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30 जुलाई 2022

मिलों की मांग बनी रहने से अरहर के साथ ही उड़द के दाम तेज

नई दिल्ली। दाल मिलों की हाजिर मांग बनी रहने के कारण शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन उड़द के साथ ही अरहर की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। हालांकि चना के भाव में हल्की नरमी आई, जबकि अन्य दालों के दाम लगभग स्थिर बने रहे। 

बर्मा में स्थानीय व्यापारियों की मांग से लेमन अरहर के भाव में 25 डॉलर की तेजी आकर दाम 900 डॉलर प्रति टन, सीएंडएफ हो गए। हालांकि इन भाव में भारतीय आयातकों ने कोई व्यापार नहीं किया। सूत्रों के अनुसार पहली अगस्त को एक वैसल चेन्नई के लिए अरहर और उड़द का लोड होने की उम्मीद है।बर्मा में निर्यातकों को निर्यात लाइसेंस प्राप्त करने में परेशानी आ रही है, तथा इसमें लंबा समय लग रहा है। ऐसे में वहां से लोडिंग में समय लग रहा है।

व्यापारियों के अनुसार अरहर एवं उड़द का हाजिर बाजार में अच्छी क्वालिटी का बकाया स्टॉक कम है, जबकि आयात पड़ते महंगे हैं। इसलिए इनके भाव में अभी ज्यादा मंदा तो नहीं है, लेकिन स्टॉकिस्ट मुनाफावसूली से हल्की गिरावट कर सकते हैं। अन्य दालों में चना में आगे हल्की सुधार बन सकता है लेकिन आयात पड़ते सस्ते होने के कारण मसूर की कीमतों में अभी सीमित तेजी, मंदी बनी रहेगी।

चालू खरीफ में जहां अरहर की बुआई में कमी आई है, वहीं उड़द एवं मूंग की बुआई जरुर बढ़ी है लेकिन देश के कई राज्यों में जहां मानसूनी सीजन के पहले दो महीनों में सामान्य से कम बारिश होने के कारण सूखे जैसे हालात बने हुए हैं, वहीं कई राज्यों में जुलाई में हुई भारी बारिश से खरीफ दलहन की फसलों को नुकसान की भी आशंका है।

डॉलर की तुलना में रुपये में हल्का सुधार तो आया है, लेकिन अभी भी डालर की तुलना में रुपया 79.24 के स्तर पर है जिस कारण आयात पड़ते महंगे हैं। सूत्रों के अनुसार तंजानिया में अरहर का उत्पादन घटकर 1.90 लाख टन ही होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल 2.05 लाख टन का उत्पादन हुआ था।

चालू खरीफ सीजन में दलहनी फसलों की कुल बुआई बढ़कर 106.18 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 103.23 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

हालांकि खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर की बुआई चालू खरीफ में घटकर 36.11 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इसकी बुआई 41.75 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

उड़द की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 28.01 लाख हेक्टेयर में और मूंग की 29.26 लाख हेक्टेयर में हुई है। पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमशः 27.94 लाख हेक्टेयर में और 25.29 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

दिल्ली में बर्मा की लेमन अरहर के भाव में 150 रुपये की तेजी आकर दाम 7,400 से 7,450 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

महाराष्ट्र की देसी अरहर में स्टॉकिस्टों की बिकवाली कमजोर होने से कोई व्यापार नहीं हुआ। महाराष्ट्र में बारिश से बाढ़ से फसल को नुकसान की आशंका से बढ़िया अरहर में बिकवाली कमजोर रही।

चेन्नई में लेमन अरहर के भाव 150 रुपये तेज होकर भाव 7,150 से 7,200 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

मुंबई में बर्मा की लेमन अरहर में मिलों की मांग से भाव 100 रुपये तेज होकर दाम 7,200 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

अन्य अफ्रीकी देशों से आयातित अरहर की कीमतें स्थिर बनी रही। तंजानिया की अरुषा और मटवारा की अरहर के भाव क्रमशः 5,850 से 5,900 रुपये और 5,700 से 5,750 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। इस दौरान मोजाम्बिक लाइन की गजरी अरहर की कीमतें 5,750 से 5,800 रुपये और मलावी अरहर के दाम 5,250 से 5,350 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

दिल्ली में बर्मा उड़द एफएक्यू और एसक्यू के भाव के भाव में 25 से 50 रुपये की तेजी आकर भाव क्रमशः 7,775 से 7,800 रुपये तथा 8,850 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

आंध्रप्रदेश लाईन की नई उड़द का दिल्ली के लिए व्यापार 100 रुपये बढ़कर 8,400 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर हुआ।

मुंबई में उड़द एफएक्यू के भाव में 50 रुपये की तेजी आकर भाव 7,600 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

चेन्नई में उड़द एफएक्यू के भाव 25 रुपये तेज होकर भाव 7,575 रुपये प्रति क्विंटल हो गए, जबकि एसक्यू के भाव 75 रुपये बढ़कर 8,675 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

दिल्ली में मध्य प्रदेश और कनाडा की मसूर की कीमतें क्रमशः 7,050 रुपये और 6,850 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बनी रही।

मुंबई में कनाडा की मसूर के दाम कंटेनर में 6,950 रुपये प्रति क्विंटल के पूर्व स्तर पर स्थिर बने रहे, जबकि ऑस्ट्रेलियाई मसूर के दाम कंटेनर में 7,100 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

दिल्ली में चना के भाव में 25 रुपये की गिरावट आकर राजस्थानी चना की कीमतें 4,925 रुपये और मध्य प्रदेश के चना भाव 4,850 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

तंजानिया के चना के भाव मुंबई में 50 रुपये कमजोर होकर भाव 4,600 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

विश्व स्तर पर तेजी बनी रहने से घरेलू बाजार में सरसों तेज, दैनिक आवकों में बढ़ोतरी

नई दिल्ली। विश्व स्तर पर तिलहन एवं खाद्य तेलों की कीमतों में तेजी बनी रहने से शुक्रवार को भी घरेलू बाजार में सरसों के साथ तेल के भाव बढ़ गए। जयपुर में कंडीशन की सरसों के भाव लगातार तीसरे दिन 50 रुपये तेज होकर 6,900 से 6,925 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। इस दौरान उत्पादक राज्यों की मंडियों में सरसों की दैनिक आवक बढ़कर 1.90 लाख बोरियों की हुई।

व्यापारियों के अनुसार सोया तेल के दाम मजबूत बने रहने से मलेशियाई पाम तेल की कीमतों में लगातार चौथे दिन करीब 9 फीसदी की तेजी दर्ज की गई। जानकारों के सोया तेल के मुकाबले पाम तेल की कीमतें काफी नीचे बनी हुई है, जिस कारण पाम तेल की मांग में बढ़ोतरी हुई है। उधर अमेरिका के मिडवेस्ट में गर्म और शुष्क मौसम के कारण सोयाबीन के पूर्वानुमान में कमी की आशंका से आपूर्ति प्रभावित होने की चिंता बनी हुई है।

हालांकि इंडोनेशिया सरकार लगातार इन्वैंट्री को कम करने के लिए कदम उठा रही है। ऐसे में घरेलू बाजार में भी खाद्वय तेलों के दाम मजबूत बने रहने से सरसों की कीमतों में हल्का सुधार और भी आ सकता है लेकिन घरेलू बाजार में व्यापारी अभी बड़ी तेजी में नहीं है। हाजिर बाजार में नकदी की किल्लत है, जिस कारण तेल मिलें भी केवल जरुरत के हिसाब से ही सरसों की खरीद कर रही हैं।

मलेशिया में पाम तेल की कीमतों में लगातार चौथे दिन 8.82 फीसदी से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई। अक्टूबर महीने के पाम तेल वायदा अनुबंध में 349 रिगिंट की तेजी आकर भाव 4,306 रिगिंट प्रति टन हो गए। वैश्विक स्तर पर डालियान का सबसे सक्रिय सोया तेल अनुबंध 1.91 फीसदी तेज हो गया, जबकि इसका पाम तेल वायदा अनुबंध भी 3.35 फीसदी तक तेज हुआ। शिकागो बोर्ड ऑफ ट्रेड पर सोया तेल की कीमतें आज इलेक्ट्रॉनिक व्यापार में 3.25 फीसदी तक तेज हो गई।

इंडोनेशियाई व्यापार मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार देश ने अपनी घरेलू जरूरतों के साथ-साथ निर्यात में तेजी लाने के अपने कार्यक्रम के माध्यम से 28 जुलाई तक संयुक्त रूप से 4.23 मिलियन टन पाम तेल के निर्यात के लिए परमिट जारी कर दिए हैं।

जयपुर में सरसों तेल कच्ची घानी एवं एक्सपेलर की कीमतें शुक्रवार को 20-20 रुपये तेज होकर भाव क्रमशः 1,393 रुपये और 1,383 रुपये प्रति 10 किलो हो गए। इस दौरान सरसों खल की कीमतें 2,675 रुपये प्रति क्विंटल के पूर्व स्तर पर स्थिर बनी रही।

देशभर की मंडियों में शुक्रवार को सरसों की दैनिक आवक बढ़कर 1.90 लाख बोरियों की ही हुई, जबकि गुरूवार को आवक 1.55 लाख बोरियों की हुई थी। कुल आवकों में से प्रमुख उत्पादक राज्य राजस्थान की मंडियों में 90 हजार बोरी, मध्य प्रदेश में 15 हजार बोरी, उत्तर प्रदेश में 30 हजार बोरी, हरियाणा और पंजाब में 15 हजार बोरी, गुजरात में 5 हजार बोरी तथा अन्य राज्यों की मंडियों में 35 हजार बोरी सरसों की आवक हुई।

चालू खरीफ में कर्नाटक, तेलंगाना और गुजरात में दलहन की बुआई घटी

नई दिल्ली। चालू मानसूनी सीजन के लगभग दो महीने बीतने को हैं, लेकिन इस दौरान हुई असामान्य बारिश का असर कर्नाटक, तेलंगाना और गुजरात में दालों की बुआई पर पड़ा है तथा इन राज्यों में बुआई पिछले साल की तुलना में पिछड़ रही है। जानकारों के इन राज्यों में जहां जून में सामान्य की तुलना में कम बारिश हुई थी, वहीं जुलाई में सामान्य से ज्यादा बारिश का असर बुआई पर पड़ा है।

कर्नाटक में 22 जुलाई तक चालू खरीफ में दलहनी फसलों की बुआई अभी तक केवल 16.94 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 18.31 लाख हेक्टेयर से कम है। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर की बुआई चालू खरीफ में 11.49 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 12.73 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। मूंग की बुआई राज्य में चालू खरीफ में 3.88 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 3.93 लाख हेक्टेयर से कम है। उड़द की बुआई चालू खरीफ में 91,600 हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 91,900 से थोड़ी पिछे है।

गुजरात के कृषि निदेशालय के अनुसार राज्य में 25 जुलाई तक चालू खरीफ सीजन में दालों की बुआई 2.85 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 3.80 लाख हेक्टेयर की तुलना में 24.84 फीसदी कम है। राज्य में अरहर की बुआई 1.72 लाख हेक्टयेर में, मूंग की 44,169 हेक्टेयर में और उड़द की बुआई 60,588 हेक्टेयर में ही हुई है। पिछले साल इस समय तक राज्य में इनकी बुआई क्रमशः 1.95 लाख हेक्टेयर में, 53,115 हेक्टेयर में और 1.23 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

तेलंगाना में 27 जुलाई तक खरीफ दालों की बुआई केवल 5.51 लाख एकड़ में ही हो पाई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 10.26 लाख एकड़ की तुलना में 46.25 फीसदी कम है। राज्य में खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर की बुआई 4.69 लाख एकड़ में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 8.56 लाख एकड़ में हो चुकी थी। राज्य में मूंग की बुआई 55,675 एकड़ में और उड़द की 25,830 एकड़ में ही हुई है, जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमशः 1.27 लाख एकड़ और 41,088 एकड़ में हो चुकी थी।

भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार पहली जून से 28 जुलाई तक नार्थ इस्ट कर्नाटक में जहां सामान्य से 29 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है, वहीं साउथ इस्ट कर्नाटक में इस दौरान सामान्य की तुलना में 35 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की गई।

इसी तरह से तेलंगाना में इस दौरान सामान्य के मुकाबले 104 फीसदी ज्यादा बारिश हो चुकी है।

उधर गुजरात रीजन में इस दौरान जहां सामान्य से 49 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है, जबकि सौराष्ट्र और कच्छ में इस दौरान सामान्य की तुलना में 66 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की गई।

आईसीए ने भारतीय कपास आयातकों के अनुबंध रद्द करने के प्रस्ताव को ठुकराया

नई दिल्ली। भारतीय कपड़ा मिलें, जिन्होंने कॉटन आयात के लिए अनुबंध किए थे, उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। अतः मिलों नेे इंटरनेशनल कॉटन एसोसिएशन, आईसीए को पत्र लिखकर आयात सौदों के आर्डर कैंसिल करने की मांग की थी, जिसे आईसीए के ठुकरा दिया है। आईसीए ने भारतीय आयातकों सुझाव दिया है कि आयातक वैश्विक निकाय के उपनियमों के अनुसार इन सौदों को वापस बेच सकते हैं।

तमिलनाडु स्पिनिंग मिल्स एसोसिएशन (TASMA) को भेजे गए एक पत्र में, जिन्होंने इस मुद्दे को उठाया था, आईसीए ने कहा कि कोई भी अनुबंध जो आईसीए के उपनियमों और नियमों के अधीन है, वह रद्द नहीं किया जा सकता है।

आईसीए ने स्पष्ट किया कि अनुबंध को बंद होने की तिथि पर बाजार मूल्य पर वापस बेचा जा सकता है। हालांकि, किसी विशेष अनुबंध में निर्दिष्ट होने पर शर्तें लागू होंगी।

नियम 238 के अनुसार, यदि किसी कारण से अनुबंध के हिस्से का अनुबंध नहीं किया गया है, या नहीं किया जाएगा (चाहे किसी भी पार्टी द्वारा अनुबंध के उल्लंघन के कारण या किसी अन्य कारण से) यह कैंसिल नहीं होगा। सभी मामलों में संपर्क या अनुबंध का हिस्सा, अनुबंध की तिथि पर लागू नियमों के अनुसार विक्रेता को वापस चालान करके बंद कर दिया जाएगा। नियम 239 के अनुसार, बंद होने की तिथि पर प्रचलित कीमतों को वापस चालान के लिए लागू किया जाएगा।

जानकारों के अनुसार भारतीय आयातकों ने बढ़ी हुई कीमतों पर कॉटन का अनुबंध किया था। लेकिन बाद के महीनों में कीमतें गिर गईं। साथ ही अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कमजोर होने से भी भारतीय आयातकों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। साथ ही शिपमेंट में देरी से आयातित कपास की खपत के लिए आयातकों की योजना भी बाधित हुई है।

बाजार सूत्रों के अनुसार लगभग 10 लाख गांठ, एक गांठ-170 किलो के आयात सौदें भारतीय आयातकों द्वारा अनुबंधित किए हुए हैं जिस कारण आयातक भारी नुकसान का सामना कर रहे हैं। विशेष रूप से, दक्षिण भारत स्थित मिलों ने घरेलू आपूर्ति की कमी के कारण कपास के आयात सौदे किए थे।

अच्छे मानसून के बाद भी कर्नाटक में मोटे अनाज, दलहन एवं तिलहन की बुआई पिछे, कपास की आगे

दिल्ली। अच्छी बारिश के बावजूद भी चालू खरीफ सीजन में कर्नाटक में 22 जुलाई तक मोटे अनाजों के साथ ही दलहन एवं तिलहन की बुआई पिछड़ रही है, जबकि कपास की बुआई में जरुर बढ़ोतरी हुई है।

भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार राज्य में पहली जून से 27 जुलाई तक सामान्य की तुलना में 107 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है।

राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार चालू खरीफ में राज्य में दलहनी फसलों की बुआई अभी तक केवल 16.94 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 18.31 लाख हेक्टेयर से कम है। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर की बुआई चालू खरीफ में 11.49 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 12.73 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। मूंग की बुआई राज्य में चालू खरीफ में 3.88 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 3.93 लाख हेक्टेयर से कम है।

तिलहनी फसलों की बुआई चालू खरीफ में राज्य में 7.83 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में इनकी बुआई 8.67 लाख हेक्टयेर में हो चुकी थी। खरीफ तिलहन की प्रमुख फसल सोयाबीन की बुआई चालू खरीफ में राज्य में बढ़कर 4.07 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 3.78 लाख हेक्टेयर में बुआई हुई थी। मूंगफली की बुआई चालू खरीफ में 2.14 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस सयम तक इसकी बुआई 3.66 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। सनफ्लावर की बुआई चालू खरीफ में 1.40 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 95 हजार हेक्टेयर से ज्यादा है।

धान, ज्वार, बाजरा एवं मक्का तथा रागी की बुआई चालू खरीफ में 17.17 हेक्टेयर में ही र्हुइ है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई 20.33 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। धान की रोपाई चालू सीजन में 2.44 हेक्टेयर में और मक्का की 12.33 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले खरीफ में इस समय तक इनकी बुआई क्रमशः 2.82 लाख हेक्टेयर और 12.54 लाख हेक्टयेर में हो चुकी थी।

कपास की बुआई चालू खरीफ में राज्य में बढ़कर 6.59 लाख हेक्टेयर हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई केवल 5.06 लाख हेक्टयेर में ही हुई थी। कपास की बुआई का लक्ष्य 7.28 लाख हेक्टेयर तय किया गया है।

अच्छी बारिश से राजस्थान में खरीफ फसलों की बुआई तय लक्ष्य के 86 फीसदी के करीब

नई दिल्ली। जून के साथ जुलाई में हुई अच्छी बारिश से राजस्थान में खरीफ फसलों की कुल बुआई तय लक्ष्य के 85.63 फीसदी तक पूरी हो चुकी हैं। राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार चालू खरीफ में राज्य में 164.17 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बुआई का लक्ष्य तय किया था, जबकि 25 जुलाई तक राज्य में 140.57 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी है। पिछले साल इस समय तक राज्य में केवल 80.94 लाख हेक्टेयर में ही फसलों की बुआई हो पाई थी।

चालू खरीफ में राज्य में मोटे अनाजों की बुआई 56.73 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि इनकी बुआई का लक्ष्य 61.67 लाख हेक्टेयर का तय किया गया है। पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई केवल 32.19 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई थी। धान की रोपाई राज्य में 1.70 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि तय लक्ष्य 2.10 लाख हेक्टेयर की 81.13 फीसदी है। इसी तरह से ज्वार की बुआई 5.91 लाख हेक्टेयर में बाजरा की 40.43 लाख हेक्टेयर में और मक्का की 8.65 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि राज्य सरकार ने चालू खरीफ में इनकी बुआई का लक्ष्य क्रमशः 6.10 लाख हेक्टेयर, 44 लाख हेक्टेयर और 9.40 लाख हेक्टेयर तय किया हुआ है।

दालों की बुआई चालू खरीफ में राज्य में बढ़कर 30.29 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई केवल 15.78 लाख हेक्टयेर में ही हो पाई थी। दालों की बुआई का लक्ष्य चालू खरीफ में 40.85 लाख हेक्टेयर का तय किया हुआ है। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल मूंग की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 18.55 लाख हेक्टयेर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 11.45 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। अन्य दालों में मोठ की 7.99 लाख हेक्टेयर में और उड़द की 3.01 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है।

तिलहनी फसलों की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 20.68 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 15.29 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। तिलहन की प्रमुख फसल मूंगफली की बुआई 7.39 लाख हेक्टेयर में और सोयाबीन की 10.97 लाख हेक्टयेर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमशः 6.94 लाख हेक्टेयर और 7.33 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

ग्वार सीड की बुआई चालू खरीफ में राज्य में 23.06 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि इसकी बुआई का लक्ष्य 25 लाख हेक्टेयर है। पिछले साल राज्य में इस समय तक केवल 9.95 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी।

कपास की बुआई राज्य में चालू सीजन में बढ़कर 6.35 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले खरीफ की समान अवधि में इसकी बुआई केवल 5.93 लाख हेक्टयेर में ही हो पाई थी। 

26 जुलाई 2022

घरेलू बाज़ार की अच्छी मॉग से बासमती 1401 स्टीम ने छुआ 9000 का आंकड़ा

घरेलू बाज़ार मे अच्छी मॉग और मार्केट मे बासमती प्रजाती की 1401 स्टीम मे कमी के चलते 1401 स्टीम मे 9000 पर नया बाजार दिल्ली मे इसका कारोवार चल रहा है इसके साथ साथ 1121 और 1718 स्टीम मे भी अच्छी मॉग होने से 1121 स्टीम 9200/9300 और 1718 स्टीम भी 8800/8900 तक बोली जा रहा है 1401 स्टीम 9000 होने से 1121 अथवा 1718 स्टीम जैसी प्रजातियो मे विकबाल पीछे हटने लगा है क्यों कि बाज़ार मे सीमित मात्रा मे ही चावल शेष है|

उधर ईरान की शिप्मैन्ट और ऐडवॉस सौदों के चलते बासमती सेले की सभी प्रजातियों ने बाज़ार मे अपनी पकड़ बना रखी है 1121&1718 सफेद सेला 8500 के आस पास व्यापार करता नज़र अरहा है अथवा इसके गोल्डेन सेला मे भी ग्राहक अच्छी मजबूती से 9000/9100 तक खरीदारी करता नज़र अरहा है हाला की 1509 नई क्रॉप के सेले मे पकाई और न आने और कुछ भारतीय निर्यातकों की मॉग कमजो़र होने से पिछले दो दिन से करिब 200/300 रु.का मन्दा देखने को मिला है लेकिन पुरानी क्रॉप की सभी प्रजातियाँ मे मार्केट अच्छे तरीके से चल रही है

इस बार कुछ विशेष्गयों के अनुसार भारत मे बासमती चावल की पाईप लाईन खाली हो जाऐगी उधर स्पेन और ईटली में सूखा पड़ जाने से खरिफ फसलों की पैदावार काफी हद तक पिछले वर्ष की तुलना मे कम अॉकी जा रही है भारत मे बासमती चावल की पाईप लाईन खाली अथवा ईरान दूआरा काफी बड़ी मात्रा मे भारत से ऐडवॉस सौदो के चलते आने बाली 2022-2023 की फसल पर शुरू से ही मारा मारी पढ़ जाऐगी और बासमती धान की सभी प्रजातियाे मे भाव ऊऩचे खुलने के आसार हैं यूरोप जैसे देशों मे अलनीनो (सूखा) पड़ जाने से इस बार भी भारतीय बासमती चावल मे एक्सपोर्ट अच्छा रहने की उम्मीद  जताई जा रही है