कुल पेज दृश्य

06 जनवरी 2017

एग्री कमोडिटी में आगे की रणनीति कैसे बनाए

एग्री कमोडिटी दलहन, तिलहन, और मसालों के साथ ही गेहूं, मक्का, जौ, कपास, खल, बिनौला, ग्वार सीड, चीनी, और कपास आदि की कीमतों में कब आयेगी तेजी तथा आगे की रणनीति कैसे बनाये, भाव में कब आयेगी तेजी, किस भाव पर स्टॉक करने पर मिलेगा मुनाफा, क्या रहेगी सरकार की नीति, आयात-निर्यात की स्थिति के साथ ही विदेष में कैसी है पैदावार, इन सब की स्टीक जानकारी के लिए हमसे जुड़े............एग्री कमोडिटी की दैनिक रिपोर्ट के साथ ही मंडियों के ताजा भाव आपको ई-मेल से हिंदी में भेजे जायेंगे
एग्री जिंसों के अलावा किराना में हल्दी, जीरा, धनिया, लालमिर्च, इलायची, कालीमिर्च आदि की जानकारी भी हिंदी में ई-मेल के माध्यम से दी जायेगी। हमें ई-मेल करे या फिर फोन पर संपक करें।

............एक महीना रिपोर्ट लेने का चार्ज मात्र 1,000 रुपये, 6 महीने का 5,000 रुपये और एक साल का केवल 8,000 रुपये........

आर एस राणा
 rsrana2001@gmail.com
09811470207

रबी फसलों की बुवाई 600 लाख हैक्टेयर से ज्यादा, धान की रौपाई में कमी

गेहूं की बुवाई 300 लाख हैक्टेयर के पार, चना की रिकार्ड बुवाई
आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी सीजन में फसलों की बुवाई 600 लाख हैक्टेयर के पार पहुंच गई है जबकि गेहूं की बुवाई भी 300 लाख हैक्टेयर से ज्यादा हो चुकी है। दलहन की बुवाई चालू रबी में रिकार्ड 152.63 लाख टन हो गई है, वहीं चना की भी रिकार्ड बुवाई 96.83 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है। चालू रबी में जहां तिलहन की बुवाई में भी बढ़ोतरी हुई है, वहीं मोटे अनाजों के साथ ही धान की रौपाई पिछड़ी है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू रबी अभी तक देशभर में 602.75 लाख हैक्टेयर में फसलों की बुवाई हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुवाई 565.89 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। मंत्रालय के अनुसार रबी की प्रमुख फसल गेहूं की बुवाई बढ़कर 303.16 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 281.70 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हो पाई थी। सामन्यतः रबी में गेहूं की बुवाई 304.05 लाख हैक्टेयर में होती है।
रबी दहलन की बुवाई भी बढ़कर चालू सीजन में 152.63 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 134.56 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। रबी सीजन में दलहन की बुवाई औसतन 140.68 लाख हैक्टेयर में होती है। रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुवाई रिकार्ड 96.83 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 84.12 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। चना की बुवाई रबी में सामान्यतः 88.37 लाख हैक्टेयर मे ही होती है। मसूर की बुवाई भी बढ़कर चालू रबी में अभी तक 16.37 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 13.86 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। मटर की बुवाई भी चालू रबी में बढ़कर 11.07 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 9.26 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हो पाई थी। उड़द की बुवाई चालू रबी में पिछले साल की तुलना में बढ़ी है, लेकिन मूंग की बुवाई में कमी आई है।
रबी तिलहनों की बुवाई चालू सीजन में अभी तक 80.63 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 74.68 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी। रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों की बुवाई 69.53 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 62.76 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई थी। मूंगफली की बुवाई चालू रबी में बढ़कर 4.29 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 3.88 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी।
चालू रबी में मोटे अनाजों की बुवाई अभी भी पिछे चल रही है, अभी तक देषभर में केवल 53.60 लाख हैक्टेयर में ही मोटे अनाजों की बुवाई हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 57.40 लाख हैक्टेयर में इनकी बुवाई हो चुकी थी। मोटे अनाजों में सबसे ज्यादा कमी ज्वार की बुवाई में आई है। ज्वार की बुवाई चालू रबी में अभी तक केवल 31.05 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 36.60 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। रबी मक्का की बुवाई भी चालू सीजन में अभी तक 13.95 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 12.87 लख हैक्टेयर में इसकी बुवाई हुई थी। जौ की बुवाई चालू रबी में 8 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 7.17 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। धान की रोपाई चालू रबी में अभी तक केवल 12.74 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 17.56 लाख हैक्टेयर में धान की रोपाई हो चुकी थी।...............आर एस राणा

दिसंबर में चना का आयात बढ़ा, जनवरी में और बढ़ेगा

आर एस राणा
नई दिल्ली। घरेलू बाजार में चना की कीमतों में आई तेजी के कारण दिसंबर महीने में इसके आयात में भारी बढ़ोतरी हुई है। सूत्रों के अनुसार दिसंबर महीने में चने का आयात बढ़कर 1.37 लाख टन का हुआ है जबकि नवंबर महीने में इसका आयात केवल 53,936 टन का ही हुआ था, दिसंबर में चना का सबसे ज्यादा आयात आस्ट्रेलिया से हुआ है। दिसंबर 2015 में चना का आयात 1.20 लाख टन का हुआ था।
आस्ट्रेलिया में चना की नई फसल आने से आमतौर पर दिसंबर से आयात में बढ़ोतरी तो होती है लेकिन इस बार घरेलू बाजार में चना के दाम ज्यादा होने के आयात सौदे ज्यादा मात्रा में हुए हैं तथा जनवरी में आयात दिसंबर के मुकाबले लगभग दोगुना होने का अनुमान है। एक अनुमान के अनुसार जनवरी में चना का आयात बढ़कर 3 से 3.50 लाख टन होने का अनुमान है। नवंबर-दिसंबर में भारतीय आयातकों द्वारा चने के बड़ी मात्रा में आयात सौदे किए गए हैं।..........आर एस राणा

पैदावार में कमी की आशंका से केस्टर सीड में तेजी की संभावना

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू सीजन में केस्टर सीड की बुवाई में आई कमी से इसकी पैदावार में 18 से 20 फीसदी की कमी आने की आशंका है जबकि केस्टर तेल का निर्यात पिछले साल की तुलना में बढ़ने का अनुमान है। गुजरात की प्रमुख उत्पादक मंडियों में केस्टर सीड के भाव 3,650 से 3,700 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं तथा आगामी दिनों में इसके भाव बढ़कर 3,900 से 4,000 रुपये प्रति क्विंटल होने की संभावना है। यूरोप में नए साल की छुट्टियां समाप्त हो गई है ऐसे में आगामी दिनों केस्टर तेल में जहां चीन की आयात मांग बढ़ेगी, वहीं यूरोप की मांग भी बढ़ोतरी होगी।
चालू फसल सीजन 2016-17 में केस्टर सीड की बुवाई 24.2 फीसदी कम होकर केवल 8.40 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इसकी बुवाई 11.08 लाख हैक्टेयर में हुई थी। प्रमुख उत्पादक राज्य गुजरात में केस्टर सीड की बुवाई में 28 फीसदी की कमी आकर कुल बुवाई केवल 5.65 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। गुजरात में किसानों ने केस्टर सीड के बजाए मूंगफली और दलहन की बुवाई ज्यादा की थी। बुवाई में तो कमी आई ही, साथ ही मौसम भी फसल के अनुकूल नहीं रहा, जिसकी वजह से प्रति हैक्टयेर उत्पादकता में भी कमी आने की आशंका है।
साल्वेंट एक्सट्रेक्सन आफ इंडिया (एसईए) के अनुसार अक्टूबर के बजाए नवंबर महीने में केस्टर तेल के निर्यात में कमी आई है लेकिन चालू वित्त वर्ष 2016-17 के पहले आठ महीनों अप्रैल से नवंबर के दौरान कुल निर्यात पिछले साल की तुलना में ज्यादा ही हुआ है। नवंबर महीने में 35,608 टन केस्टर तेल का निर्यात हुआ है जबकि अक्टूबर महीन में निर्यात 47,211 टन का हुआ था। चालू वित्त वर्ष 2016-17 के अप्रैल से नवंबर के दौरान केस्टर तेल का निर्यात 3,43,766 टन का हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 3,43,082 टन का हुआ था। जानकारों का मानना है कि नवंबर-दिसंबर में निर्यात कम रहा है लेकिन जनवरी से निर्यात मांग में तेजी आने का अनुमान है, तथा चालू वित्त वर्ष में कुल निर्यात पिछले साल की तुलना में ज्यादा ही होने का अनुमान है।
एसईए के अनुसार फसल सीजन 2015-16 में केस्टर सीड का उत्पादन 14.22 लाख टन का हुआ था।.......आर एस राणा

ग्लोबल मार्केट में सोने की तेजी पर ब्रेक

अमेरिका में आज नॉन फार्म पेरोल डाटा आने वाला है और इससे पहले ग्लोबल मार्केट में सोने की तेजी पर ब्रेक लग गया है। कॉमैक्स पर सोना 1 महीने के ऊपरी स्तर से फिसल गया है। इसमें हल्की गिरावट के साथ कारोबार हो रहा है। इससे पहले कल जारी हुए आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका में दिसंबर का सर्विस सेक्टर की एक्टिविटी 1 साल के ऊपरी स्तर पर पहुंच गया है। वहीं पिछले हफ्ते बेरोजगारी भत्ता के लिए आवेदनों की संख्या में भारी गिरावट देखने को मिली और ये पिछले 43 साल के निचले स्तर पर आ गया है। ऐसे में आज अमेरिका में नॉन फार्म पेरोल डाटा करीब 1 लाख 78 हजार के आसपास आने की संभावना है। वहीं एसपीडीआर गोल्ड की होल्डिंग गिरकर 814 टन के नीचे आ गई है। लंदन मेटल एक्सचेंज पर कॉपर हल्की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है और इसी से चांदी को भी हल्का सपोर्ट है। वहीं नायमैक्स पर कच्चा तेल डेढ़ साल का रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद दबाव में कारोबार कर रहा है। आज डॉलर के मुकाबले रुपये में अच्छी रिकवरी आई है।

05 जनवरी 2017

राजस्थान में ग्वार उत्पादन घटकर 19.62 लाख टन होने का अनुमान

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू फसल सीजन 2016-17 में सबसे बड़े उत्पदक राज्य राजस्थान में ग्वार सीड का उत्पादन घटकर केवल 19,62,424 टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसका उत्पादन 22,23,474 टन का हुआ था।
राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार चालू सीजन में राज्य में ग्वार सीड की बुवाई 35.76 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी, तथा प्रति हैक्टेयर उत्पादकता 549 प्रति किलोग्राम प्रति हैक्टेयर बैठी है जबकि पिछले साल 47.86 लाख हैक्टेयर में ग्वार सीड की बुवाई हुई थी।
चालू वित्त वर्ष 2016-17 के पहले सात महीनों अप्रैल से अक्टूबर के दौरान ग्वार गम उत्पादों का निर्यात बढ़कर 1,95,602 टन का हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इनका निर्यात 1,82,723 टन का ही हुआ था। सूत्रों के अनुसार सितंबर तक निर्यात पिछले साल की तुलना में कम था लेकिन अक्टूबर और नवंबर में निर्यात बढ़ा है। हालांकि इस समय भी ग्वार गम उत्पादों की निर्यात मांग औसत ही बनी हुई है। ऐसे में माना जा रहा है कि उत्पादक मंडियों में ग्वार सीड के भाव नीचे में 3,000 रुपये और उपर में 3,500 रुपये प्रति क्विंटल के दायरे में ही रहने का अनुमान है जबकि ग्वार गम के भाव 6,000 से 6,800 रुपये प्रति क्विंटल के दायरे में ही बने रहेंगे।
चालू वित्त वर्ष 2016-17 के पहले सात महीनों अप्रैल से अक्टूबर के दौरान जहां मात्रा में ग्वार गम उत्पादों के निर्यात में बढ़ोतरी हुई है, वहीं मूल्य के हिसाब से इस दौरान ग्वार उत्पादों का निर्यात 29.54 फीसदी कम हुआ है। अप्रैल से अक्टूबर के दौरान केवल 1,446.40 करोड़ रुपये मूल्य का ही ग्वार गम उत्पादों का निर्यात हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2015-16 की समान अवधि में 2,052.66 करोड़ रुपये मूल्य का निर्यात हुआ था।........आर एस राणा

जौ का आयात बढ़ने से भाव में गिरावट आने का अनुमान

आर एस राणा
नई दिल्ली। जौ की कीमतों में आई तेजी के कारण माल्ट कंपनियों ने बड़ी मात्रा में जौ के आयात सौदे किए हुए हैं। सूत्रों के अनुसार चालू सप्ताह के आखिर तक मुंदडा बंदरगाह पर 60 हजार टन आयातित जौ पहुंचने की संभावना है।
माल्ट कंपनियों ने फ्रांस से जौ की खरीद की है तथा भारतीय बंदरगाह पर पहुंच इसके आयात सौदे 190 डॉलर प्रति टन की दर से हुए हैं जोकि रुपये के हिसाब से 1,250 रुपये प्रति क्विंटल से कम भाव पर पड़ेगा, जबकि इस समय घरेलू मंडियों में जौ के भाव 1,800 रुपये प्रति क्विंटल से उपर बने हुए हैं। जानकारों के अनुसार आयातित जौ माल्ट कंपनियों में पहुंच 1,500 से 1,600 रुपये प्रति क्विंटल बैठेगा, ऐसे में आगामी दिनों में घरेलू बाजार में जौ की कीमतों में गिरावट आ सकती है।
सूत्रों के अनुसार जो 60 हजार टन जौ का आयात हो रहा है, उसमें 30 हजार टन बारमाल्ट माल्टिंग इंडिया का है जबकि 20 हजार टन जयपुर की रुद्रा इंटरप्राइजेज का है, इसके अलावा 10 हजार टन गुड़गांव की द माल्ट कंपनी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड का है।...........आर एस राणा