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18 अगस्त 2022

जुलाई में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 24 फीसदी बढ़ा

नई दिल्ली। जुलाई में खाद्वय तेलों के साथ ही अखाद्वय तेलों का आयात 24 फीसदी बढ़कर 1,214,353 टन का हो गया, जबकि पिछले साल जुलाई में इनका आयात केवल 980,624 टन का ही हुआ था।

सॉल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन आफ इंडिया, एसईए के अनुसार चालू तेल वर्ष नवंबर -21 से जुलाई-22 के 9 महीनों के दौरान खाद्वय तेलों के साथ ही अखाद्वय तेलों का आयात 3.3 फीसदी बढ़कर 9,974,993 टन का हुआ है, जबकि पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में इनका आयात 9,654,636 टन का हुआ था।

एसईए के अनुसार घरेलू बाजार में पिछले दो महीनों में खाद्वय तेलों की कीमतों में गिरावट आई है। आरबीडी पामोलिन की थोक कीतमों में इस दौरान जहां 25,000 रुपये प्रति टन से अधिक की कमी आई, वहीं रिफाइंड सोयाबीन तेल के दाम 24,000 रुपये प्रति टन और सूरजमुखी तेल के भाव 20,000 रुपये प्रति टन की गिरावट आई।

इंडोनेशिया सरकार द्वारा बढ़ती इन्वेंट्री को कम करने के लिए उठाये जा रहे कदमों से विश्व बाजार के साथ ही घरेलू बाजार में खाद्वय तेलों की कीमतों में गिरावट आई है। इंडोनेशियाई ने क्रूड पाम तेल पर निर्यात कर को 680 डॉलर प्रति टन के संदर्भ मूल्य पर लागू किया, जबकि इससे पहले यह 750 डॉलर प्रति टन था।

10 अगस्त 2022

गुजरात में कपास की बुआई बढ़कर तय लक्ष्य से ज्यादा, मूंगफली की कम

नई दिल्ली। चालू सीजन में कपास की कीमतें रिकार्ड स्तर पर पहुंचने के कारण गुजरात के किसानों ने कपास की बुआई ज्यादा की है। राज्य में पहली अगस्त तक इसकी बुआई बढ़कर 25.04 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि तय लक्ष्य 25 लाख हेक्टयेर से भी ज्यादा है। पिछले साल राज्य में इस समय तक केवल 22.22 लाख हेक्टेयर में ही इसकी बुआई हो पाई थी।

राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार पहली अगस्त तक राज्य में खरीफ तिलहन की प्रमुख फसल मूंगफली की बुआई 16.72 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 18.93 लाख हेक्टेयर से कम है। अन्य तिलहन में शीशम सीड, केस्टर एवं सोयाबीन की बुआई चालू खरीफ में क्रमशः 47,063 हेक्टेयर में, 1.47 लाख हेक्टेयर में और 2.11 लाख हेक्टेयर में ही हुई है। पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमशः 79,055 हेक्टेयर में, 1.02 लाख हेक्टेयर में और 2.19 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

तिलहनी फसलों की कुल बुआई चालू खरीफ में राज्य में अभी तक केवल 20.78 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 22.96 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।  

दालों की बुआई चालू खरीफ सीजन में पहली अगस्त तक केवल 3.33 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 4.35 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर की बुआई चालू खरीफ में घटकर 1.87 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इसकी बुआई 2.12 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। उड़द की बुआई केवल 74,579 हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 1.40 लाख हेक्टयेर में बुआई हो चुकी थी।

धान, ज्वार, मक्का और बाजरा की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 11.44 लाख हेक्टेयर हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई 10.72 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। हालांकि धान की रोपाई बढ़कर 6.67 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 6.29 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। बाजरा की बुआई राज्य में 1.75 लाख हेक्टेयर में तथा मक्का की बुआई 2.81 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमशः 1.36 लाख हेक्टेयर और 2.87 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

केंद्र सरकार ने गन्ने का एफआरपी 15 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाया

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पहली अक्टूबर 2022 से शुरू होने वाले पेराई सीजन 2022-23 के लिए गन्ने के फेयर एंड रिम्यूनरेटिव प्राइस, एफआरपी में 15 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतर कर भाव 315 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को कैबिनेट और कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स, सीसीईए की बैठक में इस पर फैसला लिया गया।

पिछले गन्ना पेराई सीजन 2021-22 के लिए गन्ने का एफआरपी 290 रुपये प्रति क्विंटल था तथा पिछले गन्ना पेराई सीजन में इसमें केवल पांच रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई थी।

चालू खरीफ सीजन में देशभर में गन्ने की बुआई 29 जुलाई तक बढ़कर 54.51 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इसकी बुआई 54.42 लाख हेक्टयेर में ही हो पाई थी।

इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन, इस्मा ने हाल ही में गन्ना पेराई सीजन 2022-23 के  दौरान देश में 355 लाख टन चीनी के उत्पादन का अनुमान जारी किया था, जोकि चालू पेराई सीजन के उत्पादन अनुमान 360 लाख टन से कम है।

इथेनॉल उत्पादन के लिए अगर गन्ने का उपयोग नहीं होता, तो कुल चीनी उत्पादन पेराई सीजन 2022-23 में 399.97 लाख टन से अधिक होने का अनुमान है।

गन्ना पेराई सीजन 2022-23 में वार्षिक घरेलू मांग लगभग 275 लाख टन होने का अनुमान है, जिसके बाद निर्यात के लिए लगभग 80 लाख टन चीनी बचेगी।

हाजिर में स्टॉक कम होने से कॉटन के भाव तेज, हरियाणा में नई कपास की आवक शुरू

नई दिल्ली। हाजिर में बकाया स्टॉक कम होने के कारण गुरूवार को कॉटन की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। अहमदाबाद में शंकर 6 किस्म की कॉटन के दाम 500 रुपये तेज होकर भाव 93,000 से 93,500 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए।

हरियाणा की होडल और पलवल मंडियों में नई कपास की करीब 100 गांठ, एक गांठ 170 किलो की आवक शुरू हो गई है, तथा मौसम साफ रहा तो चालू महीने के अंत तक आवक बढ़ेगी। इन मंडियों में नई कपास 8,000 से 9,200 रुपये प्रति क्विंटल क्वालिटीनुसार बिक रही है। चालू महीने के मध्य बाद राजस्थान की अलवर और खैरथल लाइन में भी अगेती कपास की आवक शुरू होने की उम्मीद है।

व्यापारियों के अनुसार घरेलू वायदा कारोबार में भाव तेज होने के साथ ही कॉटन की बैलेंश सीट टाईट होने के कारण जिनर्स की गांठों में बिकवाली कम आ रही है, जिससे कॉटन के भाव तेज बने हुए हैं। हालांकि राज्य की स्पिनिंग मिलें इस समय केवल जरुरत के हिसाब से कॉटन की खरीद कर रही है क्योंकि हाल ही में जिस अनुपात में कॉटन की कीमतें बढ़ी हैं, उसके हिसाब से यार्न के दाम नहीं बढ़ पाये। इसलिए कॉटन की मौजूदा कीमतों में मिलों को पड़ते नहीं लग रहे हैं। उधर स्पिनिंग मिलों के पास कॉटन का बकाया स्टॉक पिछले साल की तुलना में कम है तथा प्रमुख उत्पादक राज्यों गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक और मध्य प्रदेश की की मंडियों में नई कपास सितंबर, अक्टूबर में ही आयेगी। इसलिए हाजिर बाजार में में अभी कॉटन की कीमतों में बड़ी गिरावट के आसार नहीं है।

चालू खरीफ में प्रमुख उत्पादक राज्यों गुजरात और महाराष्ट्र में कपास की बुआई बढ़ी है, तथा एकाध क्षेत्र को छोड़ दे तो फसल अभी तक अच्छी स्थिति है। हालांकि सितंबर अंत तक उत्पादक राज्यों में मौसम कैसा रहता है, इस पर उत्पादन अनुमान निर्भर करेगा। जानकारों का मानना है कि मौसम अनुकूल रहा तो चालू सीजन में कपास का उत्पादन बढ़कर 400 गांठ से भी ज्यादा होने का अनुमान है।

कपास की बुआई 6.71 फीसदी बढ़कर 121 लाख हेक्टेयर के पार

नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन में 5 अगस्त तक देशभर के राज्यों में कपास की बुआई 6.71 फीसदी बढ़कर 121.12 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुआई 113.50 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई थी।

उत्तर भारत के राज्यों पंजाब और हरियाणा में हालांकि समय पर नहरी पानी एवं बिजली आपूर्ति की कमी के कारण कपास की बुआई घटकर क्रमशः 2.48 और 6.50 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इन राज्यों में क्रमशः 2.54 और 6.88 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी।

राजस्थान में जरूर चालू खरीफ में कपास की बुआई बढ़कर 6.47 लाख हेक्टेयर में हो चुकी हैए जोकि पिछले साल की समान अवधि के 5.99 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

गुजरात में चालू खरीफ में कपास की बुआई बढ़कर 25.04 लाख हेक्टेयर में और महाराष्ट्र में 41.71 लाख हेक्टेयर मेें हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इन राज्यों में क्रमशः 22.22 और 38.74 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। जानकारों के अनुसार इन राज्यों में जहां जून में सामान्य की तुलना में कम बारिश हुई थी, वहीं जुलाई में भारी बारिश से कई क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है, जिससे महाराष्ट्र की नागपुर लाईन में कॉटन को नुकसान की आशंका है।

मध्य प्रदेश में चालू खरीफ में कपास की बुआई घटकर 5.00 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इसकी बुआई 6 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

दक्षिण भारत के राज्यों तेलंगाना में कपास की बुआई घटकर 18.38 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले खरीफ की समान अवधि में इसकी बुआई 20.17 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

आंध्र प्रदेश में चालू खरीफ में कपास की बुआई 4.67 लाख हेक्टेयर में, कर्नाटक में 7.39 लाख हेक्टेयर में और तमिलनाडु में 0.12 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी है, जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इन राज्यों में क्रमशः 3.56 लाख हेक्टेयर में, 5.06 लाख हेक्टेयर में और 0.06 हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी।

चालू खरीफ में ओडिशा में कपास की बुआई 2.08 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 1.88 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

स्टॉकिस्टों की मुनाफावसूली से अरहर और उड़द में गिरावट

नई दिल्ली। दाल मिलों की मांग कमजोर होने के साथ ही स्टॉकिस्टों की बिकवाली बढ़ने से मंगलवार को अरहर के साथ ही उड़द की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि चना के भाव में सुधार आया। मसूर की कीमतों में इस दौरान मिलाजुला रुख बना रहा।


व्यापारियों के अनुसार बढ़ी हुई कीमतों में दालों में ग्राहकी कमजोर जरुर हुई है, लेकिन लेमन अरहर के साथ ही उड़द एफएक्यू और एसक्यू के आयात पड़ते अभी भी महंगे हैं, इसलिए अरहर और उड़द की कीमतों में हल्की नरमी तो आ सकती है, लेकिन अभी बड़ी गिरावट के आसार कम है।

खपत का सीजन होने के कारण चना दाल और बेसन में मांग बनी रहने का अनुमान है, इसलिए अच्छी क्वालिटी के चना के भाव में और भी सुधार आने का अनुमान है। जानकारों के अनुसार उत्पादक मंडियों में अच्छी क्वालिटी के चना की आवक कम हो रही है। हालांकि नेफेड के पास चना का स्टॉक अच्छा है, तथा आगामी दिनों में नेफेड की बिकवाली शुरू हो सकती है।

देसी मसूर की आवक पहले की तुलना में मंडियों में कम हो रही है, जबकि कनाडा से आयातित मसूर के दाम नीचे बने हुए हैं। इसलिए मसूर की कीमतों में अभी तेजी के आसार नहीं है। मसूर दाल में ग्राहकी सामान्य की तुलना में कमजोर है।

मध्य प्रदेश से मूंग की एमएसपी पर खरीद तो शुरू हो गई है, लेकिन तो खरीद कुछेक केंद्रों पर ही शुरू हुई है, दूसरा खरीद भी सीमित मात्रा में हो रही है। उधर पंजाब में मूंग की खरीद सरकार नहीं कर रही है। मौसम अनुकूल रहा तो चालू महीने के अंत तक राजस्थान की मंडियों में नई मूंग की आवक शुरू हो जायेगी। अतः मूंग की कीमतों में बड़ी तेजी मानकर व्यापार नहीं करना चाहिए।

भारतीय मौसम विभाग, पिछले 48 घंटों के दौरान महाराष्ट्र और कर्नाटक के साथ ही गुजरात और पश्चिमी राजस्थान में भारी बारिश हुई है, जिसका असर खरीफ फसलों पर पड़ने का डर है।

सूत्रों के अनुसार बर्मा में लेमन अरहर के दाम 950 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ पर स्थिर बने हुए हैं। 8 अगस्त को इसकी कीमतों में 20 डॉलर प्रति टन की तेजी आई थी,  भारतीय आयातकों ने आठ अगस्त को करीब 100 केंटनर के आयात सौदे किए थे। बर्मा से अरहर और उड़द का वैसल 15 अगस्त को चेन्नई के लिए लोड होने की उम्मीद है।

बर्मा में उड़द के दाम आज पांच से दस डॉलर कमजोर होकर एफएक्यू और एसक्यू के भाव क्रमशः 895 डॉलर और 1,040 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ रह गए। हालांकि इन भाव में कोई व्यापार नहीं हुआ। जानकारों के अनुसार बर्मा में डड़द का करीब 3.50 लाख टन का और लेमन अरहर का 1.50 लाख टन का स्टॉक बचा हुआ है।

दिल्ली में बर्मा की लेमन अरहर के भाव में 100 रुपये की गिरावट आकर दाम 7650 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

चेन्नई में लेमन अरहर के भाव 50 रुपये घटकर दाम 7550 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

मुंबई में बर्मा की लेमन अरहर में मिलों की मांग कमजोर होने से भाव 100 रुपये कमजोर होकर 7500 से 7550 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

इस दौरान अफ्रीकी देशों से आयातित अरहर की कीमतों में भी गिरावट आई। तंजानिया की अरुषा अरहर के भाव 50 रुपये कमजोर होकर 6100 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। मोजाम्बिक लाइन की गजरी अरहर की कीमतें 50 रुपये घटकर 6000 रुपये प्रति क्विंटल रह गई। मलावी अरहर के दाम 50 रुपये घटकर 5450 रुपये और सूडान की अरहर के दाम 100 रुपये घटकर 8000 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

दिल्ली में उड़द एफएक्यू और एसक्यू के भाव में 50-50 रुपये का मंदा आकर भाव क्रमशः 7,650 रुपये और 8,700 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

मुंबई में उड़द एफएक्यू के भाव 7,450 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

चेन्नई में उड़द एसक्यू हाजिर डिलीवरी के दाम 150 रुपये कमजोर होकर 8,350 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

दिल्ली में मध्य प्रदेश की मसूर की कीमतों में 50 रुपये की तेजी आकर भाव 7000 रुपये प्रति क्विंटल हो गए, जबकि कनाडा की मसूर के दाम 25 रुपये कमजोर होकर 6675 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

इंदौर में मसूर के बिल्टी भाव 50 रुपये तेज होकर 6,675 से 6,700 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

इंदौर मंडी में नई मूंग के भाव 6,200 से 6,700 रुपये एवं पुरानी के भाव 5,400 से 6,100 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।  

दिल्ली में चना की कीमतों में 25 रुपये की तेजी आकर राजस्थान लाइन के चना के भाव 5,050 रुपये और मध्य प्रदेश के चना के दाम 4,975 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

चालू खरीफ में धान की रोपाई 12.68 फीसदी पीछे, चावल उत्पादन घटने का अनुमान

नई दिल्ली। मानसूनी सीजन के पहले सवा दो महीने बीतने को हैं, लेकिन अभी देशभर के 17 फीसदी हिस्से में बारिश सामान्य की तुलना में काफी कम हुई है, जिसका असर धान की रोपाई पर पड़ा है। चालू खरीफ में धान की रोपाई 12.68 फीसदी पिछड़कर 274.29 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है। इसका असर चालू खरीफ में चावल के उत्पादन पर पड़ने की आशंका है।

भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार पहली जून से 9 अगस्त तक देशभर में सामान्य से 7 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है, लेकिन इस दौरान पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सामान्य की तुलना में क्रमशः 44 और 37 फीसदी बारिश कम हुई है। इसी तरह से बिहार में इस दौरान सामान्य से 35 फीसदी कम, झारखंड में 48 फीसदी कम और पश्चिम बंगाल में 46 फीसदी कम बारिश हुई है।

कृषि मंत्रालय के अनुसार देशभर के राज्यों में 5 अगस्त तक धान की रोपाई केवल 274.29 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 314.13 लाख हेक्टेयर से 12.68 फीसदी कम है।

चालू खरीफ में बिहार में धान की रोपाई घटकर 23.29 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 28.14 लाख हेक्टेयर से कम है। इसी तरह से झारखंड में चालू खरीफ में केवल 3.09 लाख हेक्टेयर में ही धान रोपा गया है जबकि पिछले खरीफ में इस समय तक 12.43 लाख हेक्टेयर में इसकी रोपाई हो चुकी थी।

उत्तर प्रदेश में चालू खरीफ में धान की रोपाई अभी तक केवल 53.17 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 56.99 लाख हेक्टेयर से कम है। पश्चिम बंगाल में चालू खरीफ में पांच अगस्त तक केवल 17.47 लाख हेक्टेयर में ही धान की रोपाई हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 29.75 लाख हेक्टेयर की तुलना में कम है।

आंध्रप्रदेश में चालू खरीफ में धान की रोपाई 6.66 लाख हेक्टेयर में, असम में 14.40 लाख हेक्टेयर में और छत्तीसगढ़ में 27.54 लाख हेक्टेयर में हुई है। पिछले खरीफ की समान अवधि में इन राज्यों में क्रमशः 6.53 लाख हेक्टेयर में, 13.76 लाख हेक्टेयर में और 31.64 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

हरियाणा में चालू खरीफ में धान की रोपाई 12.40 लाख हेक्टेयर में और पंजाब में 30.85 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इन राज्यों में क्रमशः 12.82 लाख हेक्टेयर में और 30.33 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी।

मध्य प्रदेश में चालू खरीफ में धान की रोपाई 22.65 लाख हेक्टेयर में, महाराष्ट्र में 12.70 लाख हेक्टेयर में और ओडिशा में 16.41 लाख हेक्टेयर में तथा तेलंगाना में 7.32 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले खरीफ की समान अवधि में इन राज्यों में क्रमशः 26.37 लाख हेक्टेयर में, 10.21 लाख हेक्टेयर में, 19.97 लाख हेक्टेयर में और 10.21 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।