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15 जून 2020

कई राज्यों में हुई अच्छी बारिश से, खरीफ फसलों की शुरूआती बुआई 13 फीसदी से ज्यादा बढ़ी

आर एस राणा
नई दिल्ली। देश के कई राज्यों में मानसून से पहले की बारिश के साथ ही जून में हुई अच्छी वर्षा से खरीफ फसलों की शुरूआती बुआई 13.23 फीसदी बढ़कर 92.56 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई केवल 81.74 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई थी।
भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार मानसून के आगमन के पहले दो सप्ताह के भीतर देशभर में बारिश सामान्य से 31 फीसदी ज्यादा हुई है। इस दौरान पूरे देश में 75.8 मिलीमीटर बारिश हुई है, जबकि इस दौरान औसतन 57.8 मिलीमीटर बारिश ही होती है। मध्य भारत के साथ ही उत्तर भारत के राज्यों में हुई अच्छी बारिश से खरीफ फसलों की बुआई में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कृषि मंत्रालय के अनुसार गन्ने की बुआई चालू खरीफ सीजन में बढ़कर 48.01 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल की इसी अवधि के 47.40 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।
धान के साथ ही दलहन की शुरूआती बुआई आगे
खरीफ की प्रमुख फसल धान की रोपाई 5.59 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 4.84 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। दालों की बुआई भी चालू खरीफ में बढ़कर 2.28 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 1.58 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। दालों में अरहर की बुआई 46 हजार हेक्टेयर में, उड़द की 34 हजार हेक्टेयर में और मूंग की बुआई 69 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है। अन्य दालों की बुआई भी 78 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है।
मोटे अनाजों में मक्का और बाजरा की बुआई ज्यादा
मोटे अनाजों की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 7.75 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई केवल 5.49 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई थी। बाजरा की बुआई बढ़कर 1.72 लाख हेक्टेयर में, ज्वार की 84 हजार हेक्टेयर में और रागी की 80 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है। मक्का की बुआई बढ़कर 3.89 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 3.63 लाख हेक्टेयर में ही मक्का की बुआई हो पाई थी।
मूंगफली के साथ ही कपास की बुआई बढ़ी
खरीफ तिलहन की बुआई चालू सीजन में बढ़कर 4.29 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 1.04 लाख हेक्टेयर में ही इनकी बुआई हो पाई थी। मूंगफली की बुआई बढ़कर 3.54 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 0.25 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। खरीफ तिलहन की प्रमुख फसल सोयाबीन की बुआई 23 हजार हेक्टेयर में और सनफ्लावर की 22 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है। कपास की बुआई चालू खरीफ सीजन में बढ़कर 18.91 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई केवल 15.32 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।..............  आर एस राणा

इस बार भी उत्तर प्रदेश से गेहूं की खरीद तय लक्ष्य से कम रहने की आशंका, उत्पादन के 8.50 फीसदी पर ही पहुंची

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी विपणन सीजन 2020-21 में जहां मध्य प्रदेश और राजस्थान से गेहूं की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद तय लक्ष्य से ज्यादा हो चुकी है वहीं सबसे बड़े गेहूं उत्पादक राज्य से खरीद तय लक्ष्य के 56.10 फीसदी तक ही पहुंच पाई है जोकि राज्य में गेहूं के 363 लाख टन उत्पादन का केवल 8.50 फीसदी ही है। राज्य में 30 जून तक गेहूं की एमएसपी पर खरीद होनी है, ऐसे में इस बार भी खरीद तय लक्ष्य 55 लाख टन से कम ही रहने की आशंका है।
उत्तर प्रदेश से चालू रबी विपणन में अभी तक केवल 30.85 लाख टन गेहूं की खरीद ही एमएसपी पर हो पाई है जबकि खरीद का लक्ष्य 55 लाख टन का तय किया गया है। पिछले रबी सीजन में भी राज्य से 55 लाख टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन खरीद हुई थी केवल 37 लाख टन की ही। राज्य सरकार ने कोरोना वायरस के कारण चालू रबी सीजन में खरीद 30 जून तक करने का निर्णय किया है, लेकिन जिस गति से खरीद हो रही है, उस देखते हुए खरीद तय लक्ष्य से कम ही रहेगी।
उत्तर प्रदेश में 30 जून तक होगी गेहूं की सरकारी खरीद
उत्तर प्रदेश के खाद्य एवं रसद विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार चालू रबी में राज्य से 30.85 लाख टन गेहूं की खरीद एमएसपी पर हो चुकी है उन्होंने बताया कि कोरोना वायरस के कारण हुए लॉकडाउन की वजह से चालू रबी में राज्य की मंडियों से गेहूं की खरीद पहली अप्रैल के बजाए 15 अप्रैल से शुरू हुई थी, इसलिए राज्य सरकार ने खरीद की समय सीमा को 15 जून से बढ़ाकर 30 जून 2020 कर दिया है। उन्होंने बताया कि अभी तक राज्य के 5.81 लाख टन किसानों से गेहूं की खरीद हुई है तथा सोशल डिस्टेंस के नियमों को देखते हुए राज्य में 5,955 केद्रों के माध्यम से खरीद की जा रही है। राज्य में गेहूं की खरीद भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और नेफेेड के साथ ही 10 एजेंसियां खरीद कर रही हैं।
चालू रबी में 376.57 लाख टन गेहूं की हो चुकी है खरीद, पिछले साल से ज्यादा
भारतीय खाद्य निगम के अनुसार चालू रबी में 376.57 लाख टन गेहूं की खरीद हुई है जबकि चालू रबी में खरीद का लक्ष्य 407 लाख टन का तय किया गया है। पिछले रबी में कुल खरीद 341.32 लाख टन की हुई थी। चालू रबी में मध्य प्रदेश से 127.48 लाख टन गेहूं की खरीद हो चुकी है जबकि राज्य से खरीद का लक्ष्य केवल 100 लाख टन का था। इसी तरह से राजस्थान से खरीद का लक्ष्य 17 लाख टन का था जबकि अभी तक 17.69 लाख टन गेहूं खरीद गया है। पंजाब से चालू रबी में 127.12 लाख टन और हरियाणा से 73.98 लाख टन गेहूं समर्थन मूल्य पर खरीदा गया है।
गेहूं का 10.71 करोड़ टन उत्पादन का अनुमान
कृषि मंत्रालय के तीसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार चालू रबी में गेहूं का रिकार्ड 10.71 करोड़ टन उत्पादन का अनुमान है जोकि पिछले साल के 10.36 करोड़ टन से अधिक है। चालू रबी में गेहूं का समर्थन मूल्य 1,925 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जबकि पिछले रबी सीजन में 1,840 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं की खरीद हुई थी।.............. आर एस राणा

13 जून 2020

अगले 48 घंटों में मानसून बिहार, दक्षिण गुजरात और दक्षिण मध्यप्रदेश तक पहुंचेगा - आईएमडी

आर एस राणा
नई दिल्ली। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार अगले 48 घंटों में मानसून और आगे बढ़ेगा और छत्तीसगढ़ के बाकी हिस्सों, बिहार, दक्षिण गुजरात और दक्षिण मध्यप्रदेश में पहुंच जायेगा। आईएमडी के उप निदेशक आनंद शर्मा ने बताया कि मानूसन अच्छी स्थिति में है और महाराष्ट्र के ज्यादातर हिस्सों में आ चुका है। कर्नाटक, ओडिशा, छत्तीसगढ़ के काफी हिस्सों में मानसून पहुंच चुका है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है। महाराष्ट्र में दस्तक देने के बाद मानसून पश्चिम बंगाल पहुंच गया है। अब जल्दी ही मानसून के बिहार पहुंचने की उम्मीद है। दिल्ली-एनसीआर में हल्की बारिश तो होने का अनुमान है लेकिन आने वाले 4-5 दिनों में कोई ज्यादा राहत नहीं है, मानसून आने में अभी वक्त लगेगा।
निम्न दबाव का क्षेत्र आगे बढ़ते हुए पूर्वी मध्य प्रदेश तथा इससे सटे छत्तीसगढ़ में पहुंचा
मौसम की जानकारी देने वाली निजी एजेंसी स्काईमेट के अनुसार निम्न दबाव का क्षेत्र आगे बढ़ते हुए पूर्वी मध्य प्रदेश तथा इससे सटे छत्तीसगढ़ तक पहुँच गया है। उत्तरी कोंकण गोवा क्षेत्र पर एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र विकसित हो गया है। एक अन्य चक्रवाती सिस्टम दक्षिणी हरियाणा के ऊपर हवाओं में बना हुआ है। दक्षिणी हरियाणा पर बने चक्रवाती क्षेत्र से मध्य प्रदेश पर निम्न दबाव के क्षेत्र तक एक ट्रफ रेखा बनी हुई है।
पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के हिस्सों में बारिश होने का अनुमान
अगले 24 घंटों के दौरान पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार, ओडिशा के कुछ हिस्सों, छत्तीसगढ़, दक्षिण-पूर्वी मध्य प्रदेश, तटीय कर्नाटक, कोंकण गोवा और गुजरात क्षेत्र में हल्की से मध्यम बारिश जारी रहने के आसार हैं। पूर्वोत्तर भारत, केरल, आंतरिक कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, आंतरिक महाराष्ट्र, शेष मध्य प्रदेश, राजस्थान के कुछ हिस्सों, जम्मू-कश्मीर, मुज़फ़्फ़राबाद, गिलगित-बाल्टिस्तान और उत्तराखंड में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश हो सकती है।
पिछले 24 घंटों में महाराष्ट्र के रत्नागिरी में हुई सबसे ज्यादा बारिश
बीते 24 घंटों के दौरान कोंकण व गोवा में मध्यम से भारी बारिश हुई। कुछ हिस्सों में अति भारी बारिश रिकॉर्ड की गई। पिछले 24 घंटों के दौरान देश के कई इलाकों में भारी वर्षा रिकॉर्ड की गई। इस दौरान देश में सबसे ज़्यादा बारिश महाराष्ट्र के रत्नागिरी में हुई। बारिश का आंकड़ा 167 मिमी रहा। तटीय कर्नाटक, केरल, मराठवाड़ा, विदर्भ, दक्षिणी छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और असम के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ एक-दो स्थानों पर मूसलाधार वर्षा हुई। पूर्वोत्तर भारत के बाकी हिस्सों, पूर्वी बिहार, ओडिशा, झारखंड, मध्य प्रदेश, गुजरात के पूर्वी क्षेत्रों, दक्षिणी राजस्थान, अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह, लक्षद्वीप और तटीय आंध्र प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश हुई। आंतरिक कर्नाटक, हरियाणा, उत्तराखंड, पंजाब और जम्मू व कश्मीर में हल्की बारिश हुई।................  आर एस राणा

महंगी मजदूरी के साथ ही महंगे डीजल ने तोड़ी धान किसानों की कमर, सात दिन में डीजल 4 रुपये बढ़ा

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2020-21 के लिए धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में 53 रुपये प्रति क्विंटल की मामूली बढ़ोतरी ही की है जबकि दोगुनी मजूदरी के साथ ही डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी से धान रोपाई की लागत ही 18 से 20 फीसदी तक बढ़ गई है। पिछले सात दिनों से डीजल की कीमतों में करीब चार रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी है जिससे खेत की जुताई से लेकर सिंचाई तक का खर्च बढ़ गया है।
कोरोना वायरस महामारी के कारण प्रवासी मजदूरों के पलायन से परेशान धान किसानों की रही सही उम्मीद महंगे डीजल ने तोड़ दी है। पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में धान की रोपाई तो शुरू हो गई है, लेकिन प्रावासी मजूदरों के गांव चले जाने से धान की रोपाई के दोगुने दाम देने पड़ रहे हैं। हरियाणा में गोहाना के गांव पूठी निवासी किसान राजेश कुमार ने बताया कि उसने पांच एकड़ में धान की फसल लगाने के लिए पौध तैयार की हुई है लेकिन रोपाई के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैैं। उन्होंने बताया कि पिछले साल 2,800 से 3,000 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से धान की रोपाई करवाई थी, लेकिन इस बार स्थानीय मजदूर 4,500 से 5,000 रुपये प्रति एकड़ मांग रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रवासी मजदूर अपने गांव चले गए हैं, जबकि स्थानीय मजदूर ज्यादा पैसे मांग रहे हैं।
पंजाब के लुधियाना के धान किसान धर्मेंद्र गिल ने बताया कि 10 जून से धान की रोपाई शुरू हो गई है लेकिन प्रवासी मजदूर अपने गांव चले गए हैं, जबकि स्थानीय मजूदर धान रोपाई के पिछले साल की तुलना में दोगुने दाम मांग रहे हैं। पिछले साल धान की रोपाई 2,200 से 2,500 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से कराई थी, जबकि इस बार मजदूर 4,800 से 5,000 रुपये प्रति एकड़ की दर से रोपाई कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले सात दिनों से डीजल की कीमतों में करीब 4 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी है, जिस कारण खेत की जुताई से लेकर सिंचाई तक का खर्च 10 से 12 फीसदी बढ़ तक गया है। उन्होंने बताया कि छह जून को डीजल का भाव 63.71 रुपये प्रति लीटर था, जोकि शनिवार को बढ़कर 67.28 रुपये प्रति लीटर हो गया।
भारतीय किसान यूनियन, हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि धान की लागत महंगी मजदूरी के साथ ही महंगे डीजल से बढ़ गई है, लेकिन सरकार ने धान के समर्थन मूल्य में मामूली 53 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है। इससे किसानों की लागत तो बढ़ गई है, लेकिन आय में कमी आयेगी। उन्होंने बताया कि हरियाणा में बिना किसी सर्वे के राज्य सरकार ने 19 ब्लॉक में धान नहीं लगाने का आदेश दे दिया था तथा प्रोत्साहन राशि 7,000 रुपये देने की बात कही थी। बाद में विरोध होने से इस फैसले का वापिस लेना पड़ा।
केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2020-21 के लिए खरीफ की प्रमुख फसल धान के एमएसपी में 53 रुपये प्रति क्विंटलकी बढ़ोतरी कर भाव कोमन वेरायटी का 1,868 रुपये और ग्रेड ए वेरायटी का 1,888 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है जबकि पिछले साल खरीफ सीजन में धान के एमएसपी में 65 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी कर भाव कोमन वेरायटी का 1,815 रुपये और ग्रेड ए वेरायटी का 1,835 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था।......... आर एस राणा

राजस्थान में मानसून पूर्व की बारिश 130 फीसदी, खरीफ फसलों की शुरूआती बुआई बढ़ी

आर एस राणा
नई दिल्ली। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार राजस्थान में अभी तक मानसून पूर्व की बारिश 130 फीसदी हुई है जिससे खरीफ फसलों की शुरूआती बुआई में बढ़ोतरी होती हुई है। राज्य में औसतन 21 मिलीमीटर मानसून पूर्व की बारिश होती है, लेकिन इस साल यह 48.2 मिलीमीटर तक हुई है।
राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार चालू सीजन में राज्य में खरीफ फसलों की बुआई बढ़कर 10.25 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 4.71 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। कपास की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 5.19 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 3.79 लाख हेक्टेयर में ही इसकी बुआई हो पाई थी। राज्य में कपास की बुआई का लक्ष्य 6.20 लाख हेक्टेयर का है।
मूंगफली, ग्वार सीड और बाजरा की शुरूआती बुआई बढ़ी
अन्य फसलों में मूंगफली की बुआई चालू खरीफ में 2.07 लाख हेक्टेयर में और ग्वार सीड की 1.09 लाख हेक्टेयर में और हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 49 हजार और 43,500 हेक्टेयर में ही हुई थी। बाजरा की बुआई चालू खरीफ में 1.03 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई शुरू ही नहीं हो पाई थी।
अप्रैल और मई में औसत से अधिक बारिश हुई
मार्च में राजस्थान में मानसून पूर्व की बारिश सामान्यत: 4.1 मिमी होती है जबकि इस साल 20.2 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य मानसून पूर्व की बारिश का 394 फीसदी है। अप्रैल में राज्य में 4.3 मिमी बारिश मानसून पूर्व की होती है जोकि इस साल पांच मिमी बारिश हुई, जो औसत मॉनसून पूर्व की बारिश से 16 फीसदी अधिक है। अप्रैल और मई में औसत से अधिक बारिश हुई, जिसके कारण तापमान सामान्य से कम रहा। मौसम विभाग के अनुसार राज्य में पश्चिमी विक्षोभ बहुत कम अंतराल पर लगातार सक्रिय होता रहा, जिसके कारण राज्य में मानसून पूर्व की बारिश की मात्रा इस साल अधिक रही।............. आर एस राणा

किसानों के बकाया भुगतान में तेजी लाने के लिए चीनी मिलों को राहत देने की तैयारी

आर एस राणा
नई दिल्ली। गन्ना किसानों के बढ़ते बकाया भुगतान को देखते हुए केंद्र सरकार जल्द ही चीनी उद्योग के लिए राहत पैकेज की घोषणा कर सकती है। राहत पैकेज के तहत बफर स्टॉक पर सब्सिडी के साथ ही निर्यात पर सब्सिडी देने के अलावा चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) में 200 रुपये प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी संभव है।
पहली अक्टूबर 2019 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन 2019-20 (अक्टूबर से सितंबर) के दौरान चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का बकाया बढ़कर 22,000 करोड़ रुपये पहुंच गया है। केंद्रीय खाद्य व उपभोक्ता मामले मंत्री रामविलास पासवान ने हाल ही में मंत्रालय के अधिकारियों के साथ गन्ना बकाया की स्थिति की समीक्षा के समय खाद्य सचिव को निर्देश दिया कि वे बकाया को कैसे कम किया जाये इस पर रिपोर्ट प्रस्तुत करें। सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में गन्ने के बकाया को कम करने के लिए एमएसपी में 200 रुपये की बढ़ोतरी करने के साथ ही बफर स्टॉक और निर्यात पर सब्सिडी जारी रखने की बात कही गई है। साथ ही इसमें सॉफ्ट लोन को एक साल और बढ़ाने का प्रस्ताव भी है।
चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य में 200 रुपये की बढ़ोतरी संभव
इस समय केंद्र सरकार ने चीनी का एमएसपी 3,100 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है इसमें अगर 200 रुपये की बढ़ोतरी की जा जाती है तो चीनी का न्यूनतम बिक्री भाव 3,300 रुपये प्रति क्विंटल हो जायेगा, मतलब एमएसपी से नीचे चीनी की बिक्री नहीं होगी जिससे चीनी मिलों को फायदा होगा। नीति आयोग द्वारा गठित टास्कफोर्स ने भी एमएसपी में 200 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की सिफारिश की थी।
मिलों को सॉफ्ट लोन के साथ ही निर्यात और बफर स्टॉक पर सब्सिडी देने का प्रस्ताव
चीनी मिलों के लिए सॉफ्ट लोन को एक साल और बढ़ाने का प्रस्ताव है। सूत्रों के अनुसार सॉफ्ट लोन के तहत 7 फीसदी के सस्ते ब्याज पर कर्ज चीनी मिलों को मिलता है। इसके साथ ही चीनी निर्यात पर सब्सिडी को भी एक साल के लिए बढ़ाया जा सकता है। चीनी के निर्यात पर चालू पेराई सीजन 2019-20 के लिए केंद्र सरकार 10,448 रुपये प्रति टन की दर से चीनी मिलों को सब्सिडी दे रही है, इसके तहत 60 लाख टन चीनी के निर्यात का कोटा तय कर रखा है, जिसमें से अभी तक 48 लाख टन चीनी के निर्यात सौदे और 43 लाख टन की शिपमेंट हो चुकी है जबकि इसके पिछले पेराई सीजन में केवल 37 लाख टन चीनी का ही निर्यात हुआ था। चीनी के बफर स्टॉक पर सब्सिडी देने का भी प्रस्ताव है। बफर स्टॉक की चीनी पर 13.5 फीसदी सब्सिडी केंद्र सरकार दे रही है तथा 40 लाख टन चीनी के बफर स्टॉक की मात्रा तय कर रखी है।
चालू पेराई सीजन में चीनी उत्पादन में आई कमी
पहली अक्टूबर 2019 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन 2019-20 के पहले आठ महीने, 31 मई 2020 तक चीनी के उत्पादन में 18.11 फीसदी की कमी आई है। इस दौरान कुल 268.21 लाख टन का ही उत्पादन हुआ है जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में 327.53 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका था। चालू पेराई सीजन के अंत तक कुल 270 लाख टन चीनी के उत्पादन का अनुमान है।............... आर एस राणा

खाद्य तेलों के आयात शुल्क में 5 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकती है केंद्र सरकार

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार खाद्य तेलों के आयात शुल्क में 5 फीसदी की बढ़ोतरी करने पर विचार कर रही है। सरकार खाने के तेलों के आयात पर निर्भरता कम करने के साथ ही तिलहन के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना चाहती है। खाद्य तेलों में अभी भी हमें अपनी जरुरत का 60 फीसदी से ज्यादा आयात करना पड़ता है।
वर्तमान में क्रूड पाम तेल के आयात पर 37.5 फीसदी और रिफाइंड तेलों के आयात पर 45 फीसदी आयात शुल्क है। क्रूड सोयाबीन तेल, क्रूड सूरजमुखी और सरसों के तेल पर आयात शुल्क 35 फीसदी है। कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार घरेलू तिलहनों का उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी विकास पर अनुसंधान निरंतर चल रहा है। सरकार ने अगले पांच साल में देश में तिलहनों का उत्पादन मौजूदा तकरीबन 300 लाख टन से बढ़ाकर 480 लाख टन तक करने का लक्ष्य रखा है। इस प्रकार पांच साल में तिलहनों का उत्पादन 180 लाख टन बढ़ाया जाएगा, जिसका खाका सरकार ने तैयार कर लिया है।
कोरोना वायरस के कारण हुए लॉकडाउन से मई में आयात में आई कमी
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) ने घरेलू तिलहनों का उत्पादन बढ़ाने के लिए आयातित खाद्य तेलों के आयात पर शुल्क बढ़ाने के साथ ही राष्ट्रीय तिलहन मिशन लांच करने के लिए भी सरकार को पत्र लिखा है। कोरोना वायरस के कारण मई में देश में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 40 फीसदी घटकर 7,07,478 टन का ही हुआ है जबकि पिछले साल मई में 11,80,789 टन का आयात हुआ था। एसईए के अनुसार चालू तेल वर्ष नवंबर-19 से मई-20 के सात महीनों में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 18 फीसदी घटकर 68,89,662 टन का ही हुआ है जबकि पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में इनका आयात 83,84,616 टन का हुआ था।
तेल वर्ष 2016-17 में रिकार्ड 150.77 लाख टन का हुआ था खाद्य एवं अखाद्य तलों का आयात
एसईए के अनुसार तेल वर्ष 2018-19 (अक्टूबर-18 से नवंबर-19) के दौरान खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात बढ़कर 149.13 लाख टन का हुआ, जोकि इसके पिछले साल के 145.16 लाख टन से ज्यादा है। देश में तेल वर्ष 2016-17 में रिकार्ड 150.77 लाख टन खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात हुआ था। कृषि मंत्रालय के तीसर आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2019-20 में 335.01 लाख टन तिलहन का उत्पादन होने का अनुमान है जोकि इसके पिछले साल के 315.22 लाख टन से ज्यादा है। तिलहन की प्रमुख फसलों में सोयाबीन, मूंगफली और सरसों है।.........   आर एस राणा