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16 फ़रवरी 2018

रबी में एमएसपी पर 320 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य

आर एस राणा
नई दिल्ली। रबी विपणन सीजन 2018—19 में केंद्र सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 320 लाख टन गेहूं और 55 लाख टन चावल की खरीद करेगी। खाद्य सचिव रविकांत की अध्यक्षता में गुरुवार को नई दिल्ली में हुई प्रमुख उत्पादक राज्यों के खाद्य सचिवों की बैठक में राज्यों ने गेहूं के खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ाने के साथ ही गेहूं का समय पर उठाने की मांग की।
खाद्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ही भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और जूट मिलों के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में राज्य के खाद्य सचिवों ने मांग की, कि किसानों को गेहूं का समय पर भुगतान होने के साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाये, कि उनकी उपज एमएसपी से नीचे ना बिके।
खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रबी विपणन सीजन 2018—19 में 320 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य तय किया गया है जबकि पिछले रबी विपणन सीजन 2017-18 में  308 लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी। पिछले खरीद सीजन में खरीद का लक्ष्य 330 लाख टन का था।
चालू रबी के लिए एमएसपी 1,735 रुपये प्रति क्विंटल
रबी विपणन सीजन 2018—19 के लिए केंद्र सरकार ने गेहूं का एमएसपी 1,735 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है जबकि पिछले रबी विपणन सीजन में एमएसपी 1,625 रुपये प्रति क्विंटल था। 
पंजाब और उत्तर प्रदेश से खरीद लक्ष्य ज्यादा
प्रमुख उत्पादक राज्य पंजाब से रबी विपणन सीजन 2018—19 में गेहूं की खरीद का लक्ष्य 119 लाख टन का तय किया है जबकि पिछले साल पंजाब से 117.06 लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी। हरियाणा से चालू रबी में खरीद का लक्ष्य 74 लाख टन का है जबकि पिछले साल हरियाणा से 74.32 लाख टन की खरीद हुई थी। मध्य प्रदेश से भी खरीद का लक्ष्य 67 लाख टन का ही रखा है जबकि पिछले साल मध्य प्रदेश से 67.25 लाख टन की खरीद हुई थी।
सबसे बड़े गेहूं उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश से चालू रबी में गेहूं की खरीद का लक्ष्य 40 लाख टन का तय किया गया है जबकि पिछले साल राज्य से 36.99 लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी। राजस्थान से चालू रबी में खरीद का लक्ष्य 16 लाख टन का तय किया है जबकि पिछले साल राजस्थान से 12.45 लाख टन गेहूं खरीदा गया था। इसके अलावा बिहार से 2 लाख टन, उत्तराखंड से एक लाख टन, गुजरात से 50 हजार टन और अन्य राज्यों से भी 50 हजार टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य ​तय किया है।
रबी में 55 लाख टन चावल की खरीद का लक्ष्य
रबी विपणन सीजन 2018—19 में चावल की खरीद का लक्ष्य 55 लाख टन का तय किया गया है जबकि खरीफ में 375 लाख टन चाल की खरीद की गई है। आंध्रप्रदेश से चावल की खरीद का लक्ष्य 18 लाख टन, तेलंगाना से 19 लाख टन, उड़ीसा से 7 लाख टन, तमिलनाडु से 5 लाख टन, केरल से 1.32 लाख टन, पश्चिमी बंगाल से 4 लाख टन, असम से 34 हजार टन और महाराष्ट्र से भी 34 हजार टन चावल की लक्ष्य तय किया है।
चालू रबी में गेहूं की बुवाई कम
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू रबी सीजन में गेहूं की बुवाई घटकर 304.29 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 317.88 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।
उत्पादन अनुमान में कमी की आशंका
मंत्रालय ने चालू रबी में गेहूं के उत्पादन का लक्ष्य 975 लाख टन का ही रखा है जबकि फसल सीजन 2016-17 में गेहूं का उत्पादन 983.8 लाख टन का हुआ था।....... आर एस राणा

12 फ़रवरी 2018

मध्य प्रदेश में गेहूं और धान किसानों को मिलेगा 200 रुपये का बोनस

आर एस राणा
नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में राज्य सरकार गेहूं के साथ ही धान के किसानों को 200 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस देगी। मुख्यमंत्री उत्पादकता प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत गेहूं और धान की फसल पर किसानों को यह बोनस मिलेगा।
राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के अनुसार पिछले साल किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम कीमतें मिली थी, इसलिए राज्य के किसानों को गेहूं और धान का उचित मूल्य नहीं पाया था। इसलिए हमने फैसला किया है कि मुख्यमंत्री उत्पादकता प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत गेहूं और धान पर किसानों को 200 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस दिया जायेगा।
मध्य प्रदेश में राज्य सरकार द्वारा बोनस दिए जाने की घोषणा से गेहूं की कीमतों में 50 से 100 रुपये का सुधार आने का अनुमान है।
रबी विपणन सीजन 2018—19 के लिए केंद्र सरकार ने गेहूं का एमएसपी 1,735 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। जबकि केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2017—18 के लिए धान कामन ग्रेड का एमएसपी 1,550 रुपये और ए ग्रेड के धान का भाव 1,590 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है।........  आर एस राणा


महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ में बारिश और ओलवाृष्ठि से फसलों को नुकसान

महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में बेमौसम ओलावृष्टि और भारी बारिश होने से रबी फसलों को भारी नुकसान हुआ है। राज्य के कृषि निदेशालय के अधिकारियों के अनुसार जालना, बीड, अमरावती, बुल्धाना, वाशिम, अकोला और आसपास के इलाकों में ओलावृष्टि से गेहूं, अंगूर, चना और आम की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। सुबह साढ़े सात बजे से ओलावृष्टि शुरू हुई और यह आधे घंटे तक लगातार जारी रही।
जालना व कुछ अन्य हिस्सों पर महज 15 मिनट तक ओलावृष्टि हुई लेकिन इतने में ही ऐसा दृश्य सामने आया कि हरे-भरे खेत कश्मीर की घाटी की तरह जैसे बर्फ की चादर से ढंक गए। किसानों ने बताया कि इस प्राकृतिक आपदा से चना, नारंगी, केला, ज्वार, गेहूं और आम व अन्य फसलें तबाह हो गई। कुछ जगहों पर टेनिस की गेंद के आकार के ओले पड़े, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई।
मृतकों की पहचान वाशिम के यमुना हुमबड़ और जालना के नामदेव शिंदे (70) के रूप में हुई हैै। वाशिम में दो लोग घायल भी हुए हैं। महाराष्ट्र सरकार ने इस प्राकृतिक आपदा के तुरंत बाद सक्रियता दिखाई और राज्य के कृषि मंत्री ने सभी किसानों को उनकी तबाह हुई फसलों के लिए मुआवजा देने की घोषणा की।
उधर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल सहित कई इलाकों में तेज आंधी के साथ भारी बारिश और ओले गिरे। प्रदेश के सीहोर, विदिशा, होशंगाबाद, गुना, राजगढ़, हरदा बैतूल और रायसेन सहित अन्य कई इलाकों में हुई बारिश और ओलावृष्टि से चना, सरसों और गेंहू की खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है।
मौसम विभाग के अनुसार उत्तर भारत में भी आंधी—तूफान और ओलावृष्ठि की संभावना है।

कच्चे तेल में आज रिकवरी

पिछले हफ्ते 10 फीसदी की भारी गिरावट के बाद कच्चे तेल में आज रिकवरी आई है। ग्लोबल मार्केट में कच्चा तेल 2 महीने के निचले स्तर से करीब 1 फीसदी संभल गया है। हालांकि बढ़त के बावजूद नायमैक्स पर इसका दाम 60 डॉलर के नीचे है जबकि ब्रेंट में 63 डॉलर पर कारोबार हो रहा है। अमेरिका में कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ने का अनुमान है, क्योंकि वहां ऑयल रिग की संख्या पिछले तीन साल के ऊपरी स्तर पर चली गई है।
डॉलर में नरमी की वजह से आज सोने में भी हल्की रिकवरी आई है और ग्लोबल मार्केट में इसका दाम 1320 डॉलर के ऊपर चला गया है। वहीं चांदी में 16.5 डॉलर के पास कारोबार हो रहा है। आज अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप अपने इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान का एलान करेंगे, ऐसे में लंदन मेटल एक्सचेंज पर मेटल में मजबूती दिख रही है। कॉपर का दाम दो महीने के निचले स्तर से संभल गया है। चीन में दबाव दिख रहा है। आज डॉलर के मुकाबले रुपये में हल्की मजबूती दिख रही है।

10 फ़रवरी 2018

एग्री उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने की पॉलिसी का खाका तैयार

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आम बजट 2018—19 में घोषणा की थी कि देश से एग्री उत्पादों के निर्यात को बढ़ाकर 100 बिलियन अमे‌रिकी डॉलर तक बढ़ाया जा सकता है, जोकि इस समय केवल 30 बिलियन अमेरिकी डॉलर है। इसको असली जामा पहनाने के लिए
सरकार जल्दी ही एग्री उत्पादों के निर्यात की नई पॉलिसी लाने जा रही है।

सूत्रों के अनुसार एग्री उत्पादों की नई पॉलिसी का पूरा खाका तैयार किया जा चुका है। एग्री उत्पादों की नई पॉलिसी आने से किसानों को फायदा होगा। माना जा रहा है कि यह प्रस्ताव मार्च के आखिर तक कैबिनेट के पास भेजा जायेगा। पॉलिसी के ड्रॉप्ट को अगले सप्ताह आॅनलाइन कंसल्टेशन के लिए डाला जायेगा।

इस पॉलिसी में किसानों के लिए ऋण की सुविधा के साथ ही एग्री उत्पादों के भंडारण की व्यवस्था, सस्ती परिवहन सुविधा की व्यवस्था के अलावा कोल्ड चेन वेयर हाउस के लिए 20 फीसदी तक प्रोत्साहन राशि की व्यवस्था की जायेगी। चाय, फसल, सब्जियों के साथ ही मरीन उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा दिया जायेगा।

देशभर में एग्री उत्पादों से जुड़े करीब 50 कलस्टर बनाने के साथ ही क्लस्टर बेस्ड एग्री उत्पादों को बढ़ावा देने पर फोकस होगा। इस पॉलिसी में केंद्र सरकार के साथ ही राज्य सरकारें, व्यापारी और किसान तथा अनुसंधान संस्थान मिलकर काम करेंगे। सूत्रों के अनुसार इस प्रस्ताव को मार्च के आखिर तक कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जायेगा।

कपास उत्पादन अनुमान में 8 लाख गांठ की कमी की आशंका — सीएआई

आर एस राणा
नई दिल्ली। तेलंगाना के साथ ही महाराष्ट्र में पिंक बॉलवर्म नामक बीमारी लगने से कपास के उत्पादन अनुमान में कमी आने की आशंका है। कॉटन एसोसिएशन आॅफ इंडिया (सीएआई) के अनुसार चालू फसल सीजन 2017—18 में कपास का उत्पादन घटकर 367 लाख गांठ (एक गांठ—170 किलोग्राम) ही होने का अनुमान है जबकि पहले अनुमान 375 लाख गांठ का था।
सीएआई के अध्यक्ष अतुल एस. गणात्रा ने आउटलुक को बताया कि तेलंगाना के साथ ही महाराष्ट्र के कई ​क्षेत्रों में पिंग बॉलवर्म नामक बीमारी लगने से राज्य सरकारों ने कपास किसानों के लिए एडजवारी जारी कर दी थी, जिसकी वजह से किसानों ने जल्दी फसल को खेतों से निकाल लिया। अत: पहले के उत्पादन अनुमान 375 लाख गांठ में 8 लाख गांठ की कमी आकर कुल उत्पादन 367 लाख गांठ का ही होने की अनुमान है। फसल सीजन 2016—17 में कपास का उत्पादन 337.25 लाख गांठ का हुआ था।
उत्पादक राज्यों में कपास की दैनिक आवक करीब 1.50 लाख गांठ से ज्यादा हो रही है, माना जा रहा है कि मार्च के मध्य तक आवक कम हो जायेगी। इसलिए कपास की कीमतों में मार्च में सुधार आने की संभावना है।  
बीस लाख गांठ के हो चुके हैं निर्यात सौदे
उन्होंने बताया कि इस समय विश्व बाजार में भारतीय कपास सबसे सस्ती है तथा चालू फसल सीजन में पहली अक्टूबर 2017 से 31 जनवरी 2018 तक करीब 20 लाख गांठ कपास के निर्यात सौदे हो चुके हैं। आईईसी न्यूयार्क में कपास का भाव 76.68 सेंट प्रति पाउंड है। चालू फसल सीजन में कपास का कुल निर्यात करीब 55 लाख गांठ होने का अनुमान है। कपास की घरेलू खपत करीब 320 लाख गांठ होने का अनुमान है। ऐसे में नई फसल की आवक के समय 30 सितंबर 2018 को 42 लाख गांठ कपास का बकाया स्टॉक बचेगा। 
आयात में कमी आने का अनुमान
उन्होंने बताया कि घरेलू मंडियों में कपास के भाव नीचे हैं इसलिए चालू फसल सीजन में कपास के आयात में कमी आने की आशंका है। चालू फसल सीजन में कपास का कुल आयात घटकर 20 लाख गांठ ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसका आयात 30 लाख गांठ का हुआ था। पहली अक्टूबर से जनवरी के आखिर तक करीब 7—8 लाख गांठ कपास का आयात हो चुका है।
कपास की कुल आवक ज्यादा
चालू सीजन में उत्पादक मंडियों में जनवरी के आखिर तक 211 लाख गांठ कपास की आवक हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी आवक केवल 157.75 लाख गांठ की ही हुई थी। .............  आर एस राणा

09 फ़रवरी 2018

मूंगफली दाने के निर्यात में आई भारी गिरावट, भाव एमएसपी से नीचे

आर एस राणा
नई दिल्ली। प्रमुख उत्पादक राज्यों गुजरात के साथ ही राजस्थान में किसानों को मूंगफली न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे भाव पर बेचनी पड़ रही है, इसका एक प्रमुख मूंगफली दाने के निर्यात में भारी गिरावट आना भी है। चालू वित्त वर्ष 2017-18 के पहले 9 महीनों अप्रैल से दिसंबर के दौरान मूंगफली दाने का निर्यात घटकर केवल 3.86 लाख टन का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2016-17 की समान अवधि में इसका निर्यात 4.74 लाख टन का हुआ था।वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2017-18 के पहले 9 महीनों अप्रैल से दिसंबर के दौरान मूंगफली दाने के निर्यात में मूल्य के हिसाब से 27.71 फीसदी की गिरावट आकर कुल निर्यात 2,639.69 करोड़ रुपये का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2016-17 की समान अवधि में इसका निर्यात 3,651.60 करोड़ रुपये का हुआ था।
नेफैड ने गुजरात, राजस्थान के साथ ही कर्नाटका और आंध्रप्रदेश से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर अभी तक 9,96,666.75 टन मूंगफली की खरीद की है। खरीफ विपणन सीजन 2017-18 के लिए केंद्र सरकार ने मूंगफली का एमएसपी 4,450 रुपये प्रति क्विंटल (बोनस सहित) तय किया हुआ है जबकि उत्पादक मंडियों में मूंगफली के भाव 3,500 से 4,100 रुपये प्रति क्विंटल क्वालिटीनुसार चल रहे हैं।चालू रबी में मूंगफली की बुवाई 6.04 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 6.03 लाख हैक्टेयर में हुई थी।कृषि मंत्रालय के पहले आरंभिक अनुमान के अनुसार खरीफ सीजन 2017—18 में मूंगफली का उत्पादन घटकर 62.12 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसका उत्पादन खरीफ सीजन में 62.21 लाख टन का हुआ था। ......आर एस राणा