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25 नवंबर 2023

दिसंबर के लिए चीनी का कोटा 24 लाख टन का जारी

 केंद्रीय खाद्वय एवं उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने दिसंबर के लिए चीनी का कोटा 24 लाख टन का जारी किया है। 

दलहन एवं तिलहन के साथ धान की बुआई चालू रबी सीजन में पिछड़ी

नई दिल्ली। चालू रबी सीजन में दलहन एवं तिलहन के साथ ही धान की बुवाई पिछले साल की तुलना में पिछड़ रही है।


कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू सीजन रबी में 24 नवंबर तक दलहन की बुआई घटकर 94.74 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 103.32 लाख हेक्टेयर से कम है।

रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई चालू सीजन में 66.19 लाख हेक्टेयर में हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 75.07 लाख हेक्टेयर से कम है। हालांकि इस दौरान मसूर की बुआई चालू रबी में बढ़कर 12.74 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई केवल 12.03 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। मटर की बुआई चालू रबी में 7.17 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई केवल 6.62 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। उड़द की बुआई 1.96 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 2.46 लाख हेक्टेयर से कम है।

तिलहनी फसलों की बुआई चालू रबी सीजन में घटकर 82.01 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 82.53 लाख हेक्टेयर से थोड़ी कम है।

रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों की बुआई चालू रबी में थोड़ी बढ़कर 77.78 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले इस समय तक इसकी बुआई 77.74 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। अन्य रबी तिलहन में मूंगफली की बुआई 1.80 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 2.07 लाख हेक्टेयर से कम है। सफ्लावर की बुआई चालू रबी में 37 हजार हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 41 हजार हेक्टेयर में हो चुकी थी। अलसी की बुआई चालू में बढ़कर 1.79 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 1.65 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी।

धान की रोपाई चालू रबी में 8.41 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 9.15 लाख हेक्टेयर से कम है।

खुदरा के साथ ही थोक में ग्राहकी कमजोर, अरहर एवं उड़द के साथ मूंग तथा मसूर में गिरावट

नई दिल्ली। खुदरा के साथ ही थोक में दालों में ग्राहकी कमजोर होने से इनकी कीमतों पर दबाव बना हुआ है। घरेलू बाजार में गुरुवार को अरहर एवं उड़द के साथ ही मूंग तथा मसूर की कीमतों में मंदा आया, जबकि इस दौरान चना की कीमतें स्थिर हो गई।


चेन्नई में बर्मा की उड़द एफएक्यू और एसक्यू की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। उड़द एफएक्यू के भाव दिसंबर शिपमेंट के फसल सीजन 2023 के दाम 15 डॉलर कमजोर होकर भाव 1,080 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ रह गए, जबकि इस दौरान एसक्यू उड़द के दाम 20 डॉलर घटकर 1,170 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ रह गए। बर्मा में लेमन अरहर के भाव दिसंबर शिपमेंट के 1,450 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ पर स्थिर बने रहे।
 
आयात पड़ते सस्ते होने के कारण घरेलू बाजार में आयातित के साथ ही देसी उड़द की कीमतों में लगातार दूसरे दिन गिरावट जारी रही। व्यापारियों के अनुसार उत्तर प्रदेश की मंडियों में नई उड़द की छिटपुट आवक हो रही है, तथा चालू महीने के अंत तक आवक बढ़ने की उम्मीद है। वैसे भी मध्य दिसंबर तक आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु एवं तेलंगाना की नई फसल आयेगी। उधर बर्मा में भी दिसंबर में एक छोटी फसल आती है। ऐसे में दाल मिलें केवल जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रही है, इसलिए उड़द की कीमतों पर दबाव देखा जा रहा है। हालांकि खपत का सीजन के कारण उड़द दाल में दक्षिण भारत की मांग बनी रहने के आसार है, जबकि उत्पादक मंडियों में अच्छी क्वालिटी की देसी उड़द की आवक कम हो रही है। इसलिए इसकी मौजूदा कीमतों में हल्की गिरावट और भी आ सकती है।

घरेलू बाजार में आयातित के साथ ही देसी अरहर की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। उधर कर्नाटक के बाद महाराष्ट्र की मंडियों में भी नई अरहर की छिटपुट आवक शुरू हो गई है तथा इन राज्य की मंडियों में आवक चालू महीने के अंत तक बढ़ेगी। हालांकि आवकों का दबाव दिसंबर में ही बनेगा। जानकारों के अनुसार इन राज्यों में अरहर के उत्पादन अनुमान में कमी आने की आशंका है, लेकिन केंद्र सरकार लगातार दलहन की कीमतों की समीक्षा कर रही है। हालांकि खपत का सीजन होने के कारण आगामी दिनों में अरहर दाल की खुदरा एवं थोक मांग बनी रहने के आसार हैं। बर्मा के साथ ही अफ्रीकी देशों से अरहर के आयात पड़ते महंगे है। इसलिए मौजूदा कीमतों में धीरे, धीरे गिरावट आयेगी।

चना की कीमतें घरेलू बाजार में स्थिर हो गई। व्यापारियों के अनुसार चना में जहां नीचे दाम पर बिकवाली कम हो जाती है, वहीं बढ़े दाम पर मिलें भी जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रही हैं। उत्पादक राज्यों में चना का बकाया स्टॉक सीमित मात्रा में ही बचा हुआ है, तथा स्टॉक लिमिट लगी होने के कारण भी दाल मिलों के पास सप्लाई तंग है। वैसे भी चना की नई फसल फरवरी, मार्च में ही आयेगी। खपत का सीजन होने के कारण चना दाल एवं बेसन की मांग अभी बनी रहेगी। नेफेड के पास बफर स्टॉक एवं अन्य कल्याणकारी योजना के अलावा खुले बाजार में बेचने के लिए चना का स्टॉक सीमित मात्रा में ही बचा हुआ है। इसलिए इसकी मौजूदा कीमतों में बड़ी गिरावट के आसार नहीं है।

सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार ने पिछले चार महीने में करीब 13 लाख चना की बिक्री खुले बाजार में की है, अत: अब केंद्र सरकार के पास अब 18 से 19 लाख टन चना का बकाया स्टॉक ही बचा हुआ है। इसमें से 10 लाख टन बफर स्टॉक का एवं करीब छह लाख टन अन्य कल्याणकारी योजनाओं में खपत होगा। ऐसे में अब खुले बाजार में बेचने के लिए दो से तीन लाख टन चना का ही बकाया स्टॉक बचा हुआ है।

देसी मसूर के दाम दिल्ली में नरम हुए, जबकि मुंबई में आयातित की कीमतें स्थिर बनी रही। व्यापारियों के अनुसार हाल ही में कनाडा से मसूर का आयात ज्यादा मात्रा में हुआ है, जिस कारण इसकी कीमतों में मंदा आया था। हालांकि व्यापारी अभी मसूर में बड़ी गिरावट के पक्ष में नहीं है, क्योंकि खपत का सीजन होने के कारण मसूर दाल में बिहार, बंगाल एवं असम की मांग आगामी दिनों में बढ़ेगी। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की मंडियों में देसी मसूर की आवक सीमित मात्रा में ही हो रही है। वैसे भी उत्पादक राज्यों में किसानों के पास देसी मसूर का बकाया स्टॉक सीमित मात्रा में ही बचा हुआ है। इसलिए स्टॉकिस्टों एवं आयातकों दाम घटाकर बिकवाली नहीं करना चाहते।

आस्ट्रेलिया में मसूर की कटाई जोरों पर है, तथा चालू सीजन में इसके उत्पादन में पिछले साल की तुलना में कमी आने की आशंका है। पिछले साल ऑस्ट्रेलिया में मसूर का उत्पादन 1.69 मिलियन टन की तुलना में घटकर 1.23 मिलियन टन का ही होने का अनुमान है।

स्टॉकिस्टों की मुनाफावसूली से मूंग की कीमतें दिल्ली में कमजोर हो गई, जबकि उत्पादक मंडियों में इसके दाम स्थिर बनी रहे। व्यापारियों के अनुसार खपत का सीजन होने के कारण मूंग दाल में मांग बनी रहेगी, तथा चालू सीजन में मूंग की बुआई कम हुई। वैसे भी अगस्त में बारिश की भारी कमी के कारण खरीफ मूंग की प्रति हेक्टेयर उत्पादकता पिछले साल की तुलना में कम बैठ रही है। हालांकि उत्पादक राज्यों में नई मूंग की दैनिक आवक बराबर बनी हुई है साथ ही नेफेड राजस्थान के साथ ही मध्य प्रदेश में लगातार मूंग की बिकवाली कर रही है। इसलिए एकतरफा बड़ी तेजी के आसार कम है।

चेन्नई में एसक्यू उड़द के दाम 9,700 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। इस दौरान एफएक्यू उड़द की कीमतें कमजोर होकर 8,800 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर आ गई।

दिल्ली में एसक्यू उड़द के दाम 50 रुपये कमजोर होकर दाम 10,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इस दौरान एफएक्यू उड़द की कीमतें 75 रुपये नरम होकर 9,200 रुपये प्रति क्विंटल बोली गई।

मुंबई में उड़द के दाम 150 रुपये घटकर दाम 8,850 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

सोलापुर मंडी में नई देसी उड़द के भाव 8,000 से 10,100 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। इस दौरान इंदौर मंडी में बोल्ड उड़द के भाव 9,201 से 9,701 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

चेन्नई में लेमन अरहर के दाम 125 रुपये कमजोर होकर भाव 10,700 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

दिल्ली में लेमन अरहर के दाम 200 रुपये कमजोर होकर भाव 11,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

मुंबई में लेमन अरहर के दाम 250 रुपये कमजोर होकर भाव 10,400 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

मुंबई में अफ्रीकी देशों से आयातित अरहर की कीमतें कमजोर हो गई। सूडान से आयातित अरहर के दाम 200 रुपये घटकर 11,100 से 11,200 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इस दौरान गजरी अरहर के भाव 100 रुपये घटकर दाम 8,800 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। मतवारा अरहर के भाव 150 रुपये घटकर दाम 8,600 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

दिल्ली में देसी मसूर के दाम 25 रुपये नरम होकर 6,550 से 6,575 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

मुंद्रा बंदरगाह पर कनाडा की मसूर के दाम 6025 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। इस दौरान हजिरा बंदरगाह पर कनाडा की मसूर के भाव 6100 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। ऑस्ट्रेलिया की मसूर की कीमतें कंटेनर में 6300 से 6350 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गई। कनाडा की मसूर की कीमतें कंटेनर में 6300 रुपये प्रति क्विंटल बोली गई।

दिल्ली में राजस्थान लाइन के चना के दाम 6,475 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। इस दौरान मध्य प्रदेश लाइन में चना के भाव 6,400 से 6,425 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

दिल्ली में मूंग के भाव 200 रुपये कमजोर होकर दाम 8,300 से 8,500 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इस दौरान जयपुर मंडी में मूंग के बिल्टी भाव 7500 से 8600 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। इंदौर में बोल्ड मूंग के भाव 8000 से 8500 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

चालू खरीफ में धान की सरकारी खरीद 269.95 लाख टन के पार

नई दिल्ली। चालू खरीफ विपणन सीजन 2023-24 में धान की न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर खरीद 269.95 लाख टन की हो चुकी है। अभी तक हुई कुल खरीद में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी पंजाब एवं हरियाणा की है।


पंजाब से चालू खरीफ में धान की सरकारी खरीद 178.57 लाख टन की हो चुकी है, जबकि हरियाणा की मंडियों से इस दौरान समर्थन मूल्य पर 58.78 लाख टन धान खरीदा जा चुका है।

इस दौरान छत्तीसगढ़ से 9.05 लाख टन, तमिलनाडु से 5.38 लाख टन तथा तेलंगाना से 8.07 लाख टन एवं उत्तराखंड से 4.09 लाख टन तथा उत्तर प्रदेश की मंडियों से 4.81 लाख टन धान की सरकारी खरीद हो चुकी है।

अन्य राज्यों में आंध्र प्रदेश से 21,826 टन, बिहार से 28,669 टन, गुजरात से 8,263 टन, हिमाचल प्रदेश से 20,795 टन तथा जम्मू-कश्मीर से 16,948 टन के अलावा केरल से 20,074 टन धान की समर्थन मूल्य पर खरीद हो चुकी है।

केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2023-24 के लिए कॉमन ग्रेड धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी 2,183 रुपये और कॉमन ग्रेड धान का एमएसपी 2,203 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। 

गुजरात में चालू रबी में चना एवं सरसों के साथ ही अन्य फसलों की बुआई घटी

नई दिल्ली। चालू रबी सीजन में गुजरात में चना एवं सरसों के साथ ही अन्य फसलों की बुआई में भारी कमी आई है। जानकारों के अनुसार सितंबर में राज्य में औसत से कम बारिश का असर फसलों की बुआई पर पड़ा है।


राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार राज्य में 20 नवंबर तक सरसों की बुआई केवल 1.66 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 2.47 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। अत: राज्य में सरसों की बुआई पिछले साल की तुलना में करीब 33 फीसदी पिछड़ रही है।

इसी तरह से चालू रबी में दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई राज्य में करीब 44 फीसदी पिछड़कर 1.86 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 3.31 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। दलहनी फसलों की कुल बुआई चालू रबी में 2.14 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 3.57 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

रबी की प्रमुख फसल गेहूं की बुआई चालू रबी में राज्य में 33 फीसदी घटकर केवल 1.87 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 2.81 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी।

मोटे अनाजों में ज्वार एवं बाजरा तथा अन्य फसलों की बुआई चालू रबी सीजन में घटकर 2.31 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 3.49 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। 

विदेश में दाम कमजोर होने से घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतें घटी

नई दिल्ली। विदेशी बाजार में दाम कमजोर होने से स्पिनिंग मिलों की मांग स्पिनिंग मिलों की मांग कमजोर हो गई, जिससे उत्तर भारत के राज्यों के साथ ही गुजरात में कॉटन के दाम नरम हो गए।


गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव 50 रुपये कमजोर होकर 56,600 से 57,000 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो रह गए।

पंजाब में नई रुई के हाजिर डिलीवरी के भाव नरम होकर 5525 से 5625 रुपये प्रति मन बोले गए। हरियाणा में नई रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव कमजोर होकर 5500 से 5600 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में नई रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 5325 से 5625 रुपये प्रति मन बोले गए। खैरथल लाइन में कॉटन के दाम 55,200 से 55,500 रुपये कैंडी, एक कैंडी-356 किलो बोले गए।

देशभर की मंडियों में कपास की आवक 1,25,600 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई। एमएसीएक्स के साथ ही एनसीडीएक्स पर आज शाम को कॉटन की कीमतों में शाम के सत्र में गिरावट का रुख रहा।

आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतों में गिरावट का रुख देखा गया। उत्तर भारत के साथ ही गुजरात में स्पिनिंग मिलों की मांग कमजोर होने से कॉटन की कीमतें नरम हुई। व्यापारियों के अनुसार घरेलू बाजार में सूती धागे में स्थानीय एवं निर्यात मांग सामान्य की तुलना में कमजोर बनी हुई है, जबकि उत्पादक मंडियों में नई कपास की आवक बढ़ रही है। घरेलू बाजार से यार्न की स्थानीय मांग बढ़ने पर ही कॉटन की कीमतों में तेजी टिक पायेगी।

हालांकि देश के कई राज्यों की मंडियों से कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई कपास की एमएसपी पर खरीद कर रही है। जानकारों के अनुसार त्योहारी छुट्टियों के कारण पिछले सप्ताह जहां कपास की आवक कम हो रही थी, वहीं आगामी दिनों में इसकी दैनिक आवक बढ़ेगी।

कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सीएआई ने पहली अक्टूबर 2023 से शुरू हुए चालू फसल सीजन 2023-24 में देश में कॉटन के आरंभिक अनुमान में एक लाख गांठ की कटौती कर कुल उत्पादन 294.10 लाख गांठ होने का जारी किया है, जबकि पहले आरंभिक अनुमान में 295.10 लाख गांठ होने का अनुमान था। फसल सीजन 2022-23 के दौरान देशभर में 318.90 लाख गांठ कॉटन का उत्पादन हुआ था।

विदेशी बाजार में खाद्वय तेलों में आज मिलाजुला रुख रहा, जबकि घरेलू बाजार में कॉटन वॉश के दाम स्थिर बने रहे। राजकोट में कॉटन वॉश के दाम 880 रुपये प्रति 10 किलो पर स्थिर हो गए। इस दौरान धुले में कॉटन वॉश के दाम 865 रुपये प्रति 10 किलो पर स्थिर बने रहे। अमरावती में कॉटन वॉश की कीमतें 885 रुपये प्रति दस किलो पर स्थिर बनी रही।

सीएआई ने कॉटन के आरंभिक अनुमान में एक लाख गांठ की कटौती की

नई दिल्ली,उद्योग ने पहली अक्टूबर 2023 से शुरू हुए चालू फसल सीजन 2023-24 में देश में कॉटन के आरंभिक अनुमान में एक लाख  गांठ की कटौती कर कुल उत्पादन 294.10 लाख गांठ होने का जारी किया है, जबकि पहले आरंभिक अनुमान में 295.10 लाख गांठ होने का अनुमान था। फसल सीजन 2022-23 के दौरान देशभर में 318.90 लाख गांठ कॉटन का उत्पादन हुआ था।


कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सीएआई के दूसरे आरंभिक अनुसार के अनुसार उत्तर भारत के राज्यों पंजाब में कॉटन का उत्पादन फसल सीजन 2023-24 में 4.50 लाख गांठ, हरियाणा में 15 लाख गांठ, अपर राजस्थान में 11 लाख गांठ एवं लोअर राजस्थान के 11.50 लाख गांठ को मिलाकर कुल 42 लाख गांठ होने का अनुमान है।

सीएआई के अनुसार मध्य भारत के राज्यों गुजरात में चालू फसल सीजन में 85 लाख गांठ, महाराष्ट्र में 76.60 लाख गांठ तथा मध्य प्रदेश के 18 लाख गांठ को मिलाकर कुल 179.60 लाख गांठ के उत्पादन का अनुमान है।

दक्षिण भारत के राज्यों में तेलंगाना में चालू फसल सीजन में 30 लाख गांठ, आंध्र प्रदेश में 12.50 लाख गांठ एवं कर्नाटक में 18.50 लाख गांठ तथा तमिलनाडु के 6.50 लाख गांठ को मिलाकर कुल 67.50 लाख गांठ के कॉटन के उत्पादन का अनुमान है।

ओडिशा में चालू खरीफ में 3 लाख गांठ एवं अन्य राज्यों में 2 लाख गांठ कॉटन के उत्पादन का अनुमान है।

सीएआई के अनुसार अक्टूबर 23 में देशभर की मंडियों में 24.34 लाख गांठ कॉटन की आवक हो चुकी है।

नई फसल की आवकों के समय पहली अक्टूबर को 28.90 लाख गांठ कॉटन का बकाया स्टॉक था, जबकि अक्टूबर में 24.34 लाख गांठ की आवक हुई। इस दौरान 1.50 लाख गांठ आयातित कॉटन भारतीय बंदरगाह पर पहुंची। अत: अक्टूबर अंत में कुल उपलब्धता 54.74 लाख गांठ की बैठी, जिसमें से 26 लाख गांठ की घरेलू खपत हुई तथा एक लाख गांठ की निर्यात शिपमेंट हुई। अत: अक्टूबर अंत में मिलों के पास करीब 25 लाख गांठ का तथा सीसीआई, महाराष्ट्र फेडरेशन, एमएनसी एवं जिनर्स के व्यापारी तथा निर्यातकों के पास 2.74 लाख गांठ का बकाया स्टॉक है।

सीएआई के अनुसार पहली अक्टूबर 2023 को कॉटन का बकाया स्टॉक 28.90 लाख गांठ का बचा हुआ था, जबकि 294.10 लाख गांठ के उत्पादन का अनुमान है। चालू सीजन में करीब 22 लाख गांठ कॉटन का आयात होने की उम्मीद है। ऐसे में कुल उपलब्धता 345 लाख गांठ की बैठेगी।

चालू फसल सीजन में कॉटन की कुल घरेलू खपत 311 लाख गांठ होने का अनुमान है, जबकि इस दौरान 14 लाख गांठ के निर्यात की उम्मीद है। ऐसे में कॉटन का बकाया स्टॉक आगामी नई फसल की आवक के समय 20 लाख गांठ का बचेगा।

बुआई में कमी के साथ ही अगस्त में बारिश की भारी कमी का असर चालू सीजन में कपास की फसल पर पड़ा है, जिस कारण इसके उत्पादन अनुमान में कमी आने की आशंका है।