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13 जून 2020

उत्तर प्रदेश में गेहूं की खरीद तय लक्ष्य के 50 फीसदी पर ही पहुंची, सरकार ने 30 जून तक बढ़ाई समय सीमा

आर एस राणा
नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े गेहूं उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में चालू रबी सीजन में गेहूं का उत्पादन बढ़कर 363 लाख टन होने का अनुमान है, लेकिन सरकारी खरीद तय लक्ष्य 55 लाख टन के 50 फीसदी तक ही पहुंच पाई है, जोकि पिछले साल हुई कुल खरीद से भी करीब 9.40 लाख टन कम है। राज्य सरकार ने खरीद की समय सीमा को बढ़ाकर 30 जून कर दिया है, लेकिन जिस गति से खरीद हो रही है उससे तय लक्ष्य तक पहुंच पाना मुश्किल लग रहा है।
उत्तर प्रदेश के खाद्य एवं रसद विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार चालू रबी में राज्य से 27.60 लाख टन गेहूं की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर हो चुकी है जबकि चालू रबी में खरीद का लक्ष्य 55 लाख टन का तय किया गया है। उन्होंने बताया कि कोरोना वायरस के कारण हुए लॉकडाउन की वजह से चालू रबी में राज्य की मंडियों से गेहूं की खरीद पहली अप्रैल के बजाए 15 अप्रैल से शुरू हुई थी, इसलिए राज्य सरकार ने खरीद की समय सीमा को बढ़ाकर 30 जून 2020 कर दिया है जबकि पहले खरीद 15 जून तक की जानी थी। उन्होंने बताया कि अभी तक राज्य के 5.23 लाख टन किसानों से गेहूं की खरीद हुई है।
7 जून तक 372.21 लाख टन गेहूं खरीदा जा चुका है
केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री राम विलास पासवान ने सोमवार को एक ट्वीट के जरिए बताया कि रबी सीजन 2020-21 के लिए तय खरीद लक्ष्य के तहत किसानों से गेहूं और चावल की खरीद का काम जारी है। उन्होंने कहा कि भारतीय खाद्य निगम ने 7 जून तक 372.21 लाख टन गेहूं और 106.34 लाख टन धान की खरीद कर ली है। चालू रबी में गेहूं की खरीद का 407 लाख टन का लक्ष्य तय किया गया है जबकि पिछले रबी में कुल खरीद 341.32 लाख टन की हुई थी।
खरीद में पंजाब, मध्य प्रदेश और हरियाणा की हिस्सेदारी ज्यादा
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के अनुसार चालू रबी में गेहूं की खरीद में सबसे ज्यादा भागीदारी पंजाब की 127.12 लाख टन, मध्य प्रदेश की 126.71 लाख टन, हरियाणा की 73.98 लाख टन की है। राजस्थान से समर्थन मूल्य पर 16.03 लाख टन और उत्तराखंड से 35 हजार टन, गुजरात से 33 हजार टन, चंडीगढ़ से 11 हजार टन, बिहार से चार हजार और हिमाचल प्रदेश से तीन हजार टन गेहूं खरीदा गया है। पंजाब से चालू रबी में 135 लाख टन, हरियाणा में 95 लाख टन, मध्य प्रदेश में 100 लाख टन, उत्तर प्रदेश में 55 लाख टन और राजस्थान में 17 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद का लक्ष्य तय किया गया था।
गेहूं का उत्पादन अनुमान ज्यादा
कृषि मंत्रालय के तीसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार चालू रबी में गेहूं का रिकार्ड 10.71 करोड़ टन उत्पादन का अनुमान है जोकि पिछले साल के 10.36 करोड़ टन से अधिक है। चालू रबी में गेहूं का समर्थन मूल्य 1,925 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जबकि पिछले रबी सीजन में 1,840 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं की खरीद हुई थी।.................  आर एस राणा

चीनी का निर्यात 50 लाख टन भी मुश्किल, ब्राजील से मिल रही है शिकस्त

आर एस राणा
नई दिल्ली। देश से चालू पेराई सीजन 2019-20 (अक्टूबर-सितंबर) में चीनी का कुल निर्यात 50 लाख टन से भी कम रहने का अनुमान है पेराई सीजन के पहले आठ महीनों में केवल 42 लाख टन चीनी का ही निर्यात हो पाया है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भारतीय चीनी को ब्राजील से कड़ी शिकस्त मिल रही है, ऐसे में अगले चार महीनों में आठ लाख टन निर्यात की संभावना कम है। केंद्र सरकार ने चालू पेराई सीजन के लिए 60 लाख टन चीनी के निर्यात का लक्ष्य तय किया था।
कोरोना वायरस के कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट के बाद ब्राजील ने गन्ने की एथनॉल का उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया है, जिस कारण ब्राजील से चीनी के निर्यात में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। जानकार बताते हैं कि एक तरफ कच्चे तेल की मांग घटने से एथनॉल की मांग कम हो गई, वहीं चीनी का दाम बढ़ने से एथनॉल के बजाय चीनी बनाने में लाभ ज्यादा होने लगा। यही कारण है कि ब्राजील ने एथनॉल के बजाए चीनी के उत्पादन पर जोर दिया।
ब्राजील की करीब 100 लाख टन चीनी वैश्विक बाजार में आ चुकी है
उद्योग संगठन नेशनल फेडरेशन ऑफ को-ऑपरेटिव शुगर फैक्टरीज (एनएफसीएसएफ) के प्रबंध निदेशक प्रकाश नाइकनवरे ने बताया, ब्राजील की चीनी अंतर्राष्ट्रीय बाजार में आने के बाद भारत से निर्यात सौदों में पहले की तुलना में कमी आई है इसलिए चालू सीजन में देश से चीनी करा निर्यात 50 लाख टन से कम ही रहने की आशंका है। उन्होंने बताया कि ब्राजील की करीब 100 लाख टन चीनी वैश्विक बाजार में आ चुकी है। भारत सरकार ने चालू पेराई सीजन 2019-20 में चीनी मिलों को एमएईक्यू यानी अधिकतम स्वीकार्य निर्यात परिमाण के तहत 60 लाख टन तक चीनी निर्यात की अनुमति दी हुई है जिस पर केंद्र सरकार चीनी मिलों को प्रति टन 10,448 रुपये की दर से निर्यात सब्सिडी दे रही है। नाइकनवरे ने बताया कि न सिर्फ निर्यात कम होने की उम्मीद है, बल्कि कोरोना वायरस के कारण अप्रैल और मई में घरेलू खपत भी कम होने से चालू सीजन में पूर्व अनुमान से करीब 20 लाख टन कम रह सकती है।
कोरोना वायरस के कारण बड़ी कंपनियों की मांग पिछले दो महीनों में सामान्य से कम रही
उन्होंने कहा कि आइस्क्रीम और शीतल पेय कंपनियों की चीनी में गर्मी में मांग बढ़ती है है वह इस साल कोरोना वायरस के कारण नहीं बढ़ी। वैसे भी चीनी की कुल खपत में 60 फीसदी हिस्सेदारी बड़ी कंपनियों की ही होती है। उन्होंने कहा कि होटल, रेस्तरां, मॉल, कैंटीन आदि लॉकडाउन के दौरान बंद होने से आइस्क्रीम और शीतल पेय कंपनियों की मांग सामान्य से काफी कम रही। हालांकि होटल, रेस्तरां व कैंटीन अब कई जगहों पर खुल जायेंगे, लेकिन उन्होंने कहा कि गरमी की मांग तो निकल ही चुकी है। हालांकि आगे चीनी की मांग में सुधार आयेगा, जिससे कीमतें भी बढ़ेगी लेकिन घरेलू खपत फिर भी 240 लाख टन से ज्यादा होने की उम्मीद नहीं है।
चीनी की सालाना घरेलू खपत 240 लाख टन होने का अनुमान
केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने भी पिछले दिनों जारी एक बयान में कहा कि, चालू सीजन 2019-20 में चीनी की घरेलू खपत 240 लाख टन और निर्यात करीब 50 लाख टन रह सकता है। चालू सीजन में चीनी का उत्पादन 270 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पेराई सीजन के आरंभ पहली अक्टूबर 2019 को पिछले साल का बकाया 145 लाख टन चीनी का बकाया स्टॉक भी बचा हुआ था। ऐसे में आगामी पेराई सीजन के आरंभ में बकाया स्टॉक 125 लाख टन के आसपास बचने का अनुमान है।......... आर एस राणा

06 जून 2020

चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य में 200 रुपये की बढ़ोतरी संभव, कीमतों में आयेगा सुधार

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) में 200 रुपये प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी कर सकती है जिससे घरेलू बाजार चीनी की कीमतों में सुधार आने का अनुमान है। वैसे भी होटल, रेस्तरा और कैंटीन को खोलने की अनुमति मिल चुकी है जिससे आगे चीनी की खपत भी बढ़ेगी।
इस समय केंद्र सरकार ने चीनी का एमएसपी 3,100 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है इसमें अगर 200 रुपये की बढ़ोतरी की जा जाती है तो चीनी का न्यूनतम बिक्री भाव 3,300 रुपये प्रति क्विंटल हो जायेगा, मतलब एमएसपी से नीचे चीनी की बिक्री नहीं होगी। इसलिए आगामी दिनों में चीनी की कीमतों में सुधार आने का अनुमान है। नीति आयोग द्वारा गठित टास्कफोर्स ने भी एमएसपी में दो रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की सिफारिश की है।
चीनी का एमएसपी गन्ने के एफआरपी के अनुसार होता है तय
कारोबारी बताते हैं कि चीनी मिलें बहरहाल एमएसएपी बढ़ने का इंतजार कर रही हैं। बाजार सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, देश की राजधानी दिल्ली में बीते 15 दिनों में चीनी की थोक कीमतों में 150 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई है। दिल्ली में इस समय चीनी का थोक दाम 3,400-3,500 रुपये प्रति क्विंटल है जबकि खुदरा भाव 3,800-4,200 रुपये प्रति क्विंटल के बीच है। वहीं, उत्तर प्रदेश की निजी चीनी मिलों का एक्स-मिल रेट एम-30 सिंगल फिल्टर चीनी का 3,200-3,300 रुपये, जबकि सरकारी मिलों की चीनी का एक्स-मिल रेट 3,150-3,170 रुपये प्रति क्विंटल है। सूत्रों के अनुसार चीनी का एमएसपी गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य यानी एफआरपी के अनुसार तय होता है। इसलिए कृषि लागत और मूल्य आयोग यानी सीएसीपी द्वारा गन्ने के एफआरपी में वृद्धि को अगर सरकार मंजूरी देती है तो एमएसपी में भी वृद्धि तय है।
तेजी की संभावना के कारण मिलें कम कर रही है बिकवाली
दिल्ली के चीनी कारोबारी सुशील कुमार ने बताया कि यही कारण है कि चीनी मिलें अभी एमएसपी में वृद्धि का इंतजार कर रही है और चालू महीने का कोटा जल्द निकालने में दिलचस्पी नहीं ले रही है। चालू महीने में चीनी मिलों को बिक्री के लिए सरकार ने 18.5 लाख टन का कोटा तय किया हुआ है। उधर, अगले सप्ताह से होटल, रेस्तरा और कैंटीन को खोलने की इजाजत मिल चुकी है जिससे चीनी की मांग में थोड़ी वृद्धि होने की उम्मीद की जा रही है, जिससे कीमतों में भी हल्की तेजी रह सकती है। हाल ही, चीनी मिलों के संगठन इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन यानी इस्मा द्वारा जारी उत्पादन अनुमान के अनुसार देश में इस साल चीनी का उत्पादन 270 लाख टन हो सकता है।............ आर एस राणा

मई में खाद्य एवं अखाद्य तेलों के आयात में 40 फीसदी की कमी आई

आर एस राणा
नई दिल्ली। कोरोना वायरस के कारण विश्वभर में चल रहे लॉकउाडन का असर खाद्य एवं अखाद्य तेलों के आयात पर भी पड़ा है। मई महीने में देश में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 40 फीसदी घटकर 7,07,478 टन का ही हुआ है जबकि पिछले साल मई में 11,80,789 टन का आयात हुआ था।
सॉल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार लॉकडाउन के कारण होटल, रेस्त्रा, केंटीन आदि बंद होने के साथ ही सार्वजनिक समारोहों का आयोजन नहीं होने से पिछले दो महीनों अप्रैल और मई में खाद्य एवं अखाद्य तेलों की मांग में भी कमी आई है, साथ ही आयात भी कम हुआ है। एसईए के अनुसार चालू तेल वर्ष नवंबर-19 से मई-20 के पहले सात महीनों में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 18 फीसदी घटकर 68,89,662 टन का ही हुआ है जबकि पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में इनका आयात 83,84,616 टन का हुआ था।
आरबीडी पॉमोलीन के आयात में पिछले वर्ष की तुलना में 96 फीसदी घटा
एसईए के अनुसार मई में आरबीडी पॉमोलीन के आयात में पिछले वर्ष की तुलना में 96 फीसदी घटा है। मई 2020 में आरबीडी पॉमोलीन का आयात केवल 16,250 टन का हुआ है जबकि पिछले साल मई में इसका आयात 3,71,060 टन का हुआ था। सीपीओ एवं सीपीकेओ का आयात मई 2020 में 17 फीसदी घटकर 3,70,756 टन का हुआ है जबकि पिछले साल मई में 4,47,089 टन का आयात हुआ था। सोयाबीन तेल के आयात में भी मई में कमी दर्ज की गई, लेकिन सनफ्लावर तेल के आयात में इस दौरान दो फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। ....... आर एस राणा

गेहूं की सरकारी खरीद 366 लाख टन के पार, उत्तर प्रदेश में तय लक्ष्य के 54 फीसदी पर ही पहुंची

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी विपणन सीजन 2020-21 में 3 जून तक गेहूं की खरीद 366.32 लाख टन पर पहुंच गई है, जोकि पिछले साल हुई कुल खरीद 341.32 लाख टन से 6.82 फीसदी ज्यादा है। मध्य प्रदेश में जहां खरीद तय लक्ष्य से ज्यादा हो चुकी है वहीं सबसे बड़े उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश से तय किए लक्ष्य की 54 फीसदी ही हो पाई है।
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के अनुसार चालू रबी में खरीद का लक्ष्य 407 लाख टन का तय किया गया है। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री राम विलास पासवान ने गुरूवार को एक ट्वीट के जरिए बताया कि रबी सीजन 2020-21 के लिए तय खरीद लक्ष्य के तहत किसानों से गेहूं और चावल की खरीद का काम जारी है। उन्होंने कहा कि भारतीय खाद्य निगम ने 3 जून तक 366.32 लाख टन गेहूं की खरीद कर ली है तथा सभी खरीद केंद्रों पर कोविड-19 संक्रमण से सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है।
खरीद में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी पंजाब, मध्य प्रदेश और हरियाणा की
एफसीआई के अनुसार अभी तक हुई खरीद में पंजाब से सबसे ज्यादा 127.68 लाख टन, मध्य प्रदेश में करीब 124.60 लाख टन और हरियाणा में 73.36 लाख टन, उत्तर प्रदेश से 25.33 लाख टन और राजस्थान से 14.53 लाख गेहूं की सरकारी खरीद हुई है। पिछले रबी सीजन में पंजाब से 129.12 लाख टन, हरियाणा से 93.20 लाख टन, मध्य प्रदेश से 67.25 लाख टन और उत्तर प्रदेश से 37 लाख टन तथा राजस्थान से 14.11 लाख टन गेहूं न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा गया था।
गेहूं का रिकार्ड 10.71 करोड़ टन उत्पादन का अनुमान
पंजाब से इस साल 135 लाख टन, हरियाणा में 95 लाख टन, मध्य प्रदेश में 100 लाख टन, उत्तर प्रदेश में 55 लाख टन और राजस्थान में 17 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद का लक्ष्य रखा गया है। कृषि मंत्रालय के तीसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार चालू रबी में गेहूं का रिकार्ड 10.71 करोड़ टन उत्पादन का अनुमान है जोकि पिछले साल के 10.36 करोड़ टन से अधिक है। चालू रबी में गेहूं का समर्थन मूल्य 1,925 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जबकि पिछले रबी सीजन में 1,840 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं की खरीद हुई थी।..... आर एस राणा

कैबिनेट ने आवश्यक वस्तु अधिनियम में बदलाव को दी मंजूरी, बहुत जरुरी होने पर ही लगेगी स्टॉक लिमिट

आर एस राणा
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में आवश्यक वस्तु अधिनियम में बदलाव को मंजूरी दे दी गई, यानी 65 साल से चला आ रहा यह अधिनियम अब बदला जाएगा। किसान अपनी मर्जी से कहीं भी अपनी जिंस बेच सकेगा तथा आवश्यक वस्तुओं खाद्य तेल, दलहन, आलू और प्याज तथा चीनी आदि पर बहुत जरुरी होने पर ही स्टॉक लिमिट लगाई जायेगी।
कैबिनेट ने कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अध्यादेश, 2020 को भी अनुमति दे दी। यह अध्यादेश कृषि उपज में बाधा मुक्त व्यापार सुनिश्चित करेगा। इसके साथ ही सरकार ने मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा अध्यादेश पर किसानों का (सशक्तिकरण और संरक्षण) समझौता अधिनियम, 2020 को भी अनुमति दी। इससे  प्रोसेसर, एग्रीगेटर, थोक व्यापारी, बड़े खुदरा विक्रेताओं और निर्यातकों के साथ जुड़ने के लिए किसानों को सशक्त बनाया जा सकेगा।
केवल अतिआवश्यक परिस्थितियों में ही स्टॉक लिमिट लगाई जायेगी
कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि आवश्यक वस्तु अधिनियम में बदलाव से किसान और व्यापारियों को कृषि उपज बेचने और खरीदने की छूट मिलेगी। उन्होंने बताया कि आवश्यक वस्तुओं अनाज, खाद्य तेल, दलहन, चीनी तथा आलू एवं प्याज आदि पर स्टॉक लिमिट को समाप्त कर दिया गया है, केवल अतिआवश्यक परिस्थितियों में ही स्टॉक लिमिट लगाई जायेगी। उन्होंने कहा कि यह फैसला कृषि क्षेत्र में बदलाव करते हुए देश के किसानों की मदद करने में एक लंबा रास्ता तय करेगा। तोमर ने कहा कि कैबिनेट ने कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अध्यादेश, 2020 को भी अनुमति दे दी। यह अध्यादेश कृषि उपज में बाधा मुक्त व्यापार सुनिश्चित करेगा। इसके साथ ही सरकार ने मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा अध्यादेश पर किसानों का (सशक्तिकरण और संरक्षण) समझौता अधिनियम, 2020 को भी अनुमति दी। इससे  प्रोसेसर, एग्रीगेटर, थोक व्यापारी, बड़े खुदरा विक्रेताओं और निर्यातकों के साथ जुड़ने के लिए किसानों को सशक्त बनाया जा सके।
?किसानों के लिए एक देश एक बाजार होगा
केद्रीय मंत्री, प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि हमने आवश्यक वस्तु अधिनियम में किसानों के अनुकूल संशोधन किए हैं। किसानों के हितों को देखते हुए आवश्यक वस्तु अधिनियम में बदलाव को मंजूरी दी है। अब किसान सीधे अपनी फसलें बेच सकेंगे तथा देश में किसानों के लिए एक देश एक बाजार होगा। उन्होंने कहा कि किसानों की यह मांग 50 सालों से थी जो आज पूरी हो गई। उन्होंने कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि अब किसानों को अपना उत्पाद ज्यादा दाम देने वालों को बेचने की आजादी मिल गई है। कोई निर्यातक प्रोसेसर है, तो उसको कृषि उपज दोनों के आपसी समझौते के तहत बेचने की सुविधा मिली है, जिससे सप्लाई चेन खड़ी होगी। भारत में पहली बार ऐसा किया गया है।.............  आर एस राणा

मसूर पर आयात शुल्क 20 फीसदी घटा, मोजांबिक से दो लाख टन दलहन आयात को मंजूरी

आर एस राणा
नई दिल्ली। घरेलू बाजार में अरहर, चना, मसूर और मूंग के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे या फिर इसके बराबर चल रहे हैं। इसके बावजूद केंद्र सरकार ने मसूर के आयात शुल्क में 20 फीसदी कटौती कर दी है। साथ ही मोजांबिक से डेढ़ लाख टन अरहर और 50 हजार टन मूंग और मटर आयात को मंजूरी दे दी है। इससे घरेलू बाजार में मसूर और अरहर की मौजूदा कीमतें और घटने के आसार बन गए हैं।
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार गैर अमेरिकी मसूर के आयात पर शुल्क 30 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी कर दिया है। अमेरिकी मसूर पर भी आयात शुल्क घटाकर 30 फीसदी किया गया है। विदेशी व्यापार महानिदेशालय द्वारा पहली जून 2020 को जारी अधिसूचना के अनुसार मोजांबिक से दो लाख टन दालों का आयात दोनों देशों की सरकारों के बीच हुए समझौते के तहत होगा।
आयात शुल्क में कटौती से मसूर की कीमतों में मंदा आने का अनुमान
मुंबई के एक दलहन कारोबारी ने बताया कि मसूर का आयात कनाडा और आस्ट्रेलिया से ही हो रहा है। कनाडा की मसूर के भाव कांडला बंदरगाह पर 5,400 रुपये और आस्ट्रेलिया की मसूर के भाव 5,500 रुपये प्रति क्विंटल हैं, जबकि मध्य प्रदेश की मंडियों में छोटी मसूर के भाव 4,900 से 5,000 रुपये और उत्तर प्रदेश की मंडियों में 4,800 से 5,000 रुपये प्रति क्विंटल हैं। केंद्र सरकार ने रबी विपणन सीजन 2020-21 के लिए मसूर का एमएसपी 4,800 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।
वित्त वर्ष 2019-20 में 6.50 लाख टन मसूर का आयात हुआ था, जबकि चालू वित्त वर्ष 2020-21 के पहले महीने अप्रैल में 40,000 टन का आयात हुआ है। लॉकडाउन के कारण अप्रैल में आयात कम रहा। उन्होंने बताया कि सरकार ने आयात शुल्क में कटौती कर दी है, तथा कनाडा में मसूर की नई फसल जुलाई के अंत में आएगी, ऐसे में आगे मसूर का आयात बढ़ने से घरेलू बाजार में इसकी कीमतों में मंदा आने की आशंका है।
म्यांमार से अरहर का आयात सस्ता
कर्नाटक की गुलबर्गा मंडी के दलहन कारोबारी चंद्रशेखर एस नादर ने बताया कि मोजांबिक से डेढ़ लाख टन अरहर और 50 हजार टन मूंग और मटर के आयात को जो मंजूरी दी गई है, वह चार लाख टन अरहर आयात, जिसे सरकार ने पहले मंजूरी दी थी, उससे अगल है। अत: चालू वित्त वर्ष में कुल 5.50 लाख टन अरहर का आयात होगा। म्यांमार से आयातित अरहर के भाव मुंबई बदंरगाह पर 4,800 से 4,900 रुपये प्रति क्विंटल हैं जबकि महाराष्ट्र की मंडियों में अरहर 4,800 से 5,000 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है। खरीफ विपणन सीजन 2019-20 के लिए अरहर का एमएसपी 5,800 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि हाल में आगामी खरीफ सीजन 2020-21 के लिए सरकार ने समर्थन मूल्य 6,000 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।
चना और मूंग के भाव उत्पादक मंडियों में समर्थन मूल्य से नीचे
केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2020-21 के लिए चार लाख टन अरहर, डेढ़ लाख टन मूंग, डेढ़ लाख टन उड़द तथा डेढ़ लाख टन मटर को मिलाकर कुल 7 लाख टन दलहन आयात को मंजूरी दी थी। बाद में उड़द के आयात कोटे की मात्रा को डेढ़ लाख टन से बढ़ाकर चार लाख टन कर दिया था। चना पर आयात शुल्क इस समय 50 फीसदी है। उत्पादक मंडियों में चना के भाव 3,800 से 4,000 रुपये और मूंग के 5,900 से 6,000 रुपये प्रति क्विंटल हैं। चना का समर्थन मूल्य 4,875 रुपये और मूंग का 7,050 रुपये प्रति क्विंटल है। मंडियों में चना और मूंग समर्थन मूल्य से 1,000 से 1,275 रुपये प्रति क्विंटल तक नीचे बिक रही है। नेफेड ने एमएसपी पर अभी तक 11.13 लाख टन चना और 5.12 लाख टन अरहर की खरीद की है। मूंग और मसूर की खरीद भी समर्थन मूल्य पर हो रही है, लेकिन सीमित मात्रा में।
दलहन के उत्पादन अनुमान में बढ़ोतरी
कृषि मंत्रालय के तीसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार चालू फसल सीजन 2019-20 में 230.1 लाख टन दालों का उत्पादन होने का अनुमान है, जो पिछले फसल सीजन में 220.8 लाख टन था। फसल सीजन 2017-18 में देश में दालों का रिकार्ड 254.2 लाख टन का उत्पादन हुआ था जबकि देश में दालों की सालाना खपत 245 से 250 लाख टन की ही होती है।............   आर एस राणा