कुल पेज दृश्य

09 दिसंबर 2016

गेहूं की बुवाई 225 लाख हैक्टेयर के पार, दलहन और तिलहन की भी ज्यादा

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी में जहां गेहूं की बुवाई बढ़कर 225 लाख हैक्टेयर से ज्यादा हो गई है, जोकि पिछले साल की तुलना में ज्यादा है, लेकिन औसतन बुवाई में कमी आई है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू रबी में अभी तक गेहूं की बुवाई बढ़कर 225.63 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 202.28 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हो पाई थी। हालांकि सामान्यतः 9 दिसंबर तक औसतन गेहूं की बुवाई 230.76 लाख हैक्टेयर में हो जाती है।
चालू रबी में जहां दलहन और तिलहनों की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है वहीं मोटे अनाजों के साथ ही धान की रोपाई अभी भी पिछे चल रही है। मंत्रालय के अनुसार चालू रबी अभी तक देषभर में 472.43 लाख हैक्टेयर में फसलों की बुवाई हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुवाई 438.90 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी।
रबी दहलन की बुवाई अभी तक 121.74 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 110.80 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुवाई बढ़कर 80.87 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 74.06 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। मसूर की बुवाई भी बढ़कर चालू रबी में अभी तक 13.96 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 11.37 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी।
रबी तिलहनों की बुवाई चालू सीजन में अभी तक 72.23 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 65.71 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी। रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों की बुवाई 64.20 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 57.27 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई थी। मूंगफली की बुवाई चालू रबी में बढ़कर 3.15 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 2.34 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी।
हालांकि मोटे अनाजों की बुवाई अभी भी पिछे चल रही है, अभी तक देषभर में केवल 44.83 लाख हैक्टेयर में ही मोटे अनाजों की बुवाई हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 49.13 लाख हैक्टेयर में इनकी बुवाई हो चुकी थी। मोटे अनाजों में सबसे ज्यादा कमी ज्वार की बुवाई में आई है। ज्वार की बुवाई चालू रबी में अभी तक केवल 29.32 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 34.58 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। रबी मक्का की बुवाई भी चालू सीजन में अभी तक 8.99 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 8.63 लख हैक्टेयर में इसकी बुवाई हुई थी। जौ की बुवाई चालू रबी में 6.19 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 5.39 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। धान की रोपाई चालू रबी में अभी तक केवल 8 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 10.98 लाख हैक्टेयर में धान की रोपाई हो चुकी थी।...........आर एस राणा

ग्लोबल मार्केट में सोने पर दबाव

डॉलर में उछाल से सोना दबाव में आ गया है और ग्लोबल मार्केट में सोने पर दबाव बढ़ गया है। कॉमैक्स पर सोना करीब 1165 डॉलर आसपास कारोबार कर रहा है। चांदी में सोने से ज्यादा गिरावट आई है। इसका दाम फिर से 17 डॉलर के नीचे आ गया है। दरअसल डॉलर में फिर से बढ़त देखने को मिली है और डॉलर इंडेक्स दोबारा 101 के पार चला गया है। ऐसे में ग्लोबल मार्केट में कमोडिटी की कीमतों पर दबाव बढ़ गया है। कल की बढ़त के बाद कच्चे तेल में भी अब दबाव शुरू हो गया है। ब्रेंट में गिरावट देखी जा रही है। लंदन मेटल एक्सचेंज पर बेस मेटल्स में बेहद छोटे दायरे में कारोबार हो रहा है। इस बीच डॉलर के मुकाबले रुपये में आज कमजोरी बढ़ गई है। घरेलू बाजार में रुपया करीब 0.5 फीसदी की कमजोरी के साथ कारोबार कर रहा है। 1 डॉलर की कीमत 67.60 रुपये के स्तर पर पहुंच गई है। गौर करने वाली बात ये है कि कल रुपया 1 महीने के ऊपरी स्तर पर चला गया था।

27 लाख टन दलहन का हो चुका है आयात, भाव में गिरावट की उम्मीद

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2016-17 के पहले सात महीनों अप्रैल से अक्टूबर के दौरान 27.48 लाख टन दलहन का आयात हो चुका है। पिछले वित्त वर्ष 2015-16 में कुल आयात 57.97 लाख टन का हुआ था।
खाद्य मंत्रालय के अनुसार चालू वित्त वर्ष में कुल दलहन के आयात में पिछले साल की तुलना में कमी आयेगी, क्योंकि फसल सीजन 2015-16 में खरीफ और रबी को मिलाकर दालों की कुल पैदावार 200 लाख टन होने का अनुमान है। ऐसे में अगर 40 लाख टन दालों का आयात होता है, तो कुल उपलब्धता 240 लाख टन की होगी, जबकि देष में सालाना दालों की खपत 220 से 225 लाख टन की ही होती है। कृषि मंत्रालय के अनुसार खरीफ में दलहन की पैदावार 87 लाख टन होने का अनुमान है जबकि रबी में 130 लाख टन होने का अनुमान है। चालू रबी में चना की बुवाई में जहां 36 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, वहीं मसूर की बुवाई भी अभी तक 13 फीसदी ज्यादा है।
जानकारों के अनुसार दिसंबर में दलहन का आयात ज्यादा मात्रा में होगा, लेकिन आगे जनवरी से दलहन के आयात के सौदों में कमी आ सकती है। इसलिए आगामी दिनों में सभी दलहन चना, अरहर, मसूर और उड़द तथा मटर के साथ ही मूंग की कीमतों पर दबाव रहेगा।
सार्वजनिक कंपनियां एमएसटीसी और एसटीसी अभी तक 4.06 लाख टन दलहन के आसात सौदे कर चुकी हैं, तथा इसमें से 81,985 टन दलहन का आयात भी हो चुका है। यह दलहन केंद्र सरकार 20 लाख टन बफर स्टॉक के लिए आयात कर रही है, तथा इसमें से जहां 10 लाख टन दलहन की खरीद घरेलू मंडियों से की जायेगी, वहीं 10 लाख टन का आयात किया जायेगा।..............आर एस राणा

08 दिसंबर 2016

नवंबर में मक्का का निर्यात बढ़ा

आर एस राणा
नई दिल्ली। नवंबर महीने में मक्का का निर्यात बढ़कर 12,801 टन का हुआ है जबकि अक्टूबर महीने में इसका निर्यात केवल 8,929 टन का ही हुआ था। नवंबर महीने में मक्का के निर्यात सौदे 259.85 डॉलर प्रति टन (एफओबी) की दर से हुए है। जानकारों के अनुसार इस दौरान मक्का का निर्यात नेपाल और यमन को डिपलोमेटिक आधार पर ही हुआ है।
स्टॉकिस्टों की मांग नहीं आने के कारण इस समय मक्का में मांग कमजोर है, जबकि नकदी की कमी के कारण उत्पादक मंडियों में मक्का की दैनिक भी आवक कम है। इसीलिए भाव लगभग स्थिर से बने हुए हैं। माना जा रहा है कि आगे जैसे ही दैनिक आवक बढ़ेगी, भाव में गिरावट ही आने का अनुमान है। चालू खरीफ में जहां मक्का की पैदावार ज्यादा होने का अनुमान है, वहीं विष्व बाजार में भाव कम होने के कारण मक्का का निर्यात भी सीमित मात्रा में ही हो पा रहा है।.............आर एस राणा

चीनी का निर्यात बढ़ा, आयात घटा

आर एस राणा
नई दिल्ली। नवंबर महीने में जहां चीनी के निर्यात में बढ़ोतरी हुई है, वहीं आयात में कमी आई है। नवंबर महीने में चीनी का निर्यात 66 फीसदी बढ़कर 0.99 लाख टन का हुआ है जबकि अक्टूबर महीने में इसका निर्यात 0.60 लाख टन का ही हुआ था।
दूसरी तरफ नवंबर महीने में चीनी का आयात घटकर 2.90 लाख टन (रॉ-षुगर) का हुआ है जबकि अक्टूर महीने में चीनी का आयात 3.76 लाख टन का हुआ था। इस समय विष्व बाजार में चीनी के भावों में चीनी के जहां निर्यात के पड़ते नहीं है, वहीं आयात भी केवल टन टू टन के आधार पर ही हो रहा है। टन टू टन के आधार पर रॉ-षुगर का आयात करके उसे व्हाईट चीनी में बदलकर निर्यात करना अनिवार्य होता है। वर्तमान में चीनी का निर्यात पहले के हुए सौदों का ही हो रहा है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2016-17 के पहले सात महीनों अप्रैल से अक्टूबर के दौरान मूल्य के हिसाब से चीनी के निर्यात में 22.05 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल निर्यात 4,842.75 करोड़ रुपये की हुई है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 3,967.90 करोड़ रुपये मूल्य का चीनी का निर्यात हुआ था।.............आर एस राणा

गेहूं पर आयात षुल्क षून्य किय

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने गेहूं के आयात पर 10 फीसदी आयात षुल्क को षून्य कर दिया है। सूत्रों के अनुसार इस बाबत जल्दी ही अधिसूचना जारी की जायेगी। गेहूं के आयात षुल्क को षून्य करने से घरेलू बाजार में गेहूं की कीमतों में हल्की नरमी आने का अनुमान है। दक्षिण भारत की मंडियों में गुरुवार को गेहूं के भाव में 50 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आई है, लेकिन दिल्ली में भाव 2,150 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।
उत्तर भारत के राज्यों में गुरुवार को गेहूं की निविदा भारी जायेगी, माना जा रहा है कि निविदा में भाव कुछ कम हो सकते हैं। जानकारों के अनुसार गेहूं के आयात षुल्क को षून्य करने का असर उत्तर भारत के राज्यों में गेहूं की कीमतों पर ज्यादा नहीं पड़ेगा, यहां गेहूं के भाव में एफसीआई द्वारा निविदा की मात्रा में बढ़ोतरी करने के बाद ही गिरावट आ सकती है। मालूम हो कि इससे पहले सितंबर में केंद्र सरकार ने गेहूं के आयात षुल्क को 25 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी किया था।.........आर एस राणा

कच्चे तेल में तेज गिरावट

घरेलू बाजार में कच्चे तेल में तेज गिरावट आई है। दरअसल नायमैक्स पर क्रूड का दाम 50 डॉलर के नीचे है। वहीं नैचुरल गैस में भी नीचे कारोबार हो रहा है। फिलहाल एमसीएक्स पर कच्चा तेल 0.7 फीसदी फिसलकर 3370 रुपये पर आ गया है। एमसीएक्स पर नैचुरल गैस 2.25 फीसदी की गिरावट के साथ 244.1 रुपये पर आ गया है। इस बीच रुपया करीब 1 महीने के ऊपरी स्तर पर चला गया है। 1 डॉलर की कीमत 67.50 रुपये के नीचे है। वहीं ग्लोबल मार्केट में रिकवरी के बावजूद घरेलू बाजार में सोने और चांदी पर दबाव है।