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01 सितंबर 2010

प्याज का निर्यात मूल्य 55 डॉलर प्रति टन बढ़ा

नई दिल्ली August 31, 2010
घरेलू बाजार में प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी रोकने के लिए सरकार ने इसके निर्यात पर अंकुश लगाने का कदम उठाया है। इसके लिए सरकार ने सितंबर महीने के लिए प्याज के न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी ) में 55 डॉलर प्रति टन की बढ़ोतरी की है। है। सरकार के इस कदम से निर्यात में कमी आएगी, जिससे घरेलू बाजार में प्याज की उपलब्धता बढऩे से कीमतों आ रही तेजी थमने की संभावना है।भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ मर्यादित (नेफेड ) के बागवानी मामलों को देखने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी बताया कि सितंबर महीने के लिए एमईपी को 55 डॉलर बढ़ाकर 270-275 डॉलर प्रति टन कर दिया गया है।उक्त अधिकारी के मुताबिक नेफेड ने यह कदम निर्यात को कम करने के लिए किया, जिससे घरेलू बाजार में प्याज की उपलब्धता में बढ़ोतरी हो सके और कीमतों में आ रही तेजी पर अंकुश लग सके। अधिकारी का कहना है कि नेफेड ने पिछले माह भी एमईपी में इजाफा किया था। (BS Hindi)

एथेनॉल उत्पादक 50 फीसदी माल रखेंगे सुरक्षित

मुंबई August 31, 2010
महाराष्ट्र के एथेनॉल उत्पादक पेट्रोल में 5 प्रतिशत एथेनॉल मिलाए जाने के लिए आपूर्ति को लेकर खासे गंभीर हैं। उन्होंने फैसला किया है कि कुल उत्पादन का 50 प्रतिशत एल्कोहल इसके लिए सुरक्षित रखा जाएगा।इससे यह सुनिश्चित होगा कि चीनी मिलें और एथेनॉल उत्पादक अपना एथेनॉल दूसरे राज्यों को निर्यात नहीं करेंगे। केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार के साथ हुई बैठक में यह फैसला किया गया। एथेनॉल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय सिंह मोहिते पाटिल ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, 'पिछले अनुभव को देखते हुए यह जरूरी फैसला है। पिछले दिनों कम पेराई के समय एथेनॉल की कीमतें स्थिर रहीं, जबकि एल्कोहल और शीरे की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई। इसके परिणामस्वरूप एल्कोहल का रुख निर्यात की ओर हुआ। 50 प्रतिशत एथेनॉल सुरक्षित रहने से यह सुनिश्चित हो सकेगा कि तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को उनके साथ हुए समझौते के मुताबिक आपूर्ति हो।'उन्होंने कहा कि एथेनॉल उत्पादकों ने इसके पहले तेल विपणन कंपनियों को 30.42 करोड़ लीटर एथेनॉल आपूर्ति करने की रुचि दिखाई थी, जिससे पेट्रोल में 5 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जा सके। मोहिते पाटिल ने कहा कि इस बैठक में मौजूद महाराष्ट्र के आबकारी मंत्री गणेश नाइक ने कहा कि उनका मंत्रालय ऐसे मानक तैयार करेगा, जिससे एथेनॉल उत्पादन के लिए एल्कोहल की मात्रा तय की जा सके।तेल विपणन कंपनियां 27 रुपये प्रति लीटर के भाव एथेनॉल की खरीदारी करेंगी, जो अब तक 21.50 रुपये प्रति लीटर के भाव एथेनॉल खरीदती थीं। इस दर पर खरीदारी तब तक होगी, जब तक योजना आयोग के सदस्य सौमित्र चटर्जी की अध्यक्षता वाली समिति भविष्य में एथेनॉल की कीमतों के बारे में फैसला नहीं करती। (BS Hindi)

मूंगफली तेल रिकॉर्ड पर

राजकोट August 31, 2010
जन्माष्टमी के त्योहार पर मांग बढऩे और आपूर्ति कम रहने के चलते मूंगफली का भाव सौराष्ट्र में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है। 15 किलो के टिन का दाम 1,465 रुपये हो गया है। इस त्योहारी मौसम में मूंगफली तेल के भाव में 40 फीसदी की तेजी आई है।मांग में तेजी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि फिलहाल खुदरा बिक्रेता हर दिन 100-125 टिन तेल बेच रहे हैं जबकि सामान्य दिनों में रोजाना औसत रूप से 40-50 टिन तेल की मांग होती है। खुली मूंगफली के दाम भी 875-880 रुपये प्रति 10 किलो तक चढ़ चुके हैं। राजकोट के एक खुदरा व्यापारी ने कहा, 'मांग में तेजी त्योहार की वजह से और त्योहार के बाद यह सामान्य हो जाएगी।' (BS Hindi)

अभी और बढ़ेंगे अनाज के भाव!

मुंबई August 31, 2010
दुनियाभर के देशों में मौसम फसल उत्पादन के लिए प्रतिकूल होता जा रहा है जिससे चालू कैलेंडर वर्ष के बाकी महीनों में भी अनाज के भाव ऊंचाई पर बने रहने की आशंका है। राबोबैंक के ताजा अनुमानों में गेहूं के भाव में मौजूदा स्तर से 50 फीसदी बढ़ोतरी की आशंका जताई गई है। वहीं, चावल, चीनी और सोयाबीन के दाम भी थोड़े बढ़ सकते हैं।2009 में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा निर्यातक रहे रूस ने देश में भारी सूखे के चलते उत्पादन घटने के अनुमानों को देखते हुए 31 दिसंबर से सभी अनाज के निर्यात पर रोक लगा दी है। 2010-11 में यूक्रेन और कजाकिस्तान में भी अनाज निर्यात पर कोटा या विशेष क्षेत्रीय कारोबार के रूप में कुछ रोक लगाई जा सकती है।कनाडा और यूरोपीय संघ में गेहूं का उत्पादन कम रहने की वजह से अब गेहूं की वैश्विक मांग अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया और अर्जेंटीना के दक्षिणी भाग की पैदावार से पूरी की जाएगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑस्ट्रेलिया और अर्जेंटीना के दक्षिणी गोलाद्र्घ में उत्पादन में किसी भी कमी से कीमतों में भारी उछाल देखी जाएगी।नतीजे के रूप में अमेरिकी कृषि विभाग ने 2010-11 के उत्पादन अनुमानों में जुलाई अनुमानों के मुकाबले 160 लाख टन की कटौती कर इसे 6457 लाख टन कर दिया है। राबोबैंक ने भी 2010-11 के लिए गेहूं का वैश्विक उत्पादन अनुमान और 5 फीसदी घटाकर 6390 लाख टन कर दिया है।अखिल भारतीय चावल निर्यातक संघ के अध्यक्ष विजय सेतिया ने कहा, 'भारतीय निर्यातकों को बढ़ते वैश्विक भावों से फायदा उठाना चाहिए। आने वाला साल भी देश के लिए अनुकूल रहने की उम्मीद है, ऐसे में देश अपने निर्यात द्वार खोल सकता है।'वैश्विक स्तर पर अनाज के दाम बढ़ रहे हैं। पर्याप्त स्थानीय आपूर्ति के बावजूद भारत में भी भाव कम से कम 10 फीसदी चढ़े हैं। हाल ही में भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने कुल 600 लाख टन के अनाज भंडार की घोषणा की है जो अगले कटाई सत्र तक घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।अनाज प्रसंस्करण की एक बड़ी भारतीय कंपनी यूजर्स एग्रो के प्रबंध निदेशक वी के चतुर्वेदी ने कहा, 'अनाज के भाव दिसंबर तक कम से कम 10-15 फीसदी और बढ़ सकते हैं, लेकिन उम्मीद के मुताबिक अगर सरकार ने सितंबर की शुरुआत से निर्यात की अनुमति देती है, तो अनाज के भाव तेजी से बढ़ेंगे।'राबोबैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका और दुनिया के बाकी देशों के लिए बड़ी चिंता यह है कि मक्का बाजार में भी तेजी बरकरार रहेगी। हाल फिलहाल के महीनों में कीमतें तेज थीं, वाबजूद इसके और तेजी संभव है। आने वाले 6-8 हफ्तों में भाव पर सट्ïटेबाजी मुनाफे और मौसमी कटाई दबाव दिख सकता है।मक्के के दाम में 30 जून से 25 फीसदी की तेजी दर्ज की गई है और यह 425 अमेरिकी सेंट प्रति बुशेल तक जा पहुंचा है जो 2010 का दूसरा सबसे ऊंचा स्तर है। 4 जनवरी के उच्चतम स्तर से यह मामूली अंतर से ही कम है। (BS Hindi)

एफसीआई के गेहूं का उठान बहुत कम है।

भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) का सस्ता गेहूं भी खरीदने में फुटकर उपभोक्ता दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। इस वजह से राज्यों की ओर से खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत इस गेहूं का उठान बहुत कम है। गौरतलब है कि ओएमएसएस के तहत एफसीआई बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं के अलावा फुटकर विक्रेताओं को भी गेहूं बेच रही है। इस वर्ग में घरेलू उपभोक्ताओं के अलावा छोटी फ्लोर मिल, आटा चक्की संचालक, ब्रेड और बिस्कुट बनाने वाली छोटी इकाइयों और घरेलू उपभोक्ता भी गेहूं ले सकती हैं। एफसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत रिटेल पिछले साल अक्टूबर से इस साल सितंबर तक उपभोक्ताओं को वितरित करने के लिए आवंटित गेहूं में से सिर्फ 24 फीसदी गेहूं बिका। जबकि सरकारी गेहूं का दाम खुले बाजार के मुकाबले करीब 125 से 150 रुपये प्रति क्विंटल कम है। उन्होंने बताया कि अक्टूबर-09 से सितंबर-10 के दौरान ओएमएसएस के तहत में रिटेल उपभोक्ताओं के लिए 21,65,286 टन गेहूं आवंटित किया गया था। बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए इसके अतिरिक्त 16,69,342 टनगेहूं आवंटित किया गया था। इसमें से भी सिर्फ 12,55,169 टन गेहूं उठाया गया। फुटकर उपभोक्ताओं के लिए आवंटित 21 लाख टन से ज्यादा गेहूं में से चालू अगस्त के आखिरी सप्ताह तक करीब 11 माह में राज्यों ने केवल 4,80,113 टन गेहूं उठाया। उत्तर भारत के राज्यों में जहां पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश ने इस दौरान कोई गेहूं नहीं उठाया, वहीं मध्य प्रदेश ने कुल आवंटन का 14 फीसदी, दिल्ली ने 56 फीसदी और राजस्थान ने 60 फीसदी गेहूं का ही उठान किया। पंजाब को 1,77,964 टन गेहूं का आवंटन किया गया था, लेकिन वहां कोई उठान नहीं हुआ। इसी तरह से हरियाणा को 39,044 टन, उत्तर प्रदेश को 1,03,036 टन और झाखंड को 6,298 टन गेहूं आवंटित किया गया था लेकिन इन राज्यों ने भी उठान में दिलचस्पी नहीं ली। उधर, मध्य प्रदेश के लिए इस दौरान 1,07,770 टन गेहूं का आवंटन किया गया था लेकिन उसने केवल 14,917 टन गेहूं का ही उठान किया है। दिल्ली बाजार में इन दिनों गेहूं का दाम 1,230-1235 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है जबकि एफसीआई के गेहूं का दाम 1,111.54 रुपये प्रति क्विंटल है। (Business Bhaskar)

सेब का रिकार्ड उत्पादन, दाम गिरे

अभी तक आम आदमी को अपने महंगे दाम से चिढ़ा रहे सेब की बंपर फसल ने इसे एक बार फिर आम आदमी के बजट में ला दिया है । इस साल हिमाचल प्रदेश में सेब की बंपर फसल हुई है। बढ़िया मौसम और प्रचुर बर्फबारी से सेब के बागान सेबों से लदे पड़े हैं। पिचळे दो सालों से सेब के उत्पादक परेशान थे।
इस बार हिमाचल से सेब की जबर्दस्त आवक की वजह से इसके दाम दिल्ली के थोक बाजार में 40% तक गिर गए हैं। पिछले सोमवार को रॉयल डेलीशस सेब जहां 50 रुपए किलो बिक रहा था वहां अब इस सोमवार को 30 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गया है। हिमाचल के एक और सेब उत्पादक क्षेत्र कुन्नुर में भी सेब की बढ़िया फसल हुई है। इसकी आवक शीघ्र होने की उम्मीद है। इसके बाद कीमतें और गिरेंगी। लेकिन कश्मीर से सेब की आवक होने के बाद कीमतों में काफी आ सकती है। (Dainik haskar)

अब बंटेगा मुफ्त में अनाज!

लगता है सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार का विभाग गरीबों को मुफ्त अनाज बंटवाने के मामले में ज्यादा ही सक्रिय हो गया है। इस मुद्दे को लेकर गुरूवार को खाद्य मामले से जुड़े अधिकार प्राप्त मंत्रियों के समूह की बैठक होगी। फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के गोदामों में पड़े अनाज और अतिरिक्त अनाज को गरीबों में मुफ्त बंटवाने के एजेंडे पर विस्तार से इस बैठक में चर्चा होगी।
गौरतलब है कि फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के पास अनाजों के भंडारन क्षमता में कमीं के चलते हर साल सैकड़ों टन अनाज सड़ जाता है। इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए माननीय सुप्रीम कोर्ट ने 12 अगस्त को कहा था कि अगर सरकार अनाजों का ठीक से भंडानरन नहीं कर सकती तो उसे खुले में रखकर सड़ाने से अच्छा है कि गरीबों में मुफ्त बांट दिया जाए।
आपको बता दें कि वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी खाद्य मामलों से जुड़े अधिकार प्राप्त मंत्रियों के समुह के अध्यक्ष हैं। माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने के सम्बंध में प्रणब दा बैठक में कुछ विशेष सुझाव देने वाले हैं।
पिछले महीने खुद शरद पवार ने लोकसभा में यह कहा था कि 2000-01 से 2009-10 के बीच 7.36 लाख टन अनाज बर्बाद हुआ है। वहीं इस साल जुलाई महीने तक 11,7000 टन से ज्यादा अनाज बर्बाद हुआ है। जिसकी कीमत करीब 6.86 करोड़ रुपए है। फिलहाल सरकारी गोदामों में 57.8 मिलियन टन अनाज पड़ा हुआ। जबकि बफर स्टॉक के नियमों के मुताबिक सरकारी गोदामों में 31.9 मिलियन टन अनाज उपलब्ध होना चाहिए। (Dainik Bhaskar)