11 जनवरी 2014
Gold gains for 3rd-day; up Rs 45 on higher buying, global cues
New Delhi, Jan 11. Rising for the third straight day,
gold prices rose by another Rs 45 to Rs 30,215 per 10 grams in
the national capital today on increased buying by stockists
and jewellers to meet the upcoming marriage season demand amid
a strong global trend.
Silver also jumped up by 490 to Rs 44,800 per kg on
increased offtake by industrial units and coin makers.
Traders said increased buying by stockists and jewellers
to meet ensuing wedding season demand mainly influenced gold
prices.
Besides, a firming global trend where the precious metal
gained the most in a week after payrolls in the US climbed
less than projected, increasing speculation that the Federal
Reserve will slow the pace of cuts to economic stimulus, also
buoyed the sentiment here, they said.
Globally, gold rose by 1.4 per cent to USD 1,246.90 an
ounce, while silver by 2.7 per cent to USD 20.22 an ounce in
New York.
On the domestic front, gold of 99.9 and 99.5 per cent
purity added Rs 45 each to Rs 30,215 and Rs 30,015 per 10
grams, respectively. It had gained Rs 170 in last two
sessions.
Sovereigns followed suit and rose by Rs 100 to Rs 25,100
per piece of eight grams.
In a similar fashion, both silver ready and silver
weekly-based delivery shot up by Rs 490 each to close at the
same level of Rs 44,800 per kg. The white metal had gained Rs
310 yesterday.
Silver coins also spurted by Rs 1,000 to Rs 85,000 for
buying and Rs 86,000 for selling of 100 pieces.
08 जनवरी 2014
नेचुरल रबर में करें निवेश
आर एस राणा : नई दिल्ली... | Jan 07, 2014, 09:58AM I
"153.20 प्रति किलो था पांच दिसंबर 2013 को नेचुरल रबर का भाव
"165.50 प्रति किलो हो गया 31 दिसंबर 2013 को इसका भाव
केंद्र सरकार द्वारा नेचुरल रबर के आयात शुल्क में बढ़ोतरी किए जाने से आयात पड़ता महंगा हो जायेगा। जनवरी मध्य के बाद नेचुरल रबर के उत्पादन का पीक सीजन भी समाप्त हो जायेगा। ऐसे में घरेलू बाजार में नेचुरल रबर की कीमतों में सुधार आने की संभावना है।
एनएमसीई में जनवरी महीने के वायदा अनुबंध में नेचुरल रबर की कीमतों में महीने भर में करीब 8 फीसदी की तेजी आई थी लेकिन मुनाफावसूली से पिछले तीन दिनों में हल्की गिरावट जरूर आई है।
आगामी महीनों में नेचुरल रबर में खपत कंपनियों की मांग भी बढऩे का अनुमान है। इसलिए वायदा बाजार में निवेशक नीचे दाम पर खरीददारी करके नेचुरल रबर में मुनाफा कमा सकते हैं।
एनएमसीई पर जनवरी वायदा अनुबंध में नेचुरल रबर का भाव ५ दिसंबर को त्र153.20 प्रति किलो था जो 31 दिसंबर को भाव बढ़कर 165.50 रुपये प्रति किलो हो गया। हालांकि ऊंचे भाव में निवेशकों की मुनाफावसूली आने से शुक्रवार को भाव 158.45 रुपये प्रति किलो पर बंद हुए।
एग्री विश्लेषक अभय लाखवान ने बताया कि केंद्र सरकार नेचुरल रबर के आयात पर शुल्क में 10 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी है जिससे आयात में कमी आने की आशंका है। नेचुरल रबर के घरेलू उत्पादन का पीक सीजन भी समाप्त हो रहा है। इसलिए घरेलू बाजार में मौजूदा कीमतों में तेजी की ही संभावना है।
साउथ मार्केटिंग कार्पोरेशन के प्रबंधक अशोक खुराना ने बताया कि घरेलू बाजार में नेचुरल रबर की घटती कीमतों को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने आयात शुल्क को बढ़ाकर 30 रुपये प्रति किलो और 20 फीसदी जो भी न्यूनतम हो कर दिया है। जबकि अभी तक नेचुरल रबर के आयात पर 20 रुपये प्रति किलो और 20 फीसदी जो भी न्यूनतम हो शुल्क लग रहा था।
उधर अंतरराष्ट्रीय बाजार में नेचुरल रबर के दाम घरेलू बाजार के लगभग बराबर ही है। फरवरी महीने से नेचुरल रबर का पीक सीजन भी समाप्त हो रहा है। वैसे भी टायर उद्योग की मांग आगामी महीनों में बढऩे का अनुमान है। इसलिए घरेलू बाजार में नेचुरल रबर की कीमतों में और भी तेजी आने की संभावना है।
रबर बोर्ड के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2013-14 के पहले आठ महीनों (अप्रैल से नवंबर) के दौरान नेचुरल रबर का आयात बढ़कर 53 फीसदी बढ़कर 2,37,723 टन का हुआ है। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका आयात 1,55,075 टन का ही हुआ था। नवंबर महीने में नेचुरल रबर का उत्पादन घटकर 91,000 टन का ही हुआ है जबकि पिछले साल नवंबर महीने में 98,000 टन का उत्पादन हुआ था। (Business Bhaskar....R S Rana)
CCEA may consider import duty hike on refined oil to 10% tom
New Delhi, Jan 8. The Cabinet Committee on Economic
Affairs (CCEA) is expected to consider a proposal tomorrow to
hike import duty on refined edible oil to 10 per cent for
protecting domestic industry and farmers.
"The CCEA is scheduled to meet tomorrow and among other
things it will consider the Food Ministry's proposal of
increasing import duty on refined edible oils," said a source.
Currently, the import duty on crude edible oil is 2.5 per
cent, while on refined edible oil is 7.5 per cent. Since the
duty difference is only 5 per cent between the two varieties,
traders have resorted to higher import of refined oils,
thereby affecting the domestic refiners and farmers.
To keep domestic refiners from operating at under-
capacity, the Food Ministry has proposed duty difference of
7.5 per cent between the two varieties by raising import tax
on refined edible oil to 10 per cent, the source said.
If approved, the move is expected to fetch Rs 600 crore
revenue to the government, the source added.
Ministries of finance and commerce have endorsed the Food
Ministry's proposal. The Agriculture Ministry has however
recommended flexible import duty structure, whereby they would
automatically go up if global edible oil prices decline by a
certain level and fall as soon as international prices rise.
The edible oil industry has demanded increasing import
duty on refined edible oil to 30 per cent.
India produces 9 million tonne edible oil, while the
consumption is around 20 million tonne. The rest is met
through imports. In the 2012-13 fiscal, the country had
imported Rs 61,273 crore worth of edible oils.
Gold falls on sluggish demand, weak global cues
New Delhi, Jan 8. Gold prices fell by Rs 160 to Rs
30,000 per ten grams in the national capital today on
sustained selling by stockists against sluggish demand amid a
weak global trend.
Silver also dropped by Rs 1,050 to Rs 44,300 per kg on
reduced offtake by industrial units, particularly coin makers,
amid weak global cues.
In Mumbai, gold of 99.9 and 99.5 per cent purity traded at
Rs 29,850 and Rs 29,700 per ten grams, respectively, while
silver enquired at Rs 45,000 per kg.
Traders said sustained selling by stockists against
sluggish demand and a weak global trend as strengthening
dollar reduced the metal's appeal as an alternative investment
mainly led to the fall in the prices of the precious metal.
Gold in Singapore, which normally sets price trend on the
domestic front, fell 0.5 per cent to USD 1,225.71 an ounce and
silver by 1.1 per cent to USD 19.64 an ounce.
At the domestic front, gold of 99.9 and 99.5 per cent
purity fell further by Rs 160 each to Rs 30,000 and Rs 29,800
per ten grams, respectively. Sovereign declined by Rs 100 to
Rs 25,000 per piece of eight gram.
Silver ready dropped by Rs 1,050 to Rs 44,300 per kg and
weekly-based delivery by Rs 1,200 to Rs 44,300 per kg.
Silver coins, however, held steady at Rs 85,000 for buying
and Rs 86,000 for selling of 100 pieces.
धानुका से हर किसान खुशहाल
नई दिल्ली | देश की अग्रणी कीटनाशक कम्पनी धानुका एग्रीटेक लिमिटेड में सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ब्रांड एम्बेसेडर बन गए हैं | कम्पनी महानायक के साथ धानुका खेती की नई तकनीक हर किसान की खुशहाली के लिए सन्देश के साथ अभियान कर रही है | इस अभियान में किसानो को वर्षा जल संरक्षण और संचयन खेती की नई तकनीक की जानकारी, और धानुका के उच्च गुणवत्ता उत्पादों की सहायता से फसलों को कीट बीमारियों से बचाया जाए , के बारे में पर्शिक्षित किया जाएगा |
धानुका एग्रीटेक लिमिटेड
नाम : आर.जी. अग्रवाल
पद : ग्रुप चेयरमैन, धानुका एग्रीटेक लिमिटेड
शिक्षा : श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, दिल्ली से 1968 में स्नातक
जिम्मेदारियां : क्रॉप केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के चार साल तक चेयरमैन रहे।
हरियाणा पेस्टीसाइड्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के प्रेसीडेंट रहे।
पुरस्कार : एग्रीकल्चर लीडरशिप अवार्ड-2009
उपलब्धियां : 1980 में गुडग़ांव स्थित बीमारू कंपनी नॉर्दन मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड को खरीदकर कारोबार की शुरुआत की। वर्ष 1960 में स्थापित इसी कंपनी ने गैमक्सीन नामक पहले बीएचसी पेस्टीसाइड का फॉर्मूलेशन किया था।
घरेलू पेस्टीसाइड कंपनियों में अहम मानी जाने वाली धानुका एग्रीटेक लिमिटेड को अपने कारोबार मे चालू साल में 25 फीसदी बढ़ोतरी की उम्मीद है। इस साल अक्तूबर तक कंपनी का कारोबार 31 फीसदी की दर से बढ़ा है। इसके साथ ही कंपनी साणंद स्थित अपने संयंत्र का विस्तार भी कर रही है। देश में आनुवांशिकीय रूप से परिवर्तित (जीएम) फसलों के बढ़ावे के बावजूद कंपनी अपने कारोबार में लगातार बढ़ोतरी देख रही है। पेस्टीसाइड की जगह आने वाले दिनों में हर्बीसाइड का कारोबार बढऩे की कंपनी को अधिक उम्मीद है। इन सभी मुद्दों पर बिजनेस भास्कर ने धानुका एग्रीटेक लिमिटेड के ग्रुप चेयरमैन आर.जी. अग्रवाल के साथ विस्तार से बातचीत की।
जीएम फसलों के बढऩे से पेस्टीसाइड के कारोबार पर क्या कोई प्रतिकूल असर पड़ा है? मुझे ऐसा नहीं लगता है क्योंकि जीएम फसलों में किसी एक बीमारी की रोकथाम के लिए ही जीन डाला जाता है। ऐसे में दूसरी बिमारियों के लिए पेस्टीसाइड की जरूरत पड़ती है। साथ ही अभी तक केवल कपास में ही जीएम प्रजातियां आई हैं। उसमें भी बालवार्म बीमारी के लिए जीएम तकनीक का उपयोग किया गया है। यह बात सही है कि इसमें पेस्टीसाइड का उपयोग घटा है लेकिन दूसरी फसलों में बढ़ा है। चालू साल में बेहतर बिक्री इसे साबित करती है।
चालू साल में धानुका एग्रीटेक का कारोबार कितना बढ़ा है?
चालू साल में अक्तूबर तक हमारा कारोबार 31 फीसदी की दर से बढ़ा है। चालू साल में हम 25 फीसदी की बढ़ोतरी का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।
किस उत्पाद की बिक्री अधिक तेजी से बढ़ रही है?
आने वाले दिनों में विडीसाइज का जमाना है क्योंकि खेती के लिए लगातार मजदूरों की किल्लत बढ़ती जा रही है। ऐसे में किसानों को विडीसाइड का उपयोग ही बेहतर दिख रहा है। कम खर्चें में फसलों से खरतपतार को नष्ट करने का यह आसान तरीका है। इसके लिए हमारा जापान की निसान केमिकल्स के साथ गठजोड़ है। उसकी तकनीक और कच्चे माल से तैयार हमारे उत्पाद बेहतर परिणाम दे रहे हैं। वैसे भी दुनिया के विकसित देशों में जहां हर्बीसाइड की पेस्टीसाइड उपयोग में 50 फीसदी हिस्सेदारी है। हमारे यहां यह अभी कुल बिक्री का 18 फीसदी ही है।
कंपनी की क्षमता विस्तार की क्या योजना है?
हम गुजरात के साणंद में अपने संयंत्र की क्षमता में विस्तार करेंगे। यहां हमारे पास 15 एकड़ जमीन है। तीन साल पहले हमने उधमपुर में संयंत्र स्थापित किया था। इसके अलावा सोहना और गुडग़ांव में हमारे संयंत्र हैं। हमारा चार जापानी कंपनियों मिस्तुसई, निसान, हुक्को और सुमित्मों के साथ गठबंधन है। वहां से हम कच्चा माल आयात करते हैं।
आपकी प्रतिस्पर्धा किससे है?
हमारे लिए बड़ी प्रतिस्पर्धी कंपनियां विदेशी ही हैं। जिसमें डव केमिकल्स, डूपांट, सिंजेंटा और एफएमसी मुख्य हैं। लेकिन मेरा मानना है कि हम बहुत प्रतिस्पर्धी कीमत पर अपने उत्पाद बेचते हैं।
देश में पेस्टीसाइड कारोबार की क्या स्थिति है?
देश का पेस्टीसाइड कारोबार इस समय 8,000 करोड़ रुपये के स्तर पर है। इसमें से 50 फीसदी घरेलू खपत में और शेष निर्यात में जाता है। लेकिन, इस क्षेत्र में ग्रे-मार्केट हमारी सबसे बड़ी चिंता है। ग्रे-मार्केट में तकरीबन 3-4 हजार करोड़ रुपये का उत्पादन हो रहा है। इससे सरकार व किसानों के साथ ही उद्योग को भी नुकसान हो रहा है। सरकारी एजेंसियों को इस ओर खास ध्यान देने की जरूरत है। (Business Bahskar)
03 जनवरी 2014
सटोरिया सर्किट में फंसी अरंडी
लगातार दो दिन अपर सर्किट लगने के बाद आज अरंडी वायदा फिर लोअर सर्किट में फंस गया। अरंडी की कीमतें अब पिछले महीने के स्तर पर आ गई हैं। नई फसल की आवक और एफएमसी की सख्ती के कारण चालू महीने में अरंडी कीमतों में दोबारा 20 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है। अरंडी में सटोरियों की सक्रियता से पिछले 9 कारोबारी दिनों में सात बार सर्किट लग चुका है। पिछले एक महीने में अरंडी में भारी उतार-चढ़ाव रहा है।
महीने की शुरुआत में कीमतें 16 फीसदी ऊपर जाकर करीब इतने फीसदी ही गिरीं। कीमतें 10 फीसदी उछलने के बाद बुधवार को चार फीसदी का लोअर सर्किट लगा। इस सप्ताह के शुरुआती तीन कारोबारी दिनों में करीब 10 फीसदी से ज्यादा उछाल इसमें आई थी। लोअर सर्किट से एनसीडीईएक्स पर अरंडी जनवरी वायदा 4,420 रुपये, फरवरी 4,503 रुपये और अप्रैल 4,583 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है।
इसकी कीमतों में तेजी की वजह इस बार अरंडी उत्पादन 40 फीसदी घटने और कीमतों में गिरावट के लिए आपूर्ति में तेजी को जिम्मेदार बताया जा रहा है। लेकिन जानकारों को अरंडी की अटपटी चाल पर दाल में कुछ काला लग रहा है और इसी कारण विशेषज्ञ इस जिंस पर बात नहीं करना चाहते। बाजार में माल की कमी के कारण 20 दिसंबर को अरंडी की कीमतें 5,000 रुपये प्रति क्विंटल को पार कर गई थीं। तर्क था कि देश में अरंडी की कमी है और नई फसल आने में अभी वक्त है। अरंडी उत्पादक प्रमुख राज्य गुजरात और आंध्र प्रदेश में इस बार रकबा कम है।
इसे देखते हुए उत्पादन पिछले साल से 40 फीसदी कम रहने की संभावना है। लेकिन 21 दिसंबर से अरंडी की कीमतों में गिरावट का दौर शुरू हुआ और 28 दिसंबर तक कीमतेंं गिरकर 4,300 रुपये प्रति क्विंटल हो गईं। दोबारा कीमतें चढ़कर एक जनवरी को 4,650 रुपये के पार पहुंच गईं। विशेषज्ञों का कहना है कीमतों में उठापटक के पीछे जिंस एक्सचेंजों का हाथ रहा है। अरंडी का वायदा कारोबार करने वाले एक प्रमुख एक्सचेंज ने नवंबर और दिसंबर में अपने गोदामों में अरंडी का भंडारण अचानक रोक दिया था, जिससे सट्टेबाजों और कारोबारियों ने गुटबाजी करके कीमतों को चढ़ाना शुरु कर दिया था।
हो-हल्ला होने पर एक्सचेंज ने दोबारा माल लेना शुरू कर दिया। कारोबारियों के अनुसार पिछले दो माह में अरंडी में सटोरियों ने जमकर पैसा कमाया है। बीकानेर उद्योग मंडल के प्रवक्ता पुखराज चोपड़ा ने कहा कि अरंडी इस समय सटोरियों की पसंद है, लेकिन बाजार में नया माल आना शुरू हो गया है। इस सीजन में अरंडी का कुल उत्पादन 10 लाख टन रहने का अनुमान है। (BS Hindi)
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