नई दिल्ली। कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई ने 9 फरवरी से 13 फरवरी के बीच फसल सीजन 2025-26 के दौरान खरीदी हुई 28,800 गांठ, एक गांठ 170 किलो कॉटन की बिक्री की। निगम ने अपनी बिक्री को बढ़ावा देने के लिए 2025-26 की कॉटन की कीमत में 1,400-1,700 रुपये प्रति कैंडी (356 किलोग्राम) की कटौती की है।
स्पिनिंग मिलों की मांग बढ़ने के कारण शनिवार को शाम के सत्र में गुजरात में कॉटन की कीमतों में तेजी आई, जबकि इस दौरान उत्तर भारत के राज्यों में इसकी कीमत स्थिर हो गई।
गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव शनिवार को 100 रुपये तेज होकर 54,000 से 54,400 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए। पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव 5,270 से 5,470 रुपये प्रति मन बोले गए। हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव 5,150 से 5,280 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 5,300 से 5,470 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 50,000 से 51,000 रुपये कैंडी बोले गए।
देशभर की मंडियों में कपास की आवक 93,700 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई।
व्यापारियों के अनुसार स्पिनिंग मिलों की मांग बढ़ने से गुजरात में कॉटन की कीमतों में सुधार, लेकिन इस दौरान उत्तर भारत के राज्यों में इसके दाम स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार अमेरिका एवं बांग्लादेश के बीच हुई ट्रेड डील के बाद घरेलू मिलें जरुरत के हिसाब से ही कॉटन की खरीद कर रही है।
घरेलू बाजार में कॉटन की कुल उपलब्धता ज्यादा है। इसलिए अधिकांश मिलें इन्वेंट्री नहीं बढ़ाना चाहती। चालू सीजन में कॉटन का आयात भी रिकॉर्ड होने का अनुमान है। सीसीआई लगातार घरेलू बाजार में कॉटन की बिकवाली कर रही है तथा चालू सीजन में सीसीआई ने 89 लाख गांठ के करीब कॉटन की खरीद की है। ऐसे में कॉटन की कीमतों में अभी बड़ी तेजी के आसार कम है।

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