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15 सितंबर 2023

दाल मिलों की खरीद घटने से अरहर एवं चना कमजोर, उड़द में मिलाजुला रुख तथा मसूर तेज

नई दिल्ली। दाल मिलों की मांग कमजोर बनी रहने के कारण घरेलू बाजार में गुरुवार को अफ्रीकी देशों से आयातित अरहर के साथ चना की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि इस दौरान आयातित मसूर के दाम तेज हुए। मूंग की कीमतें लगभग स्थिर हो गई। लेमन अरहर तथा उड़द में मिलाजुला रुख देखा गया।


चेन्नई में बर्मा की उड़द एसक्यू और एफएक्यू के दाम स्थिर बने रहे। उड़द एफएक्यू और एसक्यू के भाव सितंबर एवं अक्टूबर शिपमेंट के फसल सीजन 2023 के क्रमश: 980 डॉलर और 1,075 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ पर स्थिर बने रहे।

राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक की लगभग सभी मंडियों में नई उड़द की आवक शुरू हो गई है, तथा इस समय जो माल आ रहे हैं, उनकी क्वालिटी अच्छी है। मौसम अनुकूल रहा तो आने वाले दिनों में इसकी दैनिक आवक बढ़ेगी। हालांकि मौसम विभाग ने कई उत्पादक क्षेत्रों में आगे बारिश होने की भविष्यवाणी की हुई है। ऐसे में इसकी कीमतों में तेजी, मंदी काफी हद तक उत्पादक राज्यों में आगामी दिनों में मानसून कैसा रहता है, इस पर भी निर्भर करेगी। नई फसल की आवकों को देखते हुए इसकी कीमतों पर दबाव बढ़ा है, लेकिन आयातक नीचे दाम पर बिकवाली नहीं कर रहे। वैसे भी त्योहारी सीजन के कारण उड़द दाल में दक्षिण भारत की मांग अभी बनी रहेगी। बर्मा में पुरानी उड़द का बकाया स्टॉक कम है।

दाल मिलों की मांग कमजोर होने से अफ्रीकी देशों से आयातित अरहर की कीमतों में मंदा आया जबकि लेमन में मिलाजुला रुख रहा। घरेलू मंडियों में देसी अरहर का बकाया स्टॉक कम है जबकि नई अरहर की आवक दिसंबर में बनेगी। चालू खरीफ में अरहर की बुआई भी पिछले साल की तुलना में कम हुई है। खपत का सीजन होने के कारण अरहर दाल में मांग बनी रहने का अनुमान। स्टॉक लिमिट लगी होने के कारण दाल मिलों के पास भी तय मात्रा में ही अरहर का स्टॉक बचा हुआ है। ऐसे में इसकी मौजूदा कीमतों में अभी बड़ी गिरावट के आसार कम है। केंद्र सरकार हर सप्ताह कीमतों की समीक्षा कर रही है, इसलिए मिलर्स भी जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं।

देसी के साथ ही आयातित मसूर के दाम तेज हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार खपत का सीजन होने के कारण मसूर दाल में बिहार, बंगाल एवं असम की मांग बनी रहेगी, जबकि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की मंडियों में देसी मसूर की आवक काफी कम हो गई है। किसानों के पास बकाया स्टॉक सीमि मात्रा में ही बचा हुआ है, जबकि स्टॉकिस्टों की बिकवाली कम आ रही है। ऐसे में इसकी कीमतों में अभी बड़ी गिरावट के आसार नहीं है। हालांकि कनाडा एवं ऑस्ट्रेलिया से आयातित मसूर की आवक हो रही है तथा बंदरगाह पर स्टॉक भी है।

दाल मिलों की खरीद कमजोर होने से आज की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है। नेफेड ने पिछले सप्ताह 6,300 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर के दाम पर चना की निविदा पास की थी, जबकि नवीनतम निविदा 6,202 रुपये प्रति क्विंटल की पास की है, जिससे कीमतों पर दबाव तो है लेकिन उत्पादक राज्यों में चना का बकाया स्टॉक पिछले साल की तुलना में काफी कम बचा हुआ है। उधर चना की नई फसल फरवरी, मार्च में ही आयेगी। त्योहारी सीजन के कारण चना दाल एवं बेसन की मांग अभी बनी रहेगी। ऐसे में इसकी कीमतों में तेजी, मंदी काफी हद तक नेफेड की निविदा के दाम पर निर्भर करेगी।

मूंग की कीमतें स्थिर हो गई। व्यापारियों के अनुसार उत्पादक मंडियों में मूंग की दैनिक आवकों में हाल ही में बढ़ोतरी हुई है, तथा चालू महीने के अंत तक मौसम अनुकूल रहा तो आवक और बढ़ेगी। ऐसे में इसकी कीमतों में हल्की तो नरमी तो आ सकती है, लेकिन अभी बड़ी गिरावट के आसार कम है। खपत का सीजन होने के कारण मूंग दाल की मांग अभी बनी रहेगी। जानकारों के अनुसार आगामी दिनों में मूंग के उत्पादक राज्यों में मानसून कैसा रहता है, इस पर भी तेजी, मंदी निर्भर करेगी।

चेन्नई में उड़द एसक्यू के दाम शाम के सत्र में 250 रुपये कमजोर होकर दाम 9200 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

मुंबई में उड़द एफएक्यू के भाव शाम के सत्र में 50 रुपये तेज होकर दाम 8400 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

सोलापुर में देसी उड़द के दाम घटकर 8,000 से 9,500 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

चेन्नई में लेमन अरहर के दाम 11,200 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।

मुंबई में लेमन अरहर के दाम 50 रुपये बढ़कर भाव 11,250 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

मुंबई में अफ्रीकी देशों से आयातित अरहर की कीमतें कमजोर हुई। सूडान से आयातित अरहर के दाम 100 रुपये घटकर 11,500 से 11,600 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इस दौरान मलावी से आयातित अरहर के भाव 300 रुपये कमजोर होकर 8500 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

दाल मिलों की मांग बढ़ने से दिल्ली में देसी मसूर के भाव 50 रुपये तेज होकर दाम 6775 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

मुंद्रा बंदरगाह पर कनाडा की मसूर के दाम 25 रुपये तेज होकर 6125 से 6150 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। इस दौरान हजिरा बंदरगाह पर कनाडा की मसूर के भाव 25 रुपये बढ़कर 6225 से 6250 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। ऑस्ट्रेलिया की मसूर की कीमतें कंटेनर में 50 रुपये तेज होकर 6600 से 6650 रुपये प्रति क्विंटल हो गई। कनाडा की मसूर की कीमतें कंटेनर में 50 रुपये बढ़कर 6500 से 6550 रुपये प्रति क्विंटल बोली गई।

दिल्ली में राजस्थान लाइन के चना के दाम लगातार दूसरे दिन 125 रुपये कमजोर होकर भाव 6350 से 6375 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इस दौरान मध्य प्रदेश के चना के भाव 150 रुपये घटकर 6350 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

दिल्ली में राजस्थान लाइन की मूंग के भाव 8550 से 8600 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। इस दौरान जयपुर मंडी में मूंग के बिल्टी भाव 50 रुपये तेज होकर 7500 से 8600 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। जलगांव में पुराना समर के दाम घटकर 8700 से 9200 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

चीनी का स्टॉक पर्याप्त मात्रा में मौजूद

नई दिल्ली। केंद्रीय खाद्वय सचिव संजीव चोपड़ा ने कहा कि चीनी का स्टॉक पर्याप्त मात्रा में मौजूद है, तथा चालू सीजन में गन्ने के उत्पादन में कमी नहीं आयेगी। त्योहारी सीजन में चीनी की कीमतों पर सरकार की नजर है तथा चीनी का 85 लाख टन का स्टॉक मौजूद है, जोकि अगले 3.5 महीने की खपत के लिए पर्याप्त है।


केंद्रीय खाद्वय सचिव ने कहा कि अफवाहों के कारण चावल की कीमतें 100 रुपये तेज हुई, जबकि चालू खरीफ में धान की पैदावार ज्यादा होगी।

केंद्र सरकार ने गेहूं पर स्टॉक लिमिट को 3,000 टन से घटाकर 2,000 टन किया। केंद्र सरकार जमाखोरों के लिए खिलाफ कार्यवाही कर रही है।

केंद्र ने गेहूं की स्टॉक सीमा को घटाकर 2,000 टन किया

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने गेहूं पर स्टॉक लिमिट को 3,000 टन से घटाकर 2,000 टन कर दिया है।


केंद्रीय खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव संजीव चोपड़ा ने कहा कि सरकार ने व्यापारियों, थोक विक्रेताओं और बड़ी श्रृंखला के खुदरा विक्रेताओं के लिए गेहूं पर स्टॉक सीमा को 3,000 टन से घटाकर 2,000 टन कर दिया है।

संजीव चोपड़ा ने कहां कि देश में गेहूं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, लेकिन मुझे लगता है कि कुछ तत्व हैं जो गेहूं की कीमतों में कृत्रिम तेजी लाने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहां कि व्यापारियों, थोक विक्रेताओं और बड़ी श्रृंखला के खुदरा विक्रेताओं को अपने स्टॉक को कम करने और संशोधित सीमा में लाने के लिए 12 अक्टूबर तक का समय मिलेगा।

चोपड़ा ने कहां कि यह निर्णय नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज लिमिटेड, एनसीडीईएक्स पर गेहूं की कीमतों में बढ़ोतरी को ध्यान में रखते हुए लिया जा रहा है।

तीन महीने पहले 12 जून को केंद्र सरकार ने गेहूं के व्यापारियों, थोक विक्रेताओं और बड़ी श्रृंखला के खुदरा विक्रेताओं पर मार्च 2024 तक 3,000 टन की स्टॉक सीमा लगाई थी।

गेहूं के दाम लारेंस रोड गुरुवार को तेज होकर 2,565 रुपये प्रति क्विंटल हो जबकि इसकी दैनिक आवक 6,500 बोरियों की हुई।  

चालू तेल वर्ष के पहले 10 महीनों में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 24 फीसदी बढ़ा - उद्योग

नई दिल्ली। चालू तेल वर्ष 2022-23 (नवंबर-22 से अक्टूबर-23) की पहले 10 महीनों नवंबर-22 एवं अगस्त-23 में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात इसके पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 24 फीसदी बढ़कर 14,121,076 टन का हुआ है। जबकि पिछले साल नवंबर से अगस्त के दौरान इनका आयात  11,376,226 टन का हुआ था।


सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एसईए के अनुसार अगस्त में देश में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 33 फीसदी बढ़कर 1,866,123 टन हो गया है, जबकि पिछले साल अगस्त-22 में इनका आयात 1,401,233 टन का ही हुआ था। अगस्त के दौरान खाद्वय तेलों का आयात 1,852,115 टन का एवं अखाद्य तेलों का आयात 14,008 टन का हुआ है।

चालू तेल वर्ष की पहले दस महीनों में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात बढ़कर 141.21 लाख टन को देखते हुए, अक्टूबर 23 में समाप्त होने वाले चालू तेल वर्ष के दौरान इसका कुल आयात बढ़कर 160 से 165 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने का अनुमान है। इससे पहले देश में खाद्वय तेलों का रिकॉर्ड आयात 2016-17 में 151 लाख टन का हुआ था।

देशभर में अगस्त में मानसूनी बारिश की भारी कमी से किसानों, व्यापारी और उद्योग जगत में चिंता पैदा हो गई है। हालांकि, पिछले एक सप्ताह से, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के सोयाबीन उत्पादक क्षेत्रों में बारिश हुई है, जिससे फसल को फायदा होगा। अगस्त में गुजरात में बारिश की कमी के कारण मूंगफली की पैदावार में कमी का आने की आशंका बनी हुई है।

एसईए के अनुसार घरेलू बाजार में खाद्वय तेलों की कीमतें कमजोर बनी रही, हालांकि अगस्त में क्रूड पाम तेल का आयात 8.24 लाख टन का हुआ, जो कि जुलाई के आयात 8.41 लाख टन थोड़ा कम है। अगस्त में आरबीडी पामोलीन तेल का आयात पिछले महीने के 2.17 लाख टन से बढ़कर 2.83 लाख टन का हो गया।

अगस्त 2023 के दौरान पाम उत्पादों का कुल आयात बढ़कर 11.28 लाख टन का हुआ है, जबकि जुलाई 2023 में 10.86 लाख टन का हुआ था। अगस्त में सोयाबीन तेल का आयात पिछले महीने के 3.42 लाख टन से बढ़कर 3.58 लाख टन का हो गया। सूरजमुखी तेल का आयात बढ़कर अगस्त में 3.66 लाख टन हो गया, जबकि इसके पिछले महीने में 3.27 लाख टन का आयात हुआ था।

जुलाई के मुकाबले अगस्त में आयातित खाद्वय तेलों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। अगस्त में भारतीय बंदरगाह पर आरबीडी पामोलिन का भाव बढ़कर 894 डॉलर प्रति टन रह गया, जबकि जुलाई में इसका भाव 917 डॉलर प्रति टन था। इसी तरह से क्रूड पाम तेल का भाव अगस्त में घटकर 924 डॉलर प्रति टन रह गया, जबकि जुलाई में इसका भाव 945 डॉलर प्रति टन था। इस दौरान क्रूड सोयाबीन तेल का भाव जुलाई के 1,086 डॉलर से घटकर अगस्त में भारतीय बंदरगाह पर 1056 डॉलर प्रति टन रह गया। हालांकि क्रूड सनफ्लावर तेल का भाव जुलाई के 1,000 डॉलर प्रति टन से बढ़कर अगस्त में 1,005 डॉलर प्रति टन हो गया। 

मानसूनी बारिश की कमी से महाराष्ट्र में दलहन के साथ मूंगफली की बुआई घटी

नई दिल्ली। चालू मानसूनी सीजन में अगस्त में बारिश सामान्य से कम होने के कारण महाराष्ट्र में चालू खरीफ सीजन में दलहन के साथ ही मूंगफली बुआई में कमी आई है।


भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार चालू मानसूनी सीजन में पहली जून से 11 सितंबर तक महाराष्ट्र में सामान्य के मुकाबले 9 फीसदी बारिश कम हुई है। इस दौरान राज्य में 817.3 मिलीमीटर बारिश हुई है, जबकि सामान्यत: 900 मिलीमीटर बारिश होती है।

राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार दालों की बुआई चालू खरीफ में घटकर 16.15 लाख हेक्टयेर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक बुआई 18.72 लाख हेक्टेयर में हुई थी। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर की बुआई चालू खरीफ में घटकर राज्य में 11.15 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 11.69 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। इसी तरह से मूंग की बुआई चालू खरीफ में 1.81 लाख हेक्टेयर में और उड़द की 2.56 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 2.70 लाख हेक्टेयर में और 3.52 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

मूंगफली की बुआई चालू खरीफ में घटकर 1.43 हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले खरीफ में इसकी बुआई 1.59 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। हालांकि सोयाबीन की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 50.72 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि के 48.96 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। तिलहनी फसलों की कुल बुआई चालू सीजन में 52.31 लाख हेक्टेयर में हुई है, जोकि पिछले साल के 50.85 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

राज्य में कपास की बुआई 42.30 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुआई 42.27 लाख हेक्टेयर में हुई हुई थी।

मक्का की बुआई चालू खरीफ में 9.11 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 8.77 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। हालांकि धान की रोपाई चालू खरीफ में घटकर 15.28 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय 15.47 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

राज्य में चालू खरीफ सीजन कुल फसलों की बुआई 141.08 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 142.65 लाख हेक्टेयर से कम है।

12 सितंबर 2023

ग्राहकी सीमित बनी रहने से अरहर एवं उड़द में मिलाजुला रुख, चना तथा मसूर में सुधार

नई दिल्ली। ग्राहकी सीमित बनी रहने के कारण घरेलू बाजार में सोमवार को उड़द तथा अरहर की कीमतों में मिलाजुला रुख बना रहा जबकि देसी मसूर एवं चना तथा की कीमतों में सुधार आया, जबकि इस दौरान मूंग के दाम इस दौरान स्थिर बने रहे।

चेन्नई में बर्मा की उड़द एसक्यू और एफएक्यू के दाम स्थिर बने रहे। उड़द एफएक्यू और एसक्यू के भाव अगस्त एवं सितंबर शिपमेंट के फसल सीजन 2023 के क्रमश: 980 डॉलर और 1,075 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ पर स्थिर बने रहे।

बर्मा से आयातित उड़द की कीमतें चेन्नई में स्थिर बनी रही, जबकि घरेलू बाजार में इसके भाव में मिलाजुला रुख बना रहा। जानकारों के अनुसार त्योहारी सीजन के कारण उड़द दाल में दक्षिण भारत की मांग अभी बनी रहेगी, जबकि बर्मा में पुरानी उड़द का बकाया स्टॉक कम है, साथ ही बर्मा से उड़द के आयात पड़ते अभी भी महंगे हैं। इसलिए इसकी कीमतों में अभी बड़ी गिरावट के आसार कम है। व्यापारियों के अनुसार हाल ही में उड़द के उत्पादक क्षेत्रों में बारिश हुई है, इससे पछेती फसल को तो फायदा होगा, लेकिन जो फसल पक कर तैयार है, उसकी आवक प्रभावित हो सकती है। गुजरात में 300 से 400 बोरी नई उड़द की आवक हुई तथा भाव 9000 से 9125 रुपये प्रति क्विंटल रहे।

दाल मिलों की खरीद सीमित बनी रहने से अरहर की कीमतों में भी मिलाजुला रुख रहा। जानकारों के अनुसार लेमन अरहर का बकाया स्टॉक कम है, जबकि इसके आयात पड़ते महंगे हैं। पिछले साल सितंबर में अफ्रीका से 92 हजार टन अरहर का आयात हुआ था, लेकिन चालू सितंबर में आयात कम रहने की आशंका है। केंद्र सरकार की सख्ती के साथ ही स्टॉकिस्टों की मुनाफावसूली से हाल ही में अरहर की कीमतों में गिरावट तो आई है, लेकिन हाजिर बाजार में जहां देसी अरहर का स्टॉक भी कम है। आयातक भी दाम घटाकर बेचना नहीं चाहते। इसलिए हाजिर बाजार में अभी इसकी कीमतों में बड़ी गिरावट के आसार नहीं है। घरेलू बाजार में देसी अरहर की आवक दिसंबर में बनेगी। वैसे भी खपत का सीजन होने के कारण अरहर दाल में मांग बनी रहने का अनुमान। स्टॉक लिमिट लगी होने के कारण दाल मिलों के पास भी तय मात्रा में ही अरहर का स्टॉक बचा हुआ है जबकि घरेलू मंडियों में देसी अरहर की आवक पहले की तुलना में कम हो गई है।

देसी मसूर की कीमतों में सुधार, जबकि आयातित के दाम स्थिर बने रहे। केंद्र सरकार द्वारा स्टॉक की जानकारी मांगे जाने से हाल ही में मसूर के दाम कमजोर हुए थे, लेकिन व्यापारी ज्यादा मंदे में नहीं है। खपत का सीजन होने के कारण मसूर दाल में बिहार, बंगाल एवं असम की मांग बनी रहेगी, जबकि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की मंडियों में देसी मसूर की आवक काफी कम हो गई है। किसानों के पास बकाया स्टॉक कम है, जबकि स्टॉकिस्टों की बिकवाली कम आ रही है। हालांकि कनाडा एवं ऑस्ट्रेलिया से आयातित मसूर की आवक हो रही है तथा बंदरगाह पर स्टॉक भी है।

नीचे दाम पर दाल मिलों की खरीद से चना की कीमतों में सुधार आया है। जानकारों के अनुसार नेफेड द्वारा चना की बिक्री बढ़ाने की संभावना से इसकी कीमतों पर पिछले सप्ताह दबाव बना था, लेकिन नेफेड अभी भी उंचे दाम पर ही चना की निविदा बेच रही है। इसलिए इसकी कीमतों में ज्यादा मंदा नहीं आयेगा। उत्पादक राज्यों में चना का बकाया स्टॉक पिछले साल की तुलना में काफी कम बचा हुआ है जबकि चना की नई फसल फरवरी, मार्च में ही आयेगी। त्योहारी सीजन के कारण चना दाल एवं बेसन की मांग अभी बनी रहेगी।

दाल मिलों की सीमित खरीद से मूंग की कीमतें स्थिर बनी रही। व्यापारियों के अनुसार उत्पादक मंडियों में मूंग की दैनिक आवकों में हाल ही में सुधार आया है, तथा चालू महीने के अंत तक मौसम अनुकूल रहा तो आवक और बढ़ेगी। ऐसे में इसकी कीमतों में हल्की तो नरमी तो आ सकती है। हालांकि खपत का सीजन होने के कारण मूंग दाल की मांग अभी बनी रहेगी। इसलिए इसकी कीमतों में अभी बड़ी गिरावट की संभावना कम है।

चेन्नई में उड़द एसक्यू के दाम शाम के सत्र में 50 रुपये तेज होकर भाव 9450 रुपये प्रति क्विंटल हो गए, इस दौरान एफएक्यू के भाव 100 रुपये तेज होकर दाम 8375 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

दिल्ली में उड़द एफएक्यू के भाव 75 बढ़कर 8775 रुपये प्रति क्विंटल हो गए, जबकि उड़द एसक्यू के दाम 9400 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

मुंबई में उड़द एफएक्यू के भाव 25 रुपये कमजोर होकर दाम 8450 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

दिल्ली में लेमन अरहर के दाम 50 रुपये तेज होकर दाम 11,550 से 11,600 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

चेन्नई में लेमन अरहर के दाम 50 रुपये कमजोर होकर भाव 11,200 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

मुंबई में लेमन अरहर के दाम 50 रुपये बढ़कर भाव 11,300 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

मुंबई में अफ्रीकी देशों से आयातित अरहर की कीमतें स्थिर बने रहे। सूडान से आयातित अरहर के दाम 11,800 से 11,900 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। इस दौरान मलावी से आयातित अरहर के भाव 9000 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

दाल मिलों की मांग बढ़ने से दिल्ली में देसी मसूर के भाव बढ़कर 6700 से 6725 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

मुंद्रा बंदरगाह पर कनाडा की मसूर के दाम 6050 से 6100 रुपये प्रति क्विंटल स्थिर हो गए। इस दौरान हजिरा बंदरगाह पर कनाडा की मसूर के भाव 6200 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। ऑस्ट्रेलिया की मसूर की कीमतें कंटेनर में 6600 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गई। कनाडा की मसूर की कीमतें वैसल में 6200 से 6300 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गई। कनाडा की मसूर की कीमतें कंटेनर में 6450 से 6500 रुपये प्रति क्विंटल बोली गई।

दिल्ली में राजस्थान लाइन के चना के दाम 25 रुपये तेज होकर भाव 6500 से 6525 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। इस दौरान मध्य प्रदेश के चना के भाव 25 रुपये बढ़कर 6500 से 6525 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

दिल्ली में राजस्थान लाइन की मूंग के भाव 8850 से 8900 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। इस दौरान जयपुर मंडी में मूंग के बिल्टी भाव 7500 से 8550 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। 

गुजरात में कपास, सोयाबीन, कैस्टर एवं धान के साथ बाजरा की बुआई सामान्य से ज्यादा

नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन में गुजरात में कपास के साथ ही सोयाबीन, कैस्टर सीड एवं धान तथा बाजरा की बुआई सामान्य क्षेत्रफल से ज्यादा हुई है।


राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार 11 सितंबर तक राज्य में खरीफ फसलों की कुल बुआई बढ़कर 84.86 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि सामान्य क्षेत्रफल 85.97 लाख हेक्टेयर का करीब 98.71 फीसदी है। पिछले साल राज्य में इस समय तक 84.16 लाख हेक्टेयर में फसलों की बुआई हुई थी।

भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार राज्य में पहली जून से 11 सितंबर के दौरान सामान्य से 8 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है। हालांकि राज्य में अगस्त में बारिश सामान्य से कम हुई है। पहली जून से 11 सितंबर तक राज्य में 700.2 मिलीमीटर बारिश हुई है, जोकि सामान्य 647 मिलीमीटर से ज्यादा है।

राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार कपास की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 26.79 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में केवल 25.48 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। सामान्य: राज्य में कपास की बुआई 23.60 लाख हेक्टेयर में होती है।

सोयाबीन की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 2.65 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 2.21 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। इस दौरान कैस्टर सीड की बुआई 6.86 लाख हेक्टेयर में, शीशम की 58,044 हेक्टेयर में, ग्वार सीड की 1,03,218 हेक्टेयर में हुई है। पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 6.52 लाख हेक्टेयर में, 72,121 हेक्टेयर में और 1,03,724 हेक्टेयर में हुई थी।

धान की रोपाई चालू खरीफ में बढ़कर 8.71 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि सामान्य 8.41 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। पिछले साल इस समय तक राज्य में धान की रोपाई 8.67 लाख हेक्टेयर में हुई थी। इसी तरह से बाजरा की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 1.97 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 1.84 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। सामान्य राज्य में बाजरा की बुआई 1.77 लाख हेक्टेयर में होती है।    

मोटे अनाजों में मक्का की बुआई 2.82 लाख हेक्टेयर में और ज्वार की 19,673 हेक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 2.87 लाख हेक्टेयर और 18,150 हेक्टेयर में हुई थी।

मूंगफली की बुआई चालू खरीफ में घटकर 16.35 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि के इसकी बुआई 17.09 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। राज्य में मूंगफली की बुआई करीब 18.94 लाख हेक्टेयर में होती है।

दलहनी फसलों में अरहर की बुआई चालू खरीफ सीजन में 2.09 लाख हेक्टेयर में, मूंग की 64,614 हेक्टेयर में और उड़द की 79,265 हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 2.33 लाख हेक्टेयर में 79,850 हेक्टेयर में और 96,758 हेक्टेयर में हो चुकी थी।