दिल्ली। अच्छी बारिश के बावजूद भी चालू खरीफ सीजन में कर्नाटक में 22
जुलाई तक मोटे अनाजों के साथ ही दलहन एवं तिलहन की बुआई पिछड़ रही है, जबकि
कपास की बुआई में जरुर बढ़ोतरी हुई है।
भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार राज्य में पहली जून से 27 जुलाई तक सामान्य की तुलना में 107 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है।
राज्य
के कृषि निदेशालय के अनुसार चालू खरीफ में राज्य में दलहनी फसलों की बुआई
अभी तक केवल 16.94 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जोकि पिछले साल की समान
अवधि के 18.31 लाख हेक्टेयर से कम है। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर की
बुआई चालू खरीफ में 11.49 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल
की समान अवधि में 12.73 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। मूंग की बुआई
राज्य में चालू खरीफ में 3.88 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जोकि पिछले
साल की समान अवधि के 3.93 लाख हेक्टेयर से कम है।
तिलहनी फसलों की
बुआई चालू खरीफ में राज्य में 7.83 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले
साल इस समय तक राज्य में इनकी बुआई 8.67 लाख हेक्टयेर में हो चुकी थी।
खरीफ तिलहन की प्रमुख फसल सोयाबीन की बुआई चालू खरीफ में राज्य में बढ़कर
4.07 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 3.78 लाख
हेक्टेयर में बुआई हुई थी। मूंगफली की बुआई चालू खरीफ में 2.14 लाख
हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस सयम तक इसकी बुआई 3.66 लाख
हेक्टेयर में हो चुकी थी। सनफ्लावर की बुआई चालू खरीफ में 1.40 लाख
हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 95 हजार हेक्टेयर
से ज्यादा है।
धान, ज्वार, बाजरा एवं मक्का तथा रागी की बुआई चालू
खरीफ में 17.17 हेक्टेयर में ही र्हुइ है जबकि पिछले साल की समान अवधि में
इनकी बुआई 20.33 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। धान की रोपाई चालू सीजन में
2.44 हेक्टेयर में और मक्का की 12.33 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि
पिछले खरीफ में इस समय तक इनकी बुआई क्रमशः 2.82 लाख हेक्टेयर और 12.54 लाख
हेक्टयेर में हो चुकी थी।
कपास की बुआई चालू खरीफ में राज्य में
बढ़कर 6.59 लाख हेक्टेयर हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई
केवल 5.06 लाख हेक्टयेर में ही हुई थी। कपास की बुआई का लक्ष्य 7.28 लाख
हेक्टेयर तय किया गया है।
30 जुलाई 2022
अच्छे मानसून के बाद भी कर्नाटक में मोटे अनाज, दलहन एवं तिलहन की बुआई पिछे, कपास की आगे
अच्छी बारिश से राजस्थान में खरीफ फसलों की बुआई तय लक्ष्य के 86 फीसदी के करीब
नई
दिल्ली। जून के साथ जुलाई में हुई अच्छी बारिश से राजस्थान में खरीफ फसलों
की कुल बुआई तय लक्ष्य के 85.63 फीसदी तक पूरी हो चुकी हैं। राज्य के कृषि
निदेशालय के अनुसार चालू खरीफ में राज्य में 164.17 लाख हेक्टेयर में खरीफ
फसलों की बुआई का लक्ष्य तय किया था, जबकि 25 जुलाई तक राज्य में 140.57
लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी है। पिछले साल इस समय तक राज्य में केवल
80.94 लाख हेक्टेयर में ही फसलों की बुआई हो पाई थी।
चालू खरीफ में
राज्य में मोटे अनाजों की बुआई 56.73 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि
इनकी बुआई का लक्ष्य 61.67 लाख हेक्टेयर का तय किया गया है। पिछले साल इस
समय तक इनकी बुआई केवल 32.19 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई थी। धान की रोपाई
राज्य में 1.70 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि तय लक्ष्य 2.10 लाख
हेक्टेयर की 81.13 फीसदी है। इसी तरह से ज्वार की बुआई 5.91 लाख हेक्टेयर
में बाजरा की 40.43 लाख हेक्टेयर में और मक्का की 8.65 लाख हेक्टेयर में हो
चुकी है, जबकि राज्य सरकार ने चालू खरीफ में इनकी बुआई का लक्ष्य क्रमशः
6.10 लाख हेक्टेयर, 44 लाख हेक्टेयर और 9.40 लाख हेक्टेयर तय किया हुआ है।
दालों
की बुआई चालू खरीफ में राज्य में बढ़कर 30.29 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है,
जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई केवल 15.78 लाख हेक्टयेर में ही हो
पाई थी। दालों की बुआई का लक्ष्य चालू खरीफ में 40.85 लाख हेक्टेयर का तय
किया हुआ है। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल मूंग की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर
18.55 लाख हेक्टयेर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 11.45
लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। अन्य दालों में मोठ की 7.99 लाख हेक्टेयर में
और उड़द की 3.01 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है।
तिलहनी फसलों की बुआई
चालू खरीफ में बढ़कर 20.68 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की
समान अवधि के 15.29 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। तिलहन की प्रमुख फसल
मूंगफली की बुआई 7.39 लाख हेक्टेयर में और सोयाबीन की 10.97 लाख हेक्टयेर
में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमशः 6.94 लाख
हेक्टेयर और 7.33 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।
ग्वार सीड की बुआई
चालू खरीफ में राज्य में 23.06 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि इसकी
बुआई का लक्ष्य 25 लाख हेक्टेयर है। पिछले साल राज्य में इस समय तक केवल
9.95 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी।
कपास की बुआई राज्य में
चालू सीजन में बढ़कर 6.35 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले खरीफ की
समान अवधि में इसकी बुआई केवल 5.93 लाख हेक्टयेर में ही हो पाई थी।
26 जुलाई 2022
घरेलू बाज़ार की अच्छी मॉग से बासमती 1401 स्टीम ने छुआ 9000 का आंकड़ा
घरेलू बाज़ार मे अच्छी मॉग और मार्केट मे बासमती प्रजाती की 1401 स्टीम मे कमी के चलते 1401 स्टीम मे 9000 पर नया बाजार दिल्ली मे इसका कारोवार चल रहा है इसके साथ साथ 1121 और 1718 स्टीम मे भी अच्छी मॉग होने से 1121 स्टीम 9200/9300 और 1718 स्टीम भी 8800/8900 तक बोली जा रहा है 1401 स्टीम 9000 होने से 1121 अथवा 1718 स्टीम जैसी प्रजातियो मे विकबाल पीछे हटने लगा है क्यों कि बाज़ार मे सीमित मात्रा मे ही चावल शेष है|
उधर ईरान की शिप्मैन्ट और ऐडवॉस सौदों के चलते बासमती सेले की सभी प्रजातियों ने बाज़ार मे अपनी पकड़ बना रखी है 1121&1718 सफेद सेला 8500 के आस पास व्यापार करता नज़र अरहा है अथवा इसके गोल्डेन सेला मे भी ग्राहक अच्छी मजबूती से 9000/9100 तक खरीदारी करता नज़र अरहा है हाला की 1509 नई क्रॉप के सेले मे पकाई और न आने और कुछ भारतीय निर्यातकों की मॉग कमजो़र होने से पिछले दो दिन से करिब 200/300 रु.का मन्दा देखने को मिला है लेकिन पुरानी क्रॉप की सभी प्रजातियाँ मे मार्केट अच्छे तरीके से चल रही है
इस बार कुछ विशेष्गयों के अनुसार भारत मे बासमती चावल की पाईप लाईन खाली हो जाऐगी उधर स्पेन और ईटली में सूखा पड़ जाने से खरिफ फसलों की पैदावार काफी हद तक पिछले वर्ष की तुलना मे कम अॉकी जा रही है भारत मे बासमती चावल की पाईप लाईन खाली अथवा ईरान दूआरा काफी बड़ी मात्रा मे भारत से ऐडवॉस सौदो के चलते आने बाली 2022-2023 की फसल पर शुरू से ही मारा मारी पढ़ जाऐगी और बासमती धान की सभी प्रजातियाे मे भाव ऊऩचे खुलने के आसार हैं यूरोप जैसे देशों मे अलनीनो (सूखा) पड़ जाने से इस बार भी भारतीय बासमती चावल मे एक्सपोर्ट अच्छा रहने की उम्मीद जताई जा रही है
विभिन्न मंडियों में 26 जुलाई 2022 को जिंसों के भाव इस प्रकार रहे
विभिन्न मंडियों में 26 जुलाई 2022 को जिंसों के भाव इस प्रकार रहे
सिरसा मंडी ग्रुप
दिनांक 26-07-2022
नरमा = 9400/-
कनक = 2140/-
सरसों = 5400-5950/-
मूँग. = 3000-5400/-
ग्वार = 4300-4800/-
---
आज सलोनी भाव 7250 रहा
★आगरा (AGRA)
सरसों (MUSTARD)
बीपी (BP)-6950 +50
शारदा (SHARDA)-6900 +50
आदमपुर सरसों बोली 6021
खेरली मंडी 6540
मंदसौर 6250
खैरथल 6440
कालावाली 5990
भरतपुर 6425
अलवर 6500
अलीगढ 6000
घड़साना 6050
नोहर 6100
विजयनगर 6100
जयपुर 6825
दिल्ली 6350
टोंक 6430
गोलूवाला सरसो बिकी 6150
38%
Dt 26-07-2022
सरसों भाव (MUSTARD) 42%
केकरी(KEKRI) 6770
टोंक(TONK)6775/6800
नेवई(NEWAI) 6775
देई(DEI) 6550/75
-
Mandi Adampur
Sarwan Pandit
Sarso Boli 6192
ऐलनाबाद मंडी बोली भाव
दिनांक 26/07/2022
सरसो = 5450/6000 अब तक
चना = 4425/4611
नरवाना गेहूं
2270 पक्के में ट्रक लोढ जुट बारदाना
गोलूवाला सरसो बिकी 6150
38%
Mandi Adampur
Sarwan Pandit
Guwar Boli 4813
Gharaunda paddy 1509@3600
I'NDRI MANDI 1509 3350 3650
SIRSA
Narma 🌤️ 9300
Wheat 🌾 2140
3640 ladwa mandi 1509
KARNAL Mandi 1509 paddy 3650 top arrival 20000 approx
MANDI- NARELA. DEHLI
1509 New.
Rate- 3751. KRBL
Gharaunda mandi 1509@3551
बर्मा की उड़द तेज तो अरहर और चना के भाव रुके, मसूर और मूंग में मंदा
नई
दिल्ली। दाल मिलों की हाजिर मांग बढ़ने के कारण सोमवार को बर्मा की उड़द
एफएक्यू और एसक्यू की कीमतों में तेजी दर्ज की गई, जबकि मसूर और मूंग के
भाव में गिरावट आई। अरहर के साथ ही चना की कीमतें लगभग स्थिर हो गई।
व्यापारियों
के अनुसार अरहर एवं उड़द के आयात पड़ते महंगे हैं, तथा बीते सप्ताह बर्मा
में उड़द और लेमन अरहर की कीमतों में तेजी आई थी। घरेलू बाजार में जहां अरहर
में अच्छी क्वालिटी की उपलब्धता कम है, वहीं समर सीजन की उड़द की आवक
उत्पादक राज्यों की मंडियों में अब कम होने लगी है। खरीफ की उड़द की आवक
सितंबर, अक्टूबर में ही बनेगी जबकि अरहर की नई फसल की आवक दिसंबर में
बनेगी। ऐसे में इनकी कीमतों में आगे सुधार ही आने के आसार हैं।
पिछले
24 घंटों के दौरान गुजरात और मध्य प्रदेश के कई क्षेत्रों में सामान्य से
ज्यादा बारिश हुई है, जबकि जुलाई में महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और तेलंगाना
में भी सामान्य से ज्यादा बारिश होने के कारण कई क्षेत्रों में अरहर और उड़द
के साथ ही मूंग की फसल को भी नुकसान की आशंका है।
भारतीय मौसम
विभाग के अनुसार पिछले 24 घंटों के दौरान पश्चिमी मध्य प्रदेश में 44 फीसदी
और पूर्वी मध्य प्रदेश में 99 फीसदी बारिश सामान्य से ज्यादा हुई है। इस
दौरान गुजरात रीजन में सामान्य से 88 फीसदी और सौराष्ट्र तथा कच्छ में
सामान्य से 91 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की गई। पहली जून से 25 जुलाई तक
देशभर में सामान्य से 11 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है जबकि अभी भी करीब 18
फीसदी हिस्से में सामान्य से कम बारिश हुई है। इस दौरान 19 फीसदी क्षेत्रफल
में अत्याधिक और 35 फीसदी से ज्यादा बारिश दर्ज की गई।
नेफेड
पुराने चना की लगातार बिकवाली कम रही है, तथा पुरानी चना की क्वालिटी काफी
हल्की है। इसलिए जब तक नेफेड की बिकवाली बनी रहेगी, चना की कीमतोें में बड़ी
तेजी के आसार नहीं है। उत्पादक मंडियों में मूंग समर मूंग की आवक बनी हुई
है, जबकि चालू खरीफ में मूंग की बुआई पिछले साल की तुलना में बड़ी है। ऐसे
में मूंग की कीमतों में स्टॉकिस्ट हल्की तेजी तो कर सकते हैं लेकिन बड़ी
तेजी टिक नहीं पायेगी। कनाडा एवं आस्ट्रेलिया से आयातित मसूर के दाम नीचे
हैं, तथा केंद्र सरकार ने मसूर के शुल्क मुक्त आयात की अवधि को 31 मार्च
2023 तक बढ़ा दिया है। इसलिए मसूर की कीमतों में भी बड़ी तेजी की उम्मीद कम
है।
दिल्ली में बर्मा उड़द एफएक्यू और एसक्यू के भाव के भाव में
50-50 रुपये की तेजी आकर भाव क्रमशः 7,750 रुपये तथा 8,750 रुपये प्रति
क्विंटल हो गए।
आंध्रप्रदेश लाइन की नई उड़द का दिल्ली के लिए व्यापार 8,200 रुपये प्रति क्विंटल की पूर्व दर पर हुआ।
चेन्नई
में एसक्यू उड़द हाजिर डिलीवरी के भाव 8,475 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर
बने रहे, जबकि उड़द एफएक्यू के हाजिर डिलीवरी के दाम 7,450 से 7,475 रुपये
प्रति क्विंटल बोले गए।
मुंबई में उड़द एफएक्यू के भाव मिलों की सीमित खरीद से 7,450 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।
दिल्ली में बर्मा की लेमन अरहर 2022 की फसल के भाव 7,100 से 7,200 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।
दिल्ली डिलीवरी के लिए महाराष्ट्र की नांदेड़ लाईन की अरहर 7,200 से 7,400 रुपये प्रति क्विंटल की पूर्व दर पर स्थिर बनी रही
इस दौरान चेन्नई में बर्मा की लेमन अरहर की कीमतें 6,900 से 6,925 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।
मुंबई में बर्मा की लेमन अरहर में मिलों की सीमित मांग से 6,900 से 6,950 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर रहे।
अफ्रीकी
देशों से आयातित अरहर की कीमतें भी स्थिर हो गई। तंजानिया की अरुषा अरहर
के दाम 5,800 से 5,900 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। इस दौरान मटवारा की
अरहर के भाव 5,600 से 5,700 रुपये के पूर्व स्तर पर स्थिर रहे। मोजाम्बिक
लाइन की गजरी अरहर की कीमतें 5,700 से 5,750 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर
रही। मलावी अरहर के दाम 5,250 से 5,350 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।
दिल्ली
में मध्य प्रदेश और कनाडा की मसूर की कीमतों में 50-75 रुपये की गिरावट
आकर भाव क्रमशः 7,150 रुपये और 6,925 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।
केंद्र सरकार ने मसूर के शुल्क मुक्त आयात को 31 मार्च 2023 तक बढ़ा दिया है। इसे पहले 30 सितंबर 2022 तक अनुमति दी गई थी।
कनाडा से आयातित मसूर के भाव बंदरगाह पर 6,270 रुपये प्रति क्विंटल बैठ रहे है।
मुंबई
में कनाडा की मसूर के दाम कंटेनर में 7,100 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर
रहे, जबकि ऑस्ट्रेलियाई मसूर के दाम कंटेनर में 7,200 रुपये प्रति क्विंटल
के पूर्व स्तर पर स्थिर हो गए। इन भाव में कोई खास व्यापार नहीं हुआ।
दिल्ली
में राजस्थानी चना की कीमतें 4,925 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बनी रही,
जबकि मध्य प्रदेश के चना के दाम 4,875 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।
दिल्ली
में कानपूर लाई की मूंग के दाम 50 रुपये कमजोर होकर 6,450 रुपये प्रति
क्विंटल रह गए, जबकि मध्य प्रदेश लाईन की मूंग के भाव 150 रुपये घटकर 6,500
से 6,600 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर आ गए।
गुजरात में कपास की बुआई बढ़ी, दलहन के साथ ही तिलहन की पिछ़ड़ी
नई
दिल्ली। असमान्य बारिश का असर गुजरात में खरीफ फसलों की बुआई पर पड़ा है,
राज्य में जहां जून में सामान्य की तुलना में 49 फीसदी बारिश कम हुई थी,
जबकि पहली जुलाई से 25 जुलाई तक जहां
गुजरात
रीजन में सामान्य से 52 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है, वहीं सौराष्ट्र और
कच्छ में इस दौरान सामान्य से 76 फीसदी ज्यादा बारशि दर्ज की गई।
राज्य
के कृषि निदेशालय के अनुसार 25 जुलाई तक राज्य में कपास की बुआई बढ़कर
24.49 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 21.77
लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। हालांकि राज्य में कपास की बुआई का लक्ष्य 24
लाख हेक्टेयर ही था, अतः कुल बुआई तय लक्ष्य से ज्यादा क्षेत्रफल में हुई
है।
हालांकि इस दौरान दलहन और तिलहनी फसलों की बुआई में कमी दर्ज
की गई। तिलहनी फसलों की कुल बुआई चालू खरीफ में राज्य में अभी तक केवल
19.47 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 21.90 लाख
हेक्टेयर में हो चुकी थी। मूंगफली की बुआई चालू खरीफ में घटकर अभी तक केवल
16.26 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 18.68 लाख
हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। मूंगफली की बुआई का लक्ष्य 18.42 लाख
हेक्टेयर तय किया गया है। शीशम सीड, केस्टर एवं सोयाबीन की बुआई चालू खरीफ
में क्रमशः 36,641 हेक्टेयर में, 76,970 हेक्टेयर में और 2.05 लाख हेक्टेयर
में ही हुई है। पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमशः 63,650
हेक्टेयर में, 39,637 हेक्टेयर में और 2.17 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।
दालों
की बुआई चालू खरीफ सीजन में 25 जुलाई तक केवल 2.85 लाख हेक्टेयर में ही हो
पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 3.80 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी।
खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर की बुआई चालू खरीफ में घटकर 1.72 लाख
हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इसकी बुआई
1.95 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। उड़द की बुआई केवल 60,588 हेक्टेयर में
ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 1.23 लाख हेक्टयेर में बुआई हो चुकी
थी।
हालांकि धान, ज्वार, मक्का और बाजरा की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर
9.24 लाख हेक्टेयर हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई
8.42 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। धान की रोपाई 4.72 लाख हेक्टेयर में
बाजरा की बुआई 1.62 लाख हेक्टेयर में तथा मक्का की बुआई 2.75 लाख हेक्टेयर
में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमशः 4.21 लाख
हेक्टेयर, 1.29 लाख हेक्टयेर और 2.76 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।
कई राज्यों में बारिश की कमी से खरीफ की प्रमुख फसल धान की रोपाई 16.41 फीसदी घटी
नई
दिल्ली। देशभर के राज्यों में असामान्य बारिश होने की वजह से चालू खरीफ
सीजन में जहां धान की रोपाई 16.41 फीसदी पीछे चल रही है, वहीं दलहन, तिलहन
एवं मोटे अनाजों की बुआई में बढ़ोतरी दर्ज की गई।
भारतीय मौसम
विभाग, आईएमडी के अनुसार पहली जून से 22 जुलाई तक देशभर में सामान्य से 10
फीसदी ज्यादा बारिश हुई है। इस दौरान उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और
पश्चिम बंगाल में जहां सामान्य की तुलना में कम बारिश हुई है, वहीं दक्षिण
और मध्य भारत के कई राज्यों में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई।
कृषि
मंत्रालय के अनुसार 22 जुलाई 2022 तक देशभर के राज्यों में धान की रोपाई
चालू खरीफ में घटकर 172.70 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जोकि पिछले साल
की समान अवधि के 206.61 लाख हेक्टेयर से कम है।
दलहनी फसलों की कुल
बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 90.60 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले
साल की समान अवधि के 85.16 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। खरीफ दलहन की प्रमुख
फसल अरहर की बुआई चालू खरीफ में 31.09 लाख हेक्टेयर में, उड़द की 22.47
लाख हेक्टेयर में और मूंग की 25.99 लाख हेक्टेयर में हुई है। पिछले खरीफ
सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 38.98 लाख हेक्टेयर में, 20.85 लाख
हेक्टेयर में और 19.80 लाख हेक्टेयर में हुई थी।
मोटे अनाजों की
बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 125.66 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले
साल की समान अवधि के 108.61 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। मोटे अनाजों में
ज्वार की बुआई 9.62 लाख हेक्टेयर में और बाजरा की 50.49 लाख हेक्टेयर में
हो चुकी है, जबकि पिछले साल समय तक इनकी बुआई क्रमश: 7.66 लाख हेक्टेयर और
30.64 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई थी। इसके अलावा मक्का की बुआई चालू खरीफ
में 62.14 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 65.59 लाख
हेक्टेयर में हो चुकी थी।
तिलहनी फसलों की बुआई चालू खरीफ में
बढ़कर 149.67 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के
142.03 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। तिलहन में मूंगफली की बुवाई चालू खरीफ
में 33.29 लाख हेक्टेयर में, सोयाबीन की 108.37 लाख हेक्टेयर में और
सनफ्लावर की 1.46 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इनकी बुआई
क्रमश: 36.13 लाख हेक्टेयर में, 98.99 लाख हेक्टेयर में और 1.04 लाख
हेक्टेयर में ही हो पाई थी।
