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19 फ़रवरी 2018

नई फसल आने से पहले गेहूं महंगा

नया सीजन शुरू होने से पहले गेहूं की कीमतों में तेजी आई है और वायदा में ये पिछले एक साल के ऊपरी स्तर पर चला गया है। मार्च वायदा 1800 रुपये का स्तर छू चुका है। इस महीने इसमें करीब 9 फीसदी की तेजी आ चुकी है। वहीं दिल्ली में गेहूं का भाव 2000 रुपये पर पहुंच गया है। दरअसल सरकार ने अप्रैल से शुरू होने वाले नए सीजन के लिए 1735 रुपये क्विंटल एमएसपी तय किया है। वहीं मध्य प्रदेश में बेमौसम बारिश से करीब 600 गांवों में गेहूं की फसल को नुकसान की आशंका है। इस साल गेहूं की खेती करीब 5 फीसदी कम हुई है।

महाराष्ट्र में राज्य सरकार 4.63 लाख अरहर की एमएसपी पर करेगी खरीद

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू सीजन में पैदावार कम होने के बावजूद भी अरहर की कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे बनी हुई है। ऐसे में राज्य के किसानों को नुकसान नहीं हो इसलिए महाराष्ट्र सरकार ने 4.63 लाख टन अरहर की खरीद एमएसपी पर करने का फैसला किया है।
राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार राज्य की मंडियों में अरहर के भाव 4,400 से 5,000 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं जबकि केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2017—18 के लिए अरहर का एमएसपी 5,450 रुपये प्रति क्विंटल (बोनस सहित) तय किया हुआ है। इसलिए राज्य सरकार ने एमएसपी पर 4.63 लाख टन अरहर की खरीद का निर्णय किया है।
उधर कर्नाटका में भी राज्य सरकार एमएसपी पर एक लाख टन अरहर की खरीद करेगी। राज्य की गुलबर्गा मंडी में सोमवार को अरहर की आवक 14,000 हजार बोरी की हुई तथा भाव 4,000 से 4,400 रुपये प्रति क्विंटल रहे। आंध्रप्रदेश और तेलंगाना तथा महाराष्ट्र से अरहर की एमएसपी पर खरीद सार्वजनिक कंपनी नेफैड भी कर रही है। नेफैड के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार निगम एमएसपी पर चालू खरीफ सीजन में 17 फरवरी 2018 तक 2,87,613 टन अरहर की खरीद कर चुकी है। 
कृषि मंत्रालय के पहले आरंभिक अनुमान के अनुसार चालू फसल सीजन 2017—18 में अरहर की पैदावार घटकर 39.9 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले खरीफ सीजन में रिकार्ड 47.8 लाख टन की पैदावार हुई थी। ........   आर एस राणा

पंजाब में किसान ऋण माफी के दूसरे चरण में 600 करोड़ का आवंटन

आर एस राणा
नई दिल्ली। पंजाब में किसान ऋण माफी के दूसरे चरण के अभियान में 600 करोड़ रुपये किसानों को वितरित किए जायेंगे। मार्च के आरंभ में अमृतसर, जालंधर और गुरदासपुर से इसकी शुरुआत की जायेगी। राज्य सरकार ने पहले चरण के दौरान इस योजना के तहत 160 करोड़ रुपये का आंवटन किसानों को किया है।
सूत्रों के अनुसार पहले चरण में कुछ किसानों ने व्यापारिक कामकाज के लिए ऋण लिया हुआ था, उन्होंने भी इस योजना के तहत ऋण प्राप्त किया था। इसलिए दूसरे चरण में मुख्यमंत्री ने पार्टी विधायकों को किसान ऋण माफी अभियान पर नजर रखने के निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि विधायकों से सलाह करने के बाद ही ऋण माफी सूची को अंतिम रूप दे। राज्य सरकार ने छोटे किसानों का 2—2 लाख का ऋण माफ करने का फैसला किया हुआ है।
सूत्रों के अनुसार अगले वित्त वर्ष में किसान ऋण माफी के लिए और अधिक धनराशि का आवंटन करने का अनुमान है। ऐसे में माना जा रहा है कि आगामी बजट में किसान ऋण माफी योजना के आवंटन में राज्य की अमरेन्द्र सरकार बढ़ोतरी करे।
सूत्रों के अनुसार दूसरे चरण में उन किसानों पर भी नजर रखी जायेगी, तो किसान ऋण माफी की शर्तों को पूरा नहीं करते। ऐसे में उन किसानों पर खास नजर रहेगी, जिनकी जमीन राज्य से बाहर किसी दूसरे राज्य में है। नए नियमों के अनुसार किसानों को स्वयं प्रमाणित एफीडेविट देने होंगे, कि वह इस योजना की सभी शर्तों को पूरा करते हैं। इससे उन्हें प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काटने से भी मुक्ति मिलेगी।  ........ आर एस राणा

17 फ़रवरी 2018

जनवरी में वनस्पति तेलों का आयात 25 फीसदी बढ़ा —एसईए

आर एस राणा
नई दिल्ली। घरेलू बाजार में तिलहनों की कीमतों में आए सुधार से जनवरी में खाद्य तेलों के साथ ही अखाद्य तेलों के आयात में 25 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल आयात 12,46,847 टन का हुआ है जबकि पिछले साल जनवरी में इनका आयात 10,28,859 टन का ही हुआ था।
साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (एसईए) के अनुसार चालू तेल वर्ष 2017-18 के पहले तीन महीनों नवंबर-17 से जनवरी-18 के दौरान खाद्य और अखाद्य तेलों का कुल आयात 6 फीसदी बढ़कर 36,28,734 टन का हुआ है जबकि पिछले तेल वर्ष 2016-17 की समान अवधि में इनका आयात 34,14,008 टन का ही हुआ था। इस दौरान खाद्य तेलों का आयात 35,30,451 टन का और अखाद्य तेलों का आयात 98,283 टन का हुआ है।
आयातित खाद्य तेलों की कीमतों में भी दिसंबर के मुकाबले जनवरी में बढ़ोतरी हुई है। एसईए के अनुसार आरबीडी पॉमोलीन का भाव भारतीय बंदरगाह पर पहुंच जनवरी में बढ़कर औसतन 669 डॉलर प्रति टन हो गया जबकि दिसंबर में इसका भाव 661 डॉलर प्रति टन था। क्रुड पॉम तेल का भाव भी दिसंबर के 662 डॉलर प्रति टन से बढ़कर जनवरी में 669 डॉलर प्रति टन हो गया। क्रुड सोयाबीन तेल के भाव इस दौरान भारतीय बंदरगाह पर पहुंच 811 डॉलर से बढ़कर 817 डॉलर प्रति टन हो गए। ..........आर एस राणा

सरकारी कदमों से दलहन के आयात में तो कमी आई, लेकिन भाव नहीं सुधरे

आर एस राणा
केंद्र सरकार द्वारा दलहन आयात में कमी लाने के लिए आयात शुल्क में बढ़ोतरी के साथ ही आयात की तय सीमा कर देने से आयात में तो भारी कमी आई है, लेकिन इसका असर उत्पादक मंडियों में दालों की कीमतों पर नहीं पड़ा है। दिसंबर महीने में दालों का आयात घटकर 3.19 लाख टन का ही हुआ है जबकि पिछले साल दिसंबर में 8.24 लाख टन दालों का आयात हुआ था। हालांकि उत्पादक राज्यों में किसानों को दालें एमएसपी से 1,000 से 1,500 रुपये प्रति ​क्विंटल नीचे बेचनी पड़ रही है।
खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि केंद्र सरकार ने घरेलू दलहन किसानों के हितों को देखते मटर, चना और मसूर पर आयात शुल्क लगाया है जबकि अरहर, मूंग और उड़द के आयात की सीमा तय कर दी थी। अत: अरहर, मूंग और उड़द का आयात नहीं हो रहा है जबकि चना, मसूर और मटर के आयात में भी भारी कमी आई है। उन्होनें बताया कि चालू वित्त वर्ष के दिसंबर महीने में आयात घटकर 3.91 लाख टन का ही हुआ है जबकि इसके पहले नवंबर में 7.56 लाख टन दालों का आयात हुआ था। 
कुल आयात में कमी आने का अनुमान
उन्होने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा उठाये गए कदमों से दलहन के कुल आयात में पिछले साल की तुलना में कमी आयेगी। चालू वित्त वर्ष 2017—18 के पहले 9 महीनों अप्रैल से दिसंबर के दौरान 56.80 लाख टन दालोें का आयात हो चुका है। वित्त वर्ष 2016—17 में दालों का रिकार्ड आयात 66.08 लाख टन का हुआ था। इसके पिछले वित्त वर्ष 2015—16 में दलहन का आयात 57.97 लाख टन का हुआ था।
चालू वित्त वर्ष 2017—18 की ​तीसरी तिमाही अक्टूबर से दिसंबर के दौरान दालों का आयात घटकर 16.5 लाख टन का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2016—17 की समान अवधि में इनका आयात 26.4 लाख टन का हुआ था।
आयात घटाने के लिए उठाए कदम
केंद्र सरकार ने चालू महीने में चना के आयात शुल्क को 30 फीसदी से बढ़ाकर 40 फीसदी किया है, जबकि इससे पहले दिसंबर में चना और मसूर के आयात पर 30 फीसदी का आयात शुल्क लगाया था। नवंबर में केंद्र सरकार ने मटर के आयात पर 50 फीसदी का आयात शुल्क लगाया था। अगस्त में केंद्र सरकार ने अरहर के आयात की 2 लाख टन और मूंग और उड़द के आयात की 3 लाख टन की सीमा तय की थी।
पैदावार ज्यादा होने का अनुमान
कृषि मंत्रालय के अनुसार फसल सीजन 2016—17 में देश में दलहन की रिकार्ड पैदावार 229 लाख टन होने का अनुमान है जबकि फसल सीजन 2015—16 में उत्पादन केवल 163.5 लाख टन का ही हुआ था। देश में दलहन की सालाना खपत 240 से 250 लाख टन की होती है।
उत्पादक मंडियों में भाव एमएसपी से नीचे
महाराष्ट्र, कर्नाटक और तेलंगाना की मंडियों में अरहर के भाव 4,000 से 4,300 रुपये प्रति क्विंटल है जबकि केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2017—18 के लिए अरहर का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 5,450 रुपये प्रति क्विंटल (बोनस सहित) किया हुआ है।.....आर एस राणा

गेहूं के आयात शुल्क में बढ़ोतरी पर फैसला टला — कृषि सचिव

आर एस राणा
नई दिल्ली। उत्पादक राज्यों में खराब मौसम ने केंद्र सरकार को आयातित गेहूं को हतोत्साहित करने के लिए शुल्क में बढ़ोतरी का फैसला कुछ समय के लिए टालने पर मजबूर कर दिया है। केंद्रीय कृषि सचिव एस के पटनायक ने शुक्रवार को दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि गेहूं के आयात शुल्क में बढ़ोतरी पर फैसला नहीं हो सका।
गेहूं के उत्पादन के बारे में उन्होंने कहां कि चालू रबी में अभी तक मौसम फसल के अनुकूल ही रहा है इसलिए गेहूं का उत्पादन पिछले साल के लगभग बराबर ही होने का अनुमान है। हालांकि उन्होंने माना कि उत्पादन की सही तस्वीर 15 मार्च के बाद ही साफ होगी। गेहूं के आयात पर इस समय 20 फीसदी आयात शुल्क है। सूत्रों के अनुसार कृषि मंत्रालय ने आयात शुल्क को 20 फीसदी से बढाकर 40 फीसदी करने का प्रस्ताव किया था। चालू रबी सीजन में गेहूं की बुवाई में कमी आई है जबकि उत्पादक राज्यों में चालू सप्ताह के शुरु में मौसम खराब हो गया था।
एग्रीकल्चर—2022 कार्यशाला के बारे में उन्होंने बताया कि किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कृषि क्षेत्र में सार्वजनिक के साथ ही निजी निवेश की हिस्सेदारी बढ़ाने ​पर ​जोर दिया जायेगा। इस कार्यशाला में कृषि वैज्ञानिकों के साथ ही किसान प्रतिनिधियों और निजी सेक्टर को आमंत्रित किया गया है। कार्यशाला के पहले दिन 19 फरवरी को हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत के साथ ही केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह बैठक में शामिल होंगेे जबकि 20 फरवरी को प्रधानमंत्री खुद इस बैठक में शामिल होकर वैज्ञानिकों, किसानों संगठनों और अधिकारियों के साथ विचार—विमर्श करेंगे।
इसमें ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए शुरु की गई सभी बड़ी परियोजनाओं की बारिकी से समीक्षा की जायेगी। किसानों के साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुधार में राज्यों की अहम भूमिका है, इसलिए राज्यों के प्रतिनिधियों को कार्यशाला में आमंत्रित किया गया है।
कार्यशाला  में पशुधन, डेयरी और पोल्ट्री के साथ ही मत्सय पालन को प्रोत्साहन देने के उपायों पर भी विचार किया जायेगा। किसानों के उत्पादों की बिक्री के लिए मार्केटिंग, एग्रो लॉजिस्टिक और एग्रो वैल्यू सिस्टम को मजबूत बनाने पर जोर दिया जायेगा।
किसानों को फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) कैसे मिलें, इस पर कार्यशाला में कृषि विशेषज्ञों के साथ ही किसान प्रतिनिधियों की सलाह अहम रहेगी। देश में 2 हैक्टेयर से छोटी जोत वाले किसानों की संख्या ज्यादा है इसलिए छोटी जोत वाले किसानों की आय बढ़ाने के उपायों पर मुख्य जोर दिया जायेगा।.....आर एस राणा

16 फ़रवरी 2018

चीन की आयात मांग बढ़ने से केस्टर तेल का निर्यात बढ़ा—एसईए

आर एस राणा
नई दिल्ली। चीन की आयात मांग बढ़ने से दिसंबर महीने में केस्टर तेल के निर्यात में बढ़ोतरी हुई है। दिसंबर महीने में केस्टर तेल का निर्यात बढ़कर 49,076 टन का हुआ है जबकि पिछले साल दिसंबर में इसका निर्यात केवल 38,442 टन का ही हुआ था।
साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन आॅफ इंडिया (एसईए) के अनुसार के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2017—18 के पहले 9 महीनों अप्रैल से दिसंबर के दौरान केस्टर तेल के निर्यात में थोड़ी कमी आई है। इस दौरान देश से केस्टर तेल का निर्यात 4.11 लाख टन का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2016—17 की समान अवधि में इसका निर्यात 4.15 लाख टन का हुआ था। वित्त वर्ष 2016—17 के दौरान केस्टर तेल का कुल निर्यात 5.37 लाख टन का हुआ था। वर्तमान में हो रहे निर्यात सौदों को देखते हुए माना जा रहा है कि कुल निर्यात पिछले साल के लगभग बराबर ही हो जायेगा।
एसईए के अनुसार फसल सीजन 2016—17 में केस्टर सीड का उत्पादन घटकर 11.30 लाख टन का ही हुआ था जबकि इसके पिछले साल 14 लाख टन का उत्पादन हुआ था।...... आर एस राणा