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17 अगस्त 2010

एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को मिली कैबिनेट की हरी झंडी

आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने उत्तर पूर्वी राज्यों, जम्मू कश्मीर, अंडमान निकोबार व लक्षद्वीप को छोड़कर देश के सभी राज्यों में ईबीपी कार्यक्रम लागू करने को मंजूरी दे दी है
नई दिल्ली August 16, 2010
केंद्र सरकार ने देश के ज्यादातर हिस्सों में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) उपलब्ध कराने की योजना को आज औपचारिक स्वीकृति दे दी। आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने उत्तर-पूर्वी राज्यों, जम्मू कश्मीर, अंडमान एवं निकोबार और लक्षद्वीप को छोड़कर देश के तमाम राज्यों में ईबीपी कार्यक्रम लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।इस योजना के तहत तेल विपणन कंपनियां 27 रुपये प्रति लीटर की एक समान दर से एथेनॉल खरीदकर पेट्रोल में मिलाएंगी और इसकी बिक्री करेंगी। एथेनॉल का यह भाव फिलहाल अस्थायी है। इसे बाद में अंतिम रूप दिया जाना है, जिसमें फेरबदल की गुंजाइश है।सरकार ने अधिकारियों के एक कार्य समूह के गठन की भी मंजूरी दे दी है। यह कार्य समूह एथेनॉल की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा और 10 फीसदी के दायरे में रहते हुए देश के तमाम राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पेट्रोल के साथ इसे मिलाए जाने की मात्रा (प्रतिशत में) की सिफारिश करेगा।एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि योजना आयोग के सदस्य डॉ सौमित्र चौधरी की अध्यक्षता वाली एक समिति एथेनॉल का भाव निर्धारित करने के तरीके की शिफारिस करेगी। इस समिति के अन्य सदस्य प्रधान सलाकार (ऊर्जा), सीएसीपी के अध्यक्ष, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के संयुक्त सचिव, चीनी उद्योग के प्रतिनिधि संयुक्त सचिव (चीनी) और तेल उद्योग के प्रतिनिधि होंगे।सरकार से अनुमति मिलने के बाद अब तेल विपणन कंपनियों को तमाम मौजूदा अनुबंध खत्म करने होंगे और घरेलू स्रोतों से अस्थायी एक-समान भाव पर एथेनॉल की खरीदारी करनी होगी।इस कदम से गन्ना किसानों को फायदा हो सकता है क्योंकि पेट्रोल में मिलाए जाने वाले एथेनॉल की मात्रा बढ़ाए जाने की गुंजाइश है और इस वजह से उम्मीद जताई जा रही है कि विभिन्न राज्यों में उपलब्ध अतिरिक्त एथेनॉल ईबीपी कार्यक्रम के तहत खप जाएंगे। (BS Hindi)

वनस्पति तेल का भंडार बढ़ा

पिछले एक महीने में वनस्पति तेल के भंडार में 9.5 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी हुई है। इसकी वजह यह रही कि बड़े पैमाने पर आयात के साथ सोयाबीन के बीज की पेराई के चलते घरेलू उत्पादन में भी बढ़ोतरी हुई है।इस वर्ष पहली अगस्त तक के आंकड़ों के मुताबिक वनस्पति तेल का भंडार बढ़कर 12,15,000 टन हो गया है, जो एक महीने पहले के भंडार 11,10,000 टन की तुलना में 105,000 टन ज्यादा है।इस समय विभिन्न बंदरगाहों पर स्टॉक 6,35,000 टन है (कच्चा पाम तेल 2,75,000 टन, रिफाइंड, ब्लीच्ड और डायोडाइज्ड पामोलीन 65,000 टन, डिगम्ड सोयाबीन तेल 2,35,000 टन और कच्चा सूरजमुखी तेल 60,000 टन) और करीब 5,80,000 टन तेल के सौदे हो चुके हैं। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (एसईए) के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई महीने में भारत में कुल 8,00,644 टन तेल का आयात हुआ है, जो पिछले माह हुए 7,32,232 टन आयात से 6.34 प्रतिशत ज्यादा है। वहीं पिछले साल के समान महीने में हुए 5,96,024 टन आयात की तुलना में इसमें 34 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एसईए के कार्यकारी निदेशक बीवी मेहता ने कहा कि इसके पहले के महीने में कम सौदे होने की वजह से इस माह आयात मेंं तेज बढ़ोतरी नजर आ रही है। जुलाई तिमाही में वनस्पति तेल का आयात 11.5 प्रतिशत बढ़कर 20,91,641 टन हो गया है। इसकी पिछली तिमाही में कुल 18,76,889 टन तेल का आयात हुआ था। पिछले साल की समान तिमाही में कुल आयात 21,27,800 टन हुआ था। वहीं घरेलू मिलों की सोयाबीन की पेराई में भी करीब 45-50 प्रतिशत की जोरदार बढ़ोतरी हुई है। किसानों ने अपना अतिरिक्त स्टॉक खाली करना शुरू कर दिया है।इसकी वजह यह है कि इस वर्ष मई महीने में अनुकूल मौसम के चलते उम्मीद बनी है कि अगले सीजन में उत्पादन बेहतर रहेगा। उम्मीद जताई जा रही है कि किसान जल्दी ही अपना स्टॉक खाली कर देंगे। इंदौर के सोयाबीन प्रॉसेसर्स एसोसिएशन (सोपा) के समन्वयक राजेश अग्रवाल ने कहा कि इसके बावजूद अभी किसानों और स्टॉकिस्टों के पास कुल मिलाकर 12-15 लाख टन का स्टॉक बचा हुआ है।अनुमानों के मुताबिक किसानों ने पिछले 3 महीने में जुलाई के अंत तक 20 लाख टन से ज्यादा कोटा जारी किया है। अग्रवाल को उम्मीद है कि अभी 2010 की खरीफ की फसल तैयार होने के पहले करीब 10 लाख टन सोयाबीन बाजार में और आएगा। सेंट्रल आर्गेनाइजेशन फार ऑयल इंडस्ट्री ऐंड ट्रेड पिछले सत्र में कुल 85 लाख टन सोयाबीन का उत्पादन हुआ था, जबकि उसके पहले के सत्र में कुल 95 लाख टन सोयाबीन का उत्पादन हुआ था। इस साल भी बेहतर मॉनसून के चलते 95 लाख टन सोयाबीन उत्पादन का अनुमान है।हालांकि बुआई का रकबा 3.75 प्रतिशत गिरकर 93.08 लाख हेक्टेयर रह गया है।जुलाई में भारत का सोया खली निर्यात बढ़कर 1,60,000 टन हो गया। घरेलू खपत 2,00,000 टन रहने का अनुमान है। इस तरह से कुल उत्पादन 3,60,000 टन रहने का अनुमान लगाया गया है। अग्रवाल ने कहा कि इससे अनुमान मिलता है कि कि सोयाबीन की पेराई 5 से 5.5 लाख टन रही। (BS Hindi)

दिवाली तक नहीं हो सकेगा चीनी का निर्यात

नई दिल्ली: चीनी मिलों को करीब 10 लाख टन चीनी का निर्यात करने के लिए दिवाली तक इंतजार करना पड़ सकता है। खाद्य मंत्रालय को त्यौहारी सीजन में चीनी की कीमतें बढ़ने की आशंका है। चीनी मिलों ने अग्रिम लाइसेंस स्कीम के तहत 2004-05 फसल वर्ष (अक्तूबर-सितंबर) में 20.75 लाख टन चीनी का आयात किया था, क्योंकि उस समय चीनी का उत्पादन घटा था। मिलों को इतनी ही मात्रा में चीनी मार्च 2011 तक निर्यात करना है। कुल आयातित चीनी में से अभी तक 9.67 लाख टन चीनी की निर्यात करनी है। हालांकि, मंत्रालय की ओर से निर्यात मंजूरी के बिना चीनी मिलें चीनी का निर्यात नहीं कर सकती हैं। खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'कुछ चीनी मिलों ने हमें संपर्क किया और निर्यात आदेश जारी करने की मांग की। लेकिन फिलहाल हम इसकी अनुमति नहीं दे सके क्योंकि अगले सत्र के लिए गन्ने की उपलब्धता एवं उत्पादन अनुमान अभी जारी होना बाकी है।' उन्होंने कहा कि दिवाली जैसे बड़े त्यौहारों के बाद मिलों की मांग पर विचार किया जा सकता है क्योंकि त्यौहारी सीजन में चीनी की खपत आमतौर पर बढ़ जाती है। (Ee T Hindi)

16 अगस्त 2010

गोदाम मालिकों से 10 साल का करार करेगी एफसीआई

भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) निविदा नियमों में ढील देगी। एफसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सात साल के बजाय प्राइवेट गोदाम मालिकों के साथ आठ और दस साल के लिए करार किया जाएगा। इसके अलावा तय दाम 4.78 रुपये प्रति क्विंटल प्रति महीना की दर में भी बढ़ोतरी की जा सकती है। लेकिन किराए में बढ़ोतरी अच्छी लोकेशन होने पर ही की जाएगी। हालांकि भाव में बढ़ोतरी का फैसला उच्च स्तरीय समिति करेगी। एफसीआई को उम्मीद है कि नियमों में छूट देने से गोदाम बनाने के लिए प्राइवेट निवेशकों से ज्यादा प्रस्ताव मिल सकते हैं। हरियाणा और पंजाब में दो बार निविदा मांगी जा चुकी है। हरियाणा में जुलाई में मांगी गई निविदा में करीब 40 लाख टन भंडारण के लिए निविदा प्राप्त हुई लेकिन एफसीआई जिन जिलों में क्षमता बढ़ानी चाहती है, उनमें केवल 15-18 लाख टन की भंडारण क्षमता की निविदा मिलीं। उधर पंजाब में अभी तक केवल 15 लाख टन की ही निविदा प्राप्त हुई हैं। उन्होंने बताया कि नए नियमों के तहत जल्दी ही हरियाणा और पंजाब में दोबारा निविदा मांगी जाएंगी। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर किसानों से खरीदे जाने वाले गेहूं और चावल के भंडारण की समस्या को दूर करने के लिए एफसीआई की 127.64 लाख टन खाद्यान्न भंडारण क्षमता बढ़ाने की योजना है। राज्य सरकारों के सहयोग से पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत यह क्षमता बढ़ाई जाएगी। इस समय निगम की कुल भंडारण क्षमता 284.56 लाख टन की है। इसके अलावा राज्य सरकारों के पास भी करीब 170-180 लाख टन की भंडारण क्षमता है। केंद्रीय पूल में पहली जून को खाद्यान्न का 604.28 लाख टन का बंपर स्टॉक था, जो पिछले साल की समान अवधि के 535.25 लाख टन से 69.03 लाख टन ज्यादा है। कुल स्टॉक में 351.62 लाख टन गेहूं और 252.66 लाख चावल है। एफसीआई और राज्यों के पास मिलाकर कुल भंडारण क्षमता केवल 454-455 लाख टन होने के कारण बकाया करीब 150 लाख खाद्यान्न ज्यादातर गेहूं खुले मैदान में तिरपालों के नीचे रखा हुआ है। इसी कारण पिछले दिनों कई राज्यों उत्तर प्रदेश और पंजाब में एफसीआई के गोदामों में बारिश से गेहूं भीग गया था। खाद्यान्न की सरकारी खरीद में सबसे ज्यादा योगदान पंजाब और हरियाणा का रहता है। इसीलिए इन राज्यों में भंडारण क्षमता ज्यादा मात्रा में बढ़ाई जाएगी। पंजाब में लगभग 71 लाख टन और हरियाणा में 39 लाख टन खाद्यान्न के भंडारण की क्षमता बढ़ाई जाएगी। पंजाब और हरियाणा के अलावा जम्मू-कश्मीर में 3.6 लाख टन, तलिमनाडु में 3.2 लाख टन और बिहार में तीन लाख टन भंडारण क्षमता बढ़ाई जाएगी। जबकि झारखंड में 1.75 लाख टन, हिमाचल प्रदेश में 1.42 लाख टन, कर्नाटक में एक लाख टन और गुजरात में 45 हजार टन खाद्यान्न की भंडारण क्षमता बढ़ाई जाएगी। बात पते कीएफसीआई 4.78 रुपये प्रति क्विंटल प्रति माह किराए में बढ़ोतरी करने के लिए भी तैयार है। लेकिन अच्छी लोकेशन में गोदाम होने पर ही उच्च स्तरीय बढ़ाएगी किराया। (Business bhaskar....aar as raana)

निर्यात मांग घटने से जीरे में गिरावट का रुख

निर्यातकों की कमजोर मांग से जीरे की कीमतों में गिरावट का रुख बना हुआ है। पिछले 15 दिनों में हाजिर में जीरे के दाम करीब 3.7 और वायदा में 6.3 फीसदी घट चुके हैं। वैसे उत्पादक मंडियों में जीरे का बकाया स्टॉक कम है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत के मुकाबले टर्की और सीरिया का जीरा सस्ता है। साथ ही रमजान के कारण खाड़ी देशों की आयात मांग कम हो गई है। ऐसे में जीरे में सितंबर के बाद मौजूदा कीमतों से तेजी आने के आसार हैं। वायदा बाजार में दाम घटे नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज लिमिटेड (एनसीडीईएक्स) पर अगस्त महीने के वायदा अनुबंध में पिछले 15 दिनों में जीरे की कीमतों में करीब 6.3 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। 28 जुलाई को अगस्त महीने के वायदा अनुबंध में जीरे का भाव बढ़कर 15,199 रुपये प्रति क्विंटल हो गया था। ये शुक्रवार को घटकर 14,233 रुपये प्रति क्विंटल रह गया। अगस्त महीने के वायदा अनुबंध में 4,404 लॉट के खड़े सौदे हुए हैं। कमोडिटी विशेषज्ञ अभय लाखवान ने बताया कि वायदा में दाम काफी बढ़ गए थे, लेकिन इस अनुपात में निर्यात मांग नहीं निकल पाई। इस वजह से निवेशकों की मुनाफावसूली शुरू हो गई। इसी से गिरावट को बल मिला है। निर्यातकों की मांग घटी मुंबई स्थित मैसर्स जैब्स प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर एस शाह ने बताया कि सीरिया और टर्की में जीरे की नई फसल आने से भारत से निर्यात मांग कम हो गई है। वैसे भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत के मुकाबले सीरिया और टर्की का भाव 200 डॉलर प्रति टन कम है। इसीलिए भारत के मुकाबले इन देशों से आयात ज्यादा हो रहा है। रमजान के महीने में खाड़ी देशों की आयात मांग कम हो जाती है। भारतीय जीरे का भाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में 2,750 डॉलर प्रति टन (एफओबी) है, जबकि टर्की और सीरिया के जीरे का भाव 2,550 डॉलर प्रति टन है। चालू सीजन में टर्की में जीरे का उत्पादन 15 से 20 हजार टन रहने के आसार हैं। इसी तरह एक अन्य उत्पादक देश सीरिया में उत्पादन करीब 30-35 हजार टन रह सकता है। पहली तिमाही में निर्यात 20 घटा भारतीय मसाला बोर्ड के अनुसार चालू वित्त वर्ष के पहले तीन महीनों अप्रैल से जून के दौरान जीरा निर्यात में 20 फीसदी की कमी आई है। इस दौरान 10,750 टन जीरे का ही निर्यात हुआ है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 13,395 टन जीरे का निर्यात हुआ था। हाजिर बाजार में स्टॉक कम हनुमान प्रसाद पीयूष कुमार के प्रोपराइटर वीरेंद्र अग्रवाल ने बताया कि प्रमुख उत्पादक मंडी ऊंझा में जीरे का 7-8 लाख बोरी (एक बोरी-55 किलो) का ही स्टॉक बचा हुआ है। इसके अलावा गुजरात की अन्य मंडियों में दो लाख बोरी और राजस्थान की मंडियों में भी दो लाख बोरी का स्टॉक बचा हुआ है। ऐसे में कुल स्टॉक करीब 11-12 लाख बोरी का ही है, जो पिछले साल की समान अवधि के 17 लाख बोरी से कम है। हालांकि चालू सीजन में नई फसल की आवक के समय पांच लाख बोरी का बकाया स्टॉक था। इस समय ऊंझा मंडी में दैनिक आवक 4 से 5 हजार बोरी की हो रही है, जबकि दैनिक सौदे छह से सात हजार बोरियों के हो रहे हैं। मंडी में जीरे का भाव घटकर 2600 रुपये प्रति 20 किलो रह गया है। जुलाई के आखिरी सप्ताह में भाव बढ़कर 2700 रुपये प्रति 20 किलो रह गए थे। पैदावार पिछले साल से कम जीरा कारोबारी रजनीकांत बी पोपट ने बताया कि चालू सीजन में देश में जीरे की पैदावार पिछले साल की 30 लाख बोरी से घटकर 28 लाख बोरी ही रहने का अनुमान है। वर्तमान में निर्यात मांग कमजोर बनी हुई है, लेकिन रमजान के बाद खाड़ी देशों की आयात मांग बढ़ सकती है। इसके बाद मौजूदा कीमतों में तेजी दिख सकती है। (Business Bhaskar....aar as raana)

निर्यात रोक हटने की संभावना से कपास तेज

अक्टूबर से कपास निर्यात पर लगी रोक हटने की संभावना से शुक्रवार को कपास वायदा अनुबंधों में तेजी आ गई। एनसीडीईएक्स में कपास अप्रैल वायदा 1.6 फीसदी की बढ़त के साथ 652.50 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। इस बारे में कर्वी कॉमट्रेड के विश्लेषक वीरेश हिरेमिथ ने बताया कि देश के कपास उत्पादक कुछ क्षेत्रों में ज्यादा बारिश के कारण कपास की फसल को नुकसान होने संबंधी कुछ अपुष्ट खबरों का भी बाजार पर असर पड़ा है। बकौल वीरेश कपास में यह तेजी रह सकती है।हल्दीएनसीडीईएक्स में हल्दी नवंबर वायदा 2.7फीसदी गिरकर 12,760 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर आ गई। हल्दी अक्टूबर वायदा में भी 2.6फीसदी की गिरावट रही। विश्लेषकों का मानना है कि आंध्र प्रदेश में मौसम अच्छा रहने की खबरों का हल्दी पर नकारात्मक असर हुआ है। बेहतर मौसम के चलते हल्दी की पैदावार बढऩे की संभावना जताई जा रही है। निवेशकों के अनुसार हल्दी में गिरावट रह सकती है।क्रूड ऑयलएमसीएक्स में क्रूड ऑयल जनवरी वायदा 1.03फीसदी गिरकर 3.730 रुपये प्रति बैरल पर आ गया। इसके अलावा क्रूड के दूसरे अनुबंधों में भी गिरावट रही। निवेशकों का मानना है कि क्रूड के दाम 3500 रुपये प्रति डॉलर तक नीचे आ सकते है। पिछले दिनों विश्व बाजार में क्रूड का नकारात्मक रुख रहने का असर घरेलू वायदा पर पड़ा है।जिंकएमसीएक्स में जिंक सितंबर वायदा 0.42फीसदी बढ़कर 96.70 रुपये प्रति किलो के स्तर तक पहुंच गया। साथ ही जिंक अगस्त वायदा में भी 0.47फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। शेअरखान कमोडिटीज के विश्लेषक प्रवीन सिंह के अनुसार अमेरिका व यूरोप के शेयर बाजार गिरने का जिंक पर सकारात्मक असर हुआ है। निवेशकों के अनुसार मौजूदा स्तर पर जिंक कुछ समय टिक सकता है या मामूली बढ़त हो सकती है। (Buisness Bhaskar)

खाली होंगे पंजाब, हरियाणा के गोदाम

चंडीगढ़ August 13, 2010
पंजाब और हरियाणा में गेहूं के तकरीबन 187 लाख टन के भंडार खाली किए जा सकते हैं। इसमें से 142 लाख टन गेहूं खुले में पड़ा है। गौरतलब है कि केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार संसद में स्वीकार कर चुके हैं कि विभिन्न खाद्य एजेंसियों के पास अतिरिक्त खाद्यान्न का विशाल भंडार पड़ा है और सर्वोच्च अदालत ने सरकारी गोदामों में पड़े खाद्यान्न को सडऩे से बचाने के लिए इनके वितरण की जरूरत जताई है। कुछ दिन पहले मीडिया में खबरें आई थीं कि सरकारी गोदामों में करोड़ों रुपये के खाद्यान्न सड़ रहे हैं, जिस पर विपक्षी पार्टियों ने जबरदस्त हंगामा किया था। लेकिन सरकारी एजेंसियों के लिए गेहूं के अतिरिक्त भंडार को बाजार में खपाना आसान भी नहीं है। दरअसल इन एजेंसियों की ओर से गेहूं के रिजर्व भाव 1,238 रुपये प्रति क्विंटल (कर एवं ढुलाई खर्च अतिरिक्त) रखा गया है, जो खुले बाजार में उपलब्ध गेहूं के भाव तकरीबन 1,210 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक है।यही वजह है कि व्यापारी सरकारी गेहूं नहीं उठा रहे हैं। कुछ ही दिन पहले खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के केंद्रीय मंत्रालय ने भारतीय खाद्य निगम को निर्देश दिया था कि वह निजी कारोबारियों को गोदामों में पड़ा गेहूं खरीदने की अनुमति दे। खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत कुल 20.81 लाख टन गेहूं आवंटित किया गया है। इसमें से 16.69 लाख टन गेहूं थोक व्यापारियों के लिए और 4.12 लाख टन गेहूं निजी कारोबारियों के लिए है। अब मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि इस मद में 20 लाख टन अतिरिक्त गेहूं आवंटित किया जा सकता है। मौजूदा प्रावधान के तहत निजी कारोबारी प्रति फर्म प्रति डिपो प्रति दिन 3 से 9 टन गेहूं उठा सकते हैं। थोक व्यापारियों के लिए यह सीमा 100 से 1,000 टन है।पंजाब और हरियाणा में एफसीआई के सूत्रों ने बताया कि ओएमएसएस के तहत जारी गेहूं के लिए फिलहाल व्यापारी नहीं आ रहे हैं और आशंका जताई जा रही है कि सितंबर-अक्टूबर तक यही स्थिति बनी रहेगी, जब तक खुले बाजार में उपलब्ध गेहूं खत्म नहीं हो जाता। ओएमएसएस के तहत अनाज वितरण के लिए पंजाब ने 39 डिपो का चुनाव (प्रति जिला 3 डिपो) किया है। हरियाणा में गेहूं वितरण के लिए तकरीबन 20 डिपो चुने जाएंगे। (BS Hindi)