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30 अप्रैल 2011

सब्जियों की किल्लत दूर करने पर हो रहा विचार

नई दिल्ली April 03, 2011
देश भर के प्रमुख शहरों में सब्जियों की किल्लत दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने सब्जियों की खेती के लिए क्लस्टर की योजना बनाई है। साथ ही हर राज्य की राजधानी या 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले दूसरे शहरों में से किसी एक में इसके भंडारण की व्यवस्था करने की योजना है।
ऐसे क्लस्टर के निर्माण से चुनिंदा शहरों में सब्जियों की मांग व आपूर्ति की समस्या दूर होगी और इस बाबत वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने साल 2011-12 के बजट में प्रस्ताव रखा है और इसके लिए 300 करोड़ रुपये का आवंटन किया है।
इस योजना के क्रियान्वयन के लिए तैयार दिशा-निर्देश के मसौदे के मुताबिक, इस कार्यक्रम के संचालन में निजी क्षेत्र की बड़ी भूमिका नहीं होगी। राज्य सरकारें शहरों की पहचान करेगी, जहां वह सब्जियों के लिए क्लस्टर स्थापित करना चाहती हों। पहचान किए गए इन शहरों में एक सर्वे किया जाएगा ताकि आपूर्ति की बाधाओं के बारे में जानकारी मिले और उस शहर के आसपास के उन इलाकों की क्षमता का आकलन किया जाएगा, जहां सब्जियों की खेती की जा सकती हो।
एक अधिकारी ने बताया कि सर्वे के आधार पर राज्य सरकारों को प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करनी होगी, जिसमें भौगोलिक व जलवायु के संबंध में सूचना के साथ-साथ सब्जियों के विकास की क्षमता और जमीन की उपलब्धता की जानकारी देनी होगी। इस रिपोर्ट में उन कदमों का भी जिक्र होगा जिसके जरिए मौजूदा बुनियादी ढांचा मसलन राज्यों में गोदामों का इस्तेमाल बेहतर तरीके से सब्जियों के भंडारण में किया जा सकता है।
अधिकारी ने बताया कि उचित कीमत पर सुरक्षित व अच्छी गुणवत्ता वाली सब्जियों की लगातार उपलब्धता प्रमुख चुनौती है। इसके लिए कई मोर्चे पर मसलन उत्पादन, कटाई के बाद, भंडारण, परिवहन, विपणन, वितरण और नीतिगत सुधार पर कदम उठाने की जरूरत है।
सरकार ने सब्जी उत्पादकों को किसान एसोसिएशन के तौर पर संगठित करने और इन समूहों को मितव्ययिता का लाभ उठाने के बारे में जानकारी देने और सार्वजनिक क्षेत्र की एजेंसियों व नगर निगमों के साथ तालमेल बिठाने की योजना है ताकि शहर के आसपास सब्जियों की खेती के लिए जमीन उपलब्ध हो जाए।
राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) इस योजना के लिए आवश्यक क्रेडिट उपलब्ध कराएगा। राज्यों के वानिकी निदेशालयों, वानिकी मिशन और सरकारें इस योजना को लागू कराने वाली प्रमुख एजेंसियां होंगी।
बढ़ेगी आपूर्ति
सब्जियों की खेती के लिए क्लस्टर बनाने की योजना, राज्यों की राजधानी या दूसरे शहरों में इसके भंडारण की होगी व्ययवस्था
सरकार ने इनके लिए बजट में 300 करोड़ रुपये का आवंटन किया है (BS hindi)

फुलकारी ने बढ़ाई खुशहाली

April 17, 2011
पंजाब में 3,000 से अधिक महिलाओं के एक स्वयंसेवी समूह ने फुलकारी को अपनी कमाई का जरिया बना लिया है। कुछ साल पहले तक पटियाला जिले के थुहा गांव की जसबीर ने सोचा भी नहीं था कि वह 40 वर्ष की उम्र में आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन पाएगी। आज प्रशिक्षित कशीदाकार के रूप में जसबीर और गांव की अन्य महिलाएं अपने परिवारों और ग्रामीणों से सम्मान पा रही हैं। जसबीर के साथ काम करने वाली सुरेश रानी और प्रतिभा रानी की हालत तो और भी खराब थी, दोनों के पति क्रमश: बिहार और हरियाणा के प्रवासी मजदूर हैं। लेकिन आज उनके पास पैन कार्ड है और वे नियमित रूप से आयकर रिटर्न जमा करती हैं। यही नहीं अब ये सभी बाकी महिलाओं को भी फुलकारी कशीदाकारी करने का प्रशिक्षण दे रही हैं। जसबीर कौर, सुरेश रानी और प्रतिभा रानी उन 3,000 महिलाओं में शामिल हैं, जो 50 स्वयंसेवी समूहों के रूप में काम कर रही हैं। इन समूहों को राज्य की पारंपरिक कढ़ाई 'फुलकारी' को मशहूर बनाने के लिए कई राष्टï्रीय और अंतरराष्टï्रीय मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है। इन ग्रामीण महिलाओं द्वारा बनाए गए हस्तशिल्प उत्पादों को मलेशिया, बहरीन और चीन की सरकारों के आमंत्रण पर वहां प्रदर्शित किया गया है। इसकी शुरुआत 1994 में पटियाला की रेखा मान ने की थी। आज रेखा और उनके साथ काम करने वाली महिलाएं फुलकारी से नए डिजाइन बनाकर उसे नए जमाने के रंग में ढाल रही हैं। पटियाला हैंडीक्राफ्ट वर्कशॉप कोऑपरेटिव सोसायटी (पीएचडब्ल्यूसीएस) ने 1997 में पंजाब सहकारी समिति के पास पंजीकरण कराया था। पंजीकरण होने के बाद राष्टï्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) और सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्योग मंत्रालय की ओर से पंजाब में ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उद्यम विकास प्रशिक्षण देने के प्रस्तावों की मानों बाढ़ सी आ गई। हकीकत यह है कि पंजाब के बैंक ऋण देने के लिए संगठित गैर सरकारी संगठन की तलाश में थे, जो मान पर जाकर खत्म हुई और उन्होंने ग्रामीण कलाकारों के लिए चलाई जा रही राज्य सरकार की योजनाओं का भरपूर लाभ उठाया।पंजाब में 2 लाख से भी अधिक महिलाएं फुलकारी की कढ़ाई करती हैं। हालांकि एक बेहतर विपणन तंत्र के अभाव में उनकी अच्छी कमाई नहीं हो पाती थी। भारत के बंटवारे के समय से ही पटियाला का अदालत बाजार इस हस्तशिल्प का मुख्य केंद्र रहा है और कलाकारों व खरीदारों को दुकानदारों की शर्त पर ही कारोबार करना पड़ता है।हालांकि पीएचडब्ल्यूसीएस से जुडऩे के बाद कशीदाकारों ने असंगठित बाजार के मुकाबले तिगुना कमाना शुरू कर दिया है। रंगों के समायोजन, डिजाइन और धागों पर लगातार शोध कर रहे डिजाइनरों ने इन कशीदाकारों को उनका काम और बेेहतर बनाने में मदद की।एक बड़ी मदद तब आई जब खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग ने 2006 में महिलाओं के इस समूह को स्फूर्ति (पारंपरिक उद्योग को पुनर्जीवित करने की योजना) के लिए चुना। इसके तहत समूह को 1 करोड़ रुपये और गांव में पंचायत की जमीन मिली । समिति गांव में एक जन सुविधा केंद्र का संचालन भी करती है। ग्रामीण महिलाओं को कशीदाकारी का प्रशिक्षण देने के साथ ही नवीनतम चलन की जानकारी भी दी जाती है। केंद्र पर मौजूद आधुनिक मशीनों की मदद से ग्रामीण उद्यमी कढ़ाई वाले परिधान भी बनाती हैं और उन्हें खुले बाजार में बेचती हैं। समिति को संस्थानों से भी थोक ऑर्डर मिलते हैं।समिति के लिए सबसे गर्व की बात यह है कि उनके डिजाइन को नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी, अहमदाबाद और विवको (पंजाब स्टेट हैंडलूम वीवर्स एपेक्स को-ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड) में भी स्वीकार किये जाते हैं। स्फूर्ति फुलकारी क्लस्टर परियोजना की प्रमुख मान बताती हैं, 'हमने विवको के लिए पर्दे और कुशन कवर के डिजाइन बनाए हैं और ये उत्पाद अंतरराष्टï्रीय बाजार के लिए थे।'पंजाब का फुलकारी क्लस्टर 2007 के बाद से देश में क्लस्टर विकास कार्यक्रम के तहत बनाए गए 79 क्लस्टरों में से एक है। बटुए, फाइल फोल्डर्स, कुशन कवर्स, पर्दे, हाथ के पंखे और मोबाइल कवर पर भी कढ़ाई कर क्लस्टर ने अपने उत्पाद पोर्टफोलियो का विस्तार किया है। दरअसल अंतरराष्टï्रीय बाजारों में इन उत्पादों की भी काफी मांग है।मान ने बताया, 'हम निर्यात करने वाली दूसरी एजेंसियों के लिए भी डिजाइन बना रहे थे लेकिन अब हमने निर्यात भी करने का फैसला किया है। हमारी वेबसाइट पर इस बारे में काफी प्रस्ताव आ रहे हैं और हम सौदों के लिए बात कर रहे हैं।' इस क्लस्टर ने न सिर्फ लुप्त होती पारंपरिक कला को फलने-फूलने का मौका दिया है बल्कि ग्रामीण महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने में मदद की है। अब यहां की महिलाएं केंद्र सरकार की स्वास्थ्य परियोजनाओं और बीमा कार्यक्रमों का हिस्सा बन गई हैं। (BS Hindi)

आठ लाख किसानों को क्रेडिट कार्ड

जयपुर । राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने चालू वित्त वर्ष में आठ लाख किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड जारी करने का लक्ष्य रखा है। बैंक इस वर्ष 29 हजार 723 करोड़ की ऋण सम्भावनाओं का आंकलन कर रहा है, जिसमें 24 हजार 563 करोड़ रूपए अल्पावधि ऋण और 5160 करोड़ रूपए दीर्घावधि ऋण के रूप में जारी किए जाने की सम्भावना है। इस आधार पर नाबार्ड ने राज्य सरकार और बैंकों को वित्तीय वष्ाü में कृçष्ा के लिए 27 हजार करोड़ रूपए के ऋण जारी करने का लक्ष्य निर्घारित किया है।नाबार्ड के राजस्थान कार्यालय के क्षेत्रीय प्रभारी के. मुरलीधर राव ने बताया कि राज्य में वर्तमान में करीब 40 लाख किसान क्रेडिट कार्ड जारी हो चुके हैं। अभी 16 लाख कार्ड जारी होने की और सम्भावनाएं हैं। इनमें से आठ लाख इस वित्त वष्ाü में और शेष्ा आठ लाख अगले वित्त वष्ाü में जारी किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि वित्त वष्ाü 2010-11 में नाबार्ड ने 5168.72 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान की। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाएं विकसित करने के लिए नाबार्ड ने ग्रामीण आधारभूत संरचना संवर्घन निधि (आरआईडीएफ) योजना में गत वित्त वष्ाü में 1300.23 करोड़ के ऋण स्वीकृत कर करीब एक हजार करोड़ के ऋण वितरित किए हैं।9 जो गत वष्ाü की तुलना में 18 फीसदी अधिक है।उन्होंने बताया कि किसानों को सात प्रतिशत वाçष्ाüक ब्याज दर पर सस्ते फसली ऋण उपलब्ध कराने के लिए नाबार्ड ने सहकारी व क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को ब्याज सहायता प्रदान की है। इसके अलावा एनजीओ को विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं के लिए किसानों को प्रेरित करने के लिए अनुदान व सहायता दी जा रही है। (patrika)

नाबार्ड सहकारी बैंकों को सस्ती ब्याज दर पर पुनर्भरण उपलब्ध कराएं

नई दिल्ली। राजस्थान के सहकारिता मंत्राी परसादी लाल मीणा ने केन्द्र सरकार से मांग की है कि किसानों को सस्ती ब्याज दर पर सहकारी कर्जें उपलब्ध कराने के लिए नाबार्ड सहकारी बैंकों को 2.5 (ढ़ाई) प्रतिशत की ब्याज दर पर पुनर्भरण सुविधा उपलब्ध करावें। उन्होंने वैद्यनाथन पैकेज के तहत केन्द्र व नाबार्ड के बीच हुए सहमति पत्रा के अनुसार वैंचमार्क बिन्दुओं के क्रियान्वयन की चर्चा करते हुए राज्य की ग्राम सेवा सहकारी समितियों को जारी होने वाली शेष 25 प्रतिशत राशि 105 करोड़ रु. एवं सहकारी बैंकों के लिए 11 करोड़ 51 लाख रुपए शीघ्र जारी कराने का आग्रह किया। मीणा नई दिल्ली में बुधवार को केन्द्रीय कृषि मंत्राी शरद पवार की अध्यक्षता में राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान संस्थान में आयोजित राज्यों के सहकारिता मंत्रियों के सम्मेलन में बोल रहे थे। सम्मेलन में सहकारिता मंत्राी मीणा के साथ राजस्थान के प्रमुख शासन सचिव सहकारिता तपेश पवार एवं रजिस्ट्रार प्रेम सिंह मेहरा भी हिस्सा ले रहे थे। उन्होंने कहा कि सहकारी बैंकों की काश्तकारों तक सीधी पहुंच होने से लघु, सीमांत एवं जरुरतमंद किसानों सहित अधिकांश किसानों की ऋण जरुरतों को सहकारी बैंक ही पूरा करते हैं। राज्य में सहकारी बैंकों द्वारा 34 लाख 63 हजार काश्तकारों को किसान क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराए जा चुके हैं जो प्रदेश में वाणिज्यिक, ग्रामीण एवं निजी बैंकों द्वारा कुल वितरित किसान क्रेडिट कार्डों में 60 प्रतिशत से भी अधिक है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में पिछले वर्ष 7 लाख से अधिक नए काश्तकारों सहित 22 लाख किसानों को रेकार्ड 5 हजार 500 करोड़ रु. के फसली सहकारी ऋण वितरित किए गए हैं, इस वर्ष ऋण सुविधा का और अधिक विस्तार करते हुए 6 हजार करोड़ रु. के फसली ऋण वितरित किए जाएंगे। समय पर ऋण चुकाने वाले काश्तकारों को पांच प्रतिशत और आगामी वर्ष चार प्रतिशत से ही वसूली की जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने आदिवासी काश्तकारों को सहकारी फसली ऋण पर दो प्रतिशत का अतिरिक्त अनुदान देते हुए केवल दो प्रतिशत ब्याज दर पर फसली सहकारी ऋण उपलब्ध कराने का निर्णय किया है। सहकारी बैंकों के सीमित वित्तीय संसाधनों की चर्चा करते हुए सहकारिता मंत्राी मीणा ने कहा कि काश्तकारों तक अधिक से अधिक सहकारी ऋण सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सहकारी बैंकों के सहयोग के लिए केन्द्र सरकार व नाबार्ड को आगे आना होगा। उन्हांेने सहकारी ऋणों के वितरण में नाबार्ड की भागीदारी को 45 फीसदी से बढ़ाकर 60 फीसदी करने का करते हुए ब्याज अनुदान को भी 3 प्रतिशत करने की मांग की। मीणा ने सहकारी ऋणों पर ब्याज अनुदान की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए इस सुविधा का लाभ काश्तकारों तक प्रभावी तरीके से पंहुचाने और बैंकां की तरलता बनाए रखने के लिए राजस्थान की अनुमानित अनुदान राशि 75 करोड़ रु. का राज्य अपेक्स बैंक स्तर पर रिवाल्विंग फण्ड बनाने या गत वर्ष के आधार पर 75 प्रतिशत राशि अग्रिम उपलब्ध कराने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि दीर्घकालीन सहकारी साख संस्थाओं द्वारा वितरित फसली ऋणों पर भी 3 प्रतिशत ब्याज अनुदान राशि उपलब्ध कराई जावें। सहकारिता मंत्राी परसादी लाल मीणा ने वैद्यनाथन पैकेज के एमओयू की चर्चा करते हुए कहा कि पेक्स के साथ ही सहकारी बैंकों का एक साथ कम्प्यूटरीकरण पर जोर देते हुए कहा कि इससे सहकारी साख संस्थाएं भी वाणिज्यिक बैंकांे की तरह कोर बैंकिंग, ऑन लाईन बैंकिंग सुविधाआंे से जुड़ सकेगी। उन्होंने सुदूर ग्रामीण इलाकों में रसोई गैस के वितरण का कार्य पेक्स को दिलाने का सुझाव दिया। उन्होंने बताया कि राजस्थान में प्राथमिक स्तर से शीर्ष स्तर तक की अधिकांश प्रमुख सहकारी संस्थाआंे के चुनाव कराकर लोकतांत्रिक व्यवस्था कायम करते हुए संचालक मण्डल को अधिकार संपन्न बनाया गया हैं। 40 फीसदी नरेगा श्रमिकों के खातों का संधारण सहकारी बैंकों द्वारा किया जा रहा है। आदिवासी जिलों में 100 नई लेम्प्स खोलने का निर्णय लिया गया है। महिला सहकारी समितियों द्वारा मिड डे मील, लगभग 500 महिला समितियांे द्वारा उपभोक्ता सामग्री एवं खाद बीज वितरण केन्द्रों का संचालन किया जा रहा है। राजस्थान सरकार सहकारिता को खासतौर से ग्रामीण विकास का प्रमुख जरिया बनाने के लिए प्रयासरत है और सहकारी सुविधाओं के विस्तार व व्यवस्था के सरलीकरण किया गया है। (Press Not)

महंगा दूध खरीदने के लिए रहें तैयार

अगले ही महीने से एक से दो रुपये प्रति लीटर बढ़ सकते हैं दाम आर.एस.राणा/नरेश बातिश/समरजीत सिंह नई दिल्ली/लुधियाना/जयपुर पहले से ही दूध की ऊंची कीमतों से परेशान उपभोक्ताओं को मई महीने में ज्यादा दाम चुकाने पड़ सकते हैं। मई महीने में दूध की कीमतों में एक से दो रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी होने की संभावना है। दरअसल गर्मियों का सीजन शुरू होते ही दूध के उत्पादन में कमी आनी शुरू हो गई है, जबकि कंपनियों ने दूध खरीद के दाम बढ़ा दिए हैं। पंजाब और जयपुर में भी कमोबेश यही हाल है। पिछले दो साल में कंपनियां दूध की कीमतों में 4 से 10 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर चुकी हैं। 2009 में फूल क्रीम दूध का भाव दिल्ली में 24 रुपये प्रति लीटर था, जबकि मदर डेयरी के फूल क्रीम दूध का भाव इस समय 33 रुपये और अमूल के फूल क्रीम दूध का भाव 34 रुपये प्रति लीटर है। इसी तरह टोंड दूध के दाम पिछले दो साल में 5 रुपये और डबल टोंड दूध के दाम 4 रुपये प्रति लीटर बढ़ चुके हैं। फिलहाल टोंड दूध का भाव दिल्ली में 25 से 26 रुपये और डबल टोंड का मूल्य 22 से 23 रुपये प्रति लीटर है। सूत्रों के अनुसार फूल क्रीम दूध की कीमतों में करीब दो रुपये और टोंड तथा डबल टोंड दूध की कीमतों में एक रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी होने की संभावना है। गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर आर एस सोढी ने बिजनेस भास्कर को बताया कि दूध उत्पादन का लीन सीजन शुरू होने के कारण दूध की खरीद कम हो गई है। इस समय कंपनी की दैनिक खरीद 96 से 97 लाख लीटर की है, जबकि पीक सीजन के समय 125-126 लाख लीटर की खरीद हो रही थी। उन्होंने बताया कि कंपनी पूरे देश में 70 लाख लीटर फ्रेश दूध की दैनिक सप्लाई करती है। दूध का खरीद भाव बढ़कर 410-415 रुपये प्रति किलो फैट हो गया है, जबकि पिछले साल इसका भाव 340-350 रुपये प्रति किलो फैट था। सोढी ने बताया कि दूध के खरीद दाम बढ़ चुके हैं, इसलिए कंपनियों पर बिक्री भाव बढ़ाने का दबाव बना हुआ है। दिल्ली में अमूल फूल क्रीम दूध का दाम 34 रुपये प्रति लीटर है, जबकि किसानों से सात फीसदी फैट दूध की खरीद 29.56 रुपये प्रति लीटर के आधार पर की जा रही है। इसके अलावा किसानों को एक-दो रुपये प्रति लीटर का बोनस भी दिया जाता है। दिल्ली में अमूल दूध की पैकिंग में सप्लाई करीब 17.5 लाख लीटर दैनिक की है। हरियाणा डेयरी को-ऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड के डायरेक्टर (मार्केटिंग) आर के चुकुल खरीद 5.50 लाख लीटर की हो रही है, जबकि मई-जून में खरीद कम होकर 3.5 लाख लीटर रहने की संभावना है। कंपनी इस समय 6.5 फीसदी फैट दूध का दाम किसानों को 24.50 रुपये प्रति लीटर के आधार पर दे रही है। इसमें पिछले सप्ताह 66 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। पारस डेयरी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि गर्मियों का सीजन शुरू होने के कारण दूध की उपलब्धता कम हो गई है, जबकि दूध के खरीद दाम बढ़ गए हैं। ऐसे में कंपनियों पर दूध के दाम बढ़ाने का दबाव बना हुआ है। गर्मियों के इस सीजन में दूध की कमी आड़े नहीं आने देने के लिए पंजाब की निजी इकाइयों ने जहां पहले ही दूध पाउडर का भारी-भरकम स्टॉक कर रखा है, वहीं सहकारी दूध एजेंसी मिल्कफेड पंजाब दूध खरीद बढ़ाने के लिए इसके खरीद रेट बढ़ाने को तैयार है। इससे निजी कंपनियों पर भी दूध के खरीद रेट बढऩे का दबाव पड़ सकता है। मिल्कफेड पंजाब के चेयरमैन जीएस बब्बेहाली ने बताया कि दूध के खरीद रेट में कितनी बढ़ोतरी होगी, इस सबंध में अभी फैसला किया जाना बाकी है।मिल्कफेड अधिकारियों के मुताबिक दूध की कमी दूर करने के लिए हाल में करीब 1000 टन दूध पाउडर खरीदने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। पंजाब मिल्क प्रोसेसिंग इंडस्ट्री एसोसिएशन के महासचिव एवं हरमन मिल्कफूड के एमडी रविंदर गर्ग के मुताबिक निजी कंपनियां पहले से ही किसानों को 4 रुपये प्रति फैट के लिहाज से भुगतान कर रही हैं। कंपनियां 28 रुपये के करीब प्रति लीटर दूध का भुगतान कर रही हैं जिसमें 2 रुपये प्रति लीटर का ट्रांसपोर्टेशन खर्च भी शामिल है। (Business Bhaskar)

Nabard’s rural infra loan disbursals fall in FY11

During fiscal 2010-11, Nabard could disburse only Rs12,060 crore, lower than Rs12,388 crore in the previous fiscal year
Mumbai: National Bank for Agriculture of Rural Development, or Nabard, has seen a fall in its disbursements of rural infrastructure loans due to capacity constraints by state governments to implement projects in the fiscal year ending 31 March 2011, despite higher sanctions.
During fiscal 2010-11, Nabard sanctioned project loans worth Rs18,315 crore as against Rs15,630 crore in the previous fiscal but could disburse only Rs12,060 crore, lower than Rs12,388 crore in the previous fiscal year.
“Disbursals from RIDF has been stagnated due to lack of capacity by the state governments to implement infrastructure projects. We are looking at ways on how to address this problem,” Prakash Bakshi, executive director of Nabard, said.
Nabard is the sectoral regulator for cooperative banks and regional rural banks (RRBs). The bank has been envisaged as the regulator for smaller micro finance institutions (MFIs) in the proposed micro finance bill.
During 2010-11, Nabard posted a 16.7% rise in its total loan book to Rs1,59,147 crore as against Rs1,36,292 crore in the year-ago period while crop loan assistance to cooperative banks and RRBs stood at Rs33,400 crore during 2010-11 as against Rs24,216 crore in the previous fiscal.
The bank plans to increase crop loan disbursals to Rs40,000 crore in the current fiscal, Bakshi said.
Under investment credit, Nabard offered loans worth Rs13,500 crore during 2009-10 for agriculture and allied sectors, non-farm sector activities and services sector to commercial banks, RRBs and cooperative banks as against Rs12,036 crore in 2009-10, a release said.
Under the self help group (SHG) bank-linkage programme, banks have so far cumulatively funded 50 lakh SHGs as on 31 March 2011, while total number of SHGs opened a savings account with banks stood at 70 lakh. (Mint)

चांदी में खुदरा निवेशकों की बढ़ी भागीदारी

कोलकाता April 28, 2011
आप चाहें तो गुरुवार का दिन चांदी के नाम कर सकते हैं, जब 27 मार्च 1980 को हंट बंधुओं द्वारा की गई कालाबाजारी के चलते इसकी कीमतें धराशायी हो गई थीं या फिर इसे एक बेहतरीन मौके के रूप में देख सकते हैं क्योंकि खुदरा निवेशकों के बीच चांदी सबसे ज्यादा लोकप्रिय जिंसों में से एक के रूप में मशहूर हो गई है। पिछले एक साल में चांदी की कीमतें 140 फीसदी से ज्यादा बढ़ी हैं और अप्रैल 2010 के 27000 रुपये प्रति किलोग्राम के मुकाबले यह अप्रैल 2011 में 66,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई है।इसके अलावा वैश्विक संकेतों मसलन कमजोर डॉलर और अमेरिकी सरकार द्वारा जारी मात्रात्मक सहजता (नकदी झोंकने) ने घरेलू बाजार में चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी की है। बुधवार को फेडरल रिजर्व के चेयरमैन बेन बर्नान्के ने संकेत दिया था कि अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए अमेरिकी केंद्रीय बैंक मौद्रिक पैकेज जारी रखेगा और ब्याज दरों को शून्य के करीब रखेगा। इसके परिणामस्वरूप वायदा बाजार में गुरुवार को चांदी में 3.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और यह 71,290 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई।उच्च प्रतिफल से आकर्षित होकर खुदरा निवेशक चांदी में जमकर खरीदारी कर रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि इसकी कीमतें और बढ़ेंगी। इस समय न सिर्फ शेयर बाजार में निवेश करने वाले बल्कि वेतनभोगी वर्ग भी चांदी में आई तेजी में हाथ आजमा रहे हैं। चांदी के डीलरों का कहना है कि पिछले एक महीने में सिल्वर बार में 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। पंरपरागत रूप से ग्रामीण इलाकों में मौजूद लोग सिल्वर बार के सबसे बड़े उपभोक्ता होते हैं, लेकिन इस समय शहरी बाजार इस धातु की मांग बढ़ा रहा है।मई 2010 में एचडीएफसी बैंक ने 50 ग्राम वाले सिल्वर बार की बिक्री शुरू की थी और इस महीने बैंक ने 95 किलोग्राम से ज्यादा चांदी की बिक्री की। (BS Hindi)