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10 जनवरी 2017

मूंग की कीमतों में आई कमी का असर इसकी बुवाई पर

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी बुवाई सीजन में मूंग की बुवाई में कमी आई है। उत्पादक मंडियों में मूंग के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे होने के कारण किसानों ने बुवाई कम की है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू रबी मूंग की बुवाई 4.28 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 4.33 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।
केंद्र सरकार ने चालू खरीफ विपणन सीजन 2016-17 के लिए मूंग का एमएसपी 5,225 रुपये प्रति क्विंटल (बोनस सहित) तय किया हुआ है जबकि उत्पादक मंडियों में इसके भाव 4,600 से 4,800 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं। सोमवार को मध्य प्रदेश की इंदौर मंडी में मूंग का भाव 4,700 रुपये, राजस्थान की मेड़ता सिटी मंडी में 4,600 रुपये, जयपुर मंडी में 4,600 रुपये और महाराष्ट्र की अकोला मंडी में 4,800 रुपये प्रति क्विंटल रहे।
मूंग के भाव में आई कमी को देखते हुए केंद्र सरकार सार्वजनिक कंपनियों के माध्यम से मूंग की एमएसपी पर खरीद भी कर रही है, लेकिन उत्पादन के मुकाबले खरीद नाममात्र की होने के कारण किसानों को अपनी उपज एमएसपी से 400 से 600 रुपये प्रति क्विंटल नीचे भाव में बेचनी पड़ रही है। चालू सीजन में नेफैड ने एमएसपी पर पांच जनवरी 2017 तक केवल 1,03,011 टन मूंग की ही खरीद की है। कृषि मंत्रालय के पहले आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2016-17 खरीफ सीजन में मूंग की पैदावार बढ़कर 13.5 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसका उत्पादन 10.2 लाख टन का ही हुआ था।
मूंग की दैनिक आवक उत्पादक मंडियों में पहले की तुलना में कम हुई है, इसलिए माना जा रहा है कि मौजूदा कीमतों में 100 से 150 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट तो आ सकती है, लेकिन मौजूदा भाव में ज्यादा मंदा नहीं आयेगा मार्च में रबी मूंग की आवक चालू हो जायेगी, इसलिए कीमतों में तेजी की संभावना भी नहीं है।.....आर एस राणा

सोना 5 हफ्ते के ऊपरी स्तर पर

डॉलर में आई गिरावट से सोना 5 हफ्ते के ऊपरी स्तर पर चला गया है। कॉमैक्स पर सोना 1185 डॉलर के ऊपर कारोबार कर रहा है। हालांकि एसपीडीआर गोल्ड की होल्डिंग गिरकर 805 टन के स्तर पर आ गई है। इसका मतलब ये हुआ कि मांग सोने में नहीं है सिर्फ डॉलर में गिरावट से सोने में तेजी आई है। इस बीच डॉलर कमजोर पड़ने से कच्चे तेल को भी सपोर्ट मिला है। ग्लोबल मार्केट में कल 4 फीसदी गिरावट के बाद आज क्रूड करीब 0.5 फीसदी की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है। ईरान से सप्लाई बढ़ने की खबरों के बाद कल क्रूड में तेज गिरावट आई थी। इस बीच डॉलर में गिरावट से घरेलू बाजार में रुपये को काफी सपोर्ट मिला है। कल की कमजोरी आज खत्म हो गई है और आज डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूती के साथ कारोबार कर रहा है।

09 जनवरी 2017

दिसंबर में डीओसी निर्यात में 130 फीसदी की बढ़ोतरी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2016-17 के दिसंबर महीने में डीओसी के निर्यात में 130 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल निर्यात 1,94,309 टन का हुआ है जबकि पिछले साल दिसंबर में इसका निर्यात केवल 84,218 टन का ही हुआ था। नवंबर के मुकाबले जहां दिसंबर महीने में सोया डीओसी के निर्यात में बढ़ोतरी हुई है, वहीं सरसों और केस्टर डीओसी के निर्यात में कमी आई है। सोया डीओसी की निर्यात मांग में तेजी फ्रांस द्वारा नोन जीएम डीओसी की खरीद ज्यादा करना रहा है, तथा माना जा रहा है कि जनवरी-फरवरी में भी इसकी निर्यात मांग में और बढ़ोतरी होगी।
साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (एसईए) के अनुसार दिसंबर में सोया डीओसी का निर्यात बढ़कर 1,60,949 टन का हुआ है जबकि नवंबर महीने में इसका निर्यात केवल 51,805 टन का हुआ था। सरसों डीओसी का निर्यात दिसंबर में घटकर 2,292 टन का ही हुआ है जबकि नवंबर महीने में सरसों डीओसी का 12,304 टन का निर्यात हुआ था। इसी तरह से केस्टर डीओसी का निर्यात घटकर दिसंबर महीने में केवल 28,305 टन का ही हुआ है जबकि नवंबर महीने में इसका निर्यात 41,451 टन का हुआ था।
एसईए के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2016-17 के पहले 9 महीनों अप्रैल से दिसंबर के दौरान डीओसी का कुल निर्यात 13 फीसदी घटकर 8,56,798 टन का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 9,87,842 टन का हुआ था।
भारतीय बंदरगाह पर दिसंबर 2016 महीने में सोया डीओसी के भाव 363 डॉलर प्रति टन रहे, जबकि नवंबर में इसके भाव 367 डॉलर प्रति टन थे। दिसंबर 2015 में सोया डीओसी के भाव भारतीय बंदरगाह पर 487 डॉलर प्रति टन थे। सरसों डीओसी के भाव दिसंबर महीने में घटकर 268 डॉलर प्रति टन रह गए, जबकि नवंबर महीने में इसके भाव 275 डॉलर प्रति टन थे। केस्टर सीडओसी के भाव दिसंबर में भी भारतीय बंदरगाह पर 67 डॉलर प्रति टन पर ही स्थिर बने रहे। ............आर एस राणा

पहली छमाही के दौरान दोगुना हुआ प्याज निर्यात

न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) हटाने और प्याज पर भारत वाणिज्यिक निर्यात योजना (एमईआईएस) के विस्तार के निर्णय से चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) के दौरान प्याज निर्यात दोगुना हो गया है। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के आंकड़े दर्शाते हैं कि अप्रैल-सितंबर के दौरान कुल निर्यात 9,46,603 टन रहा जबकि पिछले साल समान अवधि में यह 4,88,446 टन था। हालांकि वैश्विक कीमतों में तेज गिरावट की वजह से इस दोगुनी मात्रा के बावजूद कुल प्राप्त राशि में कुछ ही इजाफा (पहले के 1,156 करोड़ रुपये की तुलना में 1,204 करोड़ रुपये) हुआ है।
हॉर्टिकल्चर एक्सपोट्र्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजित शाह ने कहा, 'एमईपी हटाए जाने से निर्यात में उछाल आई है। इसे हटाए जाने के बाद से भारत ने कमी वाले वाले सभी देशों - श्रीलंका, सुदूर पश्चिमी और मध्य एशियाई देशों को प्याज निर्यात करना शुरू कर दिया है।'
गिरते दामों को थामने के लिए सरकार ने अगस्त के आखिर में ताजा प्याज या फ्रोजन प्याज के निर्यात पर एमईआईएस के रूप में दिसंबर तक और बाद में अगले तीन महीनों यानी मार्च 2017 तक पांच प्रतिशत का प्रोत्साहन शुरू किया था।
सबसे बड़े विपणन केंद्रों में शामिल नासिक जिले के पिम्पलगांव की कृषि उत्पाद बाजार समिति के निदेशक अतुल शाह ने कहा, 'एमईपी हटाए जाने से निर्यातकों ने अपने बलबुते पर विदेशी बाजारों में प्याज निर्यात करना शुरू कर दिया है। इससे पहले वे ऑर्डर के आधार पर बिक्री किया करते थे।'
जोरदार उत्पादन पर मंद घरेलू कीमतों ने निर्यात को बढ़ावा दिया है। आगे चलकर विदेशों में भी कीमतों में गिरावट आने लगी। दो महीने पहले के 10-12 रुपये प्रति किलोग्राम की तुलना में मौजूदा दाम 5-6 रुपये प्रति किलोग्राम पर चल रहे हैं। असल में यह कीमत पश्चिम एशिया और पूर्वी क्षेत्र के देशों में निर्यात की वास्तविक लागत से भी तीन रुपये प्रति किलोग्राम की दर से कम है। शाह ने कहा कि इसका मतलब यह है कि अब निर्यात में गिरावट आएगी।
केंद्रीय कृषि मंत्रालय के तीसरे अग्रिम अनुमान में इस साल उत्पादन में 11 प्रतिशत के साथ 2.1 करोड़ टन उत्पादन का अनुमान है। (BS Hindi)

कच्चे तेल पर दबाव

ईरान का क्रूड एक्सपोर्ट और अमेरिका में रिग काउंट बढ़ने से कच्चे तेल पर दबाव बढ़ गया है। ग्लोबल मार्केट में करीब 0.5 फीसदी नीचे क्रूड में कारोबार हो रहा है। ब्रेंट का दाम 57 डॉलर के नीचे है जबकि डब्लयूटीआई 54 डॉलर के नीचे आ गया है। हालांकि सोने में मजबूती कायम है। अमेरिका में पिछले हफ्ते अनुमान से कम नॉन-फार्म पेरोल से सोने की कीमतों को सपोर्ट मिला है। हालांकि चांदी में दबाव है और कॉमैक्स पर चांदी का दाम करीब 0.5 फीसदी गिर गया है। इस बीच डॉलर के मुकाबले रुपया आज फिर से लुढ़क गया है। 1 डॉलर की कीमत 68.20 रुपये के पास चली गई है। रुपया करीब 0.25 से ज्यादा की कमजोरी के साथ कारोबार कर रहा है।

07 जनवरी 2017

गेहूं का 22 लाख टन का हो चुका है आयात

आर एस राणा
नई दिल्ली। आस्ट्रेलिया के साथ ही फ्रांस और यूक्रेन से चालू सीजन में अभी तक करीब 22 लाख टन गेहूं भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच चुका है तथा आयातक करीब 25 लाख टन गेहूं के आयात सौदे कर चुके हैं। माना जा रहा है कि कुल आयात 30 लाख टन तक ही हो पायेगा, क्योंकि आयातकों को डर है कि केंद्र सरकार गेहूं के आयात पर 28 फरवरी 2017 के बाद आयात शुल्क लगायेंगी, इसलिए आयातक केवल जनवरी-फरवरी शिपमेंट के ही आयात सौदे कर रहे हैं।
इस समय आस्ट्रेलिया से आयातित प्रीमियम गेहूं का भाव भारतीय बदरगांह पर 1,780 रुपये, आस्ट्रेलियाई एएसडब्ल्यू गेहूं का भाव 1,730 रुपये और यूक्रेन के गेहूं का भाव 1,660 रुपये प्रति क्विंटल है। इन भाव में उत्तर भारत की फ्लोर मिलों में गेहूं के पड़ते नहीं लग रहे है तथा सारा गेहूं दक्षिण भारत और पड़ौसी राज्यों की फ्लोर मिलों द्वारा ही खरीदा जा रहा है। एक अनुमान के अनुसार अभी तक करीब 22 लाख टन गेहूं का आयात हो चुका है तथा इसमें से 10 लाख टन गेहूं की खपत भी हो चुकी है। चालू सीजन में कुल आयात 30 लाख टन होने का अनुमान है, ऐसे में दक्षिण भारत के साथ ही पड़ौसी राज्यों की मिलों में आयातित गेहूं  फरवरी-मार्च तक खप जायेगा, तथा दक्षिण भारत की फ्लोर मिलों को अप्रैल-मई से उत्तर भारत के राज्यों से ही गेहूं की खरीद करनी पड़ेगी।..............आर एस राणा

एफसीआई को आगामी सीजन में 300 लाख टन से ज्यादा गेहूं खरीदना होगा

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्रीय पूल में पहली दिसंबर 2016 को 164.96 लाख टन गेहूं का स्टॉक मौजूद है, जबकि दिसंबर से मार्च तक सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में करीब 100 लाख टन गेहूं का आवंटन होगा, इसके अलावा खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत भी करीब 10 लाख टन गेहूं की खपत हो जायेगी। ऐसे में तय मानकों के अनुसार पहली अप्रैल को केंद्रीय पूल में गेहूं का स्टॉक 74.6 लाख टन से कम बचेगा। इसलिए भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को आगामी रबी खरीद सीजन 2017-18 में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 300 से 350 लाख टन गेहूं की खरीद करनी होगी।
चालू रबी सीजन में गेहूं की बुवाई बढ़कर 303.16 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 281.70 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हो पाई थी। मौसम भी अभी तक अनुकूल है तथा पकाई तक मौसम अनुकूल रहा तो गेहूं का उत्पादन बढ़कर 950 लाख टन से ज्यादा ही होने का अनुमान है। उत्पादन में बढ़ोतरी तो होगी, लेकिन एफसीआई को आगामी रबी विपणन सीजन 2017-18 में एमएसपी पर गेहूं की खरीद 300 लाख टन से ज्यादा ही करनी पड़ेगी, साथ फ्लोर मिलों की खरीद भी बढ़ेगी। इसलिए गेहूं के भाव फसल के समय तेज ही रहने का अनुमान है। पिछले खरीद सीजन में एफसीआई ने केवल 229.61 लाख टन गेहूं की ही खरीद की थी।
कृषि मंत्रालय के चौथे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2015-16 में गेहूं का उत्पादन 935 लाख हुआ था जबकि जानकारों के अनुसार उत्पादन 840 से 850 लाख टन का ही हुआ है। फरवरी-मार्च में बेमौसम बारिश से गेहूं की प्रति हैक्टेयर उत्पादकता में कमी आई थी इसीलिए एफसीआई की खरीद भी तय लक्ष्य 300 लाख टन से कम रही थी। रबी विपणन सीजन 2017-18 के लिए केंद्र सरकार गेहूं का एमएसपी 1,625 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है जबकि पिछले खरीद सीजन में एमएसपी 1,525 रुपये प्रति क्विंटल था।.............आर एस राणा