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04 अक्टूबर 2016

सरकारी एजेंसियों ने 3,740 टन दलहन खरीदी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन में सरकारी एजेंसियों अभी तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 3,740 टन दलहन की खरीद कर चुकी हैं। खाद्य मंत्रालय के अनुसार भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और नेफैड ने देषभर में 417 खरीद केंद्र बनाए हुए हैं, इन केंद्रों पर खरीफ दलहन की प्रमुख फसल उड़द और मूंग की खरीद एमएसपी पर की जा रही है।
मंत्रालय के अनुसार अभी तक हुई खरीद में एफसीआई ने 1,075.34 टन दलहन की खरीद की है जबकि नेफैड ने 2,665.13 टन दलहन की खरीद एमएसपी पर की है। सरकार ने चालू खरीफ सीजनह में बफर स्टॉक के लिए 50 हजार टन दलहन की खरीद का लक्ष्य तय किया है।

कमोडिटी बाजार

कच्चा तेल 3 महीने की ऊंचाई पर चला गया है। ब्रेट में 50 डॉलर के ऊपर कारोबार हो रहा है। ओपेक के प्रोडक्शन कटौती के अनुमान से इसकी कीमतों को सपोर्ट मिला है। हालांकि डॉलर में रिकवरी से अब ऊपरी स्तर से हल्का दबाव भी दिख रहा है। पिछले 1 हफ्ते के दौरान कच्चे तेल में करीब 7 फीसदी की तेजी आ चुकी है।
इस बीच सोने पर दबाव बढ़ गया है। कॉमैक्स पर सोना 1310 डॉलर तक लुढ़क गया है। सितंबर में अमेरिकी इकोनॉमी के अच्छे आंकड़ों से सोने पर दबाव बढ़ा है। वहीं भारत में सितंबर के दौरान लगातार 9वें महीने सोने के इंपोर्ट में गिरावट आई है। इस साल के पहले 9 महीनों के दौरान देश में गोल्ड इंपोर्ट करीब 60 फीसदी गिर गया है। हालांकि कल की भारी गिरावट के बाद कॉमैक्स पर चांदी में आज करीब 0.5 फीसदी की तेजी आई है लेकिन बढ़त के बावजूद चांदी  19 डॉलर के नीचे है। कल घरेलू बाजार में चांदी भारी गिरावट के साथ 45000 रुपये के नीचे बंद हुई थी।
बेस मेटल्स की बात करें तो मांग बढ़ने के अनुमान से आज लंदन मेटल एक्सचेंज पर कॉपर में तेजी आई है। इस बीच सेबी के आदेश पर एनसीडीईएक्स ने सभी कमोडिटी में 25 फीसदी डिलिवरी पीरियड मार्जिन लगाने का फैसला किया है। आज डॉलर के मुकाबले रुपये में हल्की रिकवरी आई है।

03 अक्टूबर 2016

खराब मौसम से कपास की कीमतों में आई तेजी

आर एस राणा
नई दिल्ली। कपास के उत्पादक राज्यों में मौसम खराब से नई आवक प्रभावित हुई है जिससे कपास की कीमतों में तेजी आई है। मौसम अभी भी खराब बना हुअ है इसलिए भाव तेज रह सकते हैं लेकिन जैसे ही मौसम साफ होगा, दैनिक आवक बढ़ेगी। उसके बाद भाव में अच्छी गिरावट आने की उम्मीद है।
उधर फसल सीजन 2016-17 में पाकिस्तान में कपास की पैदावार बढ़कर 8.25 मिलियन 480 पौंड गांठ की पैदावार होने का अनुमान है जोकि पिछले साल के 7 मिलियन से ज्यादा है। पाकिस्तान ने पिछले साल भारत से सबसे ज्यादा कपास का आयात किया था जबकि मौजूदा हालात में पाकिस्तान को निर्यात होने की संभावना कम है। इसलिए आगे जैसे ही मौसम साफ होगा, कपास की कीमतों में गिरावट आयेगी।.......आर एस राणा

आंध्रप्रदेष में लालमिर्च की बुवाई ज्यादा

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन में आंध्रप्रदेष में लालमिर्च की बुवाई में भारी बढ़ोतरी हुई है। राज्य के कृषि निदेषालय के अनुसार 29 सितंबर तक राज्य में 1,35,800 हैक्टेयर में लालमिर्च की बुवाई हो चुकी है जबकि निदेषालय ने बुवाई का लक्ष्य 1,18,022 हैक्टेयर का रखा था। पिछले साल की समान अवधि में राज्य में लालमिर्च की बुवाई 1,06,649 हैक्टेयर में हुई थी। गुंटूर में लालमिर्च की बुवाई बढ़कर 70,005 हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 59,554 हैक्टेयर में बुवाई हुई थी।
राज्य में हाल ही में हुई बारिष से कुछेक क्षेत्रों में लालमिर्च की फसल को नुकसान हुआ है लेकिन जानकारों का मानना है कि बुवाई में हुई बढ़ोतरी से पैदावार ज्यादा ही होगी, तथा जहां नुकसान हुआ है वहां दोबारा रोपाई हो सकती है।.....आर एस राणा

01 अक्टूबर 2016

मूंगफली की कीमतों में गिरावट आने का अनुमान

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में मूंगफली की बुवाई में हुई बढ़ोतरी से इसकी पैदावार ज्यादा होने का अनुमान है। इसलिए आगामी दिनों में दैनिक आवक बढ़ने पर मूंगफली के साथ ही इसके तेल की कीमतों में भी गिरावट आने का अनुमान है। उत्पादक मंडियों में इस समय मूंगफली का भाव 5,000 से 5,400 रुपये प्रति क्विंटल है जबकि तेल का भाव 1,190 रुपये प्रति 10 किलो है।
चालू खरीफ में मूंगफली की बुवाई बढ़कर 46.93 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई केवल 36.38 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई थी। प्रमुख उत्पादक राज्य गुजरात में मूंगफली की बुवाई बढ़कर 16.44 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 12.96 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी। अन्य राज्यों में राजस्थान में बुवाई बढ़कर 6.17 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 4.13 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी। तमिलनाडु में चालू खरीफ में मूंगफली की बुवाई 2 लाख हैक्टयेर में, महाराष्ट्र में 2.11 लाख हैक्टेयर में, मध्य प्रदेष में 2.55 लाख हैक्टेयर में और कर्नाटका में 5.23 लाख हैक्टेयर तथा आंध्रप्रदेष में 9.29 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी।
कृषि मंत्रालय के पहले आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2016-17 में खरीफ सीजन में मूंगफली की पैदावार बढ़कर 64.98 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसकी पैदावार 53.40 लाख टन की हुई थी।
मूंगफली दाने के निर्यात में चालू वित्त वर्ष 2016-17 के पहले पांच महीनों अप्रैल से अगस्त के दौरान बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान इसका निर्यात बढ़कर 2,08,476 टन का हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 1,81,507 टन का ही हुआ था। मूल्य के हिसाब से मूंगफली दाने के निर्यात में इस दौरान 23.75 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल निर्यात 1,819.94 करोड़ रुपये का हुआ है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 1,470.67 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ था।............आर एस राणा

एग्री कमोडिटी में मुनाफे का अच्छा अवसर

एग्री कमोडिटी दलहन, तिलहन, और मसालों के साथ ही गेहूं, मक्का, जौ, कपास, खल, बिनौला, ग्वार सीड, चीनी, और कपास आदि की कीमतों में कब आयेगी तेजी तथा आगे की रणनीति कैसे बनाये, भाव में कब आयेगी तेजी, किस भाव पर स्टॉक करने पर मिलेगा मुनाफा, क्या रहेगी सरकार की नीति, आयात-निर्यात की स्थिति के साथ ही विदेष में कैसी है पैदावार, इन सब की स्टीक जानकारी के लिए हमसे जुड़े............एग्री कमोडिटी की दैनिक रिपोर्ट के साथ ही मंडियों के ताजा भाव आपको ई-मेल से हिंदी में भेजे जायेंगे

---------------------खरीफ फसलों में अरहर,  किन भाव पर स्टॉक करने से मिलेगा फायदा, बाजरा, मक्का, सोयाबीन, मूंगफली, कपास, केस्टर सीड और ग्वार सीड का भविष्य कैसा रहेगा, इनके निर्यात-आयात की क्या हैं संभावनाएं, इन सभी की स्टीक जानकारी कें लिए हमसे जुड़े। अगले सप्ताह इनकी विस्तृत खबरें मिलेंगी, केवल ई-मेल के माध्यम से।

............एक महीना रिपोर्ट लेने का चार्ज मात्र 1,000 रुपये, 6 महीने का 5,000 रुपये और एक साल का केवल 8,000 रुपये........
आर एस राणा
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केस्टर सीड की कीमतों में तेजी की संभावना

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में केस्टर सीड की बुवाई में कमी आई है, साथ ही गुजरात और राजस्थार में सितंबर में बारिष भी कम हुई है जिससे केस्टर सीड की कीमतों में आगामी दिनों और तेजी आने का अनुमान है। केस्टर सीड के भाव इस समय मिल पहुंच 840 रुपये प्रति 20 किलो चल रहे है जबकि मध्य नवंबर तक इसके भाव बढ़कर 900 रुपये प्रति 20 किलो होने का अनुमान है।
जानकारों के अनुसार इस समय केस्टर तेल में निर्यात मांग अच्छी है। घरेलू मंडियों में केस्टर तेल का भाव 875 रुपये प्रति 10 किलो है। केस्टर सीड की नई फसल जनवरी महीने में आती है जबकि आवक का दबाव फरवरी-मार्च में होता है। चालू सीजन में एक तो बुवाई कम हुई है, साथ ही प्रमुख उत्पादक राज्य गुजरात और राजस्थान में सितंबर महीने में हुई कम बारिष से इसके प्रति हैक्टेयर उत्पादन में भी कमी आने की आषंका है। इस समय उत्पादक राज्यों में मौसम गर्म बना हुआ है जिसका असर फसल पर पड़ रहा है। इसलिए आगे भाव में तेजी आने का ही अनुमान है।
साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएषन के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2016-17 के पहले चार महीनों अप्रैल से जुलाई के दौरान केस्टर तेल का निर्यात बढ़कर 1,74,846 टन का हो चुका है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 1,71,804 टन का हुआ था। वित्त वर्ष 2015-16 में कुल निर्यात 4.96 लाख टन का हुआ था जबकि चालू वित्त वर्ष में निर्यात पिछले साल की तुलना में ज्यादा होने का अनुमान है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में केस्टर सीड की बुवाई केवल 8.30 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक बुवाई 10.90 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।..............आर एस राणा