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01 दिसंबर 2019

रबी फसलों की बुआई 338 लाख हेक्टेयर के पार, दलहन की बुआई पिछे

आर एस राणा
नई दिल्ली। रबी फसलों की बुआई में तो तेजी आई है, लेकिन कई राज्यों में अक्टूबर और नवंबर में हुई बेमौसम बारिश से दालों की बुआई पिछे चल रही है। रबी फसलों की बुआई 338.20 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल के 339.75 लाख हेक्टेयर के लगभग बराबर ही है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार रबी की प्रमुख फसल गेहूं की बुआई बढ़कर चालू सीजन में बढ़कर 150.74 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 141.25 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। चालू सीजन में दलहन की बुआई 10 फीसदी पिछड़कर 89.23 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 99.15 लाख हेक्टेयर में दालों की बुआई हो चुकी थी। रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई पिछले साल के 68.40 लाख हेक्टेयर से घटकर 61.59 लाख हेक्टयेर में ही हुई है। मसूर की बुआई चालू रबी में 10.29 लाख हेक्टेयर में और मटर की 6.37 लाख हेक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 11.88 और 6.68 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।
मोटे अनाजों में ज्वार और जौ की बुआई बढ़ी
मोटे अनाजों की बुआई चालू रबी में 29.75 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई 28.27 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। मोटे अनाजों में ज्वार की बुआई चालू रबी में बढ़कर 18.42 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 16.71 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हुई थी। मक्का की बुआई चालू रबी में 6.30 लाख हेक्टेयर और जौ की बुआई 4.61 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 7.15 और 4.16 लाख हेक्टेयर में हुई थी।
तिलहन की बुआई में आई कमी
रबी तिलहन की बुआई चालू रबी में 60.31 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई 63.69 लाख हेक्टेयर हो चुकी थी। रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों की बुआई 55.40 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुआई 55.58 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। मूंगफली की बुआई 1.92 लाख हेक्टेयर में और अलसी की बुआई 1.75 लाख हेक्टेयर तथा सनफ्लावर की बुआई 60 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है।..........  आर एस राणा

चालू पेराई सीजन में चीनी उत्पादन 273 लाख टन होने का अनुमान : सरकार

आर एस राणा
नई दिल्ली। पहली अक्टूबर से शुरू चालू पेराई सीजन 2019-20 में देश में चीनी का उत्पादन 273 लाख टन होने का अनुमान है जोकि पिछले पेराई सीजन 331 लाख टन से कम है। उत्पादन में कमी जरुर आने का अनुमान है लेकिन पिछले पेराई सीजन का बकाया स्टॉक ज्यादा होने के कारण कुल उपलब्धता ज्यादा है।
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री दानवे रावसाहब दादाराव ने राज्यसभा में बताया कि महाराष्ट्र में सूखे और बाढ़ से गन्ने की फसल को भारी नुकसान हुआ है जिस कारण राज्य में चीनी का उत्पादन पिछले साल के 107 लाख टन की तुलना में चालू पेराई सीजन में 58.3 लाख टन ही होने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि चालू पेराई सीजन में देश में चीनी का उत्पादन 273 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पहली अक्टूबर 2019 को 140 लाख टन का बकाया स्टॉक बचा हुआ था। अत: चालू पेराई सीजन में चीनी की कुल उपलब्धता 413 लाख टन की होगी जबकि देश में चीनी की सालाना खपत 260 लाख टन की ही होती है।
15 नवंबर तक चीनी उत्पादन में आई गिरावट
उन्होंने बताया कि चालू पेराई सीजन में चीनी मिलों में नकदी की स्थिति में सुधार लाने, तोकि गन्ना किसानों को समय पर भुगतान किया जा सके, इसके लिए केंद्र सरकार ने 40 लाख टन चीनी का बफर स्टॉक बनाने के साथ ही 60 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति भी दी हुई है। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के अनुसार चालू पेराई सीजन में चीनी का उत्पादन 260 लाख टन होने का ही होने का अनुमान है। चालू पेराई सीजन में 15 नवंबर तक देश में चीनी का उत्पादन 63.8 फीसदी कम होकर कुल उत्पादन 4.85 लाख टन का ही हुआ है जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में 13.38 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका था। ..... आर एस राणा

कपास का उत्पादन 9 फीसदी बढ़ने का अनुमान, 50 लाख गांठ निर्यात की उम्मीद-सीएबी

आर एस राणा
नई दिल्ली। पहली अक्टूबर से शुरू हुए चालू फसल सीजन 2019-20 में कपास का उत्पादन 9 फीसदी बढ़कर 360 लाख गांठ (एक गांठ-170 किलो। होने का अनुमान है। साथ ही कपास का निर्यात बढ़कर 50 लाख गांठ और आयात कम होकर 25 लाख गांठ ही होने की उम्मीद है।
टेक्सटाइल कमिश्नर की अध्यक्षता में हुई कॉटन एडवाइजरी बोर्ड (सीएबी) की पहली बैठक में फसल सीजन 2019-20 में देश में कपास का उत्पादन 360 लाख गांठ होने का अनुमान जारी किया है जोकि पिछले साल की तुलना में 9.09 फीसदी अधिक है। पिछले साल देश में 330 लाख गांठ कपास का उत्पादन हुआ था। प्रमुख उत्पादक राज्य गुजरात में चालू फसल सीजन में कपास का उत्पादन बढ़कर 95 लाख गांठ होने का अनुमान है जबकि पिछले साल राज्य में 87.50 लाख गांठ का ही उत्पादन हुआ था। महाराष्ट्र में कपास का उत्पादन 82 लाख गांठ और तेलंगाना में 53 लाख गांठ होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इन राज्यों में क्रमश: 75.50 और 43 लाख गांठ का उत्पादन हुआ था।
राजस्थान, हरियाणा और मध्य प्रदेश में उत्पादन अनुमान कम
अन्य राज्यों राजस्थान में कपास का उत्पादन 25 लाख गांठ, हरियाणा में 22 लाख गांठ और पंजाब में 13 लाख गांठ होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इन राज्यों में क्रमश: 26 लाख गांठ, 23 लाख गांठ और 10 लाख गांठ का ही उत्पादन हुआ था। भारी बारिश और बाढ़ से मध्य प्रदेश में चालू फसल सीजन में कपास का उत्पादन घटकर 20 लाख गांठ ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल राज्य में 24 लाख गांठ का उत्पादन हुआ था। आंध्रप्रदेश में चालू सीजन में 20 लाख गांठ, कर्नाटक में 18 लाख गांठ और तमिलनाडु में 6 लाख गांठ तथा ओडिशा में 4 लाख गांठ के उत्पादन का अनुमान है।
आयात कम होने एवं निर्यात बढ़ने का अनुमान
सीएबी के अनुसार फसल सीजन 2019-20 में कपास का निर्यात बढ़कर 50 लाख गांठ होने का अनुमान है जबकि पिछले साल केवल 44 लाख गांठ का ही निर्यात हुआ था। कपास का आयात पिछले साल के 31 लाख गांठ से घटकर 25 लाख गांठ ही होने का अनुमान है। सीएबी के अनुसार के चालू सीजन के आरंभ में पहली अक्टूबर 2019 को कपास का बकाया स्टॉक 44.41 लाख गांठ का बचा हुआ था जबकि पहली अक्टूबर 2020 में शुरू होने वाले सीजन के आरंभ में बकाया 48.41 लाख गांठ का स्टॉक बचने का अनुमान है। .... आर एस राणा

दलहन आयात कोटा बढ़ाने से दालों की कीमतों पर दबाव, खाद्य तेलों में सुधार


-चालू रबी में दालों की बुआई पिछे चल रही है, हालांकि व्यापारियों का मानना है कि आगे बुआई में तेजी आयेगी। कई राज्यों में अक्टूबर और नवंबर मेें बेमौसम बारिश से बुआई पिछड़ी है।

-रबी दलहन फसल की बुआई करीब 19 फीसदी पिछड़ गई है। रबी दलहन की बुआई 19.27 फीसदी पिछड़कर 71.26 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल अभी तक 88.27 लाख हेक्टेयर बुआई हो चुकी थी। चना की बुआई चालू रबी में पिछले साल के 61.91 लाख हेक्टेयर से घटकर 48.35 लाख हेक्टेयर हो हुई है।

-दलहन की बुआई में आई से केंद्र सरकार दलहन आयात का कोटा बढ़ा सकती है, इस तरह से खबर बाजार में चलाई जा रही है, जिससे दालों की कीमतों पर दबाव है।
-जानकारों के अनुसार सरकार दलहन आयात का कोटा बढ़ाती है, तो केवल उड़द और मूंग का आयात कोटा ही बढ़ेगा।

-खाद्य तेलों के आयात पर केंद्र सरकार सख्ती कर सकती है, माना जा रहा है कि रिफाइंड खाद्य तेलों के आयात को फ्री कैटेगरी से हटाकर प्रतिबंधित श्रेणी में डाल सकती है, हालांकि क्रुड पॉम तेल को फ्री कैटेगरी में ही रखने का प्रस्ताव है। उद्योग ने क्रुड और रिफाइंड तेल के आयात शुल्क अंतर को भी बढ़ाने की मांग की है, अगर ऐसा होता है खाद्य तेलों की कीमतों में सुधार बन सकता है। 

सीसीआई की कपास खरीद की गति धीमी, किसान एमएसपी से नीचे बेचने को मजबूर

आर एस राणा
नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2019 से शुरू हुए चालू खरीफ विपणन सीजन में कॉटन कारपोरेशन आफ इंडिया (सीसीआई) ने समर्थन मूल्य पर मात्र दो लाख गांठ (एक गांठ-170 किलो) कपास की खरीद ही की है जोकि अभी तक हुई कुल आवक का मात्र 6 फीसदी है। सरकारी खरीद के अभाव में किसानों को समर्थन मूल्य से 400 से 500 रुपये नीचे दाम पर कपास बेचनी पड़ रही है, जिससे उन्हें भारी घाटा उठाना पड़ रहा है।
सीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चालू सीजन में 24 नवंबर तक उत्पादक मंडियों में 32 लाख गांठ कपास की आवक हो चुकी है जिसमें से निगम ने केवल दो लाख गांठ की खरीद ही की है। उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा खरीद तेलंगाना से राज्य सरकार की एजेंसी के साथ 1.20 लाख गांठ कपास खरीदी है, जबकि अन्य राज्यों में 22 हजार गाांठ कपास की खरीद पंजाब से, 19 हजार गांठ राजस्थान से, 13 हजार गांठ गुजरात से और 12 हजार गांठ की खरीद हरियाणा से की है। इसके अलावा कर्नाटक से भी थोड़ी खरीद की गई है। उन्होंने बताया कि उत्पादक मंडियों में आ रही कपास में नमी की मात्रा ज्यादा आ रही है जिस कारण खरीद सीमित मात्रा में ही की जा रही है। पिछले साल 24 नवंबर तक उत्पादक मंडियों में 36 लाख गांठ कपास की आवक हो चुकी थी। पिछले फसल सीजन में निगम ने एमएसपी पर 10.70 लाख गांठ कपास की खरीद की थी, जिसमें से 1.70 लाख गांठ बेची गई है।
व्यापारियों को नीचे दाम पर बेच रहे किसान कपास
महाराष्ट्र के जिला परभणी के सोनपेठ के कपास किसान सुधीर बिंदू ने बताया कि सीसीआई खरीद नाममात्र की ही कर रही है जिस कारण व्यापारियों को 4,900 से 5,100 रुपये प्रति क्विंटल के दाम पर कपास बेचनी पड़ रही है जबकि केंद्र सरकार ने चालू खरीफ विपणन सीजन 2019-20 के लिए मीडियम स्टेपल कपास का समर्थन मूल्य 5,255 रुपये और लॉन्ग स्टेपल का 5,550 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। सीसीआई के एक अधिकारी के अनुसार निगम ने 8 फीसदी नमी यूक्त कपास की खरीद 5,550 रुपये प्रति क्विंटल की दर से कर रही है, तथा 12 फीसदी नमी युक्त कपास की खरीद निगम 5,328 रुपये प्रति क्विंटल की दर से कर रही है। इससे ज्यादा नमी होने पर निगम खरीद नहीं कर रही है।
विश्व बाजार में कीमतें नीची होने से निर्यात सौदे कम
राजस्थान की अलवर मंडी के कपास के थोक कारोबारी ने बताया कि उत्पादक मंडियों में कपास के भाव 4,950 से 5,200 रुपये प्रति क्विंटल (क्वालिटी के अनुसार) चल रहे हैं तथा आगे कपास की दैनिक आवक बढ़ने का अनुमान है। विश्व बाजार में कपास दाम नीचे बने हुए हैं, जिस कारण निर्यात सौदे भी सीमित मात्रा में ही हो रहे हैं। न्यूयार्क कॉटन के दिसंबर वायदा में कपास के भाव 27 नवंबर को 64.91 सेंट प्रति पाउंड रहे, जबकि 18 अक्टूबर को इसके भाव 64.99 सेंट प्रति पाउंड थे। उन्होंने बताया कि बेमौसम बारिश से महाराष्ट्र और गुजरात में कपास की फसल की आवक में देरी हुई है, साथ ही क्वालिटी भी प्रभावित हुई है।
कपास का उत्पादन अनुमान ज्यादा
कृषि मंत्रालय के पहले आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2019-20 में कपास का उत्पादन 322.67 लाख गांठ होने का अनुमान है जबकि पिछले साल 287.08 लाख गांठ का उत्पादन हुआ था। कपास की बुआई चालू खरीफ में 127.67 लाख हेक्टेयर में हुई थी, जोकि इसके पिछले साल के 121.05 लाख हेक्टेयर से ज्यादा थी। उद्योग के अनुसार चालू फसल सीजन में कपास का उत्पादन 13.62 फीसदी बढ़कर 354.50 लाख गांठ होने का अनुमान है।.......... आर एस राणा

पहली छमाही में दलहन आयात 38 फीसदी बढ़ा, रोक के बावजूद हो रहा है उड़द आयात

आर एस राणा
नई दिल्ली। किसानों को मूंग न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे दाम पर बेचनी पड़ रही है, इसके बावजूद भी चालू वित्त वर्ष 2019-20 की पहली छमाही अप्रैल से सितंबर में दालों का कुल आयात 38.13 फीसदी बढ़ गया। अक्टूबर से उड़द के आयात पर रोक लगी हुई, लेकिन हाईकोर्ट से स्टे आर्डर लेकर आयातक आयात कर रहे हैं।
केंद्र सरकार ने चालू खरीफ विपणन सीजन 2019-20 के लिए मूंग का समर्थन मूल्य 7,050 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है जबकि उत्पादक मंडियों में किसान 6,600 से 6,700 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर मूंग बेचने को मजबूर हैं। सार्वजनिक कंपनी नेफेड मूंग की समर्थन मूल्य पर खरीद तो कर रही है लेकिन अभी 22 नवंबर तक केवल 36,300 टन मूंग की खरीद ही एमएसपी पर हुई है जबकि चालू खरीफ में उत्पादन 14.2 लाख टन होने का अनुमान है। अत: समर्थन मूल्य पर खरीद नाममात्र की ही हो रही है। मूंग के अलावा मंडियों में चना, मसूर और अरहर के भाव भी समर्थन मूल्य से नीचे बने हुए हैं।
स्टे आर्डर लेकर कर रहे हैं उड़द का आयात
उड़द के भाव तो मंडियों में समर्थन मूल्य से उपर बने हुए हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2019-20 में अक्टूबर तक डेढ़ लाख टन उड़द के आयात की अनुमति दी थी, जबकि अप्रैल से अक्टूबर के दौरान ही 1.56 लाख टन उड़द का आयात हो चुका है। सूत्रों के अनुसार राजस्थान के आयातकों ने हाईकोर्ट से उड़द आयात के लिए स्टे आर्डर लिया है, अत: करीब 2,000 कंटेनर (एक कंटेनर-24 टन उड़द) जल्द ही मुंबई और चैन्नई बंदरगाह पर पहुंचने वाली हैं।
अप्रैल से सितंबर के दौरान 14.78 लाख टन दालों का हो चुका है आयात
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2019-20 की पहली छमाही अप्रैल से सितंबर के दौरान 14.78 लाख टन होने का आयात हो चुका है जोकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 38.13 फीसदी ज्यादा है। पिछले वित्त वर्ष 2018-19 में इस दौरान 10.70 लाख टन दालों का ही आयात हुआ था। दिल्ली के एक दलहन कारोबारी ने कहा कि केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष में उड़द, मूंग, अरहर और मटर के आयात की अनुमति केवल दाल मिलर्स को ही दी थी, लेकिन आयातित दालें खुले बाजार में बिक रही है। उन्होंने बताया कि लेमन अरहर का भाव मुंबई में 5,000 से 5,100 रुपये, उड़द एसक्यू का भाव 7,400 से 7,500 रुपये तथा एफएक्यू के व्यापार 6,400 से 6,500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हो रहे हैं।
खरीफ में दालों का उत्पादन अनुमान कम
केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2019-20 के लिए डेढ़ लाख टन उड़द, डेढ़ लाख टन मूंग और डेढ़ लाख टन ही मटर के आयात की अनुमति दी थी, तथा आयातकों को आयात भी 31 अक्टूबर तक ही करना था। इसके अलावा सरकार ने मसूर के आयात पर 30 फीसदी आयात शुल्क और चना के आयात पर 60 फीसदी का आयात शुल्क लगा रखा है। कृषि मंत्रालय के अ
नुसार फसल सीजन 2018-19 में खरीफ में दालों का उत्पादन घटकर 82.3 लाख टन ही होने का अनुमान है जोकि इसके पिछले साल के 85.9 लाख टन से कम है। अरहर की नई फसल की आवक उत्पादक मंडियों में दिसंबर में बढ़ेगी, जबकि अरहर के दाम मंडियों ममें 5,500 से 5,600 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं।.... आर एस राणा

लाइसेंस मिलने के डेढ़ महीने में ही गेहूं का एचडी 3226 बीज बेचने लगीं कंपनियां

आर एस राणा
नई दिल्ली। किसानों के खेत में गेहूं की फसल भले ही 142 से 150 दिन में पककर तैयार होती है, लेकिन बीज कंपनियों का कमाल देखिए 30 अगस्त 2019 को कंपनियों को गेहूं की नई किस्म एचडी 3226 (पूसा यशस्वी) का बीज तैयार करने के लिए लाइसेंस मिला, और डेढ़ महीने दिन बाद ही कंपनियों का बीज मार्केट में आ गया, वह भी अन्य बीजों से करीब दोगुने दाम पर।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने देश में विकसित अब तक के सबसे अधिक पौष्टिक गेहूं एचडी 3226 (पूसा यशस्वी) का बीज तैयार करने के लिए बीज उत्पादक कंपनियों को 30 अगस्त 2019 को लाइसेंस जारी किया था। बीज कंपनियों को 100 किलो फाउंडेशन बीज दिया गया था जिससे कंपनियां बीज तैयार करके अगले साल रबी सीजन में किसानों को बीज उपलब्ध करा सकें। लेकिन हरियाणा के कई जिलों में कपंनियों ने अक्टूबर 2019 से ही इस बीज की बिक्री 20 किलो ग्राम के पैकेट में शुरू कर दी। प्राइवेट बीज विक्रेता किसानों को यह बीज 900 रुपये प्रति 20 किलो की दर से बेच रहे हैं जबकि अन्य किस्म के बीज 1,180 से 1,200 रुपये में 40 किलो मिल रहे हैं।
प्राइवेट बीज विक्रेता 20 किलो की पैकिंग 900 रुपये में बेच रहे हैं
हरियाणा के सोनीपत जिले गांव सोहटी गांव के किसान नरेंद्र कुमार ने बताया कि खरखौदा से एक प्राइवेट बीज विक्रेता के यहां से एचडी 3226 किस्म का बीज 20 किलो की पैकिंग में 900 रुपये में खरीदा है। उन्होंने बताया कि यह बीज बहादुगढ़ में भी कई दुकानों पर बिक रहा है। उन्होंने बताया कि पूसा में एचडी 3226 का बीज 8 किलो की पैकिंग में 320 रुपये के हिसाब से मिल रहा था, लेकिन वहां बीज समाप्त हो गया था, इसलिए प्राइवेट दुकान से खरीदना पड़ा।
कंपनी को पहले ही बीज मिल गया था
राज बीज कंपनी रोहतक, जिसका बीज एचडी 3226 प्राइवेट दुकानों पर बिक रहा है, के मालिक नवनीत खुराना ने आउटलुक को बताया कि आईएआरआई ने अगस्त 2019 में बीज कंपनी को 100 किलो फाउंडेशन बीज दिया। इससे बीज तैयार करके कंपनियों को अगले साल से इसकी बिक्री करनी है। लेकिन इस पर रिसर्च तो पिछले चार से चल रही है। इसलिए कंपनी को यह बीज पहले ही मिल गया था। हालांकि कहां से मिला इस बारे में उन्होंने नहीं बताया। बीज की कीमत के बारे में उन्होंने बताया कि आईएआरआई ने 100 किलो फाउंडेशन बीज 65,000 रुपये में दिया है, इसलिए हमे उंचे दाम पर बेचना पड़ रहा है। अगले साल बीज की उपलब्धता ज्यादा रहेगी, तब कीमत में कमी आने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि हम किसानों को सलाह दे रहे हैं, इस बार केवल प्रयोग के तौर पर इसकी बुआई करें।
चालू रबी में एचडी 3226 किस्म का बीज बेचना गलतः आईएआरआई
आईएआरआई में जोनल टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट व बिजनेस प्लानिंग एंड डेवलपमेंट यूनिट की इंचार्ज डॉ. नीरू भूषण ने बताया कि इस साल 30 अगस्त को बीज कंपनियों से एचडी 3226 का बीज तैयार करने के लाइसेंस दिए गए हैं। इसके हिसाब से कंपनियों को इस साल बीज तैयार करना है, तथा अगले साल रबी सीजन में इस बीज की बिक्री शुरू करनी चाहिए। अगर कंपनियां चालू सीजन में ही एचडी 3226 की बिक्री कर रही हैं, तो यह गलत है। ....... आर एस राणा