नई दिल्ली। कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) ने चालू सप्ताह में शुक्रवार को कॉटन की बिक्री कीमतों में 200 से 800 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी 356 किलो की बढ़ोतरी की। इससे पहले भी निगम ने बुधवार को बिक्री भाव में बढ़ोतरी की थी।
सूत्रों के अनुसार शुक्रवार को सीसीआई ने कॉटन की बिक्री कीमतों में 200 से 800 रुपये प्रति कैंडी की बढ़ोतरी की। इस दौरान निगम ने 1,00,500 गांठ कॉटन की बिक्री की, जिसमें मिलों ने 45,500 गांठ कॉटन की खरीद की, इसके अलावा व्यापारियों ने इस दौरान 55,000 गांठ खरीदी।
सीसीआई चालू सप्ताह में बुधवार को भी कॉटन की बिक्री कीमतों में 200 से 900 रुपये प्रति कैंडी की बढ़ोतरी की थी, तथा इस दौरान 2,78,000 गांठ की बिक्री की थी।
स्पिनिंग मिलों की मांग बढ़ने के कारण शुक्रवार को शाम के सत्र में गुजरात में कॉटन के दाम तेज हुए, जबकि इस दौरान उत्तर भारत के राज्यों में इसके दाम लगभग स्थिर हो गए।
गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव शुक्रवार को 100 रुपये तेज होकर 54,300 से 54,500 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए।
पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव 5,300 से 5,470 रुपये प्रति मन बोले गए। हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव 5,140 से 5,300 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 5,140 से 5,480 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 50,200 से 51,200 रुपये कैंडी बोले गए।
देशभर की मंडियों में कपास की आवक 112,350 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई।
आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतों में शुक्रवार को तेजी का रुख रहा।
व्यापारियों के अनुसार सीसीआई द्वारा बिक्री दाम बढ़ा देने से स्पिनिंग मिलों की खरीद से गुजरात में कॉटन की कीमतों में सुधार आया, जबकि उत्तर भारत के राज्यों में इसके दाम लगभग स्थिर हो गए। सीसीआई चालू सप्ताह में कॉटन की बिक्री कीमतों में दो बार बढ़ोतरी कर चुकी है, जबकि इससे पहले चालू महीने में ही दो बाद इसके बिक्री भाव कम किए थे। ऐसे में स्पिनिंग मिल जरुरत के हिसाब से ही खरीद रही है। अत: हाजिर बाजार में भी इसकी कीमतों में सीमित तेजी, मंदी बनी रहने का अनुमान है। चालू सीजन में उत्पादन अनुमान तो ज्यादा है ही, साथ ही आयात भी बढ़ेगा। मौजूदा भाव में प्राइवेट जिनिंग मिलों की बिकवाली कम आ रही है, क्योंकि उनके पास कुल स्टॉक कम है। घरेलू बाजार में कॉटन का सबसे ज्यादा स्टॉक सीसीआई के पास है, इसलिए हाजिर बाजार में कॉटन की कीमतों में तेजी, मंदी सीसीआई की बिक्री दाम पर ही ज्यादा निर्भर करेगी।

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