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01 सितंबर 2023

एफसीआई ने जून से अब तक 12.8 लाख टन गेहूं की बिक्री की

 एफसीआई ने जून से अब तक 12.8 लाख टन गेहूं की बिक्री की।

5 जुलाई से अब तक एफसीआई द्वारा 32,520 टन चावल बेचा गया।

कल हुए टेंडर में 2 लाख टन आवंटित मात्रा में से 1.6 लाख टन गेहूं की बिक्री हुई।

गेहूं की यह बिक्री 2148 रुपए प्रति क्विटल के औसतन भाव पर की गयी जो पहले 2254 रुपए प्रति क्विटल थी यानी गेहूं बिक्री भाव घटे।

चावल की बिक्री 1100 टन की गयी जबकि टेंडर में 3.2 लाख टन ऑफर किया गया था।

जुलाई में अनाज की खुदरा महंगाई दर 13.04% थी जो जनवरी के 16.12% से कम।


अभी हाल ही में एफसीआई ने 50 लाख टन गेहूं बिक्री की घोषणा की थी।

चावल के भाव 200 रुपए घटाए जाने के बावजूद बिक्री रही बेहद कमजोर।

पिछले टेंडर में चावल 2973 रुपए के औसतन भाव पर बिका जो 9 अगस्त को 3163 रुपए था।

चना : आज 01/09/2023 के उच्तम बोली भाव



> महाराष्ट्र 6203 

> गुजरात 6135 

> कर्नाटका 6427 

> राजस्थान 6313 

> हैदराबाद 6126


Chickpeas: Today's highest bid


> Maharashtra 6203

> Gujarat 6135

> Karnataka 6427

> Rajasthan 6313

> Hyderabad 6126

मानसून सीजन के पहले तीन महीनों में सामान्य से 10 फीसदी कम हुई बारिश, 8 सबडिवीजन सूखे

नई दिल्ली। मानसून सीजन के पहले तीन महीनों पहली जून से 31 अगस्त के दौरान देशभर में सामान्य की तुलना में 10 फीसदी बारिश हुई है, जबकि इस दौरान देशभर के 36 सबडिवीजनों में से 8 में बारिश सामान्य से कम हुई है।


भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार पहली जून से 31 अगस्त तक देशभर में 629.7 मिलीमीटर बारिश हुई है, जबकि इस दौरान सामान्यतः: 700.7 मिलीमीटर बारिश होती है।

पहली जून से 31 अगस्त तक देशभर के 36 सबडिवीजनों में से 8 में बारिश सामान्य की तुलना में कमी हुई है, जबकि इस दौरान 24 सबडिवीजनों में बारिश सामान्य हुई है। दो सब डिवीजनों में बारिश सामान्य से ज्यादा और दो में बहुत ज्यादा हुई है।

आईएमडी के अनुसार मानसूनी सीजन के पहली तीन महीनों में पूर्वोत्तर भारत में बारिश सामान्य से 17 फीसदी कम हुई है। इस दौरान झारखंड और बिहार में बारिश सामान्य की तुलना में क्रमश: 37 और 27 फीसदी कम हुई है। पश्चिमी बंगाल में इस दौरान 28 फीसदी बारिश सामान्य से कम हुई है।

उत्तर पश्चिम भारत के राज्यों में पहली जून से 31 अगस्त तक बारिश सामान्य की तुलना में 3 फीसदी अधिक हुई है, लेकिन इस दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश में बारिश सामान्य से 28 फीसदी कम हुई है। अन्य राज्यों में पूर्वी राजस्थान में इस दौरान सामान्य से 7 फीसदी और पंजाब में 3 फीसदी कम बारिश हुई है।

मध्य भारत के राज्यों में चालू मानसूनी सीजन के पहले तीन महीनों में बारिश सामान्य से 10 फीसदी कम हुई है। इस दौरान मध्य महाराष्ट्र में पहली जून से 31 अगस्त के दौरान सामान्य से 23 फीसदी, मराठवाड़ा में 21 फीसदी और विदर्भ में 13 फीसदी बारिश कम हुई है। झारखंड में इस दौरान सामान्य से 20 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई। पूर्वी मध्य प्रदेश में इस दौरान सामान्य से 18 फीसदी और पूर्वी मध्य प्रदेश में 12 फीसदी बारिश कम हुई है। उड़ीसा में इस दौरान सामान्य की तुलना में 14 फीसदी और गुजरात रीजन में 15 फीसदी बारिश सामान्य से कम हुई है।

दक्षिण भारत के राज्यों में पहली जून से 31 अगस्त तक बारिश सामान्य की तुलना में 17 फीसदी कम हुई है। इस दौरान साउथ ईस्ट कर्नाटक में बारिश सामान्य से 30 फीसदी और नॉर्थ ईस्ट कर्नाटक में 11 फीसदी कम हुई है। इस दौरान केरल में सामान्य से 48 फीसदी और लक्षद्वीप में 29 फीसदी कम बारिश हुई है।

जानकारों के अनुसार देशभर के अधिकांश राज्यों में अगस्त में बारिश सामान्य से काफी कम हुई है, जिसका असर रबी फसलों पर पड़ने की आशंका है। इससे दलहन, तिलहन के साथ ही मोटे अनाजों की प्रति हेक्टेयर उत्पादकता में कमी आयेगी। 

हरियाणा सरकार बाजरा की एमएसपी पर खरीद के लिए 92 केंद्र खोलेगी

नई दिल्ली। खरीफ विपणन सीजन 2023-24 में हरियाणा सरकार बाजरा की न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर खरीद के लिए राज्य की 92 मंडियों में खरीद केंद्र खोलेगी।


राज्य के निदेशालय, खाद्वय एवं नागरिक एवं उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने अंबाला, फरीदाबाद, गुरुग्राम, हिसार और करनाल तथा रोहतक के उपायुक्तों के साथ ही अन्य संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर खरीद की पुखता तैयारियों के लिए कहां है।

केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2023-24 के लिए बाजरा का एमएसपी 2,500 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है, जबकि इसके पिछले खरीफ सीजन में एमएसपी 2,350 रुपये प्रति क्विंटल था। 

30 अगस्त 2023

बाजरे में अगले डेढ़ माह के अंतराल 100/150 रुपए प्रति क्विंटल की तेजी

 बाजरा


 आगरा, मथुरा, हाथरस लाइन में बाजरे की दबाव बनने से साठी माल के भाव 1800/1825 रुपए प्रति क्विंटल मंडियों में रह गया है, लेकिन इन भावों में चौतरफा स्टॉकिस्ट लिवाली में आ गए हैं, इसे देखते हुए अब और मंदा नहीं लग रहा है। चावल किनकी एवं मक्की के भाव ऊंचे हो गए हैं तथा नई फसल आने में अभी लंबा बाकी है, उसकी बिजाई हाल ही में हुई है तथा कुछ क्षेत्रों में पिछले दिनों की आई बाढ़ से नुकसान हुआ है, इन सारी परिस्थितियों को देखते हुए वर्तमान भाव के बाजरे में अगले डेढ़ माह के अंतराल 100/150 रुपए प्रति क्विंटल की तेजी आ सकती है।

बारिश में और देरी हुई तो सोयाबीन की उत्पादकता में कमी की आशंका - सोपा

नई दिल्ली। सोयाबीन के प्रमुख उत्पादक राज्यों मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान अन्य राज्यों में अभी तक फसल की स्थिति है, तथा समय अगेती फसल में दाने भरने शुरू हो गए हैं। इस समय फसल को बारिश की सख्त जरूरत है, अगर बारिश में और देरी हुई तो इसका असर नई फसल की उत्पादकता पर पड़ेगा।


सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सोपा के अनुसार मध्य प्रदेश में सोयाबीन की बुआई को 45 से 60 दिन हो चुके हैं, तथा समय फली बनने से लेकर फलियों में दारे भरने की अवस्था है। हालांकि अभी तक तक कुल मिलाकर फसल की स्थिति सामान्य है और एक पखवाड़े भर के दौरान बारिश हुई तो फसल को फायदा होगा। पूरे राज्य में, विशेषकर पश्चिमी क्षेत्र में तत्काल बारिश की आवश्यकता है। अगर बारिश में और देरी हुई तो फिर पैदावार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार मध्य प्रदेश में पहली जून से 29 अगस्त तक बारिश सामान्य की तुलना में 13 फीसदी कम हुई है। अगस्त के दौरान राज्य में बारिश सामान्य से काफी कम हुई है।

सोपा के अनुसार महाराष्ट्र में फसल 45 से 60 दिन पुरानी है, और फली बनने से लेकर फली में दाने भरने की अवस्था में है। अभी तक फसल की कुल स्थिति सामान्य है लेकिन तत्काल बारिश की आवश्यकता है। बारिश में देरी की स्थिति में, फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जिससे पैदावार कम हो जाएगी। खासकर के मराठवाड़ा में, जहां सोयाबीन की बुवाई ज्यादा हुई है।

आईएमडी के अनुसार महाराष्ट्र में पहली जून से 29 अगस्त तक बारिश सामान्य की तुलना में 10 फीसदी कम हुई है। अगस्त के दौरान राज्य में बारिश सामान्य से काफी कम हुई है।

सोपा के अनुसार राजस्थान के साथ ही अन्य राज्यों में भी फसल 45 से 60 दिन पुरानी है, और फली बनने से लेकर फली में दाने भरने की अवस्था में है। अभी तक फसल की कुल स्थिति सामान्य है लेकिन तत्काल सभी राज्यों में फसल को बारिश की आवश्यकता है। बारिश में देरी और देरी हुई तो, फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जिससे पैदावार में कमी आशंका है।

आईएमडी के अनुसार राजस्थान में पहली जून से 29 अगस्त तक बारिश सामान्य की तुलना में 14 फीसदी अधिक हुई है। हालांकि राज्य में अगस्त के दौरान बारिश सामान्य से काफी कम हुई है।

कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ सीजन में देशभर के राज्यों में 124.71 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की बुआई हो चुकी है।

केंद्र सरकार ने सिंगापुर को चावल के निर्यात की अनुमति दी

नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने मंगलवार को नई दिल्ली में कहा कि भारत ने सिंगापुर की खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए चावल के निर्यात की अनुमति देने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि भारत से सिंगापुर को चावल के निर्यात की अनुमति देने की अधिसूचना जल्द ही जारी की जायेगी।


सिंगापुर ने नई दिल्ली से अनुरोध किया था कि वह अनाज के निर्यात पर प्रतिबंध में ढील देते हुए उसे भारत से कम से कम 110,000 टन चावल आयात करने की अनुमति दे।

20 जुलाई को सरकार ने भारत से गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया।