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14 अप्रैल 2026

सीसीआई ने लगातार तीसरे दिन कॉटन की बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी की, हाजिर बाजार तेज

नई दिल्ली। कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई द्वारा कॉटन की बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी से गुरुवार को शाम के सत्र में गुजरात के साथ ही उत्तर भारत के राज्यों में कॉटन की कीमतों में तेजी आई।


सीसीआई ने गुरुवार को लगातार तीसरे कार्यदिवस में कॉटन की बिक्री कीमतों में 500 रुपये प्रति कैंडी की बढ़ोतरी की जबकि चालू सप्ताह में सीसीआई कॉटन की बिक्री कीमतों में 2,300 रुपये प्रति कैंडी तक की बढ़ोतरी कर चुकी है।

निगम ने गुरुवार को 1,43,800 गांठ, एक गांठ 170 किलो कॉटन की बिक्री की। इस दौरान स्पिनिंग मिलों ने 75,000 गांठ एवं व्यापारियों ने 68,800 गांठ कॉटन की खरीद की।

गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव गुरुवार को 500 रुपये तेज होकर 59,000 से 59,500 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए।

पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव तेज होकर 5,800 से 6,000 रुपये प्रति मन बोले गए।
हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव बढ़कर 5,650 से 5,800 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम तेज होकर 5,700 से 6,000 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम बढ़कर 55,000 से 56,000 रुपये कैंडी बोले गए।

घरेलू वायदा कारोबार में कॉटन की कीमतों में तेजी का रुख रहा। एनसीडीईएक्स पर अप्रैल 26 महीने के वायदा अनुबंध में कपास के दाम 23 रुपये तेज होकर 1,620 रुपये प्रति 20 किलो हो गए। एमसीएक्स पर अप्रैल 26 के वायदा अनुबंध में कॉटन के भाव 170 रुपये तेज होकर 27,200 रुपये प्रति कैंडी हो गए। हालांकि इस दौरान आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतों में गिरावट का रुख रहा।

सीसीआई लगातार कॉटन की बिक्री कीमत बढ़ा रही है साथ ही हाल ही में कॉटन की कीमतें दुनिया भर में मजबूत हुई हैं।

प्रमुख उत्पादक राज्यों में कपास की कीमतों में भी लगातार तेजी बनी हुई है। जानकारों के अनुसार चालू सीजन में अभी तक उत्पादक मंडियों में 280 लाख गांठ से ज्यादा कॉटन की आवक हो चुकी है तथा अब केवल 38 से 40 लाख गांठ ही बनी हुई है। कई राज्यों में कपास की कीमत न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी 8,110 प्रति क्विंटल के ऊपर पहुंच चुकी हैं।

स्पिनिंग मिलों की मांग बढ़ने से गुजरात के साथ ही उत्तर भारत में कॉटन के दाम तेज हुए। व्यापारियों के अनुसार घरेलू बाजार में अधिकांश स्पिनिंग मिलों के पास कॉटन का बकाया स्टॉक कम है, जबकि डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने से यार्न में निर्यात मांग पहले की तुलना में बढ़ी है। हालांकि सीसीआई घरेलू बाजार में लगातार कॉटन बेच रही है तथा निगम के पास कॉटन का भारी, भरकम स्टॉक है, लेकिन निगम लगातार कॉटन की बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी कर रही है। अत: घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतों में तेजी, मंदी काफी हद तक सीसीआई के बिक्री दाम पर निर्भर करेगी।

मार्च अंत तक चीनी का उत्पादन बढ़कर 271 लाख टन के पार - एनएफसीएसएफ

नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2025 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन (अक्टूबर-25 से सितंबर-26) में 31 मार्च तक देशभर के राज्यों में चीनी का उत्पादन 9.06 फीसदी बढ़कर 271.20 लाख टन का हो चुका है। पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में 248.65 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था।


नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (एनएफसीएसएफ) के अनुसार कई प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में पेराई कार्य अब समाप्ति की ओर है, लेकिन गन्ने की अधिक उपलब्धता और बेहतर रिकवरी के कारण कुल उत्पादन पिछले साल की तुलना में बढ़ा है।

एनएफसीएसएफ के अनुसार चालू पेराई सीजन 2025-26 के दौरान देशभर में कुल 540 चीनी मिलों में पेराई हुई थी, जबकि इसके पिछले पेराई सीजन 2024-25 में 533 चीनी मिलों में पेराई हुई थी। इस समय देशभर में केवल 74 चीनी मिलें ही चल रही हैं, जो पिछले साल की समान अवधि की 113 मिलों की तुलना में कम है।

चालू पेराई सीजन में प्रमुख उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में चीनी उत्पादन बढ़कर 98.95 लाख टन का हुआ है, जबकि पिछले पेराई सीजन 2024-25 राज्य में केवल 80.10 लाख टन चीनी का उत्पादन ही हुआ था। राज्य में चालू पेराई सीजन में औसत रिकवरी की दर 9.50 फीसदी की दर्ज की गई है, जो पिछले सीजन के बराबर ही है।

उत्तर प्रदेश में चालू पेराई सीजन में चीनी उत्पादन में थोड़ा कम होकर मार्च के अंत तक 87.45 लाख टन का हुआ है, जबकि पिछले सीजन में इसका उत्पादन 87.70 लाख टन का हुआ था। चालू सीजन में राज्य में औसत चीनी की रिकवरी पिछले साल के 9.70 फीसदी के मुकाबले बढ़कर 10.20 फीसदी की दर्ज की गई है।

कर्नाटक में 31 मार्च तक चालू पेराई सीजन में चीनी का उत्पादन बढ़कर 46.75 लाख टन का हुआ है, जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में राज्य में 39.90 लाख टन का ही उत्पादन हुआ था। राज्य में चीनी की औसत रिकवरी 8.65 फीसदी दर्ज की गई है, जो पिछले साल के 8.50 फीसदी से अधिक है।

एनएफसीएसएफ की रिपोर्ट के अनुसार गुजरात में एक, आंध्र प्रदेश में दो, हरियाणा में चार, पंजाब में दो, और तमिलनाडु में 18 चीनी मिलों में अभी भी पेराई चल रही है।

घरेलू बाजार में दिल्ली में बुधवार को चीनी की थोक दाम 4,330 रुपये, कानपुर में 4,360 रुपये और मुंबई में 4,070 रुपये तथा कोलकाता में 4,280 रुपये प्रति क्विंटल रहे। दिल्ली में चीनी के खुदरा भाव इस दौरान 45 रुपये तथा कानपुर में 45 रुपये और मुंबई में 44 रुपये तथा कोलकाता में 45 रुपये प्रति किलो बोले गए। 

चालू रबी सीजन में सरसों का उत्पादन 3.65 फीसदी बढ़ने का अनुमान - एसईए

नई दिल्ली। बुआई में हुई बढ़ोतरी के साथ ही उत्पादक राज्यों में अनुकूल मौसम से चालू रबी सीजन 2025-26 में सरसों का उत्पादन 3.65 फीसदी बढ़कर 119.4 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसका उत्पादन 115.2 लाख टन का हुआ था।


सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के द्वारा जारी पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार चालू रबी सीजन 2025-26 में सरसों का उत्पादन बढ़कर 119.4 लाख टन होने का अनुमान है। चालू रबी में देशभर के राज्यों में सरसों की बुआई बढ़कर 93.91 लाख हेक्टेयर में हुई थी, जबकि पिछले रबी सीजन में इसकी बुआई केवल 92.15 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

प्रमुख उत्पादक राज्य राजस्थान के साथ ही अन्य राज्यों में मौसम अनुकूल रहने से चालू रबी में इसकी उत्पादकता बढ़कर 1,270 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसकी उत्पादकता 1,250 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर ही बैठी थी।

राजस्थान में चालू रबी में सरसों का उत्पादन बढ़कर 53.9 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल इसका उत्पादन राज्य में केवल 52 लाख टन का ही हुआ था। उत्तर प्रदेश में चालू सीजन में सरसों का उत्पादन बढ़कर 18.1 लाख टन, हरियाणा में 12.7 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इन राज्यों में इसका उत्पादन क्रमश: 15.6 लाख टन और 12.3 लाख टन का हुआ था।

हालांकि मध्य प्रदेश में चालू रबी सीजन में सरसों का उत्पादन घटकर 13.9 लाख टन ही होने का अनुमान है, जबकि पिछले रबी सीजन में राज्य में इसका उत्पादन 14.7 लाख टन का हुआ था।

पश्चिमी बंगाल में चालू रबी में सरसों का उत्पादन 7.4 लाख टन, गुजरात में 5.9 लाख टन, असम में 2.1 लाख टन और बिहार में 0.9 लाख टन के उत्पादन का अनुमान है। पिछले रबी में पश्चिमी बंगाल में इसका उत्पादन 6.8 लाख टन, गुजरात में 5.4 लाख टन तथा असम में 2.5 लाख टन तथा बिहार में 0.9 लाख टन का हुआ था। अन्य राज्यों में सरसों का उत्पादन चालू रबी सीजन में 4.5 लाख टन होने का अनुमान है, जोकि पिछले रबी के 4.9 लाख टन की तुलना में कम है।

29 मार्च 2026

फरवरी में कैस्टर तेल का निर्यात 23 फीसदी फीसदी से ज्यादा घटा - एसईए

नई दिल्ली। फरवरी में देश से कैस्टर तेल का निर्यात 23.48 फीसदी घटकर 44,448 टन का ही हुआ है, जबकि पिछले साल फरवरी में इसका निर्यात 58,092 टन का हुआ था।


सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एसईए के अनुसार मूल्य के हिसाब से फरवरी में कैस्टर तेल का निर्यात 606.80 करोड़ रुपये का ही हुआ है, जो कि पिछले साल फरवरी के 790.01 करोड़ रुपये की तुलना में कम है।

एसईए के अनुसार चालू वर्ष 2026 के पहले दो महीनों जनवरी से फरवरी के दौरान कैस्टर तेल का निर्यात 87,686 टन का ही हुआ है, जबकि पिछले वर्ष 2025 की समान अवधि के दौरान इसका निर्यात 111,018 टन का हुआ था। मूल्य के हिसाब से चालू वर्ष 2026 के जनवरी से फरवरी के दौरान कैस्टर तेल का निर्यात 1,212,45 करोड़ रुपये का ही हुआ है जबकि वर्ष 2025 की समान अवधि के दौरान मूल्य के हिसाब से कैस्टर तेल का निर्यात 1,504.2 करोड़ रुपये का हुआ था।

गुजरात के राजकोट में शनिवार को कैस्टर सीड के भाव 6,300 से 6,500 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। उत्पादक मंडियों में कैस्टर सीड की दैनिक आवक 1 से 1.10 लाख बोरी, एक बोरी 75 किलो की हो रही है। हजार बोरियों, एक बोरी 75 किलो की हुई। राजकोट में कैस्टर तेल एफएसजी के दाम 1,345 रुपये प्रति 10 किलो पर स्थिर हो गए।

व्यापारियों के अनुसार मार्च क्लोजिंग के कारण व्यापार कर कम हो रहा है। अगले महीने उत्पादक मंडियों में कैस्टर सीड की दैनिक आवकों में बढ़ोतरी होगी, जिससे मौजूदा कीमतों में 100 से 200 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आ सकती है।

कृषि मंत्रालय के आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2025-26 के दौरान कैस्टर सीड का उत्पादन 16.96 लाख टन का ही होने का अनुमान है, जबकि इसके पिछले फसल सीजन के दौरान 17.86 लाख टन का उत्पादन हुआ था।

सीसीआई ने कॉटन के बिक्री दाम 300 रुपये बढ़ाए, हाजिर बाजार भाव हुए तेज

नई दिल्ली। सीसीआई द्वारा कॉटन की बिक्री कीमतों में 300 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी 356 किलो की बढ़ोतरी करने से शुक्रवार को शाम के सत्र में गुजरात के साथ ही उत्तर भारत के राज्यों में कॉटन की कीमतों में तेजी का रुख रहा।


कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई ने शुक्रवार को 3,41,000 गांठ, एक गांठ 170 किलो कॉटन की बिक्री। इस दौरान स्पिनिंग मिलों ने 1,37,000 गांठ एवं व्यापारियों ने 2,04,000 गांठ कॉटन की खरीद की। निगम ने कॉटन की बिक्री कीमतों में 300 रुपये प्रति कैंडी की बढ़ोतरी की।

गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव शुक्रवार को 250 रुपये तेज होकर 56,300 से 56,500 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए।

पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव तेज होकर 5,650 से 5,840 रुपये प्रति मन बोले गए।
हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव बढ़कर 5,500 से 5,670 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम तेज होकर 5,490 से 5,850 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 53,100 से 54,100 रुपये कैंडी बोले गए।

घरेलू वायदा कारोबार में कॉटन की कीमतों में तेजी का रुख रहा। एनसीडीईएक्स पर अप्रैल 26 महीने के वायदा अनुबंध में कपास के दाम 23 रुपये तेज होकर 1,560 रुपये प्रति 20 किलो हो गए। इस दौरान आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतों में गिरावट का रुख रहा।

स्पिनिंग मिलों की मांग बढ़ने से गुजरात के साथ ही उत्तर भारत के राज्यों में कॉटन के दाम तेज हो गए। व्यापारियों के अनुसार, सीसीआई ने चालू सप्ताह में लगातार दूसरी बार कॉटन की बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी की है। उधर विश्व बाजार में भी हाल ही में कॉटन के दाम तेज हुए है, इसलिए हाजिर बाजार में इसकी कीमतों में और भी तेजी आने का अनुमान है। घरेलू बाजार में अधिकांश स्पिनिंग मिलों के पास कॉटन का बकाया स्टॉक कम है, जबकि यार्न में स्थानीय एवं निर्यात मांग अच्छी है।

सीसीआई घरेलू बाजार में लगातार कॉटन बेच रही है तथा निगम के पास कॉटन का भारी, भरकम स्टॉक है अत: घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतों में तेजी, मंदी काफी हद तक सीसीआई के बिक्री दाम पर निर्भर करेगी। चालू सीजन में उत्पादन अनुमान तो ज्यादा है ही, साथ ही आयात भी बढ़ेगा, हालांकि मौजूदा भाव में जिनर्स की बिकवाली कम आ रही है।

केंद्र सरकार ने अप्रैल के लिए 23 लाख टन चीनी कोटा जारी किया

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने अप्रैल के लिए 23 लाख टन चीनी का कोटा जारी किया है, जोकि मार्च 2026 में जारी किए गए 22.50 लाख टन से ज्यादा है लेकिन पिछले साल अप्रैल 2025 जारी कोटे की तुलना में कम है।


केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने अप्रैल 2026 के लिए 23 लाख टन चीनी का मासिक कोटा जारी किया है, जोकि अप्रैल 2025 की तुलना में जारी किए गए 23.5 लाख टन की तुलना में 50 हजार टन कम है।

व्यापारियों के अनुसार गर्मियों के मौसम में बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अप्रैल 2026 के लिए मार्च 2026 की की तुलना में चीनी का कोटा बढ़ाया है। आमतौर पर अप्रैल और मई में चीनी की मांग पीक पर होती है। अत: माना जा रहा है कि 23 लाख टन का कोटा जारी के बाद बाजार में इसके दाम सीमित दायरे में रहने की उम्मीद है।

देश में जल्द ही चीनी मिलों का पेराई सीजन खत्म होने की संभावना है, इसलिए सरकार चीनी आपूर्ति की स्थिति पर सावधानीपूर्वक नजर बनाए हुए है।

विश्व बाजार में चीनी की कीमतों में बढ़त जारी है तथा इसके दाम पांच महीने के सबसे ऊंचे लेवल पर पहुंच गए हैं। अत: घरेलू बाजार से चीनी के निर्यात में पड़ते लग रहे हैं। विश्व बाजार में दाम तेज होने के साथ ही रुपया कमजोर होने कारण चीनी के निर्यात में पड़ते लग रहे हैं, तथा हाल ही में करीब एक लाख टन के निर्यात सौदे हुए हैं। अगले महीने गर्मी का सीजन शुरू होने के बाद चीनी की घरेलू मांग भी बढ़ने की उम्मीद है।

घरेलू बाजार में दिल्ली में बुधवार को चीनी की थोक दाम 4,300 रुपये, कानपुर में 4,330 रुपये और मुंबई में 4,070 रुपये तथा कोलकाता में 4,280 रुपये प्रति क्विंटल रहे। दिल्ली में चीनी के खुदरा भाव इस दौरान 45 रुपये तथा कानपुर में 45 रुपये और मुंबई में 44 रुपये तथा कोलकाता में 45 रुपये प्रति किलो बोले गए। 

समर में धान की रोपाई के साथ तिलहन एवं मोटे अनाजों की बुआई कम - कृषि मंत्रालय

नई दिल्ली। चालू समर सीजन 2026 में फसलों की कुल बुआई में पिछले साल की तुलना में 2.31 फीसदी कमी आई है। इस दौरान दलहन की बुआई बढ़ी है, जबकि धान की रोपाई के साथ मोटे अनाज एवं तिलहन की बुवाई पिछले साल की तुलना में पिछड़ रही है।


कृषि मंत्रालय के अनुसार 20 मार्च 2026 तक देशभर में समर सीजन की फसलों की बुआई घटकर 42.68 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई 43.69 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

समर की प्रमुख फसल धान की रोपाई चालू सीजन में घटकर केवल 27.86 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी रोपाई 28.65 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। समर सीजन में धान की रोपाई सामान्यत 31.49 लाख हेक्टेयर में होती है तथा फसल सीजन 2025 में इसकी रोपाई 33.28 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

समर सीजन में दालों की बुआई बढ़कर 4.09 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई 3.47 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। समर में दलहन की प्रमुख फसल मूंग की बुआई 2.57 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 2.18 हजार हेक्टेयर की तुलना में बढ़ी है। इस दौरान उड़द की बुआई 1.28 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि के 1.14 लाख हेक्टेयर की तुलना में बढ़ी है।

मोटे अनाजों की बुवाई चालू समर सीजन में घटकर 6.04 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई 6.84 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। इस दौरान समर मक्का की बुआई 4.24 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 5 लाख हेक्टेयर की तुलना में कम है। इस दौरान ज्वार की बुआई 20 हजार हेक्टेयर, बाजरा की 1.38 लाख हेक्टेयर तथा रागी की 20 हजार हेक्टेयर में ही हुई है।

चालू समर सीजन में तिलहनी फसलों की बुआई घटकर 4.69 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई 4.73 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। मूंगफली की बुआई चालू समर सीजन में बढ़कर 2.98 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल के 2.97 लाख हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है। इस दौरान सनफ्लावर की 32 हजार हेक्टेयर में और शीशम सीड की बुआई 1.35 लाख हेक्टेयर हो चुकी है। पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 28 हजार हेक्टेयर और 1.42 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।