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09 फ़रवरी 2026

चालू पेराई सीजन में जनवरी अंत तक चीनी का उत्पादन 18.35 फीसदी ज्यादा- इस्मा

नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2025 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन (अक्टूबर-25 से सितंबर-26) में 31 जनवरी तक देशभर के राज्यों में चीनी का उत्पादन 18.35 फीसदी बढ़कर 195.03 लाख टन का हो चुका है। पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में 164.79 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था।


इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (इस्मा) के आंकड़ों के अनुसार चालू सीजन में 515 मिलों में पेराई चल रही हैं, जबकि पिछले सीजन की समान अवधि में केवल 501 मिलें ही पेराई चल रही थी।

चालू पेराई सीजन में उत्तर प्रदेश में 31 जनवरी 2026 तक 55.01 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है, जो कि पिछले पेराई सीजन के 52.6 लाख टन से ज्यादा है। महाराष्ट्र में चालू सीजन में 78.72 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है, जबकि पिछले सीजन की इसी अवधि में 55.52 लाख टन का ही उत्पादन हुआ था। राज्य में वर्तमान में 206 चीनी मिल चल रही हैं, जबकि पिछले साल इस समय केवल 190 मिलें चल रही थी।

कर्नाटक में चालू पेराई सीजन में 38.1 लाख टन चीनी का उत्पादन जनवरी अंत तक हो चुका है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 33.27 लाख टन की तुलना में ज्यादा है। गुजरात में चालू पेराई सीजन में 31 जनवरी तक 4.9 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के बराबर है। तमिलनाडु में चालू पेराई सीजन में 2.52 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है, जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में केवल 1.68 लाख टन चीनी का उत्पादन ही हुआ था। अन्य राज्यों में जनवरी अंत तक 15.69 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 16.82 लाख टन की तुलना में कम है।

इस्मा के अनुसार बचे हुए गन्ने के रकबे का अंदाजा लगाने के लिए पूरे भारत से सैटेलाइट प्रक्रिया जारी है। इसके साथ ही, इस्मा की एग्रीकल्चर टीम खड़ी फसल का जमीनी सर्वे करने के लिए बड़े चीनी उत्पादक राज्यों का दौरा कर रही है। खेत की स्थितियों, सैटेलाइट डेटा, अब तक की अनुमानित पैदावार और रिकवरी और बाकी सीजन के लिए उम्मीद की गई पैदावार और रिकवरी के डिटेल्ड एनालिसिस के आधार पर, इस्मा फरवरी 2026 में चीनी उत्पादन का अपना तीसरा आरंभिक अनुमान जारी करेगा।

इस्मा के डीजी के अनुसार जैसे-जैसे पेराई सीजन आगे बढ़ रहा है उससे चीनी मिलों में चीनी का स्टॉक बढ़ रहा है। ऐसे में संकेत मिल रहे हैं कि गन्ने के पेमेंट का बकाया बढ़ने लगा है। चीनी उत्पादन की लागत और चीनी की कमाई के बीच अंतर के कारण इंडस्ट्री को ऑपरेशनल और कैश-फ्लो के दबाव का सामना करना पड़ रहा है।

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