नई
दिल्ली। पहली अक्टूबर 2022 से शुरू होने वाले खरीफ विपणन सीजन 2022-23 के
लिए केंद्र सरकार ने केंद्रीय पूल में 518 लाख टन चावल की खरीद का लक्ष्य
तय किया है, जोकि पिछले साल खरीफ सीजन में खरीदे गए 509.82 लाख टन से
ज्यादा है।
केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2022-23 के लिए कॉमन
ग्रेड धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी 2,040 रुपये और ए ग्रेड धान का
एमएसपी 2,060 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ हुआ है।
कृषि
मंत्रालय के अनुसार खरीफ की प्रमुख फसल धान की रोपाई चालू खरीफ में घटकर
367.55 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई हैए जोकि पिछले खरीफ की समान अवधि के
390.99 लाख हेक्टेयर से कम है।
सुधांशु पांडे, सचिव, खाद्य और
सार्वजनिक वितरण विभाग, डीएफपीडी एवं उपभोक्ता मामले और खाद्य और सार्वजनिक
वितरण मंत्रालय ने खरीफ फसलों की खरीद पर चर्चा करने के लिए राज्य के
खाद्य सचिवों और भारतीय खाद्य निगम, एफसीआई के अधिकारियों संग बैठक की
अध्यक्षता की। इसमें खरीफ विपणन सीजन 2022-23 के लिए खाद्यान्नों की खरीद
पर चर्चा की गई।
खाद्य सचिव ने कहा कि न केवल अंतरराष्ट्रीय
बाजरा-2023 वर्ष के कारण बल्कि जलवायु परिवर्तन के कारण भी बाजरा की खरीद
पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। जलवायु परिवर्तन से गेहूं और चावल के
उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और इसके परिणामस्वरूप उनके उत्पादन
में कमी आई है। इसलिए खरीफ विपणन सीजन 2022-23 के दौरान राज्यों द्वारा
13.70 लाख टन बाजरा की खरीद का लक्ष्य तय किया है, जोकि इसके पिछले खरीफ
सीजन में खरीदे गए 6.30 लाख टन से ज्यादा है।
01 सितंबर 2022
खरीफ विपणन सीजन में 518 लाख टन चावल की खरीद का लक्ष्य - खाद्य सचिव
केंद्र, राज्यों को 8 रुपये किलो के डिस्काउंट पर चना दाल देगी, दलहन की खरीद लिमिट भी बढ़ाई
नई
दिल्ली। केंद्र सरकार, राज्य सरकारों को 8 रुपये प्रति किलो के डिस्काउंट
पर चना दाल की सप्लाई करेगी, साथ ही केंद्र सरकार ने किसानों ने अरहर, उड़द
और मसूर की खरीद की मात्रा को भी 25 फीसदी से बढ़ाकर 40 फीसदी कर दिया है।
प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स, सीसीईए
ने प्राइस सपोर्ट स्कीम के तहत खरीदे गए चना के दाल की बिक्री 8 रुपये
प्रति किलो के डिस्काउंट रेट पर करने का फैसला किया है। इसके तहत राज्य
सरकार को 15 लाख टन चना दाल की बिक्री की जायेगी।
इसके अलावा
प्राइस सपोर्ट सिस्टम के तहत अरहर, उड़द और मसूर की खरीद मात्रा को भी 25
फीसदी से बढ़ाकर 40 फीसदी कर दिया है। खरीफ सीजन की दलहन की आवक अगले महीने
बढ़ेगी, तथा इसके तहत केंद्रीय एजेंयों को उड़द एवं अरहर के साथ ही आगामी रबी
सीजन में मसूर की न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर ज्यादा खरीद करनी होगी।
केंद्र सरकार के इस फैसले से राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश
विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं जैसे पीडीएस, मिड-डे मिल योजनाओं आदि में चना
दाल का उपयोग करने में सक्षम होंगे। चालू सीजन में देश में चना का रिकार्ड
उत्पादन हुआ है।
केंद्रीय पूल में चना का करीब 30.55 लाख टन का बकाया स्टॉक बचा हुआ है, जोकि तय मानकों बफर स्टॉक से ज्यादा है।
चना
की कीमतें उत्पादक मंडियों में पहले ही न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी से
नीचे बनी हुई है, तथा केंद्र सरकार के इस फैसले से कीमतों में और भी गिरावट
आने का अनुमान है। लारेंस रोड़ पर बुधवार को मध्य प्रदेश के चना की कीमतों
में 25 रुपये का मंदा आकर भाव 4,825 से 4,850 रुपये प्रति क्विंटल रह गए,
जबकि इस दौरान राजस्थान लाइन के चना के दाम 50 रुपये कमजोर होकर 4,900
रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर आ गए।
गुजरात में कपास का उत्पादन बढ़कर 91.84 लाख गांठ होने का अनुमान, भाव घटे
नई
दिल्ली। चालू खरीफ में बुआई में हुई बढ़ोतरी से प्रमुख उत्पादक राज्य
गुजरात में कपास का उत्पादन बढ़कर 91.84 लाख गांठ, एक गांठ-170 किलो होने का
अनुमान है।
चालू खरीफ में राज्य में तिलहनी फसलों का उत्पादन 54.85 लाख टन का होने का अनुमान है, तथा इनकी बुआई चालू खरीफ में 25.64 लाख हेक्टेयर में हुई थी। खरीफ तिलहन की प्रमुख फसल मूंगफली का उत्पादन चालू खरीफ में 39.17 लाख टन, कैस्टर सीड का 12.12 लाख टन और सोयाबीन का 3.22 लाख टन होने का अनुमान है।
पहले आरंभिक अनुमान के अनुसार राज्य में खरीफ दलहन का उत्पादन 3.54 लाख टन होने का अनुमान है। अरहर का उत्पादन राज्य में 2.50 लाख टन होने का अनुमान है।
अनाजों का उत्पादन राज्य में चालू खरीफ में 29.94 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि इनकी बुआई 13.49 लाख हेक्टेयर में हुई है। चावल का उत्पादन 19.81 लाख टन, बाजरा का 3.11 लाख टन और मक्का का 4.64 लाख टन का उत्पादन होने का अनुमान है।
चालू खरीफ में राज्य में ग्वार सीड का उत्पादन 60 हजार टन होने का अनुमान है।
मानसूनी बारिश की कमी से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखढ़ और पश्चिम बंगाल में धान की रोपाई घटी
नई
दिल्ली। मानसूनी सीजन के पहले तीन महीने बीतने को हैं, लेकिन अभी भी उत्तर
प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में बारिश सामान्य से कम होने के
कारण सूखे जैसे हालात बने हुए हैं, जिसका असर इन राज्यों में धान की रोपाई
पर पड़ा है।
जानकारों के अनुसर इन में बारिश की कमी के कारण धान की
रोपाई तो कम हुई है, साथ ही रोपाई हो चुकी फसल को भी नुकसान होने का डर है।
पहली से 27 अगस्त के दौरान जहां उत्तर प्रदेश में बारिश सामान्य की तुलना
में 44 फीसदी कम हुई है, वहीं बिहार में चालू मानसूनी सीजन में बारिश
सामान्य की तुलना में 42 फीसदी कम, झारखंड में 27 फीसदी तो पश्चिम बंगाल
में 19 फीसदी कम हुई है।
उत्तर प्रदेश में चालू खरीफ में 26 अगस्त
धान की रोपाई 57.62 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जोकि पिछले साल की समान
अवधि के 60.25 लाख हेक्टेयर से कम है। इस दौरान पश्चिमी बंगाल में धान की
रोपाई केवल 36.93 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले खरीफ सीजन की
समान अवधि के 41.55 लाख हेक्टेयर से कम है।
बिहार में चालू खरीफ में
26 अगस्त तक धान की रोपाई केवल 29.92 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जोकि
पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि के 32.32 लाख हेक्टेयर से कम है। झारखंड में
चालू खरीफ में धान की रोपाई घटकर केवल 6.95 लाख हेक्टेयर में ही हुई है,
जबकि पिछले खरीफ में इस समय तक राज्य में 17.46 लाख हेक्टेयर में बुआई हो
चुकी थी।
इसके अलावा अन्य धान उत्पादक राज्यों छत्तीसगढ़, हरियाणा,
मध्य प्रदेश और ओडिशा में भी धान की रोपाई पिछले साल की तुलना में पिछड़ रही
है, जिसका असर चालू खरीफ में धान उत्पादन पर पड़ने की आशंका है।
चालू
खरीफ सीजन में देशभर के राज्यों में धान की रोपाई 6 फीसदी पिछड़ कर 26
अगस्त तक देशभर में 367.55 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल
इस समय तक इसकी रोपाई 390.99 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।
भारतीय
मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार चालू मानसूनी सीजन में पहली जून से 27 अगस्त
तक देशभर में सामान्य की तुलना में सात फीसदी ज्यादा बारिश हुई है लेकिन
अगर सब डिवीजनों के आधार पर देखें तो देशभर के 19 फीसदी हिस्से में बारिश
सामान्य की तुलना में कम हुई है, जिसका असर धान की रोपाई पर पड़ा है।
कृषि
मंत्रालय के चौथे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2021-22 में खरीफ सीजन
में चावल का उत्पादन 11.17 करोड़ टन का हुआ था, जोकि इसके पिछले साल के
10.52 करोड़ टन से ज्यादा था।
चालू खरीफ में धान एवं दलहन के साथ ही तिलहन की बुआई घटी, मोटे अनाजों की बढ़ी
नई दिल्ली। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में देशभर के राज्यों में 26 जुलाई 2022 तक फसलों की बुआई घटकर 1,045.14 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई 1,061.92 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।
कृषि मंत्रालय के अनुसार खरीफ की प्रमुख फसल धान की रोपाई चालू खरीफ में घटकर 367.55 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जोकि पिछले खरीफ की समान अवधि के 390.99 लाख हेक्टेयर से कम है।
दलहनी फसलों की कुल बुआई चालू खरीफ में 4.96 फीसदी घटकर 127.71 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 134.37 लाख हेक्टेयर से कम है। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर की बुआई चालू खरीफ में 44.087 लाख हेक्टेयर में, उड़द की 36.15 लाख हेक्टेयर में और मूंग की 32.69 लाख हेक्टेयर में ही हुई है। पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमशः 47.20 लाख हेक्टेयर में, 37.91 लाख हेक्टेयर में और 34.14 लाख हेक्टेयर में हुई थी।
अन्य दालों की बुआई चालू खरीफ में 14.58 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले खरीफ सीजन में इस समय तक 14.66 लाख हेक्टेयर में इनकी बुआई हो चुकी थी।
मोटे अनाजों की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 176.33 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 169.39 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। मोटे अनाजों में ज्वार की बुआई 13.71 लाख हेक्टेयर में और बाजरा की 70.12 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल समय तक इनकी बुआई क्रमशः 14.33 लाख हेक्टेयर और 63.19 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई थी। इसके अलावा मक्का की बुआई चालू खरीफ में 80.85 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 79.06 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। रागी की बुआई चालू खरीफ में 6.22 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि खरीफ में इसकी बुआई 7.73 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।
तिलहनी फसलों की बुआई चालू खरीफ में घटकर 186.48 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 188.62 लाख हेक्टेयर से कम है। तिलहन में मूंगफली की बुवाई चालू खरीफ में 44.75 लाख हेक्टेयर में, सोयाबीन की 119.83 लाख हेक्टेयर में और सनफ्लावर की 1.86 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इनकी बुआई क्रमशः 48.38 लाख हेक्टेयर में, 120.55 लाख हेक्टेयर में और 1.44 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई थी।
शीशम सीड की बुवाई चालू खरीफ में 12.69 लाख हेक्टेयर में और कैस्टर सीड की 6.52 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले खरीफ में इनकी बुआई क्रमशः 12.65 लाख हेक्टेयर और 5.16 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई थी।
कपास की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 124.55 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 116.91 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी।
गन्ने की बुआई चालू खरीफ में 55.59 लाख हेक्टेयर में हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 54.70 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।
मानसूनी बारिश अच्छी होने के बावजूद भी आंध्र प्रदेश में दलहन एवं तिलहन की बुआई कम
नई
दिल्ली। चालू मानसूनी सीजन में सामान्य से ज्यादा बारिश होने के बावजूद भी
आंध्रप्रदेश में खरीफ दलहन के साथ ही तिलहन की बुआई पिछड़ रही है, जबकि
कपास के साथ धान की रेपाई बढ़ी है।
भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के
अनुसार चालू मानसूनी सीजन में पहली जून से 25 अगस्त तक राज्य में सामान्य
की तुलना में 10 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है। इस दौरान सामान्यतः राज्य में
341.5 मिलीमीटर बारिश होती है, जबकि चालू सीजन में 374.3 मिलीमीटर बारिश
हुई है।
राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार दलहन की बुआई चालू खरीफ
में राज्य में 24 अगस्त तक केवल 1.66 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जोकि
पिछले साल की समान अवधि के 2.03 लाख हेक्टेयर से कम है। राज्य सरकार ने
चालू खरीफ में दलहन की बुआई का लक्ष्य 3.55 लाख हेक्टेयर का तय किया है।
इसी
तरह से तिलहनी फसलों की बुआई चालू खरीफ में राज्य में 5.82 लाख हेक्टेयर
में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 6.23 लाख हेक्टेयर से कम
है। राज्य में खरीफ तिलहन की बुआई का लक्ष्य 7.73 लाख हेक्टेयर है। खरीफ
तिलहन की प्रमुख फसल मूंगफली की बुआई चालू खरीफ में घटकर 5.25 लाख हेक्टेयर
में ही हो पाई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 5.87 लाख हेक्टेयर से
कम है।
कपास की बुआई चालू खरीफ में राज्य में बढ़कर 5.72 लाख
हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले खरीफ की समान अवधि में इसकी बुआई 4.46
लाख हेक्टेयर में ही हो पाई थी। राज्य में चालू खरीफ में कपास की बुआई का
लक्ष्य 6.15 लाख हेक्टेयर तय किया गया है।
धान की रोपाई चालू खरीफ
सीजन में बढ़कर 10.69 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान
अवधि के 10.27 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। राज्य के कृषि निदेशालय ने धान
की रोपाई का लक्ष्य 16.30 लाख हेक्टेयर तय किया हुआ है।
उत्तर भारत के राज्यों में नई कपास की आवकों में सुधार, उत्पादन अनुमान ज्यादा
नई
दिल्ली। हरियाणा के बाद राजस्थान की मंडियों में भी नई कपास की आवकों में
बढ़ोतरी हुई, तथा मौसम अनुकूल रहा तो मध्य सितंबर तक उत्तर भारत के राज्यों
हरियाणा, राजस्थान के साथ ही पंजाब में भी नई फसल की आवक बढेगी़। इसलिए
आगामी दिनों में इन राज्योें की मंडियों में कॉटन की कीमतों में नरमी आने
का अनुमान है। उत्तर भारत के राज्यों में बुधवार को नई कपास की आवक 700
गांठ की हुई, जबकि मंगलवार को 500 गांठ की आवक हुई थी।
हरियाणा की
होडल एवं पलवल लाइन के अलावा हिसार की बरवाला और फतेहाबाद की भूना मंडी में
नई कपास की आवक शुरू हो चुकी है। राजस्थान की अलवर लाईन की कामा आदि
मंडियों में भी नई कपास की शुरूआती आवक शुरू हो गई है। मौसम साफ रहा तो
सितंबर के आरंभ में राजस्थान एवं पंजाब की मंडियों में भी नई कपास की आवक
बढ़ेगी। इसलिए स्पिनिंग मिलें मौजूदा भाव पर कॉटन की खरीद केवल जरुरत के
हिसाब से ही कर रही हैं। वैसे भी घरेलू बाजार में हाल ही जिस अनुपात में
कॉटन के दाम तेज हुए, उसके आधार पर धागे के दाम नहीं बढ़ पाये। इसलिए
स्पिनिंग मिलों को पड़ते भी नहीं लग रहे हैं।
उत्तर भारत के राज्यों
में पिछले दो दिनों में कॉटन की कीमतों में 300 से 400 रुपये प्रति मन की
गिरावट आ चुकी है तथा आगामी दिनों में भाव में और भी नरमी आने का अनुमान
है। बुधवार को पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव 9900 से 10,200 रुपये
प्रति रह गए। इस दौरान हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के 9,500 से
9,900 रुपये प्रति मन रह गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी
के 10,000 से 10,200 रुपये प्रति मन रह गए।
राजस्थान में चालू खरीफ में कपास की बुआई बढ़कर 6.53 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 6.29 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।
इंडियन कॉटन एसोसिएशन, आईसीए के अनुसार उत्तर भारत के राज्यों में चालू सीजन में 60.05 लाख गांठ, एक गांठ-170 किलो कॉटन के उत्पादन का अनुमान है, जोकि पिछले साल के 48.55 लाख गांठ से ज्यादा है।
चालू खरीफ में पंजाब में कपास के उत्पादन का अनुमान 7.32 लाख गांठ, हरियाणा में 19.65 लाख गांठ, ऊपरी राजस्थान में 20.88 लाख गांठ और लवर राजस्थान में 12.20 लाख गांठ के उत्पादन का अनुमान है। पिछले साल इन राज्यों में क्रमशः 7.21 लाख गांठ, 15.11 लाख गांठ, 16.37 लाख गांठ और 9.86 लाख गांठ की आवक हुई थी।
