कुल पेज दृश्य

27 अक्टूबर 2023

केंद्र ने चीनी के निर्यात पर प्रतिबंध को 31 अक्टूबर 23 से अगले आदेश तक बढ़ाया

नई दिल्ली। घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों को काबू में रखने के लिए केंद्र सरकार ने चीनी के निर्यात पर प्रतिबंध को 31 अक्टूबर 2023 से अगले आदेश तक बढ़ा दिया है।


वाणिज्य मंत्रालय द्वारा 18 अक्टूबर को जारी अधिसूचना के अनुसार चीनी के निर्यात पर प्रतिबंध को 31 अक्टूबर 2023 से अगले आदेश तक बढ़ा दिया है। सरकार ने चीनी का निर्यात 1 जून, 2022 से प्रतिबंधित कर दिया गया था, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि देश में कमी की आशंका के बीच घरेलू खपत के लिए पर्याप्त स्टॉक हो।

चालू सीजन प्रतिकूल मौसम से प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र के साथ ही कर्नाटक में गन्ने की पैदावार में कमी आने की आशंका है। अत: पहली अक्टूबर 2023 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन में चीनी के उत्पादन अनुमान में कमी की आशंका है। 

महाराष्ट्र में कपास, गन्ने के साथ ही दलहन एवं तिलहन के उत्पादन में कमी की आशंका

नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन में प्रतिकूल मौसम का असर महाराष्ट्र में खरीफ फसलों पर पड़ने की आशंका है। राज्य के कृषि निदेशालय के आरंभिक अनुमान के अनुसार राज्य में कपास के साथ ही गन्ने एवं दलहन तथा तिलहनी फसलों के उत्पादन अनुमान में कमी आने की आशंका है।


राज्य के कृषि निदेशालय के आरंभिक अनुमान के अनुसार चालू खरीफ में कपास का उत्पादन घटकर 75.73 लाख गांठ, एक गांठ-170 किलो ही होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल राज्य में 84.13 लाख गांठ का उत्पादन हुआ था।

इस दौरान राज्य में गन्ने का उत्पादन घटकर 10,68,05,200 टन ही होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल गन्ने की पैदावार 13,57,54,300 टन की हुई थी।

आरंभिक अनुमान के अनुसार दलहनी फसलों का उत्पादन चालू खरीफ में घटकर 10.69 लाख टन ही होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल खरीफ में इनका उत्पादन 13.96 लाख टन का हुआ था। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर का उत्पादन घटकर 8.76 लाख टन, उड़द का 87 हजार टन एवं मूंग का 59,900 टन ही होने का अनुमान है। पिछले खरीफ सीजन में राज्य में अरहर का उत्पादन 9.25 लाख टन का, उड़द का 2.25 लाख टन और मूंग का 1.70 लाख टन का हुआ था।

तिलहनी फसलों में सोयाबीन का उत्पादन चालू खरीफ में घटकर 47.72 लाख टन ही होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल राज्य में 66.05 लाख टन का उत्पादन हुआ था। इसी तरह से मूंगफली का उत्पादन चालू खरीफ में घटकर 1.24 लाख टन, शीशम का 1,100 टन एवं नाइजर सीड का 1,000 टन तथा सनफ्लावर का 600 टन का ही होने का अनुमान है। पिछले खरीफ में राज्य में मूंगफली का उत्पादन 1.90 लाख टन का, शीशम का 1,500 टन एवं नाइजर सीड का 1,300 टन तथा सनफ्लावर का 6,900 टन का हुआ था।

राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार चावल का उत्पादन 34.48 लाख टन ही होने का अनुमान है, जबकि पिछले खरीफ में इसका उत्पादन 34.53 लाख टन का हुआ था। मक्का का उत्पादन 13.57 लाख टन और बाजरा का 2 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले खरीफ में इनका उत्पादन क्रमश: 27.12 लाख टन का और 4.44 लाख टन का हुआ था। रागी का उत्पादन चालू खरीफ में 81,000 टन एवं ज्वार का 90,800 टन ही होने का अनुमान है। 

केंद्र ने पारबॉइल्ड चावल के निर्यात पर शुल्क की अवधि को 31 मार्च 2024 तक बढ़ाया

नई दिल्ली। सरकार ने त्योहारी सीजन की शुरुआत से पहले घरेलू बाजार में चावल की कीमत को काबू में रखने के लिए केंद्र सरकार ने पारबॉइल्ड चावल के निर्यात पर शुल्क की अवधि को 31 मार्च 2024 तक बढ़ा दिया है।


वित्त मंत्रालय द्वारा 13 अक्टूबर को जारी अधिसूचना के अनुसार पारबॉइल्ड चावल के निर्यात पर शुल्क की अवधि को 31 मार्च 2024 तक बढ़ाने का फैसला किया है। घरेलू बाजार में चावल की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने अगस्त में पारबॉइल्ड चावल के निर्यात पर 20 फीसदी निर्यात शुल्क लगाने का फैसला किया था। 

सितंबर में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात पांच फीसदी घटा - उद्योग

नई दिल्ली। सितंबर में देश में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात पिछले साल की समान अवधि की तुलना में पांच फीसदी घटकर 1,552,026 टन का ही हुआ, जबकि पिछले साल सितंबर-22 में इनका आयात 1,637,239 टन का हुआ था। सितंबर के दौरान खाद्वय तेलों का आयात 1,494,086 टन का एवं अखाद्य तेलों का आयात 57,940 टन का हुआ है।


सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एसईए के अनुसार चालू तेल वर्ष 2022-23 (नवंबर-22 से अक्टूबर-23) की पहले 11 महीनों नवंबर-22 एवं सितंबर-23 में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात इसके पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 20 फीसदी बढ़कर 15,673,102 टन का हुआ है। जबकि पिछले साल नवंबर से सितंबर के दौरान इनका आयात 13,013,465 टन का हुआ था।

चालू तेल वर्ष की पहले 11 महीनों में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात बढ़कर 154.69 लाख टन को देखते हुए, अक्टूबर 23 में समाप्त होने वाले चालू तेल वर्ष के दौरान इसका कुल आयात बढ़कर 165 से 170 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने का अनुमान है। इससे पहले देश में खाद्वय तेलों का रिकॉर्ड आयात 2016-17 में 151 लाख टन का हुआ था।

देशभर में अगस्त में मानसूनी बारिश की भारी कमी, के बाद सितंबर में ज्यादा हुई। हालांकि चालू मानसूनी सीजन में कुल बारिश सामान्य की तुलना में कम हुई। खरीफ तिलहन की बुआई पिछले साल के 196 लाख हेक्टेयर की तुलना में थोड़ी कम होकर 193 लाख हेक्टेयर में ही हुई।  सोयाबीन और कैस्टर सीड की बुआई में मामूली वृद्धि हुई है, जबकि मुख्य रूप से सौराष्ट्र में सोयाबीन की बुआई अधिक होने से मूंगफली की बुआई में कमी आई।

एसईए के अनुसार नवंबर 22 से सितंबर 23 के दौरान, पाम उत्पादों का आयात तेजी से बढ़ा और पिछले तेल वर्ष की समान अवधि के 7,028,032 टन की तुलना में बढ़कर 9,080,986 टन का हो गया। कुल आयात में पाम तेल की हिस्सेदारी 55 फीसदी से बढ़कर 59 फीसदी हो गई। पिछले छह महीनों में, सूरजमुखी और सोयाबीन तेलों की शिपमेंट में भी वृद्धि हुई है और चालू तेल वर्ष के पहले ग्यारह महीनों के दौरान कुल आयात 6,387,926 टन हो गया है, जबकि पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में 5,635,813 टन का आयात हुआ था, अत: इन तेलों की हिस्सेदारी 45 फीसदी से घटकर 41 फीसदी रह गई।

अगस्त के मुकाबले सितंबर में आयातित खाद्वय तेलों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। सितंबर में भारतीय बंदरगाह पर आरबीडी पामोलिन का भाव घटकर 867 डॉलर प्रति टन रह गया, जबकि अगस्ता में इसका भाव 894 डॉलर प्रति टन था। इसी तरह से क्रूड पाम तेल का भाव सितंबर में घटकर 883 डॉलर प्रति टन रह गया, जबकि अगस्त में इसका भाव 924 डॉलर प्रति टन था। इस दौरान क्रूड सोयाबीन तेल का भाव अगस्त के 1,0856 डॉलर से घटकर सितंबर में भारतीय बंदरगाह पर 1000 डॉलर प्रति टन रह गया। क्रूड सनफ्लावर तेल का भाव अगस्त के 1,005 डॉलर प्रति टन से घटकर सितंबर में 911 डॉलर प्रति टन रह गया। 

नवंबर में नई फसल की आवक बनने की संभावना से कैस्टर सीड की कीमतों पर दबाव

नई दिल्ली। उत्तर गुजरात के साथ ही कच्छ में कैस्टर सीड की अगेती बुआई थी, ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि अगेती फसल की आवक दीपावली बाद शुरू हो जायेगी, तथा नवंबर के अंत एवं दिसंबर में आवकों में बढ़ोतरी होगी। साथ ही उत्पादक मंडियों में कैस्टर सीड का बकाया स्टॉक भी ज्यादा माना जा रहा है। इसलिए कीमतों पर दबाव बना हुआ है।

राजकोट में गुरुवार को कैस्टर सीड के भाव 20 रुपये कमजोर होकर दाम 1,185 से 1,200 रुपये प्रति 20 किलो रह गए। इस दौरान गोंडल मार्केट में इसके दाम 10 रुपये कमजोर होकर भाव 1,125 से 1,160 रुपये, जूनागढ़ में 20 रुपये कमजोर होकर 1,110 से 1,130 रुपये और  जामनगर में इसके भाव घटकर 1,120 से 1,140 रुपये प्रति 20 किलो रह गए।

राजकोट में कैस्टर तेल के दाम कमर्शियल के 10 रुपये कमजोर होकर भाव 1,210 रुपये तथा राजकोट में एफएसजी के भाव 10 रुपये नरम होकर 1,230 रुपये प्रति 10 किलो रह गए।

व्यापारियों के अनुसार गुजरात के साथ ही राजस्थान को मिलाकर कैस्टर सीड की दैनिक आवक 45 से 50 हजार बोरी, एक बोरी 35 किलो की आवक हो रही है। उत्पादक राज्यों में किसानों के साथ ही स्टॉकिस्टों के पास कैस्टर सीड का बकाया स्टॉक भी पिछले साल की तुलना में ज्यादा माना जा रहा है कि जबकि दीपावली के बाद नई फसल की शुरूआती आवक बनेगी तथा दिसंबर में आवकों में बढ़ोतरी होगी।

साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एसईए के अनुसार सितंबर में कैस्टर तेल का निर्यात बढ़कर 43,258 टन का हुआ है, जबकि पिछले साल सितंबर में इसका निर्यात केवल 34,042 टन का ही हुआ था। जानकारों के अनुसार पिछले तीन महीनों अगस्त से सितंबर के दौरान कैस्टर तेल के निर्यात में बढ़ोतरी हुई है। चालू वित्त वर्ष 2023-24 की पहली छमाही में कैस्टर तेल का निर्यात बढ़कर 3,16,653 टन का हुआ है, जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष की छमाही में इसका निर्यात केवल 3,14,732 टन का ही हुआ था।

चालू खरीफ सीजन में कैस्टर सीड की बुआई 9.52 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 9.31 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।


महाराष्ट्र में चालू खरीफ में दलहन उत्पादन में 35 फीसदी कमी आने की आशंका

नई दिल्ली। प्रतिकूल मौसम के कारण चालू खरीफ सीजन में महाराष्ट्र में दालों के उत्पादन में 35 फीसदी की कमी आने की आशंका है। इसके साथ ही मोटे अनाज के उत्पादन में भी कमी आने का अनुमान है।

राज्य के कृषि निदेशालय द्वारा जारी अग्रिम अनुमान के अनुसार चालू खरीफ सीजन में राज्य में दालों का उत्पादन घटकर 10.6 लाख टन ही होने का अनुमान है, जोकि पिछले पांच साल के औसत उत्पादन 16.5 लाख टन की तुलना में 35 फीसदी कम है।

खरीफ दलहन की प्रमुख अरहर का उत्पादन चालू खरीफ में घटकर 8.7 लाख टन का ही होने का अनुमान है, जोकि पिछले साल के औसत उत्पादन 12.5 लाख टन की तुलना में 30 फीसदी कम है। इसी तरह से उड़द का उत्पादन चालू खरीफ में घटकर 0.8 लाख टन और मूंग का 0.6 लाख टन होने का अनुमान है जोकि पिछले पांच साल के औसतन उत्पादन क्रमश: 1.7 लाख टन और 1.7 लाख टन का हुआ था।

चालू खरीफ में मोटे अनाजों का उत्पादन चालू खरीफ में राज्य में घटकर 51.9 लाख टन ही होने का अनुमान है, जोकि पिछले पांच साल के औसत उत्पादन 63.3 लाख की तुलना में 18 फीसदी कम है।

मोटे अनाजों में मक्का का उत्पादन 13.5 लाख टन और बाजार का दो लाख टन होने का अनुमान है, जोकि पिछले पांच साल के औसत उत्पादन क्रमश: 22.9 लाख टन एवं 5.9 लाख टन के मुकाबले कम है। ज्वार का उत्पादन भी चालू खरीफ में घटकर 0.9 लाख टन ही होने का अनुमान है, जोकि पिछले पांच साल के औसत उत्पादन 2.7 लाख टन से कम है।

सरकार ने बासमती चावल के एमईपी को घटाकर 950 डॉलर प्रति टन किया

नई दिल्ली, 27 अक्टूबर। बासमती चावल की अधिक कीमत के कारण इसका निर्यात प्रभावित होने की चिंताओं के बीच सरकार ने बासमती चावल निर्यात के लिए न्यूनतम मूल्य को 1,200 डॉलर प्रति टन से घटाकर 950 डॉलर प्रति टन कर दिया है।

निर्यात संवर्धन निकाय एपीडा को भेजे एक पत्र में वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है कि बासमती चावल के निर्यात के लिए अनुबंध पंजीकरण के लिए मूल्य सीमा को 1,200 डॉलर प्रति टन से संशोधित कर 950 डॉलर प्रति टन करने का निर्णय लिया गया है।

इसके साथ ही कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) को केवल उन्हीं अनुबंधों को पंजीकृत करने का निर्देश दिया गया है जिनका मूल्य 950 डॉलर प्रति टन और उससे अधिक है।

सरकार ने 27 अगस्त को प्रीमियम बासमती चावल की आड़ में सफेद गैर-बासमती चावल के ‘अवैध’ निर्यात पर रोक लगाने के लिए 1,200 डॉलर प्रति टन से कम मूल्य वाले बासमती चावल के निर्यात की अनुमति नहीं देने का फैसला किया था।

कीमत के हिसाब से वित्त वर्ष 2022-23 में भारत का बासमती चावल का कुल निर्यात 4.8 अरब डॉलर का रहा, जबकि मात्रा के हिसाब से यह 45.6 लाख टन था।

चावल निर्यातक संघ पिछले दो महीनों से इस आधार मूल्य में कटौती की मांग कर रहे थे। उनका कहना था कि पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण भारत अपना निर्यात बाजार खो रहा है।

उनका यह तर्क भी रहा है कि पिछले दो-तीन वर्षों में भारत की औसत निर्यात प्राप्ति 800-900 डॉलर प्रति टन रही है।

इन मांगों के बीच खाद्य मंत्रालय ने 15 अक्टूबर को कहा था कि सरकार आधार मूल्य कम करने की उद्योग की मांग पर विचार कर रही है।

अंतिम अनुमान के अनुसार, चावल का उत्पादन वर्ष 2022-23 में रिकॉर्ड 13 करोड़ 57.5 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि इसके एक साल पहले यह उत्पादन 12 करोड़ 94.7 लाख टन था।

उद्योग के अनुसार, वर्ष 2021 और वर्ष 2022 में बासमती चावल का औसत निर्यात मूल्य 850-900 डॉलर प्रति टन रहा।

इस साल 1,200 डॉलर प्रति टन से नीचे के अनुबंधों को पंजीकृत नहीं करने के फैसले से पहले यह दाम लगभग 1,050 रुपये प्रति टन था।

जानकारों के अनुसार सरकार के इस कदम से वैश्विक बाजारों में भारतीय बासमती चावल निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता बहाल होगी, साथ ही इस फैसले से निर्यातकों और किसानों को राहत मिलेगी।

व्यापारियों के अनुसार बासमती चावल की लगभग 40 किस्में हैं जिनकी औसत कीमत 850-1,600 डॉलर प्रति टन तक है। बासमती चावल की निचली किस्मों का निर्यात बाजार में 70 प्रतिशत योगदान है।