07 फ़रवरी 2014
Gold rises on sustained buying, global cues
New Delhi, Feb 7. In a mixed trend, gold prices rose
Rs 30 to Rs 30,540 per ten grams in the national capital today
on sustained buying by stockists amid a firming global trend.
However, silver met with resistance and lost Rs 300 to Rs
44,800 per kg.
A similar trend was witnessed in Mumbai, as gold of 99.9
and 99.5 per cent purity strengthened by Rs 15 each to Rs
30,275 and Rs 30,125 per ten grams, respectively while silver
declined by Rs 200 to Rs 45,400 per kg.
Traders said sustained buying by stockists for the wedding
season mainly helped gold prices to gain further ground.
Firming global trend where gold rose ahead of US jobs data
and expectations that China might emerge as the largest
consumer after returning from the Lunar New Year holidays,
also boosted the sentiment, they said.
Gold in Singapore, which normally sets price trend on the
domestic front, rose 0.4 per cent to USD 1,263.23 an ounce.
At the domestic front, gold of 99.9 and 99.5 per cent
purity advanced by Rs 30 each to Rs 30,540 and Rs 30,340 per
ten grams, respectively. It had gained Rs 50 yesterday.
Sovereign held steady at Rs 25,300 per piece of eight
grams.
On the other hand, silver ready fell by Rs 300 to Rs
44,800 per kg and weekly-based delivery by Rs 385 to Rs 44,400
per kg. The white metal had surged by Rs 950 in last trade.
Silver coins, however, held steady at Rs 87,000 for buying
and Rs 88,000 for selling of 100 pieces.
Sugar export subsidy likely at Rs 3500/ton as pitched by Pawar
New Delhi, Feb 7. Government is all set to announce
a subsidy of Rs 3,500 per tonne on export of four million
tonnes of raw sugar costing the exchequer Rs 1,400 crore, a
move aimed at boosting overseas sale and bailing out the
cash-starved industry.
The CCEA had twice deferred the decision on fixing the
export subsidy this week as Agriculture Minister Sharad Pawar
was in favour of higher subsidy of Rs 3,500 per tonne as
against Rs 2,000 per tonne proposed by the Food Ministry.
Amid differences among the ministries, Pawar, Finance
Minister P Chidambaram and Food Minister K V Thomas today met
to resolve the issue. They finally agreed to fix subsidy of Rs
3,500 per tonne, aggressively pushed by the NCP chief.
"In the meeting, it has been decided to provide a subsidy
of Rs 3,500 per tonne. The matter will now come before the
CCEA soon," Food Minister K V Thomas told PTI after the
meeting.
On a subsidy of Rs 3,500 per tonne, Thomas said the
burden will increase to Rs 1,400 crore for export of 4 million
tonnes of raw sugar in two years.
On the earlier proposal of Rs 2000 per tonne the burden
would have been Rs 800 crore.
Subsidy will be reviewed after export of 2 million tonnes
of raw sugar.
The subsidy will be borne largely from Sugar Development
Fund under the Food Ministry, he added.
India, the world's second biggest sugar producer, is
sitting on huge opening stock of the sweetener.
More over, the output in the current 2013-14 marketing
year (October-September) is also expected to be higher at 25
million tonnes, against the demand of 23.5 million tonnes.
The Food Ministry has proposed a cash incentive to sugar
mills for exports of raw sugar as the industry is facing a
liquidity crunch with prices of sweetener being lower than the
cost of production.
Sugarcane price arrears to farmers has reached about Rs
10,000 crore from about Rs 3,000 crore at the start of the
current marketing year in October 2013.
In December, the government had approved Rs 6,600 crore
interest-free loan to the sugar industry for making payment to
sugarcane farmers.
05 फ़रवरी 2014
कॉयर एक्सपो में 150 करोड़ के निर्यात सौदे
आर एस राणा : आल्पुषा (केरल)... | Feb 05, 2014, 00:22AM IST
पिछले वित्त वर्ष में 1,166 करोड़ रुपये के कॉयर उत्पादों का निर्यात
कॉयर एक्सपो-2014 बायर-सेलर मीट में कॉयर (नारियल के रेशे) से बने उत्पादों को अच्छा रिस्पांस मिला है। इस दौरान 150 करोड़ रुपये के निर्यात सौदे हुए। केरल के राजस्व एवं कॉयर मंत्री अधूर प्रकाश ने बिजनेस भास्कर को बताया कि कॉयर एक्सपो 2014 में उम्मीद से ज्यादा सफलता हासिल हुई है।
केरल के आल्पुषा में चल रहे कॉयर एक्सपो के चौथे संस्करण में सोमवार को बायर-सेलर मीट का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विदेशी खरीददारों के साथ घरेलू निर्माता कंपनियों ने तकरीबन 150 करोड़ रुपये के सौदे किए। इस बिजनेस मीट का उद्घाटन राज्य के राजस्व एवं कॉयर मंत्री अधूर प्रकाश ने किया।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य कॉयर उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने के साथ-साथ उत्तम क्वालिटी के उत्पाद तैयार करना भी है, ताकि विदेशी आयातकों की मांग निरंतर बढ़े, जिससे घरेलू उद्योग को लाभ पहुंचे।
अधूर प्रकाश ने बताया कि कॉयर केरल 2014 में 46 देशों के 160 प्रतिनिधियों के साथ ही देश के करीब 100 खरीददारों ने भाग लिया। वर्ष 2012-13 में देश से 1,166 करोड़ रुपये के कॉयर उत्पादों का निर्यात हुआ था, जो इस पिछले वर्ष के 1,052 करोड़ रुपये से ज्यादा था। वर्ष 2012-13 में हुए कॉयर उत्पादों के निर्यात में केरल की हिस्सेदारी 70 फीसदी थी। उन्होंने बताया कि कॉयर उद्योग में काम कर रही कुल आबादी में 80 फीसदी महिलाएं हैं तथा यह उद्योग ग्रामीण इलाकों में रोजगार के सबसे ज्यादा अवसर प्रदान कर रहा है।
चौथे कॉयर केरल 2014 का आयोजन वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के सहयोग से किया गया। इस अवसर पर राज्य की कॉयर सचिव रानी जार्ज ने बायर-सेलर मीट को संबोधित करते हुए कहा कि कॉयर केरल 2014 में राज्य सरकार को कॉयर उत्पादों की बिक्री के नए बाजार मिले हैं, इससे उद्योग से जुड़े करीब तीन लाख कामगारों की आय बढ़ेगी तथा नए लोगों को इस उद्योग में नौकरी के और ज्यादा अवसर पैदा होंगे।
नेशनल कॉयर रिसर्च एंड मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट (एनसीआरएम) के निदेशक के.आर. अनिल ने कहा कि संस्थान भविष्य में कॉयर उद्योग को बढ़ाना देने के लिए नई-नई तकनीकों पर काम कर रहा है, ताकि उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ सके तथा युवा इस उद्योग को अपना सके। उन्होंने युवाओं से कॉयर उद्योग से जुडऩे की अपील की। उन्होंने निर्यात सौदे के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राज्य सरकार, केंद्र सरकार तथा सम्मेलन में आए विदेशी प्रतिनिधियों को बधाई दी। (Business Bhaskar...R S Rana)
केरल सरकार करेगी रबर की खरीद
केरल सरकार खुले बाजार में रबर की कीमतों में स्थिरता लाने के लिए उत्पादकों से इसकी खरीद करेगी। यह घोषणा राज्य के मुख्यमंत्री उम्मेन चांडी ने आज राज्य विधानसभा में की। रबर की कीमतों में लगातार गिरावट के मसले पर विपक्षी सदस्य के सुरेश कुरूप द्वारा रखे गए एक प्रस्ताव के जवाब में उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने केंद्र से इसके लिए वित्तीय सहायता मांगी है।
राज्य सरकार ने वाणिज्य मंत्रालय से भी रबर खरीदने का आग्रह किया है, ताकि कीमतों में स्थिरता आ सके। उन्होंने कहा कि मंत्रालय गंभीरता से इस पर विचार कर रहा है। खरीद से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा के लिए सरकार एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाएगी। उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार की तर्ज पर रबर की स्थानीय कीमतों में भी गिरावट का रुझान बना हुआ है। लेकिन फिर भी केरल में रबर के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार से ज्यादा हैं।
सुरेश कुरूप ने आरोप लगाया कि शुल्क मुक्त रास्तों से आयात और कम शुल्क पर आयात की वजह से बाजार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसके बावजूद केंद्र सरकार इस मसले पर कोई कदम नहीं उठा रही है और यह देश में 10 लाख से ज्यादा उत्पादकों की चिंताओं की अनदेखी कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार तेल विपणन कंपनियों के घाटे को कम करने के लिए इतनी ज्यादा गंभीर है, लेकिन रबर कीमतों में तेजी से लगातार हो रही गिरावट और किसानों की दुर्दशा को लेकर गंभीर नहीं है।
रबर की कीमतें गिरकर आज 142 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गईं, जो 10 दिन पहले 150 रुपये थी। अप्रैल से दिसंबर तक की अवधि के दौरान रबर का आयात बढ़कर 2,64,576 टन रहा है, जो पिछले साल की इसी अवधि में 1,73,441 टन था। इसमें 53 फीसदी इजाफा दर्ज किया गया है। देश में रबर की आपूर्ति का मुख्य स्रोत आयात है। उन्होंने कहा कि आयात शुल्क में बढ़ोतरी का सवाल ही पैदा नहीं होता है, क्योंकि टायर उद्योग ने अपनी जरूरत के जितना ही आयात किया है। वित्त मंत्री के एम मणि ने कहा कि सरकार राज्य के रबर उत्पादक क्षेत्रों की खराब हालत को लेकर बहुत अधिक चिंतित है। केरल में 92 फीसदी रबर उत्पादन को बाजार में लाया जा रहा है। (BS Hindi)
सरकार के साथ से चना मजबूत
चने की बिगड़ती हालत को संभालने के लिए सरकारी हाथ बढऩे की संभावनाओं को देखते हुए वायदा बाजार में चने के कद्रदान खड़े होने लगे हैं। कमजोर मांग की वजह से चना लंबे समय से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे बिक रहा है, लेकिन चुनाव नजदीक होने के कारण सरकार मंडियों में चने की खरीद जल्द शुरू करेगी, जिसका फैसला इस सप्ताह कृषि मंत्रालय में होने वाली सभी राज्यों के कृषि सचिवों की बैठक में लिए जाने की संभावना है।
दलहन फसलों को प्रोत्साहन देने के लिए कृषि मंत्रालय चने का एमएसपी बढ़ाकर 3,100 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। लेकिन इस साल कभी भी एमएसपी के ऊपर नहीं गई हैं। पिछले एक साल में चने के दाम करीब 25 फीसदी लुढ़क चुके हैं। चना उत्पादक प्रमुख राज्य महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के किसानों में सरकारी नीतियों को लेकर नाराजगी है, जिसे सरकार चुनाव से पहले खत्म करना चाहती है।
कारोबारियों की मानी जाए तो सरकार इन राज्यों में चने की खरीदारी अगले सप्ताह से शुरू कर सकती है। राजस्थान के बीकानेर उद्योग मंडल के प्रवक्ता पुखराज चोपड़ा कहते हैं कि किसान खुद को ठगा सा महसूस कर रहा है। अच्छी कीमत की उम्मीद में सालभर माल माल रोकने के बावजूद इसकी अच्छी कीमत नहीं मिली। किसानों को एमएसपी से नीचे चना बेचना पड़ रहा है। सरकार ने पूरे वर्षभर कोई कदम नहीं उठाया, लेकिन चुनाव नजदीक के कारण उसे अब यह फैसला लेना ही होगा।
चना कारोबारी जितेश कहते हैं कि अचानक मांग निकलनी शुरू हो गई है। बाजार में माल की कमी नहीं है और कीमतों में सुधार की एकमात्र वजह आगामी चुनाव हैं। दरअसल, सटोरियों ने चने की खरीदारी जमकर शुरू की है, क्योंकि उम्मीद की जा रही है कि सरकार 15 मार्च से चने की खरीद शुरू करेगी। इस समय हाजिर बाजार में चना 2,600 रुपये प्रति क्विंटल से भी नीच बिक रहा है, जबकि वायदा बाजार में इसका भाव 2,845 रुपये प्रति क्विंटल बना हुआ है। ऐसे में एक महीने के अंदर चने से प्रति क्विंटल 400-500 रुपये कमाये जा सकते हैं। सटोरियों के इसी गणित की वजह से मंगलवार को वायदा बाजार में चने में तेजी देखने को मिली और यह 30 रुपये प्रति बढ़कर 2,845 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया।
चालू रबी सीजन में चने की बुआई भी पिछले साल से ज्यादा होने का अनुमान है। कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार चालू रबी सीजन में देश में दलहन फसलों की बुआई 156.73 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल 31 जनवरी तक 149.09 लाख हेक्टेयर में बुआई हुई थी। 31 जनवरी तक देश में चने का रकबा 101.3 लाख हेक्टेयर पर पहुंच चुका है जबकि पिछले साल इस समय तक बुआई 93.4 लाख हेक्टेयर में हुई थी। इस बार 31 जनवरी तक मध्य प्रदेश में 34.8 लाख हेक्टेयर, राजस्थान 17.5 लाख और महाराष्ट्र में 17.4 लाख हेक्टेयर में चने की बुआई हो चुकी है।
कृषि मंत्रालय के पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार 2013-14 में दलहन फसलों का उत्पादन बढ़कर 60 लाख टन के आंकड़े पर पहुंचने की संभावना है। पिछले साल देश में दलहन उत्पादन 59 लाख टन था। सरकार ने चना किसानों का प्रोत्साहित करने के लिए एमएसपी 100 रुपये बढ़ाया है। चालू सत्र में चने का एमएसपी 3,000 रुपये से बढ़ाकर 3,100 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। एमएसपी पर कारोबारी रजनीलाल कहते हैं कि किसान को इस समय एमएसपी से करीब 400-500 रुपये कम मिल रहे हैं। दरअसल सरकारी एजेंसियां किसानों का माल खरीदने में असफल रही हैं। ऐसे में एमएसपी बढ़ाने का मतलब समझ में नहीं आ रहा है। (BS Hindi)
राजस्थान में कारोबार ठप
कृषि जिंसों को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत लाने और लाइसेंस लेने के खिलाफ राजस्थान की कृषि उपज के व्यापारियों ने आज से दो दिन की सांकेतिक हड़ताल बुलाई है। पहले दिन के हड़ताल के कारण राज्य भर की प्रमुख मंडियां बंद रहीं जिसके कारण करीब 8,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार प्रभावित हुआ। प्रदेश के सभी व्यापारियों ने इस अधिनियम के तहत लाइसेंस लेने से मना कर दिया है।
राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार महासंघ के अध्यक्ष बाबूलाल गुप्ता ने बताया कि पहले दिन राज्य भर की 247 मंडियां पूरी तरह बंद रहीं। मंडियों के बंद रहने से तकरीबन 70 हजार व्यापारी, 3.5 लाख मजदूर और पल्लेदारों ने भी काम नहीं किया। गुप्ता ने बताया कि आगे की रणनीति बनाने के लिए बुधवार को जयपुर में राज्य के सभी मंडी व्यापारियों की बैठक बुलाई गई है जिसमें व्यापारियों की सहमति के बाद आगे आंदोलन को किस तरह से चलाना है इस पर चर्चा की जाएगी।
उन्होंने बताया कि राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार महासंघ ने केंद्र सरकार से मांग की थी कि सरकार तत्काल प्रभाव से मंडी में बिकने वाले कृषि जिंसों को लाइसेंस के दायरे से बाहर करे। केंद्र और राज्य सरकार को उन्होंने 3 फरवरी तक समय दिया था लेकिन सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं मिलने पर हड़ताल की गई है। व्यापारियों ने कहा कि किसान जिस हालत में मंडी में माल लाता है, मंडी नियमों के मुताबिक उसी हालत में उसकी बिक्री करनी होती है। जिंसों के भींगने से गुणवत्ता पर असर पड़ता है जिसे मंडी नियम के तहत मिलावट (अडल्ट्रेशन) की परिभाषा में लिया जाता है और इस पर भारी जुर्माने का प्रावधान है। यही वजह है कि व्यापारी इसका विरोध कर रहे हैं।
खाद्य कारोबार के लिए लाइसेंस अवधि बढ़ी
खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत रेस्टोरेंटों और खाने-पीने की वस्तुएं बेचने वालों को राहत देते हुए लाइसेंस हासिल करने के लिए 4 अगस्त तक की मोहलत दी गई है। इससे पहले भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने लाइसेंस लेने के लिए 4 फरवरी की समय सीमा तय की थी। नैशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने एफएसएसएआई को इसकी समयसीमा बढ़ाने को कहा था। रेस्टोरेंट मालिकों का कहना था कि सरकार ने परमिट लेना आनिवार्य करने की घोषणा तो कर दी लेकिन लाइसेंस के लिए आवेदन प्रक्रिया की बाबत कोई सुविधा नहीं दी, जिससे दिक्कत आ रही है। कुछ रेस्टोरेंट मालिकों ने कहा कि कई लोगों को शर्तों के तहत मानदंड पूरे करनेे में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। (BS Hindi)
Gold, silver down on global cues, subdued demand
New Delhi, Feb 5. Gold tumbled by Rs 240 to Rs 30,460
per ten grams in the national capital today on selling by
stockists amid a weak trend in global markets.
Silver also eased by Rs 50 to Rs 44,150 per kg due to
subdued demand from coin makers.
Marketmen said selling by stockists, triggered by a weak
global trend as a rebound in equity markets reduced demand for
the precious metals amid slower physical purchases during the
Lunar New Year holidays, mainly weighed on gold prices here.
Besides, low demand from jewellery makers too had a
negative impact, they said.
Gold in Singapore, which normally sets price trend at the
domestic front, fell by 0.20 per cent to USD 1,252.74 an
ounce.
At the domestic front, gold of 99.9 and 99.5 per cent
purity suffered a setback of Rs 240 each to Rs 30,460 and Rs
30,260 per ten grams, respectively. Sovereign held steady at
Rs 25,200 per piece of eight grams.
In a similar fashion, silver ready traded Rs 50 lower at
Rs 44,150 per kg while weekly-based delivery gained Rs 50 to
Rs 43,850 per kg.
Silver coins held steady at Rs 86,000 for buying and Rs
87,000 for selling of 100 pieces.
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