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26 अप्रैल 2023

गेहूं की सरकारी खरीद 183.76 लाख टन

नई दिल्ली। चालू रबी विपणन सीजन 2023-24 में 25 अप्रैल तक गेहूं की न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर खरीद बढ़कर 183.76 लाख टन की हो गई है। केंद्रीय खाद्वय एवं उपभोक्ता मामले मंत्रालय के अनुसार इस दौरान देशभर के 18.51 लाख किसानों से 39,049.70 करोड़ रुपये मूल्य का गेहूं खरीदा गया है।


केंद्र सरकार ने चालू रबी विपणन सीजन 2023-24 में देशभर के राज्यों से 342 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य तय किया है। प्रतिकूल मौसम से पंजाब एवं हरियाणा से शुरुआत में गेहूं की सरकारी बहुत बहुत धीमी गति से हो रही थी, लेकिन अभी तक हुई कुल खरीद में इन राज्यों का योगदान सबसे ज्यादा है।

मंत्रालय के अनुसार चालू रबी पंजाब से 84 लाख टन गेहूं की एमएसपी पर खरीद हो चुकी है, जबकि हरियाणा से समर्थन मूल्य पर अभी तक 53 लाख टन गेहूं खरीदा गया है।

बेमौसम बारिश एवं ओलाृष्टि के कारण देश के कई राज्यों में गेहूं की गुणवत्ता प्रभावित हुई है, जिस कारण किसानों के नुकसान को देखते हुए केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश, चंडीगढ़, पंजाब एवं हरियाणा में गेहूं खरीद मानकारों में छूट दी हुई है।

केंद्र सरकार ने रबी विपणन सीजन 2023-234 के लिए गेहूं का एमएसपी 110 रुपये बढ़ाकर 2,125 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है, जबकि रबी विपणन सीजन 2022-23 में एमएसपी 2,015 रुपये प्रति क्विंटल था।

कृषि मंत्रालय के दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2022-23 में देश में गेहूं का उत्पादन 11.21 करोड़ टन होने का अनुमान है, जबकि इसके पिछले साल 10.77 करोड़ टन का उत्पादन हुआ था। 

चालू समर में दलहन तथा मोटे अनाजों की बुआई बढ़ी, तिलहन की घटी

नई दिल्ली। चालू समर सीजन में देशभर में दलहन के साथ ही मोटे अनाजों की बुआई आगे चल रही है, जबकि तिलहन की बुआई पिछले साल की तुलना में पिछड़ रही है।


कृषि मंत्रालय के अनुसार दलहन की बुआई चालू समर सीजन में 28.23 फीसदी बढ़कर 14.67 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 11.44 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई थी। चालू सीजन में उड़द की बुआई 2.90 लाख हेक्टेयर में और मूंग की 11.56 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 2.80 और 8.36 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई थी। अन्य दलहन की बुआई 0.20 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 0.28 लाख हेक्टेयर से कम है।

तिलहनी फसलों की बुआई चालू समर सीजन में घटकर 9.24 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 10.40 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। इस दौरान मूंगफली की बुआई 4.43 लाख हेक्टेयर में और शीशम की 4.29 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 5.26 और 4.16 लाख हेक्टेयर में हुई थी। अन्य तिलहनी फसलों में सनफ्लावर की बुआई 28 हजार हेक्टेयर में हुई है, जोकि पिछले साल की तुलना में कम है।

मोटे अनाजों की बुवाई चालू समर में बढ़कर 10.31 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई 9.94 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई थी। बाजरा की बुआई 4.12 लाख हेक्टेयर में और मक्का की 5.92 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 3.59 और 5.99 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई थी। ज्वार और रागी की बुआई क्रमश: 15 हजार और 12 हजार हेक्टेयर में ही हुई है।

21 अप्रैल 2023

वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान डीओसी का निर्यात 87 फीसदी बढ़ा - एसईए

नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान डीओसी का निर्यात 87 फीसदी बढ़कर 4,336,287 टन का हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में इनका निर्यात केवल 2,374,974 टन का ही हुआ था।


साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एसईए के अनुसार मार्च-23 में देश से डीओसी का निर्यात 138 फीसदी बढ़कर 575,958 टन का हुआ है, जबकि पिछले साल मार्च में इसका निर्यात केवल 242,043 टन का ही हुआ था।

मूल्य के हिसाब से सोया डीओसी और सरसों डीओसी का निर्यात बढ़कर वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान 11,401 करोड़ रुपये का हुआ है, जोकि इसके पिछले वित्त वर्ष के 5,607 करोड़ रुपये की तुलना से करीब 103 फीसदी ज्यादा है।

एसईए के अनुसार अप्रैल 2022 में सोयाबीन के दाम घरेलू बाजार में 7,640 रुपये प्रति क्विंटल के उच्चतम स्तर पर थे, जोकि घटकर 4,500 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। अत: कीमतों में आई गिरावट से सोयाबीन की पेराई ज्यादा हुई साथ ही सोया डीओसी का निर्यात भाव वाजिब हो गया। 13 अप्रैल, 2023 तक अर्जेंटीना सोया डीओसी की कीमत एक्स-रॉटरडैम 559 अमेरिकी डॉलर थी, जबकि भारतीय सोया डीओसी के दाम एक्स-कांडला 580 डॉलर प्रति टन थे।

भारतीय सोया डीओसी के प्रमुख आयातक देश दक्षिण पूर्व एशिया के हैं, जहां भारत छोटे लॉट में भी आपूर्ति कर सकता है। इसके अलावा, भारतीय सोया डीओसी गैर जीएमओ होने का भी फायदा है और कुछ यूरोपीय देशों और यूएसए द्वारा इसका आयात किया जा रहा है। डॉलर के मुकाबले रुपया होने के कारण भी निर्यात को बढ़ावा मिला।

एसईए के अनुसार वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान सरसों डीओसी के निर्यात ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है और इसने 2011-12 वित्त वर्ष के 12,48,000 टन के पहले के रिकॉर्ड निर्यात को तोड़ दिया है तथा वित्त वर्ष 2022-23 में 22,96,943 टन का निर्यात हुआ है। वर्तमान में भारत दक्षिण कोरिया, वियतनाम, थाईलैंड और अन्य सुदूर पूर्व देशों को 240 डॉलर प्रति टन, एफओबी पर भारतीय सरसों डीओसी का निर्यात सबसे सस्ता है। उधर हैम्बर्ग में सरसों डीओसी का एक्स-मिल भाव 349 डॉलर प्रति टन है। सरसों में तेल की मात्रा में बढ़ोतरी के साथ ही रिकार्ड सरसों डीओसी के निर्यात के कारण ही चालू रबी सीजन में देश में सरसों की बुआई बढ़कर 98.02 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले रबी सीजन में इसका की बुआई केवल 91.25 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

भारतीय बंदरगाह पर सोया डीओसी का भाव मार्च 23 में घटकर औसतन 556 डॉलर प्रति टन रह गया, जबकि मार्च 2022 में इसका दाम 888 डॉलर प्रति टन था। इसी तरह से सरसों डीओसी का भाव मार्च 23 में घटकर भारतीय बंदरगाह पर 243 डॉलर प्रति टन रह गया, जबकि पिछले साल मार्च 22 में इसका भाव 326 डॉलर प्रति टन था।

चालू फसल सीजन में 303 लाख गांठ कॉटन का उत्पादन अनुमान, पांचवी उत्पादन अनुमान में कटौती - उद्योग

नई दिल्ली। उद्योग ने चालू फसल सीजन 2022-23 में पांचवी बार कॉटन के उत्पादन अनुमान में कटौती की है। उद्योग द्वारा बुधवार को जारी उत्पादन अनुमान के अनुसार चालू फसल सीजन में कुल 303 लाख गांठ, एक गांठ-170 किलो कॉटन का उत्पादन होने का अनुमान है, जोकि चौथे आरंभिक अनुमान से 10 लाख गांठ कम है।


कृषि मंत्रालय के दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार चालू फसल सीजन 2022-23 में देश 337.23 लाख गांठ कॉटन का उत्पादन होने का अनुमान है।

कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सीएआई ने 14 नवंबर 2022 को देश में 344 लाख गांठ के कॉटन के उत्पादन का अनुमान जारी किया था। उद्योग ने 20 दिसंबर 2022 को कॉटन के आरंभिक उत्पादन अनुमान में 4.25 लाख गांठ कटौती की थी। उसके बाद 14 जनवरी 2023 को जारी किए गए अनुमान में 9.25 लाख गांठ कटौती कर कुल 330.50 लाख गांठ के उत्पादन का अनुमान जारी किया था। उद्योग ने फिर 14 फरवरी 2023 को जारी किए गए अनुमान में 9 लाख गांठ की कटौती कर कुल उत्पादन का अनुमान 321.50 लाख गांठ होने का अनुमान लगाया था। इसके बाद 14 मार्च को जारी किए गए, अनुमान में 8.5 लाख टन की कटौती कर कुल उत्पादन 313 लाख गांठ हो का जारी किया था।  

सीएआई के अनुसार चालू फसल सीजन में कॉटन का आयात 15 लाख गांठ ही होने का अनुमान है, जबकि पहले 12 लाख गांठ के आयात का अनुमान था। अत: आयात में तीन लाख गांठ की बढ़ोतरी के आसार है। मालूम हो कि पिछले फसल सीजन में 14 लाख गांठ का आयात हुआ था। पहली अक्टूबर 22 से 31 मार्च 2023 तक 6.50 लाख गांठ कॉटन भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच चुकी है।

कॉटन का निर्यात चालू सीजन में घटकर 25 लाख टन ही होने का अनुमान है, जोकि पिछले इसके पहले के अनुमान 30 लाख गांठ से पांच लाख गांठ कम है। पिछले फसल सीजन में 43 लाख गांठ का निर्यात हुआ था। पहली अक्टूबर से 31 मार्च 2023 तक 10.50 लाख गांठ कॉटन का ही निर्यात हुआ है।

चालू फसल सीजन 2022-23 में पंजाब में कपास का उत्पादन 2.50 लाख गांठ, हरियाणा में 11 लाख गांठ, अपर राजस्थान में 17 लाख गांठ तथा लोअर राजस्थान में 10.50 लाख गांठ होने का अनुमान है। अतः: उत्तर भारत के राज्यों में कपास का उत्पादन 41 लाख गांठ होने का अनुमान है।

प्रमुख कपास उत्पादक राज्य गुजरात में 92 लाख गांठ, महाराष्ट्र 75 लाख गांठ एवं मध्य प्रदेश में 19 लाख गांठ के उत्पादन का अनुमान है।

दक्षिण भारत के राज्यों में तेलंगाना में 33 लाख गांठ, आंध्र प्रदेश में 11 लाख गांठ एवं कर्नाटक में 20 लाख गांठ के अलावा तमिलनाडु में 5.50 लाख कॉटन के उत्पादन का अनुमान है। इसके अलावा ओडिशा में 3.50 लाख गांठ तथा अन्य राज्यों में 3 लाख गांठ कॉटन का उत्पादन होने का अनुमान है।

पहली अक्टूबर 2022 से शुरू हुए चालू फसल सीजन के पहले पांच महीनों अक्टूबर से 31 मार्च 23 के दौरान 202.54 लाख गांठ की आवक ही उत्पादक मंडियों में हुई है।

चालू पेराई सीजन के अंत में 30 नवंबर 2023 को कॉटन का बकाया स्टॉक 13.89 लाख गांठ बचने का अनुमान है।

चालू पेराई सीजन में अप्रैल मध्य तक चीनी का उत्पादन 5 फीसदी घटा- इस्मा

नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2022 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन 2022-23 के पहले साढ़े छह महीनों पहली अक्टूबर 2022 से 15 अप्रैल 2023 तक चीनी का उत्पादन 5.38 फीसदी कम होकर 310 लाख टन का ही हुआ है, जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में इसका उत्पादन 328.7 लाख टन का हो चुका था।


चीनी उद्योग के शीर्ष संगठन इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन, इस्मा के अनुसार उत्तर प्रदेश में चालू पेराई सीजन में 15 अप्रैल 2023 तक 96.6 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 94.4 लाख टन से थोड़ा ज्यादा है।

महाराष्ट्र में चालू पेराई सीजन में चीनी का उत्पादन 16.99 फीसदी घटकर 15 अप्रैल 2023 तक 105 लाख टन का ही हुआ है, जबकि पिछले पेराई सीजन में इस समय तक राज्य में 126.5 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका था।

कर्नाटक में चालू पेराई सीजन में 15 अप्रैल 2023 तक चीनी का उत्पादन घटकर 55.3 लाख टन का ही हुआ है जोकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि के 58 लाख टन से कम है।

देश के अन्य राज्यों में चालू पेराई सीजन में 15 अप्रैल 2023 तक चीनी का उत्पादन बढ़कर 54.1 लाख टन का हो चुका है, जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में इन राज्यों में केवल 49.8 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था।

जनवरी में इस्मा ने विपणन सीजन 2022-23 में चीनी के उत्पादन अनुमान को 365 लाख टन से घटाकर 340 लाख टन कर दिया था जबकि विपणन सीजन 2021-22 में देश में चीनी का उत्पादन 358 लाख टन का हुआ था।

इस्मा के अनुसार 15 अप्रैल, 2023 तक देशभर में 132 चीनी मिलों में पेराई चल रही हैं, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 305 मिलों में पेराई चल रही थी। महाराष्ट्र में पिछले साल इस समय तक 153 मिलों में पेराई चल रही थी जोकि इस समय सभी मिलों में पेराई बंद हो चुकी हैं। वहीं उत्तर प्रदेश में पिछले साल की 68 चीनी मिलों के मुकाबले इस साल 77 मिलें पेराई अभी भी कर रही हैं।

17 अप्रैल 2023

अप्रैल से फरवरी के दौरान बासमती एवं गैर बासमती चावल का निर्यात क्रमश: 18 एवं 3 फीसदी बढ़ा

नई दिल्ली।  वित्त वर्ष 2022-23 के पहले 11 महीनों अप्रैल से फरवरी के दौरान जहां बासमती चावल के निर्यात में 17.71 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, वहीं इस दौरान गैर बासमती चावल का निर्यात 2.89 फीसदी बढ़ा है।


वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार वित्त वर्ष 2022-23 के अप्रैल से फरवरी के दौरान बासमती चावल का निर्यात बढ़कर 41 लाख टन का हो चुका है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात केवल 34.83 लाख टन का ही हुआ था।

गैर बासमती चावल का निर्यात वित्त वर्ष के अप्रैल से फरवरी के दौरान 2.89 फीसदी बढ़कर 160.92 लाख टन का हो चुका है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात केवल 156.40 लाख टन का ही हुआ था।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार के अनुसार मूल्य के हिसाब से वित्त वर्ष 2022-23 के अप्रैल से फरवरी के दौरान बासमती चावल का निर्यात बढ़कर 34,405 करोड़ रुपये का हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात केवल 22,941 करोड़ रुपये का ही हुआ था।

गैर बासमती चावल का निर्यात वित्त वर्ष के अप्रैल से फरवरी के दौरान मूल्य के हिसाब से बढ़कर 45,931 करोड़ रुपये का हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात केवल 41,361 करोड़ रुपये का ही हुआ था।

निर्यात में हुई बढ़ोतरी से घरेलू मंडियों में बासमती चावल की कीमतें तेज बनी हुई है। दिल्ली के नया बाजार में बुधवार को बासमती सेला चावल का भाव 8400 से 8500 रुपये और इसके स्टीम चावल का भाव 9600 से 9700 रुपये प्रति क्विंटल रहा। इस दौरान पूसा 1,509 किस्म के सेला चावल का भाव 7900 से 8000 रुपय और इसके स्टीम चावल का दाम 9300 से 9400 रुपये प्रति क्विंटल है।

चालू तेल वर्ष के पांच महीनों में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 22 फीसदी बढ़ा - एसईए

नई दिल्ली। चालू तेल वर्ष 2022-23 (नवंबर-22 से अक्टूबर-23) के पांच महीनों नवंबर एवं मार्च में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात इसके पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 22 फीसदी बढ़कर 7,060,193 टन का हुआ है। जबकि पिछले साल नवंबर से फरवरी के दौरान इनका आयात 5,795,728 टन का हुआ था।


सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एसईए के अनुसार चालू तेल वर्ष 2022-23 के मार्च महीने में देश में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 6 फीसदी बढ़कर 1,172,293 टन का हुआ है, जबकि पिछले साल मार्च-22 में इनका आयात 1,104,570 टन का हुआ था।

एसईए के अनुसार मार्च 2023 में देश में फरवरी 2023 की तुलना में वनस्पति तेलों का आयात 8 फीसदी बढ़ गया। इस दौरान पाम तेल का आयात 5.86 लाख टन से 24 फीसदी बढ़कर 7.28 लाख टन को हो गया। हालांकि सोयाबीन तेल का आयात 27 फीसदी घटकर 3.56 लाख टन की तुलना में 2.59 लाख टन का रह गया। सूरजमुखी तेल का आयात इस दौरान पांच फीसदी कम होकर 1.57 लाख टन के मुकाबले 1.48 लाख टन का ही हुआ।

चालू तेल वर्ष के पहले पांच महीनों में आरबीडी पामोलिन का आयात बढ़कर 9.89 लाख टन का हो गया, जो कुल पाम तेल के आयात का लगभग 22 फीसदी है। अत: आरबीडी पामोलिन का आयात बढ़ने से घरेलू रिफाइनिंग उद्योग को नुकसान हो रहा है। इसलिए आरबीडी पामोलिन पर 12.5 फीसदी आयात शुल्क के साथ ही 7.5 फीसदी अतिरिक्त कृषि उपकर लगाकर सीपीओ और रिफाइंड पामोलिन/पाम ऑयल के बीच शुल्क अंतर को मौजूदा 7.5 फीसदी से बढ़ाकर कम से कम 15 फीसदी करने की जरूरत है।

फरवरी के मुकाबले मार्च में आरबीडी एवं क्रूड पाम तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। मार्च में भारतीय बंदरगाह पर आरबीडी पामोलिन का भाव तेज होकर 1,006 डॉलर प्रति टन हो गया, जबकि फरवरी में इसका भाव 1,002 डॉलर प्रति टन था। इसी तरह से क्रूड पाम तेल का भाव मार्च में बढ़कर 1,024 डॉलर प्रति टन हो गया, जबकि फरवरी में इसका भाव 1,015 डॉलर प्रति टन था। हालांकि क्रूड सोयाबीन तेल का भाव फरवरी के 1,274 डॉलर से घटकर मार्च में भारतीय बंदरगाह पर 1,155 डॉलर प्रति टन रह गया। क्रूड सनफ्लावर तेल का भाव फरवरी के 1,224 डॉलर प्रति टन से घटकर मार्च में 1,108 डॉलर प्रति टन रह गया।