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01 July 2016

कपास की बुवाई आधी, दलहन और तिलहन भी कम

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में मानसून की देरी का सबसे ज्यादा असर कपास की बुवाई पर पड़ा है। करीब एक सप्ताह की देरी से आए मानसून के कारण कपास की बुवाई चालू खरीफ में अभी तक केवल 30.59 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 60.16 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। तिलहनों की बुवाई अभी तक केवल 28.71 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुवाई 54.24 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।
इसी तरह से दलहन की बुवाई अभी तक केवल 19.85 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हो पाई है जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुवाई 22.25 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में अभी तक 215.87 लाख हैक्टेयर में खरीफ फसलों की बुवाई हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 279.27 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। खरीफ की प्रमुख फसल धान की रोपाई चालू खरीफ में अभी तक 47.77 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 47.62 लाख हैक्टेयर में रोपाई हो चुकी थी। मोटे अनाजों की बुवाई चालू खरीफ में अभी तक 37.15 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 43.72 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। गन्ने की बुवाई चालू खरीफ में 44.38 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले की समान अवधि में 43.68 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी।........आर एस राणा

मॉनसून ने पकड़ा जोर, जून में सिर्फ 11% कम बारिश

मॉनसून तेजी से आगे बढ़ रहा है। मध्य जून में करीब 30 फीसदी बारिश की जो कमी देखी गई थी, वह जून खत्म होने के साथ सिर्फ 11 फीसदी रह गई। पिछले हफ्ते के दौरान देश भर में सामान्य से 1 फीसदी ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई। पूरे जून के दौरान दक्षिण भारत में सामान्य से 26 फीसदी ज्यादा बारिश हुई। मध्य और उत्तर भारत में भी स्थिति सुधरी है। हालांकि दक्षिण भारत में रायलसीमा में सामान्य से 90 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है। पिछले महीने पूरे देश में आंध्रप्रदेश और तेलंगाना ऐसे दो राज्य रहे, जहां सबसे ज्यादा बारिश दर्ज हुई है। पूरे देश में बारिश की स्थिति पर नजर डालें तो 50 फीसदी ऐसे इलाके हैं, जहां सामान्य बारिश हुई है। वहीं 17 फीसदी इलाकों में सामान्य से भी ज्यादा बारिश दर्ज हुई है। हालांकि 28 फीसदी ऐसे इलाके हैं जहां सामान्य से कम बारिश हुई है, जबकि 5 फीसदी इलाकों में अभी भी सूखे जैसे हालात हैं।

चावल निर्यात 4.83 फीसदी बढ़ा

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू महीने के चौथे सप्ताह में देष से चावल के निर्यात में 4.83 फीसदी की तेजी आई है। इस दौरान देष से 2,78,317.87 टन चावल का निर्यात हुआ है जबकि इसके पहले सप्ताह 2,65,492.57 टन का हुआ था। इस दौरान बासमती चावल का निर्यात 38.39 फीसदी और गैर-बासिमती चावल का निर्यात 61.60 फीसदी का हुआ है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार बासमती चावल का निर्यात 1,06,871.95 टन का हुआ है जबकि गैर बासमती चावल का निर्यात 1,71,445.92 टन का हुआ है।
चालू वित वर्ष 2016-17 के पहले दो महीनों अप्रैल-मई में मूल्य के हिसाब से बासमती चावल के निर्यात में 16.11 फीसदी की कमी आई है। इस दौरान 3,901.30 करोड़ मूल्य का बासमती चावल का निर्यात हुआ है जबकि पिछले वित वर्ष की समान अवधि में 4,650.61 करोड़ रुपये मूल्य का निर्यात हुआ था। गैर बासमती चावल का निर्यात इस दौरान 19.16 फीसदी घटकर 2,217.91 करोड़ रुपये का हुआ है जबकि पिछले वित वर्ष की समान अवधि में 2,743.57 करोड़ रुपये मूल्य का निर्यात हुआ था।.............आर एस राणा

30 June 2016

मॉनसून

मॉनसून पूरे देश में जोर पकड़ चुका है। मध्य जून में जो बारिश में कमी करीब 30 फीसदी की थी, वह घटकर महज 11 फीसदी रह गई है। खासतौर से दक्षिण भारत में जोरदार बारिश हो रही है।

दिल्ली में चना दाल बेचेगी सरकार, दलहन आयात बढ़ायेगी सरकार

दिल्ली में चना दाल बेचेगी सरकार
दलहन आयात बढ़ायेगी सरकार
आर एस राणा
नई दिल्ली। चना की कीमतों मंे आई तेजी रोकने के लिए केंद्र सरकार ने दिल्ली में 60 रुपये प्रति किलो की दर से चना दाल बेचने का फैसला किया है। नेषनल कंजूमर कॉआपरेटिव फैडरेषन (एनसीसीएफ) मोबाईल आउटलेट के माध्यम से चना दाल की बिक्री करेगी। एनसीसीएफ पहले ही अरहर और उड़द दाल की बिक्री 120 रुपये प्रति किलो की दर से कर रही है।
उपभोक्ता मामले मंत्रालय, भारत सरकार से सचिव हेम पांडे ने बताया कि 5,000 टन चना और 2,500 टन मसूर का आयात सार्वजनिक कंपनियों के माध्यम से और किया जायेगा। इससे पहले एमएमटीसी 2,500 टन मसूर की निविदा जारी कर चुकी है। उन्होंने बताया कि अभी तक एमएमटीसी 46,000 टन दलहन के आयात सौदे कर चुकी है जिसमें से 14,321 टन दलहन की आवक भी हो चुकी है।
उन्होनें बताया कि चालू रबी में सरकारी एजेंसियां अभी तक 68,000 टन दलहन की खरीद कर चुकी हैं तथा 51 हजार टन दालों की खरीद खरीफ सीजन में की थी।..............आर एस राणा

29 June 2016

मोजांबिक से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर दाल खरीदने की पेशकश

 भारत ने अगले पांच साल के लिए मोजांबिक से न्यूनतम समर्थन मूल्य और अतिरिक्त परिवहन लागत पर अरहर की दाल खरीदने की पेशकश की है। देश में लगातार दो साल से सूखे के कारण उत्पादन घटने के बीच घरेलू बाजार में दाल की कीमत 198 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई है। सूत्रों के मुताबिक भारत ने मोजांबिक सरकार से कहा है कि क्या वह दोनों सरकारों के बीच अनुबंध के आधार पर अगले पांच साल के लिए अरहर की दाल की आपूर्ति कर सकती है। उन्होंने कहा कि भारत ने न्यूनतम समर्थन मूल्य और परिवहन एवं ढुलाई लागत के आधार पर अरहर की दाल खरीदने की पेशकश की है। मोजांबिक को इस संबंध में एक प्रस्ताव का मसौदा पेश किया जा चुका है।    अरहर की दाल का न्यनूतम समर्थन मूल्य 5,050 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है जिसमें फसल वर्ष 2016-17 (जुलाई-जून) के लिए 200 रुपये का बोनस शामिल है। उपभोक्ता मामलों के सचिव हेम पांडे की अध्यक्षता वाले भारतीय दल ने हाल ही में मोजांबिक का दौरा किया ताकि अरहर की दाल की आपूर्ति पर दीर्घकालिक समझौते पर वार्ता की जा सके। इस यात्रा के बाद पांडे ने कहा, 'शिष्टमंडल दीर्घकालिक समाधान के साथ लौटा है। अंतिम दस्तावेज को मोजांबिक सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार है। भारत सरकार को जल्द से जल्द जवाब मिलने की उम्मीद है।' मोजांबिक में करीब 70,000 टन दाल का उत्पादन होता है जिसमें ज्यादातर अरहर और कुछ उड़द शामिल है। वहां उत्पादित पूरी दाल का निर्यात भारत और विश्व के अन्य हिस्सों में प्रवासी भारतीयों की मांग पूरी करने के लिए किया जाता है। (BS Hindi)

कपास निर्यात बढ़ाने का भारत के पास मौका

पाकिस्तान का कपास आयात जुलाई 2017 में समाप्त होने वाले वर्ष के दौरान रिकॉर्ड उच्च स्तर पर रह सकता है। उद्योग जगत के अधिकारियों के मुताबिक, विश्व के इस चौथे बड़े उत्पादक देश (पाकिस्तान) में मौसम ठीक न रहने की वजह से किसानों को इस फसल का रकबा घटाना पड़ रहा है। पाकिस्तान में कपास की किल्लत ऐसे समय पैदा हुई है जब इस जिंस के सबसे बड़े उत्पादक भारत में लगातार दो साल सूखे से उत्पादन घटा है। इससे कपास की कीमतें और बढ़ सकती हैं। इस साल दोनों देश घरेलू मांग पूरी करने के लिए एक-दूसरे से कपास की खरीदारी कर चुके हैं।  ऑल पाकिस्तान टेक्सटाइल्स मिल्स एसोसिएशन (एपीटीएमए) के कार्यकारी सचिव सलीम सालेह के मुताबिक 'पाकिस्तान में कपास का रकबा 15 फीसदी घटा है। सरकार और उद्योग की कोशिशों के बावजूद सबसे अधिक उत्पादन करने वाले पंजाब सूबे के किसानों ने कपास का रकबा घटा दिया है।'   पिछले साल के अंत में बाढ़ और हाल के महीनों में कमजोर बारिश जैसे अप्रत्यााशित मौसम के कारण उत्पादकता को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है, जिससे किसान कपास की बुआई से दूरी बना रहे हैं। पाकिस्तान कॉटन जिनर्स एसोसिएशन के चैयरमेन शाहजाद अली खान ने कहा, 'कि सान को अन्य फसलें फायदेमंद नजर आ रही हैं।' एपीटीएमए के मुताबिक, पाकिस्तान में 2015 में कपास का उत्पादन एक तिहाई गिरकर 97 लाख गांठ रह गया। इस वजह से उसे 40 लाख गांठ का रिकॉर्ड आयात करना पड़ा।   यह पिछले साल से 12 लाख गांठ अधिक था। खान ने बताया कि 1 अगस्त से शुरू हुए सीजन में भी मौसम का साथ नहीं मिला। मई और जून में कम बारिश से पंजाब में फसल को पहले ही नुकसान पहुंच चुका है। पाकिस्तान में कपास की बुआई अप्रैल से शुरू होती है और इसकी कटाई जुलाई में शुरू होती है।  हालांकि पाकिस्तान ने नए सीजन में 1.41 करोड़ गांठों के उत्पादन का लक्ष्य रखा है। लेकिन उद्योग जगत के अधिकारियों का अनुमान है कि इस साल उत्पादन लक्ष्य से कम रहेगा और अगले कुछ सप्ताह के दौरान होने वाली बारिश से उत्पादन तय होगा। पड़ोसी देश पाकिस्तान में कम उत्पादन से भारत के पास निर्यात का अवसर है। इस सीजन में भारत ने कपास की करीब 65 लाख गांठों का निर्यात किया जिसमें पाकिस्तान ने 20 लाख गांठों का आयात किया।  कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष धीरेन सेठ  ने कहा, 'पाकिस्तान को निर्यात में भारत को अन्य आपूर्तिकर्ता देशों पर बढ़त हासिल है क्योंकि भारत से निर्यात का भाड़ा कम पड़ता है। जब पाकिस्तान के खरीदार आयात शुरू करेंगे तो वे निश्चित रूप से भारत को सबसे ज्यादा तरजीह देंगे।' हालांकि भारत ने इस महीने पाकिस्तान से 20 हजार गांठ के आयात का अनुबंध किया है। इससे यह संकेत मिलता है कि भारत मेंं भी कपास की आपूर्ति कम है। (BS Hindi)