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22 अक्टूबर 2016

डाकघरों के बाद अब खादी भंडारों पर बिकेंगी दालें

आर एस राणा
केंद्र सरकार डाकघरों के बाद अब खादी भंडार की दुकानों के जरिये दालें विशेष रूप से चने की दाल की बिक्री करने की योजना बना रही है। इस योजना का मकसद देश में दालों की कीमतें नियंत्रित करना है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि जिंस एक्सचेंज नैशनल कमोडिटी ऐंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज ऑफ इंडिया (एनसीडीईएक्स) के जरिये भी बड़ी मात्रा में दालों की बिक्री की जाएगी। इस पहल का मकसद राज्य सरकारों के प्रशासनिक तंत्र को किनारे करते हुए उपभोक्ताओं तक सस्ती दालें पहुंचाना है क्योंकि कुछ राज्य आवंटित दालें लेने के इच्छुक ही नहीं हैं।
डाघकरों के जरिये दालों की बिक्री 1 नवंबर से देश के चुनिंदा डाघकरों के जरिये करने का फैसला लिया गया है। देश में 1,54,000 से अधिक डाकघर हैं, जिनमें से 1,30,000 से अधिक डाकघर सुदूरवर्ती ग्रामीण इलाकों में हैं। उपभोक्ता मामलों के सचिव हेम पांडे की अध्यक्षता वाली अंतर-मंत्रालय समिति ने नई दिल्ली में हुई अपनी बैठक में यह फैसला लिया। इस बैठक में खाद्य, उपभोक्ता मामले, कृषि, वाणिज्य और वित्त मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
पिछले एक महीने के दौरान दालों, विशेष रूप से चने की दाल के दाम देश के खुदरा बाजारों में करीब 20 से 30 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ गए हैं। चने की आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए समिति ने खुदरा वितरण के लिए सरकारी एजेंसियों को और स्टॉक मुहैया कराने का फैसला किया है। केंद्र सरकार पिछले कई महीनों से राज्य सरकारों और नेफेड  एवं मदर डेयरी जैसी सरकारी एजेंसियों को खुदरा वितरण के लिए अपने बफर स्टॉक से अरहर और उड़द की दालें मुहैया करा रही है। ये दालें रियायती दरों पर उपलब्ध कराई जा रही हैं ताकि उपभोक्ताओं को ऊंची कीमतों की मार न झेलनी पड़े।
सरकार ने इस साल 20 लाख टन दालों के बफर स्टॉक का लक्ष्य तय किया है। ये दालें घरेलू बाजार में किसानों से खरीदी जा रही हैं। इसके अलावा आयात भी किया जा रहा है। सरकार ने चालू खरीफ सीजन में 50,000 टन दालों की खरीद का लक्ष्य तय किया है। अब तक 500 खरीद केंद्र खोले जा चुके हैं । ......आर एस राणा

21 अक्टूबर 2016

ब्राजील में सोयाबीन का उत्पादन ज्यादा होने का अनुमा

आर एस राणा
नई दिल्ली। फसल सीजन 2016-17 में ब्राजील में सोयाबीन का उत्पादन बढ़कर 104 मिलियन टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसका उत्पादन 95.5 मिलियन टन का हुआ था। माना जा रहा है कि चालू सीजन में मौसम फसल के अनुकूल रहा है जबकि पिछले साल सूखे का असर था।..............आर एस राणा

सोने और चांदी में निवेश

निवेश के लिहाज से दिवाली को शुभ माना जाता है ऐसे में इस दिवाली सोने और चांदी में निवेश कितना फलदायी  होगा । सोने के घरेलू फंडामेंटल्स की बात करें तो ज्वेलरी डिमांड 7 साल के निचले स्तर पर दिख रही है। पहली छमाही में सोने की 186.3 टन की डिमांड थी। लेकिन अप्रैल के बाद दाम बढ़ने से मांग घटी है। आंकड़ों के मुताबिक सोने की निवेश मांग करीब 20 फीसदी घटी है।

गोल्ड ज्वेलरी डिमांड की बात करें तो भारत और चीन में मांग 15-20 फीसदी कम हुई है। वहीं खाड़ी देशों में ज्वेलरी डिमांड 22 फीसदी घटी है। यूरोप और यूएस में ज्वेलरी की डिमांड बरकरार है।
 गोल्ड ईटीएफ का ट्रेंड देखें तो 2013-14 में गोल्ड ईटीएफ से 2,293 करोड़ रुपये की निकासी हुई थी। इसी तरह 2014-15 में 1,475 करोड़ रुपये की और 2015-16 में 903 करोड़ रुपये की निकासी हुई थी। जबकि 2016-17 में सितंबर तक गोल्ड ईटीएफ से 539 करोड़ रुपये की निकासी हो चुकी है।
चालू साल की बात करें तो गोल्ड ईटीएफ से अप्रैल में 69 करोड़ रुपये की, मई में 79 करोड़ रुपये की, जून में 80 करोड़ रुपये की, जुलाई में 183 करोड़ रुपये की, अगस्त में 51 करोड़ रुपये की और सितंबर में 77 करोड़ रुपये की निकासी हुई है। पिछली दिवाली से अब तक मिले रिटर्न की बात करें तो सोना ने 20 फीसदी, चांदी ने 22 फीसदी, सेंसेक्स ने 8 फीसदी और निफ्टी ने अब तक 11 फीसदी रिटर्न दिया है।

रबी फसलों की बुवाई पिछड़ी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी में सितंबर महीने में हुई कम बारिष के साथ ही मौसम गर्म होने का असर रबी फसलों की बुवाई पर पड़ा है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू रबी में अभी तक देष भर में केवल 7.45 लाख हैक्टेयर में ही रबी फसलों की बुवाई हो पाई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 32.19 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार अभी बुवाई चालू ही हुई है तथा आगे बुवाई में तेजी आयेगी।
रबी दलहन की बुवाई चालू सीजन में अभी तक केवल 2.53 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 11.07 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। इसी तरह से रबी तिलहन की बुवाई अभी तक केवल 0.80 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 1.15 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुवाई चालू रबी में अभी तक 2.17 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 9.67 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।
रबी की प्रमुख फसल गेहूं की बुवाई अभी तक 0.05 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 0.19 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। मोटे अनाजों की बुवाई भी चालू रबी में अभी तक केवल 2.96 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुवाई 16.18 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।.........आर एस राणा

20 अक्टूबर 2016

केंद्र सरकार 90 हजार चना आयात करेगी

आर एस राणा
नई दिल्ली। महंगाई से निपटने के लिए केंद्र सरकार सार्वजनिक कंपनी एमएमटीसी के माध्यम से 90 हजार चना का आयात करेगी। केंद्र सरकार ने दलहन के साथ ही चीनी की कीमतों की समीक्षा की, तथा त्यौहारी सीजन में दलहन और चीनी की कीमतों में तेजी नहीं आये, इसके लिए राज्यों को आवष्यक कदम उठाने को कहा।
पिछले दो महीनों में चना के दाम बढ़कर करीब 40 फीसदी बढ़ चुके हैं। दिल्ली में चना 12,000 रुपये प्रति क्विंटल से उपर हो गया है।
त्यौहारी सीजन में चीनी की कीमतें भी सरकार के लिए चिंता का सबब बनी हुई है। उच्चाधिकारियों की बैठक में चीनी की कीमतों की भी समीक्षा की गई। सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार चीनी पर आयात षुल्क में कमी भी कर सकती है, इस समय चीनी पर 40 फीसदी आयात षुल्क है। इसके अलावा सरकार ने राज्यों को चीनी के साथ ही दलहन की कीमतों को काबू रखने के लिए स्टॉक लिमिट लगाने की मांग की है।....आर एस राणा

पांच नवंबर से होगी महाराष्ट्र में गन्ने की पेराई

आर एस राणा
नई दिल्ली। महाराष्ट्र में गन्ने की पेराई पांच नवंबर से आरंभ हो जायेगी। राज्य के मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठका में यह निर्णय लिया गया। सूत्रों के अनुसार राज्य में चीनी का उत्पादन घटकर 50 लाख टन ही होने का अनुमान लगाया गया है जबकि पिछले साल 84 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। इस बार राज्य में गन्ने की बुवाई 6.33 लाख हैक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछली बार इसकी बुवाई 9.87 लाख हैक्टेयर में हुई थी।
पहले राज्य सरकार ने गन्ने की पेराई पहली दिसंबर से करने की घोषणा की थी जिसके खिलाफ चीनी कपंनियों ने राज्य सरकार पर दबाव बनाया कि दिसंबर तक गन्ने का वजन कम हो जायेगा, जिसके कारण रिकवरी में कमी आयेगी। उधर कर्नाटक में पहली नवंबर से गन्ने की पेराई होगी। ऐसे में चीनी मिलों को यह भी डर था कि अगर पेराई देरी से आरंभ की तो सीमावृति क्षेत्रों का गन्ना कर्नाटका की मिलों में चला जायेगा।......आर एस राणा

कच्चे तेल का दाम पिछले 15 महीने के ऊपरी स्तर पर

ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल का दाम पिछले 15 महीने के ऊपरी स्तर पर चला गया है। अमेरिका में भंडार घटने और डॉलर में गिरावट से इसकी कीमतों को सपोर्ट मिला है। हालांकि ऊपरी स्तर से हल्का दबाव भी दिख रहा है। लेकिन इसके बावजूद ब्रेंट का दाम 52.5 डॉलर के ऊपर है। जबकि नायमैक्स क्रूड में 51.5 डॉलर के पास कारोबार हो रहा है।

दरअसल अमेरिका में कच्चे तेल का भंडार 52 लाख बैरल गिर गया है। वहीं सोने में हल्की बढ़त है। कॉमैक्स पर इसका दाम 1270 डॉलर के ऊपर है। चांदी में भी तेजी  का  रुख है। बाजार की नजर आज अमेरिका में जारी होने वाले बेरोजगारी के साप्ताहिक आंकड़ों पर है। इससे पहले डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हो गया है।