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10 जुलाई 2025

गुजरात में मूंगफली की बुआई बढ़ी तो कपास की घटी, 50 फीसदी क्षेत्रफल में कार्य पूरा

नई दिल्ली। गुजरात में चालू खरीफ सीजन में तय लक्ष्य के 50.32 फीसदी क्षेत्रफल में फसलों की बुआई हो चुकी है। राज्य की खरीफ की प्रमुख फसल मूंगफली की बुआई में जहां बढ़ोतरी हुई है, वहीं कपास की बुआई पीछे चल रही है।


राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार 7 जुलाई तक राज्य में खरीफ फसलों की बुआई 4,305,997 हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि के 4,026,274 हेक्टेयर की तुलना में बढ़ी है। सामान्यतः: खरीफ सीजन में राज्य में 8,557,510 हेक्टेयर में फसलों की बुआई होती है।

चालू खरीफ सीजन में तिलहन की प्रमुख फसल मूंगफली की बुआई 1,759,081 हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 1,409,220 हेक्टेयर में ही हुई थी। तिलहन की कुल बुआई राज्य में बढ़कर 1,936,845 हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 1,575,298 हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। अन्य तिलहनी फसलों में सोयाबीन की 158,360 हेक्टेयर में तथा शीशम की 13,651 हेक्टेयर और कैस्टर सीड की 5,683 हेक्टेयर में हुई है।

चालू खरीफ में कपास की बुआई राज्य में 1,710,610 हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 1,860,659 हेक्टेयर में हो चुकी थी। राज्य में ग्वार सीड की बुआई 6,993 हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल के 7,653 हेक्टेयर की तुलना में कम है।

चालू खरीफ सीजन में मोटे अनाजों की बुआई बढ़कर 164,515 हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई केवल 159,153 हेक्टेयर में ही हुई थी। मोटे अनाजों में बाजरा की 52,295 हेक्टेयर में तथा मक्का की 80,689 हेक्टेयर में हुई है। इसके अलावा धान की रोपाई 30,060 हेक्टेयर और ज्वार की बुआई 1,283 हेक्टेयर में हो चुकी है।

दलहनी फसलों की बुआई चालू खरीफ सीजन में 73,162 हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 73,570 हेक्टेयर की तुलना में थोड़ी कम है। खरीफ दलहन में अरहर की बुआई 48,717 हेक्टेयर में और मूंग की 12,080 हेक्टेयर में तथा उड़द की 11,085 हेक्टेयर तथा मोठ की 933 हेक्टेयर में हो चुकी है।

05 जुलाई 2025

नीचे दाम पर ग्राहकी आने से उड़द एवं मूंग के भाव बढ़े, अरहर तथा मसूर में मंदा

नई दिल्ली। दाल मिलों की मांग बढ़ने से घरेलू बाजार में शुक्रवार को उड़द एवं मूंग की कीमतों में सुधार आया, जबकि इस दौरान अरहर तथा मसूर के भाव कमजोर हुए। चना की कीमत स्थिर बनी रही।


बर्मा से आयातित उड़द एफएक्यू एवं एसक्यू के भाव में चेन्नई में स्थिर हो गए। उड़द एफएक्यू के भाव जुलाई एवं अगस्त शिपमेंट के भाव 765 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ पर स्थिर हो गए, जबकि इस दौरान एसक्यू उड़द के भाव जुलाई एवं अगस्त शिपमेंट के 835 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ पर स्थिर बने रहे। लेमन अरहर के भाव चेन्नई में जुलाई एवं अगस्त शिपमेंट के 730 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ पर स्थिर हो गए।

चेन्नई में आयातित उड़द की कीमत डॉलर में स्थिर हो गई, साथ ही इस दौरान म्यांमार में इनके दाम स्थिर ही बने रहे। घरेलू बाजार में दाल मिलों की खरीद से उड़द की कीमतों में हल्का सुधार आया। जानकारों के अनुसार आयातक उड़द में बिकवाली कम कर रहे हैं। हालांकि घरेलू बाजार में दाल मिलों की खरीद भी सीमित बनी हुई है, जिस कारण मौजूदा कीमतों में अभी एकतरफा बड़ी तेजी के आसार नहीं है। उड़द दाल में ग्राहकी सामान्य की तुलना में कमजोर है। उधर म्यांमार के निर्यातकों की बिकवाली बराबर बनी हुई है। जबलपुर और गुजरात की मंडियों में समर उड़द की आवक पहले की तुलना में बढ़ी है। हालांकि खपत का सीजन होने के कारण अगले महीने से उड़द दाल में मांग बढ़ने की उम्मीद है साथ ही दक्षिण भारत की दाल मिलों की खरीद भी उड़द में बढ़ेगी। ऐसे में उड़द की कीमतों में आगामी दिनों में सुधार आने की उम्मीद है।

चेन्नई में लेमन अरहर की कीमत स्थिर बनी रही, साथ ही इस दौरान म्यांमार में लेमन अरहर की कीमत भी पूर्व स्तर पर लगातार दूसरे दिन स्थिर बनी रही। घरेलू बाजार में जहां आयातित अरहर के दाम स्थिर हो गए, वहीं देसी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। व्यापारियों के अनुसार दाल मिलों की खरीद अरहर में कमजोर बनी हुई है, इसलिए इसकी कीमतों में तेजी नहीं बन पा रही है। हालांकि अरहर दाल की खपत चालू महीने में बढ़ेगी। उधर उत्पादक राज्यों कर्नाटक के साथ ही महाराष्ट्र में देसी अरहर की आवकों में काफी कमी आई है। हालांकि महाराष्ट्र और कर्नाटक में अरहर का उत्पादन अनुमान ज्यादा था इसलिए स्टॉकिस्टों के पास स्टॉक है। आयातित अरहर बराबर आ रही है। अत: अरहर की कीमतों में आगे हल्का सुधार आने का अनुमान है। वैसे केंद्र सरकार घरेलू बाजार में लगातार अरहर की कीमतों की समीक्षा कर रही है।

दाल मिलों की मांग सीमित होने से चना की कीमत स्थिर हो गई। व्यापारियों के अनुसार त्योहारी सीजन के कारण चालू महीने में बेसन एवं चना दाल की मांग बढ़ने की उम्मीद है, इसलिए चना की कीमतों में सुधार आ सकता है। वैसे भी उत्पादक मंडियों में चना की आवक सीमित मात्रा में ही हो रही है, तथा स्टॉकिस्ट दाम घटाकर बिकवाली नहीं करना चाहते। माना जा रहा है कि स्टॉकिस्टों की पास चना का बकाया स्टॉक तो है लेकिन इन भाव में स्टॉकिस्टों को नुकसान हो रहा है। केंद्रीय पूल में चना का स्टॉक कम। मानसूनी सीजन एवं त्योहार के कारण जुलाई के साथ ही अगस्त में बेसन की खपत अच्छी रहने की उम्मीद है। चालू रबी सीजन में व्यापारी चना का उत्पादन अनुमान कम मान रहे हैं। इसलिए ज्यादा मंदा मानकर व्यापार नहीं करना चाहिए।

नेफेड ने 2 जुलाई को मध्य प्रदेश में ई नीलामी के माध्यम से फसल सीजन 2022 का चना 5,059 से 5,067 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेचा।

देसी मसूर के दाम दिल्ली में लगातार तीसरे दिन 25 रुपये कमजोर हुए हैं, साथ ही इस दौरान आयातित मसूर की कीमत बंदरगाह दूसरे दिन घट गई। व्यापारियों के अनुसार दाल मिलों की खरीद आगामी दिनों में मसूर में बढ़ेगी, इसलिए इसके भाव में एकतरफा बड़ी गिरावट के आसार नहीं है। प्रमुख उत्पादक राज्यों मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की मंडियों में मसूर की आवक पहले की तुलना में कम हुई है तथा मसूर का घरेलू उत्पादन अनुमान कम हुआ था। हालांकि उत्पादक राज्यों में स्टॉकिस्टों के पास बकाया स्टॉक अच्छा है, लेकिन मसूर की घरेलू फसल अप्रैल में आयेगी। कृषि मंत्रालय के अनुसार रबी में मसूर का उत्पादन 18.17 लाख टन होने का अनुमान है। जानकारों का मानना है कि आगामी महीनों में इसके आयात में बढ़ोतरी होने का अनुमान है।

सूत्रों के अनुसार मई में ऑस्ट्रेलिया से मसूर का आयात 3,515 टन का हुआ था।

दिल्ली में मूंग के भाव दूसरे दिन 25 रुपये तेज हुए, हालांकि इस दौरान उत्पादक मंडियों में इसके दाम स्थिर ही बने रहे। व्यापारियों के अनुसार मूंग की खरीद कई राज्यों में समर्थन मूल्य पर हो रही है, इसलिए स्टॉकिस्ट दाम तेज करना चाहते हैं। हालांकि उत्पादक मंडियों में समर सीजन की मूंग की आवक बराबर बनी हुई है, तथा इसका उत्पादन अनुमान भी ज्यादा है। उधर दाल मिलें जरुरत के हिसाब से ही मूंग की खरीद कर रही है। इसलिए बढ़े दाम पर मुनाफावसूली करते रहना चाहिए। वैसे भी आगामी दिनों में मूंग की आवक और बढ़ेगी। जानकारों के अनुसार उत्पादक मंडियों में मूंग की कुल आवक की तुलना में खरीद सीमित मात्रा में ही होने का अनुमान है। वैसे भी केंद्र सरकार केंद्रीय पूल से लगातार मूंग की बिकवाली कर रही है।

नेफेड ने 2 जुलाई को राजस्थान में ई नीलामी के माध्यम से फसल सीजन 2024 का मूंग 6,711 से 6,013 रुपये और फसल सीजन 2023 की मूंग 6,055 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेची।

चेन्नई में उड़द एफएक्यू के दाम 6,675 से 6,700 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए, जबकि एसक्यू के भाव 25 रुपये तेज होकर 7,325 से 7,375 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

दिल्ली में उड़द एफएक्यू के दाम 50 रुपये बढ़कर 7,100 रुपये प्रति क्विंटल हो गए, जबकि एसक्यू के भाव 50 रुपये तेज होकर दाम 7,775 से 7,800 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

मुंबई में उड़द एफएक्यू के भाव 6,675 से 6,800 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।

कोलकाता में उड़द एफएक्यू के भाव 6,850 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।

गुंटूर में उड़द पॉलिश के भाव 6,900 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए, जबकि विजयवाड़ा में पॉलिश उड़द के दाम 7,100 रुपये प्रति क्विंटल के पूर्व स्तर पर स्थिर बने रहे।

चेन्नई में लेमन अरहर के भाव शाम के सत्र में 6,350 से 6,375 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।

दिल्ली में लेमन अरहर के भाव शाम के सत्र में 6,750 से 6,775 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

मुंबई में लेमन अरहर के भाव शाम के सत्र में 6,350 से 6,375 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।

देसी अरहर के दाम रायपुर एवं जालना तथा लातूर और जलगांव में कमजोर हुए जबकि अन्य उत्पादक मंडियों में लगभग स्थिर बने रहे।

मुंबई में अफ्रीकी देशों से आयातित अरहर के भाव स्थिर हो गए। सूडान से आयातित अरहर के भाव 6,000 से 6,050 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। इस दौरान गजरी अरहर के भाव 5,800 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। मतवारा की अरहर के भाव 5,700 से 5,750 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। सफेद अरहर के दाम 6,050 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।

दिल्ली में देसी मसूर के दाम 25 रुपये कमजोर होकर भाव 6,600 से 6,625 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

मुंद्रा बंदरगाह पर मसूर के भाव 25 रुपये घटकर 5,900 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। कांडला बंदरगाह पर मसूर के भाव 5,925 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। हजिरा बंदरगाह पर मसूर के भाव 6,025 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। कनाडा की मसूर के दाम कंटेनर में 6,125 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। पटना में देसी मसूर के बिल्टी भाव 6,600 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।

दिल्ली में राजस्थान के बेस्ट चना के दाम 5,800 से 5,825 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। इस दौरान मध्य प्रदेश के चना का व्यापार 5,750 से 7,775 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ।

इंदौर में बोल्ड मूंग के भाव 7,000 से 7,200 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। जयपुर में मूंग के बिल्टी भाव 6,750 से 7,050 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। जलगांव में चमकी मूंग के दाम 6,700 से 7,350 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। दिल्ली में मूंग के दाम 25 रुपये तेज होकर 7,175 से 7,200 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। अकोला में मूंग के भाव 7,200 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।

चीनी के बिक्री भाव एवं एथेनॉल के खरीद मूल्य पर सरकार विचार करेगी - प्रहलाद जोशी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी के साथ ही तेल विपणन कंपनियों द्वारा इथेनॉल के खरीद मूल्य को बढ़ाने संबंधी उद्योग की मांग पर विचार करेगी।

केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग तथा उपभोक्ता मामले मंत्री प्रहलाद जोशी ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाना संघ (एनएफसीएसएफ) द्वारा आयोजित सहकारी चीनी उद्योग सम्मेलन 2025 और राष्ट्रीय दक्षता पुरस्कार समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर आने वाले समय में मंत्रियों के समूह (जीओएम) द्वारा विचार किया जाएगा।

उन्होने सहकारी चीनी मिलों द्वारा अपनी एथेनॉल उत्पादन क्षमता का विस्तार करने में किए गए महत्वपूर्ण निवेश को स्वीकार करते हुए इस बात पर जोर दिया कि, सरकार ऑफ-सीजन के दौरान इथेनॉल और बायो-सीएनजी उत्पादन को बढ़ावा देकर चीनी मिलों के साल भर के संचालन का समर्थन करने के लिए काम कर रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में शुरू किए गए कई प्रमुख नीतिगत सुधारों का भी उल्लेख किया, जिसमें प्रमुख रूप से इथेनॉल मिश्रण, अतिरिक्त चीनी के निर्यात की अनुमति और गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) में बढ़ोतरी करना शामिल है।

उन्होंने कहा कि गन्ना पेराई सीजन 2024-25 के लिए गन्ने का 83 फीसदी भुगतान किसानों को पहले ही किया जा चुका है। इसके अलावा 10 लाख टन चीनी के निर्यात ने घरेलू कीमतों को स्थिर करने में मदद की है। चीनी के निर्यात की अनुमति से इसके दाम 3 रुपये प्रति किलो तक तेज हुए, जिसका फायदा उद्योग को मिला।

उन्होंने कहा कि भारत के विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य के लिए सहकारी संस्थाए महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। उन्होंने नीतिगत उपायों, कर प्रोत्साहन और निवेश सुविधा के माध्यम से सरकार के निरंतर समर्थन की पुष्टि की।

एनएफसीएसएफ के अध्यक्ष हर्षवर्धन पाटिल ने केंद्र सरकार से चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य, एमएसपी बढ़ाकर 40 रुपये प्रति किलो करने और इस क्षेत्र में दीर्घकालिक स्थिरता प्रदान करने तथा निवेश आकर्षित करने के लिए 10 वर्षीय नीति तैयार करने का आग्रह किया। 


राजस्थान में खरीफ फसलों की बुआई 43 फीसदी पूरी, पिछले साल की तुलना में आगे

नई दिल्ली। राजस्थान में खरीफ फसलों की बुआई करीब 43 फीसदी क्षेत्रफल में पूरी हो चुकी है।राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार 30 जून तक राज्य में खरीफ फसलों की बुआई 71.43 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। राज्य के कृषि निदेशालय ने चालू खरीफ सीजन में 165.39 लाख हेक्टेयर में फसलों की बुआई का लक्ष्य तय किया है।

चालू खरीफ सीजन में 30 जून 25 तक मोटे अनाजों की बुआई बढ़कर 32.68 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई केवल 2.52 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। मोटे अनाजों में बाजरा की 24.96 लाख हेक्टेयर में तथा मक्का की 4.42 लाख हेक्टेयर में हुई है। इसके अलावा धान की रोपाई 51 हजार हेक्टेयर और ज्वार की बुआई 2.77 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है।

दलहनी फसलों की बुआई चालू खरीफ सीजन में बढ़कर 14.23 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 1.22 लाख हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है। खरीफ दलहन में मूंग की बुआई 10.79 लाख हेक्टेयर में और मोठ की 2.58 लाख हेक्टेयर तथा उड़द की 47 हजार हेक्टेयर तथा छौला की 37 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है ।

चालू खरीफ सीजन में तिलहनी फसलों की बुआई राज्य में बढ़कर 11.49 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 5.43 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। तिलहनी फसलों में मूंगफली की बुआई 6.73 लाख हेक्टेयर में, सोयाबीन की 4.26 लाख हेक्टेयर में तथा शीशम की 46,000 हेक्टेयर में हुई है।

चालू खरीफ में कपास की बुआई राज्य में 5.89 लाख हेक्टेयर में तथा ग्वार सीड की बुआई 5.57 लाख हेक्टेयर में और गन्ने की बुआई 3 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है।

सीसीआई ने कॉटन के बिक्री भाव में दूसरे दिन बढ़ोतरी की, 1.24 लाख गांठ बेची

नई दिल्ली। कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई ने मंगलवार को लगातार दूसरे दिन कॉटन की बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी की। निगम ने स्पिनिंग मिलों को ई नीलामी से बेची कॉटन के बिक्री दाम 100 से 400 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी 356 किलो और व्यापारियों को बेची कॉटन के बिक्री भाव 200 से 900 रुपये प्रति कैंडी तक तेज किए।


सीसीआई ने 30 जून को भी कॉटन की बिक्री कीमतों में 200 रुपये प्रति कैंडी की बढ़ोतरी की थी।

सीसीआई ने 1 जुलाई को फसल सीजन 2024-25 की खरीदी हुई 1,24,000 गांठ कॉटन, एक गांठ 170 किलो कॉटन की बिक्री की है। कुल बिक्री में स्पिनिंग मिलों ने 49,500 गांठ की खरीद की, जबकि इस दौरान व्यापारियों ने 74,500 गांठ कॉटन की खरीद की।

प्राइवेट बाजार में जिनिंग मिलों के पास कॉटन का बकाया स्टॉक नहीं के बराबर बचा हुआ है, जिस कारण स्पिनिंग मिलों के साथ ही व्यापारियों की सीसीआई से कॉटन की खरीद बढ़ी है।

सूत्रों के अनुसार सीसीआई ने स्पिनिंग मिलों को महाराष्ट्र में 54,500 से 56,000 रुपये प्रति कैंडी की दर से कॉटन की बिक्री। इस दौरान तेलंगाना में निगम ने 54,500 से 55,300 रुपये और आंध्र प्रदेश में 53,300 से 53,700 रुपये प्रति कैंडी के भाव कॉटन की बिक्री की।

व्यापारियों को सीसीआई ने ई नीलामी के माध्यम से मंगलवार को 54,500 से 56,000 रुपये प्रति कैंडी एवं तेलंगाना में 54,500 से 55,200 रुपये प्रति कैंडी की दर से कॉटन की बिक्री की।

जानकारों के अनुसार घरेलू बाजार में कॉटन का बकाया स्टॉक कम है, सीसीआई का स्टॉक भी लगातार कम हो रहा है। कपास की नई फसल की आवक सितंबर एवं अक्टूबर में बनेगी। इसलिए सीसीआई बिक्री कीमतों में और भी बढ़ोतरी कर सकती है।

कृषि मंत्रालय के अनुसार देशभर के राज्यों में 27 जून तक कपास की बुआई 54.66 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 59.97 लाख हेक्टेयर की तुलना में 8.8 फीसदी कम है।

गुजरात में चालू खरीफ में मूंगफली के साथ ही कपास की बुआई में बढ़ोतरी

नई दिल्ली। गुजरात में चालू खरीफ सीजन में मूंगफली के साथ ही कपास की बुआई में बढ़ोतरी हुई है। राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार 30 जून तक राज्य में खरीफ फसलों की बुआई 3,391,478 हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 2,440,707 हेक्टेयर से ज्यादा है।


चालू खरीफ सीजन में 30 जून 25 तक मूंगफली की बुआई बढ़कर 1,544,695 हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इसकी बुवाई केवल 899,807 हेक्टेयर में ही हुई थी।

इस दौरान राज्य में कपास की बुआई बढ़कर 1,399,771 हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में इसकी बुआई केवल 1,272,631 हेक्टेयर में ही हुई थी।

मोटे अनाजों की बुआई 36,548 हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 26,515 हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है। मोटे अनाजों में बाजरा की 14,421 हेक्टेयर में तथा मक्का की 16,264 हेक्टेयर में तथा ज्वार की 1,223 हेक्टेयर में हो चुकी है। इसके अलावा धान की रोपाई 4,558 हेक्टेयर में हो चुकी है।

दलहनी फसलों की बुआई चालू खरीफ सीजन में 30,415 हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई केवल 18,520 हेक्टेयर में ही हुई थी। खरीफ दलहन में अरहर  की बुआई 22,706 हेक्टेयर में और मूंग की 3,995 हेक्टेयर में तथा उड़द की 3,265 हेक्टेयर में तथा मोठ की 325 हेक्टेयर में हो चुकी है ।

चालू खरीफ सीजन में तिलहनी फसलों की बुआई राज्य में 1,671,835 हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 944,504 हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है। तिलहनी फसलों में सोयाबीन की बुआई 1,20,560 हेक्टेयर में, शीशम की 4,925 हेक्टेयर में तथा कैस्टर सीड की 1,621 हेक्टेयर में हुई है।

चालू खरीफ में ग्वार सीड की बुआई राज्य में 1,240 हेक्टेयर में हो चुकी है।

राजस्थान में खरीफ फसलों की बुआई में तेजी आई, तय लक्ष्य की 31 फीसदी पूरी

नई दिल्ली। चालू सप्ताह के अंत तक राजस्थान में खरीफ फसलों की बुआई में तेजी आई है। राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार 27 जून तक राज्य में खरीफ फसलों की बुआई 52.03 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि तय लक्ष्य का 21 फीसदी है। राज्य के कृषि निदेशालय ने चालू खरीफ सीजन में 165.39 लाख हेक्टेयर में फसलों की बुआई का लक्ष्य तय किया है।

चालू खरीफ सीजन में 27 जून 25 तक मोटे अनाजों की बुआई 24.54 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। मोटे अनाजों में बाजरा की 18.73 लाख हेक्टेयर में तथा मक्का की 3.14 लाख हेक्टेयर में हुई है। इसके अलावा धान की रोपाई 35 हजार हेक्टेयर और ज्वार की बुआई 2.30 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है।

दलहनी फसलों की बुआई चालू खरीफ सीजन में 9 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। खरीफ दलहन में मूंग की बुआई 7.33 लाख हेक्टेयर में और मोठ की 1.11 लाख हेक्टेयर तथा उड़द की 25 हजार हेक्टेयर तथा छौला की 28 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है ।

चालू खरीफ सीजन में तिलहनी फसलों की बुआई राज्य में 8.67 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। तिलहनी फसलों में मूंगफली की बुआई 5.76 लाख हेक्टेयर में, सोयाबीन की 2.60 लाख हेक्टेयर में तथा शीशम की 28,000 हेक्टेयर में हुई है।

चालू खरीफ में कपास की बुआई राज्य में 5.79 लाख हेक्टेयर में तथा ग्वार सीड की बुआई 2.58 लाख हेक्टेयर में और गन्ने की बुआई 3 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है।