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03 जनवरी 2017

चालू पेराई सीजन में 80 लाख टन से ज्यादा हो चुका है चीनी उत्पाद

आर एस राणा
नई दिल्ली। पहली अक्टूबर से शुरु हुए चालू पेराई सीजन 2016-17 में 31 दिसंबर 2016 तक 80.90 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है जोकि पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 0.4 फीसदी ज्यादा है। पिछले साल 31 दिसंबर तक 80.56 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के अनुसार इस समय देशभर में 462 चीनी मिलों में गन्ने की पेराई चल रही है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 481 चीनी मिलों में पेराई चल रही थी। सबसे बड़े उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में 147 चीनी मिलों में गन्ने की पेराई चल रही थी, जिनमें से 25 चीनी मिलों में पेराई बंद हो चुकी है। जिन चीनी मिलों में पेराई बंद हुआ है वह महाराष्ट्र के मराठवाडा, सोलापुर और अहमदनगर में बंद हुई है जहां सूखे का ज्यादा असर था।
महाराष्ट्र में चालू पेराई सीजन में पहली अक्टूबर से 31 दिसंबर तक चीनी का उत्पादन घटकर 25.25 लाख टन का ही हुआ है जबकि पिछले साल की समान अवधि में राज्य में 33.70 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका था। महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित क्षेत्रों मराठवाड़ा और सोलापुर में चालू पेराई सीजन में गन्ने में रिकवरी भी कम होकर 10.52 फीसदी की रही है जबकि पिछले साल इन राज्यों में रिकवरी 10.43 फीसदी की थी।
उत्तर प्रदेश में चालू पेराई सीजन में 31 दिसंबर 2016 तक 27.40 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है जबकि पिछले साल की समान अवधि में राज्य में 17.97 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था। कर्नाटका में चालू पेराई सीजन में 31 दिसंबर तक 15.60 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में 15.94 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका था। कर्नाटका में भी 5 चीनी मिलों में पेराई बंद हो चुका है। इस्मा के अनुसार कर्नाटका में पिछले साल कुल चीनी का उत्पादन 40.5 लाख टन का हुआ था जबकि चालू पेराई सीजन में कुल 31 लाख टन ही चीनी का उत्पादन होने का अनुमान है।
अन्य राज्यों गुजरात में चालू पेराई सीजन में पहली अक्टूबर से 31 दिसंबर तक 3.50 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है जबकि पिछले साल की समान अवधि में राज्य में 4.61 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। तमिलनाडु में चालू पेराई सीजन में अभी तक 1.25 लाख टन, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना में 1.80 लाख टन, बिहार में 1.50 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है। हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में चालू पेराई सीजन में अभी तक 4.45 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इन राज्यों में 3.85 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था।
महाराष्ट्र में चालू महीने में कुछ और चीनी मिलों में पेराई बंद होने का अनुमान है ऐसे में चालू महीने के मध्य तक चीनी की कीमतों में और भी 75 से 100 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आने का अनुमान है। माना जा रहा है कि जनवरी के आखिर में चीनी की कीमतों कुछ गिरावट आयेगी, तभी स्टॉकिस्टों की खरीद निकलने की संभावना है। मंगलवार को दिल्ली में चीनी के भाव 3,800 से 3,875 रुपये, उत्तर प्रदेश में 3,600 से 3,750 रुपये, बिहार में 3,700 से 3,750 रुपये, महाराष्ट्र में 3,325 से 3,400 रुपये, कर्नाटका में 3,300 से 3,350 रुपये और हरियाणा में 3,625 से 3,700 रुपये प्रति क्विंटल (ड्यूटी अलग) रहे।..........आर एस राणा

बर्ड फ्लू की आशंका से सऊदी अरब ने भारत से पोल्ट्री उत्पादों का आयात रोका

विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन द्वारा दुनिया के कुछ हिस्सों में बर्ड फ्लू की पुष्टि करने के चार सप्ताह बाद सऊदी अरब ने अस्थायी रूप से भारत से पोल्ट्री उत्पादों का आयात रोक दिया है। 2 जनवरी 2017 को जारी एक परिपत्र में कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने भारतीय पोल्ट्री निर्यातकों को सूचित किया है, 'सऊदी अरब के शाही दूतावास ने जानकारी दी है कि सऊदी अरब के पर्यावरण, जल और कृषि मंत्रालय ने बर्ड फ्लू फैलने के कारण भारत से जीविक पक्षियों, अंडों और चिकन के आयात पर अस्थायी रोक लगाने का फैसला किया है।'   यह प्रतिबंध इसलिए भी अहमियत रखता है क्योंकि सऊदी अरब भारत से पोल्ट्री का आयात करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है। भारतीय पोल्ट्री निर्यातकों इस बात को लेकर चिंतित है कि अन्य देश भी आयात पर रोक लगा सकते हैं। हालांकि देश के पोल्ट्री उद्योग में कुल निर्यात का 1 फीसदी से भी कम योगदान है, इसलिए सऊदी अरब द्वारा लगाए गए प्रतिबंध का इस उद्योग पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।    गोदरेज एग्रोवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक बलराम यादव ने कहा, 'अगर भारत को बर्ड फ्लू पॉजिटिव देश घोषित किया गया तो अब भारत का अंडों का निर्यात रुक जाएगा। कम घातक बर्ड फ्लू पहले ही हमारे देश में मौजूद है, जो कभी-कभी सिर उठा लेता है।' एपीडा के आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले तीन वर्षों के दौरान भारत के पोल्ट्री उत्पादों के निर्यात में लगातार बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2013-14 में 9.25 करोड़ डॉलर के पोल्ट्री उत्पादों का निर्यात किया गया था, जो 2015-16 में बढ़कर 11.74 करोड़ डॉलर पर पहुंच गया है।    सऊदी अरब को भी पोल्ट्री उत्पादों के निर्यात में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। सऊदी अरब को 2013-14 में 79.4 लाख डॉलर के पोल्ट्री उत्पादों का निर्यात हुआ था, जो 2015-16 में बढ़कर 1.46 करोड़ डॉलर हो गया है। इससे ओमान के बाद सऊदी अरब दूसरा प्रमुख आयातक बन गया है। देश से पोल्ट्री उत्पादों से प्राप्त होने वाले राजस्व में सऊदी अरब करीब 15 फीसदी योगदान देता है, जबकि ओमान का योगदान करीब 26 फीसदी है।    इस उद्योग के विशेषज्ञों के मुताबिक बर्ड फ्लू का प्रसार जंगली और प्रवासी पक्षियों से होता है। देश में करीब 15 अरब डॉलर का पोल्ट्री उद्योग है, लेकिन सरकार बर्ड फ्लू का प्रकोप रोकने के लिए टीकाकरण की मंजूरी नहीं देती है। बांग्लादेश सहित बहुत से देशों ने बर्ड फ्लू का प्रकोप रोकने के लिए टीकाकरण की मंजूरी दी है। विशेषज्ञों ने कहा कि भारत मेंं मकान के पिछवाड़े में मुर्गियां पाली जाती हैं, इसलिए सुदूरवर्ती इलाकों में छोटे पोल्ट्री फार्मों पर नजर रखना मुश्किल होता है।    पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष रमेश खत्री ने कहा, 'भारत से सऊदी अरब को मुर्गियों के चूजों का आयात करना ब्राजील और अमेरिका की तुलना में महंगा पड़ता है। मोटे अनाज और पक्षियों को खिलाए जाने वाले अन्य खाद्य की लागत ब्राजील और अमेरिका में भारत की तुलना में कम है। इसलिए सऊदी अरब द्वारा आयात पर अस्थायी प्रतिबंध लगाए जाने का पोल्ट्री उद्योग पर कोई असर नहीं पडऩे के आसार हैं।' खत्री ने सरकार से आग्रह किया है कि देश को पोल्ट्री फार्मिंग के हिसाब से अलग-अलग क्षेत्रों में बांटा जाए और उन क्षेत्रों को बर्ड फ्लू मुक्त घोषित किया जाए, जहां बर्ड फ्लू पैदा नहीं होता है। उन्होंने कहा, 'इससे उन क्षेत्रों से पोल्ट्री उत्पादों के निर्यात में मदद मिलेगी, जिन्हें बर्ड फ्लू मुक्त घोषित किया जाएगा। वहीं इससे संवेदनशील क्षेत्रों से निर्यात रोका जा सकेगा।' (BS Hindi)

अमेरिका को 8,424 टन कच्ची चीनी निर्यात की अनुमति

सरकार ने शुल्क दर कोटा व्यवस्था (टीआरक्यू) योजना के तहत चीनी उद्योग को 8,424 टन कच्ची चीनी अमेरिका को निर्यात करने को मंजूरी दी है। टीआरक्यू के तहत एक सीमा तक वस्तु के निर्यात पर शुल्क में कुछ छूट होती है और उससे अधिक मात्रा पर शुल्क सामान्य दर से लागू होता है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) द्वारा जारी एक सार्वजनिक सूचना में कहा गया है, 'अमेरिका को 30 सितंबर, 2017 तक टीआरक्यू के तहत भेजी जाने वाली कच्ची चीनी की मात्रा (8,424 टन) अधिसूचित की जा चुकी है।' तरजीही कोटा व्यवस्था के तहत भारत वर्ष भर में अमेरिका को 10,000 टन तक शुल्क मुक्त चीनी का निर्यात का लाभ लेता है। दुनिया में चीनी के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक और विशालतम उपभोक्ता देश भारत की यूरोपीय संघ के साथ भी चीनी निर्यात के लिए तरजीही कोटा व्यवस्था है। भारत ने विपणन वर्ष 2014-15 (अक्टूबर से सितंबर) में 11 लाख टन चीनी का निर्यात किया था।

डॉलर के मुकाबले रुपये हल्की रिकवरी

डॉलर के मुकाबले रुपये मे आज हल्की रिकवरी आई है। ग्लोबल मार्केट में नैचुरल गैस में भारी गिरावट आई है। नायमैक्स पर इसका दाम करीब 7 फीसदी लुढ़क गया है। हालांकि कच्चे तेल में तेजी जारी है। नायमैक्स पर क्रूड का दाम 54 डॉलर के पार चला गया है। जबकि ब्रेंट में 57 डॉलर के ऊपर कारोबार हो रहा है। सोने में भी तेजी जारी है और इसका दाम फिर से 1255 डॉलर के पार चला गया है। हालांकि चांदी में बढ़त ज्यादा देखी जा रही है। कामैक्स पर चांदी का दाम करीब 1.5 फीसदी बढ़कर 16 डॉलर के पार चला गया है। दरअसल नए साल में चांदी की डिमांड बढ़ने की संभावना है। बेस मेटल में तेजी से भी चांदी को सपोर्ट मिल रहा है। आज लंदन मेटल एक्सचेंज पर कॉपर करीब 0.5 फीसदी की तेजी के साथ 5.5 हजार डॉलर प्रति टन के ऊपर कारोबार कर रहा है। 

02 जनवरी 2017

स्टॉक कम होने के कारण जीरा में तेजी की संभावना

आर एस राणा
नई दिल्ली। जीरा का स्टॉक उत्पादक मंडियों में 2.5 लाख बोरी से भी कम बताया जा रहा है कि इस समय जीरा में निर्यातकों के साथ ही घेरलू मसाला कंपनियों की मांग अच्छी है। इसलिए जीरा की कीमतों में आगे और तेजी आने का अनुमान है। सोमवार को प्रमुख उत्पादक मंडी उंझा में जीरा का भाव 3,000 से 3,800 रुपये प्रति 20 किलो रहा जबकि दैनिक आवक केवल 2,500 बोरी की हुई तथा दैनिक व्यापार 5,000 बोरी का हुआ।
सूत्रों के अनुसार प्रमुख उत्पादक मंडियों में जीरा का स्टॉक बचा हुआ है जबकि नई फसल की आवक फरवरी में बनेगी। प्रमुख उत्पादक राज्य गुजरात में जीरा की बुवाई 28 दिसंबर तक 2,67,100 हैक्टेयर में ही हो पाई है जोकि पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 1,200 हैक्टेयर कम है। पिछले साल की समान अवधि में गुजरात में जीरा की बुवाई 2,68,300 हैक्टेयर में हुई थी। राजस्थान में भी चालू सीजन में जीरा की बुवाई में कमी आने की आषंका है।
टर्की और सीरिया में राजनीति गतिरोध के कारण भारत से जीरा के निर्यात में बढ़ोतरी हुई है। चालू वित्त वर्ष 2016-17 के अप्रैल से दिसंबर के दौरान जीरा का निर्यात बढ़कर 88,000 टन होने का अनुमान है। अप्रैल से अक्टूबर के दौरान जीरा का निर्यात बढ़कर 77,839 टन का हुआ था जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में केवल 55,738 टन का ही निर्यात हुआ था। अप्रैल से अक्टूबर के दौरान जीरा के निर्यात में पिछले पांच साल की तुलना में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। विश्व बाजार में भारतीय जीरा का भाव 3.64 डॉलर प्रति किलो है जबकि पिछले महीने इसका भाव 3.70 डॉलर प्रति किलो था।
फसल सीजन 2015-16 में गुजरात में जीरा का उत्पादन 2.38 लाख टन का हुआ था, जबकि इसके पिछले साल उत्पादन केवल 2 लाख टन का ही हुआ था। अतः पिछले दो साल से गुजरात में उत्पादन कम हुआ है जबकि चालू वित्त वर्ष 2016-17 में अभी तक निर्यात में अच्छी बढ़ोतरी हुई है इसीलिए जीरा के बकाया स्टॉक में कमी आई है। ऐसे में आगामी दिनों में जीरा की तेजी-मंदी काफी हद तक मौसम पर भी निर्भर करेगी।................आर एस राणा

जिंस एक्सचेंजों के कारोबार में दिसंबर में भारी गिरावट

देश के दो अग्रणी जिंस एक्सचेंजों का कारोबार दिसंबर में तेजी से गिरा है। इन दोनों एक्सचेजों में एक को कृषि कारोबार और दूसरे को धातु एवं ऊर्जा उत्पादों के लिए जाना जाता है। बाजार भागीदारों के मुताबिक डब्बा कारोबारियों के क्रॉस हेजिंग न करने से कृषि मंडियों में मामूली कारोबार हो रहा है। बहुत से कारोबारी नोटबंदी की दिक्कतों से ही निपटने में व्यस्त हैं, जिससे कारोबारी मात्रा में भारी गिरावट आई है। एमसीएक्स पर पिछले साल दिसंबर में दैनिक औसत कारोबार घटकर 17,492 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि में 19,710 करोड़ रुपये था। 
 हालांकि  वर्ष के दैनिक औसत स्तर से मुकाबले दिसंबर में कारोबारी मात्रा में गिरावट काफी अधिक है। एनसीडीईएक्स के कारोबार में भी गिरावट आई है। लेकिन इस साल एक्सचेंज पर दिसंबर में कारोबार इतनी तेजी से घटा है कि वह पूरे साल के औसत का महज 40 फीसदी है और यह पिछले साल के दैनिक औसत कारोबार का महज 25 फीसदी है। एनसीडीईएक्स के प्रवक्ता ने कहा, 'पुराने नोट वापस लिए जाने से हाजिर बाजारों में कारोबार प्रभावित हुआ है और डेरिवेटिव बाजार होने से हमें इसका भारी असर झेलना पड़ रहा है। हालांकि हमारा मानना है कि यह असर थोड़े समय रहेगा और धीरे-धीरे कारोबारी मात्रा सामान्य स्तर पर आ जाएगी। नोटबंदी जैसे बड़े सुधार से कुछ समय कारोबार प्रभावित होता है और हमारा मानना है कि हम भी उसी दौर से गुजर रहे हैं।'
नोटबंदी से भारतीय जिंस एक्सचेंजों में कारोबार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुआ है। एक बाजार भागीदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, 'बड़े नोट वापस लिए जाने की घोषणा के बाद डब्बा कारोबार थम गया है, जो एक्सचेंज प्लेटफॉर्म से बाहर होने वाला अवैध अनियमित कारोबार था। हालांकि ऐसे कारोबारी आधिकारिक प्लेटफॉर्मों पर पोजिशनों की हेजिंग कर रहे थे, इसलिए इन पोजिशनों की कवरिंग नवंबर मेंं हुई और नवंबर में कारोबारी मात्रा पर कोई असर नहीं पड़ा। आमतौर पर दिसंबर में कारोबार कम रहता है, लेकिन इस बार नोटबंदी की वजह से असर ज्यादा था।' एक्सचेंजों के बहुत से बड़े कारोबारी ग्राहक भी कारोबार करने से दूर रहे क्योंकि वे पुराने नोटों को जमा कराने की अंतिम तारीख 30 दिसंबर से पहले अपने बहीखातों को व्यवस्थित करने में व्यस्त रहे।

डॉलर के मुकाबले रुपये में आज हल्की कमजोरी

डॉलर के मुकाबले रुपये में आज हल्की कमजोरी दिख रही है और एक डॉलर की कीमत 68 रुपये के पास है। साल 2017 का आज पहला कारोबारी दिन है और आज के दिन ग्लोबल कमोडिटी मार्केट बंद हैं। लिहाजा घरेलू बाजार को कोई विदेशी संकेत फिलहाल नही हैं। लेकिन पिछले 1 साल के दौरान सोने में करीब 8 फीसदी की तेजी देखने को मिली जबकि पूरे साल के दौरान चांदी का दाम करीब 15 फीसदी उछल गया है। नए साल में अमेरिका में ब्याज दरें और डॉलर की चाल से सोने और चांदी का भविष्य तय होगा। वैसे पिछले 3 साल में पहली बार सोने में सालान रिटर्न मिला है। इस बीच कच्चा तेल पिछले 1 साल के दौरान करीब 100 फीसदी उछल चुका है और इस हफ्ते से ओपेक और नॉन ओपेक उत्पादन में कटौती शुरु कर देंगे। ऐसे में क्रूड की कीमतों पर इसका असर देखने को मिल सकता है। लेकिन बेस मेटल्स के लिए चीन की आर्थिक सेहत को दुरूस्त होना जरूरी है।