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05 फ़रवरी 2018

प्याज की कीमतों में तेजी

महाराष्ट्र की मंडियों में आज प्याज के भाव में तेजी आई है। राज्य की लासलगांव मंडी में प्याज का भाव हफ्ते के पहले दिन ही करीब 500 रुपये उछल गया है। केंद्र सरकार ने प्याज के एक्सपोर्ट पर से मिनिमम एक्सपोर्ट प्राइस पूरी तरह से हटा ली है। अब बगैर किसी एमईपी के प्याज का एक्सपोर्ट हो सकेगा। इसी वजह से प्याज की कीमतों में तेजी आई है। पिछले महीने प्याज के थोक भाव में करीब 50 फीसदी की भारी गिरावट आई थी। हालांकि रिटेल में प्याज की कीमतें अभी भी ऊपर बनी हुई हैं।

कच्चे तेल का दाम पिछले 1 महीने के निचले स्तर पर

कच्चे तेल का दाम पिछले 1 महीने के निचले स्तर पर आ गया है। ब्रेंट में 68 डॉलर के नीचे कारोबार हो रहा है। जबकि नायमैक्स क्रूड 65 डॉलर के नीचे आ गया है। डॉलर में बढ़त के साथ अमेरिका में कच्चे तेल का उत्पादन भी बढ़ रहा है। ऐसे में क्रूड की कीमतों पर दोहरा दबाव है। आज डॉलर के मुकाबले रुपये में हल्की कमजोरी है। अमेरिका में रोजगार के शानदार आंकड़ों के बाद सोने में लगातार दबाव जारी है और ग्लोबल मार्केट में सोना आज भी करीब 0.25 फीसदी की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है। हालांकि चांदी में तेजी आई है और इसका दाम करीब 0.5 फीसदी बढ़ गया है। 

चीनी पर आयात शुल्क में हो सकती है बढ़ोतरी, निर्यात नियमों में छूट

आर एस राणा
नई दिल्ली। चीनी की कीमतों में चल रही गिरावट को रोकने के लिए केंद्र सरकार चीनी के आयात पर शुल्क को बढ़ाकर 100 फीसदी कर सकती है जबकि निर्यात के लिए शुल्क में कमी कर सकती है।
सूत्रों के अनुसार चीनी की कीमतों में आई भारी गिरावट से चीनी मिलों पर किसानों का बकाया लगातार बढ़ रहा है। इसलिए चीनी मिलों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार जहां आयात शुल्क को 100 फीसदी करने की तैयारी कर रही है, वहीं निर्यात के लिए निर्यात शुल्क को हटाने के साथ ही सब्सिडी भी दी जा सकती है। इस समय चीनी के निर्यात पर जहां 20 फीसदी निर्यात शुल्क है वहीं आयात पर 40 फीसदी का आयाात शुल्क है।
दिल्ली में चीनी के भाव घटकर सोमवार को 3,375 से 3,400 रुपये प्रति क्विंटल रह गए जबकि उत्तर प्रदेश में चीनी के एक्स फैक्ट्री भाव घटकर 3,050 से 3,200 रुपये प्रति क्विंटल (टैक्स अलग) रह गए। ..............  आर एस राणा

03 फ़रवरी 2018

विश्व बाजार में भाव घटने से कपास के निर्यात में कमी की आशंका

आर एस राणा
नई दिल्ली। विदेशी बाजार में कपास की कीमतों में आई गिरावट से चालू फसल सीजन 2017—18 में इसके कुल निर्यात में कमी आने की आशंका है। चालू सीजन में निर्यात घटकर 50 से 55 लाख गांठ (एक गांठ—170 किलोग्राम) ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल 63 लाख गांठ ​का निर्यात हुआ था। फसल सीजन 2017—18 में अभी तक केवल 24 से 25 लाख गांठ  कपास के निर्यात सौदे हुए हैं। अत: निर्यात में कमी आई तो घरेलू बाजार में इसके भाव घटेंगे, ​जिसका नुकसान कपास किसानों को उठाना पड़ सकता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्ताहभर में कपास की कीमतों में करीब 4 फीसदी की गिरावट आकर न्यूयार्क एक्सचेंज में भाव 77.3 सेंट प्रति पाउंड रह गए जबकि 26 जनवरी को इसके भाव उपर में 83 सेंट प्रति पाउंड हो गए थे। 

नार्थ इंडिया कॉटन एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश राठी ने बताया कि विदेशी बाजार में भाव कम होने के निर्यात मांग में भी कमी आई है। विश्व बाजार में कपास की उपलब्धता ज्यादा है इसलिए हमारे यहां से कुल निर्यात में भी कमी आने की आशंका है। पिछले साल देश से 63 लाख गांठ का निर्यात हुआ था जबकि चालू सीजन में 50 से 55 लाख गांठ का ही निर्यात होने का अनुमान है।
निर्यातकों की मांग कम होने से घरेलू मंडियों में भी कपास की कीमतों में कमी आई है। अहमदाबाद में शंकर 6 किस्म की कपास के भाव घटकर शनिवार को 40,500 से 41,000 रुपये प्रति कैंडी (एक कैंडी—356 किलो) रह गए जबकि 27 जनवरी को इसका भाव 42,500 से 43,000 रुपये प्रति कैंडी था।

कॉटन कारपोरेशन आफ इंडिया (सीसीआई) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चालू खरीफ विपणन सीजन 2017—18 में निगम ने 6.25 लाख गांठ कपास की खरीद की है। इसमें से 3.67 लाख गांठ कपास की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और बाकि की खरीद कार्मिशयल रुप में की गई है। उन्होंने बताया कि 30 जनवनी 2018 तक उत्पादक मंडियों में 176.52 लाख गांठ कपास की आवक हो चुकी है। 

कॉटन एडवाईजरी बोर्ड (सीएबी) के अनुसार चालू फसल सीजन 2017—18 में कपास का उत्पादन बढ़कर 377 लाख गांठ होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसका उत्पादन 345 लाख गांठ का हुआ था। .............  आर एस राणा

केंद्र क्रुड पॉम तेल के आयात पर शुल्क 5 फीसदी घटाएं — अतुल चतुर्वेदी

आर एस राणा
नई दिल्ली। घरेलू उद्योग के भले के लिए केंद्र सरकार को आयातित क्रुड पॉम तेल के आयात पर शुल्क को 5 फीसदी कम कर देना चाहिए, जबकि रिफाइंड खाद्य तेलों पर आयात शुल्क को ज्यों का त्यों रखे। इससे घरेलू खाद्य तेल रिफाइनरी उद्योग को प्रोत्साहन मिलेगा।
दिल्ली में आयोजित ग्लोब आॅयल में सॉल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन आॅफ इंडिया के अध्यक्ष अतुल चतुर्वेदी ने कहां कि केंद्र सरकार को क्रुड पॉम तेल और रिफाइंड तेल के आयात में शुल्क के अंतर को 10 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर देना चाहिए। इससे रिफाइंड तेल के बजाए क्रुड पॉम तेल का आयात ज्यादा होगा, जिसका फायदा घरेलू उद्योग को मिलेगा। इस समय क्रुड पॉम तेल पर आयात शुल्क 30 फीसदी है जबकि रिफाइंड पाम तेल के आयात शुल्क 40 फीसदी है। दिसंबर में भारतीय बंदरगाह पर आरबीडी पामोलीन के औसतन भाव जहां 661 डॉलर प्रति टन रहे, वहीं क्रुड पॉम तेल के भाव इस दौरान 662 डॉलर प्रति टन थे।
भारतीय खाद्य तेलों का सबसे बड़ा आयातक देश है, तथा तेल वर्ष 2016—17 (नवंबर—16 से अक्टूबर—17) के दौरान कुल खपत के करीब 70 फीसदी खाद्य तेलों को आयात किया गया है। ऐसे में सरकार को खाद्य तेलों में आत्मनिर्भर बनाने के लिए तिलहनों के उत्पादन को ज्यादा प्रोत्साहन देने की जरुरत है। तेल वर्ष 2016—17 के दौरान कुल 146 लाख टन खाद्य तेलों का आयात हुआ है। अत: खाद्य तेलों का आयात बढ़ने से घरेलू तिलहनी फसलों के किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है।
मध्य प्रदेश में राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई भावांतर योजना को अच्छी पहल बताते हुए उन्होंने कहां कि इससे सोयाबीन के किसानों को फायदा होगा।
उन्होंने कहां कि आम बजट 2018—19 में केंद्र सरकार ने किसानों को फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) डेढ़ गुना देने का जो ऐलान किया है, इससे किसानों को लाभ होगा। उन्होंने केंद्र सरकार से नीति निर्धारण में प्राइवेट उद्योग को भी भागदारी बनाने की मांग की है इससे मांग और सप्लाई की सही तस्वीर का पता चलेगा, जिससे नीति बनानी आसान होगी।  ..........  आर एस राणा

02 फ़रवरी 2018

रबी में दलहन की बुवाई में भारी बढ़ोतरी, गेहूं की पिछड़ी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी में दलहन की रिकार्ड बुवाई 166.47 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि रबी की प्रमुख फसल गेहूं की बुवाई घटकर चालू रबी में अभी तक केवल 300.70 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 317.82 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। कृषि मंत्रालय के अनुसार रबी में फसलों की कुल बुवाई 632.34 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुवाई 741.72 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।

दलहन की बुवाई में भारी बढ़ोतरी

कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू रबी में दलहन की बुवाई बढ़कर 166.47 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुवाई केवल 158.02 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई थी। रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुवाई बढ़कर 107.24 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुवाई केवल 99.04 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। इसी तरह से मसूर की बुवाई बढ़कर 17.34 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुवाई 17.25 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। उड़द की बुवाई में चालू रबी में जरुर कमी आई है, लेकिन मूंग की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है।

तिलहनों की बुवाई घटी

रबी तिलहनों की बुवाई में चालू सीजन में कमी आई है। मंत्रालय के अनुसार चालू रबी में तिलहनों की कुल बुवाई अभी तक 80.29 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुवाई 84.44 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। रबी तिलहनों की प्रमुख फसल सरसों की बुवाई घटकर 66.84 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक सरसों की बुवाई 70.60 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। मूंगफली की बुवाई चालू सीजन में 6.04 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुवाई केवल 6.03 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। अलसी की बुवाई बढ़कर चालू रबी में 4.01 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई केवल 3.84 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी।

मोटे अनाजों की बुवाई में आई कमी

चालू रबी सीजन में मोटे अनाजों की बुवाई में भी कमी आई है। अभी तक देशभर में मोटे अनाजों की बुवाई केवल 56.27 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी 57.23 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। मोटे अनाजों में ज्वार की बुवाई 30.93 लाख हैक्टेयर में, मक्का की बुवाई 16.70 लाख हैक्टेयर में और जौ की बुवाई 7.62 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुवाई क्रमश: 32.18, 16.26 और 8.16 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।

रबी में धान की रौपाई ज्यादा

धान की रौपाई चालू रबी में बढ़कर 28.61 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी रौपाई केवल 24.21 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। .............  आर एस राणा

किसानों को कैसे मिलेगा फसलों का डेढ़ गुना एमएसपी

आर एस राणा
नई दिल्ली। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए बजट में बड़े एलान किए जिसमें किसानों को उनकी फसल पर आने वाली लागत का 1.5 गुना एमएसपी बढ़ाकर देने की घोषणा भी शामिल है। लेकिन एमएसपी किस आधार पर तय किया जाएगा ये बड़ा सवाल है। चुनावी साल से पहले किसानों को लुभाने के लिए वित्त मंत्री ने बजट में एमएसपी 1.5 गुना बढ़ाने का एलान तो कर दिया लेकिन बड़ा सवाल ये है कि आखिर एमएसपी किस आधार पर तय किया जाएगा।
2006 में आई स्वामीनाथन कमीशन की रिपोर्ट के मुताबिक फसल पर आने वाली लागत 3 हिस्सों में बंटी होती है। पहले हिस्से में किसानों के फसल उत्पादन में किए गए सभी तरह के नकद खर्च शामिल होते हैं। दूसरे हिस्से में नकद खर्च के साथ परिवार के सदस्यों की मेहनत की अनुमानित लागत को भी जोड़ा जाता है। तीसरे हिस्से में फसल उत्पादन में नकद और गैर-नकद के अलावा जमीन पर लगने वाले लीज रेंट और अन्य कृषि पूंजियों पर लगने वाला ब्याज भी शामिल होता है। वित्त मंत्री ने सिर्फ एमएसपी बढ़ाने का एलान किया लेकिन किस लागत पर एमएसपी बढ़ेगी ये साफ नहीं है।
ज्यादातर किसान संगठन सरकार के इस एलान से नाखुश हैं। एक अनुमान के मुताबिक देश के सिर्फ 6 फीसदी किसानों को ही उनकी फसल पर एमएसपी मिल पाता है। बाकी किसानों की फसल बिचौलियों और साहूकरों के पास जाती है। ऐसे में वित्त मंत्री ने ये भी साफ नहीं किया है कि 94 फीसदी किसानों को एमएसपी दिलवाने के लिए क्या इंतजाम किए जाएंगे और उनकी खरीद को सरकारी खरीद केंद्रों में कैसे पहुंचाया जाएगा।
2017-18 में कृषि क्षेत्र के लिए 41886 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था जिसे बाद में बढ़ाकर 41105 करोड़ रुपये कर दिया गया था। इस बार आवंटन बढ़ाकर 46700 करोड़ रुपये किया गया है। यानी सिर्फ 4845 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी में किसानों की आय दोगुनी कैसी होगी। ..............  आर एस राणा