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20 July 2018

देश के कई राज्यों में मानसून की बेरुखी, खरीफ फसलों की बुवाई 9 फीसदी पिछड़ी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन में देश के कई राज्यों में मानसून की बेरुखी का असर फसलों की बुवाई पर पड़ा है। खरीफ की प्रमुख फसल धान, दलहन, तिलहन के साथ ही मोटे अनाज और कपास की बुवाई पिछे चल रही है। देशभर में अभी तक 631.53 लाख हैक्टेयर में ही खरीफ फसलों की बुवाई हो पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुवाई 696.35 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।
भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार चालू खरीफ सीजन में पहली जून से 20 जुलाई तक उत्तर प्रदेश में 46 फीसदी कम, बिहार में 48 फीसदी कम और झारखंड में 42 फीसदी तथा पूर्वोतर के राज्यों में बारिश में भारी कमी आई है। इसी का असर फसलों की बुवाई पर पड़ा है। 
कृषि मंत्रालय के अनुसार खरीफ की प्रमुख फसल धान की रोपाई चालू खरीफ में अभी तक केवल 156.51 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी रोपाई 178.73 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। इसी तरह से चालू खरीफ सीजन में दालों की बुवाई घटकर 82.41 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 100.04 लाख हैक्टेयर में दालों की बुवाई हो चुकी थी। खरीफ दलहन की प्रमुख फसलों अरहर और उड़द की बुवाई पिछे चल रही है जबकि मूंग की बुवाई पिछले साल की समान अवधि की तुलना में थोड़ी अधिक हुई है। 
मोटे अनाजों की बुवाई भी पिछड़ कर चालू खरीफ में अभी तक 118.84 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक मोटे अनाजों की बुवाई 132.88 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। मोटे अनाजों में मक्का की बुवाई जरुर चालू सीजन में थोड़ी बढ़कर 61.35 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुवाई 61.32 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। बाजरा की बुवाई चालू सीजन में घटकर अभी तक केवल 40.66 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 54.87 लाख हैक्टेयर में बाजरा की बुवाई हो चुकी थी।
खरीफ तिलहनों की बुवाई भी चालू खरीफ में घटकर अभी तक केवल 123.58 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुवाई 123.69 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। हालांकि सोयाबीन की बुवाई जरुर चालू सीजन में बढ़कर 93.87 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक सोयाबीन की बुवाई केवल 84.64 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई थी। मूंगफली की बुवाई घटकर चालू सीजन में अभी तक केवल 23.01 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में मूंगफली की बुवाई 29.8 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।
कपास की बुवाई भी चालू खरीफ सीजन में 11.09 फीसदी पिछे चल रही है। अभी तक देशभर में कपास की बुवाई केवल 91.70 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुवाई 104.27 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। गन्ने की बुवाई चालू खरीफ सीजन में बढ़कर 50.52 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक गन्ने की बुवाई 49.72 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई थी।..............  
आर एस राणा

19 July 2018

चना समेत अन्य दलहन की कीमतों में और तेजी आने का अनुमान

आर एस राणा
नई दिल्ली। चना समेत अन्य दलहनों अरहर, उड़द, मूंग तथा मसूर की कीमतों में तेजी बनी हुई है। उत्पादक मंडियों में आवक नहीं हो रही है जबकि कई राज्यों में बारिश की कमी के कारण दालों की बुवाई पिछड़ रही है। इसलिए इनकी मौजूदा कीमतों में अभी और तेजी बन सकती है।  गुरूवार को दिल्ली में चना के भाव बढ़कर 4,850 रुपये और मसूर के भाव 4,000 रुपये तथा अरहर के भाव 4,000 प्रति क्विंटल हो गए।
चालू रबी विपणन सीजन में सार्वजनिक कंपनियों ने एमएसपी पर 27.39 लाख टन चना और 2.43 लाख टन मसूर की खरीद की है तथा जब तक नेफेड की बिकवाली नहीं आयेगी, भाव तेज ही बने रहने का अनुमान है। आगे त्यौहारी सीजन होने के कारण दालों में मांग और बढ़ेगी। 
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू रबी सीजन 2017—18 में चना का रिकार्ड 111.6 लाख टन उत्पादन होने का अनुमान है, जबकि मसूर का 15.1 लाख टन उत्पादन होने का अनुमान है। व्यापारियों का मानना है कि चना और मसूर का उत्पादन सरकारी अनुमान से कम हुआ है, इसीलिए उत्पादक मंडियों में आवक लगभग बंद हो गई है।..........  आर एस राणा

18 July 2018

गन्ना का एफआरपी 20 रुपये बढ़ाकर 13 रुपये वापिस लिए, किसान को मिलेंगे 7 रुपये

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार किसानों को एक हाथ से दे रही है, तो दूसरे हाथ से वापिस भी छीन ले रही है। गन्ना किसानों के साथ सरकार ने यही किया है। गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) में केंद्र सरकार ने 20 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ोतरी कर 13 रुपये वापिस ले लिए हैं। इसलिए किसान को केवल 7 रुपये ही मिलेगा, क्योंकि सरकार ने गन्ने में रिकवरी की दर को 9.5 फीसदी से बढ़ाकर 10 फीसदी कर दिया है।
​पेराई सीजन 2017-18 में गन्ने का एफआरपी 255 रुपये प्रति क्विंटल 9.5 रिकवरी की दर पर था, इसलिए 10 फीसदी की रिकवरी पर गन्ना किसानों को 267 से 268 रुपये प्रति क्विंटल का दाम मिला है, जबकि आगामी पेराई सीजन में 10 फीसदी की रिकवरी पर किसान को 275 रुपये प्रति क्विंटल मिलेगा। 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई आर्थिक मामलों की मंत्रीमंडलीय समिति (सीसीआई) की बैठक में पहली अक्टूबर से शुरू होने वाले पेराई सीजन 2018-19 के लिए गन्ने का एफआरपी 20 रुपये बढ़ाकर 275 रुपये प्रति क्विंटल तय कर दिया है, इसमें सरकार ने गन्ने में रिकवरी की दर को 9.5 फीसदी से बढ़ाकर 10 फीसदी कर दिया है। सरकार द्वारा निर्धारित रिकवरी से ज्यादा आने पर किसान को 0.1 रिकवरी पर 2.68 रुपये प्रति क्विंटल की दर से चीनी मिलों के द्वारा भुगतान किया जाता है।
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के संयोजक वी एम सिंह ने कहा कि गन्ने के एफआरपी में बढ़ोतरी मात्र दिखावा है, क्योंकि एफआरपी में सरकार ने 20 रुपये बढ़ाकर 13 रुपये वापिस ले लिए। इसलिए किसान को 7 रुपये प्रति क्विंटल से भी कम मिलेगा। उन्होनें कहा कि प्रधानमंत्री को किसानों को इस ऐतिहासिक फैसले की जानकारी भी देनी चाहिए कि हमने एफआरपी में 7 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। डीजल, खाद, बीज और कीटनाशकों की कीमतों में हुई बढ़ोतरी की तुलना में गन्ने के एफआरपी में बढ़ोतरी उंट के मुंह में जीरा है।
केंद्र सरकार गन्ने का एफआरपी तय करती है। महाराष्ट्र और कर्नाटका के अलावा कई राज्यों में चीनी मिलें गन्ने की खरीद एफआरपी पर करती हैं जबकि उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में राज्य सरकारें राज्य समर्थित मूल्य (एसएपी) भी तय करती है तथा खरीद एसएपी के आधार पर करती है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ सीजन में गन्ने की बुवाई बढ़कर 50.52 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले पेराई सीजन में इसकी बुवाई 49.72 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। बुवाई में हुई बढ़ोतरी से उद्योग के अनुसार आगामी पेराई सीजन में भी चीनी का रिकार्ड 350 से 355 लाख टन का उत्पादन होने का अनुमान है। ऐसे में किसानों को आगामी पेराई सीजन में भी बकाया राशि के लिए दो-चार होना पड़ सकता है। चालू पेराई सीजन में किसानों का चीनी मिलों पर अभी भी बकाया 19,000 करोड़ से ज्यादा का बचा हुआ है।...... 
आर एस राणा

यूपी, बिहार, झारखंड में बारिश की कमी से हालात चिंताजनक, खरीफ फसलों की बुवाई होगी प्रभावित

आर एस राणा
नई दिल्ली। देश के कई क्षेत्रों में जहां भारी बारिश से बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं, वहीं देशभर के 23 फीसदी इलाकों में बारिश सामान्य से कम हुई है। उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में अभी तक सामान्य से 40 फीसदी कम बारिश होने से हालात चिंतानजक बने हुए हैं। बारिश की कमी के कारण खरीफ की प्रमुख फसल धान के साथ ही दलहनी फसलों की बुवाई प्रभावित हो रही है।
मानसून सीजन के करीब पौने दो महीने बीतने के बावजूद भी कई राज्यों में बारिश सामान्य से कम हुई है जिसका असर खरीफ फसलों की बुवाई पर पड़ेगा। मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार चालू खरीफ सीजन में पहली जून से 17 जुलाई तक उत्तर प्रदेश में सामान्य के मुकाबले 45 फीसदी कम, झारखंड में 40 फीसदी कम और बिहार में 44 फीसदी कम बारिश हुई है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में 24 फीसदी कम, मणिपुर में 69 फीसदी कम, मेघालय में 42 फीसदी कम, नागालैंड में 38 फीसदी कम, अरुणाचल प्रदेश में 32 फीसदी कम, असम में 26 फीसदी कम और हरियाणा में 16 फीसदी कम तथा उत्तराखंड में 9 फीसदी कम बारिश हुई है। देशभर में चालू मानसूनी सीजन में सामान्य के मुकाबले 2 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई।
आईएमडी के अनुसार महाराष्ट्र में चालू खरीफ में सामान्य से 41 फीसदी ज्यादा, राजस्थान में 15 फीसदी ज्यादा, पंजाब में 21 फीसदी ज्यादा और मध्य प्रदेश में 5 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में फसलों की बुवाई 10.1 फीसदी पिछड़ कर 501.67 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुवाई 557.49 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। खरीफ की प्रमुख फसल धान के साथ ही दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों की बुवाई में चालू खरीफ में कमी आई है।... आर एस राणा

17 July 2018

गन्ने का एफआरपी 275 रुपये तय करने का प्रस्ताव,​ रिकवरी की दर बढ़ाकर 10 फीसदी की

आर एस राणा
नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2018 से शुरू होने वाले गन्ना पेराई सीजन 2018-19 के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) में 20 रुपये की बढ़ोतरी कर भाव 275 रुपये प्रति क्विंटल तय करने की सिफारिश की गई है। सीएसीपी ने ​आगामी पेराई सीजन के लिए रिकवरी की दर को 9.5 फीसदी से बढ़ाकर 10 फीसदी कर दिया है।
कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ष्ठ अधिकारी के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 18 जुलाई को होने वाली आर्थिक मामलों की मंत्रीमंडलीय समिति (सीसीआई) की बैठक में आगामी पेराई सीजन के लिए गन्ने का एफआरपरी घोषित होने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) ने आगामी पेराई सीजन के लिए गन्ने के एफएफआरपी में 20 रुपये की बढ़ोतरी कर भाव 275 रुपये प्रति क्विंटल तय करने की सिफारिश की है, इसमें गन्ने में रिकवरी की दर को बढ़ाकर 10 फीसदी कर दिया है। पिछले पेराई सीजन में गन्ने का एफआरपी 255 रुपये प्रति क्विंटल था तथा रिकवरी की औसत दर 9.5 फीसदी थी।
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के संयोजक वी एम सिंह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी अपने आप को ऐतिहासिक फैसले लेने वाली पार्टी बता रही है जबकि गन्ने के एफआरपी में 20 रुपये की बढ़ोतरी में से किसान को केवल 7 से 8 रुपये प्रति क्विंटल का ही लाभ होगा। उन्होंने बताया कि चालू पेराई सीजन में गन्ने का एफआरपी 255 रुपये प्रति क्विंटल है, तथा रिकवरी की दर 9.5 फीसदी है। इस ​आधार पर 10 फीसदी की रिकवरी पर किसानों को 267 से 268 रुपये प्रति क्विंटल का दाम मिला है, जबकि आगामी पेराई सीजन में 10 फीसदी की रिकवरी पर किसान को 275 रुपये प्रति क्विंटल मिलेगा। ऐसे में केंद्र सरकार द्वारा जो 20 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, उसमें किसान को केवल 7-8 रुपये प्रति क्विंटल ही चालू पेराई सीजन से ज्यादा मिलेंगे जोकि 3 फीसदी से भी कम है।
केंद्र सरकार गन्ने का एफआरपी तय करती है, जबकि उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में राज्य सरकारें राज्य समर्थित मूल्य (एसएपी) भी तय करती है जोकि आमतौर पर एफआरपी से ज्यादा होता है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ सीजन में गन्ने की बुवाई बढ़कर 50.52 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले पेराई सीजन में इसकी बुवाई 49.72 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। पहली अक्टूबर से शुरू हुए चालू पेराई सीजन में चीनी का रिकार्ड उत्पादन 321 लाख टन से ज्यादा का हो चुका है, जबकि बुवाई में हुई बढ़ोतरी को देखते हुए उद्योग ने आगामी पेराई सीजन में 350 से 355 लाख टन चीनी के उत्पादन का अनुमान लगाया है। बंपर उत्पादन अनुमान से आगामी पेराई सीजन में गन्ना किसानों की मुश्किल और बढ़ सकती है। चालू पेराई सीजन में गन्ना की पेराई बंद हो चुकी है जबकि किसानों का चीनी मिलों पर बकाया अभी भी 19,000 करोड़ से ज्यादा का बचा हुआ है।............  आर एस राणा

खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात जून में 23 फीसदी घटा, आयात शुल्क में बढ़ोतरी एवं मजबूत डॉलर का असर

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा आयात शुल्क में बढ़ोतरी के साथ ही रुपये के मुकाबले डॉलर की मजबूती से जून में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 23 फीसदी घटकर 10,42,003 टन का ही हुआ है जबकि पिछले साल जून महीने में इनका आयात 13,44,868 टन का हुआ था।
साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन आॅफ इंडिया (एसईए) के अनुसार चालू तेल वर्ष 2017-18 (नवंबर-17 से अक्टूबर-18) के पहले 8 महीनों नवंबर से जून के दौरान खाद्य एवं अखाद्य तेलों का कुल आयात 2.2 फीसदी घटकर 96,46,538 टन का ही हुआ है जबकि पिछले तेल वर्ष की सामान अवधि में इनका आयात 98,67,572 टन का हुआ था। एसईए के कार्यकारी निदेशक डॉ. बी वी मेहता ने बताया कि हाल में केंद्र सरकार ने आयातित खाद्य तेलों के आयात शुल्क में बढ़ोतरी की थी, जबकि रुपये की तुलना में डॉलर मजबूत बना हुआ है। इसीलिए आयातित खाद्य एवं अखाद्य तेलों के आयात में कमी आई है। सोमवार को डॉलर के मुकाबले रुपये में हल्की कमजोरी आई है और एक डॉलर की कीमत 68.75 रुपये के पार चली गई।
एसईए के अनुसार मई के मुकाबले जून में आयातित खाद्य तेलों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। जून में भारतीय बंदरगाह पर आरबीडी पामोलीन का भाव घटकर 631 डॉलर प्रति टन रह गया जबकि मई में इसका भाव 661 डॉलर प्रति टन था। इसी तरह से क्रुड पॉम तेल का भाव इस दौरान 652 डॉलर प्रति टन से घटकर 623 डॉलर प्रति टन रह गया। घरेलू बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों में तेजी-मंदी आगामी दिनों रुपये के मुकाबले डॉलर की स्थिति पर निर्भर करेगी।..............  आर एस राणा

बुवाई में बढ़ोतरी एवं अनुकूल मौसम से चीनी का रिकार्ड 350 लाख टन से ज्यादा उत्पादन का अनुमान-उद्योग

आर एस राणा
नई दिल्ली। गन्ने की बुवाई में हुई बढ़ोतरी के साथ ही अनुकूल मौसम से पेराई सीजन 2018-19 में चीनी का रिकार्ड उत्पादन 350-355 लाख टन होने का अनुमान है जोकि चालू पेराई सीजन 2017-18 के 322.5 लाख टन से 28 से 30 लाख टन ज्यादा है। चीन के रिकार्ड उत्पादन अनुमान से गन्ना किसानों की मुश्किल आगामी पेराई सीजन में बकाया के रुप में और बढ़ सकती है।
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन आॅफ इंडिया (इस्मा) के अनुसार चालू सीजन में गन्ने की बुवाई बढ़कर 54.35 लाख हैक्टेयर होने का अनुमान है जोकि पेराई सीजन 2017-18 की तुलना में 8 फीसदी अधिक है। पिछले खरीफ सीजन में गन्ने की बुवाई 50.42 लाख हैक्टेयर में हुई थी।
इस्मा के अनुसार सबसे बड़े उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में पहली अक्टूबर 2018 से शुरू होने वाले पेराई सीजन में चीनी का उत्पादन बढ़कर रिकार्ड 130 से 135 लाख टन होने का अनुमान है जबकि चालू पेराई सीजन 2017-18 में राज्य में चीनी का 120.5 लाख टन का उत्पादन हुआ है। राज्य में गन्ने की बुवाई बढ़कर चालू सीजन में 23.40 लाख हैक्टेयर होने का अनुमान है जोकि चालू पेराई सीजन के 23.30 लाख हैक्टेयर से ज्यादा है।
महाराष्ट्र में आगामी पेराई सीजन में चीनी का उत्पादन बढ़कर 110 से 115 लाख टन होने का अनुमान है जबकि चालू पेराई सीजन में राज्य में 107.15 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। उद्योग के अनुसार चालू खरीफ में राज्य में गन्ने की बुवाई 9.15 लाख हैक्टेयर से बढ़कर 11.42 लाख हैक्टेयर में होने का अनुमान है। इसी तरह से कर्नाटक में आगामी पेराई सीजन 2018-19 में चीनी का उत्पादन बढ़कर 44.80 लाख टन होने का अनुमान है जबकि चालू पेराई सीजन में राज्य में 36.54 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। तमिलनाडु में भी पेराई सीजन 2018-19 में चीनी का उत्पादन बढ़कर 2.60 लाख टन होने का अनुमान है जबकि चालू पेराई सीजन में 2.01 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है।
इस्मा के अनुसार पहली अक्टूबर 2017 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन में 30 जून तक चीनी का उत्पादन 321.95 लाख टन का हो चुका है जबकि सीजन के आखिर सितंबर तक उत्पादन 50 से 60 हजार टन का और होने का अनुमान है।............  आर एस राणा