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26 अक्टूबर 2016

दाल उत्पादन 50 फीसदी बढ़ाने का लक्ष्य

आर एस राणा
दाल का उत्पादन अगले पांच साल में 50 फीसदी बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। कृषि मंत्री राधामोहन सिंह का दावा है कि 2020-21 तक देश में 240 लाख टन दाल उत्पादन का लक्ष्य है। इसके तहत इस साल के दौरान 200 लाख टन और साल 2017-18 में 210 लाख टन दाल उत्पादन करने की योजना है।....आर एस राणा

कच्चा तेल गिरावट की चपेट में

कच्चा तेल गिरावट की चपेट में आ गया है। नायमैक्स पर कच्चा तेल 50 डॉलर के नीचे आ गया है। अमेरिका में भंडार बढ़ने से इसकी कीमतों पर दबाव बढ़ गया है। कल अमेरिकी पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट आई थी जिसके मुताबिक अमेरिका में क्रूड का भंडार 48 लाख बैरल बढ़ गया है। वहीं ओपक के कई सदस्य देशों ने उत्पादन में कटौती से इनकार किया है। इस बीच नाइजीरिया ने क्रूड का एक्सपोर्ट बढ़ा दिया है। ऐसे में कच्चे तेल में चौतरफा मार पड़ी है। अभी भी इसमें करीब 0.5 फीसदी नीचे कारोबार हो रहा है। हालांकि इस दौरान सोने में तेजी आई है और ग्लोबल मार्केट में इसका दाम करीब 3 हफ्ते के ऊपरी स्तर पर चला गया है। दरअसल डॉलर 9 महीने के ऊपरी स्तर से फिसल गया है। वहीं त्योहारों के मौके पर भारत में सोने की डिमांड बढ़ गई है। ऐसे में ग्लोबल मार्केट में सोने को सपोर्ट मिला है। कल घरेलू बाजार में सोना करीब 200 रुपये बढ़कर बंद हुआ था। इस बीच चीन में एल्युमीनियम का दाम पिछले 2 साल के ऊपरी स्तर पर पहुंच गया है।

एमएसपी पर 34,546 टन दलहन की खरीद

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ विपणन सीजन 2016-17 में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर अभी तक सरकारी एजेंसियां 34,546.69 टन दलहन की खरीद कर चुकी हैं जबकि सरकार ने खरीद का लक्ष्य 50 हजार टन का रखा है।
खाद्य मंत्रालय के अनुसार उड़द और मूंग की एमएसपी पर खरीद भारतीय खाद्य निगम के साथ ही नेफेड और एसएफएसी कर रही हैं। एफसीआई ने अभी तक चालू खरीफ में एमएसप पर 8,166.71 टन, नेफेड ने 23,510.13 टन और एसएफएसी ने 2,869.85 टन दलहन की खरीद की है।
माना जा रहा है कि सरकार ने केवल 50 हजार टन दलहन की खरीद का ही लक्ष्य तय किया है अतः जैसे ही सरकारी खरीद पूरी होगी, भाव में और गिरावट आयेगी। वैसे भी चालू खरीफ में उड़द के साथ ही मूंग का बंपर उत्पादन होने का अनुमान है। वैसे भी जिन मंडियों से मूंग की खरीद नहीं हो रही है, वहां भाव अभी भी एमएसपी से नीचे बने हुए हैं।
केंद्र सरकार ने चालू खरीफ विपणन सीजन 2016-17 के लिए मूंग का एमएसपी 5,225 रुपये और उड़द का एमएसपी 5,000 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है।.......आर एस राणा

25 अक्टूबर 2016

दलहन आयात में कमी आई

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू महीने के दूसरे सप्ताह 10 से 16 अक्टूबर के दौरान दलहन आयात 21.72 फीसदी घटकर 1,11,030 टन का ही हुआ है जबकि इसके पहले सप्ताह में 1,41,844 टन दलहन का आयात हुआ था।
इस दौरान सबसे ज्यादा ज्यादा आयात पीली मटर का 71,991 टन का हुआ, इसके अलावा 15,656 टन अरहर का और 10,119 टन चना का आयात हुआ।
दलहन की कीमतों में आगे और नरमी आने का अनुमान है। उड़द की दैनिक आवक बढ़ रही है, साथ ही मूंग की आवक भी अच्छी हो रही है। अरहर की नई फसल आने में अभी समय है लेकिन चालू खरीफ में बंपर पैदावार होने का अनुमान है। इसलिए मिलर्स भी केवल जरुरत के हिसाब से खरीद कर रहे हैं।.........आर एस राणा

केस्टर सीड की बुवाई 24 फीसदी कम

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में केस्टर सीड की बुवाई 24.18 फीसदी घटकर 8.40 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 11.08 लाख हैक्टेयर में हुई थी। केस्टर सीड की बुवाई अब पूरी हो चुकी है तथा माना जा रहा है कि चालू सीजन में इसकी पैदावार में करीब 25 से 30 फीसदी की कमी आयेगी। दीसा मंडी में केस्टर सीड के भाव 3,610 से 3,625 रुपये प्रति क्विंटल रहे। आगामी दिनों में केस्टर सीड की दैनिक आवक कम रहेगी, जिससे भाव में और तेजी आने का अनुमान है।
चालू वित्त वर्ष 2016-17 के पहले चार महीनों अप्रैल से जुलाई के दौरान देष से केस्टर तेल का निर्यात 1,74,846 टन का हो चुका है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 1,71,804 टन का हुआ था। वित्त वर्ष 2015-16 में केस्टर तेल का कुल निर्यात 4,96,188 टन का हुआ है जबकि चालू वित्त वर्ष में कुल निर्यात पिछले साल की तुलना में ज्यदा होने का अनुमान है।..........आर एस राणा

जीएम सरसों के लिए लेंगे अदालत की मंजूरी : केंद्र

केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय को भरोसा दिलाया कि वह उसकी अनुमति के बगैर जीएम (जीन संवर्धित) सरसों के बीजों को वाणिज्यिक तौर पर जारी करने की मंजूरी नहीं देगी। प्रधान न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर की अगुवाई वाले एक पीठ के समक्ष अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि अगर जीएम सरसों की फसल की खेती के परीक्षण और इसको वाणिज्यिक रूप से जारी करने करने की दिशा में कदम बढाने का फैसला होता है तो पहले इसकी अनुमति उच्चतम न्यायालय से ली जाएगी।    इस पीठ में ठाकुर के अलावा न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और एल नागेश्वर राव शामिल हैं। रोहतगी ने पीठ के समक्ष कहा, 'अगर हमें जीएम फसल के खेत परीक्षण अथवा वाणिज्यिक रूप से जारी करने के लिए आगे बढऩा है, तो हम अनुमति प्राप्त करने के लिए न्यायालय आएंगे।' उच्चतम न्यायालय इस मामले में अब चार सप्ताह बाद सुनवाई करेगा। इससे पूर्व उच्चतम न्यायालय ने जीएम सरसों को वाणिज्यिक रूप से जारी करने पर रोक को अगले आदेश तक रोक दिया था।

इस साल कपास उत्पादन बढ़ेगा, निर्यात घटेगा

आर एस राणा
देश में कपास सीजन 2016-17 में रकबे में गिरावट के बावजूद उत्पादन 3.8 फीसदी बढऩे के आसार हैं। इसकी वजह यह है कि इस साल अच्छे मॉनसून से उत्पादकता में भारी इजाफा हुआ है।  कपास सलाहकार बोर्ड की बैठक  में अनुमान जताया कि कपास वर्ष 2016-17 में उत्पादन 3.51 करोड़ गांठ (प्रत्येक 170 किलोग्राम) रहेगा, जबकि 2015-16 में उत्पादन 3.38 करोड गांठ रहा था। बीटी कपास का रकबा वर्ष 2015-16 में 106.8 लाख हेक्टेयर था, जो 2016-17 में घटकर 86.1 लाख हेक्टेयर पर आ गया है। इस तरह गैर-बीटी कपास का रकबा वर्ष 2016-17 में बढ़कर 18.9 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो वर्ष 2015-16 में 11.9 लाख हेक्टेयर था। गुप्ता ने कहा कि बीटी के मुकाबले गैर-बीटी में बढ़ोतरी का यह रुझान अगले साल बदल सकता है। यह मौसम और अन्य कई कारकों पर निर्भर करेगा।
 बैठक की अध्यक्षता केंद्र सरकार में कपड़ा आयुक्त कविता गुप्ता ने की। गुप्ता ने कहा, 'हमारा अनुमान है कि इस साल तीन कारकों- बेहतर मॉनसून, पंजाब में व्हाइट फ्लाई और गुजरात में पिंक बॉलवॉर्म का प्रकोप न होने से कपास का उत्पादन अच्छा रहेगा। इस साल कपास की उत्पादकता पिछले साल से बेहतर रहेगी।'   इस साल पंजाब और हरियाणा में कपास की उत्पादन में भारी इजाफा होने का अनुमान है। कपास सलाहकार बोर्ड का अनुमान है कि इस साल उत्पादकता में 17.47 फीसदी इजाफा होगा। वर्ष 2015-16 में उत्पादकता 483.79 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी, जो 2016-17 में सुधरकर 568.29 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो जाएगी। हालांकि पंजाब में औसत उत्पादकता 2016-17 में बढ़कर 597.66 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर होने का अनुमान है, जो 2015-16 में 376.11 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी। पिछले साल पंजाब और हरियाणा में व्हाइट फ्लाई के प्रकोप से कपास की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई थी। इसी तरह पिछले साल गुजरात में पिंक बॉलवॉर्म का प्रकोप रहा, लेकिन इस साल बेहतर कीट नियंत्रण उपायों से  यह गायब है।  
गुप्ता ने कहा, 'पाकिस्तान में बेहतर उत्पादन के अनुमानों के कारण भारत का कपास निर्यात घटने के आसार हैं। पिछले साल पाकिस्तान में कपास की फसल खराब हो गई थी, इसलिए भारत ने 40 फीसदी (27 लाख गांठ) कपास का निर्यात पाकिस्तान को किया था। हालांकि इस साल पाकिस्तान में फसल अच्छी है, इसलिए उसे कम आयात की जरूरत होगी। चीन को कपास के निर्यात में कोई भारी बढ़ोतरी नहीं होने का अनुमान है। इससे 2016-17 में कपास का निर्यात घटकर 50 लाख गांठ पर आ सकता है, जो 2015-16 में 69 लाख गांठ रहा था।'   मिलों और लघु इकाइयों की कपास की खपत क्रमश: 275 लाख गांठ और 10 लाख गांठ पर अपरिवर्तित रहने का अनुमान है। इसलिए 2016-17 के अंत में कपास का स्टॉक 48 लाख गाठ रहने का अनुमान है, जो पिछले साल 43 लाख गांठ था। इस बार तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की सरकारों ने किसानों को कपास की जगह अन्य फसलें उगाने की सलाह दी थी। इस वजह से देश में कपास का रकबा 2016-17 में 12 फीसदी घटकर 105 लाख हेक्टेयर पर आ गया, जो 2015-16 में 118.8 लाख हेक्टेयर था।......आर एस राणा