 355 लाख टन होने का अनुमान है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू सीजन में गन्ने की बुवाई बढ़कर 51.94 लाख हैक्टेयर में हुई है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 49.86 लाख हैक्टेयर से ज्यादा है। ......... आर एस राणा

खाद्यान्न की नई खरीद नीति को केंद्र की मंजूरी, किसानों को एमएसपी का मिलेगा फायदा

आर एस राणा
नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव 2019 से पहले मोदी सरकार ने किसानों को ध्यान में रखते हुए नई अनाज खरीद नीति को मंजूरी दे दी। नई खरीद नीति के तहत राज्यों को एक से ज्यादा स्कीमों का विकल्प दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह फैसला किया गया।
प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान को मंजूरी
फैसले की जानकारी देते केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने बताया कि कैबिनेट ने आज ‘प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान’ (पीएम-आशा) को मंजूरी दे दी है। इस अंब्रेला स्कीम से हमारे किसान और अधिक सशक्त होंगे, जिससे कृषि क्षेत्र को और मजबूती मिलेगी।
बैंक गारंटी के वास्ते 16,500 करोड़ रुपये का प्रावधान
उन्होंने बताया कि नई खरीद नीति में मूल्य समर्थन योजना, भावांतर योजना के साथ ही निजी खरीद तथा स्टॉकिस्ट खरीद योजना को शामिल किया गया है। इस वर्ष फसलों की खरीद के लिए बैंक गारंटी देने के वास्ते अतिरिक्त 16,550 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है जिससे यह गारंटी बढ़कर कुल 45,500 करोड़ रुपये हो जायेगी। इसके अतिरिक्त बजटीय प्रावधान को भी बढ़ाकर 15,053 करोड़ रुपये किया गया है। उन्होंने बताया कि राज्यों में पायलट परियोजना के रुप में निजी खरीद स्टॉकिस्ट योजना के तहत भी अनाजों की खरीद की जायेगी।
तिलहनों की खरीद के लिए भावांतर योजना
नई नीति में राज्य सरकारों को विकल्प होगा कि कीमतें एमएसपी से नीचे जाने पर वह किसानों के संरक्षण के लिए विभिन्न योजनाओं में से किसी का भी चयन कर सकें। सिर्फ तिलहन किसानों के संरक्षण के लिए मध्यप्रदेश की भावांतर भुगतान योजना की तर्ज पर मूल्य कमी भुगतान (पीडीपी) योजना शुरू की गई है। पीडीपी के तहत सरकार किसानों को एमएसपी तथा थोक बाजार में तिलहन के मासिक औसत मूल्य के अंतर का भुगतान करेगी। इस योजना के तहत तिलहनी फसलों की खरीद कुल उत्पादन के 25 फीसदी तक की जायेगी। इसके अलावा राज्यों को तिलहनों की खरीद करने के लिए प्रयोग के तौर पर निजी कंपनियों को साथ लेने का विकल्प दिया गया है।
अन्य स्कीम भी अपना सकते हैं राज्य
नई खाद्यान्न खरीद नीति के तहत राज्यों के पास मौजूदा मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) चुनने का विकल्प भी होगा, इसके अंतर्गत केंद्रीय एजेंसियां, जिंसों की कीमत एमएसपी से नीचे जाने की स्थिति में करती हैं, तथा केंद्र सरकार इसकी भरपाई करती है।
एफसीआई बड़े पैमाने पर गेहूं और चावल की करती है खरीद
सरकार की खाद्यान्न खरीद एवं वितरण करने वाली नोडल एजेंसी, भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई), पहले से ही राशन की दुकानों और कल्याणकारी योजनाओं के जरिये आपूर्ति करने के लिए एमएसपी पर गेहूं और चावल खरीदती है।
23 फसलों के तय करती है सरकार एमएसपी
न्यूनतम समर्थन मूल्य नीति के तहत केंद्र सरकार हर साल खरीफ और रबी की 23 फसलों के समर्थन मूल्य तय करती है। सरकार ने जुलाई में धान के एमएसपी में 200 रुपए प्रति क्विटंल की बढ़ोतरी की थी।
एथनॉल के भाव में की बढ़ोतरी
कैबिनेट की बैठक में एक और बड़ा फैसला लिया गया। एथेनॉल के दाम 25 फीसदी बढ़ाने को मंजूरी दी गई। यानि बढ़ोतरी के बाद बी-हैवी मोलासिस (शीरा) से बनने वाले एथनॉल का दाम 52.4 रुपये प्रति लीटर होगा जबकि गन्ना से सीधे बनने वाले एथनॉल का दाम 59 रुपये प्रति लीटर होगा।
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के अनुसार केंद्र सरकार ने एथनॉल की कीमतों में बढ़ोतरी से इसके उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, जिसका सीधा फायदा गन्ना किसानों को होगा। ...........  आर एस राणा