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30 जनवरी 2018

किसानों की उपज खरीदने के लिए भावांतर योजना शुरु होने की उम्मीद

आर एस राणा
वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के सपने को साकार करने में जूटी मोदी सरकार पहली फरवरी को पेश किए जाने वाले आम बजट में भावांतर योजना की शुरुआत कर सकती है। भावांतर योजना से जहां किसानों को फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) मिलना सुनिश्चित हो जायेगा, वहीं खरीदी गई जिंसों की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होगी।
​किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले, इसलिए किसानों से फसलों की एमएसपी पर खरीद के लिए केंद्र सरकार गंभीर है। इसीलिए पहली फरवरी को पेश होने वाले आम बजट 2017—18 में भावांतर योजना शुरु किए जाने की उम्मीद है। मध्य प्रदेश में राज्य सरकार किसानों से दलहन की खरीद भावांतर योजना के तहत कर रही है, जबकि हरियाणा में राज्य सरकार ने सब्जियों प्याज, आलू और टमाटर की खरीद के लिए भावांतर योजना शुरु की है।
कीमतों में गिरावट आने पर किसानों से उपज की खरीद राज्य सरकारें करेंगी, तथा उपज को बेचने की जिम्मेदारी भी राज्य सरकार की होगी। भाव में उतार—चढ़ाव से होने वाले घाटे की भरपाई केंद्र सरकार करेगी। केंद्र सरकार 22 फसलों का एमएसपी जारी करती है, लेकिन एमएपी पर खरीद मुख्यत: गेहूं और धान की ही करती है। इसके अलावा दलहन और तिलहन की खरीद सीमित मात्रा में की जाती है। मोटे अनाजों की खरीद एकाध राज्य में राज्य सरकारें स्वयं ही करती है। ऐसे में एग्री जिंसों की कीमतों में होने वाले उतार—चढ़ाव से किसानों को बचाने के लिए भावांतर योजना ​कारगर साबित हो सकती है। वैसे भी समय—समय पर यह मांग उठती रही है कि किसानों की उपज की खरीद उचित मूल्य पर सुनिश्चित होनी चाहिए।
उत्पादक मंडियों में इस समय दलहन, मोटे अनाज, गेहूं और तिलहनी फसलों सरसों और मूंगफली के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे बने हुए हैं, जिसका खामियाजा किसानों को उठाना पड़ रहा है। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर का एमएसपी खरीफ विपणन सीजन 5,450 रुपये प्रति क्विंटल (बोनस सहित) तय किया हुआ है जबकि उत्पादक मंडियों में अरहर 4,000 से 4,500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिक रही है। इसी तरह से अन्य दलहन के भाव भी उत्पादक मंडियों में एमएसपी से 1,000 से 1,500 रुपये प्रति क्विंटल नीचे बने हुए हैं। गेहूं के साथ ही मक्का और जौ की कीमतें भी एमएसपी से नीचे बनी हुई है।
रबी दलहन की प्रमुख फसल चना के भाव उत्पादक मंडियों में नई फसल की आवक से पहले ही घटकर 3,500 से 3,700 रुपये प्रति क्विंटल रह गए हैं जबकि रबी विपणन सीजन 2017—18 के लिए केंद्र सरकार ने चना का एमएसपी 4,400 रुपये प्रति क्विंटल (बोनस सहित) तय किया हुआ है। .............   आर एस राणा

मूंगफली दाने के निर्यात में 27.71 फीसदी की गिरावट

आर एस राणा
नई दिल्ली। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2017—18 के पहले 9 महीनों अप्रैल से दिसंबर के दौरान मूंगफली दाने के निर्यात में 27.71 फीसदी की गिरावट आकर कुल निर्यात मूल्य के हिसाब से 2,639.69 करोड़ रुपये का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2016—17 की समान अवधि में इसका निर्यात 3,651.60 करोड़ रुपये का हुआ था। केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2017—18 के लिए मूंगफली का एमएसपी 4,450 रुपये प्रति क्विंटल (बोनस सहित) तय किया हुआ है जबकि प्रमुख उत्पादक राज्य गुजरात की मंडियों में मूंगफली 3,800 से 4,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिक रही है।
उत्पादन में आई कमी
कृषि मंत्रालय के पहले आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2017—18 में खरीफ में मूंगफली का उत्पादन घटकर 62.13 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले पिछले खरीफ सीजन में इसका उत्पादन 62.21 लाख टन का हुआ था।
रबी में बुवाई बढ़ी
चालू रबी में मूंगफली की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है। कृषि मंत्रालय के अनुसार मूंगफली की बुवाई बढ़कर चालू रबी में 5.32 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई केवल 4.59 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई थी।
एमएसपी पर खरीद
मूंगफली की कीमतों में चल रही गिरावट के कारण केंद्र सरकार नेफैड के माध्यम से एमएसपी पर इसकी खरीद भी कर रही है लेकिन खरीद सीमित मात्रा में होने के कारण भाव नीचे ही बने हुए हैं। नेफैड ने अभी तक एमएसपी पर 4,29,436.99 टन मूंगफली की खरीद गुजरात, राजस्थान, आंध्रप्रदेश और कर्नाटका से की है।  ...........  आर एस राणा

उत्तर प्रदेश में चीनी का उत्पादन 23 फीसदी बढ़ा

आर एस राणा
नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2017 से शुरु हुए चालू पेराई सीजन 2017—18 में 29 जरवरी 2018 तक उत्तर प्रदेश में चीनी का उत्पादन 23 फीसदी बढ़कर 52.90 लाख टन का हो चुका है जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में इसका उत्पादन केवल 43.05 लाख टन का ही हुआ था। 
यूपी शुगर मिल्स एसोसिएशन (यूपीएसएमए) के अनुसार चालू पेराई सीजन में चीनी मिलों ने गन्ने की पेराई पहले आरंभ कर दी थी, साथ ही गन्ने में रिकरवरी की दर भी पिछले साल से ज्यादा आ रही है। इसीलिए चीनी के उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है। चालू पेराई सीजन में राज्य में औसतन गन्ने में रिकवरी की दर 10.25 फीसदी की आ रही है जबकि पिछले पेराई सीजन में इस समय गन्ने में 9.96 फीसदी ही रिकवरी आ रही थी। चालू पेराई सीजन में राज्य में 119 चीनी मिलों में पेराई चल रही है जबकि पिछले पेराई सीजन में राज्य में केवल 116 चीनी मिलों में ही पेराई चल रही थी।
चालू पेराई सीजन में चीनी के उत्पादन में हुई बढ़ोतरी से भाव में गिरावट आई है। उत्तर प्रदेश में चीनी के एक्स फैक्ट्री भाव घटकर मंगलवार को 3,125 से 3,200 रुपये प्रति क्विंटल (टैक्स अलग) रह गए।  ........आर एस राणा

डॉलर के मुकाबले आज रुपये में हल्की कमजोरी

डॉलर के मुकाबले आज रुपये में हल्की कमजोरी है। 1 डॉलर की कीमत 63.60 रुपये के पार है। कच्चे तेल की तेजी पर ब्रेक लग गया है। ब्रेंट का दाम 70 डॉलर के नीचे आ गया है। नायमेक्स क्रूड 66 डॉलर के नीचे कारोबार कर रहा है। इसमें करीब 0.5 फीसदी की गिरावट आई है। डॉलर में निचले स्तर से हल्की रिकवरी आने से कीमतों पर दबाव बढ़ा है। वहीं ग्लोबल मार्केट में सोना भी कमजोर पड़ गया है और ये 1,340 डॉलर के भी नीचे आ गया है। चांदी में सपाट कारोबार हो रहा है। बाजार की नजर आज से शुरु होने वाले फेड की बैठक पर है। साथ ही इस हफ्ते के अंत में अमेरिका में रोजगार के आंकड़े भी आने वाले हैं। वहीं आज अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के भाषण से पहले से बेस मेटल में मजबूती दिख रही है। इंफ्रास्ट्रचर पर निवेश बढ़ाने को लेकर बाजार को कुछ संकेत मिल सकता है। 

जल्द मिलेगा महंगे प्याज से छुटकारा

जल्द ही महंगे प्याज से छुटकारा मिल सकता है। प्याज के थोक भाव में गिरावट का दौर शुरू हो गया है और से बेहद तेजी से नीचे आ रहा है। पिछले एक हफ्ते में महाराष्ट्र की लासलगांव मंडी में प्याज का दाम करीब 25 फीसदी लुढ़क गया है। वहां प्याज 2150 रुपये क्विंटल बिक रहा है जो पिछले हफ्ते 2850 रुपये प्रति क्विंटल के ऊपर था। लेकिन अब थोक में प्याज का दाम पिछले 5 महीने के निचले स्तर पर आ गया है। इस महीने से गुजरात में प्याज की आवक बढ़ गई है। वहीं महाराष्ट्र के पुणे और अहमदनगर इलाकों में नया प्याज मार्केट में आ गया है। ऐसे में माना ये जा रहा है आगे कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है। हालांकि रिटेल में अभी भी दाम 40 से 50 रुपये किलो है।

29 जनवरी 2018

बासमती चावल का निर्यात 22 फीसदी, गैर बासमती का 45.68 फीसदी बढ़ा

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2017—18 के पहले 9 महीनों अप्रैल से दिसंबर के दौरान बासमती चावल के निर्यात में मूल्य के हिसाब से 21.98 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है जबकि गैर बासमती चावल का निर्यात इस दौरान मूल्य के​ हिसाब से 45.68 फीसदी बढ़ा है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार अप्रैल से दिसंबर के दौरान बासमती चावल का निर्यात बढ़कर मूल्य के हिसाब से 18,757.52 करोड़ रुपये का हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2016—17 की समान अवधि में इसका निर्यात केवल 15,377.01 करोड़ रुपये का हुआ था। 
गैर बासमती चावल का निर्यात मूल्य के हिसाब से चालू वित्त वर्ष 2017—18 के अप्रैल से दिसंबर के दौरान बढ़कर 16,802.98 करोड़ का हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2016—17 की समान अवधि में इसका निर्यात 11,533.81 करोड़ रुपये का हुआ था।
कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चालू वित्त वर्ष 2017—18 में बासमती चावल का कुल निर्यात करीब 40 लाख टन हो जायेगा। इस समय ईरान के साथ ही अन्य खाड़ी देशों की आयात मांग बासमती चावल में अच्छी बनी हुर्इ है।
हरियाणा की ​कैथल मंडी में सोमवार को पूसा बासमती धान 1,121 के भाव 3,800 रुपये, पूसा 1,509 बासमती धान के भाव 3,550 रुपये और डुप्लीकेट बासमती धान के भाव 3,600 रुपये प्रति​ क्विंटल रहे। पूसा 1,121 बासमती चावल सेला का भाव मंडी 7,000 रुपये प्रति क्विंटल रहा। उत्पादक मंडियों में धान की दैनिक आवक कम हो गई है, जबकि बासमती चावल में निर्यात मांग अच्छी है। ऐसे में आगामी दिनों में बासमती धान की कीमतों में और तेजी आने की संभावना है। .........  आर एस राणा

जलवायु परिवर्तन के कारण किसानों की आय में कमी की आशंका—आर्थिक सर्वेक्षण

आर एस राणा
नई दिल्ली। सरकार ने सोमवार को आर्थिक सर्वेक्षण 2017—18 संसद के बजट सत्र के पहले दिन पेश किया। इस बार आर्थिक सर्वेक्षण में कृषि पर खास तरजीह दी गई है।  वर्ष 2017-18 में एग्रीकल्‍चर सेक्‍टर की ग्रोथ 2.1 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है। यह वर्ष 2016-17 की ग्रोथ से 2.8 फीसदी कम है। पि‍छली बार एग्रीकल्‍चर सेक्‍टर की ग्रोथ 4.9 फीसदी की रही थी।

केंद्र सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके लिए उसने बीज से लेकर बाजार तक कई पहल की है। संसद में पेश आर्थिक सर्वे 2017-18 में यह बात कही गई। साथ ही आशंका जताई गई है कि जलवायु परिवर्तन के कारण किसानों की आय में 20-25 फीसदी तक की कमी आ सकती है। इससे बचने के लिए सिंचाई की व्यवस्‍था सुदढ़ करने, नई तकनीकों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और बिजली, खाद सब्सिडी का समुचित तरीके से इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।

सर्वे के मुताबिक मौजूदा वित्त वर्ष 2017-18 में किसानों के लिए 20,339 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। सरकार ने उनकी आय बढ़ाने के लिए संस्थानात्मक स्रोतों से ऋण, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, लागत प्रबंध, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, ईनाम जैसे अनेक कदम उठाए हैं। सर्वे में कृषि क्षेत्र में उच्च उत्पादकता और समग्र उत्पादन प्राप्त करने के लिए ऋण को महत्वपूर्ण पहलू बताया गया है। उम्मीद जताई गई है कि यह संस्थागत ऋण किसानों को अन्य माध्यमों से ब्याज की ऊंची दरों पर उधार लेने की मजबूरी से बचाएगा।  

इलेक्ट्रानिक राष्ट्रीय कृषि बाजार (ईनाम) का जिक्र करते हुए कहा गया है कि अप्रैल 2016 में की गई इस शुरुआत का मकसद इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसानों को ऑनलाइन व्यापार के लिए प्रोत्साहित करना है। कृषि उत्पादकता को बढ़ाने के लिए कृषि अनुसंधान और यांत्रिकीकरण पर जोर दिया गया है। सर्वे के अनुसार 2016 में अनाज की 155 उच्‍च पैदावार वाली नई किस्‍में जारी की गईं।

सर्वे बताता है कि गांवों से पुरुषों के पलायन के कारण महिलाओं की कृषि क्षेत्र में हिस्सेदारी बढ़ रही है। ग्रामीण महिलाओं ने विभिन्न तरीके के प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए प्रबंधन का एकीकृत ढांचा विकसित किया है जिससे रोजमर्रा की जरूरतें पूरी की जाती हैं। सर्वेक्षण में कहा गया है कि अब जरूरत इस बात की है कि महिलाओं तक जमीन, पानी, क्रेडिट और प्रौद्योगिकी की पहुंच बढ़ाई जाए। 

‌विश्‍व बैंक के अनुमान के अनुसार, भारत की आधी आबादी 2050 तक शहरी हो जाएगी। ऐसा अनुमान है कि कुल श्रम बल में कृषि श्रमिकों का प्रतिशत 2001 के 58.2 प्रतिशत से गिरकर 2050 तक 25.7 प्रतिशत तक आ जाएगा। इसलिए, देश में कृषि यांत्रिकी के स्‍तर को बढ़ाने की आवश्‍यकता है। विभिन्‍न कृषि परिचालनों में श्रम की सघन भागीदारी के कारण कई फसलों में उत्‍पादन की लागत काफी अधिक है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान यांत्रिकी और बिजली के स्रोतों के उपयोग की दिशा में बदलाव आया है।   ...  आर एस राणा